Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 10, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

बेटी पढ़ाओ की बजाय मां को पढ़ाओ

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

बेटी पढ़ाओ की बजाय मां को पढ़ाओ

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के बजाय अब होना चाहिए कि बेटी की बजाय मां को पढ़ाओ वो इसलिए क्योंकि जिस तरह से कन्या भ्रूण हत्या और बच्चियों की हत्या करने के केस सामने आ रहे हैं ऐसे में माओं का शिक्षित होना ज्यादा जरुरी है…

पूत कपूत सुने है लेकिन माता नहीं कुमाता

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ या फिर  बेटी को मां से बचाओ … सुनने में जरुर अटपटा लगेगा पर आज के समय में जिस तरह की घटनाए सामने आ रही हैं मन यही कहने पर मजबूर है …गूगल सर्च पर अगर आप नजर डालेगें तो बहुत कुमाता वाली बहुत खबरे पढने को मिल जाएगी किसी ने अस्ताल की छ्त से नवजात को नीचे फेक दिया तो किसी ने नाले में भ्रूण फेक़ दिया तो किसी ने कूडेदान की भेंट कर दिया नवजात को और एक केस जो हाल ही मैं सुर्खियों में आया कि अपनी नन्ही बच्ची को चाकू से मार कर ड्रामा किया कि बच्ची गायब हो गई जबकि उसका कत्ल करके  बंद पडे एयर कंडीशनर में डाल दिया था.

वाह !! पढी लिखी और करोडपति मां के क्या कहने … शर्मनाक !!

माता कुमाता नही पर ये कहावत अब इस युग में झूठी साबित हो रही है. हर युग में लोगों की सोच बदल जाया करती है. चाणक्य ने कहा है कि समय आने पर स्त्री अपने स्वार्थ के लिए अपनी कोख से जन्म लेनी वाली संतान को भी मार डालती है  तो चाणक्य की ये बात आज 100% सच दिखाई दे रही है….

कल खबर में  जयपुर की एक मां की अपनी नन्ही बच्ची को मार कर एसी में छिपा कर रखने की खबर बार बार देखी तो सारी रात सपने में भी यही चलता रहा… मासूम सा चेहरा धूमता रहा और मैं इसी बच्ची के बारे में सोचती रही कि आखिर वो बच्ची क्या सोच रही होगी कि उसका क्या कुसूर था जो उसे इतनी बेरहमी से मार दिया गया… बेशक, हत्या का ये पहला मामला नही है ऐसी धटनाए चाहे भ्रूण हत्या हो या मासूम के कत्ल की होती रहती होगी पर हर नई घटना बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देती है…

एक मां थी वो मां …मां क्या होती है …

एक छोटे बच्चे को मां गुस्से में चांटा भी मार देती हैं तो सौ बार प्यार भी करती है और हजार बार सॉरी भी बोलती हैं और उन नन्हें हाथो को अपने हाथ में लेकर यह भी बोलती हैं लो आप भी मालो अपनी ममा को .. मम्मा गंदी… बहुत गंदी अपने बच्चे को माला …  पर बच्चा भी अपना हाथ खींच लेता है और मासूमियत से टुकुर टुकुर अपनी मां को देखता है उसकी आखों में झिलमिलाते  आसूंओ को देखता है

पर ये कैसे बेरहम मां निकली .. समझ के बाहर है…

मन में एक ही बात आ रही है कि पेड के पत्तों को पानी देने से कुछ नही होगा पेड उससे फलेगा फूलेगा नही बल्कि जड को सींचना होगा और जड है पेरेंटिंग यानि माता पिता को जागरुक होना होगा कि बच्चा हो या बच्ची… बच्चा स्वस्थ होना चाहिए बस …!!

बेटी पढाओ से पहले मांओ को पढाना होगा …  अविभावकों को जागरुक करना होगा.. उन्हें सीखाना होगा.

हमारे देश में पहले संयुक्त परिवार का चलन था और बच्चे ऐसे ही पल जाते थे पर आज के दौर में मां और पिता दोनों नौकरी करतें हैं और बच्चे के लिए नौकरानी या अन्य साधन अपना लेते हैं और कई बार बच्चा उन्हें बोझ सा लगने लगता है क्योकि आजादी में खलल डालता है … जबकि ये मानसिकता बहुत गलत है… !!

बेशक, एक केस को देख कर सभी अविभावको पर भी आरोप नही लगाया जा सकता पर जब समाज में एक भी ऐसा उदाहरण उठ खडा होता है तो सारा समाज शर्मसार हो जाता है…

…

Audio- Peom-Girl Foeticide-female foeticide- india- Monica Gupta – Monica Gupta

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जो भी हो इस धटना ने शर्मसार करके रख दिया कुछ समय पहले मैने एक अजन्मी बच्ची पर कविता लिखी थी उसे भी झूठा साबित कर दिया … फिलहाल मन वाकई में बहुत व्यथित है गुस्सा है और रो रहा है ….

वैसे आपके क्या विचार हैं इस बारे में जरुर बताईएगा …

September 10, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

एक स्टार्टअप जिंदगी के नाम

करवा चौथ की कहानीhttps://monicagupta.info/wp-content/uploads/2016/09/audio-my-life-by-monica-gupta.wav

स्टार्टअप जिंदगी के नाम

एक स्टार्टअप जिंदगी के नाम

क्लिक कीजिए और सुनिए दो मिनट और 12 सैकिंड का audio . एक स्टार्टअप जिंदगी के नाम.  बजाय अपनी की गई गलतियों को लेकर पछताने के दुखी होने के  खुद को नया स्टार्टअप दीजिए …

जिंदगी बहुत खूबसूरत है

एक स्टार्टअप जिंदगी के नाम … जिंदगी में कई बार कुछ पल ऐसे आते हैं जब हमें खुद पर पछतावा होता है खुद पर गुस्सा आता है कि ये मैने क्यू किया या ये मैं अगर ये नही करता तो वो नही होता … जैसाकि नकल करते टीचर ने देख लिया और फंस गए या अपने किसी जानकार को अपना समझते हुए अपने सारे सीक्रेट बता दिए या फेसबुक टविटर पर बिना सोचे समझे कुछ ऐसा लिखा दिया जिससे अब पछतावा हो रहा है कि काश मैं ये नही करता ..  मेरे विचार से बजाय निराश, हताश दुखी और मायूस होने के अपनी की हुई गलती से सबक लेना चाहिए और प्रयास करना चाहिए कि ऐसी बात दुबारा न हो …

देखिए दुनिया ऐसी ही है वो बहुत जल्दी बात भूल जाती है पर अगर हम ही बात दिल से लगा कर बैठ जाएगें तो दुनिया कैसे भूलेगी उसे तो मजा ही आएगा आपको कुरेदने में …  इसके लिए हमे अपने आप खुद से वादे करने होंगें  …

खुद को नया स्टार्ट देना होगा वो कहते हैं ना कि  just forget about the past and “move on. आगे बढो …इसके लिए  temptations को कंट्रोल करना होगा … उन बातों से ध्यान हटाना होगा जो हमारा ध्यान आकर्षित करती हैंattention divert करती हैं  … दोस्त ऐसे सेलेक्ट करने होंगें  जो हमे मोटिवेट करें हौंसला दें … ना कि हमारा मजाक बनाए  … इसके लिए जरुरी ये भी है कि जो भी हमारी बुरी आदतें हैं जो भी बुरी आदतें हैं उसे छोडे… अपना एक टाईम टेबल बनाए और टाईम मैनेजमैंट पर पूरा ध्यान दें … अपने जीवन के सिद्दांत बनाए … और उसी पर चलने का प्रयास करें

और इस सब में जरुरी है कि पॉजीटिव रहें क्योकि सकारात्मता ही हमें आगे ले जा सकती है … अपनी अंतरामा की आवाज सुने … और प्र्यास यही रखे कि आप जो भी काम करें उसके प्रति ईमानदार रहें …

बीति ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले .. जो होता है अच्छे के लिए होता है कहते भी हैं न कि मन चाहा हो तो अच्छा और ना हो तो और भी अच्छा क्योकि अब हो होता है जो भगवान को अच्छा लगता है …

कल फिर मिलूगी एक ने स्टार्ट अप के साथ ..

जी बिल्कुल, स्टार्टअप के साथ तब तक खुश रहिए मुस्कुराते रहिए…

September 9, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

खबर जो सन्न कर दे

सनसनीखेज खबर

murder photo

खबर जो सन्न कर दे

सनसनीखेज खबर अकसर हमेंं सन्न कर जाती हैं. जिंदगी में कुछ धटनाए देखने सुनने को मिलती हैं  कि ना सिर्फ हमे सोचने पर मजबूर करती हैं बल्कि हमें सबक दे जाती है.

कुछ समय पहले एक प्रसंग पढा था कि एक बहुत छोटी सी बच्ची ने अपनी मम्मी से पूछा, “क्या वो कभी अपना रुपयों से भरा पर्स maid के पास छोड सकती हैं”. मम्मी ने लिपस्टिक लगाते हुए बोला पर्स और maid के पास !!! बिल्कुल नही! मतलब ही नही! सवाल ही नही! फिर बच्ची ने बहुत मासूमियत से पूछा, ” फिर “मुझे” maid के पास कैसे छोड सकती हो!!

उस समय मां के पास क्या जवाब रहा होगा पता नही पर हम बार बार भी समझाने से सबक नही लेते तो हमारी गलती नही मूर्खता ही मानी जाएगी …

खबरदार  खबर

बीते दिन कुछ ऐसी सनसनीखेज खबर पढी कि समझ नही आया कि इस पर क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए.

कल हैदराबाद की एक खबर थी कि माता पिता अपनी छोटी सी बच्ची को कार में सोता हुआ छोड कर नाश्ता करने चले गए… जब तक वो वापिस आए लोग धबराई बच्ची को बाहर निकालने का प्रयास कर रहे थे. सोच ही रही थी कि कैसे माता पिता हैं कि बच्ची को कार मे छोड कर चले गए कुछ लिखने को ही थी तभी खबर पढी जो इससे भी दस कदम आगे थी… और भी ज्यादा चौकानें वाली थी.

baby-killed

खबर है कि जयपुर की एक मां ने अपनी 4 माह की बेटी की हत्या कर दी और लाश को एसी में छिपा दिया. AC में… असल में, उस महिला की दो बच्चियां थीं एक 8 साल की और दूसरी चार माह की बेटी थी.
कारण बेटे की चाहत… परिवार के लोगों ने हवन कराया…. मन्नतें मांगी…. लेकिन दूसरी भी बेटी ही हो गई और मां ने ही 4 महीने की बेटी की धारदार हथियार से हत्या कर दी। उसे 16 बार चाकू से ….. !!

आखिर क्या कुसूर था इस मासूम का …

तस्वीर तो महिला की भी है पर मैं उसकी तस्वीर दिखाना ही नही चाहती … शर्मनाक !!  !! बेहद शर्मनाक !!!

वैसे आपका क्या विचार है … क्या होना चाहिए माता पिता का कर्त्वय !!! जरुर बताईएगा !!

September 9, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

नेकी की दीवार

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नेकी की दीवार

नेकी की राह पर हमेशा चलना सुखकर ही होता है.  राजस्थान के भीलवाडा में एक ऐसा जीता जागता प्रेरक प्रसंग  देखने को मिला जिससे  न सिर्फ खुशी हुई बल्कि मन में, स्वैच्छिक भाव से  कुछ करने को भी  बढावा मिला.   वाकई , किसी को बिना जताए मदद के लिए आगे आना एक ऐसा  खूबसूरत अहसास है जिसे शब्दों में नही बताया जा सकता . एक ऐसी ही प्रेरक खबर राजस्थान के भीलवाडा से पढने को मिली.

भीलवाडा से एक  प्रेरक खबर

नेकी की राह पर चलने का एक जीता जागता उदाहरण … भीलवाडा राजस्थान से एक बहुत ही प्रेरणादायी खबर पढने को मिली. शहर में एक ऐसी दीवार देखने को मिली जहां से कई बेसहारों को मदद मिलेगी। इस दीवार को रंग-रोगन कर कुछ इस तरह आकर्षक बनाया गया है कि आपके पास यदि कुछ देने को हैं तो हैंगर में टांग दीजिए या फिर जरूरत है तो वहां से ले जाइए। माना जा रहा है कि ईरान की तर्ज पर हुई ऐसी ही पहल के चलते शहर के आरसी व्यास कॉलोनी में एक दीवार को ‘नेकी की दीवार’ बनाया गया है.

दीवार पर खूबसूरत चित्रकारी है  चित्रकार केजी कदम्ब की.

जब चित्रकार केजी कदम्ब से बात हुई तो वो इस नए प्रयोग से बेहद उत्साहित नजर आए और उन्होने बताया पहले पहल तो लग रहा था कि पता नही इस तरह का अभियान हमारे देश में कितना सफल होगा.. पर खुशी यह देख कर हुई कि इसकी बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और अन्य राज्यो जैसे गुजरात के सूरत  और यूपी से भी लोग ऐसा ही करवाना चाह रहे हैं …

उन्होनें बताया कि  इसमें चित्रित पेड ये दर्शाता है कि पेड हमेशा देता ही देता है और खुशहाल परिवार दिखाने का भाव भी यही है कि परिवार लेकर भी खुश है और देकर भी खुश है.. !!

ईरान में पिछले कुछ समय से लोगों ने ऐसी दीवारें तैयार की हैं। इस दीवार पर जरूरतमंदों के लिए लोग कपड़े टांग कर चले जाते हैं। इसी तरह जरूरत वाले लोग यहां से कपड़े ले जाते हैं। इन दीवारों को ‘वॉल ऑफ काइंडनेस’ कहा जाता है। अब लोग सिर्फ कपड़े ही नहीं, किताबें और खाने-पीने का सामान भी रख रहे हैं.

बीमा कंपनी के अधिकारी प्रकाश नवहाल इंटरनेशनल बुलेटिन में ईरान की इस दीवार वाली खबर देखर काफी प्रभावित हुए। यहां भी इस तरह की जरुरत महसूस होने से नगर विकास न्यास को सुझाव दिया।

बहुत समय पहले इसी बात से मिलता जुलता प्रसंग पढा था कि इटली के वेनिस शहर के कॉफी शॉप में एक व्यक्ति वेटर को आवाज देता है। वेटर के आने पर वह ऑर्डर प्लेस करता है- ‘दो कप कॉफी कि एक मेरे लिए और एक उस दीवार के लिए. वेटर एक कप कॉफी ले आता है. लेकिन उसे दो कप का भुगतान किया जाता है। उस ग्राहक के बाहर निकलते ही वेटर दीवार पर नोटिस बोर्ड टाइप का एक कागज चिपकाता है, जिस पर लिखा होता है- ‘एक कप कॉफी’।

पांच मिनट बाद दो और व्यक्ति कॉफी शॉप में आते हैं और तीन कप कॉफी का ऑर्डर देते हैं। दो कप कॉफी उनके लिए और एक कप दीवार के लिए। उनके समक्ष दो कप कॉफी पेश की जाती है, लेकिन वे तीन कप कॉफी का भुगतान कर वहां से चले जाते हैं। इस बार भी वेटर वही करता है। वह दीवार पर ‘एक कप कॉफी’ का एक और कागज चस्पां करता है।

इटली के खूबसूरत शहर वेनिस में इस तरह का नजारा अक्सर देखा जा सकता है उस दीवार की भूमिका पर  जरा ध्यान दीजिए किसी की मदद करने के लिए यह भी एक माध्यम है…  यह  शहर के वासियों की उदारता और सेवाभाव को प्रतिबिंबित करती है।

आज यही उदाहरण भीलवाडा में भी देखने को मिला… आमतौर पर जहां मांगने वालो को हिचकिचाहट  होती है वही देने वाला भी थोडा अजीब महसूस करता है पर इस दीवार की कोई दीवार नही यहां कोई भी कभी भी आकर ले भी सकता है और दे भी सकता है… !!

वैसे आपके क्या विचार हैं … जरुर बताईएगा !!!

 

 

September 9, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

अच्छे दिन कब आयेंगे

अच्छे दिन कब आयेंगे

screenshot-kapil

अच्छे दिन कब आयेंगे

अच्छे दिन कब आयेंगे.‘ये हैं आपके अच्छे दिन? कपिल शर्मा ने मोदी जी को टैग करते हुए टवीट किया कि वो 15 करोड़ टैक्स भरते हैं लेकिन उनसे बीएमसी वाले 5 लाख की घूस मांग रहे हैं क्योंकि उन्हें ऑफिस बनवाना है…

अच्छे दिन कब आयेंगे

अच्छे दिन आने वाले हैं

अच्छे दिन कब आयेंगे… अच्छे दिनों की इंतजार लम्बी होती चली जा रहे है और इसकी इंतजार हर आम आदमी कर रहा है पर आज टविटर  पर अलग ही नजारा देखने को मिला.. अच्छे दिन की इंतजार आम आदमी को नही खास आदमी को भी है.

सबको हंसाने वाले कॉमेडियन कपिल शर्मा ने घूस मांगने की शिकायत पीएम मोदी से की है.  कपिल शर्मा ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर पीएम मोदी को टैग करके टवीट किया है कि वो 15 करोड़ टैक्स भरते हैं लेकिन उनसे बीएमसी वाले 5 लाख की घूस मांग रहे हैं क्योंकि उन्हें ऑफिस बनवाना है. इसके बाद पीएम मोदी को टैग करते हुए उन्होंने लिखा, ‘ये हैं आपके अच्छे दिन?

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ट्वीट कपिल शर्मा ने आज सुबह पांच बजकर 53 मिनट पर किया और दूसरा ट्वीट 6 बजकर 13 मिनट पर।

वैसे आपके क्या विचार हैं क्या अच्छे दिन आ गए हैं या आने वाले हैं या बस इंतजार ही करते रहिए …

September 9, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छता पर सुविचार

स्वच्छता पर सुविचार

 स्वच्छता पर सुविचार

(तस्वीर गूगल से साभार)

स्वच्छता पर सुविचार

भारत को स्वच्छ कैसे बनाए. स्वच्छता के बारे मे सर्वे भले ही कुछ हो पर इस बात में कोई दो राय नही कि स्वच्छता से खुशहाली आती है. स्वच्छता और स्वास्थ्य का एक दूसरे से सीधा सम्बंध है. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री  ने एनएसएसओ यानि नेशनल सैम्पल सर्वे ऑफिस ने एक रिपोर्ट जारी की. यह सर्वे  पिछले साल मई-जून में यह सर्वे किया थाजिसमें देश के 26 राज्यों के 3,788 गांव इसमें शामिल थे।

सर्वे के मुताबिक देश के सबसे स्वच्छ राज्य में सिक्किम नंबर पर है। साफ-सफाई में इस राज्य को सबसे ज्यादा 98.2 का स्कोर मिला। वहीं केरल 96.4 स्कोर के साथ दूसरी पोजिशन पर है। नेशनल सैम्पल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।

इस लिस्ट में मिजोरम का नंबर तीसरा है। इस राज्य ने 95.8 स्कोर बनाया है। वहीं, सबसे गंदे राज्यों में झारखंड नंबर वन है। एमपी 4th स्थान पर है।

स्वच्छता और सर्वे की रिपोर्ट भले ही कुछ भी कहे पर असल जिंदगी में स्वच्छता बदलाव  तो ला ही रहा है …

स्वच्छता पर सुविचार

स्वच्छता के बारे में लोगो के विचार

“ हमें हमारा गाँव स्वच्छ रखना चाहिए, यही हमारा कर्त्तव्य है।”

“ स्वच्छता हमारे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण विषय है। स्वच्छता के बिना स्वच्छ समाज की कल्पना भी नही की जा सकती।”

इस अभियान ने हमारा जीवन ही बदल दिया।

“बेटी वही ब्याहेंगे,

शौचालय जहाँ बनवाऐंगे”

“ हमने समाज की सेवा करने के लिए दिल और दिमाग से गाँव को खुले में शौच से मुक्त्त करवाया है ताकि आने वाले पीढ़ी को सदियों से चली आ रही इस परम्परा की बीमारी न लगे। मेरा समाज साफ-सुथरा, स्वच्छ एवं उच्च शिक्षित समाज हो।”

 

“ ना जिले में, ना स्टेट में

सफाई सारे देश में”

स्वच्छता जिन्दाबाद

अभियान ने नई चेतना जगाई है। भविष्य में भी साफ-सफाई रखेंगें।

स्वच्छता ने हमें जीने का रास्ता दिखाया है।

मैनें ना सिर्फ अपने गाँव में बल्कि दूसरे गाँवों में भी स्वच्छता का महत्व समझते हुए स्वच्छता का संदेश दिया। बोलो, “जय स्वच्छता”

हमारा गाँव खुले में शौच से मुक्त से मुक्त हो गया है। आज सभी गाँव वालें खुशी से नाच-गा रहें हैं। इसमें सभी गाँव वासियों  का सहयोग रहा।

हमने बहुत लोगों को समझाया कि बाहर खेतों में शौच जाना ठीक नही। जब वो नही मानो तो हम उनके शौच पर मिट्टी ड़ालने लगे। आज उन्होनें घर में कुई खुदवा ली है।

सभी गाँव वाले चाहे सरपंच, पंच, स्कूली टीचर, बच्चें, बूढ़े, या फिर  महिलाएँ सभी ने  इस अभियान में योगदान दिया। आज हमारा गाँव सुंदर और पवित्र है।

पहले लोगों को बातों से समझाया। बातों से ना समझने पर हमने लोगों के पैर भी पकड़े। आज हमारा गाँव खुले में शौच से मुक्त्त हैं।

एक महिला ने तो कहा कि मैं तो खुले में शौच जाऊँगी। मैनें उसके आगे झोली फैला दी। इस बात को उसने इतना महसूस किया कि अगले ही उसने घर में कुई खुदवा ली।

नारे सुनकर लोगों में विशेष तरह का उत्साह आता है इसीलिए मैने नारे लगा-लगा कर लोगों को समझाया कि वो बाहर शौच न जाए

जब तक जिन्दगी रहेगी, तब तक हम समर्थन देंगें। हमारे बाद बच्चें भी इस अभियान को समर्थन देंगें।

पहले हम भी शौच के लिए बाहर जाते थे परेशानी भी होती थी। जब हमें इस अभियान का पता चला तो हमने उसी दिन से जाना बंद कर दिया और दूसरों को भी समझाने में जुट गए।

अगर हम सफाई की तरफ ध्यान देंगें तो हमारे बच्चें भी शिक्षा लेंगें। जिससे उनका आनेवाला कल स्वच्छ और उज्जवल होगा।

पहले हमें लगता था कि यह असम्भव है। पर ये तो सम्भव हो गया।

जिसने हमारी बात नहीं मानी और बाहर शौच के लिए गए, हम उन्ही के शौच पर मिट्टी ड़ाल कर आए। शर्म के मारे उनकी शौच ही बदल गई।

दूध में डाले चावल तो खीर बनती है

जो देश की सेवा करें उसकी तकदीर बनती है।

मैं सुबह-शाम निगरानी में जाती और पहरा देती। आज गाँव में पूर्णतया सफाई है क्योंकि लोगों ने हम बच्चों की बात को समझा। मैं चाहती हूँ

अब लौटेगा खोया गौरव, होगी सफाई चारों ओर

लोटा बंद, नाली बंद, कदम बढ़ेगे, प्रगति की ओर

जब मैं जय स्वच्छता के नारे लगाती हूँ तो मुझे बहुत ही  खुशी होती है,

मुझे खुशी है कि गाँव को स्वच्छ बनाने में मैं भी अपना योगदान दे सका और आगे भी ऐसे अभियानों में शामिल होने की इच्छा रखता हूँ।

स्वच्छ शरीर ही सब कामों का आधार हैै।

मेरे विचार से सरकार द्वारा चलाया गया अभियान एकदम सही है।

हमने इन बातों को गम्भीरता से लिया। आज हमारा गाँव निर्मल है।

धीरे-धीरे हमें स्वच्छता का महत्व समझ आ गया है।

 

इस अभियान के तहत गरीब तबके लोगों को जो आगे आने का मौका मिला है। हमने आगे आकर गाँव को स्वच्छता युक्त्त कर दिया है। यह हमारा आगे बढ़ने का सफलतापूर्ण कदम है।

स्वच्छता हैं जहाँ जिन्दगी है वहाँ।

स्वच्छता ही अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है।

जब मैनें लोगों को बाहर शौच जाने से रोका तो वो मुझसे नाराज हुए पर बाद में वो मेरे साथ ही हो गए। और हमने मिल कर गाँव को स्वच्छ बना दिया।

सभी घरों में शौचालय होना चाहिए ताकि बाहर कोई व्यक्ति शौच के लिए ना जाए।

यह सरकार का अच्छा प्रयास है। गाँव में अनेक किस्म की बीमारियों से बचा जा सकता है। गाँव हरा-भरा और साफ-सुथरा है।

गाँव को पूर्ण रूप से खुले में शौच से मुक्त्त करना, लोगों को इसके लिए जागृत करना और गाँव में सफाई रखना ही अब मेरे जीवन का उदेश्य बन गया है।

सभी गाँव वासी- स्वच्छता हैं जहाँ जिन्दगी है वहाँ ।

मैं खुल्ले जान वालया नूँ समझाया के खुल्ले में जाने से बीमारियाँ लगती है।

मैनें सुबह उठकर निगरानी की और बाहर जाने वाली महिलाओं को समझाया। अपनी इज्जत का ज्ञान करवाया और आने वाली सम्सयाओं के बारे में बताया। आज मेरा गाँव साफ-सुथरा है।

हमें खुशी है कि हमारा गाँव साफ-सुथरा है। कोई भी खुले में शौच नही जाता।

गाँव की सफाई का हमारे स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा। हमं साफ- सुथरे माहौल में रहने की आदत पड़ेगी।

हमारा गाँव एक बार तो स्वच्छ हो गया है लेकिन हमें एक वचन लेना चाहिए कि सभी गाँव वासी भी आगे मिलकर गाँव को साफ-सुथरा रखें।

हमारे गाँव में जब से स्वच्छता कीे लहर चली है तब से हमारा गाँव बहुत स्वच्छ है।

मुझे अपने गाँव पर गर्व है।

हमारा गाँव पूरी तरह से खुल्ले में शौच से मुक्त्त है। चारों तरफ पूरी स्वच्छता हैं।

हमारे गाँव में इस अभियान के शुरू होने से गंदगी कम है। हम बीमारियों से सुरक्षित हैं।

मैं सुबह 5 बजे से 7ः30 बजे तक की फिरनी पर खड़ा हो जाता और गाँव की देख-रख करता। स्कूल की छुट्टी होते ही फिर काम शुरू कर देता।

स्वच्छता ही सबसे बड़ी धरोहर है। इसको हमें सम्भाल कर रखना है।

शीतल मन, नम्रता, सच्चाई व आपसी भाईचारे से कोई भी कार्य कठिन नही है।

“ हर दिल से है दोस्ती, ना किसी से बैर

हर वक्त मैं मांगू सारे जगत की खैर”

वैसे तो हमारा गाँव पहले भी साफ-सुथरा था। पर इस अभियान के बाद हम और ज्यादा जागरूक हो गए और स्वच्छता रखने लगे।

पहले गाँव का बहुत बुरा हाल था। पर आज हमारा गाँव बहुत सुंदर लग रहा है।

मैनें सुबह-शाम पहरा लगा कर गाँव को खुल्ले से शौच मुक्त्त करवाया है।

गाँव की महिलाओं ने मिल-जुल कर काम किया। आज हमने गाँव को चाँदी जैसा बना दिया। जय स्वच्छता।

हमने जिसे भी समझाया वो समझते चले गए। आज हमारा गाँव स्वच्छ है।

फाई की शुरूआत अपने ही घर से होती है। बस हमने वो किया

स्वच्छता अभियान से मेरी एक नई पहचान बनी है। मैने अपने भाई-बहनों के साथ मिलकर स्वच्छता की अलख जगाई है।

“मुझे गर्व है अपने गाँव पर” और चाहती हूँ कि और लोग भी अपना गाँव हमारे जैसा बना लें।

हमने सभी को प्रेम से समझाया। आज हम बहुत खुश है। यह स्वच्छता अभियान गाँव की भलाई के लिए ही है।

हाथ जोड़कर विनती की कि बाहर शौच नही जाना। घर में ही जाओ। आज हर गाँव साफ है।

गाँव के सभी लोगों ने इस अभियान में हिस्सा लिया और आज साफ, स्वच्छ और निर्मल है।

इस अभियान से लोग जागरूक हो गए हैं। अपने-अपने घरों की सफाई रखने लगें हैं।

हमारा गाँव पूर्ण रूप से खुले में शौच से मुक्त्त है। गाँव की गलियाँ साफ-सुथरी हैं।

मैंने स्वच्छता अभियान में बहुत काम किया और गाँव को स्वच्छ कर दिखाया।

हम सबने मिलकर गाँव सुन्दर बना लिया जी।

आज हमारे गाँव में कोई बाहर शौच के लिए नही जाता। गाँव निर्मल है।

हमारा गाँव  बहुत ही साफ-सुथरा हैं। यहाँ के हर घर में शौचालय है। शौच के लिए कोई बाहर नही जाता।

मैने सुबह 5 बजे उठकर निगरानी की है और लोगों को समझाया है।

हमारा गाँव सबसे पीछे था। हमने कभी सपने मे भी नही सोचा था कि हमारा गाँव तरक्की कर सकता है। आज हमारा गाँव साफ-सुथरा है।

मेरेे पूरे परिवार ने स्वच्छता अभियान में बहुत योगदान दिया। पहले हम गुरूद्वारे जाते तो रास्ते में गंदगी मिलती थी। लेकिन अब सुधार है।

अच्छे विचार ही देश का विकास करते हैं इसीलिए देश के सभी नागरिक स्वस्थ और स्वच्छ बने

व्यवहार परिवर्तन से समाज और समुदाय में कोई भी परिवर्तन सम्भव है।

वैसे स्वच्छ्ता के बारे में आपकी राय क्या है .. जरुर बताईएगा !!!

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