काम वाली बाई या घरेलू नौकर
काम वाली बाई या घरेलू नौकर की जरुरत सभी को रहती है और बहुत जरुरत पडने पर आनन फानन हम बिना तहकीकात किए रख लेते है पर ये कितना सही और गलत है आईए जाने दैनिक भास्कर की मधुरिमा में प्रकाशित लेख कुछ तहकीकात नौकर रखने से पहले
Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber
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आज के समय मे डाईट का बहुत ख्याल रखा जाता है .पर बात बहुत ज्यादा पुरानी भी नही है जब शादी या विवाह के लिए लडकी खोजी जाती तब सबसे पहला ये देखा जाता कि होने वाली बहू को खाना बनाना आता है या नही. पाक कला मे प्रवीण है या नही … अगर लडकी खाना बनाने मे एक्सपर्ट होती तो तुरंत समय गवाए रिश्ता कर दिया जाता पर आज के समय में लडके ऐसी लडकी की तलाश कर रहे हैं जो खाना बनाने में जरा भी कुशल न हो ताकि खा पी पर टम्मी यानि पेट या तोंद न बाहर निकल आए …. शरीर चुस्त दुरुस्त रहे … आईए पढे इस व्यंग्य में कौन खुश है और कौन सिर धुन रहा है
वैसे आप कैसी कन्या की इच्छा रखते हैं पाक कला प्रवीण या … ???
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( गूगल से साभार तस्वीर )
आंख उठा कर भी न देखू जिससे मेरा दिल न मिले ,रस्मी तौर पर हाथ मिलाना मेरे बस की बात नही …
आज जब केजरीवाल जी की नीतीश जी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान लालू जी से मिलन के बारे में सफाई आई तो बस यही बात मन में आई कि केजरीवाल जी ये हम सभी ने देखा कि पहल लालू जी ने ही की थी पर … पर … पर आपको विरोध करना चाहिए था आपने विरोध क्यों नही किया …!! देखिए दो बातें हो सकती थी या तो आप कार्यक्रम में जाते ही नही…. और अगर जाते तो दूरी बना कर रखते पर आप गए भी और भाई चारा_गी से खुद को रोक नही पाए या लालू जी नही रोक पाए और जबरदस्ती कर ली .. बहुत लोगों के दिल टूटे. जिनका मेरी तरह रहा सहा विश्वास बचा हुआ था वो भी अब डगमगा गया है क्योकि आम आदमी पार्टी पार्टी जिस लक्ष्य को लेकर सिर उठा कर चली थी अब वही सिर उठ नही रहा और अन्य पार्टियों के इस प्रश्न का सामना करने में असमर्थ हैं. कितनी लडाई करे और किस किस से लडाई करें कि अरविंद जी ने सही किया गले मिलकर … इसलिए अब यही बोलना पडता है कि हम कभी आम आदमी पार्टी में “थे” अब तो यही सोच है कि कोई सोच नही है बस दुख है और सिर्फ दुख है.
अब आप कुछ भी कहिए कोई भी सफाई दीजिए या ना दीजिए कोई फर्क नही पडता… क्योकि हमारी सोच तो कुछ इस तरह की है कि” आंख उठा कर भी न देखू जिससे मेरा दिल न मिले रस्मी तौर पर हाथ मिलाना मेरे बस की बात नही”
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आज सुबह दैनिक भास्कर अखबार पढते पढते एक खबर पर नजरे टिक गई . चाय का कप एक तरफ रख कर मैं जुट गई खबर पढने में …खबर थी कि 2050 के बाद विश्वभर में कैंसर से नही जाएगी किसी की जान .. (एम्बीकान 2015) यानि राष्ट्रीय कार्फ्रेस आफ एसोसिएशन आफ मेडिकल बायोकेमिस्ट आफ इंडिया के दौरान बताया गया कि वैज्ञानिक शोध मे जुटे हैं लंबा वक्त लगेगा पर कामयाबी की सम्भावना है.पढ कर राहत मिली और एक स्माईल भी आ गई. क्योकि जिस तरह से खांसी जुकाम होता है ना आजकल वैसे ही कैंसर का सुनने को मिल रहा है. जिसे देखो उसे कैंसर…. मेरे अपने ही परिवार के ना जाने कितने लोगों को इसकी वजह से जिंदगी को अलविदा कहना पडा,
कैंसर की चपेट में लगातार ढेरों लोग नित आए जाए रहे हैं. कैंसर महंगा ईलाज महंगा होने के साथ साथ बहुत painfull भी है ईश्वर शोध करने वालो को और ज्यादा ताकत दे ताकि वो जल्द से जल्द इस बीमारी का तोड खोज सकें और हम किसी अपने को खोने से बच जाए… बाकि जितनी एहतियात आरम्भ से रखें उतना ही अच्छा… तब तक स्वस्थ रहिए
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महा गठबंधन और फिर नेताओं का मंत्री पद के लिए चयन जनता के बीच यही आवाज उठ रही है कि नीतीशे बाबू सही नही पकडे हैं . वैसे शपथ ग्रहण समारोह में लालू जी और अरविंद जी का मिलना भी आप प्रेमियों को नागवार गुजरा और होना भी चाहिए…
खैर इन सब में एक बात तो ये हुई कि न्यूज चैनल वालो को मसाला मिल गया और वो खूब ठोक बजा कर बहस कर रहे हैं
Educational Qualification of Bihar Ministers – Hindi Oneindia
पटना। बिहार की जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक बार फिर राज्य की कमान सौंपी है। बिहार को विकास के नये पथ पर ले जाना टीम नीतीश के लिये बड़ी चुनौती है। क्योंकि टीम के कोर सदस्यों की शैक्षिक योग्यता विकास कार्यों के आगे रोढ़ा बन सकती है।
चलिये जानते हैं नीतीश की टीम के लोग कितने पढ़े लिखे हैं:
1. नीतीश कुमार – मुख्यमंत्री – गृह, सामान्य प्रशासन व सूचना-जनसंपर्क (बैचलर आॅफ इन इंजीनियरिंग)
2. तेजस्वी यादव – उपमुख्यमंत्री – भवन निर्माण, पथ निर्माण व पिछड़ा-अतिपिछड़ा कल्याण (नौंवी फेल)
3. तेज प्रताप यादव – स्वास्थ्य,लघु सिंचाई,पर्यावरण(बारहवीं फेल)?
6. ललन सिहं – जल संसाधन (आठवीं) – | Educational Qualification of Bihar Ministers – Hindi Oneindia
फिलहाल मीडिया की पैनी नजर और जनता की शुभकामनाएं हैं कि नीतीशे सरकार की महा गठबंधन सरकार सफलता पूर्वक अपना कार्यकाल पूरा करे
सही नही पक़डे हैं सरकार आप !!!
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आईना – लघु कथा है जोकि दैनिक भास्कर की मधुरिमा में प्रकाशित हुई. कहानी में मा बेटे और नौकरी पेशा बहू का यथार्थ चित्रण है काम काजी महिलाओ को आईना दिखाती है..
आमतौर पर कामकाजी महिलाएं अपने ऑफिस और काम में इतनी डूब जाती है कि घर परिवार उनका बहुत पीछे छूट जाता है और बाद में जब उन्हें समझ आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है यही सब दिखाने की कोशिश की है कहानी आईन में …
लीजिए पढिए एक नई कहानी कोट
कोट
स्कूल यूनीफार्म का कोट था। बड़े के छोटा हुआ तो दो साल छोटे ने पहन लिया। पर छोटा बडे़ से ज्यादा लंबा हो गया और उसके लिए नया कोट सिलवाना पड़ा। अब रीटा मौसी सोचने लगीं कि वो कोट जब बनवाया था, तब सात सौ का बना था… इसीलिए उसने सोचा कि इस साल तो किसी को नहीं दूँगी, उसे सहेजकर ट्रंक में रख लिया। अगली सर्दी में फिर ट्रंक खुला। कोट को उलट-पुलट करके फिर उसमें नीम के पत्ते और फिनाइल की गोलियाँ डालकर वापस रख दिया, क्योंकि वो अभी भी नया जैसा लगता था। एक साल फिर बीतने पर उसने हिम्मत करके ट्रंक से कोट बाहर तो निकाला, पर किसी को देने का मन बना ही नहीं पाई। पूरे साल बेचारा ट्रंक में पड़ा रहा।
आज रीटा मौसी ने आखिरकार, पाँच साल बाद सोच लिया कि कोट को किसी-न-किसी को जरूर देना है…. पर हाय… अब कोट दिखने में मैला और पुराना लगने लगा। एक बार तो रीटा मौसी ने बर्तन वाली को दिखाया वो भी नाक-मुँह चढ़ाकर बोली कि इसके तीन गिलास ही मिलेंगे, लेना है तो बोलो…. और घर की ओर झाँकती हुई बोली, कुछ नया और अच्छा नहीं है क्या….। रीटा मौसी ने बिना मोल-भाव किए उसे भगा दिया। अब रीटा मौसी किसी गरीब-फटेहाल को ढूँढ रही हैं जो वो कोट पहन ले…।
एक शाम एक गरीब-फटेहाल बच्चा आया, उसने फटाफट कोट निकालकर उसे दे दिया। उसने कोट तो पहन लियाए फिर बोला कि कोट गर्म नहीं है, कोई टोपी या दस्ताने हों तो… रीटा मौसी ने उसे भगा दिया…और दरवाजा बंद करके यही सोचने लगी कि काश… पाँच साल पहले ही यह कोट किसी जरूरतमंद को दे देती तो कितना अच्छा होता! क्योंकि आज कोट देकर भी न दिए के बराबर जो हो गया था।
कैसी लगी कहानी जरुर बताईएगा ..
मां शैलपुत्री – क्या है कहानी – Monica Gupta
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की कहानी देवी दुर्गा के नौ रूप हैं. पहले स्वरुप मां शैलपुत्री की क्या है कहानी सुनिए या पढिए 3 मिनट 9 सैकिंड का ऑडियो read more at monicagupta.info
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