Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 23, 2015 By Monica Gupta

सफलता की कहानी

 

ashok[1]

सफलता की कहानी

रक्तदान के क्षेत्र में एक प्रेरणा है अशोक कुमार

रक्तदाता श्री अशोक कुमार

रक्तदान से सम्बंधित एक कार्यक्रम चल रहा था. मीडिया, नेता, वक्ता, टीचर, डाक्टर आदि बहुत सज्जन मौजूद थे. सभी बहुत ध्यान पूर्वक कार्यक्रम सुन रहे थे तभी अचानक दरवाजा खुला और एक पुलिस वाले भीतर आए. उन्हे देख कर अन्य लोगो की तरह मेरे मन मे भी यही सवाल उठ रहा था कि यह यहां किसलिए आए हैं इनका यहां क्या काम है. इतने मे उन्हे स्टेज पर बुलाया गया. मैने सोचा कि स्पीच वगैरहा देकर चले जाएगे. पर स्पीच के दौरान सुना कि वो तो स्वयं रक्तदाता हैं और अभी तक 45 बार रक्तदान कर चुके हैं और 15 बार रक्तदान के कैम्प लगा चुके हैं. उनकी बातो से प्रभावित होकर मैने विस्तार से उनसे बात की.

सफलता की कहानी

उनका पूरा नाम है श्री अशोक कुमार. 3 सितम्बर सन 1972 मे जन्मे अशोक जी का जन्म हरियाणा के करनाल मे हुआ. पिता आर्मी मे थे. उन्होने सन 1962 और 1965 की लडाई भी लडी इसलिए बचपन से ही वो उनसे प्रेरित थे और बस एक ललक थी कि बडे होकर या तो आर्मी या पुलिस मे जाना है. कालिज मे जाने के बाद एनसीसी ज्वाईन कर ली थी. वैसे ना तो उन्हे सांइस और ना ही कामर्स का शौक था पर बडो के कहने पर उस विषय को लेना पडा. इससे पहले मैं कुछ और पूछती उन्होने बताया कि आज की तारीख मे उनके पास चार डिग्री बीकाम, एमकाम, एलएलबी और एलएलएम की हैं. फिर सन 98 मे वो पुलिस मे भर्ती हुए और आजकल हरियाणा के कुरुक्षेत्र मे वो फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट हैं.

रक्तदान के बारे मे अपने पहले अनुभव को उन्होने इस तरह से बताया कि सन 90 मे जब एनएसएस का कैम्प लगा था तब वो और उनके तीन चार दोस्त रक्तदान करने गए. तब अपने तीनो दोस्तो मे वो ही रक्तदान कर पाए और उनके दोस्त किसी ना किसी वजह से रक्त दान नही कर पाए. उस दिन इनमे एक अलग सा ही आत्मविश्वास आ गया और बस तभी से रक्तदान की शुरुआत हुई. एक और अच्छी बात यह भी हुई कि घर पर सभी ने शाबाशी दी और प्रोत्साहित किया. वैसे भी आर्मी मे समय बेसमय रक्त की जरुरत तो पडती ही रहती थी तब उनके पिता भी हमेशा आगे रहते. यही भावना उनके मन मे भी घर कर गई थी कि वो भी कभी भी जरुरतमंद को अवश्य खून दिया करेगें.

अब मेरे मन मे एक ही सवाल था कि पुलिस वालो के लिए अक्सर लोग बोलते है कि ये लोग तो खून पीतें हैं. इस पर वो मुस्कुराते हुए बोले कि यकीनन बोलते हैं और कई बार दुख भी होता है पर खुद काम अच्छा करते चलो तो कोई परेशानी नही आएगी. एक बार का वाक्या याद करते हुए उन्होने बताया सन 2010 मे जब उन्होने खून दान किया तो अखबार मे प्रमुखता से खबर छपी तो श्री सुधीर चौधरी (आईपीएस) ने भी यही बात की थी और शाबाशी भी दी थी कि बहुत अच्छा कार्य कर रहे हों. तब भी विश्वास को एक नया बल मिला था.

कोई मजेदार बात सोचते हुए उन्होने बताया कि जब भी वो कैम्प लगाते है कि जानी मानी शखसियत को बुलाते हैं. एक बार ( नाम नही बताया) जब उन्होने अपने कैम्प मे आने का निमत्रंण दिया तो पहले तो उन्होने सहर्ष स्वीकार कर लिया पर बाद मे बोले कि उन्हे रक्त देख कर ही डर लगता है इसलिए वो नही आ पाएगे. पर बहुत प्रयास और समझाने के बाद वो आए और पूरे समय कैम्प पर ही रहे पर रक्तदान के नाम से आज भी कतराते हैं.

अशोक जी ने बहुत गर्व से बताया कि आज की तारीख मे लगभग 1000 पुलिस विभाग के लोग उस मुहिम से जुडे हैं और वो जब भी खुद कैम्प आयोजित करते हैं ज्यादा से ज्यादा पुलिस को जोडते हैं ताकि समाज मे फैली धारणा को वो बदल सकें. समाज सेवा मे मात्र रक्तदान ही नही वो भ्रूण हत्या, वृक्षारोपण, सडक दुर्धटना मे घायल लोगो की मदद करना और गरीब बच्चो को छात्रवृति भी प्रदान करवाते हैं. आज की तारीख मे अशोक जी के पास दो नेशनल एवार्ड हैं. 15 स्टेट एवार्ड ,13 जिले व प्रशासन की ओर से मिले सम्मान और 23 एनजीओ की तरफ से मिले विशेष सम्मान मिले है जोकि बहुमूल्य हैं. मैं उनकी बातों से शत प्रतिशत सहमत थी.

अंत मे जब मैने पूछा कि जनता के लिए क्या संदेश है इस पर वो बोले कि एक कविता लिखी हैं. ये बात फिर चौका गई क्योकि पहली बात तो वो पुलिस वाले फिर रक्तदाता और फिर अब कवि भी. अपना संदेश उन्होने कुछ इस तरह से रखा….

आओ मिल कर कसम ये खाए

खून की कमी से ना कोई मरने पाए

जात पात और मजहब से उपर उठ कर

इंसानियत की जोत जगाए

हम तो है भारत वासी देख का गौरव ऊंचा बढाए !!!

अशोक जी इसी तरह रक्तदान की मुहिम को आगे बढाते रहॆं. आईएसबीटीआई परिवार की ओर से ढेरो शुभकामनाएं !!!!

सफलता की कहानी आपको कैसी लगी ?? जरुर बताईगा !!

मोनिका गुप्ता

September 22, 2015 By Monica Gupta

Audio-व्यंग्य बिजली जाने का सुख- मोनिका गुप्ता

Audio-व्यंग्य बिजली जाने का सुख- मोनिका गुप्ता

http://radioplaybackindia.blogspot.in/…/bijli-jane-ka-sukh-… लीजिए सुनिए … मेरा लिखा व्यंग्य मेरी ही आवाज मे … व्यंग्य है .. बिजली जाने का सुख ..

बिजली जाने का सुख …

 व्यंग्य बिजली जाने का सुख

 हैरान होने की कोई जरुरत नही, बिजली कटस को देखते हुए मैं इस नतीजे पर पहुंची हूं कि बिजली जाने के तो सुख ही सुख है.सबसे पहले तो समाज की तरक्की मे हमारा योगदान है भले ही वो अर्थ आवर ही क्यो न हो. और  बिजली नही तो बिल भी कम आएगा और उन पैसों से ढेर सारी शापिंग.

वृद्ध् लोग बिजली न होने पर हाथ का पखां करेगें तो कन्धों के जोडो की अकडन खुल जाएगी. घरो मे चोरी कम होगी कैसे ? अरे भई, बिजली ना होने की वजह से नींद ही नही आएगी जब सोएगें नही तो चोर आएगा कैसे..

 बिजली ना रहने से सास बहू के आपसी झगडे कम होगें दोनो बजाय एक दूसरे को कोसने के बिजली विभाग को कोसेगीं हैं इससे मन की भडास भी निकल जाएगी और मन को अभूतपूर्व शांति भी मिलेगी. बिजली न होने से दोस्ती भी हो जाएगी.

अब बिजली ना होने पर आप घर से बाहर निकलेगे अडोस पडोस मे पूछेगे लाईट के बारे में. फिर धीरे धीरे  जान पहचान होगी  और दोस्ती हो जाएगी. बिजली न होने की वजह से आप श्रृंगार  और वीर रस के  कवि या लेखक बन सकते हैं. ऐसे लेख निकलेगें आपकी कलम से कि बस पूछिए ही मत.और तो और आप जोशीले भी बन सकते है बिजली घर मे ताला लगाना, तोड फोड , जलूस की अगवाई में महारथ हासिल हो सकती है.बातें तो और भी है पर हमारे यहाँ 3घंटे से लाईट गई हुई है और अब इंवरटर में लाल लाईट जल गई है.

बिजली विभाग का फोन नो रिप्लाई  आ रहा है गुस्से मे मेरा बीपी बढ रहा है डाक्टर को फोन किया तो वो बोले तुरंत आ जाओ. अब ओटो का खर्चा, डाक्टर की फीस ,दवाईयो का खर्चा सभी के फायदे ही फायदे हैं और कितने सुख गिनवाऊँ बिजली जाने के.

 

Monica Gupta

Monica Gupta

Audio-व्यंग्य बिजली जाने का सुख- मोनिका गुप्ता

September 22, 2015 By Monica Gupta

नेता जी

कार्टून नेता (मोनिका ग़ुप्ता)

कार्टून नेता (मोनिका ग़ुप्ता)

नेता जी

कोई शक नही कि आजकल सभी डेंगू से डरे हुए हैं एक बाईट हालत खराब कर रही है. वही ये देखिए एक प्रतियोगिता हो रही है कि किसकी बाईट ज्यादा तेज…  नेता जी की या डेंगू मच्छर की …

किसमें कितना है दम !!!

नेता जी

September 22, 2015 By Monica Gupta

शराब और लडकियां

 

शराब और लडकियां

आज सुबह टीवी पर खबर देख कर मन खराब हो गया. अरे नही !! किसी  नेता के  बड बोले बयान नही देखे ?? उनसे तो मनोरंजन होता है मन खराब नही होता.. असल में, सुबह खबर देखी कि महिला शराब पी कर हंगामा कर रही थी और बहुत अंट शंट  बोल रही थी. खबर एक नही बल्कि तीन तीन थी. दो खबर देरहादून की थी और एक मुम्बई की. एक ने तो हद ही कर दी थाने में ही पुलिस के सामने  बोतल गटक रही थी. मेरा तो देख कर ही सिर शर्म से झुक गया … हे भगवन !! क्या होगा इस देश का !!  मुझे याद आई आज से तीन साल पहले की बात.. नेट पर एक फोटो देखी जिसमे तीन चार महिलाए बीयर की दुकान के बाहर खडी है और दो बीयर पी रही है.. मैने उस समय यह सोच कर सिर झटक दिया कि  ये सब ट्रिक होगी फोटोग्राफी की.. ऐसे थोडे ही ना होता है …

इसी बात के कुछ समय बाद लंच के लिए दिल्ली के जान माने होटल में गए. हमारे सामने एक यंग लडका लडकी आ कर बैठे. सामने ही बैठे  थे इसलिए उनकी आवाज भी साफ आ रही थी. लडकी ने वेटर से पहले शराब मगवाई.  फिर दोनो ने पी. हालाकि लडका बार बार मना कर रहा था.  लडकी ने दूसरी बोतल भी मगवाई. मुझे यह देख कर गुस्सा आ रहा था. इस पर मुझे  ही डांट भी पड गई कि कौन सी दुनिया में रह रही हो मोनिका .. ये तो यहां आम बात है … तू खाना खा आराम से … !!! थोडी देर में लडकी की आवाज ज्यादा तेज हो गई . लडका उसे कुछ समझा रहा था था और फिर  लडका  टुन्न हुई  लडकी को पकड कर  बाहर ले जा रहा था.

अगर ये कुछ साल पहले की बात है तो यकीनन अब तो बहुत तरक्की हो गई होगी  so called समाज में … लडकियां  और भी आगे निकल गई होगी… हैरानी की बात तो ये है कि अगर इस बारे मे हम टोके तो हम ओल्ड फैशन हैं. और अगर लडकी खुद बहक जाए और भगवान न करे इसके साथ कुछ गलत हो जाए तो उम्मीद करते हैं कि हम मोमबती ले कर सबसे आगे आए..

हैरानी है कि जहां बहुत गांव की महिलाए शराब की दुकान बंद करवाने के लिए धरने पर बैठी रहती है और समाज के ठेके दारों से भिड भी जाती हैं वही समाज का एक तबका ऐसा शर्मनाक भी है ..

          !!drink 1                                drink2

बेशक, बहुत पढ लिख गई हैं  लडकियां ,अपने पैरो पर खडी हो गई हैं पर प्लीज  शर्म करिए … अपनी मर्यादा न लांघे !!!

September 21, 2015 By Monica Gupta

बिहार इलेक्शन

बिहार चुनाव ( मोनिका गुप्ता)

बिहार चुनाव ( मोनिका गुप्ता)

बिहार इलेक्शन

बिहार इलेक्शन आए और गहमागहमी बढ गई… आरोप प्रत्यारोप बढ गया. सभी पार्टियां एक दूसरे पर दोषारोपण कर रही हैं जनता से किसी को कोई लेना देना नही!! आम आदमी को बस इलेकक्शन का ही आसरा है क्योकि उसके अच्छे दिन तो आते ही चुनावों में हैं कभी किसी पार्टी के पाले में तो कभी किसी पार्टी के पाले में ….

बिहार इलेक्शन

September 21, 2015 By Monica Gupta

रक्तदान के लिए प्रेरित कैसे करें

रक्तदान के लिए प्रेरित कैसे करें

रक्तदान के लिए प्रेरित कैसे करें – “Exploring motivational factors for altruistic blood donation” – निस्वार्थ भावना से रक्तदान के लिए प्रेरित करने वाले कारण – *रक्तदान है तो गंभीर विषय पर मनोरंजक ढंग से या कुछ इस ढंग से  अपनी  बात रखी जाए कि लोगो के दिल को छू जाए तब भी जनता में रक्तदान के प्रति जनता में जागरुकता आ सकती है.महिलाओ को रक्तदान की महत्ता समझा कर उन्हें प्रेरित करना… 

रक्तदान के लिए प्रेरित कैसे करें

जब मुझे यह विषय  डाक्टर कंचन की ओर  से मिला तो मैने तुरंत नॆट चला लिया और सोशल नेट वर्किंग साईट, फेसबुक और ब्लाग में खोजने लगी कि क्या क्या लिया जा सकता है

तभी मेरी नजर एक बात पर जाकर अटक गई. मै आपको जरुर बताना चाहूगीं. वैसे  ये बात रक्तदान से सम्बंधित नही है. मैनें पढा कि घर पर कूडा  कचरा  वाला आया तो बच्चे ने मम्मी को आवाज देकर कहा कि मम्मी कूडे वाला आया है तब पता है मम्मी ने क्या कहा  ? मम्मी ने कहा … नही बेटा ये तो सफाई वाला है कूडे वाले तो हम हैं जो हर रोज इसे कूडा देते हैं .बात मे बहुत दम था. मैं प्रभावित हो गई. उस महिला ने बहुत सही और समझदारी वाली बात कही. सच मानिए मुझे पहला पोईंट भी मिल गया.

 जी हां, मेरा पहला पोईंट है कि ज्यादा से ज्यादा  महिलाओ को रक्तदान की महत्ता समझा कर उन्हें प्रेरित करना.

Monica Gupta

रक्तदान के लिए प्रेरित कैसे करें  – Monica Gupta

 रक्तदान के लिए प्रेरित कैसे करें 

हम सब जानते हैं कि खून की कमी में हम महिलाए अव्वल नम्बर है अपने शरीर का ख्याल न रखने में महिलाए अव्वल है वही दूसरी ओर अपने परिवार में सभी का ख्याल रखने मे भी अव्वल नम्बर पर हैं और तो और अक्सर जब रक्तदान की बारी आती है तो अपने पति और बच्चों को लेकर बहुत संजीदा हो जाती है.

इसी बात पर मुझे एक उदाहरण याद आ रहा है जोकि एक साक्षात्कार के दौरान रक्त दानी हजारी लाल बंसल जी के बेटे ने बताया. उन्होनें बताया कि एक महिला के पति जोकि प्रोफेसर थे उनके पास रक्तदान के लिए फोन आया. प्रो साहब  ने पत्नी को बताया तो पत्नी का  चेहरा उतर गया खैर पत्नी को नाराज करके वो घर से निकल गए.रक्तदान केंद्र  गए तो एक व्यक्ति पहले ही वहां लेटा रक्तदान कर रहा था तो पति महाशय कुछ देर वहां बैठ कर बतिया कर चाय बिस्कुट खाकर आधे घंटे में घर लौट आए.

पत्नी जी बाहर ही खडी थी पति को देखते ही बोली ओह आप कितने कमजोर लग रहे हो चेहरा भी उतर गया है. आराम से आईए भीतर. पति ने जब समझाया कि ऐसी कोई बात नही उन्होने रक्त दिया ही नही सारी बात बताने पर पत्नी को बहुत झेप आई. यह किस्सा बताने का मतलब यही है कि  महिलाओ के मन से वहम निकाल कर रक्तदान के लिए  उन्हे प्रेरित करना होगा और अगर वो प्रेरित हो गई तो एक बात की गारंटी है कि किसी को भी जागरुक करने में अव्वल होंगीं अगर वो जागरुक हो गईं तो यकीनन देश से रक्त  की कमी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी.

*इसके साथ साथ हमेशा नए विचारो को महत्ता देनी चाहिए. युवा वर्ग  को सुनना चाहिए. खासकर बच्चे भी स्मार्ट फोन की तरह बहुत स्मार्ट हो गए है. वैसे इसी स्मार्टनेस पर फिर एक  छोटी सी कहानी याद आ रही है कि एक आदमी नाई से अपने बाल कटवा रहा होता है एक बच्चे को आता देख नाई आदमी से कहता है कि आपको कुछ दिखलाता हूं फिर नाई ने बच्चे को अपने पास बुलाया और अपने एक हाथ में 10 रूपए का नोट रखा और दूसरे में 2रूपए का सिक्का, तब उस लड़के को बोला “बेटा तुम्हें कौन सा चाहिए?” बच्चे ने 2 रूपए का सिक्का उठाया और बाहर चला गया।
नाई ने कहा, “मैंने तुमसे क्या कहा था ये लड़का कुछ भी नही जानता, बुद्दू है अगर समझदार होता तो दस रुपए ही उठाता. बाल कटवाने के  बाद  जब वो बाहर निकला तो उसे वही बच्चा दिखा जो आइसक्रीम की दुकान के पास खड़ा आइसक्रीम खा रहा था।“ उस आदमी ने बच्चे से पूछा कि  उसे दस और दो रुपए मे फर्क नही मालूम बच्चे ने अपनी आइसक्रीम चाटते हुए जवाब दिया, “अंकल जिस दिन मैंने 10 रूपए का नोट ले लिया उस दिन खेल खत्म। अगर मै 10 रुपए ले लूंगा तो आगे से वो मुझे आगे से कभी नही देंगें. बहुत समझदारी थी उसकी बात में.  तो पोईंट  यही है कि युवाओ के नए नए  विचारो को अपनाना चाहिए. इसी कडी स्कूलों  मे काम्पीटिशन और क्विज शो करवाए जाए या आन अलईन प्रतियोगिताए करवाई जाएं  ताकि बच्चे रक्तदान की महत्ता को जाने.

*इसी संदर्भ में अलग अलग जगह जाकर रक्तदान प्रदर्शिनी का आयोजन किया जाए ताकि अन्य राज्यो क्या हो रहा है हमॆं जानकारी मिलती रहे  और हम उससे बेहतर क्या अलग और नया कर सकें.

*जनता और ब्लड बैंक के बीच सीधा संवाद हो तो ना सिर्फ जनता जागरुक बनेगी बल्कि उसके ब्लड बैंक या रक्तदान से सम्बंधित जो भ्रंतियां हैं वो भी दूर होंगी जोकि बेहद जरुरी है और रक्तदान के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है.

*रक्तदान है तो गंभीर विषय पर मनोरंजक ढंग से या कुछ इस ढंग से  अपनी  बात रखी जाए कि लोगो के दिल को छू जाए तब भी जनता में रक्तदान के प्रति जनता में जागरुकता आ सकती है.

*इस क्षेत्र मे सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि हमें स्वैच्छिक रुप से रक्तदान  और जनता को भी प्रेरित करते रहना चाहिए भले की कोई सराहे या न सराहे. बस अपने कार्य मे निस्वार्थ सेवा से जुटे रहना चाहिए. सेवा से याद आया कि क्या आप जानते हैं कि “मैन आफ द मिलेनियम” कौन हैं. नही जानते !!! अच्छा रजनीकांत के बारे मे कितने लोग जानते हैं ह हा वो शायद सभी जानते हैं

मै आपको बताना चाहूगी कि रजनीकांत भी उन्हे अपना पिता मानते हैं. अब सोचिए कितने दमदार होंगें वो व्यक्ति. उनका नाम है पी. कल्याण सुंदरम. लाईबरेरी सांईस में गोल्ड मेडलिस्ट सुंदरम दक्षिण भारत के तमिलनाडू मे रहते हैं और पिछ्ले 30 सालो से अपनी सारी कमाई सामाजिक कार्यो मे लगा रहे हैं और रिटायर्मेंट के बाद जब पेंशन के दस लाख मिले तो वो भी समाज सेवा मे लगा दिए. अमेरिका सरकार ने उन्हे मैन आफ द मिलेनियम से नवाजा और 30 करोड रुपए भी दिए. वो भी इन्होने सेवा मे लगा दिए. आपके मन मे यह प्रशन भी आ रहा होगा कि खुद कैसे जीवन यापन करते तो एकाकी जीवन जीने वाले सुंदरम  पार्ट टाईम वेटर का काम करके अपना खर्चा चलाते हैं. ऐसे व्यक्तित्व प्रेरणा का स्रोत्र बनते हैं इसलिए हमे ऐसे लोगो से कुछ सीखना चाहिए और बस  निस्वार्थ भाव से सेवा करते रहनी  चाहिए.

 *कुछ ऐसे मरीज जिन्हें रक्त की जरुरत समय समय पर पडती रहती है ऐसे मरीजो के संदेश जनता तक पहुंचाने से भी लोगो में रक्तदान की भावना बढती है. जम्मू निवासी हीमोफीलिया के मरीज जगदीश जी हैं वो शिक्षक है और अपनी आधी तन्खाह हीमोफीलिया के मरीजो पर खर्च करते हैं वहीं मुम्बई से संगीता हैं जो थैलीसीमिया का सामना बेहद बहादुरी से कर रही हैं उन्होने थैलीसेमिया की वजह से अपनी बहन को खोने के बाद फेस, फाईट और फिनीश के नाम से इस बीमारी को जड से ही खत्म करने पर सराहनीय कार्य कर रही है यकीनन ऐसे लोगो के उदाहरण उनकी अपील भी नई दिशा दिखा सकती है.

*जो लोग इस क्षेत्र मे अभूतपूर्व काम कर रहे हैं उनसे जुडे रहना चाहिए और दूसरो को भी उनके बारे मे बताते रहना चाहिए. चाहे कोई व्यक्ति विशेष हो या पूरी टीम. व्यक्ति विशॆष की अगर मैं बात करु तो मैं कुछ ऐसे नाम जरुर लेना चाहूगी जोकि रक्तदान के क्षेत्र मे एक मिसाल है. दिल्ली डाक्टर संगीता पाठक, चंडीगढ से डाक्टर रवनीत कौर, श्री राकेश सांगर (पंचकुला) , ब्लड कनेक्ट टीम (नई दिल्ली) ,  श्री राजेंद्र महेश्वरी (भीलवाडा), श्री दीपक शुक्ला(जलगांव) , डाक्टर सोनू सिह (दिल्ली),  जगदीश कुमार (जम्मू) संगीता वधवा(मुम्बई) और बेहद सराहनीय कार्य कर रहें हैं. ये वो नाम हैं जब भी विभिन्न राज्यों से मेरे पास जब भी रक्त की जरुरत के लिए फोन आए और मैने इन लोगों को सम्पर्क किया तो इन्होने तुरंत अरेंज करवा दिया और मरीज को नया जीवन मिल गया . ना जाने कितने परिवारो के लिए ये हीरो और हीरोईन हैं और इन सबसे उपर  मेरे जीवन साथी संजय जी जिन्होनें मुझे हमेशा प्रेरित किया कि अगर रक्तदान नही कर सकती तो कोई बात नही लोगो को जागरुक और मदद तो कर ही सकती हो.ऐसे व्यक्तित्व का हमेशा हमे धन्यवादी होना चाहिए.

*और जैसाकि मैने शुरु में बताया था कि डाक्टर कंचन का फोन आते ही मैने नेट देखना शुरु किया. असल में, नेट के माध्यम से भी हमे रक्तदान के क्षेत्र मे ना सिर्फ देश की बल्कि विदेशो की भी नई नई जानकारी  मिलती रहती है इसलिए सोशल नेट वर्किंग साईटस भी देखना बहुत जरुरी है.

*अपना या अपनी संस्था का अच्छा सा प्रोफाईल बना कर भी लोगो का ध्यान आकर्षित किया जा सकता है. ताकि जनता को लगे कि सही मायनो मे कौन किस तरह से और कितना काम कर रहा है और अगर वो भी इस कार्य का हिस्सा बनना चाहे तो बन सकें. उसमे अपनी उपलब्धियां और विस्तार से जानकारी होनी चाहिए.

*होली, जन्मदिन, सालगिरह इत्यादि कुछ खास दिनो पर रक्तदान करके लोगो का ध्यान आकर्षित किया जा सकता है.

*अखबार या अन्य पत्र पत्रिकाओं में  रक्तदान से सम्बंधित अच्छे रंगीन लेखों के माध्यम से जागरुक किया जा सकता है.

* रक्तदान से सम्बंधित कार्टून बना कर भी समाज  मे जागरुकता लाई जा सकती है.

*जागरुक करने के लिए कोई ईवेंट किया जा सकता  हैं , कुछ हट कर कर दिखा सकते हैं ताकि जनता के मन मे जिज्ञासा बनी रहे. जैसाकि सूरत के अखिल भारतीय तेरापंथी युवक परिषद ने रक्तदान कैम्प लगाया था. जो कि अपने आप में ही एक रिकार्ड है. आईएसबीटीआई ने भी पिछ्ले साल 12 अगस्त को एक विशाल ब्लड ड्राप बना कर एक कीर्तिमान कायम किया. और इस तरह जैसे हर साल आईएसबीटीआई कांफ्रेस आयोजित करती है ऐसे की करती रहे ताकि नई नई बाते पढने सुनने और जानने का अवसर  मिलें

और सबसे जरुरी बात यह कि हमें खुद को टटोलना है लोगों की बातों मे आए बिना खुद को जागरुक बनाना हैं क्योकि

मसला ये भी है इस बेमिसाल दुनिया का
कोई अगर अच्छा भी है
तो वो अच्छा क्यूँ है !!!

Transcon 2014 पटियाला  के दौरान मेरे लेक्कचर के कुछ अंश ….

ISBTI

 रक्तदान के लिए प्रेरित कैसे करें

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