Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 5, 2015 By Monica Gupta

बेटी बचाओ अभियान

 

cartoon flag by monica gupta

बेटी बचाओ अभियान

पिछ्ले दिनों एक अभियान चला था Selfie With Daughter.. यकीन मानिए मुझे उस अभियान में कोई सकारात्मक बात नही दिखाई दी थी पर साथ ही साथ नकारात्मक बात भी नही थी इसलिए सोचा कि चलो अच्छा है इसी बहाने लडकियों के प्रति जागरुकता तो बढेगी … पर आज जो मैने खबर पढी … By God  इतनी अच्छी लगी इतनी अच्छी लगी कि मैं आपको बताने से रोक नही पा रही.

खबर ये है कि हरियाणा में स्वतंत्रता दिवस पर हर गांव की जो सबसे ज्यादा पढी लिखी लडकी होगी वो अपने अपने  गांव में ध्वजारोहण करेगी. शिक्षा विभाग की ओर से, बेटी बचाओ, बेटी पढाओ के अंतर्गत निर्देश जारी हुए है. दस तारीख तक स्कूल में नाम लिखवाने हैं और फिर उस पर फैसला होगा. सबसे ज्यादा पढी लिखी लडकी मुख्यातिथि भी होगी और झंडा भी फहराएगी और उसके साथ उसके परिवार के लिए भी बैठने की उचित व्यवस्था की जाएगी…!!! वाह !! ये हुई ना बात !! अगर ये अभियान सच्चे ढंग से निभाया गया तो एक मिसाल होगा… !!

काश मैं भी गांव की बेटी होती और ये अभियान बहुत साल पहले चलाया गया होता तो ..

निसंदेह इस अभियान से बेटी को पढाने में बहुत बल मिलेगा …

बेटी बचाओ अभियान

August 4, 2015 By Monica Gupta

हे राम

cartoon hangama by monica

देश के नेता और अब्दुल कलाम साहब

संंसद , सांसद, धरना, हंगामा और देश के नेता , जिस तरह से संसद नही चल रही और मानसून सत्र मे धरने आदि का दौर जारी है हे राम ही मुंह से निकल रहा है और  उसे देख कर स्वर्ग में बैठ कलाम साहब भी यही सोच रहे होंगें …

don’t challenge the law: sumitra mahajan to MPs – Navbharat Times

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने भी कुछ कहने का प्रयास किया। हालांकि, स्पीकर ने उनसे प्रश्नकाल के बाद बात रखने को कहा। इससे असंतुष्ट लेफ्ट पार्टियों, समाजवादी पार्टी और आरजेडी सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए। अध्यक्ष ने वाईएसआर कांग्रेस सदस्यों की नारेबाजी के बीच ही पूरा प्रश्नकाल चलाया। उल्लेखनीय है कि मानसून सत्र शुरू होने के बाद से ही सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग पर दबाव बनाने के लिए सदन में पोस्टर दिखाने और आसन के समक्ष आने वाले कांग्रेस के 25 सदस्यों को अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कल सदन की पांच बैठकों के लिए निलंबित कर दिया था। See more…

August 4, 2015 By Monica Gupta

Cartoon – Justice

cartoon justice by monica gupta

Cartoon – Justice

जिस तरह से संसद नही चलने दी जा रही और हर रोज लाखों रुपयों का नुकसान हो रहा है ऐसे मे न्याय इन लोगो को नही न्याय मुझे चाहिए !!! I WANT JUSTICE !!!!

 

August 3, 2015 By Monica Gupta

पहला कदम पहली मुस्कान – एक अविस्मरणीय अनुभव

कहानी -थकावट ( मोनिका गुप्ता)

पहला कदम पहली मुस्कान – एक अविस्मरणीय अनुभव

टेलिविजन पर एक विज्ञापन आता था. वो पहला कदम पहली मुस्कान…. जिसमे मम्मी अपने नन्हे से  बच्चे को चलना सीखाती है और एक दिन उसे उसी के नन्हे नन्हे पैरो से डगमगाते हुए चलते देख कर भावुक हो जाती है.

सच मे समय ऐसे ही बदलता रहता है.आज जो बच्चे थे वो अब बडे हो रहे हैं और वो अपने बडो को भी सीखा रहे हैं अब आप सोच रहे होगें कि बच्चे क्या सीखाएगे. हैरान होने की जरुरत नही अब आप खुद ही देखिए अगर कुछ नेट पर,मोबाईल पर मैसेज या फोटो कैसे लेनी है या कुछ भी पूछना है तो बच्चो को सारी जानकारी होती है इसलिए यह सब हम बच्चो से ही तो सीखते हैं.

escelator photo

अब देखिए ना बडे बडे शहरो मे मैट्रो चलने लगी हैं. शापिंग माल, पीवीआर इत्यादि खुल गए हैं. अब वो इतने बडे यानि बहुमंजिला होते हैं  कि  उसमे लिफ्ट भी होती है और ऐस्कीलेटर भी.ये भी सब नए जमाने की तकनीक है और हमे इनके साथ भी चलना चाहिए पर कई बार डर भी लग जाता है.

मेरी सहेली मणि ने बताया कि उसका बडा बेटा गुडगाव मे सर्विस कर रहा है जब वो उससे मिलने गए तो उन्होने पिक्चर का प्रोग़ाम बना लिया. उस पीवीआर और शापिगं माल पर ऐस्कीलेटर था. पता नही पर मणि  को उससे बहुत डर लगता था तो  बस उसने  ऐलान कर दिया कि वो किसी भी हालत मे इस पर नही जाएगी और वो सभी बिना पिक्चर देखे वापिस जाऐगे.

ऐसे मे मणि का बेटा पहले तो मम्मी को समझाता रहा फिर उसने बहुत प्यार और नर्मी  से मम्मी का हाथ पकडा और मासूमियत से बोला कि बस जैसे मै कहू वैसे ही करते रहना. मणि की दिल की धडकने बढे जा रही थी और पैर कापें जा रहे थे. लाख मना करने के बावजूद बेटा नही माना और बडो की तरह समझाते हुए उस ऐस्कीलेटर पर पहला कदम रखने को कहा. जब मणि की  एक ना चली तो उसने हिम्मत दिखाई और कुछ ही पलो मे वो ऊपर की ओर जा रहे थे.

ऐसी ही हिम्मत बढाने के लिए उसने दो तीन चक्कर और लगवाए इससे मणि का  पूरा डर खुल गया. उसने मुझे बहुत भावुक होते हुए बताया कि उसे वो समय याद आ गया जब बचपन मे वो बेटे को  चलना सीखाती थी और  जब वो चलते चलते  जमीन पर गिर जाता था था तो कभी झूठ मूठ से फर्श की पिटाई करती और कभी कहती ओ देखो ये तो चींटी मर गई आपके नीचे आकर. आज बातो बातो मे बॆटे ने भी बहुत सारे कारण देकर उसका ध्यान बांटा  और उसके अंदर छिपे हुए डर को चुटकियो मे भगा दिया. तो बताईए परिवर्तन अच्छे ही हुए ना.

मणि की बातो ने, सच मे, सोचने को मजबूर कर दिया कि समय के साथ हमेशा मिलकर चलने मे ही भलाई है.कोई बडा छोटा नही होता.सभी से मिलकर दोस्त बन कर रहना चाहिए.हम सभी एक दूसरे के काम आते है और यही तो है परिवार.बात यह भी नही है कि बेटी बेटे की बजाय ज्यादा ध्यान रखती है यह हमारी अपनी सोच है जैसा आप परिवार मे माहौल देंगे आपको वैसा ही मिलेगा.

कल आपने बच्चे को उंगली पकड कर चलना सीखाया आज वो आपकी आप उंगली थाम कर चल रहे हैं. किसी ने सच ही कहा है कि रिश्ते हथेली पर मिट्टी की तरह होते हैं यदि ढीले से पकडेगें तो वो रहेगे और अगर कस कर पकडेगे तो आपकी ऊगलियोँ मे से निकल जाएगे. अपना छोटा सा संसार सहेज कर रखे आपको यह परिवर्तन प्यारा लगेगा.

पहला कदम पहली मुस्कान – एक अविस्मरणीय अनुभव  को लेकर अगर आपकी कोई राय या अनुभव हो तो जरुर बताईएगा

परवरिश       भी जरुर पढिएगा

 

कैसा लगा आपको ये लेख … जरुर बताईएगा 🙄

August 3, 2015 By Monica Gupta

जब कार चलाना सीखा

car drive photo

 

जब कार चलाना सीखा

मुसीबत मोल ली मैने ..

जी हां … आजकल समय ही ऐसा चल रहा है.चारो तरफ टेंशन,परेशानी ही दिखाई देती रहती है. आमतौर पर हम इन तनाव या मुसीबत से छुटकारा पाना चाह्ते है पर दूसरी तरफ एक उदाहरण मै हू जोकि मुसीबत को खुद ही न्यौता दे आई और वो भी पूरे जोश के साथ पर अब कहने को कुछ नही बचा. बस चारो तरफ गहन अंधकार ही अंधकार है. खैर, इससे पहले आप माथे पर बल डाल कर ज्यादा सोचने पर मजबूर हो जाए मै आपको दुख भरी दास्तान सुनाती हूं.

बात ज्यादा पुरानी नही है बस पिछ्ले महीने ही ही है.एक दिन बाजार जाते समय मुझे एक सहेली मिली वैसे स्कूल टाईम मे वो नालायक नम्बर वन थी.पर पता नही आजकल उसे क्या हो गया है इतनी स्मार्ट इतनी स्मार्ट हो गई है कि बस पूछो ही मत.बाल कटवा लिए है धूप का चश्मा पहनने लगी है और सबसे बडी बात की कार चलाती है. बस यही मेरी दुखती रग है.

असल मे, मुझे कार चलानी नही आती. आज के समय मे कार ना चलाना आना हैरानी का विषय ना बने इसलिए मैने उसी समय घर आकर घोषणा कर दी कि कल से मै गाडी चलाना सीख रही  हूं. जो चाहे सो हो. छोटे बेटे ने तुरंत अग़ूंठा दिखा कर मेरा समर्थन किया जबकि 90% परिवार जनो की राय थी कि रहने दो क्या फायदा.

पर मै एक बार जिद कर जाती हू तो फिर अपने आप की भी नही सुनती बडे स्टाईल से डायलाग बोल कर इतराने लगी और कहा कि ठान लिया तो बस ठान लिया और अगले ही दिन ब्यूटी पार्लर मे जाकर छोटे छोटे बाल कटवा लिए और गोगल भी खरीद लिए. अब  भई स्टाईल भी तो मारना जरुरी होता है .जल्दी ही खोज शुरु हुई कार सीखाने वाले की और 15 दिन मे मै फराटे से  कार चलाना सीख गई हालाकि दो चार बार बहुत बुरी तरह बची भी हूं.अब सारी बाते क्या बतानी. आप खुद भी समझदार है….  है ना.

अब आप सोच रहे होंगे कि भई इसमे दुख भरी बात कहा है तो वही बताने तो जा रही हू.कि मुसीबत मोल ली मैने. छोटे छोटे कामो के लिए अब सब मेरा ही मुंह देखते है कि ग़ाडी भी है और ड्राईवर भी.चाहे बाजार से आधा  किलो आलू लाने हो कपडे प्रैस करवाने हो या राशन का सामान हो लाना हो .सब मेरे सिर पर ही आ गया कि कार है ना . पहले दुकान वाले  सामान  आदमी के हाथो भिजवा देते थे पर अब उनका एक ही जवाब होता है कि कार है ना आप ही आ जाओ. आदमी नही ना है. दुकान बंद करके आना पडेगा.वगैरहा वगैरहा.

घर पर किसी के जूते मे मोची से जरा सी कील ही ठुकवानी हो तो भी कार है ना. और तो और जो मेहमान सालों से हमारे यहां नही आए थे जबसे उन्हे पता चला कि मैने कार सीख ली है वो आने को तैयार है.हफ्ते दस दिन का कार्यक्रम बना कर आ रहे है. पहले उन्हे रेलवे स्टेशन लेने जाओ फिर आवभगत,जायकेदार व्यंजन बनाओ,सेवा करो और  फिर अलग अलग जगह सुबह से शाम तक  दिल्ली दर्शन  करवाओ शापिंग करवाओ और फिर रात को लजीज व्यंजन से स्वागत करो ताकि वो नाराज ना हो जाए.

पहले तो मात्र घर ही सम्भालती थी पर अब जबसे कार चलाना सीखा है बस मानो मुसीबत ही मोल ले ली है मैने.अब तो दोहरी भूमिका हो गई है.घर पर सब निश्चिंत होकर बैठे है और सभी खुश है कि अब तो दिक्कत की कोई बात ही नही है.पर मै सिर पकड कर बैठी हूं कि क्यो मैने कार चलाना सीखा और अपने पैरो पर खुद कुल्हाडी मार ली.बेटे ने जो उस दिन अगूंठा दिखा कर मेरी बात का समर्थन किया था  मुझे वो थम्स अप की बजाय  ठेंगा लग रहा है. कुछ भी कहो  इसमे अब कोई मेरी मदद नही कर सकता क्योकि यह मुसीबत खुशी खुशी मैने ही मोल ली थी… अब तो इसे भुगतना तो पडेगा ही पडेगा….

कैसा लगा आपको ये व्यंग्य … जरुर बताईएगा 🙂

जब कार चलाना सीखा

August 3, 2015 By Monica Gupta

आई बरसात तो

rain photo

Photo by VinothChandar

आई बरसात तो

आहा से आह तक का सफर

इन दिनो बरसात की खबर पढ कर या सुनकर मन मायूस हो जाता क्योकि हमारे शहर मे बरसात हो ही नही रही थी. ऐसी बात नही है कि यहां बादल नही आते. बादल गरजने के साथ साथ् बिजली भी खूब चमकाते  पर वो कहते है ना जो गरजते है वो बरसते नही बस …. ऐसा ही कुछ हो रहा था. बहुत मन था कि बरसात आए तो आनंद लें. गर्मा गर्म अदरक और इलाइची की चाय के साथ हलवा और पकौडे बनाए. बच्चो के साथ बारिश मे भीगे और कागज की नाव चलाए. पर खुशी से  आहा करने का मौका ही नही मिल रहा था. यही सोचते सोचते मैं अखबार के पन्ने पलटने लगी. तभी अचानक आखो मे आगे अंधेरा सा छा गया. अरे! चिंता मत करे. कोई चक्कर वक्कर नही आया मुझे पर ऐसा लग रहा था कि जो सूर्य महाराज पूरी तेजी से भरी दोपहरी मे चमक रहे थे अचानक उनकी चमक हलकी पड  गई.बाहर देखा तो  आसमान मे बहुत काला बादल  था. आज तो यकीनन बरसना ही चाहिए. मै सोच ही रही थी कि अचानक बूदाबांदी शुरु हो गई और मन मयूर नाच उठा.

इतने मे बच्चे भी वापिस लौट आए और कपडे बदल कर हाथ मे छतरी और बरसाती पहन कर कागज की नाव बना कर  बरसात  का आनंद उठाने को तैयार हो गए. उधर मेरी भी सहेलियाँ आ गई और हमने बरसात का खूब  मजा उठाया. प्रकृति एक दम साफ साफ धुली धुली लग रही थी.गमलो मे लगे पौधे हवा के साथ हिलते हुए ऐसे लग रहे थे मानो अपनी खुशी का इजहार कर रहे हों.  फेसबुक पर भी बरसात की सूचना दे दी गई और लाईक और कमेंट का अम्बार लग गया.. और तो और दो तीन निकट  दोस्तो का तो बधाई के लिए फोन भी आ गया कि आखिरकार भगवान ने आपकी सुन ली. सारे चेहरे खिले खिले थे.ऐसा लग रहा था मानो खुशी बरस रही थी.  माहौल खुशनुमा हो चला था. अचानक तापमान इतना कम हो गया कि पंखा भी एक नम्बर पर करना पडा. काफी देर तक भीगने के बाद कपडे बदल कर् बच्चे नेट पर काम करने लगे और सहेलियो ने भी विदा ली.

तभी अचानक बहुत तेज बिजली चमकी और मेरी आखं खुली. अरे! ये सपना था. बाहर आकर देखा तो सचमुच मूसलाधार  बरसात हो रही थी. बेशक मन खुश हुआ.पर इतनी तेज बरसात देख कर चिंता भी हो गई. तभी बिजली चली गई. चिंता इस बात की थी कि अभी बच्चे भी नही वापिस आए थे. फोन करने लगी तो वो भी डेड हो गया था. मोबाईल का नेटवर्क तो वैसे ही दुखी कर रहा था. रेंज ही नही होती कभी इसकी. खैर! सोचा कि चलो इतने पकौडो की तैयारी कर लूं रसोई मे गई तो देखा कि रसोई की नाली मे पानी जाने की बजाय बाहर आ रहा था यानि सीवर ओवरफ्लो कर रहा था. बाहर सडक पर देखा तो वो पूरी भर गई थी और ऐसा लग रहा था कि पानी किसी भी क्षण घर मे आ सकता  है  और देखते ही देखते पानी अंदर आना शुरु हो गया. असल मे बाहर सडक को ऊंचा  बनाया जा रहा है शायद इसी लिए .. !!!

वो क्षण किसी भंयकर सपने से कम नही था. मैने तीन चार पर अपने को चिकोटी काटी कि यह सब सपना ही हो.पर आह! अफसोस यह सपना नही हकीकत था. ना बिजली ना फोन ना मोबाईल और ऊपर से घर मे आता पानी. मेरा सारा शौक हवा हो गया.

बस भगवान से  सच्चे दिल से एक ही प्रार्थना कर रही हूं  कि बरसात  को तुरंत रोक दो मै 11 रुपए का प्रशाद चढाऊगी.पर भगवान तक  मेरी अर्जी जब तक  लगी  तब तक काफी देर हो चुकी थी. बरसात के लिए खुशी की आहा अब तक दुख भरी  आह  मे बदल चुकी थी. सरकार, प्रशासन और अडोस- पडोस को कोसते हुए नम हुई आखों से सारे काम भूल कर झाडू, कटका लिए बरसात के रुकने की इंतजार कर रही हूं !!!

आई बरसात तो … बरसात ने दिल तोड दिया

कैसा लगा आपको ये व्यंग्य जरुर बताईएगा 🙂

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