Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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April 23, 2015 By Monica Gupta

किसान आत्महत्या

  किसान आत्महत्या

  इंसान से इंसान का हो भाई चारा यही था पैगाम तुम्हारा … कहां गया पैगाम तुम्हारा …

कोई शक नही कि आप पार्टी की ग्रह दशा सही नही चल रही पहले आप के अपनो का छोड कर जाना  और  फिर जंतर मंतर  पर किसान द्वारा आत्महत्या प्रकरण … बेहद दुखदाई … सच पूछो तो जिन्होने आप को कभी  अपनी पलकों पर बैठाया था आज निशब्द हैं  …

cartoon -AK -monica

April 22, 2015 By Monica Gupta

प्रेम ए फेसबुक

प्रेम –ए -फेसबुक …(व्यंग्य)
बहुत हैरानी की बात है पर आज की सच्चाई है. मै खुद हैरान हूँ कि आखिर ये
सब हुआ कैसे.असल मैं आपसे क्या छिपाना. पिछले काफी समय से मैं फेसबुक पर
ज्यादा समय लगाने लगा हूँ(ऐसा मै नही, मेरे परिवार वाले कहते हैं)सब दुखी
थे.बेगम साहिबा का मुहँ तो गुब्बारे ही तरह फूला ही रहता था कि ना जाने
मै उस पर क्या क्या करता हूँ.उधर मेरी छोटी बहन भी अपनी भाभी का ही साथ
देती और बच्चो को तो आप जानते ही हो वो तो हमेशा अपनी माँ का ही साथ
देगे. कुल मिलाकर मै अकेला पड गया और मुझसे सकंल्प
करवाया गया कि मै ततकाल प्रभाव से उस मुई फेसबुक को छोड दू जिसने घर की शांति
मे आग लगा दी.

cartoon-google monica gupta

प्रेम ए फेसबुक

मन मे बहुत दुख था कि इतने दोस्त कैसे छोड पाऊगाँ पर मन मे
विश्वास लिए मैने दिल पर पत्थर रख लिया कि घर की खुशी के लिए मै सब कर
जाऊगाँ.
अगले दिन सुबह आखँ खुलते ही याद आया कि फेसबुक नही करनी.मन तो हो
रहा था कि एक बार बस आखिरी बार देख लूँ कि रोजी का जवाब आया या नही रवि
ने सौम्या की रिक्वेस्ट भेजी या नही पर पर पर ….
सुबह सुबह काम वाली बाई काम करने आ गई थी.उसे फटाफट सफाई करते देख मैने
उसे गुस्सा करते हुए कहा कि मेज के नीचे इतना कूडा पडा है इतने दिनो से.
उसे साफ क्यो नही करती और इतनी जल्दी जल्दी काम किसलिए कर रही है और
गुस्से मे बेगम को आवाज दे कर बुलाया.

 

दूसरे कमरे मे बच्चे मोबाईल पर
गेम खेल रहे थे. गुस्से मे तो मै था ही इसलिए उनसे कहा कि खेल बंद करके
अपना स्कूल बैग लेकर आओ और बताओ कि क्या चल रहा है पढाई मे. ये सुनकर तो
बच्चो का मुहँ बन गया और अनमने भाव से वो उठे और बेमन से बस्ता ले आए.
मैने उनकी किताबे देखनी शुरु की ही थी कि तभी मेरी छोटी बहन ने मोबाईल का
बिल पकडा दिया.

मेरे तो होश ही उड गए इतना बिल देखकर. उसने बताया कि बिल
ज्यादा नही है कई बार ऐसा हो जाता है इतने मे इसके मोबाईल पर किसी का
मैसेज आ गया और वो दूसरे कमरे मे चली गई. मै कुछ सोच ही रहा था तभी दूध
वाला भी आ गया.दो तीन दिन से चाय मे स्वाद नही आ रहा था तो मै बाहर चला
गया और लगा उसको डांटने की पानी पिला रहे को क्या.वो भी तुनक गया और बोला
कि कल से हम नही देने आएगे आप किसी दूसरे को रख लो. वही दूसरी तरफ काम
वाली बाई भी तुनक गई कि हम नही कर सकते काम यहाँ पर.साहब गुस्सा करते
हैं. बेगम ने बडी मुश्किल से उसे समझाया और उलटे हम पर ही बरस पडी. जब
दोपहर को खाना खाया तो भी बेगम को लेक्चर दे दिया कि घी कम डाला करो. नमक
बहुत है. दाल पतली बनी है. कढी माता जी जैसी नही बना सकती वगैरहा
वगैरहा.

मुझे मजा आ रहा था कि घर की तरफ मै ध्यान ही नही दे पा रहा था. अब
सभी पर पूरी नजर रखूगाँ पर शायद मेरे परिवार वालो को कुछ और ही मंजूर था.
शाम को ही चाय के दौरान बेगम ने सभी के सामने घोषणा कर दी कि अब से वो
अपने पति यानि मुझे नही टोकेगी.मै कितनी देर भी फेसबुक कर सकता हूँ.वाह मेरा  प्रेम ए फेसबुक!!!

अचानक इस घोषणा को सुनकर मै हैरान जरुर हुआ पर चेहरे पर स्माईल आ गई. मैने भी
भाव मे आकर बोल दिया कि ठीक है पर आगे से मुझे कोई टोकेगा नही.सभी एक ही
स्वर मे बोले …. नही कोई नही टोकेगा.आप करो जितना आपका मन करे उतनी देर
करो. आपको कोई नही टोकेगा. अगला दिन .. मै इंटरनेट कर रहा था.काम वाली
बाई सफाई कर रही थी. इसने हमेशा ही तरह मुझसे खडे होने को कहा ताकि अच्छी
तरफ सफाई हो जाए और मैने भी हमेशा की तरह उससे कह दिया कि ऊपर ऊपर से ही
निकाल ले बाकि कल कर लेना. बेगम चाय लेकर आई और मै स्वाद ले लेकर पीता
रहा कि आज अच्छा दूध दिया है दूध वाले ने.

बहन मोबाईल बिल के रुपए लेने
आई मैने पर्स ही उसे पकडा दिया. बच्चे टेस्ट पर साईन करवा कर ले गए और मै
फेसबुक मे ही जुटा रहा क्योकि रोजी की मेल का जवाब जो देना था.अब मै बहुत
खुश हूँ क्योकि अब बेरोक टोक अधिकार जो मिल गया है फेसबुक करने का. घर
वाले भी खुश और मै तो हूँ ही खुश … मैं और मेरा प्रेम ए फेसबुक

 

April 22, 2015 By Monica Gupta

नारी शक्ति पर कविता – आज की भारतीय नारी

Audio - Short Story- Dard by Monica Gupta

नारी शक्ति पर कविता – आज की भारतीय नारी- mahila diwas – आज की नारी अबला नही सबला है. हम भारतीय नारियों की तो बात ही अलग है … ढेरो परेशानियों के बावजूद भी हमेशा सकारात्मक सोच रखती हुई आगे बढती जाती हैं और अपनी बात कुछ इस तरह से  कह जाती है

नारी शक्ति पर कविता – आज की भारतीय नारी-

सुनिए मेरी लिखी कविता मेरी ही आवाज में अच्छे लगते हैं … पीले पत्ते
सूखी टहनियां
अंधकार से धिरा आसमान
पथरीला रास्ता
कांटो भरी राह
अनुत्तरित प्रश्नो को तलाशती सूनी निगाह

 

 

 

नारी शक्ति पर कविता

नारी शक्ति पर कविता

https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2015/04/POEM-acche-lagtey-hain-by-monica-gupta.wav

Audio- Poem- Indian lady -Monica Gupta

आज समय बदल रहा है और हम नारियों की सोच भी बदल रही है वो परेशानी हो या बाधा … उनका सामना करती हुई  हर क्षेत्र में आगे आ रही है और यही सब महसूस करते हुए दिल से एक कविता बन निकली …

सुनिए मेरी लिखी कविता मेरी ही आवाज में अच्छे लगते हैं … पीले पत्ते …

अच्छे लगते हैं ( कविता)

अच्छे लगते हैं
पीले पत्ते
सूखी टहनियां
अंधकार से धिरा आसमान
पथरीला रास्ता
कांटो भरी राह
अनुत्तरित प्रश्नो को तलाशती सूनी निगाह
इसलिए नही
कि हौसळे बुलंद हैं
जोश है कुछ कर दिखाने का या मन मे भरा है धैर्य, आत्मविश्वास
जुनून है, लग्न है कि जीतना ही है
नही
बल्कि इसलिए कि
मै हूं नारी
ईश्वर की अनमोल सरंचना
एक तोहफा
जन्मदात्री हू ना
इसलिए जानती हूं
कि
पीडा मे कितना सुख है
इसलिए तो तैयार हूं
अंगारो भरी राह पर खुद को समर्पित करने को
तभी तो

अच्छे लगते हैं

बडे अच्छे लगतें हैं
पीले पत्ते
सूखी टहनियां
अंधकार से धिरा आसमान ….!!!

 

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अच्छे लगते हैं  कविता आपको कैसी लगी ?? जरुर बताईएगा !!!

कार्टून – Cartoon -असली खुशी – Happiness is Celebrating Day

April 22, 2015 By Monica Gupta

Mission Target

cartoon- Mission Target

Mission Target

Target को पूरा करने के लिए ना जाने क्या क्या नही करना पडता, अस्तपाल मे आपरेशन इसलिए होते हैं कि टारगेट पूरे करने है बेशक टारगेट के चक्कर में कितनी ही मौतें न हो जाए. अब इन महाशय को देखिए चोर भी अपना टारगेट पूरा करने की फिराक में है. और तो और पुलिस भी अपना टारगेट पूरा करने के चक्कर में चोर को पकडना चाह रहा है !!!

Mission Target

April 22, 2015 By Monica Gupta

अर्थ दिवस पर अनर्थ

  आज यानि अर्थ दिवस पर अनर्थ हो गया. पर राजनेता क्या इस अर्थ  से सबक ले पाएगें या हमेशा की तरह अर्थ हीन राजनीति ही होती रहेगी
किसान
जंतर मंतर पर आज, किसान रैली में,  राजस्थान के किसान गजेन्द्र सिंह राजपूत ने पेड़ पर चढ़कर आत्महत्या कर ली . सारा मीडिया वहां था और  देखते ही देखते …. !!!!
अर्थ दिवस पर अनर्थ
मेरा विचार यह है कि अगर, जिस समय पता चला कि कोई लटक गया है तो उसी समय भाषण रोक कर तुरंत उस व्यक्ति की और जाना नही भागना चाहिए था और उसे स्वयं अस्तपाल जाते तो शायद …
अगर ये होता तो ऐसा होता अगर वो होता तो ऐसा होता … जो भी हुआ बेहद दुखद हुआ…
प्लीज….  एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप न करे! अर्थ दिवस पर अनर्थ हुआ बेहद दुखद 🙁
हे ईश्वर.. सभी को  सदबुधि दो!!!

April 22, 2015 By Monica Gupta

आईए बहस करें

आईए बहस करें
तो जनाब !!! आईए बहस करें! क्या ? मुद्दा क्या है ?

देखिए ये तो बिल्कुल ही गलत बात है . आज के समय मे भी मुझे बहस का मुद्दा बताने की जरुरत है क्या. आज हर टीवी चैनल,हर चौपाल,हर गली हर होटल हर नुक्कड पर एक ही बहस चल रही है और आप पूछ रहे है कि ??? क्या ठीक है चलिए चलिए माफ किया. हां तो बताईए आपको क्या कहना है इस बारे में.

people talking photo

आईए बहस करें
ठहरिए… इससे पहले कि आप कुछ कहे. मै बताना चाह्ती हूं कि आजकल यही सब कुछ सुनने और देखने को मिल रहा है और यकीन मानिए मै भी सच्चे देशभक्त की तरह इसके यानि भ्रष्टाचार को मिटाने के हक मे हूं. कल किट्टी पार्टी मे हम 50 महिलाओ ने इस बात का जोरदार समर्थन किया सभी ने ताली बजा कर् इसका स्वागत किया.देखिए इसकी फोटू भी छपी है आज के अखबार मे.वो अलग बात है कि मेरी तस्वीर जरा सी छिप गई है और शीला जी की तस्वीर ज्यादा साफ आई है. असल मे, हर मीटिंग मे फोटोग्राफर वही लाती है ना तो दे दिए होंगे उसे ज्यादा रुपए. हुह !!!!

चलो खैर अगली बार मे इस फोटोग्राफर को आऊट ना करवा दिया तो मेरा नाम …
हां, तो मै बात कर रही थी भ्रष्टाचार खत्म करने की. आपको पता है कि बच्चो के स्कूल मे भी इसी उपलक्ष मे तरह तरह के आयोजन करवाए गए. निबंध प्रतियोगिता,चित्रकारी और वाद विवाद. मै तो व्यस्तता के कारण जा नही सकी पर इन काम्पीटिशन मे जिसे जज बनाया मै क्या.. हम सब जानते है कि कौन कौन प्रथम , दूसरा और तीसरा स्थान पाएगा. अजी, आपने सही पहचाना जो स्कूल को सबसे ज्यादा दान देते है .. बस उन्ही के बच्चो का ही ख्याल रखा गया ताकि स्कूल मे 10 कम्प्यूटर आ सकें और एक बडा सा हाल बन सकें.
हां, तो बात हो रही थी कि भ्रष्टाचार को खत्म करने की.

आजकल सभी दफ्तरो मे यही ज्वलंत विषय बना हुआ है.वो तो उन लोगो ने शुक्र मनाया कि मामला जरा सा delay  हो गया है नही तो बहुत लोग सुसाईड करने वाले थे. अब इतने आलीशान बंगले ,ठाठ बाठ और बच्चो की ऊचीं शिक्षा कहां और कैसे दिखाते.पर कुल मिला कर चर्चा का ज्वलंत विषय जरुर बना हुआ है और बहस जारी है कि इनका अब क्या होगा.
हां, तो बात हो रही थी भ्रष्टाचार की. आज जगह जगह रैली,जूलूस और हडताल की जा रही है. सब उसका हिस्सा बनना चाह्ते है और तो और इस दौरान समोसा,चाय पार्टी का लुफ्त भी उठा रहे हैं.जिसे देखो वही इस बात की शपथ ले रहा है कि ना वो रिश्वत लेगा और ना ही देगा. अब कहिए आपके क्या विचार है इस बारे मे. अजी कुछ तो बोलिए. लगता है आप इसका समर्थन नही कर रहे. बस… आप जैसे लोगो की वजह से ही तो देश इतनी भयंकर परेशानियो से दो चार हो रहा है. हमे देखिए, ना दिन देख रहे ना रात बस जुटे है इस अभियान मे.
क्या ? क्या कहा आपने ? आप भी जुडे है इस अभियान से ? ह ह हा !!! कैसे ? जरा मै भी तो सुनु. क्या? आपने खुद से वायदा किया है कि आप किसी को रिश्वत नही देंगे. और आप यह चाह्ते है कि मै भी खुद से यानि अपने दिल मे झांक कर खुद से वायदा करु कि मै खुद इसका समर्थन नही करुगी. बस अपने सच्चे दिल से वायदा करुं.
माफ करे महाशय. इतना समय नही है मेरे पास कि अकेले बैठ कर चिंतन करु और खुद से प्रण ले लू कि कभी ना रिश्वत दूगी और ना लूगी. इतना समय नही है मेरे पास. आजकल तो इतने चैनल और सभाओ के महाबहस मे भाग लेने के लिए निमंत्रण आ रहे है कि खुद से बात करने का यानि आत्मचिंतन का समय ही नही है मेरे पास.हां अगर आपके पास समय है तो आप भी इस महा बहस मे शामिल हो सकते हैं. मै आपके इस महाबहस मे शामिल होने की सिफारिश जरुर कर सकती हू असल मे,मेरी पहुंच बहुत ऊपर तक है.ह ह हा.इसलिए …क्या आप शामिल ही नही होना चाह्ते. हद है लगता है आपने देश प्रेम का जज्बा ही नही है.

चलिए सादर नमस्कार.फिलहाल मै बहुत व्यस्त हूं …हुह … ना जाने कहां से चले आते है और कहते है कि खुद को बदलो जमाना बदल जाएगा…..हुह !!!

आईए बहस करें … कैसा लगा ?? जरुर बताईएगा !!

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