Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 27, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

जब बच्चा झूठ बोले तो – What To Do When Child Lies

Life of a Teenager

जब बच्चा झूठ बोले तो – what to do when child lies- कल एक जानकार के घर जाना  हुआ ... पैरेंट्स  नें अपने 3 साल के बेटे को बुलाया और बोला कि राईम सुनाओ जो स्कूल मे सीखी है … उसने सुनाई जॉनी, जॉनी यस पापा eating  शुगर नो पापा टेलिंग लाइस नो पापा  open your mouth ha ha ha… छोटे बच्चों को कैसे समझाए – जब बच्चा झूठ बोले – Parenting Tips

जब बच्चा झूठ बोले तो – what to do when child lies

तभी दरवाजे पर घंटी बजी … कोई मिलने आए होंगें तो मेरी जानकर ने बोला अपने बेटे को कि अगर पडोस वाली आंटी हो तो कह देना मम्मी घर पर नही है …

और वो बच्छा बहुत खुशी से भागा और झूठ बोल कर आया और मम्मी से बोला कि बोल दिया आंटी चली गई और मुझ्से बोला दूसरी भी सुनाऊ … यकीन मानिए मेरा राईम सुनने का उत्साह खत्म हो गया था …

क्या फायदा हुआ जब हम असल जिंदगी में झूठ बुलवाते हैं …

कई बार पापा लोग भी बच्चों को बोल देते हैं आज आफिस से जल्दी आ जाऊंगा फिर आईसक्रीम खाने चलेंगें पर पापा का कोई समय नही … ऐसे में बच्चा गुस्सा करेगा …

नाराज होगा तो हम क्या कहेंगें … बच्चा बिगड गया है … तो हम ये भी मान सकते हैं कि बच्चे अगर झूठ बोलते हैं तो इसके लिए ज्यादातर जिम्मेदार ज्यादा मामलों में मां-बाप ही होते हैं।बच्चें वही करते हैं जो देखते हैं …

घर उनकी पहली पाठशाला होता है और पैरेंट्स  टीचर

पर ज्यादातर होते हैं हमेशा नही …

ये उनकी संगत का असर भी हो सकता है इसलिए कारण जानने की कोशिश करनी चाहिए कि पर मार पिटाई करके ही सुधार आ सकता है

ये सम्भव नही इससे और ज्यादा बिगडने के चांस होते हैं …

patience की बहुत जरुरत होती है

बहुत साल पहले हमारे पडोस में एक परिवार रहता था उनकी बेटी भी बहुत झूठ बोलती थी मम्मी बहुत समझती पर वो समझती ही नही थी … एक दिन स्कूल में जब टेस्ट हुआ और वो फेल थी तो टीचर ने बोला कि सभी बच्चे घर से मम्मी के साईन करवा कर लाएगें और जो नही लाएगा उसे सजा मिलेगी …

उस शाम को वो लडकी पहले सहेलियों के साथ खेलती रही फिर पार्क चली गई … रात को सो गई … सुबह उठी और तैयार होकर स्कूल चली गई … स्कूल जाकर ख्याल आया कि मम्मी के साईन तो करवाए नही …

अब एक दो पक्की सहेलियों को बता दिया … और क्या किया कि चुपचाप खुद ही साईन कर दिए मम्मी के … अब जिन बच्चों को सजा मिली उन्हें पता था कि ये साईन नही करवा कर लाई है और अपने आप किए है …

बात टीचर तक पहुंची और … पांच ही मिनट में टीचर ने उसकी मम्मी को स्कूल बुलवा लिया … अब उस लडकी की हालत खस्ता … सारे भगवान के नाम ले लिए … मन ही मन सोचा कि आज के बाद से झूठ न्ही बोलूगी …

हे भगवान बचा ले …  थोडी देर में मम्मी आई और उनसे पूछा गया कि क्या आपने इसकी कॉपी पर साईन किए हैं उन्होनें हैरानी से उसकी तरफ देखा …

मन में तो बहुत गुस्सा था पर अचानक उनके मुंह से निकला कि हां जब ये कॉपी लेकर आई तो मैं किचन मे कुछ काम कर रही थी इसलिए सही से साईन नही कर पाई …

उनकी बेटी अपनी कॉपी लेकर क्लास में चली गई और उसकी मम्मी  वापिस लौट गई…

जब स्कूल से वो वापिस लौटी तो एकदम बदल चुकी थी … उस दिन के बाद से उसने कभी झूठ नही बोला उसे सबक मिल गया था …

कई बार patience रख कर माता पिता को बच्चों को समझाना चाहिए पर उससे पहले ये भी कोशिश करनी चाहिए कि वो झूठ न बोले …

वैसे आप कैसे समझातें हैं जब बच्चा झूठ बोलता है  जरुर बताईएगा …

जब बच्चा झूठ बोले तो – what to do when child lies

झूठ के पाँव नहीं होते, झूठ नहीं बोलना चाहिए, झूठ बोल, झूठ बोलना पाप है, झूठ मत बोलो

 

July 26, 2017 By Monica Gupta 1 Comment

How to Write a Story for Children – बच्चों की कहानी कैसे लिखें – कैसे लिखें कहानी

 राइटर कैसे बने इन हिंदी

 How to Write a Story for Children – बच्चों की कहानी कैसे लिखें – कैसे लिखें कहानी  – राइटर कैसे बने इन हिंदी – कहानी कैसे लिखें – writer kaise bane –  बच्चों की कहानी कैसे लिखें . कहानी इन हिंदी फॉर चाइल्ड- कहानी ऑनलाइन.  बहुत सारे मैसेज आते हैं कि हम भी लिखना चाहते हैं बच्चों के लिए बताईए कि कैसे लिखें … तो आज मैं कहानी कैसे लिखी जाती है बताती हूं अगर आप मेरी वीडियो देखते रहते हैं तो मैंने एक कहानी को लेकर बताया था कि कैसे बन जाती है कहानी … आज बच्चों की कहानी कैसे लिखें ये बताती हूं

How to Write a Story for Children – बच्चों की कहानी कैसे लिखें – कैसे लिखें कहानी

मैं हूं राजकुमारी … ये मैंने लिखी थी बहुत साल पहले… और इस किताब को हरियाणा साहित्य अकादमी की तरफ से बाल साहित्य सम्मान भी मिला था …

बच्चों की कहानी के लिए खुद का बालमन होना बहुत जरुरी है … बच्चे जैसा महसूस करना बहुत जरुरी है…मैंनें जब ये कहानी लिखी थी तब मैं किसी के घर गई थी और उनके बच्चे कार्टून भी देख रहे थे और खेल भी रहे थे … कार्टून चल रही थी सिंड्रेला की … और वो लडकी कार्टून देखते देखते उठी और बहुत प्यारे शूज ले आई और मुझे दिखाते हुए बोली कि ये देखो मेरे शूज .. पापा लाए हैं … प्यारे हैं ना … इसी बीच में उसके छोटे छोटे दोस्त भी आ गए और वो खेलने लगे …

 

उन सब बच्चों में लडकी सबसे बडी थी तो वो सब को हिदायत दे रही थी और बच्चों को डांट भी रही थी …अपने दोस्तों को भी उसने शूज दिखाए जब एक बच्चे ने कहा पहन कर तो दिखाओ तो उसके पांव में फंसे ही नही … इतने में एक और कार्टून शुरु हो गई थी … जिसमे एक लडकी के लम्बे बाल होते हैं और एक राजकुमार उसके बाल पकड कर ऊपर आता है …

बस अब मुझे आईडिया मिल गया था और मोटा मोटा मैंनें नोट कर लिया और घर भागी … असल में,  एक भी एक पहचान होती है लेखकों की जब आईडिया आता है और लिख नही लेते आधीर से हो जाते हैं …

अब मेरी कहानी बनी … मैं हूं राजकुमारी मणि … 6 लडकी होती हैं बहुत प्यारी और गोल मटोल …  एक शाम उसके घर पापा के दोस्त के बच्चे आते हैं तो वो क्योकि सभी बच्चों में सबसे बडी होती है तो धाक जमानी शुरु कर देती है कि मैं हूं राजकुमारी …

अब बच्चे पूछ्ते हैं कैसे … वो बताती है क्योकि उसके पास सिंड्रेला जैसे शूज है … वो भाग कर शूज लाती है पर पहन नही पाती … फिर वो बोलती है कि तुमने कहा नी सुनी है जिसमे एक लडकी के इतने लम्बे बाल होते हैं कि एक राजकुमार उसके बाल पकड कर ऊपर आता है उससे मिलने महल में …

मैं भी राजकुमारी हूं … तुम मेरी चोटी पकडो और जैसे ही वो उसकी चोटी पकडते हैं वो दर्द से चिल्ला उठती है … और बच्चे डर कर उसके बाल छोड देते हैं … और हंसने लगते हैं कि तू राजकुमारी नही है … नही है …

इतने में मणि का डोगी आ जाता है अंदर और वो बताती है कि फ्राग प्रिंस की कहा नी तो जरुर सुनी होगी कि जब एक किस करने से मेंढक राजकुमार बन जाता है … और बच्चों पर अपनी धाक जमाने के लिए वो अपने dog  को जोर से खींचती है और dog को पता नही क्या होता है वो उसे काट लेता है …

और फिर उसके पापा फटाफट से डाक्टर  के पास ले जाते हैं और डाक्टर सूई लगाकर उसेका इलाज करता है जब उसकी आंख खुलती है तो उसके पापा डाक्टर को कह रहे होते हैं ये तो मेरी राजकुमारी है राजकुमारी … तब मणि स्माईल देती है और बोलती है कि और नही तो क्या .. मैं हूं अपने पापा की राजकुमारी मणि…

अब बच्चों की कहानी भी हो गई , परियों की भी बात हो गई … पुरानी कहानियों के बारे में भी बता दिया… तो ऐसे बन जाती हैं कहानी … कोशिश कीजिए चारो तरफ ध्यान से गौर से देखिए … बिखरी हुई हैं कहानियां …

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July 24, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

बच्चों की परवरिश कैसे करें

Life of a Teenager

बच्चों की परवरिश कैसे करें – bachon ki parwarish kaise kare – bachon ki parwarish ka tarika .. परवरिश की जिम्मेदारी मातापिता की होती है इसलिए जरुरी है कि वो उनकी देखभाल बहुत अच्छी तरह करें

बच्चों की परवरिश कैसे करें

घर के बाहर एक महिला अपने बहुत छोटे से बच्चे को खींच कर ले जा रही थी और बोल रही थी … देखती हूं कैसे नही जाता स्कूल  … वो बच्चा बहुत सहमा हुआ बस धसीटता हुआ ही जा रहा था … यकीन मानिए मेरे ही हाथ में दर्द हो गया देख कर … क्या लगता है आपको ये सही हो रहा था … !! बेशक कुछ बच्चे आनाकानी करते हैं पर ये तरीका परवरिश का नही है .. कई बार माता पिता भी गलती कर जाते हैं वैसे तो बहुत सारी बातें हैं पर कुछ जरुरी बातो का ख्याल रखना चाहिए ..

1 सबसे पहली तो ये कि बच्चों के साथ जबरदस्ती या मार पिटाई नही करनी चाहिए .. उसकी भावनाएं समझिए … वो स्कूल जा रहा है आपसे दूर  नया माहौल है वहां समय लगेगा उसे … समय दीजिए पर प्यार से..

2 . बच्चों के सामने झग़डा नही करना … हम बडे बच्चों को हमेशा बोलते हैं झगडा करना बुरी बात है तो खुद भी तो सोचना चाहिए कि नही … आपको पता है झगडे से बच्चे पर क्या असर पडता है वो सहम जाता है … पढाई में पीछे हो जाता है … चुप रहने लगता है

कई बार लडाई झगडे में मदर्स बच्चों को ही दोष देने लगती हैं कि तेरी वजह से ही यहां रुकी हुई हूं नही तो कभी की चली जाती … ऐसे में बच्चा खुद को दोषी मानने लगता है … और इस असर क्या हो सकता है आप सोच भी नही सकते … जरुरत इस बात की है झगडा बैठ कर सुलझाएं और किसी भी वजह से बच्चे को पता चल जाए तो उसे समझाएं कि सॉरी आगे से पापा से झगडा नही करुंगीं …

3   कई पैरेंटस तो पिटाई करते हैं और कई ओवर प्रोटेक्टिंग overprotective होते हैं यानि बहुत ज्यादा ख्याल रखतें हैं  ज्यादा ख्याल रखना भी बहुत नुकसान देय होता है.. हर बात बात बात में चिंता करेंगी बात बात में स्कूल में फोन करेंगी … तो मजाक बन जाते हैं बच्चें   इसमें बच्चे को उपाधि मिल जाती है mama’s boy की..   मां का लाडला .. और बच्चे को इतनी शील्ड मिल जाती है कि वि कुछ भी कर देता है उसे पता है कोई कुछ नही कहेगा … इसलिए overprotective भी नही होना …

4 कुछ पैरेंटस बच्चों  को फीलिंग व्यक्त नही करने देते … अगर किसी बात पर रो रहा है तो बोलेगें खबरदार चुप्प हो जाओ … रोना नही … तुम बच्चे नही हो अब … और अगर वो जोर जोर से हंसेंग़ें तो भी नाराज हो जाएगें को मैंनर्स नही हैं … खुल कर खेलेंगें कपडे गंदे कर के आएगें तो गुस्सा करेंगें …  …

5 बच्चे से जासूसी नही करवाएं.. बेशक  सीआईडी सीरियल सभी को अच्छा लगता है…  पर देखना पापा फोन पर किससे बात कर रहे हैं … बच्चा पढ रहा है और आप पापा के फोन के मैसेज चैक कर रहे हैं कि किसने लिखा और क्या क्या लिखा … ऐसे में पता है क्या होगा … बच्चे के मन में शक बैठ जाएगा … और वो बडा होकर शक्की बन जाएगा …

हर बात में शक करेगा … अच्छा पति या पिता नही बन पाएगा …

ऐसी और भी बहुत सारी बातें हैं फिलहाल पर इन्हें से शुरु करें … कल फिर ..

 bachon ki parwarish ka tarika, बच्चों की परवरिश कैसे करें

July 23, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

Control Anger Motivation – How to control anger in Hindi

Life of a Teenager

Control Anger Motivation – How to control anger in Hindi – गुस्से पर कैसे काबू पाएं . Smart personality  बनानी है तो गुस्सा छोडना होगा…  कल मेरी सहेली घर आई और उसे बहुत गुस्सा आ रहा था बोली स्कूल में टयूशन फीस इतनी बढा दी और पढाते हैं नही सारा काम पेरेंटस को ही करना पडता है … मैंने उसे चाय दी … बोली नही पीनी … गुस्सा आ रहा है … और  अपना गुस्सा टीचर पर नही चाय पर उतारा …

 Control Anger Motivation – How to control anger in Hindi

अब बताईए कि इस तरह से चाय पर गुस्सा निकाल कर क्या वो सब ठीक हो जाएगा … नही ना … तो बजाय गुसा करने के कुछ हल निकालना चाहिए .. वैसे किसी न किसी बात पर गुस्सा हम सभी को आता है… कोई rare  लोग ही होंगें जिन्हें गुस्सा नही आता … अब प्रश्न ये है कि गुस्सा तो आता है पर कंट्रोल कैसे करें …  … गुस्सा कैसे ठीक करें बहुत सारी बातों पर गुस्सा आता है ..इसके लिए क्या करें … स्मार्ट भी तो बनना है … क्या नही बनना … !! बनना है ना

 

बहुत सारी बाते बताई जाती हैं कोई कहता है लम्बी सांस लो, गिनती गिन लो कोई कहता है पानी पी लो कोई कहता है योगा करो … कोई कहता है सो जाओ ... वो सब भी ठीक हैं पर मेरे विचार से …

सबसे पहले तो ये सोच लीजिए कि गुस्सा किया तो मेरे शरीर का नुकसान होगा … मेरी ही तबियत खराब होगी ..बीपी बढेगा … घबराहट होगी , बैचेनी होगी … तबियत खराब होगी डाक्टर के पास जाना नही भागना पडेगा … इसलिए गुस्से वाला आईडिया कैंसिल …

गुस्सा करते हैं हमारे चेहरे की मसल्स तन जाती हैं भवे , आखें लाल  आवाज भी गुस्से वाली हो जाती है …हम स्मार्ट ही नही लगते … उस समय भगवान न करे कोई हमारी फोटो क्लिक करके फेसबुक पर डाल ते … तो क्या रह अजएगा … बस यही सोच कर … शांत .. रिलेक्स हो जाईए … कहीं सीसीटीवी तो नही लगा …

हमें गुलामी पसंद नही … गुस्सा आया और हमने गुस्सा कर दिया … जी नही हमें गुलामी पसंद नही … हम अपनी मर्जी के मालिक है … नही करेंगें गुस्सा यानि नही करेंगें

एक बात ये कि  गुस्सा किसी चीज का हल नहीं होता.और वैसे भी

गुस्सा हम उतना ही करते हैं जितना afford कर सकते हैं

मान लीजिए आपको गुस्सा आ रहा है और आपको sir  बुलाते हैं और कुछ काम कहते हैं करने को तो क्या आप उसे कहेंगें … चल चल तू कर ले … नौकर समझ रखा है क्या …

या चुपचाप सिर झुका  कर खडे रहेगें मन ही मन बहुत कुछ कह रहे होंगें लेकिन चेहरा मासूम बना रहेगा … इसका मतलब हम चाहे तो कंट्रोल कर सकते हैं …

एक दूसरा उदाहरण सुनिए अगर हमे पता है कि काम वाली बाई नही आएगी तो हम गुस्से में कांच का बर्तन जमीन पर पटकेंगें … इसलिए नही पटकेंगें कि हमे ही साफ करना पडेगा … यानि हम चाहें तो कंट्रोल कर सकते हैं …

मन को अपना दोस्त बना लें … और अपने आप से बात करें … कुछ भी … पर मन से बात करें कि तूने गुस्सा नही करना तो नही करना .

बेस्ट यही है कि अपना ध्यान हटा लीजिए … कुछ और सोचने लगिए कुछ अच्छा … पर आपकी smile  वाले expression  सामने वाले को न दिखे … अगर उसे पता चल गया कि मैं गुस्सा कर रहा हूं और ये हंस रहा है तो बस … गई भैंस पानी में … सब ग़डबड हो जाएगा … ऐसा मेरे साथ होता था … जब मम्मी गुस्सा करते तो मुझे हंसी आ जाती और …

क्या आपने एक बात नोट की है कि हमारा गुस्सा कुछ पल का मेहमान होता है … कभी ऐसा देखा है कि किसे गुस्सा आए जा रहा है आए जा रहा है … दो घंटे हो गए … तीन घंटे हो गए … नही कुछ पल के लिए आता है तबाही मचा कर चला जाता है उन पलो को अगर कंट्रोल कर लिया तो सब ठीक हो जाता है ..

 ये वक्त गुजर जाएगा … फिर ये बात सोचिए कि गुस्सा क्षणिक होता है

हमेशा नही रहने वाला तो इस दो पल की बात के लिए पूरी जिंदगी किसलिए खराब करनी एक बार संत को एक व्यक्ति ने खूब अपशब्द कहे और उनका अपमान किया. संत ने उस व्यक्ति से कहा कि मैं कल वापस आकर तुम्हें अपना जवाब दूंगा.
अगले दिन वापस जाकर उस व्यक्ति से कहा कि अब तो तुम्हें जवाब देने की जरूरत ही नहीं….

उस व्यक्ति को बेहद आश्चर्य हुआ. उस व्यक्ति ने संत से कहा कि जिस तरीके से मैंने आपका अपमान किया और आपको अपशब्द कहे, संत ने कहा

मेरे गुरु ने मुझे सिखाया है कि   अगर हम उसी समय जवाब देते हैं तो वह आपके अवचेतन मन  से निकली हुई बात होती है इसलिए कुछ समय गुजर जाने दो.

चिंतन मनन हो जाने दो  कड़वाहट , नाराजगी खुद ही घुल जाएगी.  दिमाग शांत हो जाएगा . आपके आँखों के सामने का अँधेरा जल्द ही हट जाएगा.

चौबीस घंटे गुजर जाने दो फिर जवाब दो. समय बीत जाने दो …
वैसे आप कैसे कंट्रोल करते हैं जरुर बताईए हो सकता  है आपकी टेकनीक काम कर जाए … .

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July 23, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

Importance of Advertisement – Creative Advertising Methods

Life of a Teenager

Importance of Advertisement – Creative Advertising Methods – modern advertising methods थोडी देर पहले मैं टीवी पर एक सीरियल देख रही थी तभी उसमें advertisement शुरु हो गई और मैं जैसे ही उठने को हुई तो मुझे वो advertisement बहुत अच्छी लगी और मैं देखने लगी.. मम्मी और बेटे की वो छोटी सी advertisement इमोशनल भी कर गई .

वाकई, लाखों करोडों लोगो तक पहुचने का advertisement का यानि विज्ञापन शानदार जरिया है … होते ये कुछ ही सैकिंड के होते हैं पर असर गहरा डाल जाते हैं ..

 

हर कोई चाहे वो छोटे स्केल का बिजनेस कर रहा हो या बहुत बडा … अपनी ब्रेंडिंग अपनी प्रोमोशन हर कोई चाहता है और चाहता है कि उसकी प्रोमोशन खास अंदाज मे हो …कुछ अलग सा कुछ नयापन लाए ताकि लोग उसे देख कर आकर्षित हो…

अब जैसे मान लीजिए किसी ने अपना ब्लॉग बना रखा है और वो चाहते हैं कि उसकी ओनलाईन प्रोमोशन करें ताकि ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक आए या फिर किसी ने अपना नया बिजनेस शुरु किया है और  वो लोगो को अपनी प्रोडेक्टस की या सर्विस की जानकारी देना चाह्ता है या किसी का जमा हुआ बिजनेस है  स्केल अप करना चाहता है … या कोई प्रोफेशनल है

कहने का मतलब यही है कि वीडियो ग्राफिक्स शानदार माध्यम है अपनी बात दूसरों तक पहुंचाने का

चलिए आज आपको दिखाती हूं कुछ ऐसी विडियो जिसमे आप अपना लोगो लगा कर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं  खूबसूरत वीडियों की दुनिया के शानदार सफर पर

इस सफर में समुद्र भी है …

और कैम्प फायर का खूबसूरत माहौल

मशीनी युग में मशीने न हो ऐसा कैसे हो सकता है

अपने विज्ञापन के परचम को ऐसे भी फहराया जा सकता है …

इस तरह के अलग अलग ढेरो टेमप्लेटस हैं जिसमें अपनी अपनी कम्पनी का लोगो लगा कर टैग लाईन लिख कर अलग अंदाज से इम्प्रेस कर सकते हैं …

https://www.facebook.com/ezign.in/

अगर आपको इस तरह की एडस पसंद आई और बनवाना चाह्ते हैं  या आप इसके बारे में जानना चाहते हैं तो आपको …. इस फेसबुक के इस लिंक पर जाईए इसे लाईक कीजिए और सारी जानकारी वहां से लीजिए…!!!

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July 22, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

Positive Parenting Tips for Child Development – Good Parenting Skills

बच्चों के लिए अच्छी आदतें

Positive Parenting Tips for Child Development – Good Parenting Skills  –  मेेेेरे You Tube Channel पर  Parenting को लेकर माता पिता के  बहुत सारे मैसेज आते रहते हैं … ज्यादातर पेरेंटस अपने बच्चों की कमी या शिकायत करते नजर आते हैं …मेरा बच्चा ये नही करता मेरा बेटा वो नही करता … ऐसा है वैसा है …  कल अचानक एक मैसेज पर नजर गई और यकीन मानिए मन बहुत खुश हो गया …

Positive Parenting Tips for Child Development – Good Parenting Skills

मैसेज एक महिला का था… उन्होने लिखा  कि उनका बेटा 5 साल का है और उसे कहानी बनाना बहुत अच्छा लगता है ..और कहानी सुनकर बहुत ही अच्छा लगता है ऐसा लगता है मानो ये रियल ही हो … यकेन मानिए मुझे बहुत खुशी हुई

 

असल में आज मैं उन पेरेंटस को कहना चाह रही हूं कि खूबी हर एक में होती है जरुरी है उसे देखे और पहचाने जिस महिला का मैसेज मेरे पास आया क्या उनका बेटा शरारती नही होगा … क्या वो भी किसी बात के लिए जिद नही करता होगा … करता होगा पर उन्हें इन बातो से हट कर उसकी खूबिया भी देखी … और उसे पहचाना और सबके सामने लाए …

इसलिए बच्चे में जो खूबी है उसे पहचानिए … वो केयरिंग हो सकता है उसकी मैमरी तेज हो सकती है … उसकी ड्राईंग बहुत अच्छी हो सकती है उसकी लिखाई बहुत खूबसूरत हो सकती है …

ना जाने कितनी अनगिनत बातें हो सकती हैं इसलिए बच्चे की अच्छी बातें पहचान कर उसे एनकरेज कीजिए …

तभी  कुछ बच्चे घर आए और बोले कि स्कूल में कहानी प्रतियोगिता है और जानवरो की कहानी सुनानी है और ऐसी कहानी जो प्रेरक हो ..

मुझे उसे ख्याल आई एक कहानी जो मैंने नेट पर पढी थी कि खूबी सभी में होती है …

जंगल में शेर होता है और वो युद्द की तैयारी कर रहा होता है इसलिए सभी जानवरों को बुला भेजता है कुत्ता, बिल्ली, सियार, हिरण, बंदर धोडा गधा, खरगोश सब आ जाते हैं … जब शेर सबको काम दे रहा होता है  कि आपने ये काम करना है आपने ये …

तो दूसरे जानवर बोलते हैं कि सभी अपन काम सही से करेंगें पर न तो गधा न खरगोश किसी काम का …  शेर ने पूछा कैसे तो जानवर बोले कि गधा तो एक नम्बर का मूर्ख है … अक्ल ही नही है और

खरगोश इतना डरपोक है कि पूछो ही मत … ये दोनो युद्द के लिए एक दम बेकार है …

तब शेर ने बोला कि आप सभी ने उनकी कमी तो देखी पर क्या अच्छाई देखी …

इस पर सब हैरान कि इनमे क्या अच्छाई है …

तो शेर बोले कि गधा जितनी जोर से ढेंचू ढेंचू यानि चिल्ला सकता है उतना तो कोई भी नही चिला सकता और वही खरगोश बेशक डरता हो पर उसकी स्पीड देखी फुर्ती देखी …

कर सकता है  कोई उसका मुकाबला … अब सब चुप …

तब राजा ने कहा कि अगर कमी हर एक मे होती है तो खूबी भी हर किसी में होती है …

गधे को उदघोषक बनाया गया और खरगोश को संदेश वाहक … तो बस यही बात है हम खूबी को प्रमुखता देंगें तो कमी अपने आप छिप जाएगी और बच्चों को जो मोटिवेशन मिलेगा उनका उत्साह बढेगा उसका तो कोई मुकाबला ही नही होगा …  तो अब अच्छाईयां खोजिए …

Positive Parenting Tips for Child Development – Good Parenting Skills

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