Hat’s Off
Hat’s Off आज अखबार पढ कर पता चला कि देश में कल और भी बहुत गतिविधिया हुई. मैने सोचा कि शायद सलमान खान वाली धटना ही धटित हुई थी क्योकि जिस तरह से पल पल का धटना क्रम दिखा रहे थे उससे तो यही प्रतीत हो रहा था कि मानो कोई दूसरा मुद्दा ही नही है.
कब सलमान घर से निकले. कब अपने पापा के गले लगे. कब किस किससे गले मिले. अच्छा चलो एक बार हो तो भी समझ आता है पर बार बार एक ही सीन को दिखाना और वो भी सारे चैनल पर … ये अच्छी बात नही है …
वैसे Hat’s Off to media जिस के पीछे पडता है हाथ धो के नही, नहा धो कर पडता है.ऐसे में तो कहना बनता है Hat’s Off
आप खुद ही देखिए ना पहले आप पार्टी, फिर गजेंद्र, किसानों का मुद्दा फिर भूकम्प,फिर मोगा रेप, फिर आप पार्टी और ताजा ताजा सलमान खान केस. दिन के 24 धंटे मे से ना जाने 25 धंटे एक ही खबर लगातार चलती है और चलती ही रहती है वैसे hats off हम लोगो के लिए भी है जो दिन रात कोसते भी हैं और खबरें देखते भी हैं.. चलिए आज देखते हैं कि पूरा दिन कौन सी एक खबर सभी चैनलों पर चलेगी ..Hat’s Off
न्यायालय
Hit n run
Hit n run case
सलमान खान की खबर चल रही थी. घर पर कुछ मेहमान आए हुए थे और वो बात कर रहे थे कि इतनी बडी हस्ती है सलमान खान उसने ले दे कर केस रफा दफा क्यू नही किया. वही साथ ही साथ पल पल की खबरे चल रही थी कि सलमान किससे गले मिले किसे टाटा किया. कितने बज कर कितने मिनट पर कोर्ट पंहुचे.
Hit n run 5 साल सजा की बात सुनते ही बेल पर वार्तालाप चालू हो गया.बेशक बहुत लोगों को दुखी भी हुए. भले ही वो दो चार दिन मे छूट भी जाएगें(जैसाकि सुनने मे आया है) पर आम आदमी का न्याय पर विश्वास बना रहा एक बात अच्छी यह हुई चाहे कोई कितना बडा और रसूखदार क्यों न हो उसे कटघरे में आना ही पडता है. बडी हस्तियां जो आम आदमी को कीडे मकौडा समझती हैं इस धटना से सबक जरुर लेगी और भले ही थोडे समय के लिए पर एक डर तो सभी के मन मे बैठ ही गया होगा…सत्यमेव जयते… कानून जिंदा है
और सबसे जरुरी …. “एक बार कानून ने सज़ा दे दी तो वो सलमान की भी नहीं सुनता”
Hit n run… अफसोस, जिस तरह से अदालत ने 5 साल साल की सजा सुनाई और हाथों हाथ बेल भी मिल गई. इस पूरे प्रकरण से आम जनता को निराशा ही हाथ लगी
Swachh Bharat Mission-Gramin
Swachh Bharat Mission-Gramin
Swachh Bharat Mission-Gramin – Kanganpur – Nirmal Bharat Abhiyan – TSC – DOST
बात उन दिनों की है जब गांव के लोग खुले में शौच के लिए जाते थे पर जब से जनता में जागरुकता आई और वो सफाई का महत्व समझने लगे तभी से जबरदस्त बदलाव देखने को मिला … उसी का जीता जागता उदाहरण है हरियाणा के सिरसा के कंगनपुर गांव जिन्होनें स्वच्छता में एक मिसाल कायम की … लोग इस सफाई से बेहद उत्साहित है और खुशी का इजहार नाच गा कर रहे हैं
Swachh Bharat Mission-Gramin – Kanganpur – Nirmal Bharat Abhiyan – TSC – DOST
Swachh Bharat Mission-Gramin
Swachh Bharat Mission-Gramin
बात उन दिनों की है जब गांव के लोग खुले में शौच के लिए जाते थे पर जब से जनता में जागरुकता आई और वो सफाई का महत्व समझने लगे तभी से जबरदस्त बदलाव देखने को मिला … उसी का जीता जागता उदाहरण है हरियाणा के सिरसा का गांव वैदवाला ….जिन्होनें स्वच्छता में एक मिसाल कायम की … लोग इस सफाई से बेहद उत्साहित है और खुशी का इजहार नाच गा कर रहे हैं
Being Human
I Love you
I Love you
6 April को एक खबर पढी कि चंडीगढ के हाईकोट जज जस्टिस एम. जियापाल (60 साल) ने एक बच्ची को सुखना लेख , चंडीगढ में डूबने से बचाया. बचपन मे मैनें भी एक बच्ची को डूबने से बचाया था इसलिए ऐसी खबरों मे मेरी विशेष रुचि रहती है पर जैसे जैसे मैं खबर पढती गई मेरा ध्यान किसी और बात पर केंदित हो गया . असल में, खबर के अंत मे लिखा था कि जैसे ही जज साहब की पत्नी को यह सूचना मिली वो भागी भागी सुखना लेख पहुंची. उनको सूचना ये मिली थी कि वो डूब गए हैं. वहां अपने पति को ठीक देख कर वो उनसे लिपट गई जज साहब ने बताया कि वो लम्हा उनकी जिंदगी का यादगार लम्हा था. ऐसा अहसास उन्हे पहले कभी नही हुआ.
उसे पढ कर मैं जिस विषय पर लिखने वाली थी उससे ध्यान हट गया और जाकर ठहर गया पति पत्नी के अनमोल रिश्तें पर. जब भी हम प्यार Love शब्द का इस्तेमाल करते हैं हमेशा हमारे जहन में boy friend, girl friend या दफ्तर का कर्मचारी या boss के साथ सैकेटरी के सम्बंध की बात ही आती है और पति पत्नी के प्यार का कभी जिक्र भी नही होता जबकि सबसे केयरिंग सबसे स्पेशल यही रिश्ता होता है. खासकर उम्र के ऐसे पडाव पर आने के बाद जब दोनों को एक दूसरे के सहारे की जरुरत होती है.
I Love you हमारे समाज में पति पत्नी पर बहुत चुटकले बनाए जाते हैं पति पत्नी का मजाक उडाते हैं पर साथ ही साथ यह भी कहते हैं कि भई हम तो जोरु के गुलाम है. पर पति पत्नी के प्यार पर कभी बात नही की जाती जबकि अपने जीवन को सुखद बनाने के लिए आपसी प्यार ही होता है. एक जानकार से जब मैं इस बारे में बात कर रही थी तो उन्होने बताया कि पति पत्नी के प्यार का क्या इजहार करना वो तो understood यानि स्वाभाविक ही होता है… बेशक, स्वाभाविक है पर प्यार की उष्मा बनाए रखने के लिए जताना भी बहुत जरुरी होता है.
कभी बीमारी में सेवा करना ,कभी चाय बना कर लाना, कभी सालगिरह पर खूबसूरत उपहार देना,I Love you बोलना या कभी कोई सरप्राईज देना… रिश्तें की महक को और बढा देता है. इसमे दोनों की भूमिका बराबर की होनी चाहिए. पति कभी आफिस से लेट हो तो बजाय मुंह बनाने के उनकी थकावट उतारने की कोशिश होनी चाहिए और अगर गलती से खाना जल गया तो बर्तन पटकने के पति को ”’ कोई बात नही … हो जाता है कई बार कह कर बात सम्भाल लेनी चाहिए और सबसे जरुरी बात अपने रिश्तें को समय दें ज्याद धरेलू कार्य या दफ्तर में इतने ही न उलझ जाए कि आप एक दूसरे से दूर होते जाएं.
I Love you
शादी के बाद आरम्भ के आठ दस महीने बहुत नाजुक होते हैं क्योकि एक दूसरे को जानना समझना बहुत जरुरी होता है और दोनों को ही थोदा थोडा झुकना चाहिए अहम को दर किनारे कर देना चाहिए. पर अपना प्यार जरुर प्रकट करना चाहिए.
I love you… बहुत प्यारा शब्द है और पति पत्नी के प्यार को , दाम्पत्य जीवन को मिठास से भर देता है ….
Hypnotize
मां – प्यार का दूसरा नाम
मां – प्यार का दूसरा नाम …… कुछ देर पहले नेट पर कुछ सर्च कर रही थी कि तभी एक लेख पढने को मिला कि मां के हाथ के खाने जैसा दुनिया में और कुछ नही हो सकता… उसमे बहुत सारी बाते बताई हुई थी कि मां के हाथ मे ये है मां के हाथ में वो है… कुछ बातें बहुत अच्छी भी लगी पर जब भी मां के हाथों से बने खाने की बात होती है तो मुझे बस एक ही बात याद आती है और वो है ..पेट भरने के बाद, मना करने के बावजूद , एक फुल्का और लो ना बस ये बिल्कुल छोटा सा है … यानि मना करने के बाद भी आखिरी फुल्का तो खिलाना ही होता है… जिसे दूसरी भाषा में कहते हैं Over eating ya torture…. पेट के साथ … पर क्या करें खाना इतना लजीज जो होता है … हां तो मैं बता रही थी….
बात उन दिनों की है जब मैं कुरुक्षेत्र से एम ए (संगीत) कर रही थी. होस्टल मे खाना खा रही थी. उस दिन मेरे पसंदीदा राजमा चावल बने थे. पेट भर गया था पर नियत नही भरी थी. मैस वाला भाई प्लेट में फुल्का डाल गया और मैने कहा कि और नही चाहिए. फिर मैं बहुत देर तक इंतजार करती रही कि वो फुल्का ले कर आएगा… असल में, वो क्या है ना कि जब मम्मी को मना करती तो बाद मे एक चपाती तो आनी ही आनी होती थी . होता वही साईज था पर कहने को पतली सी छोटी सी होती. वही आदत पडी हुई थी और याद भी नही रहा कि मैं घर नही होस्टल मे हूं और ये मैस वाला भईया है मेरी मम्मी नही. मैने जब उसे बुला कर पूछा कि चपाती क्यो नही दी इतनी देर से इंतजार कर रही हूं तो वो बोला कि आपने ही तो मना किया था.
उस रात मैं अपने कमरे मे जाकर मम्मी को याद करके बहुत रोई… फिर धीरे धीरे आदत पड गई.
ये जो प्यार है न कि बस एक आखिरी , छोटी सी और ….
ये हमेशा बहुत याद आता है मां का ऐसा प्यार , दुलार और कही भी नही देखने को मिल सकता. वाकई में, मां – प्यार का दूसरा नाम ही तो है … है ना !!!!
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