Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 21, 2015 By Monica Gupta

रक्तदान की महत्ता

रक्तदान की महत्ता 

रक्तदान ( मोनिका गुप्ता)

रक्तदान ( मोनिका गुप्ता)

 

इस बात मे कोई दो राय नही कि स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर आम जन में जागरुकता पहले की अपेक्षा बढी है और वो बढ चढ कर रक्तदान के लिए आगे आ रहे हैं पर इस बात से भी नकारा नही जा सकता कि इस क्षेत्र में बहुत सी ऐसी भ्रांतियाँ या जानकारी का अभाव है जिनकी वजह से लोगो के बढते कदम पीछे हट जाते हैं. तो ऐसे मे क्या तरीके अपनाए जिनसे ना सिर्फ लोग ही आगे आए बल्कि पूरे परिवार के साथ आकर अन्य परिवारों  को भी जागरुक करें.

सबसे पहले तो हमें खुद को ही  जागरुक करना होगा. जैसा कि अगर हम चाह्ते हैं कि रक्तदान के क्षॆत्र में शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदाता हो तो, ऐसे में, कुछ लोगो का कहना यह भी होता है कि ये कोई होने वाली बात है मतलब ही नही. सबसे पहले तो हमें ये नकारात्मक मानसिकता खत्म करनी होगी.विभिन्न उदाहरणों से लोगो को संतुष्ट करना होगा जैसाकि हाल ही मे देश से पोलियों खत्म हुआ है. जिसके बारे में सोचा भी नही जा सकता था तो ये सोचना कि यह असम्भव है सबसे पहले तो मन से यह विचार  निकालवाना होगा और फिर ये कैसे सम्भव है इस पर विचार करना आरम्भ करना होगा. इसके लिए सबसे जरुरी है कि हमारे पास रक्तदान से सम्बंधित बातों की जानकारी हो. अक्सर आधी अधूरी जानकारी के चक्कर में ना तो हम खुद और न ही दूसरो को मोटिवेट कर पाते हैं. यह जानकारी हमें  अपने अपने क्षेत्र के डाक्टर, रक्तदाता या ब्लड बैंक से विस्तार से मिल सकती है.

जानकारी मिलने के बाद हमें शुरुआत अपने ही घर से करनी होगी. हम सभी जानते हैं कि घर परिवार की मुख्य धुरी महिला होती हैं. आमतौर पर यह देखा गया है कि महिलाएं अपने पति या बच्चों के रक्तदान करने की बात तो दूर इस विषय पर चर्चा तक करना पसंद नही करती. इसका सीधा सीधा कारण है उनमें जानकारी का अभाव होना. बहुत से ऐसे उदाहरण मैने देखें हैं जिसमें पति पचास बार से भी ज्यादा बार  रक्तदान कर चुका है पर पत्नी को नही बताया या घर मे मां को नही बताया कि अगर बताया तो बहुत डांट पडेगी. जबकि ऐसा नही है. महिलाए सारे परिवार को बेहद समझादारी से सहेज कर रखती हैं ऐसे में बस जरुरत है कि रक्तदान के बारे मे विस्तार से समझाने की और उनकी सारी भ्रांतियाँ को दूर करने की. अगर वो समझ गईं तो  तो ना सिर्फ वो अपने घर परिवार के लोगो को जागरुक करेगी बल्कि खुद भी रक्तदान के लिए आगे आएगीं. वैसे अपवाद भी बहुत हैं इस क्षेत्र मॆ. समाज मे ऐसी भी महिलाए हैं जो रक्तदान की महत्ता समझती हैं पर इनकी गिनती बस ऊंगलियों पर ही है जबकि हमें इस संख्या को असंख्य करना है.

इसके साथ साथ देश के जाने माने रक्तदाताओं के साथ जनता की समय समय पर राष्ट्रीय स्तर या राज्य स्तर पर रुबरु मुलाकात करवाई जाए ताकि वार्तालाप के माध्यम से जनता के मन में जो भी विचार हैं वो सांझा किए जा सकें. कुछ समय पहले  रक्तदान के क्षेत्र में जबरदस्त कार्य कर रहे  देवव्रत राय साहब को तीन दिन की ट्रेनिंग के सिलसिले में पंचकुला आमंत्रित किया गया था. उनके अनुभवों ने जनता को प्रेरित करने के साथ साथ बहुत प्रभाव भी छोडा. उनका आना एक मील का पत्थर  साबित हुआ इसलिए समय समय पर ऐसे व्यक्तित्व  को आमंत्रित करते रहेंगें तो निसंदेह जनता की रक्तदान से सम्बंधित जानकारी भी मिलेगी और ज्ञिज्ञासाओं का समाधान भी होता रहेगा.

इस बात में कोई शक नही कि विभिन्न राज्यों के कुछ लोग निस्वार्थ भाव से रक्तदान के क्षेत्र में बहुत सराहनीय कार्य कर रहे हैं. टीम बना कर या ब्लाग के माध्यम से या फिर वेब साईट बनाकर अपने अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं. उनके काम करने के तरीके को, चित्रों या पोस्टर्स के माध्यम से प्रदर्शिनी रुप में लगाया जाएगा तो बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.

 कुछ खास मौकों पर रक्तदाताओं और उनके परिवारो को सम्मानित करते रहने से भी रक्तदान के प्रति उत्साह बढता है. मैने स्वयं अनेक कार्यक्रम ऐसे देखें हैं जहां मंच पर रक्तदाता परिवारों को बुला कर उनके अनुभव सांझा किए जाते हैं और उन्हें सम्मानित भी किया जाता है. इतना ही नही जिसने एक बार भी (खासतौर पर महिला) रक्तदान किया है उसके अनुभव भी पूछे जाते हैं और सम्मान देकर प्रेरित किया जाता है. यकीन मानिए इस तरह से उनका बोलना उन लोगो पर  बहुत प्रभाव डालता है जिन्होने एक बार भी रक्तदान नही किया.

जब हम परिवार की बात करते हैं तो मन में बुजुर्गों की छवि के साथ साथ बच्चों की छवि भी उभर कर आती है. बच्चें हमारे देश का भविष्य हैं. अगर हम नींव भी मजबूत बना देंगें तो आने वाले समय में जागरुकता खुद ब खुद बढ जाएगी. स्कूल के पाठय क्रम में या फिर एक स्पेशल क्लास इसी से सम्बंधित होनी चाहिए. छात्रो का  समय समय पर हीमोग्लोबिन चैक होना चाहिए ताकि बचपन से ही वो अपने स्वास्थय का ख्याल रखें.  नियमित चैकअप से खानपान के बारे मे जागरुकता भी बढेगी. खासकर लडकियां पौष्टिक  भोजन लेती रहेंगी और 18 साल के होते होते तक वो बेझिझक रक्तदान कर पाएगीं.

रक्तदान से सम्बंधित एक पत्रिका या अखबार निकले और उसमे पूरे देश के रक्तदान की मुहिम से जुडे लोगों के परिचय और उनका अनुभव हो तो इससे भी जागरुकता लाई जा सकती है. इसी के साथ साथ सोशल नेट वर्किग  साईट जैसे कि फेसबुक पर भी पेज बना कर पूरे देश से जुडा जा सकता है और नई नई जानकरी भी मिल सकती है.

कहने का आशय यह है कि जनता को, उनके परिवार को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति  प्रोत्साहित करने के सैकडो तरीके हैं बस जरुरी है कि हमारे भीतर की लग्न, एक जोश,एक जज्बा, एक कर्मठता को जगाने की. अगर वो जाग गया तो हमें अपने मकसद से कामयाब होने से कोई ताकत नही रोक सकती.

रक्तदान की महत्ता लेख  आपको कैसा लगा ?? जरुर बताईएगा !!! 

September 20, 2015 By Monica Gupta

पति, पत्नी, एवरेस्ट और चांटा

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पति, पत्नी, एवरेस्ट और चांटा

दिन पहले खबर पढी थी कि पाकिस्तान में काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी सीआईआई ने अपने महिला संरक्षण विधेयक में एक अजीबो-गरीब प्रस्ताव दिया है। यदि पत्नियां अपने पति की अवज्ञा करती हैं तो पाकिस्तानी पति उनकी थोड़ी सी पिटाई कर सकते हैं।

आईआई ने सुझाव दिया है कि अगर महिला हिजाब नहीं पहनती है, तब भी उसकी पिटाई की इजाजत दी जानी चाहिए। इसके अलावा अपरिचितों से लगाव रखने और इतनी ऊंची आवाज में बात करने कि कोई अपरिचित उसे सुन ले तो भी उसकी हल्की पिटाई होनी चाहिए। पत्नी अगर पति से बिना पूछे दूसरों को पैसे देती है तो भी पति को पिटाई की इजाजत मिलनी चाहिए..

 

पाकिस्तान की संस्था ने महिलाओं की सुरक्षा पर पेश विधेयक में कहा- पत्नी बात नहीं माने तो पीट सकते हैं | Jansatta

read more at jansatta.com

 

मैं सोच ही रही थी कि इस पर अपनी क्या प्रतिक्रिया लिखू तभी एक इस पुरानी खबर पर नजर चली गई और मैं चुप हूं … आप भी पढिए किसलिए !!

कई बार बहुत बाते मिसाल बन जाती हैं एक ऐसी ही मिसाल बने ये हरियाणा के दम्पति …इन्होंने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने में सफलता हासिल की है। ऐसा कारनामा करने वाला यह पहला भारतीय जोड़ा है बात  30मई 2011 की है.

ऐवरेस्ट पर एक हरियाणा के दम्पंति ने परचम लहराया. बहुत खुशी हुई और जान कर हैरानी भी हुई कि पत्नी जोकि कांटेबल है जब चढाई के दौरान वो घबरा गई तो उसने वापिस जाने की जिद ठान ली ऐसे मे उसके पति ने उसे जागरुक करने के लिए एक थप्पड रसीद कर दिया और उसी की बदौलत वो चढी और चोटी पर झंडा फहराया.

बेशक ये थप्पड सफलता का थप्पड साबित हुआ पर जिस तरह से हम पिटाई की निंदा करते हैं क्या इस पिटाई की भी निंदा की जानी चाहिए या तारीफ …

स्कूली दिनो मे भी हमे डंडा या थप्पड मारते टीचर अभी तक याद है.कई बार मार जरुरी हो जाती है पर आजकल समय बदल गया है.अब तो हाथ उठाते ही नौकरी से ही निकाल देते है  तो कही कोई एवरेस्ट पर ही जीत हासिल कर लेता है !!!

एवरेस्ट

September 20, 2015 By Monica Gupta

फेसबुक लाईक

 

कार्टून  लाईक बटन ( मोनिका गुप्ता)

कार्टून लाईक बटन ( मोनिका गुप्ता)

 

 

फेसबुक लाईक

फेसबुक के साथ साथ फेसबुक लाईक और डिसलाईक का भी क्रेज है. अब इन भिखारी जी को ही देखिए … जिसने भी  भीख दी लाईक कर दिया

 

How To Gain More Facebook Like – Lifestyle

फोटो का इस्‍तेमाल करें फेसबुक पर अपनी बात को इमेज के साथ पोस्‍ट करें. ऐसा पाया गया है कि साधारण टेक्‍स्‍ट की तुलना में तस्‍वीर के इस्‍तेमाल से पोस्‍ट हुई चीजों पर 53 फीसदी ज्‍यादा लाईक करते हैं. ऐसे पोस्‍ट पर लोग 104 फीसदी ज्‍यादा कमेंट करते हैं और इस तरह की पोस्‍ट के थ्रू 84 फीसदी ज्‍यादा क्लिक की संभावनाएं भी होती हैं.80 कैरेक्‍टर तक मैटरफेसबुक पर पोस्‍ट करते टाइम टेक्‍स्‍ट मैटर का ख्‍याल रखें. कम से कम शब्‍दों का इस्‍तेमाल करें.

ऐसा देखा गया है कि 80 कैरेक्‍टर तक लिखे पोस्‍ट पर 66 फीसदी ज्‍यादा लोग समय बिताते हैं. ज्‍यादा शब्‍दों के इस्‍तेमाल होने पर उस पोस्‍ट को देखते ही लोग आगे बढ़ जाते हैं. भले ही वह कितना भी इंट्रेस्टिंग क्‍यों न हो.सवाल पोस्‍ट करेंऐसा पाया गया है कि किसी सवाल के पोस्‍ट करने पर 100 फीसदी ज्‍यादा रिस्‍पांस देखने को मिलता है. अपने फेसबुक पेज पर ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को इंगेज करने के लिए आप कोई सवाल पोस्‍ट कर सकते हैं.

सवाल लोगों के मन में कौतूहल पैदा कर देता है और हर यूजर इसका जवाब देना चाहता है.पोस्‍ट के टाइम का ध्‍यान रखेंऐसा देखा गया है कि सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक फेसबुक पर लोग एक्टिव रहते हैं. इसमें भी दोपहर के टाइम ज्‍यादा चहल-पहल रहती है.

दोपहर के बाद शाम 3 बजे फेसुबक का पीक टाइम होता है. इस टाइम पर सबसे ज्‍यादा यूजर एक्टिव रहते हैं. यानी शाम 3 बजे के आसपास पोस्‍ट करने पर लोग ज्‍यादा रियेक्‍ट करते हैं.रोजाना दो बार अपडेटरोजाना एक या दो बार स्‍टेटस अपडेट करने पर आपको 40 फीसदी ज्‍यादा रिस्‍पांस मिल सकता है. वहीं यदि आप वीक में एक से चार बार स्‍टेटस अपडेट करते हैं तो आपको 71 फीसदी ज्‍यादा रिस्‍पांस देखने को मिल सकता है. यहां 40 फीसदी रिस्‍पांस प्रतिदिन और 71 फीसदी पर वीक है, इस डाटा से कंफ्यूज न हों. How To Gain More Facebook Like – Lifestyle

September 20, 2015 By Monica Gupta

बरसात

satire by MonicaGupta

 

बरसात

आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड दिया… कभी वो दिन भी थे जब बरसात आने पर खुशियां मनाई जाती थी. पकवान बनाए जाते थे पर आज वो बात नही आज के सन्दर्भ में बात करें तो गंदगी इतनी है कि डेंगू भरपूर पनप रहा है और बीमारी फैला रहा है वही सीवर की हालत इतना खस्ता हो चली है कि बाहर का पानी घरों में घुस जाता है और सारा घर गंदा हो जाता है चलिए ज्यादा कुछ नही कहूंगी आप पढिए … बरसात पर लेख

September 20, 2015 By Monica Gupta

प्यारा परिवर्तन

लेख मोनिका गुप्ता

लेख मोनिका गुप्ता

प्यारा परिवर्तन

लेख दैनिक नभ छोर में प्रकाशित हुआ

September 20, 2015 By Monica Gupta

बिजली का महत्व

बिजली का मह्त्व ... व्यंग्य (मोनिका गुप्ता)

बिजली का महत्व … व्यंग्य (मोनिका गुप्ता)

बिजली का महत्व

हमारी जिंदगी मे बिजली का बहुत मह्त्व है. ये रहे तो भी और न रहे यानि कट लगते रहे तो भी … ज्यादा हैरान होने की जरुर नही है … अगर आप ये लेख पढेगें तो सब समझ आ जाएगा . लेख का शीर्षक है बिजली रानी तुम कब जाओगी !!!

 

बिजली जाने का सुख – बिजली का महत्व

बिजली का महत्व

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