Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 3, 2015 By Monica Gupta

ग्रीन टी के फायदे और नुकसान

ग्रीन टी के फायदे और नुकसान- Green Tea  क्या है इसे कितना पीए, किस तरह पीए और इससे वजन कैसे कम होगा इन सब बातों की जानकारी हमें जरुर होनी चाहिए. असल में भई भेड चाल है किसी ने बता दिया कि ग्रीन टी से वजन कम होगा तो हम सब जुट जाते हैं इसे पीने…

ग्रीन टी के फायदे और नुकसान

फैशन ग़्रीन टी का है तो भई हम पीछे कैसे रह सकते हैं. हमने भी खरीदी. अन्य चाय की अपेक्षा हालाकि ये चाय  महंगी थी पर सेहत के बारे में कोई समझौता नही खरीदी और सुबह सुबह  खाली पेट पीनी शुरु कर दी. वैसे कुछ भी कहिए इसकी पैंकिग बहुत ही स्टाईलिश सी  होती है वाकई में ऐसा महसूस होता है कि हम कुछ शानदार पी रहे हैं

कुछ सहेलियों से बातचीत हो रही तो पता चला कि खाली पेट नही पीनी चाहिए.  नुकसान होता है एक सहेली ने बताया कि वो दिन में पांच बार पीती है और उसे अपना वजन कम लग रहा है.हालाकि ये बात उस ने बेहद गम्भीरता से की थी पर हम सभी के चेहरे पर स्माईल आ गई. बात तो उस समय हंसी मजाक मे उड गई पर मेरे मन में बैठ गई कि हरी चाय क्या है इसके बारे मे नेट पर ही सर्च करुगी …

हरी चाय यानि   ग्रीन टी एक प्रकार की चाय होती है, जो कैमेलिया साइनेन्सिस नामक पौधे की पत्तियों से बनायी जाती है। इसके बनाने की प्रक्रिया में ऑक्सीकरण न्यूनतम होता है। इसका उद्गम करीब ५००० वर्ष पूर्व चीन में हुआ था और आगे चलकर एशिया में जापान से मध्य-पूर्व की कई संस्कृतियों से संबंधित रही. चीन देश में ग्रीन टी की शुरुआत हुई थी|कहते हैं कि चाय के कोमल पत्ते को यदि पीया जाए तो इससे काफी लाभ होता है| ग्रीन टी भी इन्ही पत्तों से बनाई जाती है|

भारत हो या ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में चाय के कई शौकीन लोग देखने को मिलते हैं और वे इन दिनों सेहतमंद चाय की तरफ कदम बढाते नजर आ रहे हैं| पश्चिम ऑस्ट्रेलिया स्थित स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ अध्यापक कोलिन बिन्स का कहना है कि ग्रीन टी की मांग पहले से काफी अधिक हो गई है| साथ ही यह सेहत की समस्याओं को काफी हद तक घटा देता है| इसकी मदद से स्टोक जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने में मदद मिलती है|

प्रायः लोग ग्रीन टी के बारे में जानते हैं लेकिन इसकी उचित मात्र न ले पाने की वजह से उन्हें उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।

हरी चाय का फ्लेवर ताज़गी से भरपूर और हल्का होता है तथा स्वाद सामान्य चाय से अलग होता है। इसकी कुछ किस्में हल्की मिठास लिए होती है, जिसे पसंद के अनुसार दूध और शक्कर के साथ बनाया जा सकता है।[2] ग्रीन टी बनाने के लिए एक प्याले में २-४ ग्राम चाय पड़ती है। पानी को पूरी तरह उबलने के बाद २-३ मिनट के लिए छोड़ देते हैं। प्याले में रखी चाय पर गर्म पानी डालकर फिर तीन मिनट छोड़ दें। इसे कुछ देर और ठंडा होने पर सेवन करते हैं। विभिन्न ब्रांड के अनुसार एक दिन में दो से तीन कप ग्रीन टी लाभदायक होती है। इसका अर्थ है कि एक दिन में ३००-४०० मिलीग्राम ग्रीन टी पर्याप्त होती है।

ग्रीन टी के फायदे और नुकसान

ग्रीन टी के फायदे और नुकसान

 

Green Tea Can Also Be Harmful |

ज्यादातर लोग ग्रीन टी को सेहत के लिहाज से काफी फायदेमंद मानते हैं। इसलिए वे दिन भर में कई बार ग्रीन टी की चुस्कियां लेते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं ग्रीन टी का ज्यादा सेवन सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। कई बार अच्छी चीजों को ज्यादा सेवन सेहत बिगाड़ सकता है। दिन भर में पांच से छह कप ग्रीन टी का सेवन परेशानियों को कारण बन सकता है।

 

ग्रीन टी आयरन को अवशोषित करता है जिससे शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। इसलिए जो लोग एनिमीया के शिकार हैं उन्हें ग्रीन टी पीते समय सावधानी बरतनी चाहिए। इस प्रभाव से बचने के लिए आप चाहें तो खाने के बीच में ग्रीन टी ले सकते हैं या उसमें नींबू मिलाकर भी पी सकते हैं।

ग्रीन टी में कैफीन व टैनिक एसिड पाया जाता है जो गर्भावस्था में नुकसानदेह हो सकता है । इसलिए गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में महिलाओं को ग्रीन टी पीने से बचना चाहिए क्योंकि इसे होने वाले शिशु को न्यूरल ट्यूब( मस्तिष्क व रीढ की हड्डी में) जन्म दोष होने की संभावना रहती है।

ग्रीन टी में ऑक्सेलिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो गुर्दे में पथरी का कारण हो सकता है। कैल्शियम, यूरिक एसिड व एमिनो एसिड काइस्टीन के साथ फॉस्फेट व ऑक्सेलिक एसिड के साथ संयोजन से गुर्दे की पथरी की समस्या होती है। See more…

Health Benefits of Green Tea In Hindi |

ग्रीन टी के लाभ के बारे में हम सब जानते हैं। एक शोध के मुताबिक रोजाना आठ कप ग्रीन टी हृदय रोग होने की आशंकाओं को कम करती है। इसके साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल के स्‍तर को भी कम करती है। साथ ही ग्रीन टी शरीर पर जमा अतिरिक्‍त वसा को भी दूर करने में मदद करती है।

ग्रीन टी में विटामिन सी, पालीफिनोल्स के अलावा अन्य एंटीआक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो शरीर के फ्री रेडीकल्स को नष्ट कर इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाते हैं। इससे शरीर में बीमारियां होने का खतरा कम होता है और शरीर रोग-मुक्‍त होता है।

ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्‍म का स्‍तर बढ़ता है। जिसके कारण शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा संतुलित रहती है। कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा संतुलित रहने से रक्त चाप सामान्य रहता है। जिससे हार्ट अटैक आशंका बहुत कम रहती है।

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सिग्रेट लत से भी छुटकारा दिलाए   ग्रीन टी

सिगरेट पीने की लत से छुटकारा चाहते हैं तो ग्रीन टी पीजिए। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार ग्रीन टी में मौजूद तत्व निकोटीन की लत छुड़ाने में मदद करते हैं। चीन की पत्रिका साइंस चाइना लाइफ में ए रेवोल्यूशनरी अप्रोज फॉर दे सिसेशन ऑफ स्मोकिंग शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने निकोटीन की तलब को शांत करने के लिए ग्रीन टी के तत्वों को मिलाकर एक सिगरेट का निर्माण किया। मालाबार कैंसर इंस्टीट्यूट के अध्यापक फिंस फिलीप ने कहा कि धूम्रपान की लत छुड़ाने के लिए निकोटीन रिप्लेसमेंट थिरेपी कारगर पाई गई है।

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Green Tea Has Side Effects Too | | – Hindi Boldsky

green tea photo

Photo by A Girl With Tea

ग्रीन टी यानी की हरी चाय के अनेक प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक गुण हैं। जब आप ग्रीन टी पीते हैं तो आपको पता होता है कि यह आपका वजन कम करेगी, त्‍वचा को सुंदर बनाएगी, बालों का झड़ना रोकेगी और शरीर से गंदगी को बाहर निकालेगी। लेकिन ग्रीन टी का ज्‍यादा सेवन स्‍वास्‍थ्‍य के लिये खराब हो सकता है। जानते हैं कैसे? हरी चाय कब्ज, दस्त, उल्टी, चक्कर और यहां तक कि सिर दर्द पैदा कर सकती है। हरी चाय में कैफीन होती है जो कि अनिद्रा पैदा कर सकती है। तो अगर आप हरी चाय पी कर वजन कम करना चाहते हैं, तो नीचे दिये गए इन चरणों का पालन करें और स्वस्‍थ्‍य तरीके से इस ग्रीन टी को अपने जीवन में शामिल करें।

 

केवल 2-3 कप: पहले भी बोला जा चुका है कि अत्‍यधिक चाय नुक्‍सानदायक हो सकती है। इसी तरह से अगर आप रोजाना 2-3 कप से ज्‍यादा ग्रीन टी पिएंगे तो यह नुक्‍सान करेगी। क्‍योंकि इसमें कैफीन होती है इसलिये तीन कप से ज्‍यादा चाय ना पिएं। Read more…

– LiveHindustan.com

ग्रीन टी हमारी सेहत के लिए फायदेमंद तो है, लेकिन कई बार यह नुकसानदेह भी साबित होती है। इसलिए खासकर इसकी मात्रा और बनाने के तरीके पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके बारे में बता रही हैं ए. त्रिपाठी

ग्रीन टी को वजन कम करने में मददगार माना जाता है। इसलिए कई लोग इस गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं कि अधिक ग्रीन टी पीने का अर्थ है जल्द वजन कम होना। लेकिन यह अवधारणा पूरी तरह से सही नहीं है। ग्रीन टी सेहत के लिए फायदेमंद है, यह तो हम सभी जानते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा ग्रीन टी सेहत को फायदा कम और नुकसान अधिक पहुंचा सकती है। यह आंखों से नींद चुरा सकती है, शरीर में आयरन की कमी पैदा कर सकती है।

कैफीन हालांकि ग्रीन टी में ज्यादा मात्रा में कैफीन नहीं होता, लेकिन ज्यादा ग्रीन टी पीने से बेचैनी, हृदय गति में अनियमितता, अनिद्रा की समस्या, चिंता, चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। जानकारों का कहना है कि दिन में चार से पांच कप तक ही ग्रीन टी पीनी चाहिए। इससे ज्यादा ग्रीन टी पीने से उन लोगों में परेशानियां जल्दी दिखने लगती हैं, जो कैफीन की ज्यादा मात्रा के आदी नहीं होते।

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तो ये तो थी नेट के अनुसार कुछ जानकारी पर अपना खुद का अनुभव भी बहुत मायने रखता है … अगर आपके पास भी कोई अच्छी जानकारी हो हरियाली चाय ओह मेरा मतलब ग्रीन टी के बारे में तो जरुर सांझा कीजिगा  🙂

 

July 3, 2015 By Monica Gupta

सैलरी डबल

cartoon sansad by monica guptaसैलरी डबल- एक बार फिर सांसदों की सैलरी का मुद्दा गरमा  गया है इससे पहले 2010 में वेतन दुगुना हुआ था. आम लोगों के अच्छे दिन आएं न आएं, लगता है सांसदों के तो आ ही जाएंगे। प्रस्ताव कहता है कि सांसदों की स्वास्थ्य सुविधाओं में उनके बच्चों के अलावा पोते-पोतियों को भी शामिल कर लिया जाए।

MPs’ salaries – Navbharat Times

फोटो शेयर करें जैसे-जैसे हमारे अधिकांश सांसदों के संसदीय बर्ताव और काम करने के तौर-तरीकों में गिरावट आ रही है, वैसे-वैसे सुविधाओं की उनकी मांगें बढ़ती जा रही हैं। बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली संसद की संयुक्त समिति ने कहा है कि सांसदों के वेतन को दोगुना कर दिया जाए। इस समय सांसदों को मासिक वेतन 50,000 रुपये मिलता है। बात यहीं तक सीमित नहीं है।

सांसदों का दैनिक भत्ता 2000 रुपए से अधिक करने और पूर्व सांसदों का पेंशन भी 75 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सांसदों के वेतन में बढ़ोतरी सन 2010 में की गई थी। बहरहाल, समिति ने कहा है कि सांसदों के लिए ऑटोमैटिक पे रिविजन की व्यवस्था हो ताकि समय-समय पर बढोतरी स्वयं होती रहे। 34 हवाई यात्राओं में 25 फीसदी किराए के प्रावधान से भी सांसद संतुष्ट नहीं हैं। समिति ने 20 से 25 फ्री हवाई यात्राओं सहित करीब 60 सिफारिशें की हैं। इनमें निजी सचिव के लिए प्रथम श्रेणी के एसी रेल-पास की मांग भी शामिल है।

सांसद ग्राम योजना के तहत कुछ भले न हुआ हो, आम लोगों के अच्छे दिन आएं न आएं, लगता है सांसदों के तो आ ही जाएंगे। प्रस्ताव कहता है कि सांसदों की स्वास्थ्य सुविधाओं में उनके बच्चों के अलावा पोते-पोतियों को भी शामिल कर लिया जाए। गौरतलब है कि अपने क्षेत्र में काम कराने के लिए प्रत्येक सांसद 45,000 रुपए का भत्ता हर महीने पाने का हकदार है। ऑफिस के खर्च के लिए भी माहवार इतनी ही रकम मिलती है।

कपड़े और परदे धुलवाने के लिए हर तीसरे महीने 50,000 रुपए मिलते हैं। सड़क मार्ग का इस्तेमाल करने वाले सांसदों को 16 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से यात्रा भत्ता मिलता है। लेकिन यह सब इन्हें कम लगता है। ऐसा लगना स्वाभाविक इसलिए है कि हमारे ज्यादातर सांसदों की नजरें उन लोगों पर रही ही नहीं जिनका प्रतिनिधित्व वे करते हैं।

अगर अपने आम वोटरों की जिंदगी पर, उनके जीवन की तकलीफों-चुनौतियों पर नजर डालने का वक्त इन्हें मिले तो शायद इनकी भी प्राथमिकता कुछ बदले। मगर, राजनीति का जो चरित्र बनता जा रहा है, उसमें इसकी संभावना तलाशना आकाश कुसुम तोड़ने जैसा ही हो गया है। ऐसे में यह उम्मीद भर जताई जा सकती है कि वेतन के साथ वे अपनी गरिमा बढ़ाने पर भी ध्यान दें तो बेहतर होगा। See more…

July 2, 2015 By Monica Gupta

पोस्ट अच्छी बुरी

 

social networking sites photo

Photo by Franco Bouly

पोस्ट अच्छी बुरी

 

कल  फेसबुक पर एक पोस्ट देखी.  फोटो में आटो वाला अपने वाहन मे विकलांगों को फ्री सर्विस देता है उन्होने अपने ओटो मे यही बात बडा करके लिखवाई हुई थी. उस पोस्ट पर लिखा था बताओ कितने लाईक मिलेंगें और उस पर मुश्किल से 10 -12 लाईक थे.

बात लाईक करने या न करने की नही है क्योकि यकीनन पढते तो सभी है बस अच्छाई को पसंद करने के लिए बस क्लिक नही कर पाते. पर मुझे यकीन है कि ऐसे लोग दिल ही दिल मे प्रशंसा भी करते होंगें.

दो दिन पहले एक अन्य तस्वीर भी देखने को मिली. आठ दस साल की लडकी की तस्वीर थी और उसमे लिखा था कि ” मेरे पापा ने कहा है कि अगर इस फोटो को एक हजार लाईक मिले तो वो सिग्रेट पीना छोड देंगें. मुझे अच्छा लगा कि लगभग 900 से ज्यादा लाईक हो चुके थे. मैने भी तुरंत लाईक कर दिया. हालाकि उसके बाद मुझे वह फोटो न्यूज फीड मे नही दिखी. पता नही लोगो ने उसे लाईक किया या  नही  वैसे आप चाहे कुछ भी कहें पर कई पोस्ट वाकई में अच्छी होती है.

एक पोस्ट तो पढ कर मजा ही आ गया . उसमे लिखा था कि मैने अभी भगवान की फोटो शेयर की है. इंतजार कर रहा हूं कि शुभ समाचार क्या मिलेगा… क्योकि उस पोस्ट पर लिखा था कि जल्दी से शेयर करो और शुभ समाचार पाओ…

बहुत समय पहले इसी प्रकार के पोस्टकार्ड आया करते थे तब समझ नही आता था कि इसे फेंक दे , फाड दें या जवाबी 50 पत्र लिख कर डाल दे…

खैर पोस्ट हर तरह की है अच्छी बुरी … हमारी ऊपर है कि हम उसे देख कर अनदेखा कर देतें हैं या लाईक करके अपनी सहमति जताते हैं.

July 2, 2015 By Monica Gupta

Really handicapped

Really handicapped

ladies talking photo

Photo by Katie Tegtmeyer

आज एक महिला बता रही थी कि वो handicapped हो गई है… अरे !!!  फिर  मैने ध्यान उसे देखते हुए पूछा अरे   कहां से, कब और कैसे. तुमने तो बताया भी नही …  इस पर उसने मुझे ही पागल करार देते हुए कहा कि अरी पगली वो वाला handicapped नही बल्कि दूसरे वाला !!!दूसरे वाला मतलब ??? तब उसने बताया कि जहाँ उसने नया घर बनाया है वहां मोबाईल नेट वर्क नही है इसलिए बिना नेट के handicap बराबर ही है. हे भगवान !!

Really handicapped….. वही कुछ दिन पहले एक जानकार भी नई कालोनी मे शिफ्ट हुए हैं. वहां जाने के लिए अभी सडक नही बनी है. एक दिन वो हमारे घर आए और बोले कि भई हम तो  handicapped हो गए है. हमने सोचा कि पता नही कैसे हो गए वो handicapped क्योकि देखने से तो लग नही रहे थे.. तब उन्होने हंसते हुए बताया कि असल में, सडक नही बनी है ना दस मिनट के रास्ते में आधा घंटा लग जाता है इसलिए … हे भगवान !!

मैं उसकी  मानसिकता पर मुस्कुरा दी.  ऐसे शब्दों का लोग किस  सहजता से इस्तेमाल कर लेते हैं ..वैसे सच ही है हम Really handicapped यानि बहुत अपाहिज हो चले है. आखों के सामने अन्याय होते हुए देख कर भी अंधे बन जाते हैं. कही से सच्चाई का स्वर उठे तो हम बहरे बन जाते हैं . अक्सर ईमानदारी का साथ देने के मामलो मे हमारी बोलती बंद हो जाती है. ओफ्फ.. नेट न चले और सडक न बनी हो तो भी  handicapped बहुत ही handicapped   Really  handicapped

 

July 2, 2015 By Monica Gupta

भविष्यकर्ता

cartoon kaam wali bai by monica gupta

भविष्यकर्ता -ये हैं हमारी भविष्यकर्ता !!इनका नाम है मिस टेक … भविष्यवाणी में साढे सात साल का लम्बा अनुभव है … ना जाने कितनी तरह की अलग अलग किताबें इन्होने पढ रखी हैं पर एक बात से ये भी सहमत है कि बेशक हम कितने भी बडे ज्योतिष क्यो न बन जाए पर एक बात आज भी पता नही लग असकते कि काम वाले बाई आज काम पर आऐगी या नही

July 2, 2015 By Monica Gupta

बाल कहानी-मणि

story by monica gupta

बाल कहानी-मणि

मणि छ्ठी क्लास में पढने वाली बेहद चुलबुली और शरारती लडकी है. वो भी बडे होकर कुछ बनना चाह्ती है. कभी सोचती है पत्रकार बन जाऊ कभी सोच में आता है कि टीचर बन जाऊ तो कभी पुलिस अधिकारी पर आखिर में क्या होता है और क्या बनने की सोचती है …

इसी का ताना बाना है बाल कहानी-मणि में …

कहानी का अंत और भी ज्यादा रोचक है कि मणि का फैसला क्या रहता है …

बाल कहानी-मणि

 

ये कहानी नेशनल बुक ट्रस्ट की पत्रिका पाठक मंच बुलेटिन में प्रकाशित हुई थी …

July 2, 2015 By Monica Gupta

लेखों का संसार

Article in champak by Monica guptaPhotograph (131)champak story  monica guptaलेखों का संसार

बेशक आज नेट का जमाना है हर एक चीज क्लिक करके सोशल मीडिया पर डाली जा सकती है जिस करोडों लोग एक ही पल में देख सकते हैं पर आज से 20- 25  साल पहले ऐसा नही था.

एक कहानी या लेख लिखने के बाद पत्र के माध्यम से सम्पर्क करना पडता था. कुछ जाने माने हाउस अकसर जवाब भी देते थे पर कई बार भेजा गया पत्र कही गुम होकर रह जाता था न ही वापिस आता था और न ही प्रकाशित होता था.

जानी मानी बाल पत्रिका जैसे “चंपक” में लेख या अन्य कोई भी सामग्री छपना बेहद गर्व की बात होती थी.

July 2, 2015 By Monica Gupta

कहानी का जन्म

story by monica gupta (2) story monica gupta

कहानी का जन्म

बात सन 92 की यूपी गाजियाबाद की  है . अचाक एक विचार दिमाग में कौंधा और कहानी डाली और  उसे  सांध्य टाईम्स  के दफ्तर जाकर   दे आई . वैसे तो लिखने का बचपन से ही शौक रहा और अपने हिसाब से कहानी भेजती भी रहती थी . पर शायद जानकारी का अभाव था शायद  कभी मौका नही मिला और रचना प्रकाशित नही हुई पर अच्छी बात ये भी रही कि उत्साह कभी कम नही हुआ.

ये बात 92 की है .उन दिनों नेट नही हुआ करता था और लेखकों का पूरा फोकस सांध्य दैनिक और राष्ट्रीय समाचार पत्र पत्रिकाओं पर ही होता था क्योकि भारी तादात में उसे ही पढा जाता था. हां , तो मैं बता रही थी कि कहानी लिखी और सांध्य टाईम्स के दफ्तर में दे आई.  उसी शाम वो कहानी प्रकाशित भी हो गई. इससे लेखनी को बेहद बल मिला और लेखनी लगातार चलती रही.

बहुत लोग चाह्ते हैं कि आज कुछ लिखा और वो राष्ट्रीय पत्र पत्रिका में छप जाए. बेशल सोशल मीडिया बहुत बलवान हो गया है और लेखन को दिखाने का बहुत अच्छा माध्यम भी है पर मेरा मानना है कि  अगर शुरुआत लोकल स्तर पर हो और धीरे धीरे अपनी कमियों को देख कर उपर उठते जाए तो बहुत अच्छा होगा …

और अब तो जबसे नेट की सुविधा हुई है कोई भी अपना ब्लाग बना कर लेखन आरम्भ कर सकता है.

 

July 2, 2015 By Monica Gupta

Digital India Weak

Digital India Weak /week ???

Digital India  week by  monica gupta   Digital India Weak / week ??               बेशक देशवासी Digital India week  को लेकर बेहद उत्साहित हैं सब कुछ नेट से जुड जाएगा और आराम ही आराम होगा … पर मूल भूत समस्या का क्या करें समस्या है नेट का न चलना या नेट का बेहद धीरे चलना !!!  तभी तो आज  Digital India week ???मनाए  या Digital India Weak !!!

 

PHOTOS: Digital India Week: PM Narendra Modis 15 point dream | The Indian Express

“I dream of a digital India where 1.2 billion connected Indians drive innovation.” (Express photo by Anil Sharma)

“I dream of a digital India where knowledge is strength and empowers people.” (Express photo by Anil Sharma)

“I dream of digital India where quality healthcare reaches right upto the remotest areas through e-health care.” (Express photo by Anil Sharma)

“I dream of digital India where cyber security becomes an integral part of national security.”

“I dream of digital India where there is mobile and e-banking for financial inclusion.”

“I dream of digital India where e-commerce drives entrepreneurship.”

“I dream of digital India where the world looks to India for the next big idea.”

“I dream of digital India where netizens are empowered citizens.” See more…

‘M-Governance (Mobile, Not Modi),’ Quips PM at Digital India Push: 10 Facts

Prime Minister Narendra Modi launching the Digital India Week. See more…

July 1, 2015 By Monica Gupta

Loudspeakers

Loudspeakers- कुछ ही देर पहले मेरी सहेली मणि का फोन आया. अरे !! आवाज ही नही पहचानी गई.. मैने पूछा क्या हुआ… पर आवाज ही नही निकल रही थी कल तक तो ठीक थी एक ही दिन में …. !!! मैं  तुरंत उसके घर गई. उसकी तो आवाज बिल्कुल  ही बंद थी.

मैने गुस्से मे कहा कि कितनी बार मना किया है बर्फ मत खाया कर … उसने  मायूस सा होते हुए इशारे से बताया कि नही खाई. फिर मैने पूछा खट्टी चटनी ?? उसने फिर  न की मुद्रा मे गर्दन हिला दी !! अरे तो फिर हुआ क्या? उसने लिख कर बताया कि कल किसी समारोह मे गए थे वहां डीजे पर  गाने बहुत तेज आवाज मे बज रहे थे. वहां बहुत जानकार भी मिले और उनसे बात भी करनी थी इसलिए महा भयंकर शोर मे कान के पास चिल्ला चिल्ला कर बोलना पडा इसलिए गला बैठ गया.

ओह ..नो !! इस पर उसने लिखा अरे तू क्यो लिख रही है मेरे कान तो ठीक है … ह हा हा !! मैने कहा ये भी एक बडा चिंता का विषय है. कान फूडू संगीत भी आज कल स्टेटस सिंबल बन गया है. कुछ दिन पहले मै भी एक प्रोग्राम मे गई  वहां भी बहुत तेज संगीत बज रहा था इस पर जब  मालिक से बोला कि क्या संगीत की ध्वनि धीमे  हो सकती है  इस पर वो बोले अजी आप कमाल करती हैं इतने पैसे खर्च किए हैं डीजे के लिए…  आवाज  कम नही होगी..

और पूरे कार्यक्रम में हम इशारों मे ही बात करते रहे… या फिर वटस अप पर मैसेज भेज कर बाते करते रहे. मेरी सहेली ने जब अपना मोबाईल देखा तो बीस मिस्ड काल थी उसके पति बाहर बुलाने के लिए कर रहे थे… पर सुनाई ही नही दिया…मैने सलाह दी कि ऐसे मे वाईब्रेशन पर लगा देना चाहिए और मोबाईल हाथ में पकडे रहना चाहिए.

वैसे  वो भी अच्छा अनुभव था. मूड खराब करने का कोई फायदा नही क्योकि लोग नही सुधरेंगें पर हम नई नई भाषा जरुर सीख जाएगे.

Loudspeakers

 

 

Loudspeakers photo

Be kind to your ears, listen quietly

Give it a try, turn the volume down a little, and once you get used to listening quietly, turn it down a little more. Granted, quiet listening works best in quiet places; in noisy environments stick with in-ear, closed-back, or noise-canceling headphones. Avoid ear buds and open-back headphones, they don’t hush external noise so you have to play music a lot louder than you might realize.

If you do the bulk of your listening in noisy places, continuing with ear buds (the type that come with phones) may eventually lead to hearing loss from continued exposure over a long period of time to excessively loud sound. I covered how ear buds, in-ear, and closed- and open-back headphones work and how they differ on previous blogs.

If you have to listen in noisy places or while commuting, consider buying in-ear or closed-back full-size headphones to seal out noise. When you reduce the background noise level competing with the music, you can turn the music’s volume way down, and the difference can be very significant. Even inexpensive closed-back or in-ear headphones will help you listen more quietly.

I find with the better-sounding in-ear and closed-back headphones I can listen at a much lower volume and still not feel like I’m losing detail or the music’s energy. Quiet listening draws me in more, so I listen more attentively. Once you get used to listening quietly it will become the new norm, and your ears will suffer less listening fatigue.

Noise-canceling headphones block more noise than any other type of headphone, so you can turn the music down even more, but most noise-canceling models don’t sound as good playing music as equivalently priced closed-back headphones. See more…

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