Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 6, 2015 By Monica Gupta

Take Care

Take Care

Pic by Monica Gupta

अभी कुछ देर पहले मणि मेरे घर खीर ले कर आई … अरे वाह खीर !!!! किस खुशी में … वो बोली कि जब पिछ्ले दिनों वो छुट्टियों में बाहर चले गए थे तो पौधे सूख गए थे. एक को तो बचा नही पाई थी पर एक पौधे को उसने बचा लिया. उसकी खूब देखभाल की सुबह दोपहर शाम पानी दिया और आज सुबह उसमे फूल खिला है. उसी खुशी में खीर … मैने उसकी आखों मे झिलमिलाती खुशी देखी.

सच, हम अक्सर पौधो के मामले मे सुस्त हो जाते हैं अगर उन्हे लगाया है तो पानी देना तपती गर्मी से बचाना भी हमारा ही फर्ज है. घर की सुंदरता बढाने के साथ साथ वो हमारे अच्छे दोस्त भी है. अगर आप भी बचा सकते हैं तो किसी को मुरझाने से बचा लिजिए… Take Care of plants …

पर्यावरण को सुरक्षित रखने के बहुत लोग अपने अपने तरीके से संदेश देते हैं … कोई टीवी पर, कोई नाटिका के माध्यम से तो कोई गीत गाकर तो कोई समाचार पत्र मे माध्यम से जनता को प्रेरित करते हैं …

दैनिक भास्कर ने भी एक अभियान छेडा

बरसात के इस मौसम में अपने नाम का पौधा लगाएं।

औषधीय पौधा लगाएंगे तो और भी उत्तम होगा।

एक पौधा हमारे लिए माध्यम बनेगा, अपने बचपन को फिर से जीने का।

मा नसून ने दस्तक दे दी है। फिलहाल इसने तेजी नहीं पकड़ी है। मगर पूरी उम्मीद है कि कुछ देर से ही सही, घटाएं जमकर बरसेंगी।

हर वर्ष की तरह, इस बार भी दैनिक भास्कर समूह अपने करोड़ों पाठक परिवारों के साथ मिलकर आज से पौधरोपण अभियान की शुरुआत कर रहा है। यही तो सही समय है, जब हमारे द्वारा लगाए गए पौधे धरती की गोद में आसानी से पल-बढ़ सकते हैं।

आइए, आज हम एक नई परंपरा की शुरुआत भी करते हैं। बरसात के इस मौसम में हम अपने नाम का एक पौधा लगाते हैं। और फिर उसकी देखभाल उतने ही प्यार से करें, जैसी हमारे बड़े हमारी करते थे। यकीन मानिए, जब हम रोज सुबह अपने नाम के इस पौधे को देखेंगे तो हमारे चेहरे पर कुछ वैसी ही मासूम मुस्कुराहट होगी, जैसी बचपन में हुआ करती थी। वह पौधा हमारे लिए माध्यम बनेगा, अपने बचपन को फिर से जीने का।

ऐसा हम अपने परिवार के सभी सदस्यों के लिए करें। परिवार का प्रत्येक सदस्य अपने नाम का एक पौधा लगाए। यदि भास्कर के करोड़ों पाठक अपने नाम का एक पौधा लगाएं और उसकी देखभाल करें, तो हम पर्यावरण को हराभरा करेंगे ही, आने वाली पीढ़ियों को अपने नाम की अनमोल विरासत भी देंगे।

 

 www.bhaskar.com

Via bhaskar.com

Take Care

July 6, 2015 By Monica Gupta

सादर चरण स्पर्श

बच्चों के लिए अच्छी आदतें

सादर चरण स्पर्श – आज घर पर एक मित्र आए . उनके छोटे  से बच्चे ने बहुत शालीनता से झुक कर पैर छुए. सच जानिए बहुत अच्छा लगा. बच्चों में इस तरह के संस्कार जरुर देने चाहिए. पुराने ऐतिहासिक धारावाहिकों में भी अक्सर  ये देखने को मिल जाता है. कुछ लोग पाव छूने पर आशीर्वाद देते हैं और पीठ थपथपाते हैं तो कुछ रोक लेते हैं कि अरे नही नही … हम इतने बडे अभी नही हुए हैं..!!!

सादर चरण स्पर्श

वैसे मेरी एक जानकार थी वो पैर छूने पर बस मुहं से ही बोलती थी खुश रहो पर सिर पर हाथ नही रखती थी … बाद मे महसूस किया कि वो कभी भी किसी को सिर पर हाथ रख कर आशीर्वाद नही देती थी पर दूर से ही खुश रहो बोल देती थी. वैसे पहले समय की अगर बात करें तो कई लोग जब अपने से बडे को पत्र लिखते थे तो वो शुरुआत ही सादर चरण स्पर्श से करते थे.

हिंदू परंपराओं में से एक परंपरा है सभी उम्र में बड़े लोगों के पैर छुए जाते हैं। इसे बड़े लोगों का सम्मान करना समझा जाता है. उम्र में बड़े लोगों के पैर छूने की परंपरा काफी प्राचीन काल से ही चली आ रही है। इससे आदर-सम्मान और प्रेम के भाव उत्पन्न होते हैं। साथ ही रिश्तों में प्रेम और विश्वास भी बढ़ता है। पैर छूने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण दोनों ही मौजूद हैं।

bow his head photo


जब भी कोई आपके पैर छुए तो सामान्यत: आशीर्वाद और शुभकामनाएं तो देना ही चाहिए, साथ भगवान का नाम भी लेना चाहिए। जब भी कोई आपके पैर छूता है तो इससे आपको दोष भी लगता है। इस दोष से मुक्ति के लिए भगवान
का नाम लेना चाहिए। भगवान का नाम लेने से पैर छूने वाले व्यक्ति को भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं और आपके पुण्यों में बढ़ोतरी होती है।
आशीर्वाद देने से पैर छूने वाले व्यक्ति की समस्याएं समाप्त होती है, उम्र भी बढ़ती है।
किसी बड़े के पैर क्यों छुना चाहिए:-
पैर छुना या प्रणाम करना, केवल एक परंपरा या बंधन नहीं है। यह एक विज्ञान है
जो हमारे शारीरिक, मानसिक और वैचारिक विकास से जुड़ा है। पैर छूने से केवल बड़ों का आशीर्वाद ही नहीं मिलता बल्कि अनजाने ही कई बातें हमार अंदर उतर जाती है।

पैर छूने का सबसे बड़ा फायदा शारीरिक कसरत होती है, तीन तरह
से पैर छुए जाते हैं। पहले झुककर पैर छूना, दूसरा घुटने के बल बैठकर तथा तीसरा साष्टांग प्रणाम। झुककर पैर छूने से
कमर और रीढ़ की हड्डी को आराम मिलता है। दूसरी विधि में हमारे सारे जोड़ों को मोड़ा जाता है, जिससे उनमें होने वाले
स्ट्रेस से राहत मिलती है, तीसरी विधि में सारे जोड़ थोड़ी देर के लिए तन जाते हैं, इससे भी स्ट्रेस दूर होता है। इसके
अलावा झुकने से सिर में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जो स्वास्थ्य और आंखों के लिए लाभप्रद होता है। प्रणाम करने का तीसरा सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे हमारा अहंकार कम होता है। किसी के पैर छूना यानी उसके
प्रति समर्पण भाव जगाना, जब मन में समर्पण का भाव आता है तो अहंकार स्वत: ही खत्म
होता है।

 

Rajasthan Patrika:secret of feet touching sanskar

जयपुर चरण स्पर्श व चरण वंदना को भारतीय संस्कृति में सभ्यता और सदाचार का प्रतीक माना जाता है। आत्मसमर्पण का यह भाव व्यक्ति आस्था और श्रद्धा से प्रकट करता है। यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो चरण स्पर्श की यह क्रिया व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से पुष्ट करती है। यही कारण है कि गुरुओं, (अपने से वरिष्ठ) ब्राह्मणों और संत पुरुषों के अंगूठे की पूजन परिपाटी प्राचीनकाल से चली आ रही है।

यही कारण है कि गुरुओं, (अपने से वरिष्ठ) ब्राह्मणों और संत पुरुषों के अंगूठे की पूजन परिपाटी प्राचीनकाल से चली आ रही है।

इसी परंपरा का अनुसरण करते हुए परवर्ती मंदिर मार्गी जैन धर्मावलंबियों में मूर्ति पूजा का यह विधान दक्षिण पैर के अंगूठे की पूजा से आरंभ करते हैं और वहां से चंदन लगाते हुए देव प्रतिमा के मस्तक तक पहुंचते हैं। rajasthanpatrika.patrika.com

कुछ भी कहिए पर चापलूसी से दूर होकर चरण स्पर्श आदर के साथ किया जाए तो सुखकर होता है …

सादर चरण स्पर्श … लेख आपको कैसा लगा !! जरुर बताईएगा !!

July 5, 2015 By Monica Gupta

संदेशे आते हैं

mobile messages photo

 

{व्यंग्य}

संदेशे आते हैं

मुझे तडपाते …..!!!!

यकीनन यह गीत बहुत साल पहले लिखा गया था उस समय मोबाईल भी नही होते थे पर अगर आज के संदर्भ मे बात करे तो यह गीत मेरी दुख भरी गाथा के बहुत निकट है.

आज जब लोगो को देखती हू कि हजार हजार वाला मैसेज पैक मोबाईल पर लेते है तो बहुत हैरानी सी होती है. यहां तो ये आलम है कि एक भी मैसेज आए तो बुरी तरह घबराहट होनी शुरु हो जाती है.
वैसे कुछ समय पहले तक ऐसा नही था. मुझे भी शौक था मैसेज का. मै भी बहुत चाव से मैसेज पढती थी और भेजती भी थी कि अचानक एक दिन रात को सपना देखा कि आफिस मे बास बहुत बुरी तरह से डांट रहे हैं. मै अचानक उठ बैठी.खुद को संयत किया ही था कि मेरा मोबाईल बहुत खूबसूरत ध्वनि के साथ बज उठा. दोस्त का मैसेज आया था.
“मै ईश्वर से प्रार्थना करुगां कि वो आपके सारे सपने सच करे”
मै अंदर तक कापं गई. फिर सोचा कि सपना ही तो है और खुद पर मुस्कुराई. मैने निश्चय किया कि सारी की सारी फाईले आफिस ले जाऊगी जिससे डांट पडने की कोई सम्भावना ही न रहेगी इसलिए एक एक कागज ले गई पर पैन ड्राईव ले जाना भूल गई जो सबसे ज्यादा जरुरी थी और फिर वही हुआ जो नही होना चाहिए था.
खैर, उस दिन की बात तो मैं महज इत्तेफाक समझ कर भूल गई. एक दिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि मै पुन: सोचने पर मजबूर हो गई. असल में, बदलते मौसम के चलते मुझे बहुत छींके आ रही थी. हलकी सी कम्कपी सी भी थी सोचा कि मलेरिया आदि का टेस्ट ही करवा लिया जाए आजकल बीमारी का पता थोडे ही लगता है. बस मैने टेस्ट करवा लिया और रिपोर्ट शाम को मिलनी थी. हाथ मे मोबाईल था कि अचानक एक अन्य संदेश आया.
”हमेशा पोजिटिव रहो और जिंदगी मे पाजिटिव ही सोचो”
मै मन ही मन बहुत खुश हुई कि कितनी अच्छी बात लिखी है इसलिए हाथो हाथ मैने अपने दोस्त को मैसेज किया कि धन्यवाद, वाकई मे संदेश बहुत ही प्यारा है. तभी मोबाईल घनघना उठा. मेरा मलेरिया पोजिटिव था. मै बुरी तरह से कांप गई कि अयं ये क्या हुआ. उस दिन से संदेश से डर लगने लगा कि पता नही क्या मैसेज आए और…!!!

काफी दिन तक शांति रही. फिर एक मैसेज भूचाल ले आया. मेरी परम प्रिय सखी मणि ने मैसेज किया कि
आज आपका कोई पता पूछ रहे थे. उनका नाम है सुख, शांति और समृधि मैने बता दिया अब वो आपके घर कभी भी आते ही होंगे.शुभकामनाए!
मै घबरा गई क्योकि सुख और समृधि का तो पता नही पर शांति बुआ तो उतनी चिपकू  हैं कि एक बार घर आ जाए तो महीने भर से पहले जाने का नाम नही लेती. मेरी धडकन जोरो जोरो से चलने लगी. तभी दरवाजे पर घंटी बजी और शायद बुआ….!!!
अब तो यह हाल है कि मै मोबाईल हाथ मे रखने से डरने लगी हूं. मैसेज की इतनी शानदार ध्वनि रखवाई थी पर वही अब हारर फिल्मो के रामसे का संगीत बन कर डराने लगा है. या आज के समय के “आहट … जरा सी आह्ट होती है तो दिल ///  ये लो अचानक फिर से एक और मैसेज  आया…
चलो प्रकृति की ओर ..!! असली सुख वही है.!!

अब आप यही सोच रहे होंग़े कि यह तो सच है प्रकृति के साथ रहना तो हमेशा सुखकर है. जरा मेरी बात तो सुनिए! असल मे “प्रकृति” यहां का सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल है. वहां पर बहुत गम्भीर किस्म के केस ही आते है.!!!

हे भगवान!!! क्या करु क्या नही समझ नही आ रहा !!! बस एक ही बात मुंह से निकल रही है कि संदेशे आते हैं मुझे तडपाते हैं ….!!!!

वैसे ये व्यंग्य आपको थोडा अजीब लग रहा होगा क्योकि आज का समय तो वटसअप और फेसबुक मैसेनजर का जमाना है पर मैं यह बताना चाहूगी कि ये व्यंग्य बहुत पुराना है उन दिनों मैसेज का ही जमाना था …:)

पर आपको …संदेशे आते हैं… व्यंग्य लगा कैसा ??? जरुर बताईगा 🙂

July 5, 2015 By Monica Gupta

एक सैल्फी स्वच्छता के नाम

एक सैल्फी स्वच्छता के नाम

एक सैल्फी स्वच्छता के नाम – बेशक दुनिया में सैल्फी का इतिहास बहुत पुराना हो पर अगर अपने देश की बात करें तो बात ज्यादा पुरानी भी नही है…लाखों  लोगो को सैल्फी का मतलब ही नही पता था…

एक सैल्फी स्वच्छता के नाम

चुनावो के दौरान जब मोदी जी ने अपना वोट डाल कर अपनी फोटो ली और वो सोशल मीडिया पर खूब चली तब पता चला कि ये सैल्फी होती है फिर तो मानों सैल्फी की बाढ सी ही आ गई थी और तब इसका प्रचलन शुरु हुआ. मोदी जी की सरकार आने के बाद सैल्फी को बहुत बढावा मिला और साथ ही साथ सोशल मीडिया भी बहुत सक्रिय हो उठा.

selfie with toilet

एक सैल्फी स्वच्छता के नाम

PICS

बीबीपुर गांव के सरपंच सुनील जागलान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरणा लेकर इसी महीने पंचायत की तरफ से बेटी बचाओ सैल्फी बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया। सरपंच की यह मुहिम खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन को इस कद्र भायी कि गत रविवार को उन्होंने रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम में इसका जिक्र कर डाला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रेडियो पर अपने मन की बात कार्यक्रम में गांव की पंचायत द्वारा हाल ही में आयोजित बेटी बचाओ, सैल्फी बनाओ प्रतियोगिता का जिक्र और इसकी तारीफ सुनकर बीबीपुर गांव के सरपंच सुनील जागलान गदगद हैं। सुनील जागलान ने कहा कि प्रधानमंत्री के मुंह से अपनी तारीफ सुनना उनके लिए अकल्पनीय था। See more…

 

PM was stuck on the idea of sarpanch , ‘#SelfieWithDaughter’ hit on Social media

 

सोशल साइट पर ट्रेंड कर रहे ‘#SelfieWithDaughter’ की कहानी भी कम रोचक नहीं है।

#SelfieWithDaughter’ कैंपेन के सोशल मीडिया पर हिट होते ही बीबीपुर गांव के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोग अपनी बेटियों के साथ तस्वीरों को सोशल साइट पर शेयर कर रहे हैं और कैंपेन लगातार ट्रेंड कर रहा है। Via jagran.com

हालाकिं इस सैल्फी की बहुत लोगों द्वारा आलोचना भी हुई कि इस से क्या भला होगा वगैरहा वगैरहा … इस सारे धटना क्रम को देखते हुए मन मे विचार आया कि क्यो ना स्वच्छता पर ही एक सैल्फी ली जाए और स्वच्छता की बात करें तो शौचालय से अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है… देश की बेटिया इस लिए भी मर रही हैं कि घर मे शौचालय नही है … शायद इसे देख कर वो भी अपने अपने घर के शौचालयों की सैल्फी लें और इसी बहाने शौचालयों का निर्माण ही जाए …

एक सैल्फी स्वच्छता के नाम 🙂

July 5, 2015 By Monica Gupta

Toilet – A Necessity

Toilet – A Necessity   कल एक खबर पढी कि दुमका झारखंड की 17 साल की किशोरी ने इसलिए आत्मह्त्या कर ली कि घर मे टायलेट नही था… इधर उधर खेतो में जाने से बहुत परेशान थी … लेकिन शायद परिवार ने इसकी मह्त्ता को कभी नही समझा कि ये भी  ज्यादा जरुरी है…. बेहद दुखद … महिलाओं की मान सम्मान आबरु शौचालय ही है … घर मे शौचालय होना बेहद जरुरी है. 

घर में शौचालय न होने पर बारात का  वापिस चला जाना  या महिला का घर छोड देना या शौचालय बनवाने की जिद ठान लेना तो सुना , शौचालय की वजह से महिला का रेप होना भी होना सुना और अब मौत भी इसकी वजह से जुड गई है…

भले ही  फिलम अभिनेत्री विद्या बालन समझाए या खिलाडी विजेंद्र … पर जब तक लोगो की सोच नही बदलेगी … तब तक कुछ नही हो सकेगा … !!! ये मेरा गांव गांव जाकर महिलाओं से पूछ्ने का पर्सनल अनुभव भी रहा है जब महिलाए बताती थी कि मुहं अंधेरे या शाम ढलने पर ही खेत जाना पडता है दिन मे कभी कोई दिक्कत आने पर रोक कर ही रखना पडता है और मासिक धर्म के दिनों में तो बहुत मुश्किल से दो चार होना पडता है… बेशक मानसिकता यह भी देखने को मिली कि जो शौचालय के लिए पैसा मिला उसे किसी और चीज मे खर्च कर दिया … क्योकि शौचालय की अहमियत समझ नही आई …  बी ए पार्ट वन मे पढने  वाली  लडकी खुले मे शौच जाना नही सहन कर पाई और आत्महत्या कर ली  … बेहद अफसोस हुआ … जागो जनता जागो

  cartoon toilet by monica gupta

 Toilet – A Necessity

| Minor | Committed | Suicide | Dumka | | Hindi Latest News

घर में टॉयलेट न होने पर शादी टूटने और ससुराल छोड़ने के मामले तो आपने सुने होंगे, लेकिन अब ऐसी घटना सामने आई है, जो किसी को बेचैन कर सकती है. झारखंड में 17 साल की एक लड़की ने घर में टॉयलेट न होने पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. बताया जा रहा है कि झारखंड के दुमका जिले में रहने वाली लड़की ने माता-पिता … See more…

July 5, 2015 By Monica Gupta

Audio – Poem- Monica Gupta

Audio – Poem- Monica Gupta

आप सुनिए मेरी लिखी कविता कुछ देर”  कई बार जिंदगी में ऐसे पल आते हैं जब मन एक दम अकेला और मायूस सा हो जाता है… अब ये अपनी ऊपर हैं कि दुखी मन को लेकर दुखी हो जाओ या फिर मनोबल बनाए रखने के लिए मन को खुश रखो … मैने मन को ही खुश रखा क्योकि उसमे मेरा ही भला होना था … ज्यादा तनाव रखती तो तबियत खराब हो जाती और डाक्टरों के चक्कर , अस्पताल के चक्कर लगाने कौन से आसान है भई … इसलिए सकारात्मक सोच लिए जीओ और देखना समस्या का हल भी निकल जाएगा… पर …  बस एक ही कंडीशन है कि आप अपने कार्यों के प्रति ईमानदार रहना होगा …!!!

 

 

rainbow in a sky photo

Photo by VinothChandar

https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2015/07/audio-kuch-der-poem.wav

 

मैं हँसी
तो फूल मुस्कुरा उठे
मैनें छेड़ा तराना
तो इन्द्रधनुष और खिल उठा……
जिसकी कामना की……..
वही मिलती चलती गर्इ….
मन सुख समुंद्र में
लगा गोते लगाने
चारों और खुशनुमा माहौल
लगा मन में अजब स्फूर्ति भरने
ये धरती……… ये आकाश
ये चाँद …………ये तारे
सभी लगे मस्ती में झूमने
तभी…………….
टूटी तंद्रा मेरी
बीमार काया
टूटा पलंग, सूखी रसोर्इ
यहाँ गरीबी का हो रहा था ताँड़व
अचानक
फीकी हँसी मेरे अधरों पर खिल उठी
चलो………….
कोर्इ नही कल्पना तो है मेरे साथ
जब चाहे उसे नया रूप देकर
खुद को बहला तो सकती हूँ
कुछ देर जी तो सकती हूँ………….
कुछ देर जी तो सकती हूँ……………

कैसी लगी मेरी ये कविता ” कुछ देर” … जरुर बताईगा 🙂

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