Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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February 8, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

What is Google Adsense

What is Google Adsense

What is Google Adsense

गूगल एडसेन्स क्या है   

 Google Adsense photo

जब भी हम कभी जब ब्लॉग या इंटरनेट से आय कैसे हो कि बात करते हैं तो सबसे पहले हमारे जहन में Adsense का नाम आता है क्योकि सब पूछते हैं Adsense तो होगा ही पर हमें पता नही कि आखिर ये Adsense होता क्या है ?

अगर  जानकारी नही है  तो कोई बात नही. आज आप भी इसकी पूरी जानकारी पा सकतें है क्योकि अगर आप  ब्लॉग शुरु कर रहे हैं या कर चुके हैं तो यकीनन आप स्मार्टनेस की दुनिया में कदम रख चुके हैं इसलिए आपका सभी बातों को जानना भी बहुत जरुरी है.

गूगल एडसेन्स

गूगल ने इसको 18 जून 2003 को launch किया था. आय का फ्री और आसान तरीका है. Google Adsense  CPC यानि cost per click program है. ये एक ऐसा tool है जो पहले आपके ब्लॉग को उसके condition के हिसाब से पहले approvel देता है और  जब आपका ब्लॉग Google Adsense से approved हो जाता है तो  उसके बाद आप google Adsense का ads अपने ब्लॉग पर लगा कर अच्छे पैसे कमा सकते है और अगर आपके ब्लॉग पर ट्रैफिक बढिया है यानि बहुत लोग आ रहे हैं तो Google Adsense एकदम perfect माध्यम है.

AdSense photo

    

AdSense – AdSense

Google AdSense वेबसाइट स्वामियों को उनकी ऑनलाइन सामग्री से पैसे कमाने का तरीका प्रदान करता है. AdSense आपकी सामग्री और विज़िटर के आधार पर आपकी साइट से टेक्स्ट और प्रदर्शन विज्ञापनों का मिलान करता है. इन विज्ञापनों का निर्माण और भुगतान उन विज्ञापनदाताओं द्वारा किया जाता है, जो अपने उत्पादों का प्रचार करना चाहते हैं. चूंकि ये विज्ञापनदाता अलग-अलग विज्ञापनों के लिए अलग-अलग राशियों का भुगतान करते हैं, इसलिए आपकी आय की राशि में फ़र्क होगा.

यहां तीन चरणों में AdSense की कार्यप्रणाली समझाई गई है: read more at google.com

What is Google Adsense

उम्मीद है आपको Google AdSense पूरा समझ आ गया होगा अगर फिर भी मन कोई प्रश्न है तो

हमसे   SetUpMyBlog   पर जाकर  या मैसेज के माध्यम से बिल्कुल पूछ सकते हैं… !!  

Photo by kazwoo215

February 8, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

फिल्मफेयर अवार्ड और दीपिका पादुकोण के पिता का पत्र

deepika-filmfare

फिल्मफेयर अवार्ड और दीपिका पादुकोण के पिता का पत्र

इसे कहतें है असली मन की बात … दिल से निकली बात अक्सर दिल पर ही लगती है…
फिल्मफेयर अवार्ड्स कार्यक्रम में  पीकू फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवार्ड लेने स्टेज पर आई दीपिका पादुकोण ने भरी सभा में सभी दर्शकों से अनुरोध किया कि वो दो मिनट अपनी बात शेयर करना चाहती है दीपिका ने अपने पिता प्रकाश पादुकोण जोकि  मशहूर बैडमिंटन खिलाडी रहें  हैं उन के लिखे एक पत्र को सभी के साथ शेयर किया. जिसे सुनकर दर्शकों की आखॆं तो नम हुई ही हम जैसे जो लोग टीवी पर ये कार्यक्रम देख रहे थे… भावुक हो गए और आखें भर आईं.. एक एक शब्द सच्चाई से भरा था एक एक शब्द प्रेम और अपनेपन से भरा था शायद दिल से निकली बात थी इसीलिए सभी के दिल पर लगी…  और सभी की  आंखें नम हो गईं ….

 

दीपिका फिल्मफेयर में

दीपिका फिल्मफेयर में

प्रकाश पादुकोण का पत्र दीपिका के नाम

दीपिका, जब तुम 18 साल की हुईं थीं तो तुमने मुंबई जाकर मॉडलिंग करने की इच्छा जताई थी. तुम्हारे मुंह से मुंबई जाकर मॉडलिंग करने की बात सुनकर हमें थोड़ी दिक्कत हुई क्योंकि तुम एक ऐसी इंडस्ट्री में जाने की बात कर रही थीं जिसके लिए तुम बहुत छोटी और अनुभवहीन थी और, ये एक ऐसी इंडस्ट्री थी, जिसके बारे में हम भी कुछ नहीं जानते थे. लेकिन, फिर हमने सोचा कि तुम्हें तुम्हारे सपने को पूरा करने से रोकना तुम्हारे साथ अन्याय होगा. खासकर, उस सपने को पूरा करने से रोकना जिसके बारे में तुम दिन रात सोचती हो. अगर तुम अपना सपना सच कर पाईं तो हमें गर्व होगा लेकिन अगर तुम अपनी कोशिश में सफल भी नहीं होती हो, तब भी तुमको खराब नहीं लगेगा कि तुमने अपने सपने को सच करने की कोशिश नहीं की.

दीपिका, जब तुम घर आओगी तो खाने के बाद तुम्हें अपने बिस्तर खुद ही बिछाने होंगे और अगर घर में मेहमान आए होंगे तो तुम्हें जमीन पर भी सोना पड़ेगा. अगर कभी तुम्हें लगे कि हम तुम्हें स्टार की तरह क्यों ट्रीट नहीं करते तो उसका कारण ये है कि तुम हमारी बेटी पहले हो एक सुपर स्टार बाद में. एक वक्त के बाद तुम्हारे आगे-पीछे घूमने वाले कैमरे धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे. तब तुम ही बचोगी और एक बात हमेशा याद रखना कि जिंदगी में हमेशा जीत नहीं होती है. कभी हार भी होती है. जीतने के लिए कभी हारना भी पड़ता है. तुम जिस इंडस्ट्री में हो उसमें तुम बहुत छोटी हो, लेकिन हमेशा एक सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करना.
पापा

बहुत खुशी है क़ि आप जैसे स्टार्स से ना सिर्फ आज के, बल्कि आने वाली पीढी बहुत कुछ सीखेगी।।। ढेर सारी शुभकामनाए 🙂 लव यू !!!

फिल्मफेयर अवार्ड और दीपिका पादुकोण के पिता का पत्र आपको कैसा लगा ?? आप भी अपने मन की बात जरुर शेयर कीजिएगा … अच्छा लगेगा आपको भी और हमको भी !!!

February 7, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Valentine Week

velentine week cartoon by monica gupta

Valentine Week

एक समय था जब Valentine Day का ही पता नही होता था और अब देखिए  ये रोज डे या चाकलेट डे भी कुछ होता है और अब पता चला …

1.Rose Day – February 7
2. Propose Day – February 8
3. Chocolate Day – February 9
4. Teddy Day – February 10
5. Promise Day – February 11
6. Kiss Day – February 12
7. Hug Day – February 13
8. Valentine’s Day – February 14

हां तो मैं बता रही थी कि एक समय था जब इन दिनों का पता ही नही होता था … रोज की बात से याद आया कि एक समय था जब काम वाली बाई बिना कोई छुट्टी लिए हर “रोज” काम पर आती थी. तब हम सोच भी नही सकते थे कि वो कभी बीमार पड सकती हैं या उन्हे भी कुछ हो सकता है.आज देखिए इतनी छुट्टी कभी उन्हे ब्लड शूगर है तो कभी थाईराईड तो कभी सिर दर्द तो कभी आखे टेस्ट तो कभी बी पी कम हो रहा है इसलिए चैकअप के लिए छुट्टी लेनी है .. उनका BP भले ही कम हो पर उनकी छुट्टियां देख कर हमारा बी.पी जरुर बढ जाता है.

हमेशा की तरह आज भी “वो” देरी से आई तो मेरे आराम से पूछ्ने पर ( अब भई गुस्से में तो बात कर नही सकते इन लोगों से ) इसलिए मेरे पूछ्ने पर साडी मे दबा गुलाब दे कर बोली दीदी जी ये आपके लिए है. बाग मे गई थी इसे लेने इसीलिए देरी …!!!

हैप्पी रोज डे …. वाकई समय बदल रहा है और मैने मुस्कुराते हुए प्यार से चपत लगाई और उससे  थैक्यू कहते हुए गुलाब का फूल ले लिया !!

velentine week cartoon by monica gupta

velentine week cartoon by monica gupta

February 7, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

खबरिया चैनल और खबरों का गिरता स्तर

खबरिया चैनल और खबरों का गिरता स्तर

बेहद दुखद और आश्चर्यजनक है कि खबरें लच्छेदार और मसालेदार दिखाने के चक्कर में न्यूज चैनल कैसी कैसी खबरों को प्रमुखता देते हैं

अरविंद केजरीवाल को जूते खरीदने के लिए 364 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट भेजने की खबर को जिस प्रमुखता से चलाया गया बेहद हैरानी हुई कि क्या वाकई हमारी खबरों में और कुछ दिखाने को नही है जो इस खबर को प्रमुखता दी गई. कभी उसका लाईव फोनो लिया गया तो कभी न्यूज की सुर्खिया बनी

विशाखापत्तनम के एक व्यापारी सुमित अग्रवाल ने दिल्ली के मुख्मंत्री अरविंद केजरीवाल को ओपन लेटर लिखते हुए उन्हें 364 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट भेजा और आग्रह किया है कि डीडी द्वारा भेजी गई धनराशि से वह अपने लिए जूते खरीद लें ताकि आगे से होने वाले महत्वपूर्ण मौकों पर देश का सम्मान को ठेस न पहुंचे।

सुमित ने लिखा सर, आपकी तरह मैं भी एक मकैनिकल इंजिनियर हूं, हालांकि, आईआईटी या ऐसे ही किसी दूसरे प्रतिष्ठित से नहीं पढ़ा हूं। आपकी तरह मैं मारवाड़ी (बनिया) भी हूं। लेकिन, आपकी तरह मेरे अंदर आम आदमी का वह नैचरल आकर्षण नहीं है, इसीलिए बहुत कोशिश करने के बाद भी मैं बस 364 रुपये जुटा पाया हूं। हालांकि, इतने पैसे एक मुख्यमंत्री के लिए काफी नहीं हैं, लेकिन मेरा आपसे अनुरोध है कि कृपया इस छोटे से योगदान को स्वीकार करें और अपने लिए एक जोड़ी बढ़िया ब्लैक फॉर्मल शूज ले लें। अगर आपको और पैसों की जरूरत हो तो मुझे लिखें, जरूरत पड़ी तो मैं कुछ और पैसे जुटाने के लिए पूरे शहर का चक्कर लगा आऊंगा

गूगल सर्च से साभार तस्वीर

गूगल सर्च से साभार तस्वीर

असल में ,जनवरी में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में अरविंद केजरीवाल सैंडल पहनकर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद से मिले थे। इसी घटना को आधार बनाकर सुमित ने अपने पत्र में लिखा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री की तनख्वाह 2 लाख रुपए मासिक होने के बाद भी वह खास मौकों पर सैंडल पहनकर चले जाते हैं। यह किसी खास दोस्त की निजी पार्टी नहीं थी वरन राष्ट्रपति भवन का डिनर था। जिसकी अपनी अहमियत है।

इस बात में कोई शक नही कि अरविंद केजरीवाल आज करोडों युवाओं के आर्दश हैं देश की राजनीति को उन्होनें एक नई दिशा दी है जिसकी हिम्मत किसी मे नही थी और शायद हो भी नही सकती थी …स्वाभाविक है उनका नाम लेकर हर कोई प्रसिद्द होना चाहता है हैरानी मुझे सुमीत पर नही उन सभी न्यूज चैनलों पर है जो बिना सिर पैर की खबरें दिखा कर टीआरपी बटोरने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं.

हमें उनकी की सादगी पर ना सिर्फ गर्व है बल्कि हम भी उसी सादगी को अपनाना चाहतें हैं और उसी सादगी से सादा जीवन जीना चाहतें हैं सुमित  को किसने भ्रमित किया या नही ये तो पता नही पर हमारे चैनल ऐसी बेसिर पैर की खबरों से हमें दिन रात भ्रमित किए जा रहे हैं ये हैरानी के साथ साथ दुखद है !!

 

Vishakhapattnam engineer sends Rs 364 DD to Arvind Kejriwal to buy shoes- – Patrika News

सुमित आगे लिखते हैं कि शो ऑफ करना अच्छी बात नहीं, परन्तु सादगी का जरूरत से ज्यादा प्रदर्शन इससे भी बुरा है। उन्होंने आगे दिल्ली के सीएम को संबोधित करते हुए लिखा, “मेरे शहर में इस वीकेंड पर इंटरनैशनल फ्लीट रिव्यू का आयोजन होगा। ऐसे मौके अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने और दूसरे देशों के साथ दोस्ती का संबंध बनाने के लिए होते हैं। इस मौके पर 60 देशों के प्रतिनिधि आएंगे। संभावना है कि आपको (केजरीवाल को) भी आमंत्रण मिले। बस इसी वजह से मैं आपको यह खत लिख रहा हूं।” Read more…

खबरिया चैनल और खबरों का गिरता स्तर पर आप भी अपनी राय रख सकते हैं…

Photo by ePublicist

Photo by ePublicist

February 6, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

ऐसा भी होता है

ऐसा भी होता है

ऐसा भी होता है

कई बार कुछ ऐसी बात हो जाती है जो भुलाए नही भुलती. हमेशा हमारे दिमाग में ताजा रहती है.
बहुत समय बाद एक व्यक्ति से मिलना हुआ. पहले तो पहचान नही पाई पर जब याद आया तो  हम दस मिनट तक हंसते ही रहे… !!! हंसते ही रहे !!! असल में हुआ ये था कि बहुत समय पहले हम किसी शादी में गए थे. वहां बहुत रश था. खाना बहुत देर से सर्व हुआ इस करके वहां बहुत भीड थी…

किसी तरह मैं भी टेबल तक पहुंची तो प्लेट खत्म हो चुकी थी इसलिए एक तरफ किनारे पर खडी प्लेट की इंतजार कर ही रही थी तभी देखा एक व्यक्ति ने प्लेट में तो खाना डाल लिया पर चमच्च नही मिला. काफी देर इधर उधर देखने के बाद उन्होने सब्जी में रखा बडा चमच्च( करछा) (सर्विंग स्पून) उठा लिया और उसी से दाल खाने लगे क्योकि मैं वही खडी थी और पहले तो बहुत कंट्रोल किया कि हंसी न आए पर हंसी छूट ही गई. जिस तरह से वो इतने बडे चमच्च से दाल खा रहे थे … ह हा हा !!!

वो भी समझ गए पर अपनी मजबूरी इशारे से बताई और खाने में जुटे रहे तभी और प्लेट भी आ गई और मैं भी खाना डालने लगी. अब जब दाल ले पास पहुंची तो उसका चमच्च नही था  …  !!!वो व्यक्ति जो खाना खा चुके थे उन्होने मेरी दिक्कत समझी और खुद खाना खाकर मुझे चमच्च देने के लिए पूछा पर मैने मुस्कुरा कर मना कर दिया … आज इतने समय बाद, आज वही चमच्च वाले जानकार मिले और बीती बातें ताजा हो गईं  …!!! वो समय वो अंजाने थे पर अब मैं उनका अनुभव जानना चाह रही थी कि इतने बडे चमच्च से खाना खाया कैसे ??

smily photo

मुझे लगता है कि ऐसी मजेदार बातें हम सभी के साथ होती है इसलिए अगर आप भी अपनी बातें शेयर करेंगें तो बहुत अच्छा लगेगा …

February 6, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

रक्तदान और जागरुकता

रक्तदान और जागरुकताmonica surat
रक्तदान और जागरुकताmonica surat

रक्तदान और जागरुकता     monica surat

रक्तदान और जागरुकता

Blood Donation की जागरुकता  लोगो में बढ रही है और स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगो को जागरुक कर रहे हैं.

सुरत में पिछले दिनों सुरत रक्तदान केद्र और रिसर्च सैटर द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान कैम्प आयोजको की वर्कशाप का आयोजन किया गया

surat surat1

तमे केम छो

सूरत शहर के बारे में …

डायमंड और टेक्स्टाईल का शहर सुरत भले ही तीन बार बाढ और एक बार प्लेग का प्रकोप झेल चुका हो पर आज भी शान से खडा मुस्कुरा रहा है इसकी वजह ना सिर्फ यहा पर रहने वाले लोग है बल्कि प्रशासन और महानगर पालिका का भी विशेष सहयोग है. सभी का सहयोग मिलता है और मुसीबत जल्द ही छूमंतर हो जाती है ओह छू से याद आया… तमे केम छो… मजा मा…इतना ही नही यहां के लोगो को खाने का भी बहुत शौक है हर रविवार पूरा परिवार बाहर घूमने जाता है और ठेला हो या स्टाल सडक किनारे ही मजेदार जायके का आनंद लेता है.

खम्मणी,फाफडा,पात्रा,खांडवी,लोचा,खाकरा,इंदडा( बडी मुश्किल से नाम याद हुए वैसे कुछ नही भी हुए तो लिख लिए थे) खास भोजन है. वहा के लोग कहते है कि सुरत का जमण और काशी का मरण सब चाह्ते हैं.वैसे एक खाउ गली भी है वहां पर वहां जाना नही हुआ. कुल मिलाकर तापी और नर्मदा का शहर सूरत वाकई”खूबसूरत” है.सू छै !

 

surat3

 

 

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