Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 2, 2015 By Monica Gupta

Digital India Weak

Digital India Weak /week ???

Digital India  week by  monica gupta   Digital India Weak / week ??               बेशक देशवासी Digital India week  को लेकर बेहद उत्साहित हैं सब कुछ नेट से जुड जाएगा और आराम ही आराम होगा … पर मूल भूत समस्या का क्या करें समस्या है नेट का न चलना या नेट का बेहद धीरे चलना !!!  तभी तो आज  Digital India week ???मनाए  या Digital India Weak !!!

 

PHOTOS: Digital India Week: PM Narendra Modis 15 point dream | The Indian Express

“I dream of a digital India where 1.2 billion connected Indians drive innovation.” (Express photo by Anil Sharma)

“I dream of a digital India where knowledge is strength and empowers people.” (Express photo by Anil Sharma)

“I dream of digital India where quality healthcare reaches right upto the remotest areas through e-health care.” (Express photo by Anil Sharma)

“I dream of digital India where cyber security becomes an integral part of national security.”

“I dream of digital India where there is mobile and e-banking for financial inclusion.”

“I dream of digital India where e-commerce drives entrepreneurship.”

“I dream of digital India where the world looks to India for the next big idea.”

“I dream of digital India where netizens are empowered citizens.” See more…

‘M-Governance (Mobile, Not Modi),’ Quips PM at Digital India Push: 10 Facts

Prime Minister Narendra Modi launching the Digital India Week. See more…

July 1, 2015 By Monica Gupta

Loudspeakers

Loudspeakers- कुछ ही देर पहले मेरी सहेली मणि का फोन आया. अरे !! आवाज ही नही पहचानी गई.. मैने पूछा क्या हुआ… पर आवाज ही नही निकल रही थी कल तक तो ठीक थी एक ही दिन में …. !!! मैं  तुरंत उसके घर गई. उसकी तो आवाज बिल्कुल  ही बंद थी.

मैने गुस्से मे कहा कि कितनी बार मना किया है बर्फ मत खाया कर … उसने  मायूस सा होते हुए इशारे से बताया कि नही खाई. फिर मैने पूछा खट्टी चटनी ?? उसने फिर  न की मुद्रा मे गर्दन हिला दी !! अरे तो फिर हुआ क्या? उसने लिख कर बताया कि कल किसी समारोह मे गए थे वहां डीजे पर  गाने बहुत तेज आवाज मे बज रहे थे. वहां बहुत जानकार भी मिले और उनसे बात भी करनी थी इसलिए महा भयंकर शोर मे कान के पास चिल्ला चिल्ला कर बोलना पडा इसलिए गला बैठ गया.

ओह ..नो !! इस पर उसने लिखा अरे तू क्यो लिख रही है मेरे कान तो ठीक है … ह हा हा !! मैने कहा ये भी एक बडा चिंता का विषय है. कान फूडू संगीत भी आज कल स्टेटस सिंबल बन गया है. कुछ दिन पहले मै भी एक प्रोग्राम मे गई  वहां भी बहुत तेज संगीत बज रहा था इस पर जब  मालिक से बोला कि क्या संगीत की ध्वनि धीमे  हो सकती है  इस पर वो बोले अजी आप कमाल करती हैं इतने पैसे खर्च किए हैं डीजे के लिए…  आवाज  कम नही होगी..

और पूरे कार्यक्रम में हम इशारों मे ही बात करते रहे… या फिर वटस अप पर मैसेज भेज कर बाते करते रहे. मेरी सहेली ने जब अपना मोबाईल देखा तो बीस मिस्ड काल थी उसके पति बाहर बुलाने के लिए कर रहे थे… पर सुनाई ही नही दिया…मैने सलाह दी कि ऐसे मे वाईब्रेशन पर लगा देना चाहिए और मोबाईल हाथ में पकडे रहना चाहिए.

वैसे  वो भी अच्छा अनुभव था. मूड खराब करने का कोई फायदा नही क्योकि लोग नही सुधरेंगें पर हम नई नई भाषा जरुर सीख जाएगे.

Loudspeakers

 

 

Loudspeakers photo

Be kind to your ears, listen quietly

Give it a try, turn the volume down a little, and once you get used to listening quietly, turn it down a little more. Granted, quiet listening works best in quiet places; in noisy environments stick with in-ear, closed-back, or noise-canceling headphones. Avoid ear buds and open-back headphones, they don’t hush external noise so you have to play music a lot louder than you might realize.

If you do the bulk of your listening in noisy places, continuing with ear buds (the type that come with phones) may eventually lead to hearing loss from continued exposure over a long period of time to excessively loud sound. I covered how ear buds, in-ear, and closed- and open-back headphones work and how they differ on previous blogs.

If you have to listen in noisy places or while commuting, consider buying in-ear or closed-back full-size headphones to seal out noise. When you reduce the background noise level competing with the music, you can turn the music’s volume way down, and the difference can be very significant. Even inexpensive closed-back or in-ear headphones will help you listen more quietly.

I find with the better-sounding in-ear and closed-back headphones I can listen at a much lower volume and still not feel like I’m losing detail or the music’s energy. Quiet listening draws me in more, so I listen more attentively. Once you get used to listening quietly it will become the new norm, and your ears will suffer less listening fatigue.

Noise-canceling headphones block more noise than any other type of headphone, so you can turn the music down even more, but most noise-canceling models don’t sound as good playing music as equivalently priced closed-back headphones. See more…

July 1, 2015 By Monica Gupta

Foot Steps

cartoon neta no by monica gupta

Foot Steps  एक समय था जब हमारे देश मे ऐसे नेता थे जिनके पद चिन्ह यानि Foot Steps का हम अनुकरण करते पर आज के दौर में कोई भी ऐसा नेता नही जो इस काबिल हो कि हम उनका अनुकरण करके उनसे  प्रेरणा पा सकें

बहुत दुख होता है कि हम भविष्य के लिए क्या सहेज कर रख रहे हैं और भावी पीढी को क्या देकर जाएगें …

July 1, 2015 By Monica Gupta

दैनिक जागरण में कार्टून

collage DJ 16

दैनिक जागरण में कार्टून … दैनिक जागरण में मुद्दा के अंतर्गत कुछ कार्टून … समाज में फैले अलग अलग गम्भीर  मुद्दों पर चर्चा करके उनका हल निकाला जाता था … उसी मे प्रकाशित कुछ कार्टून

July 1, 2015 By Monica Gupta

स्वच्छता का महत्व – स्वच्छता का अहसास

Total Sanitation Campaign in Haryana

स्वच्छता का महत्व समझना बहुत जरुरी है. लोगों को स्वच्छता का अहसास करवाना जरुरी है ताकि वो इसकी मह्त्ता समझ सकें. इसके लिए सभी को मिल कर पहल करनी होगी

 

स्वच्छता का महत्व

swachata ka mahatva

कैसे करवाया स्वच्छता का अहसास

स्वच्छता का महत्व जहन में रखते हुए स्वच्छता का अहसास करवाया गया.

बात  2007 -2008 की है तब स्वच्छता अभियान हरियाणा के जिला सिरसा  में जोर  शोर से चला हुआ था. Zee News की रिपोर्टर  हम इस अभियान की  डाक्यूमैंट्री बना रहे थे तो स्वाभाविक है गांव गांव जा कर लोगो से इस अभियान के बारे मे साक्षात्कार ले रहे थे.

गांव में जा जा कर लोगों को समझाना कि खुले में शौच न जाओ ये अच्छा नही है …. आसान नही था. क्योकि बरसों से बाहर जाकर शौच करने का रिवाज रहा है तो कहां मानेगें ये लोग ….  फिर भी चलो सोच में उनकी थोडा बदलाव आया. कुछ गांव के लोग बहुत  समझदार थे  तो कुछ गांव के लोग बिल्कुल न समझ  और कुछ तो लडने को ही उतारु हो जाते कि हम तो बाहर शौच जाएगे कर ले  जो करना है …  ऐसे मे उनकी सोच बदलने मॆ कुछ समय लगा.

अभियान के दौरान एक गांव की महिलाए  सामने आने से कतरा रही थी.  बहुत समझाया  और कुछ देर बाद थोडी सी महिलाए सामने आई. आते ही महिलाओं ने मुझे घेर लिया और बोली कि हम न जाने इस अभियान को … हम को ये बता दो कि पैसा कितना मिलेगा… पैसा ??? किस बात का पैसा ??? इस पर वो बोली कि हम निगरानी करेगी. सुबह शाम गांव वालों को बाहर  जाने से रोकेगी तो समय भी तो लगेगा उसी लिए पूछ रहे हैं कि पैसा कितना लगेगा… उन दिनों मैं “जी न्यूज चैनल” की संवाददाता भी हुआ करती थी और  प्रशासन की ओर से डोक्य़ूमैंटी भी  बना रहे थे. मुझे ज्यादा बोलने का अनुभव तो नही था पर चूकि इस अभियान को बहुत नजदीक  से देख रही थी  और जिले के ADC डाक्टर युद्दबीर सिह ख्यालिया जोकि इस अभियान को आगे बढा रहे थे उनकी बाते सुन सुन कर मन में जोश भरा हुआ था. मन में  ढेरों विचार उमड रहे थे.

उन्हे  पेड के नीचे बैठा दिया और बोला कि बताओ कितना पैसा चाहिए. कोई बोली पाचं सौ तो कोई बोली सात सौ रुपया महीना तो होना ही चाहिए. क्या ??? मैने कहा बस ?? 500 – 700 रुपए महीना. उन्होनें सोचा कि बहुत कम बोल दिया शायद तो एक खडी होकर बोली हजार मैडम जी हजार चाहिए.  क्या ??? सिर्फ हजार !!! सफाई की कीमत सिर्फ हजार रुपए. इस पर वो फिर सोचने लगी और बोली पद्रंह सौ रुपए … फिर महिलाओं मे कानाफूसी होने लगी.

मैने उन्हें शांत करवाया और बोला कि ये स्वच्छता अभियान है स्वच्छता अभियान … इस अभियान के अगर आप हजार क्या लाख भी मांगोगे तो भी कम है क्योकि ये जो काम आप लोग करने जा रहे हो यह अमूल्य है बहुमूल्य है इसकी कीमत का तो कोई अंदाजा ही नही लगाया जा सकता.

कोई सिर पर पल्लू डाले तो कोई नाक पर पल्लू रखे मेरी बात गम्भीरता से सुन रही थीं. मैने कहा अच्छा चलो एक बात बताओ … आपको ये पता है कि पहले हमारा देश आजाद नही था. बहुत लोगों ने कुर्बानी दी … कुछ की आवाज आई कि म्हारा दादा ससुर , ताऊ, ने भी हिस्सा लिया था … मैने कहा कि अरे वाह !! ये तो बहुत अच्छी बात है कि आप उस परिवार से हो … अच्छा ये तो बताओ कि क्या आपने कभी सुना कि जो लोग देश के लिए लडे. स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया उन्होने ये कहा हो कि हम इस लडाई मे तभी हिस्सा लेंगें जब आप हमें पैसे दोगे .. सब हंसने लगी और बोली ऐसे थोडे ही न होता है बल्कि जिन जिन ने इस आंदोलन में  हिस्सा  लिया उन्होनें अपने गहने, जेवर तक भी दान मे दे दिए थे. बिल्कुल … मैने कहा  बस दिल में एक ही लग्न थी, जज्बा था और  निस्वार्थ सेवा भाव था कि हर हालत में देश को आजाद करवाना ही है कितने लोग तो बेनाम ही रह कर देश के लिए लडे और जान कुर्बान कर दी  कि देश को आजाद करवाना है और देखो सच्चे मन से देश के लिए लडे और आज हम आजाद है.

आज भी एक लडाई हमे लडनी हैं और वो लडाई है गंदगी के साथ … उसका जड से  सफाया करना है  और आपका साथ चाहिए आपकी निस्वार्थ सेवा भाव चाहिए और आप है कि पैसे मांग रहे हो ..

इन बातों ने उनको सोचने पर मजबूर कर दिया . मैने कहा कि इतिहास बदलने जा रहे हो  इतिहास आप लोग .. क्या कभी सोचा है आपने … सफाई के मामले मॆं पूरी दुनिया में देश एक  देश नम्बर एक पर होगा  हमारा देश वो भी आप लोगो की वजह से …

इतने में कुछ महिलाए बोल पडी … न जी हम कुछ नही लेंगें … सफाई रखेंगें और अपने गांव का देश मॆं नाम करेंगें …

इनकी बात सुनकर मन खुशी से नाच उठा कि मैनें भी  स्वच्छता की अलख जगाई.  कुछ लोगों को तो प्रेरित किया स्वच्छता  के लिए  कम से कम … 😀

जिस जोश मे ये अभियान सिरसा में आगे बढा वो वाकई मे देखने लायक था.  जिसका मुख्य श्रेय डाक्टर ख्यालिया और उनकी पूरी टीम को जाता है. निसंदेह अगर गांव वाले आगे न आते जागरुक  न होते तो स्वच्छता कभी नही आ सकती थी इसलिए गांव वाले, गांव के सभी स्कूल के  टीचर, पंच सरपंच की बेहद मह्त्वपूर्ण भूमिका रही. छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग ने इस अभियान मे योगदान दिया.

तब सिरसा के 333 गांवो मे से 260 गांवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार मिला . जिसे महामहिम प्रतिभा पाटिल जी ने हिसार में सम्मानित किया. सिरसा के हर गांव मॆ जय स्वच्छता के नारे गूंजने लगे और लोग खुशी से नाच उठे.

 

 

 

July 1, 2015 By Monica Gupta

स्वच्छता के नारे

101-swachhta-ke-naare

स्वच्छता के नारे / स्वच्छता पर नारे

स्वच्छता हम सभी के लिए बेहद जरुरी है जानते हैं हम सब पर फिर भी मानते नही है और गंदगी फैलाए चले जाते हैं. ये कहना भी सही नही है कि गंदगी गांव के असभ्य और अनपढ लोग फैलाते हैं.

गंदगी पढे लिखे लोग भी बराबर की ही फैलाते हैं. हैरानी की बात तो तब हुई जब गांव के लोगों मे स्वच्छता की अलख जगाई गई उन्हें खुले मे शौच जाने से होने वाली बीमारियों के बारे मॆं बताया गया तो ना सिर्फ उन्होने घर में शौचालय बनवाया बल्कि दूसरों को भी प्रेरित करने के लिए नारे भी बना दिए.

ये स्वच्छता के नारे बनाए हैं हरियाणा में  जिला  सिरसा के गांव वालो ने …  जिला प्रशासन के समझाने पर  एक नई चेतना जागी और स्वच्छता को एक नया आयाम दिया …

नारे स्वच्छता अभियान के

गाँव वालों ने तो स्वच्छता  अभियान को नर्इ दिशा देने के लिए ढ़ेरों नारे बना दिए।
• मूँगफली में गोटा, छोड़ दो लोटा।

• ना जिलें में, न स्टेट में, सफार्इ सारे देश में

• 1-2-3-4, कुर्इ खुदवा लो मेरे यार

• सफार्इ करना मेरा काम, स्वच्छ रहें हमारा गाँव।

• सुन ले सरपंच, सुन ले मैम्बर, कुर्इ खुदवा लें घर के अंदर

• बच्चें, बूढ़े और जवान, सफार्इ का रखो ध्यान
• आँखों से हटाओ पटटी, खुले में न जाओ टटटी

• खुले में शौच, जल्दी मौत

• नक्क तै मक्खी बैन नी देनी, खुल्ले में टट्टी रहन नी देनी

• लोटा बोतल बंद करो, शौचालय का प्रबन्ध करों।

• मेरी बहना मेरी माँ, खुले में जाना ना ना ना….

• ताऊ बोला तार्इ से, सबसे बड़ी सफार्इ सै

• खुले में शौच, पिछड़ी हुर्इ सोच

इस अभियान से लम्बे समय तक जुडे रहने के कारण बहुत नारे पढे सुने और देखे … वाकई नारों में एक अलग ही शक्ति है जागरुक करने की… इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैने भी कुछ नारे लिखे , कुछ गांव वालो के लिए और  कुछ नारे नेट से सकलिंत किए और उस ई बुक को

” 101 स्वच्छता के नारे” का नाम दिया…  लिंक नीचे दिया है …

 

101-swachhta-ke-naare

101-swachhta-ke-naare

महात्मा गांधी भी स्वच्छता पर जोर देते रहे और पंडित नेहरु भी स्वच्छता की अहमियत जनता को समझाते रहे.

महात्मा गाँधी

स्वच्छता स्वतंत्रता से भी महत्वपूर्ण है
स्वच्छता में ही र्इश्वर का वास होता है

पं0 जवाहर लाल नेहरू

जिस दिन हम सबके पास अपने प्रयोग के लिए एक शौचालय होगा मुझे पूर्ण विश्वास है कि उस दिन देश अपनी प्रगति की चरम सीमा पर पहुँच चुका होगा।

जय स्वच्छता

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