Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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June 16, 2015 By Monica Gupta

Nature

Nature

 plant and sun photo

Nature  (poem)

एक तरफ
तपता सूरज
जलती धरा
मन बेचारा
अकेला पड़ा………बेसहारा
दूसरी ओर
नन्हा पौधा
गर्मी की मार
सह ना सका
और
पनपते ही कुम्हला गया
काश
मिल जाता
किसी का सहारा
या फिर शीतल धरा
और पनप जाता
पर……
वो चुपचाप…….खामोश सा
पड़ा रहा
मन भी ऐसा ही है
खामोश, चुपचाप
एकदम अलग-अलग
काश……..
मन कुछ कर सकता
झुलसते पौधे को देखकर
सहला सकता
तभी अचानक
रूक गए मेरे पानी पीते हाथ
उड़ेल दिया पानी
उस नन्हें पर
तब तक
सूरज की लौ
पड़ चुकी थी मद्धम
ठण्ड़े झोंको से
आने लगी उसमे जान
इधर………..
मुस्कुरा उठा मेरा मन
उधर….
जलती धरा भी
शांत हो गर्इ
अब……..
नन्हें को मिल गया था एक सहारा
शीतल धरा का
एक तरफ……….
प्रकृति खिलखिलार्इ
दूसरी तरफ……….
मन मुस्कुराया

Nature

June 16, 2015 By Monica Gupta

योग दिवस

cartoon Yoga diwas by monica gupta21 जून को योग दिवस मनाया जाएगा. सरकारी दफ्तर के सभी  कर्मचारी  इसी में जुटे हैं और कार्य शून्य …

| Zee News Hindi

नयी दिल्ली : सार्वजनिक प्रसारक दूरदर्शन ने राजपथ पर आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह का गणतंत्र दिवस समारोह जैसा कवरेज करने की योजना तैयार की है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शरीक होंगे।

सूत्रों ने बताया कि समारोह के कवरेज के लिए दूरदर्शन 20 हाईडेफिनिशन कैमरे लगाएगा। संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के तौर पर घोषित किया है। दो कैमरे इंडिया गेट के उपर लगाए जाएंगे और इंडिया गेट से विजय चौक तक के विहंगम दृश्य को दिखाने के लिए हाइड्रोलिक क्रेन पर कई कैमरे लगाए जाएंगे। ऐसा अनुमान है कि समारोह के दौरान योगासन करने के लिए रिकॉर्ड संख्या में लोग हिस्सा लेंगे। सूत्रों ने बताया कि करीब 18 कैमरे मुख्य मंच को कवर करेंगे और प्रस्तुतियों का पूरा कवरेज सुनिश्चित करेंगे।

इसके सीधे प्रसारण के लिए कई आउटडोर प्रसारक वाहनों को भी सेवा में रखा जाएगा। सूत्रों ने बताया है कि इसका कवरेज अंतरराष्ट्रीय मानक का हो यह सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक उपकरण का इस्तेमाल होगा।

समारोह के सीधे प्रसारण के लिए इंजीनियर, सिनेमेटोग्राफर और अन्य संबंधित विशेषज्ञों का एक विशेष दल ड्यूटी पर होगा। क्रू के ज्यादातर सदस्यों को स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, कॉमनवेल्थ खेल इत्यादि जैसे विशाल समारोहों के आउटडोर प्रोडक्शन का अनुभव हासिल है। | Zee News Hindi

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : देश-विदेश में समारोहों में हिस्सा लेंगे सरकार के वरिष्‍ठ मंत्री

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री देश-विदेश में समारोहों में हिस्सा लेंगे। बीजेपी ने भी सभी राज्य इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए कहा है। मगर ये नसीहत भी दी है कि इस मौक़े पर पार्टी का झंडा या चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने के बजाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोटो लगाया जाए।

सूत्रों के मुताबिक़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में राजपथ पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पटना में योग दिवस के कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज न्यूयार्क, वित्त मंत्री अरुण जेटली सैन फ्रांसिस्को और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला शिकागो के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे…..

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June 16, 2015 By Monica Gupta

स्वच्छता एक अहसास

स्वच्छता एक अहसास

sawacchta  book by monica gupta

स्वच्छता एक अहसास…

2009 में प्रकाशित हुई ये मेरी तीसरी किताब है. 56 पेज की है तो ये छोटी सी किताब पर इस किताब में आसाधारण गांव के लोगों की जागरुकता का वर्णन है कि कैसे मात्र 90 दिन में उनमें जागरुकता आई और हरियाणा के सिरसा के 333 गांवों को स्वच्छ बना दिया.

स्वच्छता एक अहसास

पुस्तक को लेकर आपके मन में ढ़ेरो सवाल उठ रहें होंगें कि आखिर इस पुस्तक के माध्यम से स्वच्छता का अहसास कैसे करवाया जा सकता है। सच पूछो तो, हम सभ्य समाज के सभ्य नागरिक हैं, पढे़- लिखे और समझदार भी हैं लेकिन सही मायनों में देखा जाए तो अनपढ़ और असभ्य की श्रेणी में आते हैं क्योंकि जिस समाज में हम रहतें हैं उसी को गंदा कर रहें हैं।

यहां बात भ्रष्टाचार की नहीं बलिक उस कूडे़- कर्कट की है जो हमारें चारों तरफ फैला है और कूडेदान एक तरफ खडे़- खडे़ गंदगी का मुँह ही ताकते रह जातें हैं और तो और सड़क के किनारें, दीवारों की ओट को शौचालय का रूप देकर दिन-रात गंदगी में इजाफा किया जा रहा है। सड़क पर चलते हुए थूकना और पूरी सड़क को कूडादान समझना आम बात है।

अगर यह पढ़े- लिखे सभ्य समाज को चित्रित करता है तो गाँव वालों को किस श्रेणी में रखेंगें क्योंकि वो तो वैसे भी अनपढ़, सीधे-साधारण गरीब, किसान और मज़दूर होतें हैं।
स्वच्छता एक अहसास
भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत गाँव वासियों की सोच में एक ऐसा बदलाव, ऐसी जागरूकता देखने को मिली जिसकी सपनें में भी कल्पना नहीं की जा सकती थी। बस, यहीं मुझे पुस्तक लिखने का मकसद मिल गया कि आज जो अहसास इन गाँव वासियों को हो रहा है उसकी महक उन लोगों तक भी पहुँचे जो अभी तक इससे अछूते हैं।

मैनें अपनी तरफ से पुस्तिका में स्वच्छता और उससे आए बदलाव के बारे में जानकारी देने की पूरी कोशिश की है और मुझे उम्मीद ही नही पूरा विश्वास है कि इसको पढ़ने के बाद आप भी और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में मदद करेंगें।

स्वच्छता एक अहसास  …

स्वच्छ भारत मिशन …

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) पंचायतीराज विभाग, भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना है जिसका पूर्व में नाम निर्मल भारत अभियान था। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के निम्न उद्देश्य हैं:-
1. ग्रामीण क्षेत्रों के सामान्य जीवन स्तर में सुधार लाना।
2. समस्त ग्राम पंचायतों को निर्मल एवं स्वच्छ बनाना।
3. ग्रामीण क्षेत्र के समस्त शासकीय विद्यालयों को स्वच्छता सुविधाओं (स्वच्छ स्कूल शौचालय जलापूर्ति सहित) से आच्छादित करना साथ ही छात्र-छात्राओं को स्वास्थ्य, शिक्षा एवं साफ-सफाई की आदतों को बढ़ावा देना।
4. ग्रामीण क्षेत्र के समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों को स्वच्छता सुविधाओं से आच्छादित करना।?
5. सामान्य पर्यावर्णीय स्वच्छता हेतु ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबन्धन अर्थात् कूड़े कचरे एवं बेकार पानी की उचित निकासी पर कार्य करना।
मानव मल एवं पर्यावरण में इधर-उधर पड़े कूड़े-कचरे एवं बेकार पानी के कारण विभिन्न प्रकार के रोग जैसे डायरिया, मलेरिया, कालरा, जापानी इन्सेफ्लाइटिस, पोलियो जैसी भयानक बीमारियों की रोकथाम हेतु, जल स्रोतों को सुरक्षित रखने हेतु, पर्यावर्णीय स्वच्छता हेतु यह योजना अत्यन्त आवश्यक है।हमारे प्रधान मंत्री जी द्वारा आरम्भ किया गया

महात्मा गांधी ने जिस भारत का सपना देखा था उसमें सिर्फ राजनैतिक आजादी ही नहीं थी, बल्कि एक स्वच्छ एवं विकसित देश की कल्पना भी थी। महात्मा गांधी ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर मां भारती को आजाद कराया। अब हमारा कर्त्तव्य है कि गंदगी को दूर करके भारत माता की सेवा करें। मैं शपथ लेता हूं कि मैं स्वयं स्वच्छता के प्रति सजग रहूंगा और उसके लिए समय दूंगा।

हर वर्ष 100 घंटे यानि हर सप्ताह 2 घंटे श्रमदान कर के स्वच्छता के इस संकल्प को चरितार्थ करूंगा। मैं न गंदगी करूंगा न किसी और को करने दूंगा। सबसे पहले मैं स्वयं से, मेरे परिवार से, मेरे मुहल्ले से, मेरे गांव से एवं मेरे कार्यस्थल से शुरुआत करूंगा।

मैं यह मानता हूं कि दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखते हैं उसका कारण यह है कि वहां के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं। इस विचार के साथ मैं गांव-गांव और गली-गली स्वच्छ भारत मिशन का प्रचार करूंगा। मैं आज जो शपथ ले रहा हूं, वह अन्य 100 व्यक्तियों से भी करवाऊंगा। वे भी मेरी तरह स्वच्छता के लिए 100 घंटे दें, इसके लिए प्रयास करूंगा। मुझे मालूम है कि स्वच्छता की तरफ बढ़ाया गया मेरा एक कदम पूरे भारत देश को स्वच्छ बनाने में मदद करेगा।

 

राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को अब घरों में शौचालय बनाना अनिवार्य कर दिया है.

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को अब घरों में शौचालय बनाना अनिवार्य होगा. सरकार से पचास हजार का कर्जा लेने वाले काश्तकारों के लिए भी कर्ज लेने के लिए इस शर्त को पूरा करना होगा.

राज्य सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत मार्च 2018 तक प्रदेश को खुले में शौच से मुक्त करने के अनूठे कार्यक्रम में ऐसी कई शर्तें जरूरी की गई है.

खास यह कि कर्मचारियों को 20 जून तक शर्त की पालना के लिए निर्धारित प्रपत्र में उद्घोषणा करनी होगी। इसके आधार पर ही उन्हें जुलाई माह में होने वाली वार्षिक वेतन वृद्धि, मानदेय,ऋण आदि स्वीकृत के लाभ दिए जाएंगे. इस कार्यक्रम की निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय कर रहा है. : , – Regional News – Samay Live

June 16, 2015 By Monica Gupta

मैं हूं कौन

व्य़ंग्य

मैं हूं कौन

अरे दीवानों … मुझे पहचानो … कहां से आया … मैं हूं कौन ???
मैं हूं कौन .. जी हाँ, क्या आप जानते हैं कि मै हूँ कौन …चलिए मैं हिंट देता हूँ .. सबसे पहले मै यह बता दूं कि मैं आम आदमी नही हूँ . मुझसे मिलने के लिए लोगो की भीड लगी रहती है पर मै जिला उपायुक्त नही हूँ. मेरे आगे पीछे 4-4 अंगरक्षक घूमते हैं पर मै पुलिस कप्तान भी नही हूँ .मेरे पीछे दिन रात जनता पडी रहती है पर मै कोई स्वामी जी या कही का महाराज भी नही हूँ. मेरे बच्चे स्कूल मे प्रथम आते हैं और सभी स्कूल के प्रोग्रामो मे हिस्सा लेते हैं सारा स्टाफ मेरा सम्मान करता है पर मै स्कूल का प्रिसीपल भी नही हूँ.
जिले मे कोई भी कार्यक्रम होता है तो मुझे जरुर बुलाया जाता है . मेरे साथ फोटो खिचवाई जाती है. रिबन कट्वाया जाता है ताली बजा कर स्वागत किया जाता है मेरी बातो को समाचार पत्र मे मुख्य स्थान दिया जाता है पर मै किसी समाचार पत्र का सम्पादक भी नही हूं. मेरे पास सभी खास अफसरो के फोन आते रहते है या मै जब भी फोन करता हू तो वो तुरंत पहचान जाते हैं और मुझे और मेरे परिवार को भोजन पर बुलाते हैं. मुझे देख कर कौन कितना जला भुना या कितना खुश हुआ मैं सब जानता हूँ.

फिर  मैं हूं कौन…..

 

spoon  photo

 

आप सोच रहे होगें कि मैं यकीनन ही कोई पागल हूं जो ऐसे ही बात किए जा रहा है तो जनाब, मै बताता हू कि मै कौन हूँ . मै हूँ “चमचा” एक दम चालू चक्रम चमचा .लोगो की चापलूसी करने मे सबसे आगे .थूक कर चाट्ने मे सबसे आगे . शहर मे कौन बडा अफसर है कौन नेता है उनकी पत्नी, बच्चे और तो और उनके कुतॆ का नाम उसकी पसंद ना पसंद सभी मुझे पता है . सभी को खुश रखना मेरा परम धर्म है तभी तो लोग मुझे फोन करके मुझसे मिलने को बैचेन रहते हैं क्योकि वो जानते है कि मै ही उनके काम करवा सकता हूँ.
मै भी महान हूँ पता है जब मेरा मन होता है तब फोन उठाता हूँ

जब मन नही होता तब फोन उठाता ही नही चाहे कितनी घंटी बजती रहे. मै जानता हूँ कि जिसने मेरे पास चक्कर लगाने है वो तो लगाएगा ही चाहे घंटो ही इंतजार ही क्यो ना करना पडे
ना सिर्फ बडे लोगो से बलिक मीडिया से भी मै बना कर रखता हूँ. समय समय पर मैं प्रैस कांफ्रैस करता रहता हूँ ताकि वो सैट रहे. लोगो के काम के लिए लंबी कतार मेरे घर या दफतर मे कभी भी देखी जा सकती है . पता है मै गिरगिट की तरह रंग बदलने मे माहिर हूँ.

कल जो मेरा जानी दुश्मन था आज वो मेरे साथ बैठ कर चाय पी रहा होता है.या आज मै जिसके संग चाय पी रहा हू वो कल मेरा जानी दुश्मन बन सकता है काम निकलवाने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ किसी भी हद तक जा सकता हूँ. बस अधिकारी लोग खुश रहने चाहिए.

ये चमचागिरि मुझे अपने बडो से विरासत मे नही मिली बलिक समय और हालात को देखते हुए मुझे सीखनी पडी .मै जानता हूँ कि भले ही लोग मुझे पीठ पीछे गाली देते होगें मुझे अकडू की उपाधि भी दे दी होगी पर मुझे कोई असर नही. मै आज जो भी हूँ बहुत खुश हूँ.
तो दोस्तो, अगर आप भी खुश रहना चाहते हैं तो एक बार चमचागिरी के मैदान मे आ जाओ यकीन मानो एक बार समय तो लगेगा, अजीब भी लगेगा पर कुछ समय बाद आपको खुद ही अच्छा लगने लगेगा.
सच पूछो तो आज का समय शराफत, महेनत और ईमानदारी का नही है क्योकि उनकी कोई कद्र ही नही है या ये कहे कि सबसे ज्यादा पिसता ही शरीफ आदमी है इसलिए तो मुझे भी चमचागिरी को अपनाना पडा. तो अगर आप सुखी रहना चाहते है अपने सारे काम भी निकलवाना चाहते हैं तो बनावट और दिखावे की दुनिया मे आपका स्वागत है बिना देरी किए तुरंत आए और अधिक जानकारी के लिए शहर के किसी भी बडे अफसर से आप मेरा पता पूछ सकते हैं….

मैं हूं कौन…..

June 16, 2015 By Monica Gupta

हम और हमारी नकारात्मक सोच

हम और हमारी नकारात्मक सोच

be positive photo

Photo by h.koppdelaney

कल ही हमारे मित्र विदेश से लौटे. उनको रिसीव करने हम भी एयर पोर्ट गए.वहाँ कार मे बैठ्ने से पहले उन्हे मिठाई खिलाई तो उन्होने उसका रैपर कोई कूडा दान ना दिखाई देने की वजह से सड्क पर ना डाल कर अपनी जेब मे ही डाल लिया. जबकि हमारे ही भारतीय मित्रो ने खुद तो मिठाई के रैपर को जमीन पर ही फेंक दिया और हसँते हुए अपने मित्र को सलाह देने लगे कि भई, यह तो भारत है यहाँ सब कुछ होता है यहाँ क्या सोचना … पूरी सडक अपनी है कही भी फेंक दो … बे वजह जेब क्यो खराब करनी है …उस समय तो मैं चुप रही पर वापिस लौट्ते वक्त यही सोचने लगी कि सारे आरोप सरकार पर लगा कर हम निशचिंत होकर बैठ जाते है कि सरकार ये नही कर रही वो नही कर रही बिना यह जाने कि हम क्या कर रहे है यह हमारी नकारात्मक सोच नही तो क्या है. अगर हम सभी अपना अपना फर्ज़ समझ ले तो क्या नही हो सकता.
हम विदेशो की बात करते हैं कि वहा कठोर कायदे कानून है वहाँ सफाई रखनी जरुरी होती है नही तो फाईन लग जाता है वगहैरा वगहैरा . पर उसके मुकाबले हम यहा क्या कर रहे हैं सिवाय कोसने के कि हम कितने गंद मे रह रहे हैं …
और तो और बार बार मना किया जाता है कि गाडी चलाते समय सीट बेल्ट बाँध ले. हम मे से कितने बाधँते है. हाँ , अगर सामने चैकिंग़ हो रही होगी तो फाईन के चक्कर मे फटाफ़ट लगा लेग़ें … गाडी चलाते समय मोबाईल का इस्तेमाल भी नही करने की सलाह दी जाती है. पर हम तो महान है ना सबसे व्यस्त आदमी है अगर बात नही की तो लाखो का नुकसान जो हो जाएगा. हाँ, अगर कोई ट्क्कर वक्कर हो गई तो दोष अपना नही मानेग़ें …
अगर हम अपनी नकारात्मक सोच हटा कर सकारत्मक सोचेगे और समाज मे रहते हुए नियमो का पालन करेगें तो हमारा देश भी आदर्श देश बन सकता है.
यही बात काफी हद तक मीडिया पर भी लागू होती है वो समाज को सच्ची दिशा दिखा सकता है पर उसकी सोच भी कम नही है मार पिटाई, खून खराबा, अन्धविश्वास, फालतू की फिल्मी खबरो आदि से भरी रहती है खबरे पर जब बात आती है कुछ ऐसी खबरो की जिनसे समाज मे चेतना आए … वो तो गायब ही रहती है अब ताजा उदाहरण ही है कि एक स्कूली बच्चे ने एवरेस्ट पर जीत हासिल की और सबसे कम उम्र का विजेता बन गया कोई बच्चो का खेल नही था कि वो ऐसे ही चढ गया पर वो खबर भी ना के बराबर रही. जब मैं कुछ बच्चो का इंटरवयू लेने पहुची कि उन्हे यह जान कर कैसा लगा कि उनकी ही उम्र का अर्जन ऐवरेस्ट को जीत कर लौटा है. उन्हे तो हैरानी हुई क्योकि इस बात की जानकारी ही नही थी उन बच्चो को कि ऐसा भी हुआ है अब भला बताओ कि समाज के सामने अगर उदाहरण ही नही रखे जाएगे तो समाज तरक्की कैसे करेगा सिर्फ क्राईम से तो गाडी नही चलेगी ना.

हम और हमारी नकारात्मक सोच
हम सभी को एक दूसरो पर दोष डालने की बजाय खुद को अच्छा बनाना होगा अपनी सोच सकारात्मक रखनी होगी अच्छे उदाहरण समाज के सामने रखने होग़ॆं ताकि उनका अनुकरण किया जा सके. इसमे आपसे अच्छी भूमिका तो कोई निभा ही नही सकता …

हम और हमारी नकारात्मक सोच

June 16, 2015 By Monica Gupta

रिटायरमैंट नही फुल स्टाप

रिटायरमैंट नही फुल स्टाप………..

रिटायरमैंट का नाम सुनते ही मन मे एक ही बात आती है कि अब … बस… लाईफ मे फुल स्टाप लग गया. लेकिन जो लोग ऐसा सोच रहे हैं उनके लिए एक खुश खबर है अब अगर वो वाकई मे समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो उनके लिए ढेरो रास्ते खुले हैं.

रिटायरमैंट के बाद खाली बैठ कर लोग बहुत भावुक हो जाते हैं चिडचिडे हो जाते हैं वो मन ही मन सोचते हैं कि बस हमने जितना काम करना था वो कर लिया पर असल मे सही मायनो मे उनमे ऊर्जा की कोई कमी नही होती.  अगर वो अध्यापक रिटायर हुए है तो वो बच्चो को पढा सकते हैं या जिसमे भी रुचि हो वो काम कर सकते हैं जिससे ना उनमे भावना आएगी कि बस हमारी जिंदगी रुक गई है और वह उसी उत्साह और जोश के साथ काम करते जाएगें

 

 

 

old man  photo

 

हमारे एक जानकार का घर बन रहा था उन्हे एक व्यक्ति ऐसा चाहिए था जो उस बनते घर मे बैठ सके ताकि मजदूर खाली न बैठे… ऐसे में उन्होने एक दादा से जिक्र किया … दादा सारा दिन खाली रहते थे अब जब उन्हें पता चला कि बैठने के पैसे भी मिलेंगें तो वो खुश हो गए …मजदूरों से बाते भी करते रहते और मजदूर भी अपने काम मे लगे रहते देखते ही देखते घर बहुत जल्दी बन गया.
सीनियर सिटीजन की सेवाओ की, अनुभवो की देश को समाज को जरुरत है ताकि विकास के काम सुचारु रुप से चलते रहें.
खाली घर पर बैठ कर चिढ्ने कुढ्ने की बजाय अगर वो काम पर ध्यान देगें तो उनका भी अच्छा समय व्यतीत होगा और उनके अनुभवो से हमें भी फायदा होगा खासकर बच्चे बहुत कुछ सीख सकतें हैं
और इसकी  हमे बहुत जरुरत है इसलिए अब फुल स्टाप नही रही रिटायरमैंट ………..अब तो शुरुआत है नई जिन्दगी की …

 

रेल हादसे ने छीन लिए दोनों ही हाथ: हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के गगरेट-दौलतपुर रोड पर स्थित गांव दियोली के मूल निवासी पूर्ण चंद परदेसी के पिता रामरक्खा दिल्ली के शकूर बस्ती रेलवे स्टेशन पर गनमैन के पद पर कार्यरत थे। 1959 में परदेसी जब चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे तो एक दिन स्कूल जाने के दौरान रेलगाड़ी से उतरते समय रेल के पहिए की चपेट में आकर अपने दोनों ही हाथ गंवा बैठे। उन्होंने इसे जिंदगी का सबक मान इसी एक टुकड़े में चमड़े की छोटी सी बैल्ट के बीच कलम फंसाकर लिखना शुरू कर दिया। 1970 में द्वितीय श्रेणी में मैट्रिक करने के बाद बड़े भाई के साथ होशियारपुर लौट आए। पूर्ण चंद की सुंदर लिखावट बताती है कि उन्होंने जीवन को कभी बोझ नहीं बनने दिया। साल 1976 में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के हाथों नैशनल अवार्ड से सम्मानित परदेसी अब तक 1 लाख से भी अधिक पुस्तकों व मैगजीनों की प्रूफ-रीडिंग कर चुके हैं। होशियारपुर के साधु आश्रम में बतौर प्रूफ रीडर से करियर की शुरूआत करने वाले परदेसी हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी व पंजाबी में अब तक लाखों पुस्तकों की प्रूफ रीडिंग का काम सफलतापूर्वक निभा रहे हैं। रिटायरमैंट के बाद भी ईमानदारी व जज्बा बेमिसाल पूर्ण चंद परदेसी की ईमानदारी और जीने का जज्बा ही है कि साल 2005 में रिटायरमैंट के बाद भी संस्थान को उनकी जरूरत महसूस हुई। पिछले 10 सालों से कांट्रैक्ट बेस पर काम करने के दौरान प्रूफ रीडिंग का काम करते हुए इन पुस्तकों से सबक लेना कभी नहीं भूले… Read more…

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