Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 6, 2015 By Monica Gupta

धारावाहिकों के किरदार

 

tv serial indian photo

Photo by jepoirrier

 

धारावाहिकों के किरदार

एक जानकार को डिनर पर आमत्रित करने के लिए फोन किया तो उन्होने कहा कि वो साढे नौ बजे के बाद  ही घर से चलेगें क्योकि वो अपना पसंदीदा सीरियल छोड नही  सकते. वैसे ये कहानी घर घर की है पर मेरा मानना ये है कि  टीवी  सीरियल सीरियसली कभी नही देखना चाहिए क्योकि ना सिर्फ मुख्य किरदार कभी भी बदल सकते हैं बल्कि  कहानी 10- 20 साल तक भी आगे जा सकती है और तो और  पूरी  कहानी ही बदल सकती है … कुछ समय पहले एक सीरियल आता था लौट आओ तृष्षा … कहानी हट कर थी इसलिए देखना शुरु किया .. इस मे वो बच्ची भी थी जो बजरंगी भाईजान मे थी.

खैर, देखते ही देखते अच्छी खासी सस्पैंस वाली कहानी  बिल्कुल ही बदल गई. फिर उसमे अलग अलग  कोर्ट केस ही रह गए  जिसका पहले की कहानी से कोई लिंक ही नही था और केस भी ऐसे जो हर बार नई कहानी लेकर आते  जैसाकि  अदालत सीरियल मे होते थे कभी वो सीरियल 40 मिनट का होता कभी 50 मिनट का  और फिर अचानक सीरियल ही बंद हो गया.

एक धारावाहिक महाराणा प्रताप आ रहा है दो साल आगे कर दिया कोई दिक्कत नही दिक्कत तब आई जब मुख्य पात्र अकबर को ही बदल दिया. जरा सोचना चाहिए जो अपना समय निकाल कर इन धारावाहिको को देखते हैं उनके दिल पर क्या गुजरती होगी .एक समय था जब 13 एपिसोड ही  होते थे दर्शक दिल से देखते थे फिर एपिसोड की संख्या बढने लगी अब तो कोई हाल ही नही. शायद ही कोई बिरला सीरियल  होगा जिसका कभी कोई किरदार ही न बदला हो… यकीनन सभी किरदार बहुत मेहनत करते हैं और अपना बेस्ट भी देते हैं पर अगर देखते ही देखते किरदार ही बदल जाए तो दर्शक बेचारा भी क्या करे किसके पास जाए किसके पास रोना रोए … आज के फास्ट लाईफ मे वो भी तो समय निकाल रहा है ना देखने के लिए ….

तो अगर आप किसी भी धारावाहिक को देख रहे है जरुर देखिए उसका पुन प्रसारण भी देखिए पर अचानक  बदलाव के लिए  भी तैयार रहिए  और सबसे अहम बात ये कि इन सीरियल्स को  सीरियसली देखना बंद कर दीजिए…

August 6, 2015 By Monica Gupta

हमारा पशु प्रेम

 

animals photo

Photo by magnus.johansson10

                                  हमारा पशु प्रेम (व्यंग्य)

तू इस तरह से मेरे जिंदगी मे शामिल है जहां भी जाऊं ये लगता है तेरी महफिल है …. रुकिए रुकिए ज्यादा सोचिए मत!!! असल मे, यह गाना मैं पशुओ के लिए गुनगुना रही हूं जो हमारे चारो तरफ है. जिधर देखू तेरी तस्वीर नजर आती है…क्या???

 आपको विश्वास नही हो रहा चलिए मै बताती हूं. सुबह सुबह घर से आफिस  जाने के लिए  निकलती हूं तो हमारी पडोसन गजगामिनी उर्फ मुन्नी अक्सर हमारे गेट के आगे फल और सब्जियो के छिलके फैकती मिल जाती है. असल मे, वो क्या है ना सडक पर धूमने वाले सांड और बैल भूखे रहे यह उसे सहन नही होता और उसके घर के आगे उनका नाच हो यह भी उसे अच्छा नही लगता इसलिए वो अच्छी पडोसन होने के नाते अपना प्यार दिखाती हुई ,छिलके फेंक कर मीठी मुस्कुराहट लिए भीतर चली जाती है और मै भी जल्दी से कार मे बैठ कर दफ्तर लपकती हूं कि कही लडाई करते सांड और बैल मेरा रास्ता ही ना रोक ले.

अब रास्ते की बात करे तो सडक पर एक मैन होल का ढक्कन किसी ने चुरा लिया तो गऊ माता उसमे गिर गई थी. ना सिर्फ लोग बल्कि चैनल वाले भी लाईव कवरेज के लिए माईक लेकर खडे सनसनी पेश कर रहे थे और यह अब तो हर रोज की ही बात हो गई हैं.

हमेशा की तरह भारी ट्रैफिक से बच बचाकर किसी तरह  दफ्तर पहुची तो  मेरा स्वागत बुलडोजर से  हुआ. क्या !! आप उसे भी  नही जानते !! बुलडोजर हमारे बास के कुत्ते का नाम है पर श्श्श्श्श्श … उसे  कुछ भी कहना …पर…. कुत्ता मत कहना. बास बुरा मान जाएगे.खैर, जैसे ही मै बास के रुम मे पहुंची तभी उनकी श्रीमति जी का फोन आ गया और शेर से वो अचानक भीगी बिल्ली बन कर म्याऊ म्याऊ करके बात करने लगे. उफ ये पशु प्रेम !!

अपनी सीट पर आई तो एक फाईल गायब थी तभी पता चला कि आज बंदरो की टोली आई थी खिडकी के रास्ते. हो सकता है कि कागज,वागज उठा कर ले गए हो. मैने सिर पकड लिया कि अब बलि का बकरा मै ही बनने वाली हूं और हुआ भी यही चाहे आप इसे बंदर धुडकी कहे या गीदद भभकी … मुझे घर भेज दिया गया कि आप जाकर आराम करें. कल बात करेगे.

देखे कल ऊटं किस करवट बैठता है सोचते सोचते  मै घर लौट आई. पर बात अभी भी खत्म नही हुई. घर पर चूहे बिल्ली की कोई कार्टून चल रही थी.सच, उफ!!! जानवरो ने तो मुझे कही का नही छोडा.आज अगर मेरी नौकरी जाएगी भी तो वो भी सिर्फ बंदर की वजह से.सच मे, ये जानवर जिंदगी मे इस कदर हावी हो गए है कि मुझे  काला अक्षर भैंस बराबर लगने लगा है और मैं खडी बास यानि भैस के आगे बीन बजा रही हूं और शायद  मगरमच्छ के आसूं बहा रही हू पर .. पर … पर …!!!

तभी भैंस का  मेरा मतलब  बास का फोन आ गया. उन्हे शाम को अपनी पत्नी के साथ शांपिग जाना था और मेरी डय़ूटी लगा दी कि बुलडोजर को पार्क मे घुमाने ले जाना है क्योकि मैनें उन्हे बताया हुआ था कि मुझे जानवरो से विशेष प्रेम है इसलिए मरती क्या न करती. मुस्कुरा  कर हामी भर् दी.सोचा शेर के मुहं मे हाथ डालने से क्या फायदा.अब तो जल्दी ही बुलडोजर के बहाने गधे को बाप बना कर अपनी प्रोमोशन  का राग जरुर छेड दूगी और मै बछिया का ताऊ बनी जी हजूरी मे जुट गई.

सडक पर बुलडोजर इतरा कर चल रहा था जैसे अपनी गली मे कुत्ता भी शेर हो. सैर सपाटा करवा कर घर पहुची तो पडोसन मुन्नी रात के खाने की तैयारी कर चुकी थी. गेट के आगे  छिलको मे मटर और गाजर भी थी लग रहा था कि शायद मेहमानो को बुलाया है नही तो सुबह शाम मैथी,गोभी और आलू के छिलको से ही दो चार होना पडता है मै खडी खडी सोच ही रही थी तभी  ना जाने कहां से बैलो के जोडे को छिलको की महक आई और वो अचानक  सरपट भागते भागते आए और छिलके खाने मे जुट गए और मै डर के मारे घर के भीतर भागी. तभी फोन की घंटी घनघना उठी बास का फोन था  कि कल सुबह जल्दी आ जाना क्योकि शाम को घर लौटते वक्त कोई बैल अचानक उनकी  गाडी के सामने आ गया टक्कर हो गई और उन्हे  पैर मे फ्रैक्चर हो गया है….

तो  मै सही हू  ना … जानवर हमारी  जिंदगी मे शामिल हुए कि नाहि  …  इसलिए जहां भी जाए ये लगता है …!!!!

जरुर बताईएगा कि आपको हमारा पशु प्रेम कैसा लगा ??

August 6, 2015 By Monica Gupta

Entertainment

cartoon politics by monica

Entertainment

बड बोले बयान मे हम आगे… काम न करने में हम आगे … धरना देने मे हम आगे … चैनलो पर अब तो सास बहू से भी ज्यादा लडाने भिडाने में हम आगे, टीआरपी बटोरने में हम आगे…. बोलो फुल्ल टू एंटरटेनमैंट Entertainment करते है या नही … बताओ करते हैं या नही … बोलो करते हैं या नही !!!

अब भई फिल्मों का तो पता नही कि एंटरटेनमैंट से चलती है या नही पर इतना पक्का है कि हमारी राजनीति में एंटरटेनमैंट के सभी गुण हैं और यही वजह है कि ये आज के समय मे सभी सास बहू सीरियल को हटाती हुई टीआरपी के मैसान में सबसे आगे चल रही है … कोई शक या सवाल ???

August 5, 2015 By Monica Gupta

Traffic

Traffic

आज गूगल सर्च के दौरान जब गूगल का साईन देखा तो समझ नही आया कि ये क्या है … उसमे ट्रैफिक लाईट बनी हुई थी और ट्रैफिक भी था. पर भला हो नेट का बहुत जल्दी पता चल गया कि आज ट्रैफिक लाईट का 100वा जन्मदिन है …

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सडक के ट्रैफिक के साथ साथ सोशल साईटस पर हमारा भी ट्रैफिक बनाए रखिए … शुभकामनाएं !!! Best wishes !!!

August 5, 2015 By Monica Gupta

एक पत्र दुल्हनियां के नाम

 

indian bride photo

Photo by naveen chander joshi

एक पत्र दुल्हनियां के नाम ….

बचपन मे घर घर खेलने वाली देखते ही देखते इतनी बडी हो गई कि आज अपना ही घर बसाने  पिया के घर जा रही है.जहां एक तरफ् मम्मी पापा  को खुशी होती है वही दूसरी ओर उनके सुखद भविष्य को लेकर अंजाना सा भय उनके मन मे व्याप्त  रहता है.

इसमे कोई शक नही कि समय बहुत तेजी से बदल रहा है और इसी आपा धापी मे हमारी मान्याताए भी बदल रही है. आजकल पापा तो व्यस्त रह्ते ही है साथ ही साथ  मम्मियां भी नौकरी करने लगी है और इसी वजह से ज्यादातर बच्चे होस्टल मे रहने लगे है और यहां तक की अपने  घर की शादी जैसे मौको पर  मम्मी को भी आफिस से  ज्यादा से ज्यादा हफ्ते की छुट्टी ही मिल पाती है.

वैसे देखा जाए तो इसमे कोई दिक्कत भी नही है आजकल सब रेडिमेट हो रहा  है.शादी के लिए हाल ,खाना पीना आदि  वगैरहा सारे इंतजाम. बस आर्डर बुक करवा दो और सभी चिंताओ से मुक्त हो जाओ. और मेहमान भी चंद घंटे के लिए आते हैं और चले जाते है किसी के पास समय ही नही होता.

मम्मी पापा को शादी के समय  बस एक ही चिंता हमेशा रहती है और वो है शादी के बाद वो अपना घर बार कैसे सम्भालेगी. इसमे कोई शक नही कि आजकल आप सभी लडकियां बहुत स्मार्ट हो गई हो. खूब शिक्षित हो गई हो और हजारो कमाने लगी हो.और आप अपना भला बुरा खूब अच्छी तरह से समझती हो या कई बार ऐसा भी होता है कि  आप किसी की बात सुनना भी पसंद नही करती.

प्यारी दुल्हनियां, शादी कोई गुड्डे गुडिया का खेल नही. यह एक बेहद पवित्र बंधन है और इस रिश्ते की गरिमा को रखने के लिए कुछ बाते ख्याल रखनी बहुत ही जरुरी है. पति पत्नी के एक साथ मिल जुल कर ही गृहस्थी रुपी गाडी आराम से चला  सकते हैं. आप आजकल देख ही रही है कि एकल परिवार ज्यादा होने लग गए है. बेटा भी अपने घर से दूर रह कर नौकरी करने लगा है.ऐसे मे पति पत्नी दोनो की सूझबूझ से घर खूबसूरत बन सकता है. अपना आचरण नारी सुलभ यानि लज्जा,सादगी, शालीनता और वाणी मे मिठास रखें. अपने घर परिवार को पूरा समय दें. बजाय जो आपके घर मे होता था उसका अनुसरण करने के  आपको अपने  नए घर और पति के परिवार के हिसाब से ही एडजस्ट करना होगा. बात बात पर व्यंग्य करना या किसी बात पर कटाक्ष करना बहुत चुभ जाता है इसलिए जो भी बोले और किसी के लिए भी बोले बहुत सोच समझ कर ही बोले.वैसे यही बात वर पक्ष पर भी लागू होती है और  यह सब आपसी तालमेल से ही आएगी.

सबसे जरुरी बात यह है कि अपने घर की बात घर की चार दीवारी मे ही रहे. छोटा मोटा झगडा हर घर मे होता है इसलिए बजाय इधर उधर बाते करने के या हर बात फोन करके घर बताने के  कोशिश करे कि  बात घर मे ही  मिल बैठ कर करे और उसका निष्कर्ष निकाले. सूझबूझ से आप अपने घर की बगिया महका सकती हैं. अपने नए प्यारे से घर को समझे और समझादारी से काम लें…

बाते तो बहुत सारी है अभी आप नई दुनिया मे कदम रखने जा रही है इसलिए अभी के लिए इतना ही ….

अपने नए जीवन की शुरुआत के पहले कदम ले लिए ढेर सारी शुभकामनाएं…

 

शेष फिर

आपकी शुभचिंतक

 

 

August 5, 2015 By Monica Gupta

नाजुक है रिश्ता

नाजुक है रिश्ता

चार महीने पहले एक जानकार की शादी हुई थी. तब किसी कारण से जा नही पाए. कल पता लगा कि वो अपने घर आई हुई है तो सोचा कि आज मिल ही आती हूं. मणि को फोन कर ही रही थी कि साथ चलते हैं इतने में वो घर ही आ गई.. जब मैने उससे कहा तो वो बोली कि नही जाना उनके घर क्योकि वो लड कर आ गई है और सुनने मे यही आया है कि वो कभी वापिस नही जाएगी अब !! अरे !! मैने कहा ये क्या बात हुई .. !!  अभी समय ही कितना हुआ है शादी को और इतनी जल्दी ऐसा निर्णय लेना !!! मुझे याद है कि शायद शहर की सबसे महंगी शादी थी वो … और दहेज का तो पूछो ही मत ऐसे में झगड कर घर वापिस आ जाना ???

sad girl photo

फिर मेरी और मणि की इसी विषय पर बात हुई कि आखिर इतनी जल्दी क्यो अलगाव की नौबत आ रही है.. मणि का कहना था कि जो लडकी आज खुद कमाती है आत्मनिर्भर है शायद इसलिए वो दब कर नही रहना चाह्ती या अगर बात दब कर रहने की ना भी हो बराबरी की हो और शायद हमारा पुरुष समाज स्वीकार नही कर पा रहा हो या शायद दोनों की ईगो का टकराव हो या पैसा हो या … हमारी बहस अभी भी जारी है  शायद आप कोई कारण बता सकें कि क्यो हो रहे हैं विवाह के तुरंत  बाद अलगाव… ??

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