मौन व्रत
कई बार खबरों की वजह से विचारो की गहमा गहमा इतनी ज्यादा हो जाती है कि मौन रहना ही सर्वोतम है
Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber
By Monica Gupta
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( व्यंग्य )
दैनिक भास्कर की मधुरिमा मे प्रकाशित
By Monica Gupta
(व्यंग्य)
By Monica Gupta
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Photo by DiAichner3 
जानवर और हम
घर के सामने से एक महिला बच्चों के साथ जा रही थी. बच्चे आपस मे लड रहे थे और महिला बोल रही थी क्या कुत्ते बिल्ली की तरह लडते रहते हो…मैं सोचने लगी कि हम लोग जानवरों का नाम हम कितनी सहजता से ले लेते हैं.
कुछ दिन पहले एक जानकार बता रही थी कि उसकी बेटी तो एकदम गाय है गाय. वो तो उसकी सास ही नागिन की तरह फुंकारती रह्ती है. वही मेघा अपने छोटे भाई को बंदर की उपाधि दे रखी है. मनुज ने बताया जब वो बाल कटवाने गया तो नाई ने कहा कि क्या रीछ की तरह बाल बढा रखे हैं. अक्सर सुनने में यह भी आता है कि फलां आदमी तो बैल की तरह सारा दिन चरता ही रहता है या क्या खा खा कर हाथी बने जा रहा है.
विजय का कहना है कि उसका मालिक खुद तो सारा दिन भौकते रहता है और उससे गधे की तरह काम करवाता रहता है. आफिस मे कुछ लोग तो गिरगिट की तरह रंग बदलने मे माहिर होते हैं तो वही कुछ लोग किसी के आगे शेर बन जाते हैं तो कोई किसी के सामने भीगी बिल्ली. मिताली भी किसी से पीछे नही है उसका मानना है कि उसकी आखे हिरणी की तरह है. निशा अपनी जेठानी के लिए कहती है कि वो तो लोमडी की तरह चालाक है और जेठ बिच्छु जैसा !!! इतना ही नही. किसी को किसी की नजर चील जैसी लगती है तो यह कहने से भी कोई पीछे नही हटता कि तुम्हारी अक्ल घास चरने गई है क्या?? बात बात पर कछुए और खरगोश का उदाहरण देना आम बात है!! इसके इलावा सुअर, उल्लू, मुर्गा आदि नाम का इस्तेमाल भी अक्सर हमारे द्वारा होता रहता है.
तो देखा आपने जानवरो की आड मे हम लोग क्या क्या नही बोल जाते. इतना ही नही अब बात को ज्यादा क्या बढाना वैसे आप खुद ही समझदार हैं कुछ लोग तो बात बात में जानवरो के बच्चो को भी बीच मे ले आते हैं. हे भगवान !!! … कैसी भेडचाल है ये !!! वैसे आप तो ऐसे नही होंगें है ना !!!
जानवर और हम
By Monica Gupta

ऐसा भी होता है …!!!!

छोटी बातें
शीना और गीता बहुत अच्छी सहेलियां थी. पर अचानक एक दिन ना जाने क्या हुआ क्या नही पर दोनो की आपसी बोल चाल बंद हो गई. यह बात लगभग 2 महीने तक चली और जब उनका आमना सामना हुआ तो हकीकत जान कर दोनो बहुत झेंपी. असल मे ,हुआ यू कि एक शाम शीना बाजार जा रही थी और गीता अपने घर की बालकनी मे खडी थी. मुस्कुराते हुए शीना ने उसे हाथ हिलाया पर उसने ना तो कोई जवाब दिया और ना स्माईल.
शीना को बहुत गुस्सा आया और मन ही मन उसने उससे कुट्टा कर ली कि बहुत अकड आ गई है उसमे. एक दो बार गीता के फोन भी आए पर उसने जवाब नही दिया. वही एक दिन गीता को बाहर जाना था और उसने देखा कि शीना पौधो को पानी दे रही है उसने प्यार से हाथ हिलाया पर शीना यथावत पानी ही देती रही.बस दोनो मे दूरियां बढती गई.
एक दिन दोनो का अनयास ही आखों के डाक्टर के यहा आमना सामना हुआ.बातो बातो मे जब बात खुली तो झेंप इसलिए आई कि बात कुछ भी नही थी.असल में, दोनो की नजर कमजोर हो गई थी. हल्के अंधेरे मे दोनो को ही दिखाई नही दिया और एवई ही बात का बतंगड बन गया.
ऐसे ना जाने कितने उदाहरण है जिसमे बात कुछ भी नही होती और दिलो मे खटास बेवजह ही पैदा हो जाती है.चाहे माता पिता मे हो, बच्चो मे हो या दोस्तो मे हो या अपने दफ्तर मे हो.अगर ऐसे मे कभी भी थोडा भी संदेह हो तो बजाय बोलचाल बंद करने के खुल कर बात कर लेना बेहतर है. दूसरे लोग ऐसे मे ना सिर्फ मजाक उडाते है बल्कि आनंद भी लेते हैं तो किसी को क्यो मौका देना … वैसे आप तो ऐसा कुछ नही कर रहे होंगे अगर कर रहे हैं तो बिना समय गवाए बात कर लीजिए प्लीज … !!!

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