Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 7, 2015 By Monica Gupta

हिंसक होते बच्चे

हिंसक होते बच्चे

कई बार लगता है कि बच्चो की गुस्सैल और हिंसक होती प्रवृति के जिम्मेदार और कोई नही हम खुद ही है. कारण भी एकदम ठोस है. असल में, बदलते समय के साथ साथ हमारी करनी और कथनी मे फर्क आता गया जो हम महसूस ही नही कर पाए और बच्चे इस बदलाव को सह नही पाए.

 

kids fighting photo

Photo by Tony Fischer Photography

यकीनन हम बच्चो को किताबी पाठ पढाते रहे कि सदा सच बोलो . ईमानदारी का जीवन अपनाओ. बडो का आदर करो. नकल करने से जीवन मे कभी सफल नही होगे.पर हकीकत मे हम उनके आगे कुछ और ही परोसते रहे.

मसलन, अकसर झूठ बोलने पर हम ही उन्हे उकसाते हैं.पाठ ईमानदारी का पढाते हैं और आफिस से रिश्वत या तो ले कर आते हैं या उनके सुखद भविष्य के लिए दे कर आते हैं और तो और परीक्षा हाल मे बच्चो को नकल मारने के लिए सदा उत्साहित करते हैं ताकि कही अच्छी जगह दाखिला होने मे कोई दिक्कत ना आए.

जुगाड संस्कृति से हमेशा बच्चो को जोडे रखना चाहते हैं ताकि कोई दूसरा बच्चा उसको काट करके आगे ना निकल जाए. बडो का आदर करने का पाठ तो पढा देते हैं पर हम घर पर अपने ही बडे बुजुर्गो से ऊची आवाज मे बात करते हैं.

ऐसे मे अगर हम अपनी गलती मान लें तो कोई छोटे नही बन जाएगे.बच्चो का सही मार्गदर्शन हमारा पहला और आखिरी कर्तव्य होना चाहिए….

कैसा लगा आपको ये लेख हिंसक होते बच्चे …. जरुर बताईएगा 🙂

July 7, 2015 By Monica Gupta

बीमार का हाल

बीमार का हाल

sick lady in hospital  photo

Photo by Internet Archive Book Images

मेरी एक जानकार बहुत बीमार थी. काफी समय अस्तपाल मे भी रही. छुट्टी मिली और घर आ गई. मैने फोन करके मिलने को कहा तो उसने बेहद शालीनता से मना कर दिया.

उसने कहा कि कुछ ही दिनों की बात है वो ठीक हो जाएगी तब वो खुद ही फोन कर देगी. तब जरुर आना. बातो बातों मे उसने बताया कि मिलने वाले बीमार की नही अपनी सहूलियत के हिसाब से आते और धंटों बैठ कर गप्पे भी मारते और चाय वाय पी कर आराम से जाते हैं.

एक रिश्तेदार तो इसलिए नाराज हो कर चले गए कि उसने खाने को नही पूछा.. बीमारी करके वैसे ही किसी का हंसना बोलना अच्छा नही लगता …  ये तो लोगो को सोचना चाहिए … अगर उसने मुझे बुला लिया   और दूसरों को मना कर दिया तो भी सब बुरा मान जाएगे …. इसलिए मना कर रही हूं …

सभी को मना किया है. प्लीज बुरा मत मानना…!!!

मैने बिल्कुल बुरा नही माना बल्कि बहुत सही है…  अस्पताल में तो टाईम फिक्स होते हैं पर घर पर फिक्स नही कर सकते..  वाकई में लोग अपनी सहुलियत देख कर ही आते हैं और एक बार आकर आराम से  बैठ जाते हैं …

अब मैं उसके जल्दी से ठीक होने की प्रार्थना कर रही हूं ताकि उससे मिल सकूं…

वैसे आप भी अगर किसी बीमार से मिलने जाते होंगें तो कम समय ही लगाते होंगे .. है ना … अगर नही तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है क्योकि बीमार का हाल अच्छा नही है … !!!

July 7, 2015 By Monica Gupta

Increase vs decrease

  graph photo

Increase vs decrease

जनसंख्या लगातार बढ रही है. महंगाई का तो कोई हिसाब ही नही बेरोजगारी ,भ्रष्टाचार,प्रदूषण, पेट्रोल, राशन आदि की तो बात ही मत करो . हाल बेहाल है. क्या इनसे कभी छुटकारा मिलेगा.  क्या हमारे सामने कभी कमी भी आएगी या कमी का नाम भी इतिहास हो जाएगा    क्या इनसे कभी छुटकारा मिलेगा…..

अगर आप ऐसा ही कुछ सोच रहे हैं तो परेशान होने की कोई जरुरत नही है क्योकि आज के समय मे बहुत सी चीजो मे कमी या गिरावट आई है और तो और कुछ चीजे तो इतनी सस्ती हो गई है कि उनका कोई मोल ही नही रहा और आप हैं कि राग अलापे जा रहे हैं.

 

 

सुनिए हमारी जान(जिंदगी) सस्ती हो गई है इसकी कोई कीमत नही रही.

जीवन के मूल्य गिर गए है.

आँखो का पानी खत्म होता जा रहा है.

विश्वास की नीव कमजोर हो गई है.

सहनशक्ति कम हो गई है.

जंगल खत्म हो गए हैं हरियाली मे भारी कमी आई है.पक्षियो की चहचाहट कम हो गई है.

चीनी मे मिठास कम हो गई है.

बिजली की सप्लाई कम हो गई है.

स्कूलो मे टीचर और अस्पतालो मे डाक्टरो की कमी हो गई है.

खाने मे पोषक तत्वो की कमी हो गई है.

लडकियो मे खून की कमी हो गई है.जागरुकता, इज्जत, आदर मान ना के बराबर रह गए है और भी बहुत उदाहरण है इसलिए यह मत कहिए कि आज के समय मे कमी की कमी हो गई …..

 

कैसा लगा आपको ये Increase vs decrease लेख जरुर बताईगा 🙂  )

July 7, 2015 By Monica Gupta

बढता काम्पीटिशन

बढता काम्पीटिशन

thinking future photo

Photo by lindaaslund

आजकल काम्पीटीशन इतना बढ गया है कि बहुत विचार विमर्श चलता रहता  है कि बच्चे को कौन सा क्षेत्र दिलवाया जाए. द्फ्तर मे बास का बेटा इंजीनियर है एक बार तो मन आता है कि ये पढाई सही है.

शर्मा जी का विचार है कि डाक्टरी भी बुरी नही है घर मे एक डाक्टर हो तो अच्छा रहता है. पर जब लाल बत्ती वाली ग़ाडी देखते हैं तो मन करता है कि बच्चा सरकारी अफसर ही बने. बडा सा घर हो. नौकर चाकर आगे पीछे घूमे.

वही एक एक चैनल के  reporter को देख कर कभी कभी मन करता है कि TV पर आए news पढे और मशहूर हो जाए…

वही पडोस के मियाँ जी कहते हैं कि बच्चे को सीधा विदेश भेज दो. वहाँ पढाई भी करेगा और कमाई भी. उधर दादी ने रट लगा रखी है कि बचपने मे उनका मन था कि वो singer बने पर अपना शौक तो पूरा नही कर पाई अब अपनी पोती को गायिका बनाना चाह रही है कि वो रिएल्टी शो मे गाए और वो उसके साथ टीवी पर जाए.

उन्होने तो साडी और ज्वैलरी भी डिसाईड कर ली जो वो उस शो मे पहन कर जाएगी. समझ नही आ रहा कि किस की बात माने .

जी क्या कहा आपने?? … बच्चे से पूछ लें कि वो क्या चाहता है. कमाल करते है आप. जिंदगी का इतना बडा फैसला बच्चे पर कैसे छोड दें. उसे भले बुरे की समझ ही कहा है…. रहने दे आप. हम खुद ही सोच लेगे.

July 7, 2015 By Monica Gupta

मैं खिलाडी

मैं खिलाडी

sketch of a man photo

Photo by The British Library

मैं खिलाडी

मैं खिलाडी तू अनाडी …

क्या परिचय दिया आपने अपने बारे मे ? क्या? आप खिलाडी हैं. ओह अच्छा अच्छा … कौन सा खेल खेलते हैं आप… अरे आप तो मेरी बात सुनकर हंसने लगे … बताईए न कौन सा खेल खेलते हैं आप ?? जी क्या कहां ???

आप राजनीति के मैदान के खिलाडी हैं. जनता को कितना भड्काना है आरक्षण का मुद्दा कितना,कब, कहाँ, कैसे उठाना है. कहाँ बसो, ट्रेनो को आग लगानी है. इसके खिलाडी तो नही है   आप ? ओह अच्छा अच्छा इसके साथ साथ   मैच फिक्सिंग के मैदान के खिलाडी हैं कि कब कहाँ कितना और किसको देना लेना है. किसको स्टिंग आपरेशन मे फसंवाना है या किसे बाहर निकालना है. इसके भी परफेक्ट खिलाडी हैं और इसी के साथ साथ  आप यकीनन देश की भोली भाली जनता को विदेश भेजने के नाम पर लाखो रुपये गटकने वाले खिलाडी  भी होग़ें. है ना. जोकि लालच दिखा कर धोखे से रुपए ऐंठ कर फरार हो जाते हैं.क्यो जनाब!!! कितने रुपये गटके आपने? कुछ बताईए ना …

असल में, हमारे देश मे खिलाडियो की कमी नही है यहाँ किस्म किस्म के खिलाडी है… वैसे आप खिलाडी तो नही होंगें .. क्या कहां … आप खिलाडी हैं … कौन से खेल के … 🙂

 

मैं खिलाडी तू अनाडी

July 7, 2015 By Monica Gupta

नुक्ताचीनी – नुक्ताचीनी करना सही नही

नुक्ताचीनी

नुक्ताचीनी करने की कई लोगो मे बहुत आदत होती है. हर बात में कमी ही निकालते हैं और हर बात पर टोकतें हैं बिना जाने की दूसरे को महसूस हो सकता है उसे भी बुरा लग सकता है उसकी भी भावनाए आहत हो सकती हैं…

नुक्ताचीनी – नुक्ताचीनी करना सही नही

पिछ्ले दिनों मेरी सहेली छुट्टियों मे गई हुई थी. पूछ्ने पर कि कैसी रही छुट्टियां… वो उदास थी. उसने बताया कि जहां भी जिस घर में गए पति उस महिला की तारीफ करने लगते… तारीफ की भी कोई बात नही  पर उसे उसे कम दिखाने की कोशिश करते

जैसाकि एक जानकार के घर लंच पर गए तो पति बोले भाभी जी आप चपाती बहुत अच्छी बनाती है जरा इसे भी सीखा दो कैसी बनती है इतनी नर्म और मुलायम.. फिर बोले जरुर सीख लेना … उसने बताया कि उस समय तो वो मुस्कुरा दी पर गुस्सा बहुत आया… बात को कहने का ढंग होना चाहिए कि सुनने वाले को बुरा न लगे और अपनी बात भी कही जाए …

मैं हंस पडी… अरे … ये तो छोटी छोटी बाते होती हैं इनमे अपना मूड खराब करने की क्या जरुरत… तुम बोल देती ठीक है सीख लूंगी तो बात इतनी बढती ही नही… तब मुझे भी एक बात याद आई जो मेरे मित्र ने सुनाई थी….

 

नुक्ताचीनी

नुक्ताचीनी

जहाँ पत्नी अपने पति को खुश रखने की कोशिश करती है वही पति भी नुक्ताचीनी करने का कारण खोज ही लेता है.  मानसी ने नाश्ते मे पति को खुश करने के लिए स्वादिष्ट आमलेट बनाया तो महाशय बोले. ओ,  आमलेट बनाया है ??आज तो अंडे की भुज्जी खाने का मन था. बेचारी ने कुछ नही कहा पर अगले दिन उसने भुज्जी बना दी. पति महाशय आज भी नही चूके और मुहँ बना कर बोले भई, आज तो आमलेट ही खाने का मन था. मानसी फिर चुप रही.मेरी सहेली बेहद चुपचाप मेरी बात सुन रही थी.

अगले दिन उसने आमलेट और भुज्जी दोनो सर्व कर दी तो पता है महाशय क्या बोले अरे, जिस अंडे की भुज्जी बनाई उसका आमलेट बनाना था और जिस अंडे का आमलेट बनाया. उसकी भुज्जी मुझे खानी थी. कोई भी काम ढंग से नही कर सकती. अब मानसी के पास कहने को कुछ नही बचा. अकसर घरो मे झगडे की वजह खाना ही होता है.  दो दिन तक मानसी ने अपने पति से  बोलचाल बंद रखी.

मेरी सहेली की जान मे जान आई कि चलो उसके साथ इतना ज्यादा तो नही हुआ. अक्सर पति पत्नी मे नोकझोंक हो ही जाती है पर दोनो को अपनी उदारता दिखलाते हुए नाराजगी खत्म कर देनी चाहिए. अन्यथा कई बार बात बढ जाती है और तालाक तक की नौबत आ जाती है … अपने अपने अहम के चक्कर में बच्चे बेचारे पिस कर रह जाते हैं.

महिला पढी लिखी है कमाती है इसका मतलब ये नही कि वो घर मे अपनी चलाए … यही बात पति पर भी लागू होती है.. हंसी मजाक मे उडा कर मस्त हो जाना चाहिए .. मेरी बात सुनकर मेरी सहेली ने कहा वैसे वो महिला चपाती वाकई मे बहुत मुलायम बना रही थी… आज फोन करके उससे जरुर सीखूगी … 🙂

सकारात्मक सोच – Monica Gupta

सकारात्मक सोच हो तो कोई डर नही !!! घना अंधेरा था गरीब बच्चों के पास कोई बिजली का उपकरण नही था डर था कि गहन जंगल से बाहर कैसे जाएगें पर हिम्मत नही हारी कुछ जुगुनूओ को पकड लिया राह दिखाने के लिए और निडर बेखौफ चलते चले गए और घर पहुंच गए… सकारात्मक सोच – Monica Gupta

 

 

आपको ये लेख कैसा लगा ?? जरुर बताईगा !!!

July 7, 2015 By Monica Gupta

दाने दाने में कैंसर

cartoon cancer by monica gupta

cartoon cancer by monica gupta

दाने दाने में कैंसर… पान मसाला

तरह तरह के ब्रांड और तरह तरह के स्वाद पर एक बात सभी में समान है और वो है चटखारे ले कर खाने वाले दाने दाने में कैंसर छिपा है.. बेशक विज्ञापन बहुत आकर्षित करते नजर आते हैं, कई बार ऐसा लगता है कि पान मसाला नही खाया तो जिंदगी ही बेकार है … सफलता भी नही मिलेगी.

और उपर से ये टीवी वाले सच पूछो तो मैं इनसे बहुत नाराज हूं … क्यो?? अरे भई .. कैंसर का प्रोग्राम भी दिखाते है और प्रयोजक भी दिखाते है … आधे से ज्यादा विज्ञापन पान मसाले के ही होते हैं अब चाहे अजय देवगण हो, गोविंदा हो , शाहरुख हो ,,, और हम इम्प्रेस हुए जाते हैं.. टीवी हमारी जिंदगी में सीधा असर डालता है इसलिए ऐसे विज्ञापनों को दिखाने पर इन पर केस होना चाहिए… कि ये विज्ञापन हमें भ्रमित कर रहें  है.

सिविल जज सीनियर डिविजन सिद्धार्थ ¨सह ने कहा कि तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। तंबाकू के सेवन से लोगों में तेजी से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां हो रहीं हैं। आज की युवा पीढ़ी में यह लत तेजी से बढ़ता दिख रहा है, जो खतरनाक संकेत है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा.अखिलेश कुमार ने कहा कि तंबाकू सेवन से प्रतिवर्ष 8 लाख लोग मौत के शिकार हो रहे हैं। जो चिंताजनक है। सीएमओ ने कहा कि तंबाकू से कई बीमारियां फैलती हैं। खैनी, पान, पान मसाला, सिगरेट आदि का सेवन बेहद खतरनाक है। बढ़ते हृदय रोग का एक प्रमुख कारण तंबाकू ही है। Read more…

No Smoking

– पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू महंगा होने के बाद बावजूद कम नहीं हुए नशाखोर

ALLAHABAD: आलोक सिंह एक ऑटोमोबाइल कंपनी में फील्ड ऑफिसर हैं. उनकी सैलरी पंद्रह हजार रुपए है. वह स्मोकिंग करते हैं और रोजाना बीस सिगरेट पी जाते हैं. इस तरह से उनकी एक तिहाई सैलरी हर महीने धुएं में उड़ रही है. यह तो महज एग्जाम्पल है. ऐसे लाखों लोग हैं जो रोजाना तंबाकू, सिगरेट, पान मसाला की लत पर बड़ी रकम खर्च कर देते हैं. जिसकी वजह से शहर में तंबाकू उत्पादों की बिक्री का ग्राफ बढ़ता जा रहा है. सरकार द्वारा वैट टैक्स में बढ़ोतरी किए जाने के बाद उत्पाद महंगे हुए लेकिन बिक्री पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा.

तंबाकू से होने वाले नुकसान को लेकर सरकार भले ही लोगों को लाख जागरुक करने की कोशिश करे लेकिन नशाखोरी कम होने के बजाय बढ़ रही है. केवल शहर में रोजाना आठ से दस लाख रुपए के तंबाकू, सिगरेट और पान मसाला की बिक्री हो रही है. इनमें सबसे ज्यादा डिमांड सिगरेट की है. कुल बिक्री का आधा हिस्सा स्मोकर्स अदा करते हैं. होल सेलर्स बताते हैं कि तंबाकू उत्पादों के मार्केट में सीमित ब्रांड हैं लेकिन इनकी डिमांड बहुत ज्यादा है.

पहले से ज्यादा बढ़ गया पान-मसाले का क्रेज

हाईकोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने प्रदेश में गुटखे की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था. कंपनियों ने इस आदेश का पालन करते हुए पान मसाले का प्रोडक्शन शुरू कर दिया लेकिन इसके साथ तंबाकू के पाउच फ्री कर दिए. इससे गुटखा प्रेमियों को ऑप्शन मिल गया. अब वह पान मसाले के साथ पहले से ज्यादा तंबाकू का सेवन कर रहे हैं, जो कि सेहत के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है. कंपनियां तंबाकू के पाउच का पैसा पान-मसाले के जरिए वसूल कर रही हैं.

महंगाई भी कम नहीं कर पाई दीवानगी

सरकार द्वारा चालीस फीसदी वैट टैक्स में बढ़ोतरी किए जाने के बाद पान मसाले और सिगरेट के दाम तेजी से बढ़े हैं लेकिन इससे बिक्री पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है. लोग अपना नशा पूरा करने के लिए बढ़े हुए दाम देने को भी तैयार हैं. पान मसाले में एक तो सिगरेट में तीन रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार का रेवेन्यू भी बढ़ा है. दुकानदार कहते हैं कि महंगाई के चलते कुछ लोगों ने जरूर नशा छोड़ा है लेकिन उससे ज्यादा संख्या उन टीन एजर्स की है जो नशे की लत का शिकार हो रहे हैं.

तंबाकू उत्पाद बेचने वाले कीडगंज के दुकानदार विवेक की मानें तो इस धंधे में ग्राहकों को बुलाना नहीं पड़ता है. वह खुद ब खुद चले आते हैं लेकिन चिंता का सबब है टीन एजर्स का नशे का शिकार होना. वह बताते हैं कि क्फ् से क्7 साल की उम्र के बच्चों में सिगरेट की लत तेजी से बढ़ रही है. अपना स्टेटस सिंबल मेंटेन करने और शोऑफ के चक्कर में वह शौकिया स्मोकिंग करते हैं और धीरे-धीरे एडिक्ट होने लगते हैं. शुरुआत में वह दस से पंद्रह रुपए की महंगी सिगरेट पीते हैं लेकिन नशे का शिकार होने के बाद 7 रुपए वाली सस्ती सिगरेट पीने से भी नहीं हिचकते. inextlive.jagran.com

कुछ समय पहले मेरी सहेली दक्षिण धूमने गई. उसे सुपारी पान मसाले का शौक है. रास्ते मॆं खत्म होने पर सोचा कि वहां मार्किट से ले लेगी. वहां जब पता किया तो पता लगा कि पान मसाला , सुपारी बैन है… वो हसंने लगी क्योकि उसे पता था कि हरियाणा जैसी जगह मे बैन का मतलब क्या होता है पर वहां सही मायने मे पता लगा कि बैन का मतलब बैन बैन ही होता है … काश देश भर की सरकार इसे अमल मे लाए … काश काश …

कुल मिला कर जब तक हम खुद से विचार करके इसे नकार न दे हमें समझ नही आएगी या साफ शब्दों में ये कहॆं कि  अक्ल नही आएगी.. अब ये हमारे उपर है कि विज्ञापन देख कर हमे भ्रमित होना है या …. केसर समझ कर इसे चबाते रहना है …

July 6, 2015 By Monica Gupta

बहस बनाम ऊंगली उठाना

 

cartoon news by monica gupta

बहस बनाम ऊंगली उठाना

न्यूज चैनल कोई भी हो co called ज्ञानी, प्रबुद, नेता व अन्य अक्सर बहस के दौरान ऊंगली उठाए मिल जाते हैं .. अरे ??? क्या क्लास लग रही है क्या ?? कल तो एक चैनल पर चारों आमंत्रित मेहमान ऊंगली उठाए रहे और एंकर अपना ही बोले जा रहा था. और अगर ये सोच रहे  हो कि ऊंगली उठा कर एक समझदार सभ्य बच्चे की तरह छवि बन जाएगी तो क्षमा करें ..

जिस तरह से आप लोग चैनल पर तू तू मैं मैं करते हैं वो जग जाहिर है…फिर फिर ये उंगली का नाटक बंद करके सीधा मुद्दे और आईए और ढंग से बात कीजिए पर ऊंगली उठा कर मजाक का पात्र न बनिए.. अपनी गरिमा दिखाईए … !!!

 

 

July 6, 2015 By Monica Gupta

Best Wishes- Happy New Year

 

best wishes photo

Photo by Sandie Edwards

Best Wishes- Happy New Year

आओ विश करें

नया साल शुरु होता नही कि सकंल्पो की बौछार शुरु हो जाती है. अच्छी बात है सकंल्प लेने कोई बुराई नही है पर कम से कम उसकी लाज तो रखनी चाहिए. हर बात को टालने के अभ्यस्त हम फिर टाल देते है कि कुछ समय और ठहर जाते हैं. कर लेगें, हम कौन सा भागे जा रहे हैं. सोच तो लिया है ना बस …

इन दिनो वैसे एक चिंता और भी हम लोगो मे पाई जाती है और वो है शुभकामनाएं देना. असल में, देने मे कोई परेशानी नही है पर देनी किस किसको हैं ये परेशानी का विषय बन जाता है उसका सबसे मुख्य कारण है हर साल हमारी जिंदगी मे नए लोगो का आवागमन होता रहता है या फिर जो लोग पिछ्ले साल बहुत काम आए इस साल इनकी महत्ता उतनी नही रही.  तो ज्यादा कंफ्यूजन से बचने के लिए मैने बिना समय गवाएं चार कैटेगिरी बना ली.

1 धक्के से
2 मजबूरी से
3 जरुरी से
4 दिल से

आप सभी इस बात से इत्तेफाक रखते होग़े कि कई बार कुछ शुभकामनाएं ना चाह्ते हुए धक्के से फोन करके हमे देनी पडती हैं. मसलन अपनी ससुराल मे या फिर अपने मकान मालिक को जो हमे फूटी आखँ ही नही सुहाता. समय की नजाकत को भापँ कर जीती मक्खी निगलनी ही पडती है.

अब बात मजबूरी की आती है.अब मेरी बात से आप इंकार कर ही नही सकते कि भले ही हमारी सम्पादक से जान पहचान हो ना हो पर उसे शुभकामनाएं भेजेगे जरुर.(भई, नही तो हमारा लेख कैसे छपेगा)ऐसे ही जिन से हमे हमारा काम निकलवाना है,पैमैंट निकलवानी है चाहे वो सरकारी नौकरी मे ही हो.चाहे वो कितने ही भाव ही क्यो ना खा रहा हो हमारा फोन ना उठा रहा हो पर हमे भी ढीठ बन कर लगातार उसे फोन मिलाते ही रहना है. जब तक वो फोन न उठा ले उसके बाद चाहे हमे कितना ही समय लगे उन्हे बताने मे कि हम कौन बोल रहे हैं. इसी का नाम मजबूरी है.
अब बारी आती है जरुरी से की. मेरे हिसाब से ये वाकई मे जरुरी है उन लोगो को शुभकामनाएं देने की जो जाने अंजाने सारे साल किसी ना किसी रुप मे हमारे काम आते हैं जैसे कि डाक्टर, गैस बुक करने वाले, बैंक मे काम करने वाले जो जाते ही हमारा सारा काम ना सिर्फ जल्दी निबटवा देते है बल्कि चाय भी पिलाते हैं. उधर गैस वाले तुरंत सप्लाई भेज देते हैं. वही अपने डाक्टर साहब भले ही फोन पर कितना ही व्यस्त क्यो ना हो वो हमे देखते ही फोन का चोंगा रख देते हैं. बच्चो की ट्यूशन सर या क्लास टीचर को भी बहुत जरुरी है शुभकामनाएं देना क्योकि सारे साल उन्होने ही तो ख्याल रखना है बच्चों को अच्छे अकं देने मे.

अब बात आती है दिल से की. ये आवाज दिल से ही निकलती है.अब भला जो हमारे साथ दफ़्तर मे कंधा मिलाकर काम करे मोना, रोजी पिंक आदि उन्हे तो विश करना बनता ही है न और जो सोशल नेट वर्क की साईट पर हैं उन्हे तो और भी ज्यादा और जल्दी विश करना हमारा हक बनता है.कही वो नाराज ना हो जाए या हमसे पहले कोई दूसरा की ना बाजी मार ले जाएं. वही दूसरी तरफ बास की माता जी का स्थान है भले ही बास को विश करे ना करे पर इनकी माता श्री या पत्नी श्री को दिल से प्रणाम करने को मन करता है. भई, आप भले ही कुछ भी समझे पर नौकरी मे तरक्की की चाह तो आपको भी होगी. है ना. तो मै आपसे अलग थोडे ही ना हूँ.
तो कुल मिला कर बताने का तात्पर्य़ ये है कि हमे संकल्प लेने की बजाय फोन करने वालो की लिस्ट मे ज्यादा जोर देना चाहिए ताकि हमारा आने वाला समय सुखद और मगंलमय हो.
आप हमारे प्रिय पाठकगण हैं तो आपकी जगह दिल से वाले कालम मे ही है आप सभी को  ढेर सारी शुभकामनाएं.

ये लेख Best Wishes आओ विश करें   कैसा लगा जरुर बताईगा …  🙂

July 6, 2015 By Monica Gupta

माँ को भी याद आती है

 

 indian lady thinking photo

Photo by RamyaB

माँ को भी याद आती है

अक्सर

माँ को भी याद आती है

अपनी माँ की हर बात

उसका वो

नर्म हाथो से रोटी का निवाला खिलाना

होस्टल छोडने जाते हुए वो डबडबाई आखों से निहारना

उसका पल्लू पकड़कर आगे पीछे घूमना

उसके प्यार की आचँ से तपता बुखार उतर जाना

कम अंक लाने पर उसका रुठना पर जल्दी ही मान जाना

अक्सर

माँ को भी याद आती है

अपनी माँ की हर बात

पर माँ तो माँ है

इसलिए बस चंद पल खुद ही सिसक लेती है

और फिर भुला देती है खुद को

पाकर अपने बच्चों को प्यार भरी

छावँ मे,दुलार मे ,मनुहार में

पर अक्सर

माँ को भी याद आती है

अपनी माँ की हर बात

असल मॆं, हम हरदम अपनी मां की बात करते हैं उन्हें याद करते हैं पर हमारी मां को भी अपनी मां की याद आती है … है ना … बस यही सोच कर कविता बन गई …

कैसी लगी आपको जरुर बताईगा !!!

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