Oh My God
Oh My God
आज मुझे शायद पहली बार किसी को गिरता देख कर दुख नही हुआ …. अरे !!! हैरान होने की जरुरत नही… मैं निष्ठुर या निर्दयी हूं ये आप पूरी पोस्ट पढने के बाद फैसला लें…
कुछ देर पहले मैं मार्किट से पैदल आ रही थी. मेरे सामने एक लडकी जोकि करीबन बीस बाईस साल की होगी, आ रही थी. हाव भाव से लग रहा था कि मोबाईल पर शायद कोई मैसेज टाईप करे जा रही है और अचानक सडक पर कोई पडा पत्थर शायद वो देख नही पाई और बुरी तरह लडखडा कर गिरी.
वैसे तो वो गिरते ही उठ गई और मोबाईल पर लगी मिट्टी को पोछने लगी पर मुझे उससे कोई हमदर्दी नही हुई. बल्कि मैं मन ही मन कह रही थी और देख मोबाईल और खा ठोकर … शायद अक्ल ठिकाने आ जाए और मैसेज एक जगह खडी होकर करना सीख जाए ना कि चलते चलते…!!! पता नही लोग कब सुधरेंगें
Oh My God !!! पता नही हम ठोकर खाकर भी सुधरेंगें या नही
ब्रांड एम्बेस्डर
ब्रांड एम्बेस्डर
पिछ्ले दिनों अमिताभ बच्चन जी सुर्खियों में थे कि उन्होने किसान चैनल के लिए 6.31 करोड रुपए लिए हैं जिसका बाद में खंंडन हुआ और फिर ये सुनने मे आया कि वो रुपए लौटा रहे हैं. मामला अभी गर्म ही था कि हरियाणा में बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की बैंड एम्बेसडर बनी परिणिती चोपडा का पता नही कितने पैसे लिए है?
कुछ समय पहले हमने भी एक छोटी सी संस्था बनाने की सोची थी और सोचा था कि जानी मानी हस्ती से बात करके उन्हे अपने साथ जोडेग़ें तो यकीनन बहुत लोग साथ जुड जाएगें. किसी के माध्यम से एक जानी मानी हस्ती से बात भी पर मामला तब खटाई में पड गया जब वहां से पूछा गया कि आपका बजट कितना है. हम हैरान ?? हमने कहा जी, समाज सेवा का काम है ये और आप तो वैसे भी समाज सेवा के काम करते दिखाई देते रहते हैं और साथ ही साथ आपके पास तो वैसे ही इतना नेम ऎंड फेम है… अगर एक छोटा सा संदेश दे देंगें तो आपको क्या फर्क पडने वाला है ??? तब बिचोलिए ने बताया कि ये सैलीब्रेटी यकीनन समाज सेवा करती हैं पर बिना पैसे के एक कदम भी नही चलती. पहले पैसा बाद में कोई और बात… अब हमारा बजट तो था नही इसलिए हमें उनको वही नमस्कार करना पडा पर मन जरुर खटटा हो गया कि नाम बडा और दर्शन छोटे ….
आज अगर सैलिब्रेटी को लेकर पैसे का मुद्दा उठ रहा है तो यकीनन अच्छी बात है, किसी चीज का ब्रांड एम्बेसडर बनने में खुद की भी तो ब्रांडिंग होती है ऐसे में सरकारी पैसा किसलिए लुटाया जाए …ह हा हा !! हंसी इसलिए आ रही है कि ऐसा होगा नही क्योकि ये बिना पैसे के कोई काम नही करेंगें इस बात में कोई किंतु परंतु या दो राय नही. हां वो अलग बात है कि पैसा किस तरह से लिया जाएगा कि समाज सेवा भी हो जाए और नाम भी खराब नही होगा…
BBC
डीडी किसान चैनल से पैसे लेने की बात से हालांकि अमिताभ बच्चन ने इंकार किया है लेकिन उनके प्रचार का कामकाज देख रही कंपनी – लिंटास, और किसान चैनल का कहना है कि बिग बी को मेहनताना दिया गया.
हालांकि अब कंपनी पैसा लौटाने की प्रक्रिया में है.
एक अंग्रेजी अख़बार में ख़बर छपी थी कि अमिताभ बच्चन ने किसानों के लिए शुरू किए गए सरकारी चैनल से साढ़े छह करोड़ रुपये से ज़्यादा का मेहनताना लिया है.
इसके बाद सोशल मीडिया और दूसरी जगहों पर ये सवाल पूछे जाने लगे कि क्या अमिताभ बच्चन को चैनल से पैसे लेने चाहिए थे, ऐसा करना जायज़ था?
बच्चन ने ट्वीट करके कहा कि उन्होंने डीडी किसान से किसी क़िस्म का मेहनताना नहीं लिया है.
फ़िल्मों में अभिनय के अलावा बच्चन ढेर सारी कंपनियों और उत्पादों के लिए विज्ञापन भी करते हैं. इनमें सरकारी विज्ञापन भी शामिल हैं.
ज़ाहिर है इन विज्ञापनों के लिए उन्हें मोटी रकम मिलती है.
किसान चैनल से पैसे लेने के विवाद पर किसान चैनल के प्रमुख नरेश सिरोही ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “हमने लिंटास कंपनी को अमिताभ बच्चन से विज्ञापन कराने के लिए पैसे दिए थे.”
सिरोही का यह भी कहना था कि अब अचानक कंपनी ने यह कहकर पैसे लौटाने का फ़ैसला किया है कि अमिताभ ने पैसे लेने से मना कर दिया है.
लिंटास कंपनी ने भी इस संबंध में स्पष्टीकरण दिया और अपने बयान में पहले पैसे लेने और फिर लौटाने की बात कही है.
“डीडी किसान ने 31 मार्च, 2015 को औपचारिक रूप से हमें अमिताभ बच्चन के कार्यालय से बातचीत के लिए अधिकृत किया था. 12 मई को अमिताभ बच्चन के कार्यालय से हमें इसकी स्वीकृति मिल गई. उसके बाद हमने डीडी किसान चैनल के साथ काग़ज़ी कार्रवाई शुरू की और फिर डीडी किसान ने पैसे जारी किए.”
“श्री बच्चन ने सैद्धांतिक रूप से ये फ़ैसला लिया है कि राष्ट्र हित में इस विज्ञापन के लिए वह किसी तरह का शुल्क नहीं लेंगे इसलिए अब हमारी कंपनी डीडी किसान को पैसे वापस करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है.” See more…
ब्रांड एम्बेस्डर
मौन की बात
मौन की बात…. ये बात तब सामने आई जब सत्र से पहले मोदी जी ने पत्रकारों के किसी भी प्रश्न का जवाब नही दिया … वही बात आई कि मोदी जी मन की बात में अपने विचार रखेंगें … वही कल की बात को ध्यान में रखते हुए एक बात और जहन में आई कि मोदी जी कल स्क्रीन पर थे पर कुछ नही बोले वही केजरीवाल कल स्क्रीन पर नही थे पर उनकी आवाज स्क्रीन पर थी. कोई दिखता है पर बोलता नही कोई बोलता है पर दिखता नही… हे भगवान !!!
भाग्य, अंधविश्वास और भारतीय
भाग्य, अंधविश्वास और भारतीय
हम लोग मंत्र तंत्र , Superstition और वहम को न सिर्फ मानते हैं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत अहमियत भी देते हैं.
दो दिन पहले काम वाली बाई बोल कर गई कि वो कल काम पर नही आएगी क्योकि लडकी वाले उसके घर रिश्ते के लिए उसका लडका देखने आ रहे हैं फिर अचानक ही कल वो काम पर आ गई. मेरे हैराने से पूछने पर उसने बताया कि शायद चामचुकाई नजर हो गई. उसने अपने पडोस में भी एक दो लोगों को बता दिया था शायद नजर लग गई कि हाय लडकी वाले आ रहे हैं. उसकी बात सुन कर मैं सोचने लगी कि हम इन छोटी छोटी बातों में अभी भी हैं और शायद रहेंगें भी.
आज ही मैने नेट पर भी पढा कि घर पर महाभारत का कोई पोस्टर या ताजमहल या फिर डूबता जहाज की तस्वीर नही होनी चाहिए. फव्वारा भी नही लगाना चाहिए. इतना ही नही इसी बात को सर्च करते करते मैं भूत वाली खबर पर पहुंच गई. खबर दिल्ली की है. दिल्ली के सिविल लाइंस इलाक़े का एक विशाल बंगला 10 साल से इसलिए खाली पड़ा है क्योंकि उसे वहाँ रहने वाले के लिए अशुभ या भूतिया माना जाता था. सुनने में आया कि वहां रहने वाले कई मंत्रियों के करियर बर्बाद हुए और कुछ की समय से पहले मौत भी हो गई. लेकिन अब दिल्ली डायलॉग कमीशन ने इसे अपना दफ़्तर बनाया है. कमीशन के वाइस-चेयरमैन आशीष खेतान इसके मनहूस होने की बात को बकवास बताते हैं. खेतान के अनुसार कमीशन के दफ़्तर के लिए इस बंगले को ख़ुद उन्होंने चुना है. सुनने में अच्छा भी है पर डरावना भी.ऐसी बातो पर विश्वास करें या न करें मैं सोच ही रही थी तभी दरवाजे पर धंटी हुई. कोई काम वाली बाई के घर से आया था उसे बुलाने क्योकि लडकी वालों का अचानक कार्यक्रम बन गया और वो आ गए हैं उसके घर. मैने उसे all the best कहा और वो स्माईल देती अपने घर भागी …
आज वो मिठाई लाई है क्योकि रिश्ता पक्का हो गया… मैं मिठाई खा ही रही थी तभी मणि का फोन आया. बोली, आज सिर दर्द कर रहा है वो कल एक शादी में गई थी . सुंदर बहुत लग रही थी शायद किसी की नजर लग गई होगी इसलिए …
ह हा हा !! हे भगवान !! इन बातों को माने या न माने 🙂
फिलहाल तो आप ये खबर जरुर पढें….
BBC
दिल्ली के सिविल लाइंस इलाक़े का एक विशाल बंगला 10 साल से इसलिए खाली पड़ा था क्योंकि उसे वहाँ रहने वाले के लिए अशुभ माना जाता था. लेकिन दिल्ली डायलॉग कमीशन ने इसे अपना दफ़्तर बनाया है.
तो क्या है इस ‘मनहूस’ बंगले की कहानी और क्या उसमें अब काम कर रहे लोग भी अफ़वाहों से डरे हुए हैं?
शामनाथ मार्ग का बंगला नंबर 33 पहली नज़र में ही आलीशान नज़र आता है. 5500 वर्गमीटर में फैले दो मंज़िला बंगले में तीन बेडरूम, ड्राइंग रूम, डाइनिंग हॉल और कांफ्रेंस रूम हैं.
बंगले में गॉर्ड के लिए अलग कमरा है और नौकरों-चाकरों के लिए अलग से 10 क्वार्टर हैं. बंगले के चारों तरफ़ एक बड़ा सा लॉन है. बग़ीचे में पानी का फव्वारा है.
राजधानी दिल्ली के पॉश इलाक़े के इस बंगले की क़ीमत करोड़ों में होगी. लेकिन ये सरकारी बंगला मनहूस माना जाता है और पिछले 10 साल से इसमें रहने वाला कोई नहीं था.
लोग तब यहाँ रहने से कतराने लगे जब ये माना जाने लगा कि इस बंगले में रहने की वजह से कइयों के करियर बर्बाद हुए और कुछ लोगों की असमय मौत हो भी हुई.
सिविल लाइंस को ब्रितानी शासकों ने अपने आला अफ़सरों के लिए बनाया था. यहाँ के पुराने बाशिंदे बताते हैं कि ये बंगला 1920 के दशक में तैयार हुआ था.
आज़ादी के बाद इसे दिल्ली के मुख्यमंत्री निवास के लिए सबसे बेहतरीन माना गया. दिल्ली विधान सभा यहां से महज़ 100 गज़ दूर है.
सूबे के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने 1952 में इसे अपना निवास बनाया. 1990 के दशक में दिल्ली के एक अन्य मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना भी यहीं रहे.
दोनों मुख्यमंत्रियों को कार्यकाल ख़त्म होने से पहले ही पद छोड़ना पड़ा. और फिर तो बंगले के साथ ‘मनहूस’ शब्द जुड़ गया.
महदूदिया कहते हैं, “खुराना की गद्दी जाने के बाद किसी ने इस बंगले को अपना घर नहीं बनाया. अफ़वाह फैल गई कि ये बंगला मनहूस है. मुख्यमंत्री बनने के बाद साहब सिंह वर्मा और शीला दीक्षित ने इसमें रहने से मना कर दिया.”
साल 2003 में दिल्ली की तत्कालीन सरकार में मंत्री दीपचंद बंधू ने सहयोगियों की सलाह को नज़रअंदाज़ करते हुए इसे अपना निवास बनाया.
महदूदिया कहते हैं, “उन्होंने कहा कि वो अंधविश्वासी नहीं हैं और बंगले में शिफ़्ट हो गए. लेकिन कुछ ही दिनों बाद वो बीमार पड़ गए. उन्हें मेनिनजाइटिस हो गया. जिससे उनकी अस्पताल में मौत हो गई.”
इसके बाद इस अफ़वाह ने और ज़ोर पकड़ लिया कि ये बंगला मनहूस है. इसके बाद अगले 10 सालों तक किसी नेता या अफ़सर ने इस बंगले को अपना घर नहीं बनाया.
साल 2013 में वरिष्ठ नौकरशाह शक्ति सिन्हा ने इसमें रहने का फ़ैसला किया. सिन्हा के अनुसार उनके लिए ये बंगला ख़ुशनुमा रहा लेकिन अन्य लोग ध्यान दिलाते हैं कि सिन्हा भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे.
इस साल 9 जून को इस बंगले को फिर से नया निवासी मिला. दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे दिल्ली सरकार को नीतिगत सलाह देने वाले दिल्ली डॉयलॉग कमीशन का दफ़्तर बना दिया.
कमीशन के वाइस-चेयरमैन आशीष खेतान इसके मनहूस होने की बात को बकवास बताते हैं. खेतान के अनुसार कमीशन के दफ़्तर के लिए इस बंगले को ख़ुद उन्होंने चुना है.
खेतान ने बीबीसी से कहा, “मुझे पता चला कि इतनी बड़ी सार्वजनिक संपत्ति को कोई नेता या अफ़सर इस्तेमाल नहीं कर रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि ये मनहूस है.”
उन्होंने कहा, “एक ऐसे वक़्त में जब हम डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं, स्पेस में सैटेलाइट भेज रहे हैं, मुझे लगा इस मनहूसियत को तोड़ना ज़रूरी है.”
खेतान के साथी देवेंद्र सिंह बताते हैं कि जब वो लोग यहाँ आए तो ‘सारे कमरे टूटी हुई कुर्सियों और फ़र्नीचरों से भरे हुए थे.’
पिछले कुछ हफ़्तों में इस बंगले की साफ़-सफ़ाई हुई है. ताज़ा पेंट के गंध अभी तक इससे नहीं गई है. खिड़कियों पर नए पर्दे लग रहे हैं.
खेतान कहते हैं, “हर किसी को अंधविश्वास से लड़ने की क़सम खानी चाहिए और वैज्ञानिक चेतना को बढ़ावा देना चाहिए. ये बहुत दुख की बात है कि पढ़े-लिखे लोग काले जादू और अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं.” Read more…
6 Things you should never bring in the house- 6
जयपुर। भारतीय वास्तु विज्ञान चाइनीज फेंगसुई से काफी मिलता-जुलता है। यह प्राकृतिक शक्तियों को मनुष्य के लिए उपयोगी बनाने का एक कलात्मक परंपरा है। हम अक्सर सुनते आए हैं कि घर में क्या रखना अच्छा होता है और क्या रखना बुरा। आइए आज आपको बताते हैं कि घर में कौनसी 6 चीजें कभी नहीं रखनी चाहिए।
1 महाभारत की तस्वीरें या प्रतीक : महाभारत को भारत के इतिहास का सबसे भीषण युद्ध माना जाता है। कहते हैं कि इस युद्ध के प्रतीकों, मसलन तस्वीर या रथ इत्यादि को घर में रखने से घर में क्लेश बढ़ता है। यही नहीं, महाभारत ग्रंथ भी घर से दूर ही रखने की सलाह दी जाती है।
2 नटराज की मूर्ति : नटराज नृत्य कला के देवता हैं। लगभग हर क्लासिकल डांसर के घर में आपको नटराज की मूर्ति रखी मिल जाती है। लेकिन नटराज की इस मूर्ति में भगवान शिव श्तांडव नृत्य की मुद्रा में हैं जो कि विनाश का परिचायक है। इसलिए इसे घर में रखना भी अशुभ फलकारक होता है।
3. ताजमहल : ताजमहल प्रेम का प्रतीक तो है, लेकि न साथ ही वह मुमताज की कब्रगाह भी है। इसलिए ताजमहल की तस्वीर या उसका प्रतीक घर में रखना नकारात्मकता फैलाता है। माना जाता है कि ऎसी चीजें घर पर रखी होने से हमारे जीवन पर बहुत गलत असर पड़ सकता है। यह सीधे-सीधे मौत से जुड़ा है इसलिए इसे घर पर न रखें।
5 फव्वारा : फव्वारे या फाउन्टन आपके घर की खूबसूरती तो बढ़ाते हैं लेकिन इसके बहते पानी के साथ आपका पैसा और समृद्धि भी बह जाती है। घर में फाउन्टन रखना शुभ नहीं होता। Read more…
इसी बात पर अगर आप भी अपना कोई अनुभव शेयर करेंगें तो अच्छा लगेगा !!!
भाग्य, अंधविश्वास और भारतीय
Digital India
प्रेरक बातें
प्रेरक बातें
पॉजिटिव बातें हो प्रेरक बाते हमेशा अच्छी होती है चाहे हम उस पर ध्यान दें या न दें अक्सर जाने अनजाने भी हमें बहुत बातें ऐसी सीखने को मिल जाती हैं जिनसे जिंदगी में एक बदलाव लाया जा सकता है. ऐसे कुछ छोटे छोटे उदाहरण मेरे नजरिए से…
कई बार बात करते करते या फिर टीवी के माध्यम से हमें बहुत सीख मिल जाती है कुछ समय पहले टीवी पर अनुपम खेर का कार्यक्रम आ रहा था. वो बातों बातों में किसी को बता रहे थे कि एयर पोर्ट पर उन्हें कोई मिला और बहुत गर्म जोशी से मिला. अनुपम खेर उन्हें पहचान नही पाए कि ये है कौन पर अनुपम खेर ने उनसे पूछा नही बल्कि उससे दुगुने अपनेपन से गले मिले और हाल चाल पूछा बात करते करते उन्हें याद आ गया कि वो कौन था.. ऐसा अक्सर हमारे साथ भी हो जाता है कोई मिलता है बहुत गर्मजोशी से पर याद ही नही आता इसलिए उस समय ये पूछ्ने कि भई आप कौन है ?? मैं आपको कैसे जानता हूं …. हमें भी गर्म जोशी से मिलना चाहिए … देर सवेर याद आ ही जाएगा …!!
ऐसे ही एक बार बहुत साल पहले टीवी पर हेमा मालिनी का साक्षात्कार आ रहा था. उन्होने बताया कि हमें अपने बच्चे में अगर हमे कोई कमी लगती है तो बजाय दूसरों को बताने के बच्चों को ही बतानी चाहिए. एक बार वो अपनी किसी सहेली से अपनी बच्ची के बारे में बात कर रही थी . ये बात उनकी बेटी ने सुन ली और उनके जाने के बाद टोका कि अगर यही बात आप हमे बताते तो हम उसे सुधारते.इस बात ने भी बहुत असर डाला मन पर. वाकई में हमें कोशिश यही करनी चाहिए कि घर की बात आपस में ही सुलझा लेनी चाहिए.
एक बार जब मैं ज़ी न्यूज की ओर से उनसे साक्षात्कार ले रही थी और महिलाओं और फिल्म इंडस्ट्री के बारे में पूछा कि कितना सही है लडकियों या महिलाओं का इस तरफ रुझान तो उन्होने महिलाओ के बारे में बहुत बाते सांझा की. उन्होने बताया कि महिला कही भी काम करें चाहे आफिस में या फिल्मों में…. जरुरी बात ये है कि अपनी गरिमा बना कर रखनी चाहिए.
एक और उदाहरण है सचिन तेंदुलकर का..
शाबाश, वाह, बहुत खूब, क्या बात है, लगे रहो, शुभकामनाएं …. !!! बहुत अच्छा लगता है सुनना !!! पर अगर कोई काम अच्छा करे और यह शब्द उसे सुनने को न मिले तो यकीनन मन उदास हो जाता है और काम करने का उत्साह लगभग खत्म हो जाता है. मेरी सोच भी कुछ ऐसी ही है पर 17 नवम्बर को जब सचिन का स्टेडियम से भाषण सुना तब से मन बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हो रहा है. सचिन ने भाषण के दौरान अपने कोच श्री रमाकांत आचरेकर के बारे मे बताया कि उन्होनें बहुत मेहनत करवाई. स्कूटर पर एक मैदान से दूसरे मैदान ले जाते पर पिछले 29 साल में उन्होंने एक बार भी कभी “वेल प्लेड” नहीं कहा। शायद उन्हें डर था कि मैं ज्यादा ही खुश न हो जाऊं और मेहनत करना न छोड़ दूं।’…
वाकई में, सचिन की यह बात बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर रही है. बेशक ,आगे बढने के लिए अपनो का साथ तो चाहिए ही होता पर इसके साथ साथ प्रोत्साहन भी बहुत जरुरी होता है पर सचिन ने इस बात को दिल से नही लगाया और मेहनत मे जुटे रहे. मेरी भी विचार धारा बदल रही है और अगर आप लोगों को भी किसी खास की शाबाशी नही मिल रही है. जिससे आपको बहुत उम्मीद है तो भी कोई बात नही. यकीन मानिए वो बेशक लफ्जों ना बोलें पर दिल से आपका बहुत भला चाह्ते हैं
तो है ना … अच्छी है ये बाते … अगर आप भी कोई ऐसी बात हमसे शेयर करना चाहें तो आपका स्वागत है …
मॉनसून सत्र
मॉनसून सत्र
सूत्रों के मुताबिक मानसून सत्र का पूर्वानुमान : विपक्षी गर्जना के साथ बौछार करेगा , बिजली चमकेगी, बादल गरजेंगें हो सकता है एक आध जगह बादल फट भी जाए या फिर लैंड स्लाईड हो जाए … तैयार रहिएगाBJP to ‘aggressively’ counter opposition attack in House as Congress sticks to its guns – Navbharat Times
शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र मोदी और सुषमा स्वराज (फाइल फोटो)फोटो शेयर करेंनई दिल्ली कांग्रेस ने रविवार को संसद चलाने का सारा दारोमदार सरकार पर डालते हुए सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान को हटाने की ‘न्यूनतम कार्रवाई’ की मांग की जबकि BJP ने इन आरोपों का जोरदार ढंग से मुकाबला करने का निर्णय किया है जिससे मंगलवार से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र के हंगामेदार रहने के प्रबल आसार नजर आ रहे हैं।
नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मॉनसून सत्र के दौरान संसद का चलना और महत्वपूर्ण विधेयकों का पारित होना ‘अधिक आसान’ हो जाएगा यदि BJP इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करे और इससे BJP को अपनी छवि ‘ठीक करने’ में भी मदद मिलेगी जो घोटालों से प्रभावित हुई है। मिलती-जुलती खबरेंकेंद्र की हाउज़िंग फॉर ऑल योजना पर संशय, रोज बनाने होंगे 44 हजार मकानUPA-2 के मंत्रियों के थे NDA से दोगुने दौरेशाह ने सुषमा, वसुंधरा, चौहान से मांगा ‘सबूत’!PM ने पहली बार NDA की बैठक बुलाईभारत और हिंदू विरोध के लिए हो रहा है IITs का इस्तेमाल: RSS पढ़ें- मिल गई कांग्रेस और बीजेपी हाथ मलते रहे गए शरद पवार यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस पार्टी कौन सी न्यूनतम कार्रवाई से संतुष्ट होगी, आजाद ने कहा, ‘न्यूनतम कार्रवाई उन सभी को हटाना है, विशेष तौर पर तीन जो ललितगेट में हैं, जिसमें राजस्थान की मुख्यमंत्री और अन्य सांसद और केंद्रीय मंत्री हैं, इसके अलावा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के दो मंत्री शामिल हैं।’ पढ़ें- विपक्ष से ‘मुकाबले’ के लिए शाह ने सुषमा, वसुंधरा, चौहान से मांगा ‘सबूत’!
उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि एक दिन बाद जब संसद का सत्र शुरू होगा प्रधानमंत्री उन सभी के इस्तीफे की घोषणा करेंगे जो ललितगेट में शामिल हैं या जिन पर आरोप लगे हैं और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री जिनके मुख्यमंत्री रहते बड़ी संख्या में गवाहों की मौत हुई है और हजारों को डिग्रियां मिली हैं।’ पढ़ें- रिमोट से कांग्रेस चलाती थी राज, बीजेपी नहीं : राजस्थान बीजेपी मंगलवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र के मद्देनजर BJP अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी, रवि शंकर प्रसाद और पीयूष गोयल सहित पार्टी के विभिन्न सहकर्मियों और पार्टी प्रवक्ताओं के साथ रणनीतिक बैठकें की जिस दौरान राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी मौजूद थीं। पढ़ें- रेकॉर्ड चौथी बार भूमि अध्यादेश को जारी कर सकती है मोदी सरकार इसके साथ ही, शाह ने रणनीति को और बेहतर बनाने के लिए जेटली और राजनाथ सिंह और वेंकैया नायडू जैसे अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। बातचीत में भाग लेने के लिए चौहान भी बाद में दिल्ली पहुंच गए। किसी का इस्तीफा नहीं लेने की बात स्पष्ट करते हुए बैठक में यह भी चर्चा हुई कि मंगलवार से शुरू हो रहे सत्र के दौरान संसद में इन मुद्दों पर विपक्ष के हमले का मुकाबला और सरकार और पार्टी के जवाब को कैसे सुसंगत किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि BJP उन विवादास्पद मुद्दों पर बैकफुट पर नहीं दिखना चाहती थी जिनको लेकर पार्टी को पिछले कुछ दिनों से निशाना बनाया जा रहा है। Read more…
हमशक्लस
चल मेरी टमटम
चल मेरी टमटम
चल मेरी टमटम
बिहार में विधांसभा चुनाव नजदीक है और चुनावी सरगर्मिया तेजी पकड रही है.. लालू जी हमेशा अपनी चुटीली बातों के लिए जाने जाते हैं ऐसा ही एक शगूफा उन्होनॆं छोडा है टमटम का …
: Jansatta
राजद ‘टमटम’ के जरिए भाजपा के ‘परिवर्तन रथ’ का मुकाबला करेगा, जिसे विधानसभा चुनाव से पहले राजग की नीतियों के बारे में जनता को अवगत करने के लिए बिहार में निकाला जा रहा है।
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने कहा कि उनकी पार्टी 1000 ‘टमटमों ’ के साथ 160 परिवर्तन रथों का मुकाबला करेगी। उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकर से लैस कम बजट के टमटम गरीबों के लिए पार्टी का संदेश लेकर बिहार के अंदरूनी इलाकों में जाएंगे और भाजपा को बेनकाब करेंगे।
प्रसाद ने गांधी मैदान में एक कार्यक्रम में यह कहा। यह स्थान गुरुवार को भाजपा का कार्यक्रम स्थल था जहां भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 160 हाई टेक परिवर्तन रथों को हरी झंडी दिखाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री ने तुरहा जाति के सदस्यों द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अमित शाह बिहार में ढोंग कर रहे हैं। उन्हें 2002 में गुजरात में किए पापों को धोना चाहिए।’’
उन्होंने भाजपा के 160 हाईटेक रथों के लिए धन के स्रोत पर सवाल उठाया, जिन्हें शाह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दूत बताया है। कल के कार्यक्रम में शाह और राजग के अन्य नेताओं के मुख्य निशाने पर राजद प्रमुख थे।
प्रसाद ने एक बार फिर सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना जारी करने की जोरदार मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जाति रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती है तो वह 26 जुलाई को एक दिन का अनशन करेंगे और उसके अगले दिन राजद बिहार बंद करेगा।
प्रसाद ने मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया और कहा, ‘‘जब गरीब रोटी मांगते हैं, तब सरकार उनसे योग करने को कहती है।’’ Read more…
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