Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

  • About Me
  • Blog
  • Contact
  • Home
  • Blog
  • Articles
    • Poems
    • Stories
  • Blogging
    • Blogging Tips
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Kids n Teens
  • Contact
You are here: Home / Archives for Monica Gupta

August 13, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वतंत्रता दिवस – मोदी जी और नागरिकों से सुझाव ,विचार और संदेश

2016_8image_14_40_420987552dddddd-ll

(तस्वीर गूगल से साभार)

स्वतंत्रता दिवस – मोदी जी और नागरिकों से सुझाव ,विचार और संदेश

suggestions for Independence Day Speech

पिछ्ले दिनों हमारे प्रधान  मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों ‘मन की बात’ में स्वतंत्रता दिवस की अपनी स्पीच के लिए लोगों से सुझाव मांगे थे। ये वाकई बहुत अच्छी बात है .आज जिस तरह से सोशल मीडिया घर घर पहुंच रहा है ऐसे में, देश के प्रधान मंत्री तक अपनी बात पहुंचाना सरल हो गया है और उस पर अगर प्रधान मंत्री खुद जानना चाहें तो इससे बेहतर और क्या बात हो सकती है.

दिमाग तो मेरा भी बहुत दौड रहा था कि क्या लिख सकती हूं मेरे दिमाग में महिला सुरक्षा और स्वच्छ भारत ज्यादा चहल कदमी कर रहे थे. फिर 100 नम्बर हेल्प लाईन या सरकारी अस्पतालों या सरकारी स्कूलों की की जर्र जर्र हालत.फिर सोचा अपना बनाया कार्टून भेज दूं फिर विचार आया कि कि एक ऑडियो भेज दूं बस विचारों की सुनामी सी आ गई और…और….. और मैं कुछ नही भेज पाई.

आज जब बहुत सारे लोगो के विचार पढे तो मन खुश हो गया… सभी ने अच्छा लिखा है तो सोचा कि क्यो ना उसे ही आप सभी के सथ ब्लॉग के माध्यम से सांझा कर लूं.

जितना मैनें अभी तक  पढा. उनके पास देशभर से 10 हजार से ज्यादा सुझाव आ चुके हैं। लोगों ने गाय, दलित, एलजीबीटी, सफाई, महंगाई, गुलदस्ते और कश्मीर जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. कुछ मुझे बहुत पसंद आए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आप हर रोज दर्जनों लोगों से गुलदस्ते क्यों स्वीकार करते हैं? क्या आप और सारे मंत्री इस स्वागत प्रक्रिया को रोक नहीं सकते हैं। क्योंकि सिर्फ आपको गुलदस्ता देने में सालाना तौर पर 1.5 करोड़ रुपए सालाना का खर्च आ रहा है।

आशीष ने कहा है कि 9 अगस्त को जब प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश में उतरे, 10-15 गुलाब के गुलदस्तों से उनका स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री ने इन गुलदस्तों को एक या दो सेकेंड के लिए हाथों में लिया और फिर सिक्योरिटी स्टॉफ को दे दिया।

आनंद ने लिखा है, ‘इससे पहले कि खुश्बू प्रधानमंत्री तक पहुंचती, दूसरा गुलदस्ता उनके हाथों में आ जाता। आप (प्रधानमंत्री) हर रोज कई लोगों से मिलते होंगे और स्वागत में आपको गुलदस्ते भेंट किए जाते होंगे।’ उन्होंने आगे कहा है कि प्रधानमंत्री को एक स्वागत कोष शुरू करना चाहिए। इस कोष में उन लोगों से पैसे जमा करने को कहना चाहिए, जो प्रधानमंत्री का स्वागत करना चाहते हो और प्रधानमंत्री को गुलदस्तों को स्वीकार करने की प्रक्रिया कम से कम कर देनी चाहिए

अन्य सुझावों में एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि टेलीविजन पर प्रधानमंत्री का चेहरा थका हुआ दिख रहा है।

पीएम पन्द्रह अगस्त को अपने भाषण में लोगों से बच्चों को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी फिल्में दिखाने को कहें बजाय इसके कि वे बच्चों संग पिकनिक पर निकल जाएं।

एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री से जम्मू-कश्मीर को दिए गए 80 हजार करोड़ के पैकेज पर विस्तृत रूप से बात करने को कहा है। ताकि यह बताया जा सके कि अगर बीजेपी सांप्रदायिक होती, तो ऐसी घोषणा क्यों करती।

एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री से शहीदों के परिवारों के बैंक अकाउंट साझा करने की घोषणा करने को कहा है। ताकि शहीदों के परिवारों की मदद के लिए लोग पैसे दे सकें।

– संदीप दास ने लिखा कि पीएम को 1000 रुपए से ज्यादा का कैश लेन-देन बंद करने का एलान करना चाहिए। गरीब लोग इससे ज्यादा पैसा खर्च नहीं कर पाते हैं। इससे ब्लैक मनी पर लगाम लगेगी। वहीं, 1000 और 500 के नोट बंद किए जाएं।

– बिजेंद्र जांगरा ने सुझाव दिया- “देशभर में प्लास्टिक बैग पर बैन लगाएं।”

– आरुणि त्रिवेदी ने कहा – “मैं दो सुझाव देना चाहता हूं। पहला, अपनी स्पीच कृपया 30 मिनट के अंदर खत्म कर लें तो अच्छा होगा। दूसरा, शहीद जवानों को देश में पूरा सम्मान मिले।”

– नवरंग लाल बोले- “फैमिली प्लानिंग के लिए मोटिवेशन स्कीम लाएं। इसे स्वच्छ भारत अभियान की तरह पॉपुलर किया जाना चाहिए।”

– जय ने कहा कि घाटी में तनाव पर सबका ध्यान है। अगर अच्छा हो कि पीएम अपनी स्पीच में जम्मू-कश्मीर के लिए घोषित 80 हजार करोड के पैकेज की डिटेल में जानकारी दें।

– एक शख्स ने कहा- ” मैं पीएम की सेहत को लेकर फिक्रमंद हैं। पीएम ज्यादा मेहनत न किया करें, क्योंकि टीवी पर चेहरा थका हुआ दिखता है।

“आदित्य दीवान ने सफाई कर्मचारियों को सफाई सैनिक कहने की बात रखी।

-करोड़पति सांसद अपनी सैलरी छोड़ें

– नितिन निगम ने सुझाव दिया- “यदि कोई शख्स कार चलाते समय सड़क पर थूकता है तो उस पर कुछ कार्रवाई की जानी चाहिए।”

– कमलेश राम ने कहा- ” मोदी जी आप महंगाई कम करने के लिए स्टेप उठाएं। आम आदमी जानना चाहता है कि महंगाई दर कब 2 से फीसदी होगी।”

– महेश कवडे चाहते हैं, पीएम ऑर्गन डोनेशन पर कुछ बोलें। भविष्य में इसकी जरूरत बढ़ेगी। इसलिए कानूनी में सख्ती कम हो।”

– राजन सोनी ने करोड़पति सांसदों की सैलरी पर कहा- “करोड़पति सांसदों को अपनी सैलरी छोड़ देनी चाहिए। इस बारे में कोई एलान लाल किले से होना चाहिए।”

पांच साल की बच्ची का सुझाव अनुष्का रुद्रावर ने लिखा, “हेलो सर में अपने पापा के आईडी से मेल भेज रही हूं” “मेरा सुझाव उस प्रोजेक्ट को लेकर है, जिस पर हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने पहल की थी।”

– विकास राय ने सलाह दी है कि उन्हें इस स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की जगह कश्मीर जाकर तिरंगा फरहाना चाहिए.

मेरे विचार से कुछ करेंगें तभी देश बदलेगा…प्रोफाईल पिक्चर या स्वतंत्रता दिवस के संदेश भेजने से कोई बदलाव नही आएगा. चुपचाप बस खुद कुछ अच्छा काम करते रहें अपना देश के प्रति फर्ज समझे… बदलाव जरुर आएगा !!

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!

स्वतंत्रता दिवस भाषण के लिए PM मोदी ने मांगे जनता से सुझाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस पर दिए जाने वाले अपने भाषण के लिए जनता से सुझाव मांगे हैं। read more at www.punjabkesari.in

वैसे आपके क्या विचार होते जरुर सांझा कीजिए …

August 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

हार्दिक शुभकामनाएं – ओडियो

टैटू गुदवाना और रक्तदान
Monica Gupta

Monica Gupta

https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2016/08/audio-dil-se-by-monica-gupta-.wav

क्लिक कीजिए और सुनिए  दो मिनट का मजेदार ऑडियो

हार्दिक शुभकामनाएं – ओडियो Audio

मैं अपनी सहेली मणि के घर गई तो वो उलझी हुई थी लिस्ट बनाने में बोली कि फैस्टिवल आने वाले हैं पहले से ही शुभकामनाएं देने लेने की लिस्ट बनी हो तो अच्छा रहता है मैने उसे कहा कि अरे इसमें इतना टेंशन वाली क्या बात है लिस्ट में चार केटेगिरी बनाओ   1 धक्के से 2 मजबूरी से 3 जरुरी से 4 दिल से

धक्के से जैसा कि नाम से पता चलता है कि हमें धक्के से शुभकामनाएं देनी पडती जैसे कि मकान मालिक वो  हमे जरा भी अच्छा नही लगते  कभी पानी तो कभी पार्किंग के लिए तंग करके रखते है पर धक्के से विश करना ही पडता है

अब आती है मजबूरी से. मजबूरी केटेगिरी में वो लोग आते हैं जो हमे भाव नही देते पर हमारा उनके बिना काम नही चलता जिन से हमे  काम निकलवाना है, पैमैंट निकलवानी है जैसाकि पत्रिका के सम्पादक .. भले ही हमारी सम्पादक से जान पहचान हो ना हो पर शुभकामनाएं भेजेगे अरे भई आर्टिकल भी  तो छपवाने है कि नही जरुर.

अब बारी आती है जरुरी से की. और जरुरी है वो  लोग जो जाने अंजाने सारे साल किसी ना किसी रुप मे हमारे काम आते हैं जैसे कि डाक्टर, बैंक मे काम करने वाले या बच्चो की ट्यूशन सर या क्लास टीचर क्योकि सारे साल उन्होने ही तो ख्याल रखना है बच्चों को अच्छे marks  मे.

अब बात आती है दिल से की. जिसमे है हमारा घर परिवार हमारे प्यारे दोस्त जो हमेशा हमारे साथ दिल से जुडे रहतें हैं हमारी एक स्माईल smile  से हमारे दर्द को महसूस कर लेते हैं और बिना लिखे हमारे शब्द समझ जाते हैं वटस अप पर हमारे लास्ट सीन last seen को देखते हैं और हमारी डीपी पर thumbs up  हमारा हौंसला बढाते हैं.

वैसे सोशल मीडिया भी अच्छा माध्यम है अपनी शुभकामनाएं देने का… बस वोल पर शुभकामनाएं लिख दो.. फोन का  डाक का खर्चा  भी बचेगा …वैसे .आपने तो लिस्ट बना ली होगी अगर नही बनाई तो बना लीजिए और सबसे ज्यादा अहमियत दिल से वाली केटीगिरी को दीजिए .. कल फिर मिलूगी एक और नई केटेगिरी ohh  मेरा मतलब topic  के साथ तब तक

अपना ख्याल रखिए खुश रहिए बाय बाय…. फिलहाल आपको हार्दिक शुभकामनाएं दिल से

 

August 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

रियो ओलंपिक में भारत और खेल मंत्री

रियो ओलंपिक में भारत और खेल मंत्री

1470405394-7671

रियो ओलंपिक में भारत और खेल मंत्री

हे भगवान !!ये क्या हो “रियो” है. एक तरफ ओलंपिक में हमारे पदक नही आ पा रहे और दूसरी तरफ हमारे खेल मंत्री को ही चेतावनी मिल गई और वही चीनी मीडिया ने ओलंपिक में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के छह कारण बता दिए कि भारत में मूलभूत ढांचे की कमी, स्वास्थ्य की कमी, ग़रीबी, लड़कियों को खेलों से दूर रखना, लड़कों पर अच्छे डॉक्टर और इंजीनियर बनने का दबाव, क्रिकेट की लोकप्रियता और ओलंपिक के बारे में ग्रामीण इलाक़ों में जानकारी की कमी है.

बहुत स्टीक बात कही उन्होनें … चीनी मीडिया में ये भी कहा गया है कि भारत चीन के बाद दूसरा सबसे ज़्यादा जनसंख्या वाला देश है लेकिन ओलंपिक में बहुत कम पदक जीत पाता है.

बहुत सच्चाई है इस बात में तभी कह रही हूं कि ये क्या हो रियो है…

खेल मंत्री विजय गोयल को रियो में चेतावनी – BBC हिंदी

रियो में उपमहाद्वीप प्रबंधक साराह पेटरसन ने भारतीय चीफ़-डे-मिशन राकेश गुप्ता को एक ख़त लिखा है कि ऐसी कई रिपोर्टें मिली हैं कि खेल मंत्री एक्रेडिटेशन वाली जगहों पर प्रवेश चाह रहे थे, उनके साथ ऐसे लोग थे जिनके पास यहां जाने की अनुमति नहीं थी. जब ओलंपिक कर्मचारी उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे तो उनका बर्ताव रूखा और आक्रामक था.

भारतीय खेल मंत्री दलबल को ऐसी जगहों पर ले जा रहे थे जिसका एक्रेडिटेशन उनके पास नहीं था और अख़बारों की सुर्खियां. read more at bbc.com

 

August 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छ भारत मिशन – सफलता की कहानी(वीडियो)

स्वच्छ भारत मिशन – सफलता की कहानी(वीडियो)

स्वच्छ भारत मिशन – सफलता की कहानी(वीडियो)

ये सफलता की कहानी किसी एक व्यक्ति की नही बल्कि पूरे गांव की है.  पूरा गांव  जय स्वच्छ्ता के नारे गूंज उठा. एक कहानी नही हकीकत है और हकीकत है हरियाणा के जिला सिरसा के गांव फूलकां की.

ये तभी सम्भव हुआ जब जिला प्रशासन की टीम ने गांवों का दौरा किया और लोगो में जागृति  आई…

गांव की निवासी पुष्पा देवी बताती है कि पहले अपने गांव में आते जाते जाते शर्म आती और आज इस गांव में इतनी स्वच्छता आ गई है कि हमारा गांव अपने नाम जैसा  फूल जैसा खूबसूरत हो गया है..

वही गांव के बच्चों प्रदीप और कलावती ने बताया कि वो निगरानी करते और लोगो को खुले में शौच जाने को मना करते जब लोग नही मानते तो इनके शौच पर मिट्टी डाल कर आते ताकि बीमारियों से बचाव हो सके.

स्कूली टीचर श्री जगदेव फौगाट ने भी बताया कि बच्चों ने स्वच्छता के मह्त्व को बहुत जल्दी समझा.

आज ये गांव पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त है यही इस गांव की सफलता की कहानी है क्योकि सभी के सांझे प्रयासों से स्वच्छता आई तभी आज इस गांव की महिला नाच रही है गा रही है और जय स्वच्छता नारे गूंज रहे हैं

स्वच्छ भारत मिशन – सफलता की कहानी(वीडियो)

Swachh Bharat Mission-Gramin

Swachh Bharat Mission-Gramin Swachh Bharat Mission-Gramin – Kanganpur – Nirmal Bharat Abhiyan – TSC – DOST बात उन दिनों की है जब गांव के लोग खुले में See more…

 

 

August 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

एन. रघुरामन- मैनेजमेंट फंडा – एक शख्सियत

एन. रघुरामन- मैनेजमेंट फंडा – एक शख्सियत

Ab Muskil

एन. रघुरामन- मैनेजमेंट फंडा – एक शख्सियत

N Raghuraman Management Funda in Dainik Bhaskar

कुछ साल पहले मैनें बच्चों को प्रेरित करने के लिए एक किताब लिखी थी अब मुश्किल नही कुछ भी और सोच विचार उन नामों पर था जिन्होनें अपना बचपन  बेहद साधारण रुप में यापन किया और आज आसाधारण प्रतिभा बन कर हम सभी का मार्ग दर्शन कर रहे हैं अपनी किताब के लिए मैने जिन आसाधारण प्रतिभाओं का साक्षात्कार लिया उनमें से एक हैं  एन रघुरामन.. हम हमेशा उन का लिखा मैनेजमैंट फंडा पढते हैं पर आज पढिए रघु जी के बारे में…

एन रघुरामन
कहते है कि एक अच्छी किताब सौ दोस्तो के बराबर होती है पर एक अच्छा उत्साहित करने वाला दोस्त हो तो वो तो पूरी की पूरी लाइ्रब्रेरी ही होता है।
जी हॉ, अब जिस शख्सियत से आपकी मुलाकात होगी वो हजारो प्रेरक प्रंसगो और जागरूक करने वाले फंडो की चलती फिरती लाइब्रेरी से कम नही है। मैनेजमैंट फंडा के जनक श्री एन रघुरामन आज किसी परिचय के मोहताज नही है। लेखन के प्रति समर्पित नटराजन रघुरामन मध्य प्रदेश दैनिक भास्कर के स्टेट एडिटर है और समस्त सिटी भास्कर के मुखिया है।

मैनेजेमैंट फंडा के नाम से दैनिक भास्कर में नियमित रूप से कालॅम लिखने वाले रघु जी से जब मिलने का समय लिया तो उन्होने तुरन्त अपने व्यस्त कार्यक्रम से कुछ समय निकाल लिया और फिर शुरू हुआ बातो का सिलसिला। बाते शुरू करने से पहले एक बात मैने महसूस की कि रघु जी सादगी की जीती जागती मिसाल है जिससे भी मिलते है उसे अपना बना लेते है और ऐसा महसूस होने लगता है कि इन्हे तो हम बहुत पहले से ही जानते है।

N-Raghuraman1_f_400x400
13 मई 1960 को तमिलनाडू के तंजौर जिले के कुम्भाकोणम् मे इनका जन्म हुआ। इनकी मॉ जी श्रीमति जय लक्ष्मी गृहणी और पिता श्री वैकेटारामन नटराजन् वर्धा रेलवे स्टेशन जोकि गांधी आश्रम के पास था। उसी रेलवे में कार्यरत थे। रघुजी के दादाजी के भाई डा0 शंंकरन् महात्मा गांधी जी के तमिल टीचर थे।

वाह !!  हैरानी से सारी बात सुने जा रही थी। उन्होने बताया कि इस कारण उनको भी आश्रम मे जाने का और गांधी जी से सम्बधित चीजो को पास से देखने का सुअवसर मिला। बताते बताते उनकी आंखो मे एक अलग सी चमक आ गई। निश्चित तौर  पर यह बात किसी के लिए भी गर्व का विषय हो सकती है.

रघुजी ने बताया कि दिनचर्या मे अकसर वो स्कूल जाने से पहले गांधी आश्रम की झाड़पोछ करते और खुद को भाग्यशाली समझते। सैलानियो के लिए आश्रम आठ बजे खुलता था। तब तक उनके स्कूल जाने का समय हो जाता।
वो बता रहे थे कि बचपन में घर मे आर्थिक रूप से बहुत तंगी थी इसलिए उन्होने 14 साल की उम्र से ही अपने घर का खर्चा चलाने के लिए छोटा मोटा पढाने का काम करने लगे पर पढाई साथ में जारी रही। मैं हैरानी से उनकी बाते सुन रही थी। उन्होनें बताया कि समय ऐसे ही बीत रहा था। कुछ समय बाद गॉव में अच्छा स्कूल ना होने की वजह से उनका परिवार नागपुर जा कर बस गया और स्कूली शिक्षा नागपुर से हुई। मेरे मन मे प्रश्न् उठ रहा था कि कम उम्र में ही उन्होने घर का खर्चा चलाने के लिए काम भी करना शुरू किया पर आखिर लेखन की तरफ कैसे और कब आकर्षित हुए।
इस पर वो मुस्कुराते हुए बोले कि इसको भी अलग ही कहानी है असल में, 1978 में यानि जब वो 18 साल के थे तब उन्होने रोची प्रोडेक्ट में मशीन संचालक के रूप मे कार्यभार सम्भाला। जो सैरीडोन दवाई बनाते थे। मैने फिर बीच मे पूछा कि लेखनी…….। इस पर वो बोले कि वो उसी बात पर आ रहे है काम के दौरान एक बार सैरीडोन दवाई का पैकेट जल गया तो वहा के जी0एम0 श्री डा0 काशीनाथ कॉल ने कहा कि लिख कर सारी जानकारी दो कि ये जला कैसे। जब उन्होने लिख कर दिया तो सारी बाते भूल कर वो उनकी लेखनी से बहुत प्रभावित हुए और उसके बाद लेखन के क्षेत्र मे आगे हो बढ़ते गए।

फ्री प्री जनरल उनका पहला पेपर ग्रुप था जिसमे उन्होने काम करना शुरू किया। बचपन से एक ऐसा माहौल देखा था कि मन मे आता था कि कुछ ऐसा लिखूं की आमजन तक उनकी आवाज पहुचे। इसी बीच लेखन के साथ साथ पोस्ट ग्रेजूएशन की और एम0बी0ए0 की डिग्री  मुम्बई से प्राप्त की।
सन् 2000 में दैनिक भास्कर समाचार पत्र में मैनेजेमैंट गुरू के नाम से कालॅम लिखना शुरू किया और हर दिन लेखो की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिलती रही जिससे हर रोज कुछ नया कुछ अलग लिखने की भावना आती रही। उनके लेख ना सिर्फ पंसद किए जाते बल्कि पाठक उनसे प्रेरणा भी लेने लगे। इसके लिए उन्होने विशेष रूप से दैनिक भास्कर का धन्यवाद किया क्योकि उसके माध्यम से वो निरन्तर अपनी बात रख रहे है।
मै उनकी बाते बहुत ध्यान से सुन रही थी और मैं कुछ पूछने को ही हुई थी कि उनका फोन आ गया और वो दो मिनट का समय लेकर बात करने मे व्यस्त हो गए।
फोन रखने के बाद मेरा प्रश्न तैयार था कि बहुत लोग आपको अपना गुरू या आर्दश मानते है क्या आपके भी कोई प्रेरक है? इस पर वो मुस्कुराते हुए बोले कि जिससे भी चाहे वो बच्चा हो या बडा सीखने को मिले वो उनका गुरू है। वैसे वो श्री सी0के0 प्रहलाद जोकि जाने माने मैनेजेमैण्ट एक्सपर्ट है उन्हे बहुत पंसद करते है क्योकि जमीन से जुडे उनके लेख आम आदमी को बहुत प्रभावित करते है।

इसी बीच फिर से उनका फोन आ गया और वो किसी से बात करने लगे। मेरा अगला प्रश्न तैयार था। फोन रखते ही मैने पूछा कि आपके बचपन की कोई ऐसी धटना जिसे आप कभी ना भूल पाए। उस पर वो बोले कि बाते तो बहुत है पर एक धटना बहुत बड़ी सीख दे गई थी।
एक बार गॉव मे मेला लगा हुआ था। मॉ ने 5 पैसे दिए। मेरी गो राऊड (गोल घूमने वाला) झूले में तीन पैसे का एक चक्कर था। एक चक्कर लगाने के बाद झूले वाले ने कहा कि दो पैसे में वो एक चक्कर और लगवा देगा। वो खुश हो गए और एक चक्कर और लगा लिया। घर लौट कर जब मॉ जी की बताया कि झूले में 5 पैसे लगा दिए दो पैसे बेवजह खर्च करने पर तो बहुत नाराज हुई कि 2 पैसे खर्च करने का अधिकार किसने दिया इसके परिणाम स्वरूप उन्हे 6 धण्टे धूप मे खडे रहने की सजा मिली। बुखार भी हो गया और डाक्टर का खर्चा हुआ वो अलग। पर ये बात बहुत बडा सबक दे गई कि ऐसे ही फिजूल खर्च नही करने चाहिए और बात भी सही है जब तक हम कमाते नही है तब तक इसकी कीमत भी नही पता लगती।
उन्होने बताया कि आज के समय मे जहॉ बच्चे 100-200 रूपये तो ऐसे खर्च कर देते है वहा 2 पैसे की बात सुनकर उन्हे हॅसी ही आऐगी। पर ये भी एक सच है ऐसा लगा कि वो बाते बताते बताते कही खो गए मैने बात को आगे बढ़ाते हुए पूछा कि बचपन की और क्या बात बहुत याद आती है उन्होने बताया कि मॉ जब अपने हाथ से खाना खिलाती थी तो वो समय बहुत याद आता है। काश वो समय दुबारा आ जाए कहते-कहते वो संजीदा हो गए।

मैने बात बदलते हुए पूछा कि चलिए खाने की बात चली है तो खाने मे क्या-क्या पंसद है । तो उन्होने बताया दही, चावल अचार बहुत पंसद है और अगर पूरे साल सिंर्फ यही मिले तो भी वो बहुत शौक से खा सकते है बताते हुए उनके चेहरे पर मुस्कान दौड गई। मैने जानना चाहा कि उनकी दिनचर्या कैसी रहती है तो उन्होने बताया कि सुबह 5.30 बजे उठाना और 6 बजे से 8 बजे तक अखबार पढ़ना और सैर करना रहता है और इसी बीच विचारो की उथल पुथल होती रहती है और वही समय लेखन के लिए उपयुक्त होता है।
मैने मुस्कुराते हुए पूछा कि हम अपने मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए आपके लेख पढ़ते है पर आप इसके लिए क्या करते है कोई फिल्म वगैरहा या इस पर वो बोले कि फिल्मो मे तो ज्यादा रूचि है नही पर लेखन के लिए फिल्म देखनी पड़ती है और पसंदीदा गाना पूछने पर उन्होने बताया कि एम0एस0 सुब्बालक्ष्मी का भजन भज गोविंदम् प्रार्थना है। जब कभी भी सुनते हैं तो रोंगटे खडे हो जाते है और बार बार सुनने का मन करता रहता है।
मेरे पूछने पर कि आप दक्षिणी भारतीय है कौन सी जगह भारत की पसंद है उन्होने मुस्कुराते हुए कहा कि सभी जगह उन्हे बहुत पसंद है फिर मेरे एक प्रश्न पूछ्ने  पर कि जिंदगी में हमेशा  उतार-चढाव और टेंशन  आती रहती है। तनाव के वक्त खुद को कैसे कूल रखते है… उन्होने सहज होते हुए कहा कि टेंशन होने पर टेंंशन मे रहने से कोई नतीजा नही निकलता।

उन्होने बताया कि अब इस समय उनकी बेटी अस्पताल मे भर्ती है तबियत ठीक नही है और वो उसके पास नही है पर टेंशन लेने से ना तो वो ठीक हो जाऐगी और न ही वो ठीक रह पाऐगें। हां  इतना जरूर है कि उन्होने सभी अपने डाक्टर मित्रो को बोल दिया है और वो लगातार उनसे फोन पर सम्पर्क बनाए हुए है और उसकी तबियत की जानकारी दे रहे है।
सच पूछो, तो अब मैं थोड़ी असहज हो गई क्योकि मुझे लगा कि शायद ये सही समय नही है उनसे बात करने के लिए। तो उन्होने कहा कि कोई दिक्कत ही नही है आप अपना अगला प्रश्न पूछिए।

मैने मुस्कान लाते हुए पूछा कि बचपन मे आपने कोई सपना देखा था। उन्होने बताया कि बचपन में बहुत गरीबी देखी थी इसीलिए बस यही सपना देखता था कि बडे होकर आराम की जिंदगी जीउ, इसीलिए बचपन से ही दिन रात मेहनत शुरू कर दी। 14 साल की उम्र से काम मे लग गया। आज ईश्वर की कृपा है कि उन्होने मेरी प्रार्थना सुन ली और उनके बच्चे को वो सब नही देखना पडा जो उन्होने देखा।

अब बच्चे का भविष्य खुद बच्चो पर निर्भर है कि वो अपना आने वाला कल कैसे बनाते है। बिल्कुल सही बात है। मै उनकी बात से सहमत थी।
मै जानना चाह रही थी कि उनके परिवार में और कौन कौन है और परिवार को कितना वक्त दे पाते है इस पर वो बोले कि उनकी पत्नी प्रेमा है, प्यारी सी बिटिया है और पिक्सी नाम की डॉगी है पर जहॉ तब वक्त देने की बात है.

सच मे, व्यस्तताएॅ इतनी ज्यादा है कि वो ज्यादा समय परिवार को नही दे पाते। पर जब भी समय मिलता है तो उनका सारा समय परिवार के साथ ही बीतता है और कहते कहते मुस्कुराने लगे।
मेरा अगला प्रश्न भी तैयार था कि भविष्य को लेकर आपका क्या सपना है इस पर वो मुस्कराते हुए बोले कि अच्छा सवाल है वो अक्सर सोचते है कि उनके इस दुनिया से अलविदा कहने के बाद जब लोग आएगे तो क्या बात करेगे कि अच्छा हुआ एक बुरा आदमी दुनिया से चला गया । बहुत दुख हुआ। उन्होने बच्चो और बड़ो से बहुत ज्ञान बांंटा पर अब शून्य ही रह गया ।

फिर खुद ही मुस्कुराते हुए बोले कि वो जानते है कि अभी वो उस रास्ते से कोसो दूर है जब लोग उनके बारे मे अच्छा बोलेगे पर इतना यकीन है कि वो कम से कम सही रास्ते पर तो है।
इसमें कोई शक नही कि अपने लेखन से वो पाठको को हर रोज कुछ ना कुछ नया सन्देश दे रहे है। सन्देश से मुझे याद आया और मैं पूछ बैठी कि बच्चो को क्या संदेश देना चाहते है तो वो कुछ सोचने की मुद्रा मे बोले कि आज के बच्चे बहुत समझदार है उनके सपने वो जानते है कि उन्हे क्या करना है पहले साधन नही थे। आज उनके पास सभी साधन और सुविधाए है बस उसका इस्तेमाल सही ढ़ग से करना होगा। सीधे शब्दों  मे कहे तो चीनी, चावल उनके पास है खीर कैसे बनानी है यह उन्हे सोचना होगा।

नींव उनके पास उस पर महल कैसे खडा करना है उन्हे विचारना होगा ताकि आने वाली पीढी के लिए रास्ता खुला रहे। हम सभी को उन्हे प्रोत्साहित करना होगा, पीठ थपथपानी होगी ताकि वो मीलो आगे जा सकें। बस अपने से बडो का आदर मान कभी नही छोडना चाहिए। जो बच्चे अपने अभिभावको का आदर करते है देख कर बहुत खुशी होती है उन्होने सभी बच्चो को शुभकामनाए दी और कहा कि अपने माता पिता बडे बुर्जगो की सेवा करते, आशीर्वाद  लेते अपने लक्ष्य की ओर बढो फिर देखो सफलता आपके कदमो मे होगी।
फिर उनका फोन आ गया और वो फोन पर बात करने मे व्यस्त हो गए और मैं भी अपने कागजो को समेटने लगी क्योकि बहुत सारी जानकारी उनसे ले ली थी। बस एक आखिरी प्रश्न  पूछना रह गया था कि उनकी भविष्य मे क्या योजनाए है फोन पर बात करने के बाद वो समझ चुके थे कि मैं कुछ पूछना चाह रही हॅू प्रश्न  सुनने के बाद वो बोले कि वो दिन रात इसी प्रयास में जुटे है कि लेखन के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगो के बीच मे रह कर उन्हे जागरूक और प्रेरित करते रहे।

nraghu ji

 

चार किताबे भी लिखी है और दूसरी किताबो पर काम चल रहा है इसी सिलसिले ने ना सिर्फ देश के अन्य शहरो मे बल्कि विदेशो में भी दौरे लग रहे है और लोगो के स्नेह देखकर वो भी बहुत उत्साहित है मुझे जाने के लिए उठता देख उन्होनें कहा कि आपके बिना प्रश्न पूछे एक बात का मैं जवाब देना चाह्ता हूं कि  उनकी बिटिया अब ठीक है अभी फोन पर बात हुई है । उनकी बात सुनकर मै मुस्कुरा उठी।
मैने उन्हे सुनहरे भविष्य की ढेर सारी शुभकामनाए दी और वहा से रवाना हो गई ।जाते जाते मैं सोच रही थी कि सादा जीवन उच्च विचार रखते हुए रघु जी आज निसन्देह एक चमकते सूरज के समान अपनी किरणो रूपी बातो और लेखो से हम सभी में एक नई स्फूर्ति भर रहे है। यही सोचते सोचते मै आगे बढ़ गई।

कैसा लगा आपको उनका ये साक्षात्कार ?? जरुर बताईएगा !!

August 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो – Total Sanitation Campaign in India ,Nirmal Bharat Abhiyan ,’Swachh Bharat Abhiyan या स्वच्छता अभियान नाम कोई भी हो मकसद सिर्फ एक है कि हमारा भारत देश स्वच्छ हो खुले में शौच से मुक्त हो 

  स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छ भारत अभियान के एक नए जारी किए गए वीडियो में कंगना रनौत लक्ष्मी के रूप में दिखती हैं और अमिताभ बच्चन जी  की आवाज़ है. इस वीडियो में संदेश दिया गया है कि सफाई न रखने पर लक्ष्मी आपका घर छोड़ कर चली जाएंगी, आप चाहे तो उन्हें रोक लें. बेशक, स्वच्छता अभियान में चाहे विद्द्या बालन जी हों या अमिताभ जी….  पर असली हीरो होते हैं गांव वाले जो  स्वच्छता से प्रेरित होकर अपने गन्दे और शौच युक्त गांव का नक्शा ही बदल देते हैं . एक बडा सा सलाम हैं उन गांव वालो को जिन्होने अपने गांव को गांव नही परिवार समझा और देखते ही देखते गांव का नक्शा ही बदल गया..

यह कोई सुनी सुनाई बात नही बल्कि मेरे सामने की बात है और गांव वालो के जज्बे से उनका सफाई के प्रति प्रेम देख कर मैं इतना उत्साहित हो गई कि मैने स्वच्छता एक अहसास पर पूरी किताब ही लिख डाली.

अहसास स्वच्छता का ………… पुस्तक को लेकर आपके मन में ढ़ेरो सवाल उठ रहें होंगें कि आखिर इस पुस्तक के माध्यम से स्वच्छता का अहसास कैसे करवाया जा सकता है। सच पूछो तो, हम सभ्य समाज के सभ्य नागरिक हैं, पढे़- लिखे और समझदार भी हैं लेकिन सही मायनों में देखा जाए तो अनपढ़ और असभ्य की श्रेणी में आते हैं क्योंकि जिस समाज में हम रहतें हैं उसी को गंदा कर रहें हैं।

यहां बात भ्रष्टाचार की नहीं बल्कि उस कूडे़- कर्कट की है जो हमारें चारों तरफ फैला है और कूडेदान एक तरफ खडे़- खडे़ गंदगी का मुँह ही ताकते रह जातें हैं और तो और सड़क के किनारें, दीवारों की ओट को शौचालय का रूप देकर दिन-रात गंदगी में इजाफा किया जा रहा है। सड़क पर चलते हुए थूकना और पूरी सड़क को कूडादान समझना आम बात है। अगर यह पढ़े- लिखे सभ्य समाज को चित्रित करता है तो गाँव वालों को किस श्रेणी में रखेंगें क्योंकि वो तो वैसे भी अनपढ़, सीधे-साधारण गरीब, किसान और मज़दूर होतें हैं।

भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत गाँव वासियों की सोच में एक ऐसा बदलाव, ऐसी जागरूकता देखने को मिली जिसकी सपनें में भी कल्पना नहीं की जा सकती थी। बस, यहीं मुझे पुस्तक लिखने का मकसद मिल गया कि आज जो अहसास इन गाँव वासियों को हो रहा है उसकी महक उन लोगों तक भी पहुँचे जो अभी तक इससे अछूते हैं। मैनें अपनी तरफ से पुस्तिका में स्वच्छता और उससे आए बदलाव के बारे में जानकारी देने की पूरी कोशिश की है और मुझे उम्मीद ही नही पूरा विश्वास है कि इसको पढ़ने के बाद आप भी और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में मदद करेंगें।
अहसास ……………स्वच्छता का

“देशोऽस्ति हरयाणारव्यः पृथिव्यां स्वर्गसनिन्नभः” यानि हरियाणा नाम का एक देश हैं जो धरती पर स्वर्ग के समान है। यह विक्रमी संवत् 1385 के शिलालेख से उद्घृत है जो दिल्ली के निकट सारवान गाँव से मिला है।

सन् 2005 में जिला फतेहबाद के निकट भिरड़ाना गाँव में खुदाई के दौरान एक ऐसी सभ्यता मिली जो स्वच्छता से रहती थी। खुदाई के दौरान नालियाँ और मुख्य नाला इस ढ़ंग से बनाया गया था कि ऐसा मालूम देता था कि जिस समय यहां लोग रहते होंगें उस समय गंदगी का नामो-निशान नही होगा क्योंकि घर-घर में नालियाँ इस सफाई से बनाई गई थी कि पानी रूकने या जमा होने का कोई मतलब ही नही था।

सफाई, एक अनमोल गहना है जिसे हर एक अपने पास रखना चाहता है पर उसे सहेज कर रखने के चक्कर में वो इसे सम्भाल कर नहीं रख पाता और नतीजा…….. हमें चारों तरफ गंदगी, कूडे़, कीचड़ आदि का साम्राज्य मिल जाता हैं। बात शहर की हो या गाँव की, गन्दगी हर जगह हैं। हाँ, अगर तुलना की जाए तो गाँव में गंदगी का तो बहुत ही बुरा हाल है। गलियों में जमा पानी, रूढि़यों के ढे़र, कूड़ा-कर्कट और तो और बाहर खेतों में शौच जाते गाँव-वासी गन्दगी और फैलती जानलेवा बीमारियों में बढ़-चढ़ कर योगदान दे रहें हैं।

ना तो उन्हें कोई समझाने वाला है और ना ही कोई जागरूक करने वाला। जबकि इतिहास के पन्ने पलटने पर हम पढ़ते है कि खाना खाने से पहले और खाने के बाद हाथ धोना, प्रतिदिन नहाना, कमरे मे जाने से पहले चप्पल-जूतें उतारना, बिना स्नान किए रसोई में ना जाना, प्रसूति के बाद माँ तथा बच्चें को कुछ समय के लिए संक्रमण से बचाने के लिए अलग कमरें में रखा जाता था। व्यक्तिगत स्वच्छता का उल्लेख मनुस्मृति में भी मिलता है। मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा की खुदाई भी स्वच्छता की साक्षी रहीं हैं।
आज जबकि देश इतनी प्रगति कर रहा है। हर रोज नई-नई वैज्ञानिक खोजें हो रही है ऐसे में लोग गन्दगी से दूर क्यों नहीं जा पा रहें? क्यों वो घर और गलियों के आगे इकट्ठा बदबूूदार पानी देखकर भी कुछ नहीं करते? क्यों मच्छरों को उन्होनें अपनी नियति समझ लिया है और क्यों सदियों पुरानी चली आ रही खुल्ले में शौच जाने आदत से उन्हें इतना भावनात्मक लगाव है।

 

देखा जाए तो क्यों यानि प्रश्न बहुत हैं। आखिर कोई तो रास्ता होगा इससे बाहर निकलने का। जबकि सभी को पता है कि स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल की कमी से 80ः बीमारियाँ पैदा होती हैं। प्रति वर्ष विश्व भर में 5 वर्ष से कम आयु के 15 लाख बच्चें मौत के शिकार बनते हैं।
आंकड़ा सुनकर सिरहन दौड़ जाना स्वाभाविक है पर स्वाभाविकता से परे एक कटु सत्य है और वो है कैसे भी करके गंदगी को दूर भगाना, लोगों को अच्छे रहन-सहन के तरीकों की जानकारी देना, बेकार पानी की निकासी, पीने के पानी की सम्भाल, कूडे़-कर्कट के साथ-साथ मानव मल का सही ढ़ंग से निपटान, व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ ग्रामीण स्वच्छता को जान कर, समझ कर उस पर अमल करना।
इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाएँ उपलब्ध करवाने के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर प्रयास किए जाते रहे और सन् 1986 में भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (सी0आर0एस0पी0 ) की शुरूआत की गई। सन् 1999 में भारत सरकार द्वारा सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान की शुरूआत की गई।

sawacchta book by monica gupta

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छता अभियान और मेरे मन की बात – Monica Gupta

क्लिक करिए और सुनिए स्वच्छता अभियान पर 4 मिनट और 35 सैकिंड की ऑडियो… मेरा अनुभव स्वच्छता अभियान और मेरे मन की बात बात स्वच्छता अभियान के दौरान की है. जब गांव गांव जाकर लोगों को जागरुक किया जा रहा था.लोगो को समझाया जा रहा था कि खुले मे शौच नही जाओ आसान नही था क्योकि सदियों से चली आ रही मानसिकता बदलना मुश्किल था.

https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2016/07/audio-sani.mp3 क्लिक करिए और सुनिए स्वच्छता अभियान पर  4 मिनट और 35 सैकिंड की ऑडियो… मेरा अनुभव बात स्वच्छता अभियान के दौरान की है. Read more…

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

  • « Previous Page
  • 1
  • …
  • 162
  • 163
  • 164
  • 165
  • 166
  • …
  • 391
  • Next Page »

Stay Connected

  • Facebook
  • Instagram
  • Pinterest
  • Twitter
  • YouTube

Categories

छोटे बच्चों की सारी जिद मान लेना सही नही

Blogging Tips in Hindi

Blogging Tips in Hindi Blogging यानि आज के समय में अपनी feeling अपने experience, अपने thoughts को शेयर करने के साथ साथ Source of Income का सबसे सशक्त माध्यम है  जिसे आज लोग अपना करियर बनाने में गर्व का अनुभव करने लगे हैं कि मैं हूं ब्लागर. बहुत लोग ऐसे हैं जो लम्बें समय से […]

GST बोले तो

GST बोले तो

GST बोले तो –  चाहे मीडिया हो या समाचार पत्र जीएसटी की खबरे ही खबरें सुनाई देती हैं पर हर कोई कंफ्यूज है कि आखिर होगा क्या  ?  क्या ये सही कदम है या  देशवासी दुखी ही रहें …  GST बोले तो Goods and Service Tax.  The full form of GST is Goods and Services Tax. […]

डर के आगे ही जीत है - डर दूर करने के तरीका ये भी

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन – Social Networking Sites aur Blog Writing –  Blog kya hai .कहां लिखें और अपना लिखा publish कैसे करे ? आप जानना चाहते हैं कि लिखने का शौक है लिखतें हैं पर पता नही उसे कहां पब्लिश करें … तो जहां तक पब्लिश करने की बात है तो सोशल मीडिया जिंदाबाद […]

  • Home
  • Blog
  • Articles
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Poems
  • Stories
  • Kids n Teens
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms of Use
  • Disclaimer
  • Anti Spam Policy
  • Copyright Act Notice

© Copyright 2024-25 · Monica gupta · All Rights Reserved