Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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April 22, 2015 By Monica Gupta

किसान रैली

किसान रैली    बरसात क्या आई मानों किसानों की जिंदगी मॆ ग्रहण सा लग गया. फसले तबाह हो गई और किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए. लेकिन नेता अपनी अपनी पार्टी का राग आलाप रहे हैं कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस तो कभी आप पार्टी स्वयं को किसान का हितैषी बता रहे हैं पर उनका दुख दर्द कोई नही समझ रहा.. बस किसान रैली में सभी दल राजनीति कर रहे है और किसने कैसा भाषण दिया इस पर लगातार चर्चा हो रही है अफसोस !!! ऐसे मे पृथ्वी दिवस की शुभकामनाए कैसे दें किसानों को …

cartoon- farmer-monica

April 21, 2015 By Monica Gupta

शुभ यात्रा

cartoon -gud days-monicaआपकी यात्रा शुभ हो !! शुभ यात्रा  जी … अभी आए नही है … अच्छे दिन आने वाले हैं … बस चलते रहिए … चलते रहिए और चलते रहिए … कभी न कभी आ ही जाएगे… आपकी यात्रा शुभ हो 🙂

Modi One Year

‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ का नारा देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए थे। एक साल के दौरान उन्होंने 18 विदेश दौरे किए। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई तो पेट्राेल-डीजल सस्ता हुआ। लेकिन फरवरी के बाद कीमतें फिर बढ़ने लगीं। मोदी का चीन दौरा खत्म होते-होते सोशल मीडिया पर उनका जादू भी कमजोर पड़ता दिखा। 26 मई को मोदी सरकार के एक साल पूरे होने के मौके पर dainikbhaskar.com आपको बता रहा है कि अच्छे दिन की कोशिश में मोदी कहां चूके और कहां तारीफ पाई?

Expert View : मोदी के पास अब देने को ज्यादा कुछ नहीं – राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन का मानना है कि पिछले एक साल में मोदी सरकार को लेकर जनता के उत्साह में कमी आई है। अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की तुलना में मोदी के पास अब देने के लिए बहुत कुछ नहीं है। सरकार अब पब्लिसिटी को ज्यादा तव्वजो दे रही है। लेकिन मोदी के पास खुद का उत्साह बचा है। उसमें कमी आती है तो यह चिंता की बात होगी। जहां तक स्वच्छ भारत अभियान, बीमा योजना, जन धन योजना की बात है तो ये हल्के कार्यक्रम हैं। इनके जरिए राजनीतिक-सामाजिक स्तर पर प्रभाव नहीं डाला जा सकता। – ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के चेयरमैन पी.

भट्टाचार्य का कहना है कि फिलहाल महंगाई काबू में है। अच्छे दिन हैं या नहीं, इसका पता मानसून के बाद चलेगा, क्योंकि इस बार अलनीनो का असर रह सकता है। कच्चे तेल के दाम बढ़े तो भी महंगाई बढ़ेगी। – अंतरराष्ट्रीय संबंध मामलों के जानकार पुष्पेश पंत का कहना है कि मोदी सरकार की विदेश नीति की कई लोग आलोचना कर रहे हैं, लेकिन मैं मानता हूं कि उनकी विदेश नीति काफी संतुलित रही है। मोदी की सभी 18 विदेश यात्राएं सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थीं। विदेश नीति में एक-एक कदम काफी सूझबूझ के साथ उठाया गया। See more…

कछुआ चाल है … अभी तो पहला साल है आप चलते रहिए …आपकी यात्रा शुभ हो !!  अभी आए नही है … अच्छे दिन आने वाले हैं … बस चलते रहिए … चलते रहिए और चलते रहिए … कभी न कभी आ ही जाएगे… आपकी यात्रा शुभ हो 🙂

April 21, 2015 By Monica Gupta

Cartoon Kissan

cartoon-kissan monica-

Cartoon Kissan

अपना हाथ ही जगन्नाथ

कभी मोदी जी तो कभी राहुल… उफ ये राजनीति !!!   किसानों की बदहाली पर ठीकरा एक दूसरे पर फोडते नजर आते हैं मुसीबत के मारे किसानों ने अलग अलग रैलियां भी कर ली, धरने भी दे दिए और तस्वीरे भी खिंचवा ली पर नतीजा शून्य अब किसान को समझ आ गया है कि दुबारा हल ही लेना पडेगा और जमीन नए सिरे से जोतनी पडेगी … किसी भी राजनीति दल की इच्छा ही नही कि वो किसानो का कल्याण करे.. और रही बात मीडिया की …वो बेचारी तो अपने टीआरपी मे ही उलझी हुई है

Cartoon Kissan

April 20, 2015 By Monica Gupta

बाल साहित्यकार

बाल साहित्यकार

आज नेट पर सर्च करते हुए अचानक कुछ ऐसा पढने को मिला कि दिल खुश हो गया. असल में , सर्च के दौरान मैने अपनी कहानी भईया पर जाने माने साहित्य कार श्री मनोहर चमोली “मनु” जी की प्रतिक्रिया पढी. वैसे तो वो लेख है जिसमे देश भर के  जाने माने  बाल साहित्यकारों की रचनाओं को लेकर  उन्होने अपनी राय दी है. मेरी लिखी कहानी “भईया” पर उन्होनें अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है

Monica gupta

बाल साहित्यकार

मोनिका गुप्ता (हरियाणा)रिश्तों की कथाकार हैं। वे बच्चों के बीच आत्मीय संबंधों का खुलासा भी करती हैं। उनकी एक कहानी है ‘भईया‘। भाई-बहिनों में कभी-कभार तकरार-नोंकझोंक हो ही जाती है। लेकिन एकदम से वह प्यार में भी बदल जाती है।

यह कथाकार बेहद सरल तरीके से गहरे तक रिश्तों की पड़ताल कर लेती हैं। दोस्ती से लेकर झगड़ों के भावपूर्ण कथाएं कहना आसान नहीं। वह भी तब जब उनका अंत सकारात्मक हो। मोनिका गुप्ता की कहानियों में बालिकाओं की मनस्थिति का सूक्ष्म अवलोकन मिलता है।

बाल साहित्यकार

 

April 20, 2015 By Monica Gupta

AAP Cartoons – धमासान जारी है

AK by Monica Gupta

AAP Cartoons – धमासान जारी है -अरविंद  केजरीवाल जी और उनकी आम आदमी पार्टी- इसके बारे मे हम कह कर भी कुछ नही कह सकते अचानक चलते चलते इसे झटके लगते हैं  या झटके लगते लगते अचानक बलवान हो जाती है और दुख इस बात का होता है कि अपने ही ….  खैर आईए आनंद लेते हैं आप के कुछ कार्टून … मेरे दवारा बनाए गए 🙂 AAP Cartoons

AAP Cartoons – धमासान जारी है

आम आदमी पार्टी, संक्षेप में आप, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल एवं अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन से जुड़े बहुत से सहयोगियों द्वारा गठित एक भारतीय राजनीतिक दल है। इसके गठन की आधिकारिक घोषणा २६ नवम्बर २०१२ को भारतीय संविधान अधिनियम की ६३ वीं वर्षगाँठ के अवसर पर जंतर मंतर, दिल्ली में की गयी थी।

 

 

 

सन् २०११ में इंडिया अगेंस्ट करपशन नामक संगठन ने अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए जन लोकपाल आंदोलन के दौरान भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा जनहित की उपेक्षा के खिलाफ़ आवाज़ उठाई। अन्ना भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आंदोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे, जबकि अरविन्द केजरीवाल और उनके सहयोगियों की यह राय थी कि पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा जाये। इसी उद्देश्य के तहत पार्टी पहली बार दिसम्बर २०१३ में दिल्ली विधानसभा चुनाव में झाड़ू चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में उतरी।

पार्टी ने चुनाव में २८ सीटों पर जीत दर्ज़ की और कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनायी। अरविन्द केजरीवाल ने २८ दिसम्बर २०१३ को दिल्ली के ७वें मुख्य मन्त्री पद की शपथ ली। ४९ दिनों के बाद १४ फ़रवरी २०१४ को विधान सभा द्वारा जन लोकपाल विधेयक प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को समर्थन न मिल पाने के कारण अरविंद केजरीवाल की सरकार ने त्यागपत्र दे दिया।

AAP   की उत्पत्ति सन् २०११ में इण्डिया अगेंस्ट करप्शन द्वारा अन्ना हजारे के नेतृत्व में चलाये गये जन लोकपाल आन्दोलन के समापन के दौरान हुई। जन लोकपाल बनाने के प्रति भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा प्रदर्शित उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण राजनीतिक विकल्प की तलाश की जाने लगी थी। अन्ना हजारे भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आन्दोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे जबकि अरविन्द केजरीवाल आन्दोलन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिये एक अलग पार्टी बनाकर चुनाव में शामिल होने के पक्षधर थे। उनके विचार से वार्ता के जरिये जन लोकपाल विधेयक बनवाने की कोशिशें व्यर्थ जा रहीं थीं। इण्डिया अगेंस्ट करप्शन द्वारा सामाजिक जुड़ाव सेवाओं पर किये गये सर्वे में राजनीति में शामिल होने के विचार को व्यापक समर्थन मिला।

१९ सितम्बर २०१२ को अन्ना और अरविन्द इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि उनके राजनीति में शामिल होने सम्बन्धी मतभेदों का दूर होना मुश्किल है। इसलिये उन्होंने समान लक्ष्यों के बावजूद अपना रास्ता अलग करने का निश्चय किया। जन लोकपाल आन्दोलन से जुड़े मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण व योगेन्द्र यादव आदि ने अरविन्द केजरीवाल का साथ दिया, जबकि किरण वेदी व सन्तोष हेगड़े आदि कुछ अन्य लोगों ने हजारे से सहमति प्रकट की। केजरीवाल ने २ अक्टूबर २०१२ को राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की। इस प्रकार भारतीय संविधान की वर्षगांठ के दिन २६ नवम्वर (२०१२) को औपचारिक रूप से AAP  का गठन हुआ

AK by Monica Gupta

AK by Monica Gupta

आजकल भारी बहुमत से जीत कर अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्य मंत्री पद पर आसीन है. अरविंद जी ने बहुत उतार चढाव देखी हैं. इन्हीं उतार चढावों को कुछ कार्टून के माध्यम से मैने दर्शाने की कोशिश की है

AAP Cartoons…..

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April 20, 2015 By Monica Gupta

Only for Ladies

विश्व स्वास्थ्य दिवस और हमारा खानपान

केवल महिलाओ के लिए

Only for Ladies

केवल महिलाओ के लिए …!!

इस लेख का महिला दिवस से कोई सम्बन्ध नही है पर यह लेख केवल महिलाओ के लिए ही है.

मै जानती हू कि हम सभी अपनी आदत से मजबूर है और जिस काम को मना किया जाए  उसे तो किसी भी कीमत पर करना ही होता है.जैसे कि आमिर खान ने देहली बैली फिल्म बनाई और उसने  सभी से कहा कि बच्चे ना देखे. जो अपशब्द भाषा इस्तेमाल नही करते वो भी ना देखे पर नतीजा क्या हुआ.बच्चो ने सबसे ज्यादा देखी.इसका सीधा सीधा  कारण बस उन्हे मना करना ही था है ना. नन्हे मुन्ने बच्चो को मुहँ मे चप्पल डालने का बहुत शौक होता है जितना मना करो वो उतना ज्यादा ही करते  है. हमारा स्वभाव ही ऐसा बन चुका है कि मना करने पर एक हिलोर सी उठती है कि इसे तो करके ही देखे कि आखिर मना किसलिए किया गया है.

तो अब मै अपनी बात पर आती हूं. असल मे, मै यही चाह्ती थे कि हम सब चाहे पुरुष,बच्चे या बुजुर्ग हो इस लेख को पढे क्योकि इसका सम्बंध हमारे घर की धूरी यानि महिला से हैं.

Only for Ladies

कोई शक नही कि आज घर हो या द्फ़्तर दोनो काम बखूबी सम्भाले हुए है पर खुद कितने तनाव मे रहती है इसका किसी को कोई अंदाजा नही हो सकता. मेरा सभी महिलाओ  से अनुरोध है कि प्लीज टेंशन को अपने घर मे  घर मत बनाने दें. खुश रहे और मस्त रहे. मुझे पता है कि कहना बहुत आसान है कि खुश रहो पर जिस पर बीतती है वही जानता है आप यही सोच रही होंगी.है  ना. पर यकीन मानिए आज के समय मे एक भी घर या परिवार   ऐसा नही जिस को  तनाव, चिंता या परेशानी ना हो.हर एक घर की  अपनी  ही राम कहानी होती है.फालतू की बातो पर तूल देने की बजाय, उधर उधर बाते बनाने मे  समय बेकार गवाने की बजाय  कुछ भी रचनात्मक करें.

अगर आप कामकाजी है तो समय निकालिए अपने बच्चों और परिवार के लिए और अगर आप घर पर ही रहती हैं तो आप कुछ रचनात्मक करें. अपनी अनदेखी ना करें कि आप किसी भी काम की नही या किसी को आपकी कोई कद्र ही नही.आप बहुत समझदार हैं और आप समय का बहुत अच्छा उपयोग कर सकती हैं  आज कल तो नेट भी बहुत जानकारी दे सकता है.पर इस पर लाभदायक काम कर सकती हैं पर इसका मतलब यह भी नही है कि सारा सारा दिन नेट पर ही जुटी रहे. और घरवाले परेशान ही हो जाएं. हर काम का समय बाधं ले और जिंदगी को जीना सीखें.

सबसे पहले खुद को अच्छा माने कि मै अच्छी हूं क्या हुआ कि कई बार सब्जी अच्छी नही बनी. क्या हुआ कि कई बार साहब की कमीज मे दाग लगा रह गया.क्या हुआ अगर हिसाब किताब करते समय हम अपनी उगलियो पर गिनना शुरु कर देते हैं .परिवार मे किसी दूसरे के दर्द को देख कर अपना दर्द भुला देते है.खुद फ्रिज का बचा हुआ खाना पसंद करते हैं और परिवार के लिए ताजा ही  बनाना चाह्ती है.जब दूसरे के प्रति हम  इतनी सोच रखती है तो अपने को क्यो भूल जाती है. बस आज से और अभी से आप अपने से बात करके उसे जानिए और अपना ख्याल रखते हुए मस्त रहिए यकीन मानिए अगर आप खुश रहेगी तो सारा परिवार भी खिलखिला उठेगा.

मुझे उम्मीद है कि परिवार के सभी लोग इसे पढ रहे होगे और उनको उचित प्यार,मान सम्मान  और समय देगे जिसकी वो सच्ची हकदार हैं.

petrol by monica gupta

Only for Ladies

बस हमे इतना सा करना है कि सकारात्मक सोच ही रखनी है. मैने कही पढा था कि आपके आसूं बताते है कि आप प्याज काट रही हैं. आपकी चुप्पी यह बताती है कि आपके पर्स मे रुपए खत्म हो गए हैं और आपकी मुस्कान यह बताती है कि आज आपने बहुत अच्छी तरह से दातं साफ किए हैं. ह हा हा !!! कहने का मतलब यही है कि जिंदगी को बहुत खुशी खुशी जीए इसे मुसीबत मत बना कर रखो. हर बात मे अच्छाई खोजें,खुशियां खोजें और जो भी अच्छा लगे उसकी खुल कर प्रशंसा करें फिर देखें जिंदगी कितनी प्यारी लगेगी. है ना….शुभकामनाएं …!!!

तो कैसा  आप सभी को ये लेख .. जरुर बताईएगा

 

April 20, 2015 By Monica Gupta

पहचान

 

 ( मोनिका गुप्ता)

( मोनिका गुप्ता)

पहचान (कविता)

नन्हू की चाची
दिव्या की मौसी
गीता की ताई
नीरु की आंटी
जमुना की बाई जी
दीप की भाभी
लीना की देवरानी
रानो की जेठानी
सासू माँ की बहू रानी
माँ की मोना
पति की सुनती हो
रामू की बीबी जी
मणि की मम्मी
इन नामो से मेरी

पहचान कही गुम हो गई
एक दिन
आईने के आगे
खुद को जानने की कोशिश की
तो
मुस्कुरा दिया आईना
और बोला
मेरी नजरो मे ना तुम
चाची हो ना ताई
ना भाभी हो ना बाई
बस

तुम सिर्फ तुम हो
सादगी की मूरत
दयालुता की प्रतीक
प्रेम की देवी

ईश्वर का प्रतिबिम्ब
बस …
तभी से अपने पास
आईना रखने लगी हूं
ताकि पहचान धुंधलाने पर
उसके अक्स मे खुद को जान सकू
पहचान सकू….
कि मैं भी कुछ हूं
कि मैं भी कुछ हूं ….( पहचान )

 

 

 

April 20, 2015 By Monica Gupta

माँ

 thinking woman photo

माँ

सुखद अहसास है माँ
जिसमे रुई की सी कोमलता
शहद की सी मिठास
तेल की धार जैसा सतत बहता प्यार
लेकिन एक दिन
अचानक

मायने बदल गए
शादी के बाद
माँ के माँजी होते ही वो सुखद अहसास हवा हो गए
क्योकि उस “जी” मे छिपी थी

कठोरता, कडकपन और पराएपन की सी अनबुझी दीवार
यौवन पर था ईर्ष्र्या का ज्वार भाटा

वक्त बेवक्त कुछ तलाशती पैनी निगाहें
दिल मे मचा रही थी अजीब हलचल,
ऐसा क्यू होता है
सच
“जी” लगाते ही आखिर क्यो बदल जाते हैं मायने

क्यो खत्म हो जाता है अपनापन
मानो “ज़ी” की खडी हो गई हो इक दीवार
जिसमे ना कोई खिडकी ना ही रोशन दान

है तो बस घुटन ही घुटन
काश
हमेशा के लिए हट जाए “जी”
माँ माँ ही बनी रहे
“ज़ी” को जमीन निगल जाए
और माँ बरसात की पहली फुहार जैसे
सौंधी सौंधी महक लिए
तन मन को महका जाए

बस , माँ के दोनो ही रुप
अथाह स्नेह सागर बरसाए

क्योकि सुखद अहसास है माँ

आपको कविता कैसी लगी ?? जरुर बताईएगा !!

April 20, 2015 By Monica Gupta

जी में आता है

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जी में आता है  … (कविता)

जी में आता है
ये बदल दू
वो बदल दूं
कुछ ऐसा लिखू
कि मच जाए हलचल
सुप्त समाज मे भर दूं नव चेतना
भर दू रंग इस बेरंग दुनिया में
अंधियारी गलियो मे भर दूं नई रोशनी
फिर
अनायास ही ठिठक जाती हूं
क्योंकि
मैं भी उसी समाज का हिस्सा हूं
कौन देगा मौका
कौन सुनेगा बात
ना रुपया ना सिफारिश मेरे पास
मेरी कलम कैसे कह पाएगी अपने दिल की बात
फिर बैठे बैठे जी भर आया
अपनी लिखी कविता को फिर दिल से लगाया …

जी में आता है…. कविता कैसी लगी ? जरुर बताईएगा !!!

April 20, 2015 By Monica Gupta

इतवारी धूप

sun rays photo

 

इतवारी धूप ( कविता)

रोजमर्रा की भाग दौड में
अक्सर धूप नजर नही आती

पर

मेरे घर का है एक कोना
जंहा से इतवारी धूप छ्न छ्न कर है आती
उस कोने मे

किरणे
अपने कणो से अठखेलियां है करती
रिझाती, उलझाती, सहलाती
और
अपनी तपिश से
नई स्फूर्ति जगाती

खिला खिला रहता है
सर्द इतवारी धूप से वो कोना
क्योकि
रोजमर्रा की भागदौड में
अक्सर वो नजर नही आता ….!!!

इतवारी धूप

 

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