Skill Development
Skill Development
हे भगवान! वैसे टैलेंट तो हमारे देश मे बिखरा हुआ है. वो अलग बात है कि वो टैलेंट किसी चैनल या अखबार की हैडलाईन नही बनता. अब देखिए ना,बसो की छ्त पर स्टाइल से बैठ कर सफर करते हैं, शराब पीकर ठाठ से वाहन चलाते है. रेलवे फाटक बंद होता है और वो शान से अपना वाहन नीचे से निकाल लेते हैं ऐसी Skill Development कही देखी है और वो भी बिना किसी ट्रैनिंग के
परीक्षा भवन मे मुन्नाभाई टाईप को लाते हैं और ठाठ से किसी टेलेंटिड की तरह नकल मरवाते हैं. वही किसी की नौकरी की काट करने के लिए किसी भी हद तक जुगाड तक जा सकते हैं.
इतना ही नही जनाब …. अजी टैलेंट तो देखिए नेताओ और सरकारी अफसरो से सैटिंग कर के रखते हैं कि दोनो हाथ घी मे और मुह कडाई मे हो, वही ब्लाग के मामले मे भी बहुत महानुभाव कम नही है हर रोज ब्लाग या फेसबुक देखते है पर जब उसे लाईक या कमेट करने की बात आती है तो किसी स्मार्ट और टैलेंटिड बन्दे की तरह बोलेगे अच्छा आपका लिखा??? हमने तो नही देखा!!!!! दिखाना जरा !!!
क्या कमाल का टैलेंट् है जनाब!! वैसे आप तो ऐसे नही होंगे है ना
अरे मेरा आज का अखबार कहा गया … कही पडोसी फिर से तो नही …. ! !!
Skill Development का अगर कोई और भी उदाहरण हो तो जरुर बताना !!!

Beyond Limits 2012
Beyond Limits 2012
मुश्किलो से भाग जाना आसान होता है, क्योकि हर पल जिंदगी मे इम्तेहान होता है, डरने वालो को कुछ नही मिलता, लडने वालो के कदमो मे सारा जहान होता है….
यह यह पक्तियां अनायास सी मन मे नही आई बल्कि कुछ ऐसे लोगो से मिल कर महसूस हुई जिनके हौसलों के आगे मैं नत मस्तक हूं.
Beyond Limits 2012
आज दिल्ली मे एक प्रदर्शिनी मे जाना हुआ. श्री राजेंद्र जौहर जोकि 100% विकलांग है. उनकी देखरेख मे इस प्रदर्शिनी का आयोजन किया जा रहा हैं. सन 1992 मे उन्होने Family of Disabled नामक संस्था की शुरुआत की और सन 2001 से प्रदर्शिनी लगानी शुरु की. उनकी सुपुत्री श्रीमति प्रीति जौहर ने सारी जानकारी देते हुए बताया कि उनके पापा की जिंदगी मे एक गम्भीर हादसा हुआ. एक बार तो सारा परिवार हिल गया पर पापा ने हिम्मत दिखाई और इसे चैलेंज की तरह लिया और मानसिक और शारीरिक रुप से विकलांगो की एक संस्था बनाई. संस्था चलाने के लिए फंड बिल्कुल नही थे पर मदर टेरेसा का आशीर्वाद जरुर मिला और यकीनन वो बहुत आत्मबल दे गया.
आरम्भ मे संस्था की शुरुआत घर से ही की. सन 2001 मे ग्रीटिंग कार्ड बनाने से काम शुरु किया. तब सिर्फ एक ही कलाकार साथ थे. देखते ही देखते कला के क्षेत्र मे रुचि रखने वाले विशेष लोग मिलते ही गए. फिर मन मे यह सोच हुई कि इन मानसिक तथा शारीरिक रुप से विकलांग यानि इन विशेष कलाकारो की कलाकारी को दिखाने के लिए कोई मंच होना आवश्यक है पर बात फिर वही सामने आई कि इन सब मे खर्चा बहुत आएगा और फंड बिल्कुल भी नही थे. इसी बीच ईश्वर की असीम कृपा हुई और अर्पना कौर जी से मुलाकात हुई. उन्होने भावनाओ को समझा और उनकी गैलरी मे प्रदर्शिनी लगनी शुरु हो गई. पिछ्ली 11 बार से अर्पना आर्ट गैलरी मे दिसम्बर के महीने मे इन विशेष लोगो दवारा बनाई कलाकृतियो की नुमाईश की जाती है.
आज Beyond Limits – 2012, नामक प्रदर्शिनी मे 49 विशेष कलाकार हिस्सा ले रहे हैं.जिसमे जम्मू, तमिलनाडू,बिहार,पटना, कोलकता,गुजरात, लखनऊ, राजस्थान आदि राज्यो से हैं. इस प्रदर्शिनी मे विभिन्न प्रकार की कला का मिश्रण है. जिसमे विभिन्न प्रकार की चित्रकारी है, sculptures है जोकि bronze और stone मे हैं, ऐसी कलाकारी देख कर खुद ब खुद दांतो तले ऊंगली दब जाती है कि क्या अदभुत कलाकारी है.
ऐसी ही एक कलाकार शीला शर्मा से बात हुई उनके दोनो हाथ नही है और पैरो से चित्रकारी करती हैं.उनके अदभुत साहस ने चकित कर दिया. श्रीमति प्रीति जौहर ने बताया कि आमिर खान के कार्यक्रम सत्यमेव जयते मे भी उनकी संस्था के बारे मे बताया गया उससे भी बहुत आत्मबल मिला.
उनका कहना है कि यह 12वी प्रदर्शिनि है. वो चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग आए और इसे देखे सराहें और कलाकारो का आत्मबल बढाए. यह प्रदर्शिनी Arpana Art Gallery, Academy of Fine Arts & Literature, 4/6, Siri Fort Institutional Area, Khel Gaon Marg, दिल्ली मे, 2 दिसम्बर से 8 दिसम्बर तक लगी हुई है. इसका समय है दिन के 11 बजे से शाम के 7 बजे तक.
जाते जाते एक बात फिर जहन मे आ रही है कि….
उम्मीदो की कश्ती को डुबोया नही करते/ साहिल अगर दूर हो तो रोया नही करते/ रखते है जो दिल मे उम्मीद कुछ पाने की / वो लोग जिंदगी मे कुछ खोया नही करते !!!
समाज और महिलाएं
समाज और महिलाएं
समाज और महिलाएं ,पता नही आज समाज मे क्या हो रहा है…. !!! महिलाएं हारी हारी सी महसूस कर रही है. जहां महिलाओं पर शर्मनाक धटनाए रुकने का नाम नही ले रही वही कुछ नेता लोग अजीबो गरीब बयान देकर पता नही खुद को क्या साबित करना चाहते हैं. मुझे दुख इस बात का भी है कि धटनाओ की वजह से लडकियों और महिलाओं का मनोबल टूट रहा है.
समाज और महिलाएं
आज एक महिला से तो मेरी सहेली मणि की बहस ही हो गई. वो अपनी लडकी की पढाई छुडवा रही है और एक उसी की सहेली जोकि शहर से बाहर नौकरी करती थी वो भी नौकरी छोड कर वापिस आ गई है. कारण है माता पिता की चिंता. पुलिस पर से उनका विश्वास हट गया है और दिन तीन दिन पहले राष्ट्रपति की लडकी भी जब एक टीवी पर साक्षात्कार के दौरान यह बोले कि उसे भी दिल्ली मे डर लगता है तो वो तो आम आदमी ही है.
जब मणि ने उसे समझाने की कोशिश की तो वो बोली कि ठीक है आप मेरी दोनो लडकियो की जिम्मेवारी ले लो. मणि के पास अब कुछ कहने को नही था. उसने जब आकर मुझे सारी बात बताई तो मन मे यही बात आ रही थी कि जल्द ही बहुत जल्द ही सरकार को कदम उठाने होंगे. फालतू के बयान बाजी की कौन क्या कह रहा है कौन नही ..
इससे हट कर महिलाओ की सुरक्षा और पुलिस की जिम्मेवारी पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा अन्यथा बहुत लडकियो को अपना मन मार कर घर पर ही बैठना पडेगा.
वैसे समाज और महिलाएं के बारे में आप क्या राय रखतें हैं जरुर बताईगा !!!
26 January
26 January के रंग में रंगे अखबार
क्या बात है !!! बात 26 January की है
सभी चैनल और अखबार तिरंगे के रंग मे सरोबार हैं और कुछ अखबार के विज्ञापन तो अपनी ओर हमारा ध्यान आकर्षित कर रहे हैं जैसा कि एक भारतीय जीवन बीमा निगम का विज्ञापन है …RepubLIC of india यानि इसमे भी उन्होने LIC खोज लिया.
वही एक ने लिखा है on RE_PUBLIC demand 50% offer. ह हा हा !!!
एक ने लिखा है आज और कल दो दिन मात्र 26 रुपए down payment करे और ले जाए सैमसंग का कोई उत्पाद
26 January
एक ने 26 को बना दिया कि 2 गुणा वृद्दि तेल और गैस के उत्पाद मे और 6 गुणा वृदि ओवरसीज उत्पाद मे… !!!
एक दुकान के बाहर लिखा था 26 चीजे खरीदो और एक शानदार उपहार पाओ. Surprised
एक चैनल पर 64 गणतंत्र पर 26 ज्वलंत प्रश्न जनता के सामने रख रहा है.
वही एक लेख आया हुआ 26 का सफर बनाम suffer.ह हा !! है ना लोगो की + कुछ मेरी सोच का कमाल !!!
26 January गंणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!!
Blood donation and ladies
Blood donation and ladies
रक्तदान और महिलाए
Blood donation and ladies कुछ समय पहले ISBTI की ओर से स्वैच्छिक रक्तदान पर एक दिवसीय सम्मेलन था.बहुत दर्शक और बहुत वक्ता थे. रक्तदान के बारे मे बहुत पुरुषों ने ये बोला कि उन्होनें जब रक्तदान किया तब घर पर अपनी पत्नी को नही बताया या अपनी मां को नही बताया क्योकि वो नाराज हो जाती कि रक्त किसलिए दे कर आए हो.
इतना ही नही एक ने तो बताया कि उन्होने 5 साल तक अपने घर मे किसी को खबर नही लगने दी कि वो रक्तदान कर रहे हैं. अगर पता चल जाता तो वो उसे रक्तदान नही करने दिया जाता.
वही उसी कार्यक्रम मे एक सज्जन ने बताया कि महिलाओ की कुछ परेशानियां ऐसी होती है कि वो खून नही दे सकती जैसा कि स्तनपान, महावारी और एनीमिया इसलिए पुरुषो को आगे आना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करना चाहिए.एक सज्जन ने यह भी बताया कि भले ही रक्तदान के लिए महिलाओ मे बहुत उत्साह देखने को मिलता है और वो बढ चढ कर रक्तदान के लिए कैम्पो मे आती भी हैं पर जब उन्हे पता चलता है कि उनमे खून की कमी यानि एनीमिया है वो रक्तदान नही कर सकती तब उन्हे मजबूरन पीछे हटना पडता है.
Blood donation and ladies
तब मेरे दिमाग मे बस एक ही बात आई कि भले ही हम महिलाओ को हर महीने किसी न किसी रुप मे परेशानी से दो चार होना पडता है पर अगर कम से कम हमें रक्तदान के बारे मे विस्तार से जानकारी होगी तो अपने घर परिवार के लोगो को तो बजाय रक्तदान पर नाराज होने के होने प्रेरित तो कर सकती हैं और इसके साथ साथ भले ही रक्तदान ना करे पर इतना तो करें कि खुद मे तो रक्त हो यानि ब्लड डोनर से पहले रक्त ओनर तो बनें.
अगर महिलाए एनीमिया से कम ग्रसित होगी तो रक्त की भी कम जरुरत पडेगी. इसके साथ साथ यह भी जानकारी भी होनी जरुरी है कि रक्तदान से कोई नुकसान नही होता.चाहे स्वयं रक्तदान करे या अपने घर परिवार मे किसी का, तो भी बहुत जागरुकता आ सकती है. असल मे, रक्तदान के बारे मे जब भी महिलाओ से बात की तो यही जवाब मिला कि हमे तो किसी ने कहा ही नही या हमे तो पता ही नही था.
महिला दिवस पर या कभी भी आप यही संकल्प लें कि रक्तदान के बारे मे सारी जानकारी लेगी और अगर होमोग्लोबिन 12.5 है तो रक्तदान करके खुद महसूस करेगी कि क्या अनुभव रहा और अगर किसी वजह से खुद ना कर पाई तो कम से कम अपने परिवार के सदस्यो को नाराजगी दिखाने के बजाय रक्तदान के लिए जरुर प्रेरित करेगी. जैसे किसी को जन्म देना एक खूबसूरत अहसास है ठीक वैसे ही किसी को नई जिंदगी देना भी एक खूबसूरत अहसास से कम नही है और आप से बेहतर इस बात को कौन जान सकता है … है ना !!!
इसलिए Donate Blood & save Lives …
जरा से जागरुक बनिए Blood & Blood Donation के बारे में …
वैसे जाते जाते एक बात मैं ये भी बता दूं कि सन 73 में मैने एक बच्ची को एक छोटे से pond मे से डूबने से बचाया था और यही बात मै सभी को बताती रहती पर जब से रक्तदान के बारे मे सुना और इस क्षेत्र में जुडी तो वो बात लगभग भूल ही गई जब से मैने रक्तदान के बारे मे जाना है तब से इस प्रयास में रही हूं कि रक्तदान कर सकूं पर नही कर पा रही पर आप जैसे लोगो को मोटिवेट करके या जब किसी को रक्त की जरुरत हो उनकी मदद करके इस क्षेत्र में कुछ न कुछ काम तो कर ही रही हूं … और जब किसी की जान बचती है और उनका धन्यवाद कहने के लिए फोन आता है तब मैं खुद को सातवें आसमान पर पाती हूं … !!!
Blood donation and ladies आप इस बारे में क्या राय रखते हैं जरुर बताईगा ….
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