Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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April 25, 2015 By Monica Gupta

Suicide of a News

Suicide of a News

किसान

एक खबर की खुदकुशी …

Suicide of a News  जंतर मंतर पर किसान रैली चल रही थी और मैं अन्य दर्शकों की तरह टीवी पर  खबर देख रही थी. बेशक, बीच बीच में चैनल भी बदल रही थी कि अचानक कुछ ऐसा दिखाया जाने लगा कि रिमोट एक तरफ रख कर मैं नाखून चबाते हुए रैली का प्रसारण लगातार देखने लगी. यकीनन  नजरे मेरी  थी पर मीडिया की आखों से देख रही थी जो दिखाया जा रहा था वही देख रही थी  और देखते देखते मेरे मन मे सिर्फ एक ही बात आ रही थी प्लीज केजरीवाल जी, भाषण बंद कीजिए और उस किसान के साथ अस्तपाल जाईए… और फिर बार बार बार बार कुमार विश्वास का सीन दिखाना लटक गया के बाद उनका इशारा करना … दिमाग खराब हो चुका था कि यह सब आम आदमी पार्टी कर रही है फिर आशुतोष का यह कहना कि अगली बार ऐसा होगा तो … बार बार दिखाए जाने पर मेरा मन आम आदमी पार्टी के प्रति बिल्कुल बदल चुका था. खुद भी पत्रकार रही हूं इसलिए हर बात को गौण करते हुए एक ही बात बार बार मन मे आ रही थी कि केजरीवाल जी को उस समय पेड के पास चले जाना चाहिए था या भाषण रोक कर  मंच से ही अपील करनी चाहिए थी जैसाकि मोदी जी ने एक रैली के दौरान दो युवको से की थी (ये भी मैने एक खबर में देखा था) पर पता नही उस समय मंच पर क्या चल रहा था क्या नही पर जो हुआ ठीक नही हुआ और मन में कडवाहट् भर गई.

Suicide of a News     सारे चैनल आप पार्टी को दोष देने लगे और उनका  लगातार  इसी खबर पर फोकस रहा. फिर धीरे धीरे पता चला कि मृतक व्यक्ति आर्थैक रुप से कमजोर नही थे जो उनकी आत्महत्या की वजह बनता. जो पर्ची चैनल वाले को  मिली उस पर यही लिखा था कि उनके पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया था. खेती उजड गई है. तीन बच्चे हैं अब वो घर वापिस कैसे जाए.  अब यह बात भी सामने आ रही है कि वो लिखावट उनकी नही थी. तो पत्र किसने लिखा ??? एक अंग्रेजी  अखबार के मुताबिक मरने से कुछ देर पहले तक उन्होने पेड पर से बहुत पोज दिए. पेड पर बैठे बैठे चिल्ला भी रहे थे अपना ध्यान लोगो की तरफ करने के लिए उन्होनें गले मे गमछा  लपेट कर दूसरा सिरा  टहनी से कस दिया ताकि वो फोकस मे आ जाए पर इस बीच उनका दाया पैर फिसल गया. और जो हुआ हमारे सामने है. निसंदेह जो हुआ बहुत दुखद था.

घटना से कुछ देर पहले उन्होनें फोन करके अपने घर यह भी सूचना दी थी कि वो रैली वाली खबर पर टीवी पर आएगें. अब बात आती है मंच पर बैठे लोगो की. जिनके अनुसार पेड पर क्या हो रहा है दिखाई नही दे रहा था पर हलचल जरुर हो रही थी. लगातार मृतक व्यक्ति पोज दे देकर फोटो भी खिंचवा रहा था जोकि हम सभी ने टीवी पर देखा. मेरा प्रश्न आप सभी से ये है कि जो लोग उस समय उस व्यक्ति के पास खडे थे जो उसे देख रहे थे चाहे पब्लिक हो, पुलिस हो क्या उनका कुछ फर्ज नही था. क्या मीडिया वाले  उसे नीचे लाने की अपील नही कर सकते थे … कि सभी को चटपटी खबर मिल रही थी इसलिए मजा ले रहे थे. मेरे विचार से ,मंच पर बैठे लोगो से पहले गुनहगार वो लोग हैं जो उस व्यक्ति को देख कर फोटो ले रहे थे, देख रहे थे  और मसालेदार खबर बना कर पेश करे जा रहे थे.

जाने माने पत्रकार राहुल कंवल ने टवीट किया कि जो पत्रकार नेताओ पर आरोप लगा रहे हैं वो जरा देर रुके और खुद से पूछे कि हममें से कोई उस वक्त कोई मदद के लिए आगे क्यों नही आया.

मात्र एक पार्टी को निशाना बना कर राजनीति करना सही नही है आप पार्टी अपनी गलती मान रही है और रो भी रही है पर इससे भी चैनल वाले संतुष्ट नही. कल फिर एक चैनल वाला साईट पर खडा होकर बता रहा था कि मंच से ये पेड बहुत दूर था. कुछ दिखाई देन असम्भव नही था. क्या ये बात वो पहले दर्शको तक नही पंहुंचा सकते थे इतना ही नही एक चैनल वाले ने बताया कि वो वसुंधरा राजे , भाजपा के खिलाफ नारे बाजी कर रहा था. जिस बात को उछाला नही गया पर वही आज तक पर आशुतोष फफक कर रो पडे और अंजना संवेदनहीन होकर प्रश्न पूछती रही. बार बार बार बार  यही दिखाया गया. वही कांग्रेस और भाजपा की प्रसन्नता मन ही मन छिपाए नही छिप रही क्योकि अब खुले आम उन्हें आप पर ऊंगली उठाने का मौका मिल गया.

कुछ देर पहले एक बहुत छोटी से खबर दिखाई कि मृतक  के परिवार वाले कह रहे थे हमे जबसे ये खबर दिखाई है कि आप पार्टी बार बार पेड पर चढे व्यक्ति कि उतारने की अपील कर रही थी. पुलिस को बोल रही थी. अब हमे लग रहा है कि उनका कसूर नही है…बताईए … क्या कहेंगें… क्या न्यूज चैनल को दोनो तरफ के पक्ष रख कर खबर नही दिखानी चाहिए क्या खुद ही वकील और जज बन कर सारे फैसले सुनाएगी. एक खबर की असलियत कही दफन हो गई और राजनीति जबरद्स्त रुप से हावी हो गई. एक बार फिर  एक खबर की आत्महत्या हो गई ..  Suicide of a News

cartoon-farmer-field-monicaवही चिडिया किसानों की भावना समझ कर फसल न खाने की बात कर रही है …

April 24, 2015 By Monica Gupta

कार्टून दर्द किसान का

कार्टून दर्द किसान का – अफसोस .. जिस तरह से मीडिया कवरेज के दौरान चाहे भाजपा हो, आप पार्टी हो या कांग्रेस … सभी एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे है कोई किसानों के दुख दर्द को जानना नही चाहता …

कार्टून दर्द किसान का

वो आत्महत्या किसलिए  कर रहे हैं ऐसे मैं हमेशा तंग करने वाली चिडिया उनके दुख को जान कर इस बार बची खुची फसल को बनाए रखेगी … नुकसान नही होने देगी …

cartoon-farmer-field-monica

कार्टून दर्द किसान का

किसान की दुर्दशा

April 24, 2015 By Monica Gupta

लाईव खुदकुशी

लाईव खुदकुशी …

वो तो मीडिया के पास कोई और खबर नही है इसलिए एक ही खबर जंतर मंतर और आम आदमी पार्टी कसूरवार  से चिपके हुए हैं कोई दूसरी खबर आते ही उस पर टूट पडेगी …  फिर तू कौन मैं खामखाह… कौन सा किसान और किसकी आत्महत्या.. !!!

लाईव खुदकुशी किसी व्यक्ति की है या खबरिया चैनलों की कहना मुश्किल है

….किसी के रोने पर टीआरपी, आपतिजनक बयानों को बार बार दिखाने पर टीआरपी .. पूरी तरह से संवेदनहीन है मीडिया.. तस्वीर का एक ही रुख दिखाता है जबकि अगर वो खुद ही जज और  वकील बन कर जनता के सामने खडा  हैं तो तस्वीर के दोनों रुख पेश करने चाहिए  और जहां तक राजनीति की बात है मीडिया मे किस कदर राजनीति हावी है हम सब जानते है…. वाकई ये वो मीडिया नही है जो कभी हुआ करती थी…  अफसोस !!! मिर्च, मसाला , छौक, तडका… कुछ ज्यादा ही हो रहा है … कम डालो ,नपा तुला डालो और ढंग से परोसो भई अन्यथा .. लाईव खुदकुशी होती ही रहेंगी … !!!

April 24, 2015 By Monica Gupta

सोच

सोच

एक जानकार बहुत अमीर हैं और उनकी विशाल हवेली  निर्माणाधीन थी. मैं वहां गई तो उन्होने मुझे कहा कि उपर तक जाकर सारा देख कर आओ. मेरे पूछने पर उन्होनें बताया कि सीढियों पर नही चढ सकते क्योकि घुटनों मॆ दर्द है लिफ्ट अभी लगी नही है. मैं सारा घर देख कर नीचे आ रही थी तो देखा कि पतले दुबले मजदूर कोई सीमेंट की बोरी लेकर उपर चढ रहे थे तो कोई दस दस ईटे … गजब की फुर्ती पाई थी उन मजदूरों ने.

बातो बातों में जानकार ने बताया कि कल मजदूर आपस मे बात कर रहे थे कि मालिक कितना अमीर है इतना आलीशान घर बनवा रहा है जबकि वो सोच रहे थे कि मजदूर कितने सुखी है सुबह से शाम तक आराम से काम करते हैं बीच में अपना टिफिन खाते हैं 1 घंटे की नींद लेते हैं और शरीर इतना मजबूत की भारी भारी सामान भी सीढियों पर ले जाए जबकि उन्हें स्वयं सीढी पर चढने के लिए सहारे की जरुरत होती है और काम का इतना तनाव रहता है कि नींद लाने के लिए भी गोली खानी पडती है.  वो बता रहे थे कि उनके हिसाब से मजदूर ही ज्यादा सुखी है. हालाकि इनका इलाज चल रहा है पर यह बात भी शत प्रतिशत सही है कि ठीक होने के बाद भी वो इतने एक्टिव कभी नही हो पाएगें.

मुझे महसूस हुआ कि वो भीतर से बहुत दुखी है. असल में ये भी सच है कि जो हमारे पास नही होता अक्सर हम उसी की इच्छा रखते हैं. मजदूरों को अमीरी प्रभावित कर रही थी और जानकार को उन मजदूरों का बढिया स्वास्थ्य. देखा जाए तो परेशान हम सब ही है पर अगर सकारात्मक नजरिया रखेंगें तो जिंदगी ज्यादा अच्छे ढंग से जी पाएगे अन्यथा परेशान ही रहेगें… इतने मे मजदूरो की चाय बन कर आ गई और वो सब सुड सुड करके चाय की चुस्की लेने लगे … बाहर निकली तो आंटी खम्भों और दीवार की तराई यानि पानी दे रही थी ताकि वो मजबूत बनें और मैं सोच रही थी कि इतनी इमारते बन गई अब हम उन्ही को मजबूत बनाने के लिए पानी देते हैं जबकि पहले हरियाली के लिए  पौधों को पानी दिया करते थे …

cartoon-building-monica

April 23, 2015 By Monica Gupta

आतंकी भव

cartoon in NBT jail

आतंकी भव

नव भारत टाईम्स मे छपा एक बहुत पुराना मेरा बनाया कार्टून मिला, इसमे पिता अपने बेटे को आतंकी भव का आशीर्वाद दिलवाने लाया है ताकि वो भी अच्छा आतंकी कसाव टाईप बने और जेल मे भी सारे सुख भोगे !!!

April 23, 2015 By Monica Gupta

Live Coverage

Cartoon Navbharat Times-live coverage

Live Coverage

हमारे देश का media मीडिया महान है. Live कवरेज दिखाता रहता है कई बाए ऐसे में किसी का नुकसान हो जाता है तो कई बार किसी का फायदा भी हो जाता है .. अब आप ही बताईए कि इस कार्टून मे नुकसान हुआ या फायदा …

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