Monica Gupta

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February 21, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

परीक्षा के दिनों में बच्चें – एक प्रेरक कहानी

 Art of Public Speaking in Hindi

परीक्षा के दिनों में बच्चें – एक प्रेरक कहानी – pariksha ke kathin din , Exams  यानि परीक्षा आने वाली है और अब खूब पढना भी पडेगा … जो बच्चे सारा साल नियमित रहते हैं उनके लिए कोई चिंता नही पर जो बच्चे सारा साल पढाई नही करते वो सुबह सवेरे उठने में, पढने आना कानी भी करते हैं

परीक्षा के दिनों में बच्चें – एक प्रेरक कहानी

 Exams days में बच्चे अकसर अपनी मम्मी को कह कर सोते हैं कि सुबह उठा देना और वो सुबह उठाते रहते हैं और हम बस दो मिनट पांच मिनट ही करते रहते हैं पर उठते नही सोते ही रह जाते हैं … और वही जब वटसअप या फेसबुक कर रहे होते हैं तो कहते हैं बस दो मिनट मे बंद ही कर रहा हूं पर दो मिनट है कि पूरे ही नही होते … इन दोनो के पीछे एक बात कॉमन है कि हम खुद नही चाहते … खुद जब तक हमारा मन किसी काम को करने के लिए मजबूत नही होगा … खुद से फैसला नही लेगें टालते जाएगें .. टालते जाएगें खुद नही करेंगें तो काम भी नही होगा …जिस दिन खुद फैसला ले लिया उस दिन आप न सिर्फ कर पाएगें बल्कि सफल भी होंगें… इसी बारे में एक कहानी है

 

इसी बारे में एक प्रेरक कहानी है …

एक बार एक किसान के गेंहू के खेत में एक चिड़िया ने घोंसला बना रखा था। उस घोंसले में उसने अंडे दिये। कुछ समय बाद अंडो में से बच्चे निकले। चिड़िया दाना चुगने के लिए दूर जंगल में जाती थी और अपने बच्चों के लिये दाना लेकर लौटती थी। इस दौरान उसके बच्चे घोंसले में अकेले रहते थे। जब चिड़िया दाना लेकर लौटकर आती तो बच्चे बहुत खुश होते और  दानों को खाते।
एक दिन चिड़िया जब दाना लेकर लौटी तो उसने देखा कि उसके बच्चे बहुत डरे हुए हैं। उसने बच्चों से पूछा क्या बात है बच्चो ? तुम सब इतने डरे हुए क्यों हो?
बच्चों ने बताया कि “आज किसान आया था और वह कह रहा था कि फसल अब पक चुकी है, मैं कल अपने मजदूरों से फसल काटने के लिये कहूँगा। अगर उसने फसल काटी तो हमारा घोसला टूट जायेगा, फिर हम कहाँ रहेंगे?”
चिड़िया बोली “ फ़िक्र मत करो बच्चों, अभी खेत की फसल नही कटेगी।”
सच में अगले दिन कोई फसल काटने नहीं आया और चिड़िया के बच्चे बेफिक्र हो गए। लेकिन कुछ दिनों बाद चिड़िया को बच्चे फिर से डरे हुए मिले। चिड़िया के पूछने पर बच्चों ने बताया “किसान आज भी आया था और कह रहा था कि बेटे नहीं आये तो क्या हुआ? कल फसल काटने के लिए बेटों को भेजूंगा।”
इस बार भी चिड़िया ने बच्चों से कहा “डरने की जरुरत नहीं हैं, फसल कल भी नहीं कटेगी।”
ऐसे ही कुछ दिन और बीत गए। कोई फसल काटने के लिए नहीं आया।
कुछ दिन बाद एक दिन बच्चे फिर से डरे हुए थे। और उन्होंने चिड़िया को बताया कि “आज किसान फिर से आया था और कह रहा था कि दूसरों के भरोसे रहकर मैंने फसल काटने में बहुत देर कर दी है। मैं कल खुद ही फसल को काटने आऊँगा।
यह सुनकर चिड़िया बच्चों से बोली “अब हमें यह जगह छोड़कर कोई सुरक्षित जगह चले जाना चाहिए। क्योंकि कल खेत की फसल जरुर कटेगी।”
वह तुरंत बच्चों को लेकर एक दूसरे घोसले में आ गई। जिसे उसने कई दिनों से कड़ी मेहनत कर के बनाया था।
अगले दिन चिड़िया और उसके बच्चो ने देखा कि किसान ने फसल काटनी शुरू कर दी है।
बच्चों ने बड़ी हैरानी से चिड़िया से पूछा “माँ, तुमने कैसे जाना कि कल खेत की फसल कट ही जाएगी?”
चिड़िया ने बच्चो को बताया कि “जब तक इंसान किसी कार्य के लिए दूसरों पर निर्भर रहता है, वह कार्य पूरा नहीं होता है। लेकिन जब इंसान उस कार्य को खुद करने की ठान लेता है तो वो कार्य जरुर पूरा होता है। किसान जब तक दूसरों पर निर्भर था तब तक उसकी फसल नहीं कटी। लेकिन जब उसने खुद फसल काटने का फैसला किया तो उसकी फसल कट गयी।
– जब तक हम किसी भी काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं तो उस काम के होने की सम्भावना बहुत कम होती हैं और अगर वो काम हो भी गया तो उस तरह से नहीं हो पाता जैसे हम चाहते थे। लेकिन अगर वही काम हम खुद करें तो वो काम समय पर हो भी जायेगा और जैसा हम चाहते हैं वैसा ही होता है।  मन को पक्का कीजिए … और जुट जाईए

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December 9, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Dear Parents Your Kind Attention Please

 Art of Public Speaking in Hindi

Dear Parents Your Kind Attention Please- परीक्षा की तैयारी के दौरान माता पिता यानि पेरेंटस यानि अविभावक ध्यान दें कि बच्चों के लिए परीक्षा के कठिन दिन से बच्चों को आप ही उबार सकते हैं.

Dear Parents Your Kind Attention Please

थोडी देर पहले मैं अपनी जानकार के घर से खराब मूड वापिस आई वजह है कि उसके दोनो बच्चों के एक 4 और दूसरा 7 क्लास में है… पेपर यानि एग्जाम शुरु हो गए हैं और घर पर जेल जैसा माहौल है… टीवी बंद … नेट बंद बच्चों को कमरे में बंद न कही आना जाना बस पढाई पढाई और पढाई मम्मी पापा चाह्ते हैं कि बच्चे फर्स्ट आएं … बहुत अच्छी बात है उम्मीदे रखते ही हैं पर जब बच्चों से बेस्ट ऑफ लक कहने के लिएगई तो दोनो बहुत तनाव में नजर आए … बेटी ने बोला कि कुछ याद ही नही हो रहा ऐसा लग रहा है कि दिमाग एकदम ब्लैंक है … मम्मी ने और ज्यादा सख्ती कर दी …

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   DC कोटा ,  श्री रवि कुमार सुरपुर का पत्र पेरेंटस के नाम 

पांच पेज का लैटर DC कोटा राजस्थान के हैं श्री रवि कुमार सुरपुर उन्होने लिखा कोटा जंहा ज्यादातर बच्चे कोचिंग के लिए जाते हैं और प्रेशर की वजह से कुछ बच्चों ने sucide कर लिया था…उन्होने क्या सलाह दी ..

उन्होने लिखा था कि वो चाइल्ड मैनेजमेंट का एक्सपर्ट नहीं हैं, लेकिन अपने अनुभव के आधार पर यह सब लिख रहें हैं ‘बच्चों को बेहतर प्रदर्शन के लिए डराने धमकाने या फिर अपेक्षाओं का बोझ लादने की जगह आपके सांत्वना के बोल जरूरी हैं। नतीजों को भूलकर बेहतर करने के लिए प्रेरित करना, मासूम कीमती जानें बचा सकता है।’ माता पिता को बच्चों की तरह अपरिपक्वता नही  दिखानी चाहिए ‘महज परीक्षा पास कर लेना ही सबकुछ नहीं होता। अपनी अपेक्षाओं और सपनों को जबरन अपने बच्चों पर नहीं थोपें, बल्कि बच्चे जो करना चाहते हैं, जिसे करने के काबिल हैं उन्हें वही करने दें। उनकी क्षमता के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें।’  इंजीनियरिंग और मेडिकल को अपना करियर बनाने के अलावा अन्य विकल्पों की ओर भी ध्यान देना चाहिए और सबसे आखिर में प्र्रेंटस को मैसेज दिया कि, ‘दुनिया के सबसे बेहतर पैरंट्स आप बनें।’

समय का महत्व – एक छोटी सी कहानी

ये आप नेट पर भी सर्च कर सकते हैं वाकई एग्जाम हौव्वा नही है इसलिए गुस्सा, मार पिटाई ठीक नही … पेरेंटस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है.

मैं बस एक ही बात कहना चाहूंगी …

इस दुनिया में कुछ अच्छा रहने दो बच्चों को बस बच्चा रहने दो …

जरुर सोचिऎ और अपने बच्चों को ढेर सारा ढेर सारा प्यार दीजिए …

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