Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 11, 2015 By Monica Gupta

ऐसे ही हैं हम

cartoon run

ऐसे ही हैं हम ….भ्रष्टाचार, महंगाई, खराब सडके, लच्चर नियम और इन सब मे ऊंचे चिल्लाते लाऊडस्पीकर कि… आ गया, आ गया आपका भाई… बेटा.. हमे वोट दीजिए और आपके शहर की काया पलट जाएगी. मैने निश्चय कर लिया था  कि आने दो घर पर वोट मांगने… मैं भी देखती हूं…. !!! तभी बाहर शोर की आवाज तेज हो गई. बाहर मीठी मुस्कान लिए हाथ जोडे उम्मीदवार खडे हुए थे. मैने नमस्कार का जवाब दिया और तुनक कर बोली   कि क्या सोच कर वोट मांगने आए हो. क्यू और किसलिए वोट दें आपको. हालात देखें हैं क्या आपने? मेरा वोट नोटा को जाएगा. कोई किसी लायक नही है. बस अपना मतलब निकालने मे लगे हुए आम जनता को बुदू बना रहे हैं और वो बन रही है.

वहां एकदम सन्नाटा छा गया. मैने धाड से दरवाजा बंद किया और भीतर आ गई. तभी बहुत जोर से डोर बेल हुई. मैं अचानक चौक कर उठी. अरे ये सब सपना था. झांक कर  बाहर देखा तो पार्टी के उम्मीदवार हाथ जोडे मोहक मुस्कान लिए खडे थे. मैं तुरंत उठी और बाहर आई. उनका अभिवादन स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए कहा आप चिंता न करें . अजी… हमारा वोट आपके लिए ही है. आईए चाय पीकर जाईए. उनके मना करने पर मैं बोली हमारे लायक कोई काम हो तो जरुर बताईगा और उनकी पार्टी का स्टीकर बहुत खुशी से अपने घर के आगे चिपकवा दिया और दो तीन लेकर भी रख लिए ताकि मैं भी पार्टी मे योगदान दे सकूं स्टीकरों को बांट सकूं… जागो मतदाता जागो !!!

( ऐसे ही है हम तभी देश भी ऐसे ही चल रहा है)

 

August 10, 2015 By Monica Gupta

आपरेशन अशिष्टाचार

आपरेशन अशिष्टाचार

operation cartoon copy

जिस तरह दिल्ली में आपरेशन शिष्टाचार ने गति पकडी हुई है ठीक वैसे ही एक अन्य आपरेशन अशिष्टाचार भी अपनी पकड बनाए हुए है अगर आप जाना चाहे तो कृप्या अपने रिस्क पर ही जाए … आपरेशन अशिष्टाचार चालू आहे !!! आह !!!

 

August 10, 2015 By Monica Gupta

कार्टून प्लेकार्ड

cartoon on sansad by monica gupta

प्लेकार्ड

21 जुलाई यानि जब से मानसून सत्र आरम्भ हुआ है तब से कोई कार्यवाही ही नही हुई … जिस कारण अनेकों बिल अटके पडे  हैं पर सांसदों को कोई चिंता नही बस अपना कभी काला कपडा बांध कर विरोध करते है तो कभी प्लेकार्ड दिखा कर …

| Zee News Hindi

नई दिल्ली : मानसून सत्र के अंतिम दिनों में भी संसद में गतिरोध खत्म होने के आसार नहीं हैं क्योंकि कांग्रेस ने रविवार को ललित मोदी और व्यापम मुद्दों पर अपने रुख में किसी ढिलाई के कोई संकेत नहीं दिए और ‘अपशब्दों की राजनीति’ के लिए भाजपा की आलोचना की।

सत्तारूढ़ पार्टी ने भी कांग्रेस पर यह कहते हुए अपने हमले की धार तेज कर दी कि इसने सत्र के दौरान ‘बाधाकारी और विध्वंसक’ भूमिका निभाई है क्योंकि यह ‘राजनीतिक रूप से दिवालिया’ हो गई है। See more…

August 9, 2015 By Monica Gupta

राधे राधे

 

cartoon on radhey ma by monica gupta

राधे राधे …

अक्सर जब बडे बुजुर्ग मिलते हैं तो राम राम या राधे राधे करते हैं … ये उनके अभिवादन का तरीका है पर जिस तरह से आज कल इन ढोगी बाबाओ या देवियों की पोल खुल रही है जनता का इन पर से विश्वास ही उठता चला जा रहा है … बेशक अफसोसनाक बात है कि हम लोग पढे लिखे होकर भी ऐसी बातों को बढावा देते हैं और सबसे ज्यादा न्यूज चैनल पर हैरानी है कि अच्छी भली खबरे छोड कर, मात्र टीआरपी बढाने क्योकि खबर मे  अश्लीलता रुपी ग्लैमर का तडका जो लगा है , पीछे पडा है …

 

 IBN Khabar

राधे मां पर आरोप लगते रहे है कि वो सिर्फ आशीर्वाद देने में ही नहीं, बल्कि तंत्र मंत्र में भी निपुण हैं। बताया जाता है कि मुकेरिया में डकोर खालसा के बैरागी संत बीरमदास के संपर्क में आने के बाद उन्होंने तंत्र-मंत्र में अपना ज्ञान बढ़ाया। मुंबई पहुंचने से पहले मुकेरिया में गुरबत के दिन काट रहीं, राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर उर्फ पप्पू लोगों की समस्याएं दूर करने के लिए तांत्रिक क्रियाएं भी करती थीं। इसी तंत्र-मंत्र और तांत्रिक क्रियाओं ने उन्हें ख्याति दिलाई और मुंबई का रास्ता दिखाया। Via ibnlive.com

 

  ABP News

पंजाब के बिजली विभाग में काम करने वाले सरदार अजित सिंह के घर तीन मार्च 1969 को राधे मां का जन्म हुआ था. बचपन में राधे मां को घर वाले प्यार से गुड़िया बुलाया करते थे लेकिन जब उनका दाखिला गांव के ही स्कूल में करवाया गया तो उनका नाम बदलकर सुखविंदर कौर रख दिया गया था. दोरांगला के गवर्मेंट एल एस एम सीनियर सेकेंडरी स्कूल से राधे मां ने दसवीं तक की पढ़ाई की है. राधे मां को बचपन के दिनों से जानने वाले उनके भक्त विवेक पाठक उनके स्कूल की ये कहानी कुछ इस तरह बयान करते हैं.

दोरांगला के मोहल्ले की गलियों में राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर का बचपन खेलते कूदते हुए गुजरा है. राधे मां को करीब से जानने वाले बताते हैं कि बचपन से ही उनका मन धार्मिक कामों में ज्यादा लगता था. राधे मां के पिता का ये दावा भी है कि बचपन में राधे मां उनके घर के सामने बने मंदिर में अपना ज्यादातर वक्त गुजारा करती थी. राधे मां के परिवार के करीबी रहे विवेक पाठक बचपन के अपने दिनों को याद कर बताते हैं कि सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां कम उम्र से ही भविष्यवाणियां भी करने लगी थी.

Read more…

August 9, 2015 By Monica Gupta

हिल स्टेशन यात्रा -एक अनुभव

hills photo

Photo by diana_robinson

 

हिल स्टेशन यात्रा -एक अनुभव

एक हिला देने वाला अनुभव … जी हां मैने भी की हिल स्टेशन यात्रा… क्या ??? आपको विश्वास नही हो रहा ??? क्या मैं पूछ सकती हूं कि विश्वास न करने की क्या वजह है ??? फोटो ??? ओह … हां !!! ये तो सच है कि  कोई फोटो नही डाली पर इसका मतलब यह भी नही की हम गए ही नही… !!! असल में, कैमरा तो था पर तस्वीरे ली ही नही.. कैमरा बैग में ही पडा रहा.

बात ये हुई कि वैसे तो हम हिल स्टेशन पर जाते ही रहते हैं… अरे हां सच में … जाते रहते हैं … अब आपने बात सुननी है या मैं न बताऊं … ठीक है … तो मैं कह रहे थी कि वैसे तो हम हिल स्टेशन पर जाते ही रहते हैं  पर अब की बार जो अनुभव हुआ वो कभी नही भूलेगा. हुआ ये कि हर बार की तरह इस बार हम अपनी कार में नही गए उसके बजाय बडी गाडी यानि कैब  कर ली ताकि सपरिवार जाए और खूब मस्ती करें.कार बुक करवा दी और वो समय पर पहुच भी गई. हमने सारा सामान कार मे भरा और चल पडे मस्ती भरे सफर में पर अब ये बनने वाला था अंग्रेंजी वाला सफर … Suffer…

कार का ड्राईवर बहुत अच्छा था . सुबह सवेरे उसने चलने से पहले कार मे लगी भगवान की फोटो को प्रणाम किया और धूप बत्ती की. फिर भक्ति वाले गाने भी चला दिए … सुबह सवेरे एक दम खाली सडक थी और वो 30 की स्पीड से कार चला रहा था. रिक्शा भी आराम से हमे ओवरटेक कर सकती थी. खैर, जब उससे थोडी तेज चलाने को कहा गया तो वो बोला कि वो अभी रास्तों के लिए नया है इसलिए हमने भी कुछ नही कहा … कार आराम आराम से चलती रही … पर जो लोग ड्राईव करते हैं यकीनन वो इतनी धीमी गति शायद सहन नही कर सकते.. खैर जैसे तैसे आगे बढते रहे और जब बातो बातों में उसने ये बताया कि उसका ये पहला अनुभव है पहली बार कार लेकर निकला है तो हमने सोचा  बस … अब तो गए काम से !!!  क्योकि उसकी सबसे बडी वजह ये थी कि कई बार लगता था उसमें आत्मविश्वास ही नही है तो कई बार लगता उसमे भरपूर आत्मविश्वास है इतना आत्मविश्वास है कि हमारा ही डममगा रहा था क्योकिं खाली सडक पर बिल्कुल  धीमी गति  से चलाता और जब किसी वाहन को ओवरटेक करता तो इतनी तेज की लगता अब ठुकी कार…. तब ठुकी !!!

सांस रोक कर और  हम आखे फाड फाड कर उसकी ड्राईविंग  देखते रहे और बोलते रहे अब धीरे करो अब तेज करो …  एक बार तो उसे झपकी भी आने को हुई तो हमने कहा कि कार रोक कर आराम कर लो तो भी उसने मना कर दिया. जब हमने उससे ये कहा कि कार हम चला लेंगें तो भी उसने इंकार कर दिया कि अगर कुछ हो गया तो … कौन भरेगा…!!! मेरे मन में आया कि कह दूं कि और हमे कुछ हो गया तो उसकी भरपाई कौन करेगा !!! पर चुप रही… !!!

आगे जाकर सामने से धुमावदार रास्ता शुरु हो रहा था.. वो हैरान रह गया कि ये कैसी सडक है … हमने कहा कि कैसी क्या ??? पहाडी रास्ता है … इस पर वो बोला अरे ऐसा कैसा होता है … यानि की वो कभी पहाड पर गया ही नही था उसने तो पहाड ही पहली बार देखा था…  हे भगवान !!! ..हमारी सिट्टी पिट्टी गुम की होगा क्या … एक बार दुबारा ट्राई किया कि हम को कार दे दो हम चलाते है इस पर फिर उसने मना कर दिया कि फिर वो सीखेगा कैसे….. मानो सारा सीखना यही से ट्राई करना है … सांस रोकर कार मे बैठे रहे… वही एक साईड का शीशा बंद ही नही हो रहा था … मौसम की ठंड और भीतर की गरमी जबरदस्त तूफान पैदा कर रही थी… जिस तरह से उसकी ड्राईविंग थी….  मैं…  मैं तो यहां तक सोचने लगी थी कि कल अखबार की हैड लाईन क्या होगी … कार  50 फुट  गहरे खड्डे में गिरी. परिवार के सभी लोग …. !!! रास्ते के साईन बोर्ड मुंह चिढा रहे थे कि आपकी यात्रा सुखद हो और घर पर आपका कोई इंतजार कर रहा है…

जैसे तैसे करके हिल स्टेशन पहुंचे और कार से उतर कर जान में जान आई … और तुरंत  होटल के कमरे मे ही धुस गए. हिम्मत ही नही थी कि सैर करने जाए .. वही वापसी की भी चिंता थी क्योकि पहाडों से उतरते वक्त और  ज्यादा सावधान रहने की जरुरत होती है … उसे बहुत मनाया कि कार हम लोग चला लेंगें पर उसने मना कर दिया. एक बार मन किया हम दूसरी टैक्सी कर लेते हैं पर बुकिंग इतनी ज्यादा थी कि अगले हफ्ते ही  टैक्सी मिल पाती.

खैर,  दिन बीता और  हम कही धूमने नही निकले… मन ही नही कर रहा था. और हमारा वापिस जाने का समय आ गया.  बस भगवान से यही प्रार्थना थी कि सकुशल पंहुचा दे…  धडकते दिल से हम कार मे बैठे और एक दूसरे के हाथ कस कर पकड रखे थे. कोई देवी या देवता का स्मरण करना नही छोडा … अम्मा ने तो व्रत भी बोल दिए और जीजी ने प्रसाद … !!!रास्ते में बारिश भी थी और धुंध भी … बस उतरते  ही जा रहे थे उतरते ही जा रहे थे…  सांस में सांस तब आई जब हम घर के आगे खडे थे. फटाफट कार से सामान निकाला . जान बची सो लाखो पाए …

फिर उसका हिसाब किताब करने बाहर आए तो फिर धूप बत्ती कर रहा था बोला भगवान बहुत ग्रेट है उसने बहुत रक्षा की … मैने वाकई मे , कार मे लगी भगवान जी की फोटो को प्रणाम किया कि रक्षा इन्होने ही की वरना अपना प्रोग्राम तो पक्का ही था उपर जाने का …

पर जाते जाते मैं उसे इतना जरुर बोली कि थोडी प्रैक्टिस और करो … खासकर किसी कार को ओवर टेक करते समय स्पीड का ध्यान रखना जरुरी होता है वो बोला कि जिसने उसे सिखाई वो भी यही बोलता था इसलिए उसने उससे सीखना ही छोड दिया था … मेरे पास अब कहने को कुछ नही बचा और तुरंत घर दौड गई…

अब तो कसम ही खा ली कभी टैक्सी नही करेगें अपनी कार से ही जाएगें कम से कम एंजाय तो कर सकेंगें …इस हिल स्टेशन की यात्रा ने तो पूरा ही हिला कर रख दिया …  वैसे आपको एक बात बताऊ कि तस्वीर एक दो तो ली थी पर शक्ल इतनी धबराई हुई और चेहरे से मुस्कान नदारद थी इसलिए डाली ही नही कि कही आप लोग डर ही न जाए !!!

ऐसा अनुभव आप के साथ कभी न हो … शुभकामनाएं !!!!

 

August 8, 2015 By Monica Gupta

लाल खून काला कारोबार

blood-donate
blood donate photo

Photo by jonklinger

लाल खून काला कारोबार

रक्तदान महादान है और हम सभी को रक्तदान करना चाहिए.. रक्तदान करना और रक्तदान के लिए प्रेरित करना अच्छा लगता है . ये एक सामाजिक कार्य है जिसमे युवा वर्ग की भागीदारी आवश्यक है…

क्योकि मैं खुद भी रक्तदान से जुडी हुई हूं इसलिए रक्तदान से जुडी हर खबर हमेशा मुझे आकर्षित करती है पर आज  जब इसी संदर्भ में खबर पढी और यकीन मानिए  खबर जरा भी अच्छी नही लगी … आप भी सोच रहे होंगें कि ऐसा क्या हुआ … खबर अच्छी ना लगने का सबसे बडा कारण था कि रक्तदाता  नाबालिग थे यानि 18 साल से कम उम्र के थे… जी सही पढा … नाबालिग …  और रक्तदान करते  थे या करवाया जाता था जिसके उन्हे पैसे मिलते … यानि रक्त बेचते थे … 500 रुपये उन्हें मिलते और 500 दलाल को … खबर ने सन्न कर करके रख दिया ना  आपको भी … मैं भी ऐसे ही सन्न हो गई जब टीवी पर खबर देखी और फिर नेट पर  पढी .

खबर लखनऊ की है … चौक का कोहली ब्लड बैंक, नाबालिग बच्चों को पैसे का लालच देकर उनसे खून लेने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप में शुक्रवार को सील कर दिया गया.  बच्चों की गरीबी का फायदा दलालों ने उठाया.  43 नाबालिग बच्चों को प्रोफेशनल डोनर बना दिया गया. इतना ही नही इनमें महिलाए यानि लडकियां  भी शामिल है …  पकडे जाने पर  इन लड़कों ने पुलिस को बताया कि चार दलाल उनसे खून देने का काम कराते थे.  इतना ही नही  ये दलाल  गरीब परिवारों के 43 युवकों का हर माह कई बार खून निकलवाते थे.

सुनकर दिल धक से रह गया मानो खून ही जम गया हो … मैं बहुत लोगों को जानती हूं जो रक्तदान के क्षेत्र मे अभूतपूर्व काम कर रहे हैं और जनता को रक्तदान के प्रति प्रेरित भी कर रहे हैं .. ऐसी खबरों से अभियान को कितना बडा धक्का लगता है क्योकि  लोगों को प्रेरित करना वैसे भी बहुत मुश्किल होता है और तो और रक्तदान के प्रति लोगों में भ्रांतिया भी बहुत तरह की होती है ऐसे में ऐसी खबर का आना बेहद सन्न करने वाला है …

 

43 boys in the business of blood removed – Navbharat Times

लखनऊ पुराने शहर में 43 लड़कों को चंद रुपये का लालच देकर खून के कारोबार में उतार दिया गया। बड़ी बात यह है कि इनमें ज्यादातर नाबालिग हैं। कोहली ब्लड बैंक में खून देने वाले तीन नाबालिगों ने पुलिस पूछताछ में यह बात कबूली है। इन लड़कों ने पुलिस को बताया कि चार दलाल उनसे खून देने का काम कराते थे। ये दलाल गरीब परिवारों के 43 युवकों का हर माह कई बार खून निकलवाते थे। चौक इंस्पेक्टर आईपी सिंह ने बताया कि कोहली ब्लड बैंक में खून देने वाले किशोरों ने कबूला है कि उनको गजनी, राहुल, अमर और एक अन्य शख्स पैसों का लालच देकर ब्लड बैंक ले जाता था। इन चारों आरोपितों ने 43 लड़कों को प्रोफेशनल डोनर बना दिया। पुलिस को तीनों किशोरों ने सभी 43 लड़को के नाम भी बताए हैं। इनमें ज्यादातर किशोर हैं, जिनको खून के धंधे में शामिल किया गया है। पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। महिलाएं भी प्रफेशनल डोनर कोहली में खून बेचने वाले किशोरों ने कई महिलाओं के नाम भी बताए हैं, जो प्रफेशनल डोनर हैं। इनको 700 रुपये प्रति यूनिट पर दिया जाता था। ये महिलाएं वजीरगंज की बताई जा रही हैं। पुलिस इन महिलाओं से भी पूछताछ कर पूरे रैकेट तक पहुंचने की तैयारी में है। आप यहां दें सूचना Read more…

Taking blood from children, Kohli Blood Bank seal – Navbharat Times

लखनऊ चौक का कोहली ब्लड बैंक, नाबालिग बच्चों को पैसे का लालच देकर उनसे खून लेने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप में शुक्रवार को सील कर दिया गया। कुछ स्थानीय युवकों से मिली जानकारी के आधार पर सीएमओ की टीम ने छापेमारी के बाद यह कार्रवाई की। ब्लड बैंक की कारस्तानी का खुलासा होते ही स्थानीय लोग भड़क गए और ब्लड बैंक में तोड़-फोड़ शुरू कर दी। तनाव बढ़ने पर पुलिस के अलावा पैरा मिलिट्री फोर्स को भी मौके पर बुलाना पड़ा। दलाल दिलवाते थे पैसा चौक में मोबाइल शॉप में काम करने वाले अनंत अग्रवाल और शिवा साहू ने बताया कि उनकी दुकान पर उनके मोहल्ले के कुछ नाबालिग बच्चे शुक्रवार को ब्लड देने के बदले रुपये लेने की बात कर रहे थे। उन्होंने बच्चों से पूछताछ की तो पता चला कि कोहली ब्लड बैंक में खून देने के एवज में 500 रुपये दिए जाते हैं। शिवा के अनुसार, बच्चों ने दर्जी पार्क में रहने वाले पांच लोगों के नाम बताए जो उन्हें ब्लड बैंक ले जाते हैं।

 नियमत: 18 साल से कम उम्र का शख्स रक्तदान नहीं कर सकता। तीन अरेस्ट पुलिस ने मौके से कोहली ब्लड बैंक के कार्यप्रभारी वीके भटनागर, लैब टेक्नीशियन विजय प्रकाश और कर्मचारी संतराम यादव को अरेस्ट किया है। इन पर धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज रखने, कागजों से छेड़छाड़ करने और ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।  Read more…

ऐसे दलाल और ऐसे ब्लड बैंक समाज मे काल धब्बा है जिन्हे कडी से कडी सजा दी जानी चाहिए…

लाल खून काला कारोबार

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