How to Make Your Family Happy – परिवार को खुश कैसे रखें
जैसे अलग अलग वार दिनों को जोड कर रखते है सोम वार, मंगल वार बुद्द वार ऐसे ही होता है और फिर बनता है एक महीना… ठीक वैसे ही एक और वार होता है और वो होता है परिवार… परिवार जो अलग अलग सदस्य को जोड कर रखता है.. कोई बच्चा हो बड़ा हो युवा हो बुजुर्ग हो.. हर सदस्य का अहम रोल होता है… हर किसी का contribution होता है कोई भी हो वो एक परिवार बन जाता है…
परिवार हर किसी मनुष्य के जीवन में परिवार बहुत महत्व रखता है। परिवार के बिना जैसे ये जीवन अधूरा सा होता है।
अब प्रश्न ये उठता है कि परिवार को खुश कैसे रखें… एक अच्छी बात ये भी हुई कि कुछ कमेंट इस बारे में भी आए कि आप बताईए कि कैसे खुश रखें.. तो आज इसी बारे में बता रही हूं कि परिवार को खुश कैसे रखें…
1.सबसे पहले तो जो कप्लस हैं उन्हें अपने रिश्ते को अहमियत देनी चाहिए… अक्सर पति पत्नी अपने रिश्ते को अहमियत देने की बजाय बच्चों को देते हैं जबकि अगर अपने रिश्ते को अहमियत देंगे एक दूसरे का ख्याल रखेंगें केयर करेंगें तो परिवार के दूसरे सदस्य भी उनसे सीख लेंगे
2.एक साथ समय बिताना चाहिए वो अपने उपर है क्या और कितना समय देना है पर देना है… बात करनी है उनका जिस चीज में इटर्स्ट है खुद भी उसमे इंटरस्ट लेना है..
फिर जैसे पेरेंटस हैं वो अपने पेरेंटस के बारे में बाते बताए, कुछ उदाहरण दे या फमली फोटो दिखाए या अगर ग्रेड पेरेंटस साथ रहते हैं तो मिल कर बात करें वो अपने अनुभव शेयर करें इससे परिवार की बॉंडिंग ही बडती है..
3.जब किसी को जरुरत हो हमेशा साथ खडे हों… कंसर्न हों.. बेशक काम अलग अलग हो, नौकरी अलग हो पर हमेशा किसी बात की जरुरत है या कोई प्रोब्लम है तो साथ खडे हों…
अपना प्यार जताए ये नहीं कि बस दिल ही दिल में रखा उसे समय समय पर जताते भी रहें कि मैं आपकी केयर करता हूं आपका ख्याल है मुझे.. जैसे मान लीजिए बच्चे हैं बच्चे डरे नहीं खुल कर बात करें हां पर अपने परिवार की कुछ बाऊंड्ड्री भी बना लेनी चाहिए… पर इतना जरुर हो कि आपस में कोई चोरी ना हो.. खुल कर बात करे शेयर करें.. समय समय पर सर्प्राईज भी दें…
4.जब बातचीत करें तो पॉजिटिव रहें ये नहीं कि बुराई करें, किसी का मजाक उडाए…
अच्छा कई बार बातचीत नहीं हो पाती तो भी वटस अप पर हैलो हाय क्या हाल है… लिख दिया हाल चाल पूछ लिया.. इसी बहाने जुडे रहते हैं…
5.फिर हर घर के कुछ रीति रिवाज होते है जो रिश्ते को और मजबूत करते हैं क्योंकि वो मिल कर किए जाते हैं तो इससे प्यार बढता हैया जन्मदिन है, शादी की सालगिरह है…
6.अच्छा फिर परिवार के साथ साथ अपनी रिश्तेदारी में भी सम्बंध मजबूत होने चाहिए… चाचा हैं, ताऊ जी हैं, मामा हैं मौसी हैं जैसे cousin niece nephew, सभी… जैसे मान लीजिए आठ दस भाई बहनों का एक बड़ा परिवार है सब अलग अलग रहते हैं पर जब कोई त्योहार हो सब मिलकर मनाते हैं…
7जैसे हमारी कोर वेल्यूज होती हैं हमारे कुछ प्रिंसीपल कुछ रुल्स होते हैं वैसे ही परिवार के भी होने चाहिए… और सभी उसको फॉलो भी करें.. जैसे अरे फलां परिवार तो बहुत ईमानदार है.. उनकी ईमानदारी की तो पूरा समाज उदाहरण देता है या पढा लिखा सभ्य परिवार है… धार्मिक लोग हैं..
तो कुल मिला कर घर के हर सदस्य से मिलकर परिवार बनता है तो हर सदस्य को बराबर से ट्रीट करना है ये नहीं कि लड़का है लडकी है बड़ा है छोटा है सब एक हैं और सभी का ओपीनियन मैटर करता है…
परिवार एक पेड़ जैसा होता है जिसकी छाया में हम बैठ कर बतिया भी सकते हैं और चैन की सांस ले सकते हैं
एक बार एक आदमी अगूंर खरीदने गया.. दो तरह के थे गुच्छे में और अलग-अलग टूटे हुए अंगूरों के दाने पडे थे खुले.. तो आदमी ने रेट पूछे तो दुकानदार बोला कि जो गुछे में हैं वो 100 रुप्ये और खुले 50 रुप्ये तो आदमी ने पूछा कि क्या फर्क है एक जैसे ही तो हैं तो आदमी बोला “साहब, हैं तो ये भी बहुत बढीया..!! लेकिन …..अपने गुच्छे से टूट गए हैं ।” मैं समझ गया कि अपने संगठन, समाज और परिवार से अलग होने पर हमारी कीमत………. यानि हमारी ताकत आधी रह जाती है सीधा सीधा एकता में बल है बात लागू हो जाती है…
रोटी कमाना बडी बात नहीं पर रोटी परिवार के साथ मिल कर खाना बडी बात है..
पत्थर तब तक सलामत है जब तक पहाड़ से जुडा है पत्ता सभी तक सलामत है जब तक पेड़ से जुडा है और इंसान तब तक सलामत है जब तक परिवार से जुडा है.. बेशक अलग होकर आजादी तो मिल जाती है पर ताकत चली जाती है जिसकी हमें बहुत ज्यादा जरुरत रहती है..



