Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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January 18, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Develop Your Child’s Brain – बच्चों के दिमाग को तेज कैसे करें – Parenting Tips – Monica Gupta

How to Develop Your Child's Brain

How to Develop Your Child’s Brain – बच्चों के दिमाग को तेज कैसे करें – Parenting Tips – Monica Gupta – How to Develop Your Child’s Brain – brain game – बच्चों के दिमाग को तेज कैसे करें – Parenting Tips Brain Development in Children – Increase Brain Power in Children – कल शाम को पार्क से लौटते हुए मैंने देखा एक मम्मी अपनी बच्चे को बहुत आवाजें लगा रही हैं आ जाओ दूध ठंडा हो रहा है होमवर्क भी करना है और बच्चे मम्मी बस दस मिनट और बस दस मिनट बाद आता हूं… कह कर खेलने लगा और मम्मी गुस्से होती हुई वापिस मुड गई.. ज्यादातर बच्चे ऐसे ही होते हैं सारा दिन खेलना चाहते हैं और पढाई के नाम से ही दूर भागते हैं…

How to Develop Your Child’s Brain – बच्चों के दिमाग को तेज कैसे करें

तो क्या करें कैसे बच्चों में interest create  करें कि बच्चे पढाई में मन लगाएं.. मेरे विचार से हमें भी खेलना चाहिए… और खेल होने चाहिए brain game  !! ऐसे गेम जिसे खेल कर बच्चों की memory बढे क्योकि मैमरी बढेगी तो बच्चे का मन खुद ब खुद पढने को भी करेगा.. तो चलिए आज मैं आपको कुछ मजेदार ब्रेन गेम बताती हूं जिसे आप और आपके बच्चे मिलकर खेल सकते हैं….

पहला गेम…

एक टेबल पर बहुत सारी चीजे रख दीजिए.. 15 से ज्यादा पेपर , पैंसिल, कागज, कंघा, फाईल कवर. एल्फाबेट,पिन आदि एक मिनट के लिए बच्चे को दिखाईए और फिर उसे छिपा लीजिए या उसे अखबार से कवर कर दीजिए अब बच्चे को पेपर पैन दीजिए और एक मिनट में जितनी ज्यादा हो सके चीजों के नाम लिखने हैं..

स्टाप वॉंच से मोनिटर कर सकते हैं.. एक चीज और भी पूछ सकते हैं कि पहले वो सारा सामान दिखा दिया फिर एक को हटा दिया ये बताना है कि इसमे क्या मिसिंग है..

एक मैमरी गेम ऐसे भी खेल सकते हैं

कि बच्चे को कोई फोटो दिखाईए जिसमे बहुत कुछ हो… एक मिनट बाद उसे हटा लीजिए अब बच्चे को कुछ प्रश्न पूछने हैं उस फोटो के बारे में… जिसने ज्यादा सही जवाब दिया… वो जीत जाएगा…

एक गेम और भी खेल सकते हैं

ये सब मैं बिल्कुल आसान वाले बता रही हूं आप दस सिक्के लीजिए और सिक्के एक लाईन में रख दीजिए जैसा कि एक सिके पर हैड ऊपर एक पर टेल ऊपर फिर तीन हैड फिर दो टेल.. ऐसे कुछ भी करके… फिर बच्चे को दिखाईए और फिर उसके उपर अखबार रख दीजिए. अब आप बच्चे को बोलिए कि जैसा जिस सिक्वेंस में रखा है वैसा ही लिखो.. फिर देखिए.. वो कितना सही लिखते हैं

या फिर कुछ पचास के सिक्के कुछ पांच रुपये के सिक्के कोई दस पैसा ऐसा रख दीजिए और एक मिनट तक बच्चे को देखने दीजिए और फिर उस को कवर कर दीजिए फिर पूछिए कि एक मिनट में लिखो की क्या और किस सिक्वेंस मे हैं..

एक गेम और भी है कि स्टोरी बतानी है

शुरु करते हैं एक लडकी थी… दूसरा उसे आगे बढाएगा कि एक लडकी थी.. उसका नाम मीना था.. अब दूसरा फिर उसी को बोलेगा और एक लाईन अपनी भी जोडेगा कि एक एक लडकी थी उसका नाम मीना था वो 5 क्लास में पढती थी…

ऐसे ऐसे कहानी आगे बढाएगें और जहां लाईन भूले वहीं आऊट.. गेम तो और भी बहुत है… वो आगे वाली वीडियो में बताऊंगी.. वैसे इन्हें खेलने का फायदा यही होता है कि हमारी मैमरी शार्प होती है ब्रेन शार्प होता है

बच्चों के दिमाग को तेज कैसे करें

January 17, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

How to become a Good Husband – एक अच्छे पति कैसे बने – Qualities of a Good Husband – Monica Gupta

How to become a Good Husband

How to become a Good Husband – एक अच्छे पति कैसे बने – Qualities of a Good Husband – Monica Gupta – Husband Wife Relationship Tips In Hindi – Monica Gupta Videos – अच्छे पति कैसे बनें… कुछ समय पहले मैंनें एक वीडियो बनाई थी कि अच्छी पत्नी कैसे बनें तब बहुत सारी लेडीज के मैसेज और कमेंटस आए कि कि बात सिर्फ हमारे अच्छे बनने से खत्म नही हो जाती आपको ये भी बताना चाहिए कि अच्छे पति कैसे बनें क्योकि घर दोनो से चलता है अकेली महिला से नही… पति के बारे में भी बताईए कि क्या क्या खास बातें होनी चाहिए.. लाईफ पार्टनर कैसा होना चाहिए तो चलिए आज यही बात करती हूं कि कैसे बने अच्छा पति ? क्या क्या बातें खास होनी चाहिए….

How to become a Good Husband – एक अच्छे पति कैसे बने – Qualities of a Good Husband –

1.  सबसे पहले केयरिंग नेचर हो…

भावनाओं को समझने वाला होना चाहिए.. ख्याल रखने वाले हों… बातें बहुत छोटी छोटी होती हैं अगर वायदा किया है कि आफिस से जल्दी आ कर धूमने चलेगें तो आना चाहिए और किसी वजह से नही आ पा रहे तो फोन करके बता देना चाहिए… अगर पत्नी की तबियत ठीक नही तो उन्हें आराम करने दीजिए और थोडा बहुत काम खुद कीजिए..

भावनाओं को भी समझना चाहिए. अकसर पत्नी अंडा या नॉन वेज नही खाती और पति खाते हैं तो सामने कम खाना चाहिए…

कई बार ये भी होता है कि पत्नी को पति का नशा करना अच्छा नही लगता तो सम्मान करना चाहिए और छोड देनी चाहिए या कम कर देनी चाहिए.. ऐसे प्यार बढता ही है कम नही होता..

2.  हमेशा विश्वास करना चाहिए..

Trust her completely.  हमेशा ईमानदार रहते हुए विश्वास करना चाहिए ये रिश्ता ही ऐसा होता है कि एक बार कहीं कुछ शक हो गया तो कई बार एक अच्छा खासा रिश्ता ही खत्म हो जाता है इसलिए हमेशा पत्नी के प्रति ईमानदार रहे और अगर मन में कोई बात है भी उसे आपसी बात करके मिलबैठ कर सुलझा लेनी चाहिए न झूठ बोले और न धोखा दें… चालाकी की इस रिश्ते में कोई जगह नही होनी चाहिए. कुछ की आदत होती है तांक झांक करने की.. ‘ताक झाक नही करनी चाहिए.. ये भी बुरा लगता है..

3. cheerful  रहें न गुस्से से बोले और न ही हाथ उठाएं

अक्सर देखने में आता है हसबैंड लोग बहुत जल्दी इरीटेट हो जाते हैं इसे अपनी ईगो या जो भी कहिए.. उसके चलते कई बार पत्नी पर हाथ भी उठा देते हैं तो ये तो बिकुल भी नही करना चाहिए… हमेशा खुशमिजाज रहना चाहिए और गुस्सा अगर आता भी है तो उसे बहुत बढावा नही देना चाहिए..

4. घर के छोटे छोटे कामों में मदद करवानी चाहिए

बहुत जरुरी है कि घर के छोटे मोटे कामों में कभी कभार मदद करवाएं… और अगर मदद नही करवाना चाहते तो इतना तो कर सकते हैं कि जो खुद का सामान है जैसाकि तौलिया ही उसे धूप में डाल दें इस्तेमाल करने के बाद.. या कमरे में तीन चार चाय के गिलास इकठ्ठे हो गए पत्नी को और भी काम हैं तो उसे उठा दें… रसोई में रख दें.. ये छोटी छोटी मदद ही बहुत हैल्पफुल्ल हो जाती है.. कहीं जाना है पैकिंग करनी है तो मदद करवानी चाहिए ये नही कि बस पलंग पर बैठ कर आर्डर ही देते रहें कि इसे रख दो इसे हटा दो…

5. समय दीजिए

घर पर सबसे बडा इशू ही यही रहता हि समय नही देते.. अगर दुकान है तो सारा दिन दुकान पर रहते हैं और अगर सरकारी दफ्तर में काम करते हैं तो आने जाने वाले इतने होते हैं तो भी समय नही निकालते और अगर समय है भी तो मोबाईल या लैपटाप लेकर बैठ जाएं ये जरा भी सही नही है.. समय जरुर देना चाहिए और बैठ कर अगर उनके कोई ईशू हैं कुछ बात करना चह रही हैं तो जरुर सुननी चाहिए और उसका हल भी निकालना चाहिए काम काम काम .. नही होना चाहिए हमेशा. बहुत सारी बातें होती हैं अगर मिल बैठ कर सुलझा ली जाएं तो बात बढती ही नही है…

और समय समय पर प्यार जताते रहना चाहिए चाहे कहीं बाहर जाकर या उपहार देकर या कोई सरप्राईज पार्टी देकर..

  1. तुलना नही करनी चाहिए.. बहुत सारे पति दूसरी महिलाओं से बहुत तुलना करते हैं.. हमारे ओफिस में नई सेक्रेटरी आई है कितनी पतली दुबली है और तुम देखो कितनी बैडोल.. या मिसेज शर्मा कितनी अच्छी चाय बनाती है तीन दिन तक स्वाद रहता है उनकी चाय का .. तुम वैसी नही बनाती.. ये नही…
  2. Compliment देते रहें

गलती criticize निकालना या बुराई करने की बजाय समय समय पर Compliment देते रहने चाहिए.. आज बहुत अच्छी लग रही हो. साडी का रंग बहुत अच्छा लग रहा है या आज खाना बहुत टेस्टी बनाया था मैं तो ओवर ईटिंग ही कर गया… या आज मेहमान आए थे बहुत अच्छी तरह से तुमने उनकी खातिर की… बहुत खुश होकर गए हैं वो…

8. दिखावा नही करना चाहिए…

जो हैं वही बने रहना चाहिए… कई बार क्या होता है कि अपने आफिस में या दोस्तों के सामने ये कह्ते हैं कि हम तो जोरु के गुलाम है जो उनका हुक्म वही मानना पडता है और घर पर उसके बिल्कुल उल्टा.. तो दिखावा नही.. दिल से आदर करना चाहिए. पत्नी की बात दिल से सुननी है..

8.पत्नी के रिश्तेदारों को अपना रिश्तेदार समझना है.. तेरा मेरा नही होना चाहिए कि मेरे मम्मी है या ये तेरे मम्मी है अब दोनो एक ही परिवार है इसलिए भेदभाव नही रखना चाहिए

  1. मेच्योर होना चाहिए..

घर पर छोटे मोटे झगडे तो हो ही जाते हैं इसका मतलब ये नही कि पकड कर बैठ जाए.. पिछ्ले साल क्या हुआ था. तुम्हारे पापा ने ये कहा था.. ताऊ जी ने शादी पर कम शगुन दिया था.. ऐसे नही… पत्नी से भी गलती हुई है तो भी बीती बातें भूल कर आगे बढिए

देखिए अगर हम ये सोचे कि मेरी पत्नी परफेक्ट हो या मैं परफेक्ट बनू .. तो कोई न कोई कही न कही कमी तो रह ही जाती है .. तो जो गलती हो गई या जो अनबन हो गई उसे छोड उससे सबक सीख कर आगे बढना चाहिए समझदारी इसी में है कि मेच्योर बनना चाहिए..

Move ahead  आगे बढ जाना चाहिए और अपने परिवार और बेहतर और खुशहाल बनाने में लगे रहना चाहिए

How to become a Good Husband – एक अच्छे पति कैसे बने – Qualities of a Good Husband –

January 16, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

घर का काम खुद करना – अपना काम स्वयं करना चाहिए

I am Proud to be an Indian

घर का काम खुद करना – अपना काम स्वयं करना चाहिए –  कोई शर्म की बात नही – बात कल की है.. मैं नेट पर कुछ सर्च कर रही थी तभी मेरा ध्यान गया एक बहुत ही काम की बात पर कि कांच के गिलास को अगर  सफेद वाले सिरके  vinegar और विम से धोएगें तो वो चमक जाएगें और ऐसे ही अगर  सर्विंग ट्रे  भी जो अक्सर साईड से गंदी हो जाती हैं उन्हें साफ करेगें तो वो भी सारी चमक जाएगीं.. ऐसा लगेगा मानो नई है…

घर का काम खुद करना – अपना काम स्वयं करना चाहिए –

इसे मैंनें खुद आजमा कर देखा और जब शानदार परिणाम मिला तो सोचा कि इसे अपनी सोशल नेट वर्किंग साईट पर भी शेयर कर दूं… जब मैंनें शेयर किया तो बहुत प्रतिक्रियाएं आई पर एक प्रतिक्रिया ये भी थी कि क्या आप घर का काम करती हैं आपकी बातों से तो ऐसा लगता है कि आप घर की सफाई बर्तन आदि करती हैं…

घर का काम खुद करना

तब मेरा तुरंत ये जवाब था कि बिल्कुल !! मैं अपने घर का सारा काम करती हूं और काम करने में शर्म कैसी…

अपना काम स्वयं करने के लाभ….

जबकि और ज्यादा अच्छा और साफ सुथरा हो जाता है और वो भी तनाव रहित होकर.. क्योकिं काम वाली बाई होने से बेशक, आराम भी होता है पर टेंशन भी बहुत होती है.. न आने का समय न छुट्टी का पता, दो दिन नही आएगी और कोई फोन भी नही आएगा और तीसरे दिन जब हम काम निबटा लेंगें सारा का सारा तब अचानक वो आ जाती है…

लगे हाथ कसरत भी हो ही जाती है.. और हमारे पास समय भी बहुत होता है क्योकि अब हम समय अपने हिसाब से मैंनेज करते हैं

बात सिर्फ इतनी ही कहना चाह रही हूं कि अगर हम खुद घर का काम करें तो कोई दिक्कत नही होनी चाहिए और न ही शर्म.. और वैसे भी हम विदेशी कल्चर को फ़ोलो करना चाहते हैं तो विदेशों में तो  मिलती ही नही हैं काम वाली बाईया… सभी खुद ही करते हैं… यकीन नही तो पूछ लीजिए किसी विदेशी मित्र से…

तो घर का काम खुद करना कोई शर्म की बात नही!!

 घर का काम खुद करना – अपना काम स्वयं करना चाहिए

January 16, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Thumb Sucking Habit – अंगूठा चूसने की आदत – Help Your Child Stop Thumb Sucking – Monica Gupta

Thumb Sucking Habit

Thumb Sucking Habit – अंगूठा चूसने की आदत – Help Your Child Stop Thumb Sucking – Monica Gupta – बच्चे का अंगूठा चूसना कैसे छुडवायें  – Stop Children Thumb Sucking Habit – बच्चे को अंगूठा चूसने की आदत कैसे छुड़ाए –  कल शाम को जब मैं एक दुकान पर कुछ सामान ले रही थी तभी ध्यान गया एक lady पर जोकि अपने बच्चे को डांट रही थी कि जरा भी अक्ल नही है तुझमे..

Thumb Sucking Habit – अंगूठा चूसने की आदत – Help Your Child Stop Thumb Sucking

मुझे लगा दुकान से कुछ सामान छेड रहा होगा… पर जब मैंनें देखा तो बात कुछ और थी.. मैंने देखा कि बच्चा जोकि शायद तीन चार साल का होगा वो बार बार मुंह में अंगूठा डाल रहा था और वो lady पक्का ही उसकी मम्मी ही होगी बहुत बुरी तरह उसे गुस्सा भी कर रही थी और देखते ही देखते चांटा भी लगा दिया.. और दुकान दार से अपने बच्चे के बारे मे बोलने भी लगी कि दुखी कर दिया आदत छोड ही नही रहा… बच्चा जब रोने लगा तो उसे गोदी मे लिया और दुकान के बाहर बडबडाती हुई चली गई…

उसके जाने के बाद मैं सोचने लगी कि क्या उसने सही किया… एक मम्मी की भूमिका क्या उसने सही निभाई !! आप ही बताईए कि अगर बच्चा अंग़ूठा चूसता है तो क्या ये सही तरीका है मना करने का..

अगर बच्चा अंगूठा चूसना समय से छोड दे तो सही है नही तो अंगूठा चूसने के बहुत side effects  होते हैं…

जैसा कि बच्चे के दांत बाहर आ जाते हैं  , चबाने में दिक्कत होने लग जाती है चेहरा देखने में सही नही लगता बोलने में भी दिक्कत आनी शुरु हो जाती है कुछ शब्द सही नही बोल पाते germs लग जाते है बच्चे मजाक बनाते हैं

आत्मविश्वास नही रहता

ये सब बातें हैं पर मारना भी सही नही है बच्चे को प्यार से समझाना चाहिए

अब बात आती है कि कैसे  ??

सबसे पहले तो खुद पैशेंस रखनी होगी..  

कारण जानना ऐसे मार पिटाई हल नही है… दो से तीन साल तक के बच्चे छोड देते हैं पर अगर न छोडे तो सबसे पहले कारण जानने की कोशिश कीजिए कि कब लेता है अंगूठा और किसलिए लेता है..

बोर हो रहा है,  थका हुआ है या टेंशन है या अपना ध्यान आकर्षित करना चाह रहा है. इनका हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए…

फिर जरुरी है कि बच्चे को समझाईए.. बात करिए..

बात करके इससे होने वाले नुकसान बताईए. आजकल तो videos का जमाना है उसे दिखा कर कि कितनी तरह की दिक्कत आ सकती है बोलने में हमारा चेहरा हमारी smile  खराब हो सकती है.. इसलिए अंगूठा छोड देना चाहिए.

कहानी  सुना कर बच्चे को motivate कीजिए कि वो इसे छोड दे..

Fav Time क्या है चूसने का

सोते समय है या टीवी देखते समय है. अगर टीवी देखते हुए अंगूठा लिया तो बोल दीजिए 5 मिनट टीवी बंद कर दिया जाएगा..सोते समय है तो हम दो तीन बातें कर सकते हैं Gloves  पहना दीजिए या  Thumb Gurad, Fingure Gurad ताकि उंगलियां कवर रहें

बेंडडेड लगा दीजिए , कुछ पेरेंटस नेल पालिश लगा देते हैं ताकि टेस्ट गंदा हो जाए  कई लोग नींबू, कडवा या सिरका भी लगा देते हैं जब अंगूठा मुंह में जाया तो taste खराब हो जाए..

कुछ parents सोते समय  ऐसे कवर कर देते हैं कि बाजू न मुडे और जब मुडेगा नही तो अंगूंठा मुंह मे जाएगा नही.. ऐसे जो भी सूट करें

बच्चे को कोई टॉफी या दे सकते हैं Distract कर सकते हैं,

उसके हाथों को बिजी रख सकते हैं या video games में या फिर colours करके ताकि हाथ की उंगलियों को मौका ही न मिले…

बच्चे को इससे होने वाली बीमारी बता सकते हैं कि बार बार मुंह में उंगली डालेगें तो कीटाणु लग जाएगें. बीमार भी हो सकते हैं पेट खराब हो सकता है

अंगूठा मुंह में लेने से हमारे बोलने पर भी असर पडता है कुछ शब्द हम नही बोल पाएगें और फिर हमारे दोस्त हमारा मजाक भी बनाएगें

प्रशंसा करनी चाहिए

अगर बच्चे ने अंगूठा नही लिया हम कुछ ईनाम भी रख सकते हैं कि अगर आपने आज सारा दिन नही लिया तो हम हम वहां चलेगें या अगर चार दिन नही लिया तो जो आप कहोगे वही करेंगें.. ऐसे ऐसे दिन आगे करते जाएं और देखते ही देखते आदत छूट जाएगी…

हमें पॉजीटिव Positive रहना है

ये सोचना है कि एक दिन में नही चली जाएगी आदत समय लगेगा और हमें धैर्य रखना है और हिम्मत नही हारनी

Thumb Sucking Habit – अंगूठा चूसने की आदत – Help Your Child Stop Thumb Sucking – Monica Gupta

January 12, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Parenting Goals – क्यों जरूरी हैं Parenting Goals – Parenting Tips in Hindi – Monica Gupta

Parenting Goals

Parenting Goals – क्यों जरूरी हैं Parenting Goals – Parenting Tips in Hindi – Monica Gupta –  #MonicaGuptaVideos – बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए – बच्चों की परवरिश कैसे करें – पेरेंटिंग टिप्स बच्चों की परवरिश – परवरिश के तरीके – माता पिता की भूमिका – कल एक जानकार से मिली तो उन्होनें बताया कि नए साल पर उन्होनें Parenting Goal बनाया है जिसमे उनका लक्ष्य यही होगा कि हर रोज शाम को बच्चे के साथ एक घंटा बिताएगें और स्कूल की और दूसरी सारी बातें करेंगें..

Parenting Goals – क्यों जरूरी हैं Parenting Goals – Parenting Tips in Hindi –

वाकई मुझे अच्छा लगा कि चलिए इसी बहाने ही सही कम से कम पेरेंटस अपने बच्चों के साथ समय तो बिताएगें…

वैसे अगर Parenting Goals  की बात करुं तो कुछ पेरेट्स जब नई क्लास नया सेशन शुरु होता है तब गोल बना लेते हैं कि पूरे साल वो कुछ बातों पर फ़ोलोअप करेंगें….

वैसे अलग अलग Goals होते हैं कुछ एक साल का बनाते हैं तो कुछ 6 महीने का तो कुछ सिर्फ 2 महीने का जब फाईनल पेपर शुरु होने वाले होते हैं

Parenting Goals बहुत जरुरी भी होता है… किसलिए जरुरी होता है

सबसे पहली बात तो बच्चे को फोकस मिलता है..

अगर पेरेंटस ये गोल बनाते हैं कि हर रोज बच्चे का क्लास वर्क और होम वर्क चैक करेंगें  तो बच्चा भी सोचेगा कि उसे हर रोज क्लास में भी सही काम करना है और होमवर्क भी सही करना है जब मम्मी पापा मोनिटर करेंगें तो फर्क तो पडेगा ही… बच्चे को पता है पापा ने ये कॉपी देखनी है या ये होमवर्क पूछना है तो वो फोकस भी रखेगा

नियमित चैक रखेंगें तो पता लगता रहेगा कि बच्चे प्रोगरेस कैसी चल रही है.. कम है या सही है..

यानि जाने अनजाने एक उद्देश्य मिलता है..

मान लीजिए एक बच्चा रोज स्कूल जा रहा है बस.. जा रहा है वही उसके पेरेंटस का ये कहना है आपको क्लास में टॉप थ्री में आना है तो बच्चे को एक लक्ष्य मिल गया.. और वो उस दिशा में पढाई भी करेगा नही तो बस पास होना है और वो हो ही जाएगा.. पर अगर उसमें पोटेंशल है तो उसे आगे आना भी चाहिए…

बात पढाई की ही नही खेल या अन्य क्षेत्र में भी हो सकती है  कुछ पेरेंटस खेल के प्रति अपना गोल बना लेते हैं मैदान में हर रोज लेकर जाना एक घंटा उसके साथ रहना भी बहुत बडी बात होती है उससे बच्चे के सपने को बल मिलता है कि जब पेरेंटस इतना एफर्ट कर रहे हैं तो उसे भी कुछ करके दिखाना है.

Responsibility की भावना पैदा होती है

जब पेरेंटस बच्चों की पढाई या दूसरे एक्टिविटी में ध्यान देते हैं तो बच्चे भी पूरा ध्यान देते हैं Responsible बनते हैं और वही आदत उन्हें सफलता की ओर ले जाती है…

फिर बात आती है कि बच्चे मोटिवेट होते हैं.. और अगर सफल हो जाते हैं तो उनका मनोबल और ज्यादा बढ जाता है और वो और अच्छा करके दिखाने के प्रयास मे रहते हैं.

बात सिर्फ पढाई की ही नही बल्कि इससे आपसी परिवार के रिश्ते भी मजबूत बनते हैं… बोंडिंग हो जाती है और घर का एक बहुत अच्छा माहौल बन जाता है.. quality time with the family के साथ बिताते हैं .. परिवार में एकता बढती है

पेरेंटिंग गोल्स अलग अलग होते हैं कोई ये कहते हैं कि एक घंटा समय बिताएगें

कोई ये कहते हैं कि वो हर शाम बच्चों को पार्क लेकर जाएगें और मिलकर खेलेगें

कोई ये कहते हैं कि हर पेरेंट डीचर मीटिग में जाएगें और बच्चे की रिपोर्ट लेंगें

कोई ये कहते हैं कि डिनर बच्चों के साथ ही मिलकर करेंगें…

बहुत पेरेंटस ऐसे होते हैं जो कह तो देते हैं और चार पांच दिन उस पर कायम भी रहते है पर फिर भूलते जाते हैं और गोल गोल ही बन जाते हैं जबकि ये बहुत जरुरी है…

अगर हम गोल्स बनाते हैं तो इस पर स्टिक भी रहना बहुत जरुरी है…. इसलिए अगर हम बच्चे का अच्छा भविष्य चाह्ते हैं कि बच्चे की परवरिश अच्छी हो, बच्चा सफल हो, स्किल सीखे तो अपने गोल जरुर बना लेने चाहिए..

क्या आपने बनाएं हैं ??

Parenting Goals – क्यों जरूरी हैं Parenting Goals – Parenting Tips in Hindi

January 11, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Deal with Negative People – Hindi – How to Stay Positive with Negative People – Monica Gupta

How to Deal with Negative People

How to Deal with Negative People – Hindi – How to Stay Positive with Negative People – Monica Gupta – नेगेटिव लोगो से कैसे डील करें… #MonicaGuptaVideos – How to Deal with Negative People in Hindi – नकरात्मक लोगों के साथ सकरात्मक कैसे रहें – बहुत बार ऐसे होता है कि हमारा आमान सामना हो जाता है तो कैसे दूरी बना कर रखें.

आईए जाने कुछ पॉजिटिव बातें नेगेटिव लोगो से डील करने की

How to Deal with Negative People – Hindi – How to Stay Positive with Negative People

सबसे पहली तो हमे अपनी लिमिट सेट कर लेनी चाहिए…

कि हमें किस हद तक रहना है जरुरी नही है कि अगर हमारा सामना नेगेटिव से हो गया तो हमने उसके पास बैठना भी है और बहस भी करनी है… बिल्कुल नही.. कई बार ऐसा हो जाता है कि सामने दिख गए तो बस ज्यादा बात करने की कोई जरुरत नही… चुप रहिए… अगर वहां दो तीन लोग है तो कुछ देर वहां रह सकते हैं पर बातों में involve होने की जरुरत नही…

कई बार होता है कि हमें दूर भी नही जा सकते..

मान लीजिए कोई घर ही आए.. तो हल्की फुल्की बातें ही करें मौसम की या किसी फिल्म की या टीवी सीरियल की…   क्योंकि जहां  कोई ऐसा विषय छिड गया तो गडबड हो जाएगी.. arguments हो जाएगें

नेगेटिव का भी कई बार कोई न कोई अच्छा पोईंट होता है…

अगर हम ये जानते हैं कि बेशक है तो ये नेगेटिव पर इसका ये तो अच्छा पोईट है ये तो अच्छी बात है तो उसे जरुर कहिए.. मान लीजिए आफिस में बॉस है बहुत नेगेटिव पर अच्छी बात ये है कि बहुत organized हैं तो उनकी प्रशंसा कीजिए कि ये बात तो आपसे सीखनी पडेगी या

फिर मान लीजिए किसी की सासू मां है बहुत नेगेटिव पर खीर बहुत अच्छी बनाती है तो उन्हें भी कहिए कि आपकी ये बहुत खास बात है आपने .. हो सकता है हम उन्हें कुछ बदल दें..

एक पहल एक प्रयास इस और भी करना चाहिए कि हम उनकी नेगेटविटी का कारण जान कर उन्हें कुछ पोजीटिविटी की राह पर लाएं

समय आपका है.. जिसकी बाते irritate करें उससे किसलिए उलझना

समय किसका है.. आपका और अगर आपको लगता है कि किसी ऐसे से मिलकर आपका समय वयर्थ ही होगा क्योकि आपने उसे समझाया भी बहुत बार है पर वो नही समझते तो बे वजह उनसे उलझना नही चाहिए… अगर आप चाहें तो इसे वेस्ट कर सकते हैं या इसे ठीक कर सकते हैं.. तो इससे पहले कोई मुद्दा बन जाए ईशू बन जाए इससे निकल जाना चाहिए..

कई बार सामने मिल गए तो बहाना बना सकते हैं कि मुझे जरुरी जाना है .. काम है.. मीटिंग है या किसी से मिलना है.

दो चार पॉजीटिव लोगो का सर्कल जरुर रखना चाहिए..

हमारी कोशिश तो रहती है कि नेगेटिव लोगो से दूर रहे पर कभी मिल गए या हम उन्हें समझ अरहे हैं और उन्होने हमें ही अपनी बातों में मोल्ड कर लिया तो ?? हम उनसे कहीं न कहीं प्रभावित भी हो गए उन्होनें हमें मोटिवेट भी कर दिया कि तुम ये नही कर सकते तो ऐसे समय में बचने के लिए कुछ पॉजिटिव दोस्त होने ही चाहिए… मान लीजिए एक लडकी है वो बोल रही है कि मैं भी वीडियो बनाऊंगी यूटयूब पर पर नेगेटिव सोच रखने वाले बोलते हैं अरे नही.. बहुत कोम्पीटिशन है तू कैसे करेगी… कौन देखेगा… और वो डिमोरोलाईज हो जाती है .. उसके लिए दो चार ऐसे मित्र हो जो बोले कि अरे नही तू बना.. तू कर सकती है.. चिंता मत कर.. हम साथ हैं तेरे..

हमें mature बनना है…

मान लीजिए मैं किसी से मिलकर आई और वो बिल्कुल नेगेटिव सोच के हैं और मैं अपनी सहेलियों से उसका मजाक बना रही हूं .. अरे वो इतनी बोर है.. पता है वो क्या कह रही थी और हंसना, मजाक बनाना मैं उस पर ब्लेम तो कर रही हूं पर खुद भी कही न कहीं नेगेटिव हो रही हूं

Ignore कर देना चाहिए… Reduce contact ज्यादा बात ही नही करनी चाहिए.. हां हूं अच्छा .. हा ओके .. बस इतना ही और वहां से निकल जाना चाहिए उसकी बुराई करके…

How to Deal with Negative People –

January 10, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

How to be a Good Mother – एक अच्छी माँ कैसे बनें – Tips to become a Good Mother – Monica Gupta

How to be a Good Mother

How to be a Good Mother – एक अच्छी माँ कैसे बनें – Tips to become a Good Mother – Monica Gupta – एक अच्छी माँ कैसे बनें – Tips to become a Good Mother  – How to become an Ideal Mother – कैसे बनें एक अच्छी मम्मी – कल मैं यू टयूब पर आए आप सभी के आए कमेंटस पढ ही रही थी तभी एक कमेंट पर नजर गई… एक mom  ने उन्होनें लिखा हुआ था कि मेरे दो बच्चे हैं एक अभी 4 महीने का है और दूसरा दो साल का… बहुत तंग हो जाती हूं. बडा बेटा तंग करता है वही जब छोटा बेटा उठ जाता है वो तंग करता है… समझ नही आता कि क्या करुं.. सिंगल फैमली है और कोई हैल्प नही… पति भी जब थके हारे आते हैं आफिस से और बच्चे तंग करते मिलते हैं तो परेशान हो जाते हैं क्या करुं बहुत परेशान हूं…

How to be a Good Mother – एक अच्छी माँ कैसे बनें – Tips to become a Good Mother

क्या करना चाहिए.. देखिए मैं आपको एक बात बताऊं कि जिस situation से आप इस समय निकल रही है ये बहुत लेडीज face कर रही हैं.. ये तो होता है बच्चा एक भी हो और छोटा हो तो बहुत ऐसे situation देखने में आती है… जरुरत है कि इसे tension नही बनना है…

 

तो क्या क्या करना है…  सबसे पहले तो लम्बी सांस लीजिए और खुद से बोलिए कि मैं कर सकती हूं… मेरे बस का नही है कि बजाय मेरे बस का क्यों नही है… मैं ये सब प्यार से हैंडल कर सकती हूं..

खुद को पॉजिटिव बनाना है  – और ज्यादा खुद को पॉजिटिव बनाना है तो अपने बच्चे को गोदी में लीजिए और उसे देखिए आपका बच्चा है आपने इसे जन्म दिया है आप मां हैं इस मासूम की मां… आपको तो भगवान का धन्यवाद देना चाहिए कि आपको मां का दर्जा मिला है… मां … तो अब भी आप इसे रोने देंगी या उसे किसी बात पर तंग होने देंगीं…

स्माईल लाईए और बच्चों की देख रेख में जुट जाईए..  अगर हैल्प है तो बहुत अच्छी बात है और अगर नही है तो भी कोई बात नही… जब बच्चा सो रहा हो या जाग भी रहा हो तो अपने पास रसोई में या किसी सेफ जगह लिटा कर काम निबटा लीजिए…

अब बात आती है बच्चे कि छोटा तो बहुत छोटा है पर जो अब बडा है यानि 2 साल का

बच्चे की भावनाएं समझिए… अपने बडे बच्चे की फीलिंग भी समझिए .. जो आप उसे हमेशा अटेंशन देते थे अब वो बट गया है उसे भी ठीक होने में समय लगेगा..

Supportive बनिए…  ज्यादा समय अपने बडे बेटे के साथ बिताईए… और Communicate कीजिए ताकि उसे लगे की मम्मी अभी भी उसे प्यार करती है

छोटे छोटे कामो के लिए उसकी डयूटी लगाईए कि आप ख्याल रखना… इसके पास बैठो… आप किचन में हो तो बोलिए जब तक मैं न आऊं ध्यान रखना इससे उसमे बडे की फीलिंग आएगी…

अपने गुस्से पर कंट्रोल रखना है… इस बात का बहुत जरुरी ख्याल रखना है… आपकी नींद पूरी नही हो रही क्योकि छोटा बच्चा रात भर सोने नही देता तो इसमें आपके बडे बेटे का तो कोई रोल नही है उसे गुस्सा किसलिए करना है…

और अगर कभी गुस्सा आ भी जाए आपको तो सॉरी बोल दीजिए बच्चे को उसे बोलिए कि मम्मी के नींद नही पूरी हुई थी इसलिए गुस्सा  आ गया… आप बताओ क्या सजा है मेरी…

और बच्चे को कुछ गिफ्ट भी दीजिए अगर वो आपकी छोटी छोटी मदद करवाता है तो उसे लिए कुछ न कुछ जरुर दीजिए.. उसके साथ कोई इंडोर गेम खेलिए… कार्टून देखिए…

ये समय भी बीत जाएगा… ये समय हमेशा नही रहना… आज ये छोटा है कल चलना सीखेगा… फिर भागेगा.. फिर स्कूल जाएगा फिर कालिज .. और फिर नौकरी पर चला जाएगा.. बस यही यादें मीठी यादें ही रह जाएगी तो इसे सहेज कर रखें…

डायरी बनाईए या फोटो या वीडियो एलबम बनाईए और इस समय को एंज्वाय कीजिए

रोल मॉडल बनिए .. और आप बन सकती हैं !!

How to be a Good Mother – एक अच्छी माँ कैसे बनें – Tips to become a Good Mother – Monica Gupta

January 9, 2018 By Monica Gupta 1 Comment

Avoid Negative People in Life – सकारात्मक कैसे बनें – नकारात्मक लोगों से बचें – Monica Gupta

Avoid Negative People in Life

Avoid Negative People in Life – सकारात्मक कैसे बनें – नकारात्मक लोगों से बचें – Monica Gupta – #MonicaGuptaVideos -Why to avoid negative people –

कई बार बात कहने के लिए बहुत भूमिका बांधनी पडती है और कई बार सीधे ही … कोई भूमिका वूमिका नही स्ट्रेट फार्वर्ड कि कीप डिटटेंस – नेगेटिव लोगो से दूरी बना कर रखनी चाहिए .. उनको avoid  करना चाहिए… उन्हें दूर से ही नमस्कार करें और आगे बढें… क्योकि वो हमारी सोच , हमारा  mindset  को ही बदल कर रख देते हैं…

Avoid Negative People in Life – सकारात्मक कैसे बनें – नकारात्मक लोगों से बचें –

असल में, एक मेरी जानकार की बेटी थी उसका सपना था कि वो नौकरी करे .. और जबरदस्त सपना था पर कुछ समय बाद पता चला कि उसने कुछ नही किया और अब उसकी घर ही बैठी है .. असल में, कुछ नेगेटिव लोगो की उसे ऐसी संगत मिली जिन्होनें उसे जता दिया कि तेरे तो बस का ही नही… और वो आज बस… कोई सपना नही… कोई कुछ नही… अगर उसे अच्छे लोग मिले होते उसे समझते तो यकीनन आज उसकी अलग ही पहचान होती

तो बहुत सारी बाते ऐसी हैं जिनकी वजह से हमें नेगेटिव लोगो को दूर से ही नमस्कार कर देना चाहिए..

हमारी प्रोग्रामिंग ही खराब कर देते हैं…

हमारी सोच ही बदल देते हैं डिमोरोलाईज कर देते हैं…  ये नही हो सकता तुम नही कर सकते … जैसे कि मेरी जानकार बनना चाहती थी पुलिस आफिसर और अब वो क्या बन गई… सिर्फ ये ही नही कि वो कुछ हासिल नही कर पाई अब तो उसकी सोच भी वैसी ही हो गई उसमे किसी तरह का कोई उत्साह नही कोई जोश नही  बेकार है ये दुनिया..

हमें अपनी क्षमता,  काबलियत पर ही शक होने लगता है…

नेगेटिव लोग अपनी बातों में इतना उलझा लेते हैं कि हमें अपनी क्षमता पर ही विश्वास नही रहता… जैसे मान लीजिए एक महिला है वो कुछ लिखती है और मैगजीन में भेजती है और वो वापिस आ जाती है और वो दुबारा लिखने बैठ जाती है कि कोई बात नही दुबारा ट्राई करती हूं तभी उसका एक दोस्त आ जाता है वो बताती है कि एक रचना भेजी थी वो वापिस आ गई… तो मित्र का यही कहना होगा कि अरे कहा.. तेरा तो छप ही नही सकता वहां तो सब सिफारिशी है… और ऐसी बात सुनकर उस महिला को भी शक होगा ही कि हां भी सही कह रहा है कि क्योकि लिखा तो मैंनें अच्छा था… वाकई में,  वहां तो सब सिफारिशी ही हैं… और उसका लेखन बंद, भेजना बंद..

हमारी सेहत खराब हो जाती है…

अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए भी हमें नेगेटिव लोगो से दूर रहना चाहिए.. नेगेटिव लोग कभी खुश नही रहते.. हमेशा दुखी परेशान और बस रोना ही रोते रहते हैं… ये नही हुआ.. वो नही हुआ.. ये ऐसे हुआ ये वैसे हुआ… और फिर हमारी सोच भी वैसी बनती जाती है… हमेशा तनाव Depression में रहेंगे तो तबियत कैसे सही रहेगी…

हमेशा fatigue थकावट रहती है और कई बार वजन भी बढना शुरु हो जाता है

जब किसी काम को करने का जोश ही नही होगा तो क्या होगा .. सारा समय थकावट ही तो रहेगी और ये मैंटली और फीजिकल दोनो ही होती है…और इस वजह से तनाव में कई बार वजन भी बढना शुरु हो जाता है..

हमें अच्छे इंसान बनना है

हमे उनसे दूर रहना है कि हमें अच्छे इंसान बनना है

Law of nature है कि जो देंगें वही मिलेगा… तो हम क्या देंगें… नेगेटिविटी… बुरा देंगें उससे क्या होगा … बुराई और ज्यादा बढेगी… तो इसलिए भी हमे उनसे दूर रहना है कि हमें अच्छे इंसान बनना है

Energy लेवल को कमजोर बना देते है.. डिमोटिवेट कर देते हैं हमारे अंदर जितना उत्साह होता है लग्न होती है वो सब खत्म कर देते हैं… हमारी एनर्जी लेवल एक दम डाऊन कर देते हैं…

जिंदगी बहुत छोटी है

दूर इसलिए भी रहना चाहिए कि जिंदगी बहुत छोटी है और हमें जो समय मिला है उसमें बहुत कुछ करके दिखाना है.. समय वेस्ट नही करना… इन लोगो के चक्कर में पड कर हम कुछ नही कर पाएगें …

नेगेटिव लोग न खुद बदलते हैं न दूसरो को बदलने देखना चाह्ते हैं न किसी के Grateful होते हैं और न किसी से माफी मांगते हैं बहुत अजीब ही दुनिया होती है जिसमें बस अंधकार ही अंधकार होता है… कोई रोशनी की किरण नजर नही आती..

इसलिए इसलिए मैं कह रही हूं कि ऐसे लोगो avoid कर देना चाहिए.. avoid कैसे करना चाहिए इस बारे में भी मैं जल्दी ही बताऊंगी…

Avoid Negative People in Life – सकारात्मक कैसे बनें – नकारात्मक लोगों से बचें – Monica Gupta – #MonicaGuptaVideos -Why to avoid negative people –

January 8, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Praise Children – बच्चों की प्रशंसा कैसे करें – Ways to Praise Your Kids – Monica Gupta

How to Praise Children

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How to Praise Children – बच्चों की प्रशंसा कैसे करें – Ways to Praise Your Kids

बच्चे जब कुछ गलत करते हैं तो हम पेरेंटस क्या करते हैं… गुस्सा करते हैं डांटते हैं और कई बार पिटाई भी कर देते हैं वही जब कुछ अच्छा काम करते हैं तो … तो क्या हमेशा पीठ थपथपाते हैं शाबाशी देते हैं … दो मीठे बोल बोलते हैं जबकि दो शब्द एनकरेजमैंट के बोल कर बच्चों का आत्म सम्मान बढता है , कोफिडेंस आता है मैंटली खुशी मिलती है और मोटिवेशन भी आगे बढने की…

तो हमें अगर बच्चा कुछ अच्छा करे तो उसे एनकरेज करते रहना चाहिए पर इसके लिए भी कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए… क्योकि कई बार हम पेरेंटस अपनी तरफ से तो बच्चे को एनकरेज करते हैं पर हो कुछ और जाता है… चलिए एक उदाहरण देकर मैं अपनी बात समझाती हूं किस किस तरह से एनकरेज करना चाहिए… बच्चों को Encourage कैसे करें

मान लीजिए एक बच्चा साईकिल चलाना सीख रहा है और उसने दो दिन में अपना बैलेंस बनाना सीख लिया है तो उसकी मम्मी खुश तो है कि दो दिन में साईकिल चलानी आ गई पर साथ ही साथ क्या बोल रही हैं कि… तेरे भाई ने तो एक ही दिन में सीख ली थी…  पहले ही दिन चला ली थी उसने साईकिल चलानी… तो क्या होगा … बच्चे को यकीनन बुरा लगेगा क्योकि उसकी तुलना में प्रशंसा हुई है अगर उसकी मम्मी ये कहती कि अरे वाह… दो दिन में… सीख भी गए साईकिल चलाना.. कमाल हो गई तो बच्चे का उत्साह अलग ही होता … बच्चे को Encouragement  मिलती पर हो गया बिल्कुल गलत… तो इस तरह की अलग अलग हम कई बार गलती कर जाते हैं तो इससे क्या सीखा कि हमें एनकरेज करना तो चाहिए पर Comparison  Praise कभी नही करनी चाहिए नही कीजिए… इससे बच्चे के आत्मसम्मान को चोट पहुंचती हैं…

ये बात अगर अपने ऊपर ले जाए तो ज्यादा समझ आएगी… उसकी मम्मी भी तो कितनी अच्छी कार चलाती है आपको तो ढंग से चलानी भी नही आती … तो क्या रिएक्श्न होगा आपका.. बुरा लगता है बहुत बुरा लगता है… इसलिए तुलना करते हुए प्रशंसा नही करनी चाहिए बल्कि ये बोलना चाहिए.. आप बहुत अच्छा कर रहे हो… कल तब बिल्कुल आ जाएगी…

छोटी छोटी बात यानि आसान कामों पर बार बार praise करना या फिर overdo overpraise करना भी सही नही है उससे नेगेटिव असर पडता है…

बात बात पर प्रशंसा करना बच्चे की मोटिवेशन कम ही करता है बढाता नही है… छोटी छोटी बात पर अगर हम बच्चे की प्रशंसा कर रहे हैं इसका मतलब ये है कि हमें ज्यादा उम्मीद नही है… और फिर बच्चा भी कुछ ऐसा नही करने की कोशिश करता… उसे पता है कि छोटी छोटी बात पर प्रंशसा हो ही रही है तो कुछ और करने की क्या जरुरत है… कई बार ज्यादा प्रेज करने से प्रेज करने की वेल्यू भी कम हो जाती है…कभी कभार करेंगें तो उसकी महत्ता भी रहेगी…

जब हम किसी को एनकरेज कर रहे हैं तो Specific होना पडेगा और विस्तार से भी ..

मान लीजिए एक बच्चा क्लास में फर्स्ट आया तो आमतौर पर हम क्या बोलते हैं वाव !! बहुत अच्छे… जबकि हमें बोलना चाहिए कि जिस तरह से आपने पढाई की और शानदार नतीजा लाए… ये बहुत बढिया है.. खाली वाह , बहुत अच्छा नही होना चाहिए अगर जिस बारे में किसी को एनकरेज करना है तो उसे विस्तार से बताना होगा…

हमे प्रंशसा Honestly करनी पडेगी..

सच्चे मन से और ईमानदारी से… दिखावा नही करना… हम कई बार बच्चों को ऐसे ही प्रेज कर देते हैं… एक सहेली ने बताया जब वो छोटी थी तो उनके घर एक अकंल आते और हमेशा बोलते अभी तक जितने बच्चों से मैं मिला हूं ये सबसे अच्छी बच्ची है… तो बहुत खुशी होती  और जब वही अंकल किसी और घर जाते तो भी यही बोलते कि आपका बच्चा बहुत अच्छा है अभी तक जितने बच्चों से मैं मिला हूं ये सबसे अच्छा है… उनका ये डायलॉग था…  अब बताईए.. हो गई न गलत बात … अगर हम वाकई बहुत खुश हैं तभी कीजिए नही तो ..

एक बात का और ख्याल रखना चाहिए कि हमें बच्चे की Ability की बजाय Effort की या Process की Praiseकरनी चाहिए

जैसाकि मान लीजिए एक बच्चा मेरे पास अपनी ड्राईग लेकर आता हि कि देखो… मैं देखती हूं और ये कहती हूं कि कितनी अच्छी ड्राईंग है तो ये बात नही बनेगी.. क्योकि वो तो अच्छी है ही पर अगर मैं ये कहूंगी कि वाह ये पेड और ये पहाड कितने अच्छे बनाए हैं तो उसे बहुत एनकरेजमेंट मिलेगी कि वाकई में मैंने अच्छा बनाया है या उन्होने ध्यान से देखा तो वो और भी अच्छा बनाने का प्रयास करेगा..

How to Praise Children – बच्चों की प्रशंसा कैसे करें

January 7, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Lohri – लोहड़ी – Lohri Festival – लोहड़ी का त्यौहार – लोहड़ी की कथा – Monica Gupta

Lohri Festival

Lohri – लोहड़ी – Lohri Festival – लोहड़ी का त्यौहार – लोहड़ी की कथा – Monica Gupta –  जनवरी महीना पूरे भारत के लिए त्योहार लेकर आता है.. ऐसा ही एक त्योहार है लोहडी… आपसी प्रेम और भाई चारे की मिसाल कायम करने वाला अनूठा पर्व है लोहडी. लोहड़ी शब्द तिल + रोड़ी शब्दों के मेल से बना है, जो समय के साथ बदल कर तिलोड़ी और बाद में लोहड़ी हो गया

Lohri – लोहड़ी – Lohri Festival – लोहड़ी का त्यौहार – लोहड़ी की कथा –

लोहड़ी पर्व पौष के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद माघ संक्रांति की पूर्व संध्या पर सभी एक साथ खुशी खुशी मिलजुल कर नाच गाकर  मनाते हैं।

लोहड़ी शब्द तिल + रोड़ी शब्दों के मेल से बना है, जो समय के साथ बदल कर तिलोड़ी और बाद में लोहड़ी हो गया। पंजाब के कई इलाकों मे इसे लोही या लोई भी कहा जाता है।

लोहड़ी के कुछ दिन पहले से ही दिन बच्चे और बडे अपनी-अपनी टोलियाँ बना ‘दे माई लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी’ गाते हुए या सुंदर मुदरिए गाते हुए ढोल की थाप के साथ घर-घर जा कर लोहड़ी माँगते हैं।

पूरा वातावरण संगीतमय हो जाता  है

समस्त उत्तर भारत में लोहड़ी तो दक्षिण भारत के लोग पोंगल और असम में बिहू पर्व ऐसे ही हर्ष उल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है।

हर त्योहार के पीछे कोई न कोई कहानी होती है…

लोहरी की लोक कथा  कुछ इस तरह से है
कहा जाता है की सुंदरी और मुनरी नाम की दो बहनें थी। बचपन में ही उनके माता -पिता का स्वर्गवास हो गया था। जवान होने पर उनके चाचा उन्हें किसी राजा के हाथों बेच देना चाहते थे।
जब इसकी जानकारी दुल्ला भट्टी नामक एक डाकू को हुई तो वो उन जालिमों से इन बच्चियों को बचाकर जंगल में लाए और उनके पिता बनकर उनका विवाह योग्य वर से वहीं आग जलाकर के सात फेरे करवा दिए। क्यूकि शादी बहुत जल्दी में हुई ,दुल्ला को उस समय देने के लिए कुछ भी नही था अतः लड़कियों के आँचल में एक एक सेर गुड डालकर विदा किया।
तबसे लोहड़ी को त्यौहार, उत्सव इस के रूप में मनाने की प्रथा चली आ रही है। जिसे पूरे  देशभर में हर्षोलास के साथ मनाया जाता है।

लोहड़ी का त्यौहार उमंग और उत्साह का प्रतीक है। रात को आग के अलाव जलाकर उसके चारों ओर नाच किया जाता है और जलती हुई आग में तिल गुड और मूंगफली आदि का भोग लगाकर लोगों को भी मूंगफली ,रेवड़ी आदि बांटी जाती है

इस त्योहार का सबंध फसल से भी है, इस समय गेहूँ और सरसों की फसलें अपने यौवन पर लहरा रही होती हैं,

बेशक , लोहड़ी,  उत्तर भारत का एक सबसे लोकप्रिय त्यौहार है. पंजाब के अतिरिक्त इसे हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी बहुत उत्साह से मनाया जाता है.

कुल मिलाकर लोहडी पर्व न सिर्फ रिश्तों की मधुरता, सुकून और प्रेम का प्रतीक है बल्कि सदभावना से रहने का संदेश भी देता है।

Lohri Festival

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