Cartoon – Justice
जिस तरह से संसद नही चलने दी जा रही और हर रोज लाखों रुपयों का नुकसान हो रहा है ऐसे मे न्याय इन लोगो को नही न्याय मुझे चाहिए !!! I WANT JUSTICE !!!!
Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber
By Monica Gupta
By Monica Gupta

टेलिविजन पर एक विज्ञापन आता था. वो पहला कदम पहली मुस्कान…. जिसमे मम्मी अपने नन्हे से बच्चे को चलना सीखाती है और एक दिन उसे उसी के नन्हे नन्हे पैरो से डगमगाते हुए चलते देख कर भावुक हो जाती है.
सच मे समय ऐसे ही बदलता रहता है.आज जो बच्चे थे वो अब बडे हो रहे हैं और वो अपने बडो को भी सीखा रहे हैं अब आप सोच रहे होगें कि बच्चे क्या सीखाएगे. हैरान होने की जरुरत नही अब आप खुद ही देखिए अगर कुछ नेट पर,मोबाईल पर मैसेज या फोटो कैसे लेनी है या कुछ भी पूछना है तो बच्चो को सारी जानकारी होती है इसलिए यह सब हम बच्चो से ही तो सीखते हैं.

अब देखिए ना बडे बडे शहरो मे मैट्रो चलने लगी हैं. शापिंग माल, पीवीआर इत्यादि खुल गए हैं. अब वो इतने बडे यानि बहुमंजिला होते हैं कि उसमे लिफ्ट भी होती है और ऐस्कीलेटर भी.ये भी सब नए जमाने की तकनीक है और हमे इनके साथ भी चलना चाहिए पर कई बार डर भी लग जाता है.
मेरी सहेली मणि ने बताया कि उसका बडा बेटा गुडगाव मे सर्विस कर रहा है जब वो उससे मिलने गए तो उन्होने पिक्चर का प्रोग़ाम बना लिया. उस पीवीआर और शापिगं माल पर ऐस्कीलेटर था. पता नही पर मणि को उससे बहुत डर लगता था तो बस उसने ऐलान कर दिया कि वो किसी भी हालत मे इस पर नही जाएगी और वो सभी बिना पिक्चर देखे वापिस जाऐगे.
ऐसे मे मणि का बेटा पहले तो मम्मी को समझाता रहा फिर उसने बहुत प्यार और नर्मी से मम्मी का हाथ पकडा और मासूमियत से बोला कि बस जैसे मै कहू वैसे ही करते रहना. मणि की दिल की धडकने बढे जा रही थी और पैर कापें जा रहे थे. लाख मना करने के बावजूद बेटा नही माना और बडो की तरह समझाते हुए उस ऐस्कीलेटर पर पहला कदम रखने को कहा. जब मणि की एक ना चली तो उसने हिम्मत दिखाई और कुछ ही पलो मे वो ऊपर की ओर जा रहे थे.
ऐसी ही हिम्मत बढाने के लिए उसने दो तीन चक्कर और लगवाए इससे मणि का पूरा डर खुल गया. उसने मुझे बहुत भावुक होते हुए बताया कि उसे वो समय याद आ गया जब बचपन मे वो बेटे को चलना सीखाती थी और जब वो चलते चलते जमीन पर गिर जाता था था तो कभी झूठ मूठ से फर्श की पिटाई करती और कभी कहती ओ देखो ये तो चींटी मर गई आपके नीचे आकर. आज बातो बातो मे बॆटे ने भी बहुत सारे कारण देकर उसका ध्यान बांटा और उसके अंदर छिपे हुए डर को चुटकियो मे भगा दिया. तो बताईए परिवर्तन अच्छे ही हुए ना.
मणि की बातो ने, सच मे, सोचने को मजबूर कर दिया कि समय के साथ हमेशा मिलकर चलने मे ही भलाई है.कोई बडा छोटा नही होता.सभी से मिलकर दोस्त बन कर रहना चाहिए.हम सभी एक दूसरे के काम आते है और यही तो है परिवार.बात यह भी नही है कि बेटी बेटे की बजाय ज्यादा ध्यान रखती है यह हमारी अपनी सोच है जैसा आप परिवार मे माहौल देंगे आपको वैसा ही मिलेगा.
कल आपने बच्चे को उंगली पकड कर चलना सीखाया आज वो आपकी आप उंगली थाम कर चल रहे हैं. किसी ने सच ही कहा है कि रिश्ते हथेली पर मिट्टी की तरह होते हैं यदि ढीले से पकडेगें तो वो रहेगे और अगर कस कर पकडेगे तो आपकी ऊगलियोँ मे से निकल जाएगे. अपना छोटा सा संसार सहेज कर रखे आपको यह परिवर्तन प्यारा लगेगा.
परवरिश भी जरुर पढिएगा
कैसा लगा आपको ये लेख … जरुर बताईएगा 🙄
By Monica Gupta


By Monica Gupta
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( व्यंग्य )
दैनिक भास्कर की मधुरिमा मे प्रकाशित
By Monica Gupta
(व्यंग्य)
By Monica Gupta
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Photo by DiAichner3 
जानवर और हम
घर के सामने से एक महिला बच्चों के साथ जा रही थी. बच्चे आपस मे लड रहे थे और महिला बोल रही थी क्या कुत्ते बिल्ली की तरह लडते रहते हो…मैं सोचने लगी कि हम लोग जानवरों का नाम हम कितनी सहजता से ले लेते हैं.
कुछ दिन पहले एक जानकार बता रही थी कि उसकी बेटी तो एकदम गाय है गाय. वो तो उसकी सास ही नागिन की तरह फुंकारती रह्ती है. वही मेघा अपने छोटे भाई को बंदर की उपाधि दे रखी है. मनुज ने बताया जब वो बाल कटवाने गया तो नाई ने कहा कि क्या रीछ की तरह बाल बढा रखे हैं. अक्सर सुनने में यह भी आता है कि फलां आदमी तो बैल की तरह सारा दिन चरता ही रहता है या क्या खा खा कर हाथी बने जा रहा है.
विजय का कहना है कि उसका मालिक खुद तो सारा दिन भौकते रहता है और उससे गधे की तरह काम करवाता रहता है. आफिस मे कुछ लोग तो गिरगिट की तरह रंग बदलने मे माहिर होते हैं तो वही कुछ लोग किसी के आगे शेर बन जाते हैं तो कोई किसी के सामने भीगी बिल्ली. मिताली भी किसी से पीछे नही है उसका मानना है कि उसकी आखे हिरणी की तरह है. निशा अपनी जेठानी के लिए कहती है कि वो तो लोमडी की तरह चालाक है और जेठ बिच्छु जैसा !!! इतना ही नही. किसी को किसी की नजर चील जैसी लगती है तो यह कहने से भी कोई पीछे नही हटता कि तुम्हारी अक्ल घास चरने गई है क्या?? बात बात पर कछुए और खरगोश का उदाहरण देना आम बात है!! इसके इलावा सुअर, उल्लू, मुर्गा आदि नाम का इस्तेमाल भी अक्सर हमारे द्वारा होता रहता है.
तो देखा आपने जानवरो की आड मे हम लोग क्या क्या नही बोल जाते. इतना ही नही अब बात को ज्यादा क्या बढाना वैसे आप खुद ही समझदार हैं कुछ लोग तो बात बात में जानवरो के बच्चो को भी बीच मे ले आते हैं. हे भगवान !!! … कैसी भेडचाल है ये !!! वैसे आप तो ऐसे नही होंगें है ना !!!
जानवर और हम
By Monica Gupta

ऐसा भी होता है …!!!!

छोटी बातें
शीना और गीता बहुत अच्छी सहेलियां थी. पर अचानक एक दिन ना जाने क्या हुआ क्या नही पर दोनो की आपसी बोल चाल बंद हो गई. यह बात लगभग 2 महीने तक चली और जब उनका आमना सामना हुआ तो हकीकत जान कर दोनो बहुत झेंपी. असल मे ,हुआ यू कि एक शाम शीना बाजार जा रही थी और गीता अपने घर की बालकनी मे खडी थी. मुस्कुराते हुए शीना ने उसे हाथ हिलाया पर उसने ना तो कोई जवाब दिया और ना स्माईल.
शीना को बहुत गुस्सा आया और मन ही मन उसने उससे कुट्टा कर ली कि बहुत अकड आ गई है उसमे. एक दो बार गीता के फोन भी आए पर उसने जवाब नही दिया. वही एक दिन गीता को बाहर जाना था और उसने देखा कि शीना पौधो को पानी दे रही है उसने प्यार से हाथ हिलाया पर शीना यथावत पानी ही देती रही.बस दोनो मे दूरियां बढती गई.
एक दिन दोनो का अनयास ही आखों के डाक्टर के यहा आमना सामना हुआ.बातो बातो मे जब बात खुली तो झेंप इसलिए आई कि बात कुछ भी नही थी.असल में, दोनो की नजर कमजोर हो गई थी. हल्के अंधेरे मे दोनो को ही दिखाई नही दिया और एवई ही बात का बतंगड बन गया.
ऐसे ना जाने कितने उदाहरण है जिसमे बात कुछ भी नही होती और दिलो मे खटास बेवजह ही पैदा हो जाती है.चाहे माता पिता मे हो, बच्चो मे हो या दोस्तो मे हो या अपने दफ्तर मे हो.अगर ऐसे मे कभी भी थोडा भी संदेह हो तो बजाय बोलचाल बंद करने के खुल कर बात कर लेना बेहतर है. दूसरे लोग ऐसे मे ना सिर्फ मजाक उडाते है बल्कि आनंद भी लेते हैं तो किसी को क्यो मौका देना … वैसे आप तो ऐसा कुछ नही कर रहे होंगे अगर कर रहे हैं तो बिना समय गवाए बात कर लीजिए प्लीज … !!!

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