Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 15, 2015 By Monica Gupta

शौक, शोक, शेक और शक

dog photo

 

शौक, शोक, शेक और शक

Satire –  व्यंग्य

असल मे, वो क्या है ना हम चाहे कुछ भी हो पर स्टेट्स सिंबल बन चुका है कुत्ता पालना.. जिसे हम सभ्य भाषा मे पप्पी,डागी या मेरा बच्चा के नाम से पुकारते हैं.

अभी परसो ही जब मुझे प्रमोशन मिली और मैने सखी को यह खुशखबरी दी कि अब तो मुझे गाडी भी मिल जाएगी तो लम्बू जी यानि अमिताभ जी के स्टाईल मे कमर पर हाथ रख कर वो बोली वो सब तो ठीक है हंय….   पर क्या कुत्ता है तुम्हारे पास. बस इतना अपमान मै सहन नही कर सकी और ठान ली कि चाहे कुछ भी हो जाए कुत्ते ( ओ क्षमा करे) डागी को तो खरीद कर ही रहूगी.चाहे जो हो सो हो ..भई आखिर स्टेट्स सिंबल का सवाल जो ठहरा. आखिर वो अपने को समझती क्या है . हम भी कुत्ते वाले क्यो नही बन सकते.

यही सब विचारते भुनभुनाते घर पहुंच कर सोचा था कि किसी ना किसी पर गुस्सा जरुर निकालूगी और अगर कोई नही मिला तो कांच वगैरहा का गिलास ही पटक कर तोड दूगी पर पर पर तभी काम वाली बाई का मोबाईल पर मैसेज आया कि आज वो नही आएगी इसलिए ये प्रोग्राम भी कैंसिल करना पडा क्योकि झाडू जो खुद लगानी पडती. खैर खाली मुहं फूलाने से ही काम चलाना पडा.

उसी शाम को किट्टी पार्टी मे जाना था वहां सभी शायद किसी अंग्रेजी फिल्म या किसी हीरो की बात कर रहे थे. जैसे बाक्सर, हासा, एप्सो, ग्रेट्डेन, सेट्बर्नार्ड, जर्मन शेफर्ड् आदि .अब मै भी कहां  चुप रहने वाली थी.  मैं भी बोल पडी कि मैने भी देखा है बहुत खूब हीरो हैं और वाह वाह क्या पिक्चर है. मेरा बोलना ही था कि सभी चुप होकर मेरा मुहं देखने लगी और मिसेज शर्मा हंसती हुई बोली कि भई, कोई कुछ भी कहे आपका सैंस आफ हयूमर बहुत ही शानदार है. मै भी मंद मंद मुस्कुराने लगी वो तो बाद मे पता चला कि वो सभी कुत्तो की नस्ल के नाम थे.

खैर उसी समय मैने निश्चय कर लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए  कल तक एक कुत्ता मेरे भी घर की शोभा बढाएगा ही बढाएगा. दिखावे का शौक ऐसा चढा कि अगले दिन स्पेशल  दिल्ली गए  और अलग अलग नस्लो से दो चार हुए. ग्रेटडेन की खूंखार बाडी देखकर, उनका खाना पीना  और उसका रेट सुनकर पसीना ही छूट  गया यानि चक्कर खाकर गिरते गिरते बची. बहुतों को देखने के बाद यही फैसला किया गया कि हल्का सा पामेरियन ही ले चलते हैं पर बात पक्की होते होते यही फाईनल हुआ कि अल्सेशियन ही ले कर जाएगे.

हालांकि इसके खाने पीने, रहन सहन के बारे मे जानकर बार बार श्वास अटकने लगी पर शौक था इसलिए चेहरे पर मुस्कान लिए सब समझती रही. अगले कुछ ही पलों में चैक से भुगतान करने के बाद उसे गाडी मे लेकर हम घर लौट आए.

शाम को आते ही अपने फ्रैड सर्किल को न्यौता दे आई. वो अलग बात है कि  भारी भरकम आवाज मे उसके भौकने की आवाज सुन सुन कर सिर दर्द हो चला था. फिर इसका वो सब साफ करना जिसकी आदत ही नही थी और उसे वो सब खिलाना जो मैने कभी सपने मे भी नही सोचा था… लग रहा था बहुत जल्दी मेरा शौक शोक मे बदल रहा है.शाम को सभी सहेलियां अपने अपने पप्पी के साथ उससे मुलाकात करने आई थी.

दोपहर बाद इसका ट्रैनर भी आ गया कि ताकि हमे इसकी आदतो केर बारे मे सीखा सके.पर सच पूछो तो इस कुत्ते के ऐशो आराम देख कर मेरा पूरा शरीर शेक करने लगा है. नाश्ता, दोपहर का भोजन फिर कभी उसे सैर करवाना तो कभी उसके नखरे देखना. मेरा पूरे घर का बजट चार दिन मे ही बिगड चुका है. ट्रैनर का खर्चा देखकर हमने उसे बहुत जल्दी विदा कर दिया पर … पर … पर … कोई शक नही कि शौक के चक्कर मे सारा शरीर शोक मे है और घबराहट और डर के मारे शेक कर रहा है. अब मै उसे निकालना चाह रही हूँ पर इतने रुपए खर्च करके खरीदा था इतने मे कोई खरीदने को तैयार ही नही है.

उसे घर मे लाए आज 10 दिन हो चुके हैं मुझे शक है कि मै उसकी वजह से बहुत जल्दी पागल होने वाली हूं. रात के 12 बजे है और वो फिर भौंक रहा है पता नही उसे भूख लगी है या धूमने जाना है. बस अब तो जैसे भी हो…  इसे बाहर का रास्ता दिखाना ही पडेगा चाहे जो हो सो हो.!!!

Satire …   व्यंग्य

शौक, शोक, शेक और शक  ….कैसा लगा आपको ये व्यंग्य जरुर बताईएगा …

 

 

 

July 15, 2015 By Monica Gupta

लाटरी – लॉटरी टिकट

लाटरी

लाटरी  या लॉटरी टिकट खरीदने का शौक हम सभी को होता है टिकट खरीद कर हम अमीर बनने के सपने देखने लगते हैं पर क्या वाकई अमीर सिर्फ ऐसे ही बना जा सकता है आईए पढे इसी बात से जुडी एक कहानी

lottery ticket photo

 लाटरी

वो मात्र दस साल की थी तब घर पर एक गूंगे बहरे पंडित जी आए. उन्होने स्लेट पर लिख कर बताया कि वो बहुत भाग्यशाली है उसकी लाटरी निकलेगी. समय बीता और उसका विवाह एक खानदानी परिवार मे हो गया.पर लाटरी वाली बात उसके मन मे कही बैठी हुई थी इसलिए जब भी मौका मिलता तो कभी खुद जाकर या किसी को भेज कर लाटरी का टिकट मंगवा लेती .हालाकि इसके पति उसे काफी बार समझाते कि सब कुछ तो है किस बात के लिए टिकट खरीदना पर उस पर एक किस्म का भूत सवार था कि वो  पंडितजी कभी भी गलत नही होते. एक बार  जरुर निकलेगी इसलिए टिकट खरीदना जरुरी है.

समय बीतता रहा. उसके प्यारे प्यारे तीन बच्चे हुए. उनकी परवरिश और देखभाल उसने पूरे दिल से की. बच्चों की अच्छी पढाई हुई और बडे होने पर बच्चे नौकरी लग गए और बिटिया की शादी कर दी.

सब कुछ बहुत अच्छा बीत रहा था पर हर बार ईनाम निकलने का  इंतजार रहता कि काश … !!! इसी बीच उसे नानी और दादी बनने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ.

कुछ दिनो से उसकी तबियत कुछ ठीक नही चल रही थी इसलिए डाक्टर के पास दिखाने ले गए. बस डाक्टर् ने आराम की सलाह दी थी. बेटे, बहुए ,नाती ,पोते अचानक उनकी खराब तबियत सुनकर घबरा गए और अगले ही दिन सभी इकठ्ठे हो गए. वो बिस्तर मे लेटी हुई सभी से बतिया रही थी और बता रही थी कि जाते जाते बस लाटरी निकल जाती तो … क्योकि पंडित जी कभी गलत नही हुए थे.

कुछ समय बाद तबियत सम्भली. आज लाटरी के टिकट की तारीख थी शायद आज उसका भाग्य खुल ही जाए. यही सोच कर वो बाहर निकली कि माली काका को भेज कर अखबार मंगवा लेगी.बाहर माली काका और उनका रसोईया आपस मे बात कर रहे थे  अरे !!  माँ जी की तो लाटरी ही निकल गई. इतना सुखी हसंता खेलता परिवार … किसी भी बात की यहाँ कमी नही.. काश ऐसी लाटरी सभी की निकले..   

वो चुपचाप उनकी बाते सुनकर ठगी सी खडी रह गई और हाथ मे पकडा लाटरी का टिकट फाड कर फेक दिया…

क्योकि सब कुछ रुपया पैसा ही नही होता !!!

कहानी कैसी लगी ??? जरुर बताईएगा !!!

July 15, 2015 By Monica Gupta

आपका बहुत बहुत धन्यवाद

thanks photo

Photo by opensourceway

 

आपका बहुत बहुत धन्यवाद

कुछ समय पहले की बात है कि एक महिला को अपनी नन्ही बच्ची के लिए खून की जरुरत थी.वो खून का ग्रुप जल्दी से उपलब्ध नही होता था यानि रेयर ग्रुप था. मेरी सहेली मणि ने उन्हे ना जानते या पहचानते इंसानियत के नाते बहुत दौड धूप की और उस रक्त का इंतजाम करवा दिया. आप्रेशन सफल रहा. कुछ समय बाद वह् लडकी आईसीयू से बाहर भी आ गई और कुछ समय बाद वो ठीक होकर अपने घर भी चली गई.

इसी बीच मणि ने  एक दो बार बच्ची का हाल चाल पूछ्ने के लिए इस महिला को फोन भी किया. पर हैरानी ही बात यह रही कि महिला ने एक बार भी उसका धन्यवाद नही किया. वैसे तो उसे उम्मीद ही नही रखनी चाहिए थी क्योकि मेजर आप्रेशन था और उस महिला को मानसिक परेशानी भी बहुत रही होगी उस समय. पर जब बच्ची भी ठीक होकर घर आ गई तो भी उसने एक बार भी फोन करके मणि का धन्यवाद नही किया. इस बात से मणि का मनोबल बहुत गिरा पर क्योकि उसका ये किसी की मदद करने का यह उसका पहला मौका था.

पर फिर मेरे समझाने पर वो फिर अपने नेकी के काम मे दुबारा से जुट गई पर उसके जाने के बाद मैं जरुर सोचने लगी कि हम अक्सर कहते रहते है कि हमे दूसरो की मदद करनी चाहिए या जब किसी को जरुरत पडे उसकी सेवा निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए पर इसके साथ साथ जिन लोगो को मदद मिलती है या जिन लोगो का ऐसे प्रोत्साहन से मनोबल दुगुना होता हो उन्हे भी इस बात का ध्यान रखना चहिए कि जो लोग उनके लिए आगे आए है समय निकाला है या उन्हे कुछ समय दिया है.

उनका दिल से “धन्यवाद” या “आभार” जताना बहुत जरुरी है उसे बिल्कुल नही भूलना चाहिए … तो अगर आप किसी का धन्यवाद करना भूल गए है तो प्लीज और देर मत कीजिए!!! यकीनन जितनी आपको खुशी मिली है उससे भी दुगुनी उन्हे मिलेगी आप एक बार धन्यवाद कर के तो देखिए !!!

July 14, 2015 By Monica Gupta

अच्छे दिन

Cartoon BJP by monica gupta

 अच्छे दिन

अच्छे दिन के इंतजार मे मेरे बनाए कुछ कार्टून … कभी कछुए पर, कभी परदे के पीछे छिप कर, तो कभी आखें टेस्ट करवा क,र कभी दूरबीन लगा कर अच्छे दिन देखने की कोशिश की कई बार मुझे सम्मोहित भी किया गया कि अच्छे दिन आ चुके हैं पर…. Thank God  🙂  आज पता चल गया कि बस 25 साल बाद आने ही वाले हैं अच्छे दिन… 🙂

July 14, 2015 By Monica Gupta

सिर्फ पच्चीस साल

achछ्e din by Monica

सिर्फ पच्चीस साल

देश की जनता को पिछ्ले एक साल से भी ज्यादा से इंतजार था कि अच्छे दिन आएं अच्छे दिन आएं….आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को भोपाल पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘अच्छे दिन आने में 25 साल लगेंगे. जिससे जनता ठग़ा सा महसूस कर रही है और विपक्ष चुटकी ले रहा है …

25 : – ABP News

नई दिल्लीः पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव से पहले देश की जनता से जिस ‘अच्छे दिन’ के वादे किए थे, अब उसे लानें में बीजेपी को 25 साल लगेंगे.  बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को भोपाल पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘अच्छे दिन आने में 25 साल लगेंगे.’

शाह ने यह भी कहा कि इंडिया को नंबर वन पोजिशन पर पहुंचाने के लिए बीजेपी को इन 25 साल में पंचायत से लेकर लोकसभा तक, हर चुनाव जीतना होगा. शाह ने कहा, ”देश को दुनिया के सर्वोच्च स्थान पर बैठाना है तो पांच साल की सरकार कुछ नहीं कर सकती.”

शाह ने आगे कहा,  मुद्रास्फीति दर घटाना, विदेश नीति, सीमा सुरक्षा, बेहतर नीतियां इन सभी में बेहतरी लाएंगे लेकिन उसके लिए हमें पांच नहीं बल्कि और समय देना होगा, और बीजेपी को सभी स्तर के चुनावों में जीत दिलानी होगी.

अमित  शाह के  इस बयान पर विपक्षी पार्टियों के हमले तेज हो गए हैं,  इस बयान पर दिल्ली  सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्विट करते हुए लिखा है, “अगर चुनाव के पहले भाजपा बता देती कि ये लोग अच्छे दिन 25 साल में लाएंगे, तो क्या लोग इन्हें वोट देते?”

वहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने लिखा है,  “अच्छे दिन आने में  25  साल लगेंगे” अमित जी आपके अच्छे दिन तो आ गये, ऐश करिये सारे मुक़दमों को समाप्त करा लीजिये. जनता जाये भाड़ में”

इस पूरे मुद्दे पर बीजेपी  ने मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा है कि, “मीडिया  ने इस बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है. गलत तरीके से हेडलाइन बनाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही  है.” abpnews.abplive.in

https://youtu.be/70Va8XFWidQ   एक वीडियों

July 14, 2015 By Monica Gupta

कहानी फिल्मी नहीं

watching movie photo

Photo by NASA Goddard Photo and Video

 

कहानी फिल्मी नहीं

कुछ देर पहले मेरी एक सहेली का फोन आया. बहुत शोर भी आ रहा था. मैने पूछा कि शोर कैसा ?? इस पर वो बोली कि असल में, हम बाहुबली फिल्म देखने आए हुए है. और फिल्म शुरु हो चुकी है. बस बताने के लिए किया था फोन. मेरे ओह बोलने पर वो अचानक बोली अच्छा एक और फोन भी आ रहा है. जब मैने उसे किया तब बिजी था और बाय बोल कर फोन रख दिया.

मेरे चेहरे पर स्माईल थी क्योकि मैं उसकी इस दिखावे की आदत से बहुत परिचित हूं पर गुस्सा इस बात का भी आ रहा था कि फिल्म में उसके आगे पीछे बैठे लोग भी कितना डिस्टर्ब हो रहे होंगें.. अरे भई फिल्म देखने आए हो चुपचाप देखो और अगर बताना ही है तो इंंटरवल में बता दो ताकि दूसरों को असुविधा तो न हो … वैसे आप तो ऐसे हरगिज नही होंगें अगर हैं तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है…

कहानी फिल्मी नहीं

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