कैसे कैसे समाज सेवी
पिछ्ले दिनो कुछ समाज सेवियों से वास्ता पडा. आप सोच रहे होंगे कि ये वास्ता शब्द किसलिए इस्तेमाल किया.तो ज्यादा हैरान या परेशान होने की जरुरत नही. सुनिए! एक महाशय बस या ट्रेन मे सफर करना पसंद करते है और अपनी यात्रा के दौरान लोगो को बिस्कुट चाय इत्यादि भी देते हैं. आप सोच रहे होगे तो क्या हुआ ये तो अच्छी बात है.ओहो, पूरी बात तो सुनिए आप तो बोलते बहुत है. हां, तो अक्सर चाय और बिस्कुट पीने के बाद वो व्यक्ति बेहोश हो जाता है और वो उसका सारा सामन लेकर रफूचक्कर हो जाते है.
एक महाशय तो और भी बढ कर हैं. असल मे वो, जरुरत मंद की किसी ना किसी रुप मे मदद करते है और फिर उनके घर मानो डेरा ही जमा लेते हैं. अहसान के तले बेचारा बोल ही नही पाता और उनका पूरा परिवार उन्हे झेलने पर मजबूर हो जाते हैं.
कैसे कैसे समाज सेवी !!! एक और महानुभाव है. असल मे, उनके लिंक सरकारी बाबू से लेकर अफसर और फिर मंत्री जी तक हैं. अब जिसे भी कोई काम निकलवाना होता है वो सीधा उनके पास जाता है और सैंटिग के अनुसार काम हाथो हाथ हो जाता है. अब भई वैसे तो यह बहुत अच्छी बात है पर इस बीच “जरा सा” कमीशन भी तो बनता है बस “जरा सा” लेते है क्योकि समाज सेवी जो है. जनता जनार्दन का दर्द वो नही देख सकते.
एक बुजुर्ग महाशय है. उन जैसी लग्न तो मैने कही नही देखी. असल मे. 60 साल के हो गए है. पर खुद को स्वीट 30 ही समझते हैं और बालो मे तेल लगा कर, कपडो पर इत्र का छिडकाव करके और कपडे अच्छी पर इस्त्री करके अपना स्कूटर लेकर लडकियो के कालिज की तरफ दो घंटे के लिए निकल जाते है और किसी लडकी को बस स्टेण्ड तक लिफ्ट देनी हो या कही जाना हो तो उनका स्कूटर तैयार रहता है. इस सिलसिले मे पुलिस भी उन्हे धमका चुकी है पर समाज की सेवा का प्रेम इस कदर सवार है कि बस पिट पिटा कर भी वही पहुंच जाते हैं.
आप सोच रहे होगे की महिला का जिक्र नही आया क्या महिला समाज सेवी नही?? जी नही. वो भी बिल्कुल है. असल मे, एक महिलाओ का समूह है. वो शादी करवाता है. यानि शादी के लिए लडकियां उपलब्ध करवाता है.आप सोच रहे होंगे कि तो क्या हुआ. आजकल लडकियां मिलती कहा है पर साहब आगे तो सुनिए शादी होने के सात दिन रुपया गहना लेकर उडन छू और और पूरा समूह भी किसी और “बेचारे” की तलाश मे.
अब आप इसे क्या मानेगे ना !!! ये आपके ऊपर है !!! क्या !!! आप भी कह उठे …कैसे कैसे समाज सेवी !!!




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