Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

  • About Me
  • Blog
  • Contact
  • Home
  • Blog
  • Articles
    • Poems
    • Stories
  • Blogging
    • Blogging Tips
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Kids n Teens
  • Contact
You are here: Home / Blog

October 3, 2015 By Monica Gupta

लेखिका से कार्टूनिस्ट तक का सफर-मोनिका गुप्ता

Journey from writer to cartoonist of Monica Gupta

लेखन का शौक बचपन से ही था  पर असली पहचान मिली इंटरनेट से और फिर शुरु हुआ लेखिका से कार्टूनिस्ट तक का सफर-मोनिका गुप्ता का यानि मेरा इंटरनेट ने ना सिर्फ लेखन को बढने का मौका दिया बल्कि कार्टून बनाने की दुनिया में भी पांव रखने का मौका दिया.

कार्टून मोनिका गुप्ता

कार्टून मोनिका गुप्ता

Indian Lady Cartoonist Monica Gupta

मेरा लेखिका से कार्टूनिस्ट तक का सफर-मोनिका गुप्ता ज्यादा उतार चढाव वाला नही रहा क्योकि मैनें अखबारों के सम्पादकों के चक्कर नही लगाए… जो बनाया उसे नेट पर फेसबुक पर गूगल प्लस पर डालती गई और फिर शुरु हुई पहचान मिलनी

From writer to cartoonist Monica Gupta

बात बचपन के उन दिनों की है जब घर पर या किसी सहेली या जन्मदिन होता तो मैं कार्ड बना कर दिया करती. उन दिनो कार्डस का बहुत प्रचलन था  मेरी कोशिश यह रहती कि कटिंग वाले कार्डस बना कर दूं और सभी पसंद भी करते थे.  फिर समय बीता और कार्ड बनाने का शौक जारी रहा.

कालिज मे आने के बाद अखबार द ट्रिब्यून में “You said it” नामक कार्टून आया करता था. अखबार सुबह सुबह आ जाता था और मैं फटाफट वैसा कार्टून बना कर कालिज ले जाती और प्रिन्सीपल के कक्ष के सामने वॉल मैगजीन मे लगा देती.

एक दिन उन्होनें ( शांति मलिक ज़ी) ने मुझे बुलाया और पूछा कि क्या तुम बनाती हो? एक बार तो मैं डर  गई सोचा कि आज तो गए काम से डांट पडेगी पर मेरे हां कहने पर कि मैं अखबार से देख कर बनाती हूं उन्होनें शाबाशी दी और बोला कि बनाते रहा करो… उस दिन तो मानो मेरे पंख ही लग गए थे. खैर, समय बीतता रहा और होस्टल जाने के बाद, पढाई मे लग कर कार्टून वार्टून सब भूल गई.  फिर बहुत समय बीत गया.

इस बीच लेखन तो चलता रहा पर चित्र बनाना कही छूट सा गया और अन्य कार्यों जैसे आकाशवाणी , दूरदर्शन, डाक्यूमैंट्री, स्क्रिप्ट लेखन , वायस ओवर, अपने बनाए टीवी प्रोग्राम और फिर ज़ी न्यूज की संवाददाता और किताबे लिखने  आदि में बहुत व्यस्त हो गई. पर इतना जरुर है दोनो बच्चे बहुत ही अच्छी चित्रकारी करते और कई बार ईनाम भी मिलता तो खुशी के साथ गर्व भी होता.

समय और बीता लेखन जारी रहा किताबें भी आ गई और एक पहली ही किताब ” मैं हूं मणि ” को हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से सन 2012 में  बाल साहित्य पुरस्कार भी मिला.फिर मुझे पता लगा ओरकुट नाम का कुछ है उससे पहले की उसे जान पाती…. पता चला कि फेसबुक शुरु हुआ है. फिर उसमे शामिल हो गई. इसी बीच नव भारत टाईम्स में भी अपना ब्लॉग बना लिया और साथ साथ अपना ब्लॉग ( जो आप पढ रहे हैं)  भी बना लिया.

फेसबुक पर एक दो कार्टूनिस्ट  मित्र बने और मुझे अपना समय याद आ गया. एक दिन हिम्मत करके एक कार्टून डाल ही दिया. यह बात …… मैने सोचा भी नही कि पाठको को अच्छा लगेगा… बस फिर तो मैं रुकी नही. जब कोई आईडिया आता बना लेती  और डाल देती. कुछ कमेंटस मुझे यह जताने के लिए भी होते कि मुझे कार्टून नही बनाने चाहिए पर मैं हमेशा अच्छे कमेंटस को ध्यान मे रखती और प्रयास रहता की सुधार भी होता रहे… मुझे पता था कि मेरी चित्रकारी कोई बहुत अच्छी नही है पर सोचा कि जब एक मंच मिला है तो क्यो न उसका पूरा लाभ उठाया जाए  है और दूसरा ये  कि इसी बहाने प्रैक्टिस ही होती जाएगी …!!

 मोनिका गुप्ता  

फेसबुक पर जनवरी 2011 में डाले कार्टून Cartoon MONICA GUPTA 2 (2)

कार्टून मोनिका गुप्ता

कार्टून मोनिका गुप्ता

लेखिका से कार्टूनिस्ट तक का सफर-मोनिका गुप्ता

फिर एक प्रतियोगिता आयोजित की गई… A day in the life of India….. इसमे मैने लगातार कार्टून भेजे और कम से कम 50 कार्टून शार्ट लिस्ट हुए. मेरे विचार से किसी नए कलाकार के लिए इससे अच्छा प्रोत्साहन हो ही नही सकता.

aday3 cartoon monica gupta aday cartoon monica gupta

aday 4 cartoon by monica guptaकार्टून .... मोनिका गुप्ता कार्टून …. मोनिका गुप्ता

http://navbharattimes.indiatimes.com/photomazza/eye-witness/-/photomazaashow/8460997.cms

एक दिन  नेट पर सर्च करते हुए मैने देखा कि मेरे बनाए कार्टून्स  के स्लाईड बने हुए हैं जोकि मेरा उत्साह बढाने के लिए बहुत थे…

लेखन के साथ साथ  नव भारत टाईम्स के ब्लॉग में कार्टून भी नियमित डालने  शुरु किए तो वहां से भी बहुत अच्छा रिस्पांस मिलता चला गया.

एक दिन फेसबुक मित्र का मैसेज आया कि आपका कार्टून दैनिक जागरण मे प्रकाशित हुआ है.. लेख, हास्य, व्यंग्य तो  बहुत  प्रकाशित होते रहते थे पर कार्टून का छपना मेरे लिए बेहद खुशी का पल था.

दैनिक जागरण मे कार्टून ( मोनिका गुप्ता)

उसके बाद  2012  से मेरे कार्टून नियमित तौर से दैनिक जागरण के मुद्दा मे प्रकाशित होने लगे… ये लगभग डेढ साल तक आए.  हर बृहस्पतिवार ये मुद्दा के तहत प्रकाशित होता था.

मोनिका गुप्ता के कार्टून दैनिक जागरण में प्रकाशित

मोनिका गुप्ता के कार्टून
दैनिक जागरण में प्रकाशित

कार्टून मोनिका गुप्ता दैनिक जागरण में

कार्टून मोनिका गुप्ता   दैनिक जागरण में

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता                                                                                               मोनिका गुप्ता

इसी बीच अन्य समाचार पत्रों व पत्रिकाओं जैसाकि कार्टून वाच  में तथा नभछोर में नियमित कालम{ नजरिया} के नाम से छपना शुरु हुआ जिसमे नियमित रुप से ढेरों कार्टून आते चले गए…

cartoon nabh chor monica gupta cartoon-nabh-chor-5

कार्टून मोनिका गुप्ता

कार्टून मोनिका गुप्ता

ये सब चल ही रहा था तभी निमंत्रण  मिला Cartoonist Exhibition का

बात 29 Oct. 2012 की है .Government Of Kerala की ओर से राष्ट्रपति भवन के आडिटोरीयम में केरल कार्टून अकादमी ने late shree P.K.S. Kutty की याद में एक पुस्तिका का विमोचन किया। विमोचन श्री प्रणव दा ने किया। राष्ट्रपति भवन में 12 बजे कार्यक्रम आरम्भ हुआ कार्यक्रम करीब 2 घटे तक चला .इस अवसर पर श्री प्रणव दा ने भी अपने अनुभव सभी को बताए . देश भर से आए जाने माने कार्टूनिस्ट ने इसमे भाग लिया। अवसर पर Exhibition भी लगाई गयी। जिसे दादा ने बहुत सराहा सच में, सभी जाने माने कार्टूनिस्ट से मिलना,रूबरू होना सुखद अनुभव रहा …

कार्टूनिस्ट मोनिका गुप्ता

  कार्टूनिस्ट मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता कार्टूनिस्ट

हालाकिं प्रणव दा के लिए कार्टून बनाया पर दे न सकी पर वो अनुभव अभी भी मेरी आखों में मौजूद है..

लगातार कार्टून बना रही हूं. कई बार ठीक तो कई बार अच्छे बन जाते हैं. इस बीच कई अखबारों मे कार्टून आने शुरु हो गए. नेट व अन्य अखबारों के साथ साथ  कई बार दैनिक भास्कर में भी प्रकाशित हुए और हो रहे है…

कार्टून मोनिका गुप्ता

कार्टून मोनिका गुप्ता

कार्टून मोनिका गुप्ता

कार्टून मोनिका गुप्ता

कार्टून मोनिका गुप्ता

कार्टून मोनिका गुप्ता

तब से लगातार कार्टून बना रही हूं इस बीच काफी पत्र पत्रिकाओं में भी भेजती रहती हूं पर मुझे लगता है कि नेट अपनी बात कहने का सबसे अच्छा माध्यम है आज अगर मैं समाचार पत्रों पर ही निर्भर करती तो शायद कभी बना ही पाती पर ब्लॉग  और फेसबुक ने नई पहचान दी और पाठको का कार्टून पर महज लाईक करना ही नया आत्मविश्वास पैदा करता चला गया…

आज के कुछ कार्टून …

m IMG_10505456941162 Digital-India-week-by-monica-gupta cartoon nitish by monica cartoon election by monica g cartoon acche dina by Monica gupta bihar by monica gupta

कार्टून मोनिका गुप्ता

कार्टून मोनिका गुप्ता

एक फायदा और हुआ वो ये कि जहां मेरे पहली पुस्तक “मैं हूं मणि” के कुछ चित्र मैने बनाए वही अपनी लिखी एक अन्य पुस्तक ” अब मुश्किल नही कुछ भी ” का कवर पेज तैयार किया

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता

आम आदमी पार्टी पर बनाए कुछ कार्टूंन वीडियों रुप में बनाए

इसके इलावा 25 June to 27 June, 2015 को  A unique, major exhibition of cartoons and caricatures featuring Charlie Chaplin by 200 cartoonists.जोकि  Piramal Gallery, National Centre for the Performing Arts (NCPA), Nariman Point, Mumbai  मे आयोजित हुई. उसमे भी हिस्सा लिया…

और अगर आप गूगल सर्च करेंगें तो आपको ढेर सारे कार्टून देखने को मिलेंगें …

कार्टून मोनिका गुप्ता

कार्टून मोनिका गुप्ता

cartoonist pics cartoonist names charlie monica

चार्ली चेप्लिन के जन्म के 125 वे वर्ष पर उनके फ़िल्मी जीवन में व्यंग्य की कथा के साथ-साथ उनकी स्क्रीन पर उपस्थिति का 100 वां वर्ष मनाने के लिए ये साल यानि 2015 चार्ली चैपलिन वर्ष के रूप में मनाया गया. इनमें से लगभग 200 कार्टून एक विशेष पुस्तक में शामिल किए गए हैं.चार्ली चैपलिन लाइन्स’ के रूप में सबसे पहले भारत में चार्ली चैपलिन वर्ष समारोह 25-27 जून , NCPA मुंबई में कार्टून/करिकेचर प्रदर्शनी आयोजित की गई.. इसमे मेरे बनाए चार्ली चैपलिन भी शामिल किए गए

बेशक, मुझे अपने पहले के बनाए कार्टून देख कर हंसी आती हैं कि कितने बुरे बनाती थी … पर ये तो चलता ही रहेगा और चलता ही रहना चाहिए … मेरे विचार से हम जिस भी काम में जुटे वो सच्चे मन और ईमानदारी से  करते रहना चाहिए सफलता कभी न कभी जरुर मिलेगी … !!!

हाल ही में एक अन्य प्रदर्शिनि का आयोजन किया गया

monica cartoonist

IIC is organising 9th Anniversary of the Indian Cartoon Gallery on 4th June 2016 in Bangalore. Distribution of Prizes of MKMA-2015 and an exhibition of Indian and Foreign cartoons will also be organised on the same occasion at the cartoon gallery.

विश्व पर्यावरण दिवस पर कार्टून प्रतियोगिता – National Level Cartoon Competition

monacartoon plant

 http://blogs.navbharattimes.indiatimes.com/author/monicagupta/

बात 30 जून 2011 की है जब मैंने नव भारत टाइम्स में अपना रीडर्स ब्लाग लिखना शुरु किया  था.

इसके बाद  29. 11. 2012 की बात है जब मैनें अपना blog (जिसे आप पढ रहे हैं )  बनाया और उस पर लिखना शुरु किया  और आज की तारीख में 1,213 यानि  एक हजार 213 पोस्ट हो चुकी हैं और नव भारत टाईम्स के ब्लॉग  में भी तब से आज तक 730 लेख, विचार और कार्टून प्रकाशित हो चुके हैं और फिर अक्टूबर 2015 से  नव भारत टाईम्स ने मुझे रीडर्स ब्लॉग  से author blog में शामिल कर लिया गया है जिसमें मेरे अधिकतर कार्टून प्रकाशित होते हैं.

आप लिंक क्लिक करके देख सकते हैं  😎

अब मैं अपने ही बनाए कार्टून की वीडियों बना रही हूं ताकि आप सभी इसे सहजता से देख पाएं

थैक्स गूगल , फेसबुक गूगल प्लस, टवीटर, पिनट्र्स्ट और नव भारत टाईम्स ब्लॉग  के साथ साथ उन सभी का जिन्होनें मुझे हमेशा मुझे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से प्रेरित किया और कर रहे हैं …

आज ये देख कर और भी ज्यादा खुशी हुई जब मेरे बनाएं कार्टून एबीपी न्यूज में दिखाए गए… सोचा आपसे भी शेयर कर लूं…
https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2015/10/abp20.mp4

सफर जारी है….!!! 🙂

लेखिका से कार्टूनिस्ट तक का सफर-मोनिका गुप्ता

क्या आप भी कुछ बनना चाह्ते हैं तो सोचिए मत बस प्रयास जारी रखिए हौंसला रखिए और बहरे बन जाईए ( नकारात्मक विचारों की तरफ ध्यान नही दीजिए) … फिर देखिए सफलता न मिले तो मुझे बताईएगा 🙂

हंसते रहिए मुस्कुराते रहिए !!!

October 2, 2015 By Monica Gupta

रक्तदाता और सफलता की कहानी

 

r saini kuk

r saini kuk

 

रक्तदाता और सफलता की कहानी

अगर बात हो निस्वार्थ स्वैच्छिक रक्तदान की तो हरियाणा के राजेन्द्र सैनी का नाम आगे आता है.

हरियाणा के जिला  कुरुक्षेत्र में रक्तदान से सम्बंधित एक कार्यक्रम चल रहा था. स्टेज पर जो भी वक्ता आ रहे थे सभी राजेंद्र सैनी का धन्यवाद और आभार प्रकट कर रहे थे कि आज रक्तदान के क्षेत्र मे रक्तदाता या कैम्प आयोजक या प्रेरक वो जो भी कुछ  है  सब राजेंद सैनी जी  की वजह से हैं.सभी के मुंह से यह बात सुनकर एक उत्सुकता सी बनी हुई थी कि आखिर सैनी जी है कौन  क़िस तरह का काम कर रहे हैं. खैर मीटिंग खत्म हुई और मुझे मौका मिला. सैनी साहब से बात करने का.

न्यू पिंच ने बदल दी दुनिया

1 जून 1962 को पुंडरी मे जन्मे राजेंद्र सैनी आज पूरी तरह से रक्तदान केप्रति समर्पित है. इतना ही नही इनके  परिवार  परिवार म्रे बेटा और बेटी भी रक्तदाता है. मेरे पूछ्ने पर कि रक्तदान के प्रति ऐसी प्रेरणा कब आई तो उन्होने बताया सन 1998 मे रक्तदान मे मीटिंग के दौरान  एक बार उन्होने श्री युद्दबीर सिह ख्यालिया को सुना और रक्तदान के बारे मे उनकी बाते सुनकर उनकी सोच बदली और उन्होने मन ही मन प्रण किया कि वो भी रक्तदान करेंगें. बाकि तो सब ठीक था बस एक ही जरा सी अडचन थी कि उन्हे सूई से डर लगता था. हालाकिं वो बच्चो या बडो को रक्तदान के प्रति जागरुक करते रहते थे कि सूई से जरा भी डर नही लगता पर खुद सूई फोबिया से बाहर नही निकल पा रहे थे.

एक दिन एक कैम्प के दौरान मन बना पर फिर डर गए और सोचा कि किसी लैब मे ही जाकर चुपचाप रक्तदान करके आंऊगा क्योकि अगर यहां  रक्तदान कैम्प मे वो रक्तदान करते समय डर के मारे चिल्ला पडे तो दूसरे लोग उनके बारे मे क्या सोचेगें पर शायद उस दिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था. डाक्टर ने उनकी भावनाओ को समझा और उन्हे बातो मे लगा कर उन्हे लिटाया और  सूई लगा दी. जब रक्तदान करके वो उठे  तो नई स्फूर्ति का उनके अंदर संचार हो रहा था, उस समय का अनुभव बताया कि दर्द तो महज इतना ही हुआ जितना  कोई नई कमीज पहनता है और उसके दोस्त उसे न्यू पिंच बोलते. 

दूसरे शब्दो मे यह न्यू पिंच ही था जिसने एक नई दिशा दी और वो और भी ज्यादा विश्वास से भर कर लोगो को रक्तदान के प्रति जागरुक करने मे जुट गए. तब का दिन है और आज का दिन है. आज सैनी जी 49 बार रक्तदान कर चुके हैं और न्यू पिंच से प्यार हो गया है. उन्होने बताया कि रक्तदान मे अर्धशतक तो लग चुका है पर  बस अब वो  शतक लगना चाहते हैं. उन्होने बताया कि लोगो को प्रेरित करना और वो प्रेरित हुए  लोग  आगे लोगो को प्रेरित करके मुहिम जारी रखे तो एक सकून सा मिलता है. बहुत अच्छा लगता है. जब  एक दीए से दूसरा दीया जगमग करता है तो दिल को खुशी मिलती है जिसका बयान शब्दो मे नही किया जा सकता.

अपनी बिटिया श्वेता के बारे मे उन्होने बताया कि जब उनकी बिटिया पहली बार रक्तदान के लिए गई तो डाक्टर ने बोला कि वजन कम है  वो रक्तदान कर  नही पाएगी. इस पर वो काफी मायूस हो गए पर आधे धटे बाद जब देखा तो वो रक्तदान करके बाहर आ रही थी इस पर जब उन्होने हैरानी जाहिर की तो श्वेता ने बताया कि उसने 5-6 केले खा लिए थे और रक्तदान कर के आई है. उसके चेहरे से जो खुशी झलक  रही थी वो आज भी भुलाए नही भूलती.

मैने जब उनसे पूछा कि कार्यक्रम के दौरान जब सभी उनका नाम ले कर सम्बोधितकर रहे थे तो वो कैसा महसूस कर रहे थे इस पर वो बोले कि खुशी तो हो रही थी एक नया संचार सा शरीर मे भर  रहा था पर दूसरी तरफ अच्छा भी नही लग रहा था. कारण पूछ्ने पर उन्होने बताया कि कही दर्शक यह ना सोचे कि मैंने  ही उन्हे कहा है कि  मेरे बारे मे भी जरुर कहना. उनकी बात सुनकर मै मंद मंदमुस्कुरा उठी क्योकि मैने खुद सुना कि लोग पीठ पीछे भी उनकी तारीफ कर रहेथे. आखिर नेक काम की अच्छाई तो छुपाए नही छिप सकती.

आज रक्तदान के क्षेत्र मे हरियाणा के  राजेंद् सैनी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. पीजीआई रोहतक से उन्हे कैम्प आयोजक रुप मे दो बार सम्मान मिल चुका है और फस्ट एड ट्रैनर यानि प्राथमिक चिकित्सक ट्रैनर  व रक्तदाता के रुप मे वो महा महिम बाबू परमानंद, डाक्टर किदवई और श्री धनिक लाल मंडल से सम्मानित हो चुके है. राजेंद्र सैनी  दिन रात इसी उधेड बुन मे रहते है  कि किस तरहलोगो को जागरुक करे और उन्हे मोटिवेटर बनाए ताकि वो इसका संदेश आगे औरआगे फैलाते रहें. भले ही राजेंद्र सैनी आज 52 साल के हो चुके हैं पर खुद को वो नौजवान ही मानते है उनका कहना है कि रक्तदाता कभी बूढा नही होता वो हमेशा जवान ही बना रहता है.उनकी भाषा मे ‘ तो आप न्यू पिंच कब करवा रहे हैं”  !!!!

हमारी ढेर सारी शुभकामनाएं !!! 

रक्तदाता और सफलता की कहानी

 

October 2, 2015 By Monica Gupta

विजन बनाम वजन

विजन बनाम वजन

Vision /वजन = बिहार में उपहार
अब चुनावों में विजन से किसी को क्या मतलब … सभी को वजन से मतबल है कि कित्ता मिलेगा … इसलिए विजन नही वजन का राग असर आलापिएगा सर

cartoon vision by monica gupta

cartoon vision by monica gupta

जिस तरह से बिहार चुनाव मे जनता को लुभाने के प्रयत्न किए जा रहे हैं … बेहद दुखद है … यानि फिर एक ऐसा उम्मीदवार जीतेगा जो पैसे के बल पर जीता

http://www.amarujala.com/feature/states/bihar/bjp-released-vision-document-for-bihar-election-hindi-news/

बिहार विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने घोषणा पत्र के रूप में अपना विजन डाक्यूमेंट पेश कर दिया। छात्रों को लैपटॉप और दलितों को रंगीन टीवी देने का वादा कर भाजपा ने भी विकास के मुद्दे को एकतरफ रख उसी लोकलुभावन राजनीति की ओर ही कदम बढ़ा दिया है जिस पर पिछले कुछ समय से राजनीतिक दल जीत हासिल करते आए हैं।

पटना में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विजन डाक्यूमेंट पेश करते हुए कहा कि बिहार को बीमारू राज्य की श्रेणी से निकालकर विकास की दिशा में ले जाने के लिए भाजपा ने यह संकल्प पत्र जारी किया है।

वित्त मंत्री ने भी प्रधानमंत्री मोदी की तरह बिहार के चर्चित मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया की तर्ज पर बिहार में भी मेक इन बिहार और डिजिटल बिहार कार्यक्रम शुरू करने का वादा किया।

October 2, 2015 By Monica Gupta

रक्तदान और महिलाए

रक्तदान और महिलाए

रक्तदान और महिलाए – बेशक जागरुकता का अभाव है पर फिर भी बहुत महिलाएं हैं जो रक्तदान  के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही हैं…

आज  जिस महिला से आपकी मुलाकात होगी वो ठेठ गांव की अनपढ महिला है.उम्र 50 से भी उपर हो चुकी है पर अगर रक्तदान की बात करें तो उसमे वो हमेशा ना सिर्फ सबसे आगे रहती है बल्कि लोगो को रक्तदान के प्रति अपने ठेठ मारवाडी अंदाज मे  प्रेरित भी करती हैं. अभी तक वो 21 बार  से ज्यादा बार रक्तदान कर चुकी हैं.

रक्तदान और महिलाए

इस जागरुक महिला का नाम है श्रीमति बिमला कासंवा. इनका जन्म राजस्थान के गांव खारा खेडा मे हुआ. अपने 6 भाई बहनो मे ये सबसे बडी थी. अपनी मां के साथ घर का सारा काम करवाना फिर अपने छोटे छोटे भाई बहनो की भी देखभाल करना. बस इन्ही सब कामो मे बचपन कैसे निकल गया पता ही नही चला.

blood donor

blood donor

 

उन्होने बताया उस समय लडकियो को पढाने पर जोर नही दिया जाता था. घर के काम काज मे ही लगा दिया जाता था. वो भी इसी कामकाज मे व्यस्त हो गई.  पर ऐसा  भी नही था कि उनका मन पढने का या स्कूल जाने का नही करता था. जब बच्चे सुबह सुबह स्कूल मे प्रार्थना करते तो उनका मन भी करता कि वो भी जाए पर यह सम्भव ही नही हो पाया और वो अनपढ ही रह गई.

 

समय बीता और उनकी शादी हो गई. अपने नए जीवन का स्वागत उन्होने बहुत खुशी खुशी किया. ईश्वर ने उन्हे प्यारी सी बेटी और एक बेटा दिया. यहां भी वो अपने घरेलू कामो मे ही व्यस्त रही. तभी अचानक एक दिन उनकी जिंदगी मे एक यादगार दिन बन गया.

 

10 जनवरी 1997 को हरियाणा के सिरसा में  एक रक्तदान मेला लगा. उनके पति श्री भगीरथ जी ने बस एक बार कहा कि रक्तदान मेला लगा है .यहां रक्तदान करके आते हैं. उन्हे रक्तदान की जरा भी समझ नही थी पर वो अपने पति के साथ चली गई. वहां इन्होने रक्तदान किया और रक्तदान करके बेहद खुशी मिली. बस उस दिन के बाद से इसके बारे मे सारी जानकारी ले कर इन्होने मन बना लिया कि ये हर तीन महीने बाद  रक्तदान करेगीं.

 

रक्तदान के दौरान इन्हे यह भी पता चला कि इनका ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है . डाक्टर ने बताया कि इसकी मांग बहुत है इसलिए जब भी जरुरत होगी वो उन्हे बुला लिया करेगें. उसके बाद काफी बार इन्होने इमरजैंसी मे भी रक्तदान दिया.

 

एक वाक्या याद करते हुए उन्होने बताया कि एक बार रात को एक बजे  फोन आया कि रक्तदान के लिए उनकी जरुरत है और डाक्टर ने उनके लिए  एबूलैस भेज दी.इतनी देर रात गाडी आई तो पडोसी भी जाग गए. पर तब जल्दी थी इसलिए वो फटाफट उसमे सवार होकर चली गई. सुबह आकर वो अपने रोजमर्रा के कामो मे जुट गई. वही पडोसी आकर पूछ्ने लगे कि रात को क्या हुआ. इस पर उन्होने हंसते हुए बताया कि कुछ नही हुआ बस रक्तदान करने गई थी.

 

बिमला जी  हो इस बात का दुख जरुर है कि उन्हे पहले इसकी जानकारी नही थी पर अब जब उन्हे इसकी अहमियत का पता चला तो उन्होने अपने दोनो बच्चो को भी रक्तदान का पाठ पढाया. आज इनका सारा परिवार नियमित रुप से रक्तदान करता है. बिमला जी समय समय पर रक्तदान से सम्बंधित वर्कशाप मे जाकर रक्तदान के प्रति जनता को जागरुक भी करती रहती है.

 

यकीनन आज बिमला कांसवा  सभी लोगो के लिए एक प्रेरणा से कम नही है.

रक्तदान और अमिताभ बच्चन

रक्तदान और महिलाए

 

October 2, 2015 By Monica Gupta

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस

आईएसबीटीआई ( मोनिका गुप्ता)

 

 

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस की हार्दिक शुभकामनाऎं…

 खुशी का विषय यह है कि आईएसबीटीआई यानि इंडियन सोसाईटी आफ ब्लड ट्रांसफ्यूजनएंड इमयोनोहीमेटोलोजी  ने ही इस दिवस की शुरुआत सन 1976 में की थी.  आईएसबीटीआई पिछ्ले चालीस सालों से रक्तदान से जुडी गैर सरकारी संस्था है और स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र  मे अभूतपूर्व कार्य कर रही है. स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति पूरी तरह समर्पित आईएसबीटीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. युद्द्बीर सिह खयालिया एक ही दृष्टि कोण  लेकर चल रहें  हैं  कि जनता में स्वैच्छिक  रक्तदान के प्रति इतनी जागरुकता आ जाए कि सुरक्षित रक्त मरीज की इंतजार करे  ना मरीज रक्त की. डाक्टर ख्यालिया का  मानना है कि इसके लिए शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान की भावना का होना बेहद जरुरी है और ऐसी जागरुकता जन जन मे कैसे लाई जाए. अपने इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आईएसबीटीआई दिन रात कार्यरत है. इन्ही सब बातों को ध्यान मे रखते हुए  जगह जगह ट्रैंनिग करवाई जाती है. स्कूल कालिजो मे क्विज, पोस्टर बनाना तथा अन्य माध्यमों से जागरुकता लाई जाती  है. भिन्न भिन्न रक्तदान के  खास अवसरो पर जैसाकि विश्व रक्तदान दिवस, स्वैच्छिक रक्तदान दिवस आदि कुछ  खास दिनों में प्रतियोगिताए भी आयोजित करवाई जाती  है.

 रक्तदान से जुडे होने के कारण अक्सर मेरे पास भी रक्त की जरुरत के लिए फोन आते रहते हैं.यथा सम्भव मदद करने की कोशिश तो करती हूं पर जहां तक हमारी पहुंच ही नही है वहां मदद करना या किसी को कहना बहुत मुश्किल हो जाता है. दिल्ली में डाक्टर संगीता पाठक Sangeeta Pathak, सोनू सिह  Sonu Singh Bais , राजेंद्र माहेश्वरी (भीलवाडा, राजस्थान) मंजुल पालीवाल, रोहतक हरियाणा से , मुम्बई से दीपक शुक्ला जी,  ब्लड कनेक्ट की पूरी टीम नई दिल्ली से और चंडीगढ में डाक्टर रवनीत कौर को जब भी मैंने वक्त बेवक्त फोन किया  और रक्त  की जरुरत के बारे मे बताया तो उन्होनें तुरंत एक्शन लिया और एक ही बात कही कि चिंता नही करो आप उन्हे मेरा नम्बर दे दो. कोई फिक्र नही. परेशानी मे पडे एक अंजान के लिए ऐसी बात कहना बहुत बडी बात है. मैं उनका अक्सर खुले लफ्जों में और कई बार दिल ही दिल मॆ बहुत धन्यवाद करती हूं और फिर विचार आता है कि क्यों ना ऐसे शानदार और समर्पित व्यक्तित्व पूरे देश भर में हो. हमारे पास देश भर में कही से भी फोन आए. हम किसी को रक्त की कमी से न मरने दे.

अगर डाक्टर या ब्लड बैंक से जुडे लोग हों तो बहुत बेहतर है या फिर कोई ऐसे जो स्वैच्छिक रक्तदान से जुडे हों और समाज के लिए निस्वार्थ भाव से कुछ करना चाहते हों. उनका स्वागत है. यह बात पक्की है कि आपके सहयोग के बिना यह कार्य सम्भव नही है और यह बात भी पक्की है कि इस लक्ष्य को हम जीत सकते हैं. अगर आप ऐसे किसी भी व्यक्ति को जानते हैं या आप खुद ही हैं तो नेक काम मे आगें आए. अपना नाम और पता monica.isbti [at]gmail.com पर भेज दीजिए….. !!!!

आईएसबीटीआई ( मोनिका गुप्ता)

ISBTI monica gupta 1

October 2, 2015 By Monica Gupta

हम और हमारा भोजन

हम और हमारा भोजन

 

तीन छुट्टियां क्या आई घर परिवार में रौनक सी आ गई. मेरी एक सहेली भी बहुत व्यस्त है कल से पकवान बनाने में. एक तो श्राद और दूसरा उसका बेटा आ रहा था दो दिन के लिए. आलू, गोभी, पूरी हलवा, पाव भाजी, छोले भठूरे, खीर, दही भल्ले क्या क्या नही बनाया उसने !!! पर उसकी खुशियों पर तब  पानी फिर गया जब बेटे के कहा कि वो ये कुछ भी नही खाएगा.

असल में, दो साल से बाहर रह रहा है और लाईफ स्टाईल बिल्कुल बदल गया है. अब तली भुनी चीजो की बजाय हैल्दी फूड और जिम पर पूरा ध्यान केंद्रित है उसका.

वैसे देखा जाए तो समय वाकई बदल गया है. एक समय था जब खीर पूरी हलवा रसोईघर की शान होती थी पर आज मेरी जानकारी में जितने घर हैं ज्यादातर घरों में आयुर्वेदिक सामान जैसे आवलां जूस, एलोवीरा जूस, त्रिफला पाउडर, इसबगोल, ओटस, ब्रेन, वाईट ओट, मूसली, ब्राउन राइस, ब्राउन ब्रेड, होल ग्रेन और ढेरों फल  ही देखने को मिलती हैं और ये अच्छा भी है आखिर बुराई क्या है इसमें … !!!

our food  photo

Photo by Tatters ❀

सेहत की सेहत और नो साईड इफेक्ट !! मैं लिख ही रही थी कि अचानक मणि आई और मेरे पीछे खडी हो गई वो मेरे लिए मूंग की दाल का हलवा लाई थी.. अरे!! अब लग रहा है वाकई अपवाद भी हैं इस क्षेत्र में … कुछ लोग ऐसे हैं जो कंट्रोल ही नही कर पाते और मैं खाने मे जुट गई.

हम और हमारा भोजन

 

October 1, 2015 By Monica Gupta

Twitter

Twitter

cartoon twitter by monica  gupta

cartoon twitter by monica
gupta

Twitter

आज शाम घर के सामने  से एक छोटा सा  बच्चा अपनी मम्मी के साथ जा रहा था और अचानक आसममान ने उडती चिडिया देखकर उत्साहित होता हुआ बोला देखो मम्मी…. टवीटर !!! और टवीट टवीट कह कर बोलने लगा.. मैं सब देख रही थी और देखकर सोचने लगी …आजकल बच्चों बडो मे नेट का क्रेज बढता जा रहा है घंटो घंटो हम नेट पर बैठे रहते हैं. असली चिडिया की चहचाहट उनका कलरव  भूल गए हैं… चिडिया को टवीटर के नाम से जानने लगे  हैं… नेट का क्रेज होना चाहिए बहुत अच्छी बात है पर हमे प्रकृति से भी दूर नही जाना चाहिए !!

Twitter

October 1, 2015 By Monica Gupta

स्वच्छ भारत

कार्टून ( मोनिका ग़ुप्ता)

कार्टून ( मोनिका ग़ुप्ता)

स्वच्छ भारत

बनाम गांधी जयंती

पिछ्ले साल यानि सन 2014 में 2 अक्टूबर से स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की गई. आरम्भ में झाडू हाथ मे लेकर फोटो खिचवाने का बहुत क्रेज देखा गया. नेता लोग साफ सुथरी जगह जाकर अभियान का शुभ आरम्भ  करते चाय ठंडा पीकर अपनी बाईट देकर लौट जाते पर इस बात को जब मीडिया मे उछाला गया तो फोटो का काम लगभग बंद हो गया और स्वच्छता भी कही दिखाई नही दी. और देखिए स्वच्छ भारत अभियान में बापू गांधी को ही स्वच्छता का चश्मा लगा दिया…

स्वच्छता तभी आएगी जब आम जन स्वच्छता को लेकर जागरुक होगा. मेरे विचार से हमारे देश वासी जुर्माने से बहुत डरते हैं .. जो गंदगी फैके उस पर जुर्माना कर देना चाहिए पर उससे पहले सडक पर कूडा दान होने चाहिए और जमादार नियमित रुप से घरों में आने चाहिए !!!

: | स्वच्छ भारत अभियान: एक कदम स्वच्छता की ओर

महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। उन्होंने “स्वच्छ भारत” का सपना देखा था जिसके लिए वह चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें। महात्‍मा गांधी के स्‍वच्‍छ भारत के स्‍वप्‍न को पूरा करने के लिए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी – बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडो में खुलती है ने 2 अक्‍टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान – बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडो में खुलती है शुरू किया और इसके सफल कार्यान्वयन हेतु भारत के सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की।

इस अभियान का उद्देश्य अगले पांच वर्ष में स्वच्छ भारत का लक्ष्य प्राप्त करना है ताकि बापू की 150वीं जयंती को इस लक्ष्य की प्राप्ति के रूप में मनाया जा सके। स्वच्छ भारत अभियान – बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडो में खुलती है, सफाई करने की दिशा में प्रतिवर्ष 100 घंटे के श्रमदान के लिए लोगों को प्रेरित करता है। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा मृदला सिन्‍हा, सचिन तेंदुलकर, बाबा रामदेव, शशि थरूर, अनिल अम्‍बानी, कमल हसन, सलमान खान, प्रियंका चोपड़ा और तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा की टीम जैसी नौ नामचीन हस्तियों को आमंत्रित किया गया कि वह भी स्‍वच्‍छ भारत अभियान में अपना सहयोग प्रदान करें, इसकी तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर साझा करें और अन्‍य नौ लोगों को भी अपने साथ जोड़ें, ताकि यह एक श्रृंखला बन जाएं। आम जनता को भी सोशल मीडिया पर हैश टैग #MyCleanIndia लिखकर अपने सहयोग को साझा करने के लिए कहा गया।. india.gov.in

September 30, 2015 By Monica Gupta

मन की उलझन

मन की उलझन

कुछ  देर पहले मार्किट में एक जानकार मिली. वो अपनी बिटिया के साथ शापिंग करने आई हुई थी. उसकी शादी को साल भर ही हुआ होगा. वो बिटिया मेरे पास आई और बोली कि आपसे बात करनी है. मेरे कहने पर कि बताओ इस पर वो बोली कि अकेले मे … शाम को घर आएगी पर मम्मी को बिना बताए. टेंशन तो मुझे भी हुई कि कोई न कोई गम्भीर बात है. जरुर दहेज आदि का ही मामला होगा पर मम्मी के सामने नही बोला यानि कुछ और ही बात है.

ठीक चार बजे वो घर आई. उसने कहा कि आप मम्मी को समझाईए वो बहुत फोन करती हैं मुझे. एक दिन मे कम से कम पाचं सात बार… क्या कर रही हो ? आज क्या खाया? कौन सी साडी पहनी? दहेज खूब दिया है ठाठ से रह.. किसी की मत सुनियो और घर का काम करने की जरुरत नही. रानी की तरह रह… वो बोलती ही जा रही थी कि वो अपने नए परिवार के साथ मिलजुल कर रहना चाह्ती है पर मम्मी की बात सुन कर उनकी बातों में आने का डर लगा रहता है. अब आप ही मम्मी को समझाईए कि दखल न दें उसे अपने हिसाब से घर चलाने दें…

मैं उसकी बात से सहमत हूं. कई बार माओं के ज्यादा प्यार के चक्कर में बसा बसाया घर बिखर भी जाता है पर मुझे खुशी इस बात की है कि बिटिया समझदार है. वो सही गलत जानती है. बिटिया तो चली गई और सोच रही हूं कि उसकी मम्मी को समझाना भी एक अभियान है या तो उसकी मम्मी से सीधी बात करुं या कि सीधी बात न करके किसी दूसरे का उदाहरण देकर उसे समझाऊं या फिर उसकी बिटिया ही मां को समझाए  हो सकता है उसने समझाया होगा पर बात नही बनी होगी… वैसे क्या आप आईडिया दे सकते है ???

मन की उलझन tension photo

 

 

 

September 30, 2015 By Monica Gupta

Rotary Blood Bank

Rotary Blood Bank

 

आईएसबीटीआई की दिल्ली में कांफ्रेस के दौरान बहुत से ऐसे लोगों से मिलना हुआ जो रक्तदान पर बहुत जबरदस्त कार्य कर रहे थे. किसी की संस्था है तो कोई संस्था के साथ मिलकर रक्तदान जैसे सामाजिक कार्य में निस्वार्थ भावना से कार्य कर रहें हैं. लक्ष्य और उद्देश्य सभी का एक है कि देश में शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान हो.

इसी कार्यक्रम में आई रोट्ररी ब्लड बैंक दिल्ली की सीएमओ अंजू वर्मा  और चीफ टैक्निकल आफिसर आशा बजाज जी से मिलना हुआ. बेहद मिलनसार और सबसे अच्छी बात ये कि रक्तदान के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं. आशा जी ने बताया कि  वो और अंजू वर्मा जी जब से रोट्ररी ब्लड बैंक शुरु हुआ वो तभी से यानि 2001 से इसके साथ जुडी हैं.

रोट्ररी ब्लड बैंक का मिशन यही है कि दिल्ली और दिल्ली के आसपास रहने वालों की रक्त की कमी से कभी जान न जाए. इसलिए उनकी संस्था कभी कालिज, कभी स्कूल कभी किसी संस्थान में तो कभी कैम्प के माध्यम से रक्त एकत्र करने के साथ साथ जागरुक भी करते हैं. स्कूल में पेरेंटस टीचर मीटिंग के दौरान कैम्प लगाते हैं क्योकि अगर टीचर या माता पिता रक्तदान करेंगें तो निसंदेह  बडे होने पर बच्चे भी आगे आएंगें.

उन्होने बताया कि ब्लड बैंक में किसी भी तरह से रिप्लेसमैंट नही है और 24 घंटे खुला रहता है. जिसे जब भी जरुरत हो वो फोन करके या मिलकर विस्तार से  जानकारी ले सकता है. दिल्ली मे तुगलकाबाद में उनका रोट्ररी ब्लड बैंक है और  टेलिफोन नम्बर 01129054066- 69 तक नम्बर हैं.

आशा जी ने यह भी बताया कि थैलीसिमिया  का टेस्ट भी यहां होता है. इस बारे में भी वो लगातार जागरुक करते रहतें हैं कि शादी से पहले थैलीसीमिया टेस्ट जरुरी होता है ताकि शादी के बाद किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पडे.

आजकल बहुत ज्यादा व्यस्तता है क्योंकि डेंग़ू की वजह से प्लेटलेटस  और रैड ब्लड सैल की बहुत मांग है. उन्होनें बताया कि ब्लड बैंक का सारा स्टाफ स्वैच्छिक रक्तदाता है और हर तीन महीने बाद रक्तदान करता है.

मेरे पूछने पर कि एक महिला होने के नाते महिलाओं की खून की कमी के बारे में क्या कहना चाहेंगी इस पर वो मुस्कुरा कर बोली कि एनीमिया प्रोजेक़्ट पर भी उनका  ब्लड बैंक जुटा हुआ है और समय समय पर चैकअप कैम्प लगाए जाते हैं और जागरुक किया जाता है.

रही बात आज के समय कि तो उन्होनें बताया कि बहुत बदलाव आया है और आ भी रहा है. बहुत अच्छा लगता है जब स्वैच्छिक रक्तदान के लिए ना सिर्फ पुरुष बल्कि महिलाए भी आगे आती हैं. हालाकि यूरोपिय देशों की तुलना में तो बहुत कम है पर फिर भी ऐसी जागरुकता होना एक शुभ संकेत है.

आशा जी ने बताया कि वो लगभग 30 सालों से इस क्षेत्र से जुडी है. जब भी कोई परेशान, दुखी व्यक्ति रक्त के लिए आता है और उसे वो मिल जाता है तो उसके चेहरे की खुशी देख कर एक ऐसी आत्मसंतुष्टि मिलती है जिसे शब्दों मे व्यक्त नही किया जा सकता.

मीटिंग का अगला सैशन शुरु हो गया था इसलिए मुझे अपनी बात को यही रोकना पडा. जिस सच्चे मन से उनकी संस्था कार्य कर रही है उसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है… शुभकामनाएं !!!

यकीनन देश में अगर हम शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान देखना चाह्ते हैं तो हम सभी को मिल कर सांझा प्रयास करना होगा.

Rotary Blood Bank

Rotary Blood Bank

 

 

Rotary Blood Bank

 

  • « Previous Page
  • 1
  • …
  • 156
  • 157
  • 158
  • 159
  • 160
  • …
  • 235
  • Next Page »

Stay Connected

  • Facebook
  • Instagram
  • Pinterest
  • Twitter
  • YouTube

Categories

छोटे बच्चों की सारी जिद मान लेना सही नही

Blogging Tips in Hindi

Blogging Tips in Hindi Blogging यानि आज के समय में अपनी feeling अपने experience, अपने thoughts को शेयर करने के साथ साथ Source of Income का सबसे सशक्त माध्यम है  जिसे आज लोग अपना करियर बनाने में गर्व का अनुभव करने लगे हैं कि मैं हूं ब्लागर. बहुत लोग ऐसे हैं जो लम्बें समय से […]

GST बोले तो

GST बोले तो

GST बोले तो –  चाहे मीडिया हो या समाचार पत्र जीएसटी की खबरे ही खबरें सुनाई देती हैं पर हर कोई कंफ्यूज है कि आखिर होगा क्या  ?  क्या ये सही कदम है या  देशवासी दुखी ही रहें …  GST बोले तो Goods and Service Tax.  The full form of GST is Goods and Services Tax. […]

डर के आगे ही जीत है - डर दूर करने के तरीका ये भी

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन – Social Networking Sites aur Blog Writing –  Blog kya hai .कहां लिखें और अपना लिखा publish कैसे करे ? आप जानना चाहते हैं कि लिखने का शौक है लिखतें हैं पर पता नही उसे कहां पब्लिश करें … तो जहां तक पब्लिश करने की बात है तो सोशल मीडिया जिंदाबाद […]

  • Home
  • Blog
  • Articles
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Poems
  • Stories
  • Kids n Teens
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms of Use
  • Disclaimer
  • Anti Spam Policy
  • Copyright Act Notice

© Copyright 2024-25 · Monica gupta · All Rights Reserved