Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 4, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Deal with Angry Child – जिद्दी बच्चों को कैसे सुधारें – How to Deal with Angry Child – बच्चों को कैसे समझाएं – Monica Gupta

How to Deal with Angry Child

How to Deal with Angry Child – जिद्दी बच्चों को कैसे सुधारें – How to Deal with Angry Child – बच्चों को कैसे समझाएं – Monica Gupta – जिद्दी बच्चों को कैसे सुधारें – ziddi-bache-ko-kaise-sudhare –

बहुत सारे मैसेज आए हुए हए थे कि बच्चे बहुत गुस्सैल और जिद्दी हो गए हैं उन्हें कैसे समझाएं … यही कुछ मेरे दिमाग में चल रहा था पहले तो मैं टीवी देखती रही फिर किसी के घर कुछ काम था वहां चली गई …

How to Deal with Angry Child – जिद्दी बच्चों को कैसे सुधारें – How to Deal with Angry Child – बच्चों को कैसे समझाएं

वहां एक चार साल का बच्चा अपनी मम्मी को बहुत तंग कर रहा था जोर जोर से चिल्ला रहा था उसकी मम्मी ने दो चांटे मारे   और फिर बच्चा भी मां को खूब मारने लगा कभी लात कभी बाल खिंचने लगा.. फिर मेरी जानकार भी खूब मारने लगी बच्चा चिल्ला रहा था …

आप गंदी हो बहुत गंदी हो मारती हो … दोनों बराबर का बोले जा रहे थे…

अचानक उनकी मार पिटाई में doorbell हुई  और मेरी नींद खुल गई .. अरे बाप रे ये सब सपना था असल में यही सोचते सोचते सो गई और शायद  सपना आ गया …

बाहर गई तो कोई नही था … शायद बच्चे ही होंगें कई बार बेल बजा कर भाग जाते हैं … क्या बच्चे ऐसे ही होते हैं गंदे, लडाकू,  जिद्दी …

यही सोचते सोचते मैं अखबार  पढने लगी .. एक खबर ने मेरी सोच बदल दी कि बच्चे ऐसे नही होते …

खबर पुणे की थी एक माता पिता के बीच में बहुत लडाई चल रही थी और जब केस जज के पास पहुंचा.. उस दिन बच्चे का जन्मदिन था और माता पिता अलग रहना शुरु कर चुके थे … कोर्ट में जन्मदिन साथ मनाया और जब उससे उपहार की बात पूछी तो बच्चे ने एक लैटर थमा दिया उस पर लिखा था कि लडिए मत … मैं आप दोनों को साथ देखना चाह्ता हूं…

दोनो को महसूस हुआ और खुल कर बात हुई और सुलह हो गई …

तो एक बात तो साफ है कि बच्चे गंदे नही होते … कुछ एक ऐसी बातें हो जाती हैं जो उन्हें चिडचिडा बना देती हैं …

अच्छा एक बात बताईए कि जब मैंनें ये कहा कि बच्चे गंदे होते हैं तो आपको कैसा लगा … अच्छा नही लगा ना आपको मन ही मन गुस्सा भी आया होगा कि ये बच्चे को गंदा कहने वाली कौन है … !! बस !! ठीक है अब मैं समझ गई …

प्यार तो आप बहुत करते हैं बच्चे से पर आपकी जिंदगी में इतने तनाव और busy  है कि आप पूरा ध्यान नही दे पा रहे इस वजह से बच्चा जिद्दी हो गया है…

मेरी एक जानकार ने बताया कि अक्सर उसका बच्चा मार्किट जाने पर बहुत जिद करता … वही दुकान पर लेट जाता .. रोने लगता और जिद करने लगता …  उसका हल उसने ये निकाला कि उसने उस समय बच्चे को कुछ नही कहा …

जब घर आए तो उसने बच्चे से बात नही की और बोला मम्मी को बहुत दुख हुआ कि मम्मी का प्यारा बेटा कैसे करता है … बच्चे जैसे भी हो पर वो मम्मी को नाराज नही देख सकते … वो झूठ मूठ से रोने की acting  करने लगी और बच्चा बार बार मम्मी के चेहरे से बाल हटा कर देखता रहा ..

उसे लगा कि उसने गलत किया है नही करना चाहिए था … और उसने सोरी बोला … उसके बाद से दोनों में बहुत दोस्ती हो गई है अब वो जिद नही करता … घर से बाहर जाने से पहले ही वो rules  बना लेते हैं एक लिस्ट बना लेते हैं कि क्या क्या करना है और क्या नही .. …. आराम से tackle  हो गई प्रोब्लम …

जरुरत यही है कि मार पिटाई हल नही है बच्चों के साथ दोस्ताना treat  करें और अगर  कोई गलती है उसे मान लें … अगर कान पकड कर सोरी बोलना भी पडे तो शर्म नही आनी चाहिए …

देखिए इन सब में एक बार जरुर देखने वाली है कि इन सब में बस एक बात का अगर ख्याल रखेंगें कि उसके उसके दोस्त कैसे हैं .. समय समय पर उसके दोस्तों को घर बुलाते रहें और उनका स्वभाव जानने की कोशिश करें …

जरुरत इस बात की है आप कूल रहें और कूल माईंड से ही कैसे सामना करना हैं वो सोचें … इसकी आखॉं में देखिए जिद्दी नही बहुत प्यारा और मासूम है वो …

यही तो बचपन के दिन है … बडा हो जाएगा चला जाएगा … इसलिए समय दीजिए समझिए और प्यार दीजिए … बस …

अगर आपको मेरी बात पसंद आई हो तो बाकि आपके पास भी कोई टिप्स हो तो कमेंट में जरुर बताईएगा …

How to Deal with Angry Child – जिद्दी बच्चों को कैसे सुधारें – How to Deal with Angry Child – बच्चों को कैसे समझाएं – Monica Gupta

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August 3, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

छोटे बच्चों को कैसे लिखना सिखाएं – How to Motivate a Child to Write

Monica Gupta

छोटे बच्चों को कैसे लिखना सिखाएं – Chote Baccho ko Likhna Kaise Sikhaye –  how to create interest in writing – how to motivate a child to write – how to create interest in writing..  पढ़ाई  पढ़ाई के नाम से ही बच्चा दूर भागता है क्या करें ??

छोटे बच्चों को कैसे लिखना सिखाएं – How to Motivate a Child to Write

मेरे पास बहुत सारे मैसेज और mail आते हैं वो जानना चाहते हैं कि बच्चा लिखता नही है PreSchool जाता है  LKG, UKG मे हैं  पर लिखने का जरा भी शौक नही है कैसे उसमें interest बनाएं Motivate  करें  कि वो लिखे …

तो देखिए मैं ऐसे पैरेंटस को एक बात कहना चाहती हूं कि हर घर का अलग माहौल होता है और बच्चे की अपनी skill होती है .. और writing skill slowly यानि वो धीरे धीरे ही आती है … किसी बच्चे में जल्दी तो किसी में समय लगता है बस जरुरत इस बात की होती है कि उसे समय समय पर encourage करते रहेगें तो वो जरुर progress करता दिखाई देगा …

अकसर पैरेंटस की ये शिकायत रहती है कॉपी पर नही लिखता

अच्छा आप एक बात बताईए कि आप कागज पैन का कितना इस्तेमाल करती हैं … बच्चा अगर आपको कुछ लिखते देखेगा तो उसका भी मन करेगा कि वो लिखे पर जब वो देखेगा ही नही … तो उसमें शौक कैसा बनेगा … तो खुद भी अपने लिए पेपर पैन रखे …

इसे fun समझा जाए …

सबसे बडी बात ये हैं कि उन्हें force न किया जाए … इन्हें ये न कहा जाए कि पढो पढो … पढाई करते हैं ये कहिए कि खेल खेलते है .. गेम खेलते हैं Let’s play a game.

Coloring, copying, tracing,  finger painting , करने दीजिए enjoy करने दीजिए कलर से … इन ऊंगलियों को एक बार मजबूत होने दीजिए कि grip मजबूत हो जाए …  उनकी pencil grip, wrist position, pencil position  को सही होने दीजिए.. अगर एक बार गलत तरीके से पकडने लगे तो दिक्कत हो जाएगी …

अच्छा सिर्फ कॉपी पैंसिल ही नही आप उन्हें स्लेट, ब्लैक बोर्ड या white board   भी दे सकते हैं क्योकि उस पर लिख कर मिटाना आसन होता है … या एक ट्रे में मिट्टी या

या फिर आप एक ट्रे में जैसे रंगोली के कलर होते हैं वो डाल दीजिए और बोलिए कि अब अक्षर बनाईए कभी 0 कभी कुछ ताकि उसमें शौक बनें

आप किचन में काम कर रही हैं और चपाती बना रही है उसका alphabet बना दीजिए उसे वहीं बैठा लीजिए और बोलिए आप बनाओ … या फिर क्ले देकर उससे अलग अलग चीजे बनवा सकती हैं देखिए सबसे जरुरी है उसमे interest  create करना एक बार हो गया फिर आगे कभी दिक्कत नही आएगी …

और अगर आपको लगे कि colour से भी नही खेल रहा तो आज की टेलनोलोजी का इस्तेमाल करिए telephone टेलिफोन का कुछ देर के लिए प्लग निकाल लीजिए या calculators के माध्यम से उसे सीखाएं कि ये क्या नम्बर है या वीडियों गेम से भी बच्चा बहुत जल्दी सीखता है … उसमे अलग अलग स्टेज या गेम का नाम क्या है उसे तुरंत पता लग जाता है ..

आजकल मार्किट में बहुत सारी चीजे आती हैं जैसे कि magnetic alphabets … उसे अलमारी या फ्रिज पर भी लगा सकते हैं … देखिए जरुरी है उसमे interest पैदा करना एक बार उसमें interest आ गया तो …

पैशेंस . रखते हुए बच्चों को पूरा समय दीजिए … उनके साथ बैठिए … वो टिक कर नही बैठेगा … ये तो मान कर चलिए … जिस दिन वो टिक गया समझ लो आधी लडाई आपने जीत ली …

बच्चों से कहें कि हम आज मुंह से बात नही करेंगें तो भी करेंगें लिख कर करेंगें …  आपको toffee चाहिए … पैंसिल चाहिए  आप ड्रा करके बताओ और मैं भी उसका जवाब वैसे ही दूंगी … इससे उसमे इंटर्स्ट पैदा होगा …

 

इसलिए वो कुछ लिखें तो उसे encourage करना बहुत जरुरी है फिर देखिए कभी भी दिक्कत नही होगी … इसलिए सबसे जरुरी चीज मम्मी लोगो के लिए..

August 2, 2017 By Monica Gupta 2 Comments

राखी का  त्यौहार – अनमोल है ये बंधन – एक पवित्र और  खूबसूरत त्योहार

Monica Gupta

राखी का  त्यौहार – अनमोल है ये बंधन – एक पवित्र और  खूबसूरत त्योहार –  India ka Tyohaar – Rakhi ka Tyohaar , Festival..  बहुत प्यारा और खूबसूरत सा त्योहार है राखी …

राखी का  त्यौहार – अनमोल है ये बंधन – एक पवित्र और  खूबसूरत त्योहार

बाजारों की रौनक तो देखते ही बनती है … रंग बिरंगी राखियों से दुकानें सजी हुई हैं … मैं गई हुई थी राखी खरीदने … तो मेरे सामने एक महिला आई और दो चार राखियां देखी मुंह बिचकाया  और फिर बोली और नही है क्या अच्छी राखी महंगी राखी… दुकान दार से बोली कोई सबसे  सबसे मंहगी राखी दिखाओ.

राखी देखते हुए बोली ऐसी राखी जिसमे खूब सारे नग हों वो दिखाओं … और बोली भाईयों ने पहननी भी कितनी देर के लिए होती है … आधा धंटा बाद तो उतार ही देते हैं …  कुछ देर माथा पच्ची के बाद और ठंडा कोल्ड ड्रिक पी कर दुकान दार ने सबसे महंगी राखी खरीद कर धमंड से वो बाहर जा रही थी…

उसके जाने के बाद एक अन्य महिला आई और वो डोरियां देखने लगी …. दुकानदार ने कहा कि और भी बहुत खूबसूरत और महंगी राखी आई हुई हैं वो दिखाऊं तो वो महिला बोली कि पिछ्ले साल जो डोरी लेकर गई थी भईया ने बहुत महीने तक पहने रखी इसलिए डोरी ही ले कर जाऊगी ताकि भईया की कलाई पर ज्यादा से ज्यादा समय तक वो सजी रहे … . बात करते करते उसने खूबसूरत सी पांच छह डोरी खरीदी…

सच, बात मंहगी सस्ती की नही ,प्यार की होती है. अनमोल बंधन है ये इसका कोई मोल नही …

वैसे मैंनें देखा है बहुत ladies अपने या बच्चे घर पर राखी बनाते हैं और वही भाई को पहनाते हैं … ऐसी राखियों का तो कोई मुकाबला ही नही …  राखी का त्यौहार  हार्दिक शुभकामनाएं !!!

मुझे राखी बिल्कुल अच्छी नही लगती अचानक जब मेरी सहेली ने ये बोला तो मैं सकते में आ गई. अरे !!! क्या हुआ !! अच्छी तो है राखी.. किसलिए अच्छी नही लगती. वो बोली पता नही पर राखी का नाम सुनते ही एक अजीब सी टेंशन हो जाती है.मैने पूछ ही लिया कि क्या इसकी वजह पैसे तो नही वो बोली पैसे कितने दें न दें मुझे उससे क्या मेरा क्या मतलब..

राखी

August 1, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

बच्चों को सिखाएं पैसों की कद्र करना – पैसों की कीमत पर प्रेरक कहानी

Monica Gupta

बच्चों को सिखाएं पैसों की कद्र करना – पैसों की कीमत पर प्रेरक कहानी  – Baccho ko Sikhayen Paiso Ki Kadar Kerna – आमतौर पर हम बच्चों को कोई परेशानी या दिक्कत में नही देखना चाहते इसलिए उन्हें सारी सुख सुविधाएं दे देते हैं पर बच्चे कई बार बिगड जाते हैं उन्हें लगता है कि खूब पैसा है इसलिए कई बार गलत संगत में भी पड जाते हैं…

बच्चों को सिखाएं पैसों की कद्र करना – पैसों की कीमत पर प्रेरक कहानी

कल क्या हुआ कि शाम को मार्किट गई . वहां  पुलिस ने एक मोटर साईकिल वाले को रोक रखा था क्योकि हेलमेट नही पहना था … दो दोस्त भी थे और  वो लडका इस बात को महसूस नही कर रहा था कि उसने गलती की है … अपना पर्स निकाल कर खडा था और बहुत घमंड से बोल रहा था हां हां ले लो चलान कितना है …

 

बहुत दुख हुआ … कि एक तो नियम तोड रहे हैं और ना ही  पैसे की वैल्यू समझ रहे हैं ..

उस समय तो मैं आगे बढ गई  पर ये वेल्यू माता पिता को ही महसूस करवानी होगी … कि पैसा कमाना आसान नही है … वैसे इस पर बहुत सारी कहानियां  है पर एक कहानी मुझे बहुत ही अच्छी लगती है …

एक आदमी के पास बहुत पैसा था और उसका बेटा बिगड गया था और खराब संगत में पड गया और खूब पैसे उडाने लगा …  … एक दिन उसने अपने बेटे को पास बुलाया और कहा कि अब कुछ काम करो अगर तुम 100 रुपये कमा कर लाओगे तभी तुम्हें खाना मिलेगा … नही तो नही मिलेगा … …..

अब वो ठहरा बिगडा अमीर .. काम कहां उसके बस का  … तो वो गया अपनी बहन के पास और बोला कि दीदी जरा सौ रुपये देना … पापा को देने हैं …

दीदी ने दे दिए … उसने जाकर अपने पापा को दे दिए … पापा ने उसे बोला इसे फाड कर फेंक दो … उसने उसे फाड दिया … पापा ने गुस्सा किया कि खुद कमा कर लाओ नही तो खाना नही मिलेगा …

… अगले दिन फिर सारा दिन वो मटर गशती करता रहा और शाम को मम्मी के पास जाकर रोने लगा कि मैं कहां से कमा कर लाऊ पैसे … मम्मी का दिल भी पसीज गया और उन्होनें 100 रुपये उसे दे दिए

उसने फिर जाकर पापा को दे दिए … पापा ने उसे हाथ में लिया और उसे वपिस करते हुए बोले इसे फाड कर फेंक दो … उसने फाड दिया अब पापा ने कहा कि खुद कमा कर के लाओ …

अब दीदी और मां ने मना कर दिया पैसे देने को … अब वो वाकई निकल गया .. सोचा जरुर कमा कर लाऊगां

शाम को एक ढाबे पर काम किया बर्तन धोए, चाय सर्व की लोगो को और पचास रुपये मिले वो पापा को जाकर दे दिए .. पापा ने हाथ में लिए और उसे वापिस करते हुए बोले लो फाड कर फेंक दो उसे …

ये सुनते ही उसे गुस्सा आ गया … बोला ऐसे कैसे कह रहे हो आप … आपको पता है सारा दिन काम करके मेहनत करके ये 100 रुपये कमाएं हैं मैं कैसे फाड सकता हूं …

अब पापा के चेहरे पर खुशी थी … वो बोले यही मैं सुनना चाह रहा था … ये वाकई में तुम्हारी  मेहनत की कमाई है … जो तुमने नही कमाए थे मेहनत की ही नही थी इसलिए उसे फाडते समय तुम्हें दर्द भी नही हुआ था … समझ चुका था कि रुपया पैसा  बर्बाद करने में कितना दुख होता है…. पैसे की वैल्यू हमें ही समझानी पडेगी ताकि बडे होकर वो मेहनती और ईमानादर इंसान बनें

July 31, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

बच्चों को कैसे समझाएं नकल करना बुरी बात है – No Cheating Allowed

Monica Gupta

बच्चों को कैसे समझाएं नकल करना बुरी बात है – No Cheating Allowed – Bacho ko Kaise Samjhaye Nakal Kerna Buri Baat Hai… हम परेंटस हमेशा बच्चों की अच्छी शिक्षा के बारे में सोचते हैं उन्हें अच्छा इंसान बनाने के बारे में सोचते हैं पर नकल मारने की जब बात आती है तो चुप हो जाते हैं जबकि  नकल करना अच्छी बात नही है कितना समझातें हैं उन्हें …

बच्चों को कैसे समझाएं नकल करना बुरी बात है – No Cheating Allowed

शाम को  घर के सामने से दो छोटे बच्चे जा रहे थे .. बात करते हुए कि आज क्लास टेस्ट में मैंनें खूब नकल मारी … वो बच्चे जिस खुशी और गर्व से बात करते जा रहे थे … सुनकर अच्छा नही लगा …

 

नकल एक ऐसा short cut  है जिसका रास्ता आगे से बंद है ये रास्ता कहीं नही जाता… Full Stop  है जिंदगी का ..

चलिए मान लीजिए.. नकल मार कर   एक साल हम पास हो जाएगें दो साल पास हो जाएगें हमें star  भी मिलेगा पर जिंदगी के इम्तेहान में जीवन  भर के लिए फेल हो जाएग़ें… कभी सोचा है ??

इसलिए माता पिता को ही समझाना होगा कि बच्चे नकल न करें… आमतौर पर जब बच्चे घर आकर बताते हैं कि स्कूल में test  में सभी बच्चे नकल मार रहे थे … तो कहा जाता ही फिर ठीक है … जब सारे ही नकल कर रहे थे तो कोई बात नही … जबकि नही … !! ये गलत है…

एक सर्वे से पता चला कि नकल करने का सबसे बड़ा कारण है, विद्यार्थियों students का तैयारी करके न जाना…

स्कूल में एक-दूसरे से फर्स्ट आने की  होड़ लगाने का माहौल या

माता-पिताओं की ऊँची उम्मीदों पर खरे उतरने का दबाव विद्यार्थियों पर इतना ज़्यादा होता है कि उनके पास नकल करने के अलावा कोई चारा ही नहीं होता.

कुछ बच्चे मानते हैं कि अच्छे नंबर लाने का लगातार दबाव रहता है इसलिए वे नकल करते हैं…. अच्छा बात यही नही रुकती अगर नकल करने की आदत हो जाए तो और भी बातों में वो बिगडने लगते हैं जैसाकि

सिर्फ स्कूल में ही नही वो घर पर भी चींटिंग करते हैं जैसा कि मान लीजिए कैरम खेल रहे हैं और उसकी गोटियां उठा लेंगें चुपचाप

या फिर मम्मी बाजार से सामान मगंवाएगे 100 रुपये देगी पर बच्चा बोलेगा कि सारे खर्च हो गए जबकि उसके पास हैं कुछ पैसे …

ऐसे बच्चे पता है कैसे हो जाते हैं हमेशा डरे सहमे…

उनमे Confidence ही नही रहता …

चोर रहता है मन में कि कहीं पकडे न जाएं कोई शिकायत न कर दे …

तो पैरेंटस से यही कहना है expectations कम कीजिए

Lower your expectations

उन्हें एक आदर्श बच्चा बनाईए … उन्हें समझाईए कि बेशक सारे कितनी नकल क्यू न मारें पर तुमने नही करनी … अगर अपनी मेहनत से 100 मे से 50 भी ले कर आए हो तो वो मेरे लिए 100 के बराबर ही हैं …

उन्हें समझाईए कि नकल एक तरह से चोरी करना होता है … चोरी करना क्या सही है … ये ही सोच लीजिए … ‘हरगिज़ नहीं।’ आप शायद ऐसा कहें, खासकर तब जब आपका  पैसा चुराया गया हो! दरअसल नकल करके हम उस बात का श्रेय ले रहे होते हैं, जिसके हम हकदार नहीं…

नकल एक लत है … जो एक बार लग गई तो इसे सुधार नही सकते …  और ये भी सोचिए कि आप नकल कर रहे हैं और पकडे गए तो कितनी बईज्जती होगी … तो क्यों नही बच्चे में मेहनत की आदत डल वाते …

Set a good example.नकल मारने वाली बात को बजाय प्रोत्साहित करने के कि वाह मेरा बेटा है शाबाश … आप अपना या किसी काल्पनिक दोस्त का उदाहरण दीजिए कि एक बार उसने भी स्कूल में नकल मारी थी … और पकडा गया था .. सभी बच्चों ने टीचर ने मजाक बनाया था …

या फिर कोई प्रेरक बात या कहानी सुना कर  मोटिवेट कीजिए कि नकल करना बुरी बात है … नाम खराब होता है … सारी जिंदगी के लिए नक्कल चोर का तमगा मिल जाता है

 

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no cheating allowed , बच्चों को कैसे समझाएं नकल करना बुरी बात है

No Cheating Allowed , no cheating in class

July 30, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

जिंदगी का सच ये भी है – खट्टे मीठे अनुभव

Monica Gupta

जिंदगी का सच ये भी है – खट्टे मीठे अनुभव – Zindagi Ka Sach  Yeh bhi hai . जिंदगी में अक्सर कडवे अनुभवो के साथ साथ खट्टे मीठे अनुभव भी होते रहते हैं… कई बार हम झेंप जातें हैं सिर खुजलाने लगते हैं और हम कह उठते हैं … हे भगवान !!

जिंदगी का सच ये भी है – खट्टे मीठे अनुभव

कुछ ऐसा ही खट्टा मीठा अनुभव मेरे साथ हुआ … कल मैं अपनी सहेली के घर गई वहां बहुत तनाव का माहौल था … असल में उसकी मम्मी का चश्मा नही मिल रहा था और पूरा घर हिला डाला … मेरी सहेली आराम से चाय बना रही थी और उसकी सास परेशान थी … मैंनें कहा कि आप आराम से बैठ कर सोचिए कि चश्मा कहां रखा था ..

उन्हें बैठाया और मैं उनके लिए पानी लेने गई और फ्रिज खोला तो चश्मा फ्रिज के ऊपर रखा था … उन्हें याद आया कि हां वही रखा था … मैंने  उन्हें चश्मा पकडाया और बोला कि कई बार चीज न मिलने पर शांत होकर बैठने से चीज मिल जाती है .. इस बीच में मैंनें देखा कि मेरी सहेली मुझे गुस्से से देख रही है … मुझे समझ नही आया और मैं आंटी से कहने लगी आपने वो कहानी नही सुनी … वो बोली सुनाओ … तो मैंनें सुनाई एक कहानी

एक आदमी अपने घर मे अपनी घडी रख कर कही भूल गया. बहुत जगह खोजा. नही मिली. उसने अपने घर मे पत्नी और बच्चो सभी से कहा. सभी ने खोजी पर नही मिली.

उन्होने ईनाम भी रख दिया कि सौ रुपए इनाम मिलेगा जो घडी खोज कर लाएगा. इसी बीच उसके बेटे ने कहा कि यह काम वो अकेले ही करना चाहता है.

पहले वो एक कमरे में फिर दूसरे कमरे मे गया और बाहर आया तो उसके हाथ मे घडी थी. सब हैरान !!

पिता ने पूछा कि आखिर तुम्हे यह मिली कैसे?? इस पर बेटा बोला कि मैंने कुछ नहीं किया बस मैं कमरे में गया और चुप-चाप बैठ गया, और घड़ी की आवाज़ पर ध्यान केन्द्रित करने लगा , कमरे में शांति होने के कारण मुझे घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे गयी , जिससे मैंने उसकी दिशा का अंदाजा लगा लिया और आलमारी के पीछे गिरी ये घड़ी खोज निकाली.”

. इसलिए बजाय हाय तौबा मचाने के हमें शांत होकर बैठ जाना चाहिए और सोचना चाहिए इससे चीज मिल जाएगी …

बात खत्म करके मैंने आंटी को देखा वो चश्में से बडे आराम से अपना कान …

और मेरी सहेली बोली कि चश्मा गुमा नही था हमनें छिपाया था जान बूझ कर क्योकि ये उसे पहनने के लिए इस्तेमाल नही करती बल्कि …. कान में बहुत इंफेक्शन है इसलिए डाक्टर के कहने पर ही हमने

हे भगवान !! अब समझ आया … तो ऐसा ही होता है … जिंदगी को चटपटा बनाने के लिए ऐसे अनुभव बहुत जरुरी भी हैं … आंंटी बोली कि और कहानी सुनाओ न … पर मैं अब जाना नही भागना चाह रही थी …

वैसे आप तो ऐसे नही हैं ना … वो कहते भी है ना कि

…. नाक में उंगली, कान में तिनका मत कर, मत कर, मत कर …  दाँत में मंजन, आँख में अंजन नित कर, नित कर, नित कर ”

खट्टे मीठे , ऐसा भी होता है , जिंदगी का सच- ये भी है

खट्टे मीठे अनुभव –  खट्टी मीठी जिंदगी , चश्मा कैसे हटाये –

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जिंदगी का सफर,  जिंदगी का सार,

 

जिंदगी का कड़वा सच ये भी – कड़वी बाते लेकिन सच्ची बाते

 

July 29, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

छोटे बच्चों की बडी सीख देती एक कहानी – दुनिया के 7 आश्चर्य

Monica Gupta

छोटे बच्चों की बडी सीख देती एक कहानी  –  दुनिया के 7 आश्चर्य  – Chote Bacho Ki Bade Seekh Deti Kahani – बच्चे किसी से कम नहीं होते .. उनकी सोच … यकीनन कई बार हमें आश्चर्य चकित कर देती है कल मैं टीवी देख रही थी उसमें दुनिया के सात आश्चर्यों के बारे में बता रहे थे … उसमे हमारा ताजमहल भी था … तभी मुझे ख्याल  आई एक कहानी जोकि मैंने नेट पर पढी थी और बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर गई …

छोटे बच्चों की बडी सीख देती एक कहानी  –  दुनिया के 7 आश्चर्य

कहानी एक 5  क्लास में पढने वाली लडकी की है कि वो गांव से शहर पढने आती है नए स्कूल में दाखिला लेती है … सब बच्चे उसे अजीब सी नजरों से देखतें हैं क्योकि वो बहुत साधारण सी होती है.. क्लास टेस्ट हो रहा था कि दुनिया के 7 आश्चर्य लिखों .. अब बच्चों ने लिखना शुरु किया .. टीचर ने नई लडकी को कहा कि आप भी लिखो जितना आता है … जो भी आता है यहां के बच्चों को तो पहले ही बता दिया था …

 

तो वो भी लिखने लगती है … अब टीचर एक एक एक बच्चे से पढ़वाती है … लगभग सभी ने सही लिखे होते हैं फिर बारी आती है उस लडकी की .. टीचर बोलती है कि आप भी सुनाओ कि क्या लिखा है

और वो लडकी लिखा बोलने लगती है कि … दुनिया के आश्चर्य हैं …

देख पाना , सुन पान, महसूस कर पाना, हंस पाना, दया कर पाना, प्रेम कर पाना … वो बोलती जा रही थी और टीचर हैरान की कभी इस बारे मे तो सोचा ही नही … वाकई में … ईश्वर ने जो शक्तियां हमें दी हैं वो किसी आश्चर्य से कम नही … हमें इसकी महत्ता समझ कर इनका उपयोग सही दिशा में करना चाहिए …  एक

छोटे बच्चों की बडी सीख देती एक कहानी

एक बच्ची की सोच ने बदल दिया सोचने का नजरिया … अब पूरी क्लास उसकी दोस्त बन गई थी …

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बच्चों की कहानी- सोच बदल देगी

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छोटे बच्चों की बडी सीख देती एक कहानी

बच्चों की मनोरंजक कहानी – समझदार कौन

July 28, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

छोटे बच्चों की परवरिश के तरीके – Chote Baccho Ki Parvarish Ke Tarike

Monica Gupta

छोटे बच्चों की परवरिश के तरीके – Chote Baccho Ki Parvarish Ke Tarike – Parenting Tips  छोटे बच्चों को अच्छा माहौल दें – बच्चों की परवरिश इन हिंदी- बच्चों की परवरिश कैसे करें . अकसर सभी माता पिता चाह्ते हैं कि अपने बच्चे को ऐसा माहौल दें कि वो खुश रहे … चिडचिडा न रहे … और जब वो बडे हो अपने बचपन को याद करे तो एक खुशी का अहसास हो …!!

छोटे बच्चों की परवरिश के तरीके – Chote Baccho Ki Parvarish Ke Tarike

कुछ दिन पहले मौसम अच्छा था तो हम लोग पार्क में सैर कर रहे थे … बहुत सारे बच्चें खेल रहे थे इस पर एक सहेली ने कहा कि मन करता है फिर से बच्चे बन जाएं.. इस पर एक दूसरी सहेली ने कहा कि बच्चा … अरे नही … मैं तो भूल कर भी नही बनना चाहती बच्चा. तनाव सा हो जाता है बचपन का नाम सुनकर …

 

हमनें बहुत पूछा इसने कुछ नही बताया पर इतना तो पक्का था कि कुछ जरुर ऐसा हुआ है कि जिसे वो याद नही करना चाहती इसलिए बहुत सोचने की बात है कि बच्चों को ऐसा माहौल दें कि वो बडे होकर न सिर्फ उसे याद करें बल्कि अपने बचपन को फिर से जीना चाहें …

मैं सोचती हूं कि कुछ एक बातें …

जैसाकि मार पिटाई , गुस्सा न करें … ये बात आप जानते ही हैं पर मानते नही है … इसे मानिए भी ..

समय दें …

इस समय के बीच में मोबाईल भी न आएं … ज्यादातर पैरेंटस क्या करते हैं कि हां भई … बच्चों के साथ हूं समय दे रही हूं घर पर जरुर है पर मोबाईल के साथ … इसलिए समय दें … क्वालिटी टाईम … ये भी नही होना चाहिए कि जब कोई प्रोब्लम आएं तभी बात करें … हर रोज आधा घंटा तो जरुर दें … चाहे वो डिनर टाईम हो या सुबह का समय हो ..वो आप पर है ..

तुलना न करें … एक मेरे पास मैसेज आया कि मेरा बेटा तीन साल का है वो टयूशन नही जाना चाह्ता जबकि उसकी उम्र के सारे बच्चे जाते हैं … देखिए यही है तुलना … दूसरे बच्चों से नही कई बार घर के भाई बहन से ही तुलना करने लगते हैं ऐसे में बच्चे को कॉम्प्लेक्स भर जाता है और ईर्ष्या की भावना आने लगती है …

बच्चों को ईमानदार बनना सीखाएं इसकी महत्ता बताए

बच्चों को बात बात पर प्रोत्साहित करें …  बजाय ये कहने केे  तुम नही कर सकतेे… ये कहिए तुुुुम क्योंं नहीं कर सकते … Give them encouragement along with constructive criticism.  मान लीजिए आपने एक पौधा लगाया है उसे बोलिए कि इसका ख्याल रखो समय समय पर पानी दो  इसमे जब फूल आ जाएगें हम पार्टी करेंगें …या चिडिया के लिए पानी रखना .. या किसी बहुत गरीब की मदद करना … एक परिवार हमेशा अपने अपने  जन्मदिन पर वृद्धाश्रम जाता है वही बात वही गुण बच्चे में भी आ गए ..वो स्कूल में भी टोफी देता और वृद्धाश्रम ओल्ड एज होम भी जाता..

 बच्चों को कभी ज्यादा समय के लिए नौकर या ड्राईवर के भरोसे न छोडे. इन पर पूरा ख्याल रखें या सीसीटीवी लगवा लें … ये खासकर उन महिलाओं के लिए है जो ज्यादातर किटी पार्टी में अपना सोशल स्टेटस बनाने में व्यस्त रहती है और बच्चे की ओर जरा भी ध्यान नही देती

Be the role model .. बच्चों के साथ बच्चा बन जाएं … उसके साथ जीए … समय गुजरते देर नही लगती … बच्चे अगर अच्छे और प्यारे माहौल में पला है तो हमेशा याद करेगा और बचपन में जाना चाहेगा … नही तो … !!! ???

जब बच्चा झूठ बोले तो – What To Do When Child Lies

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July 27, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

जब बच्चा झूठ बोले तो – What To Do When Child Lies

Life of a Teenager

जब बच्चा झूठ बोले तो – what to do when child lies- कल एक जानकार के घर जाना  हुआ ... पैरेंट्स  नें अपने 3 साल के बेटे को बुलाया और बोला कि राईम सुनाओ जो स्कूल मे सीखी है … उसने सुनाई जॉनी, जॉनी यस पापा eating  शुगर नो पापा टेलिंग लाइस नो पापा  open your mouth ha ha ha… छोटे बच्चों को कैसे समझाए – जब बच्चा झूठ बोले – Parenting Tips

जब बच्चा झूठ बोले तो – what to do when child lies

तभी दरवाजे पर घंटी बजी … कोई मिलने आए होंगें तो मेरी जानकर ने बोला अपने बेटे को कि अगर पडोस वाली आंटी हो तो कह देना मम्मी घर पर नही है …

और वो बच्छा बहुत खुशी से भागा और झूठ बोल कर आया और मम्मी से बोला कि बोल दिया आंटी चली गई और मुझ्से बोला दूसरी भी सुनाऊ … यकीन मानिए मेरा राईम सुनने का उत्साह खत्म हो गया था …

क्या फायदा हुआ जब हम असल जिंदगी में झूठ बुलवाते हैं …

कई बार पापा लोग भी बच्चों को बोल देते हैं आज आफिस से जल्दी आ जाऊंगा फिर आईसक्रीम खाने चलेंगें पर पापा का कोई समय नही … ऐसे में बच्चा गुस्सा करेगा …

नाराज होगा तो हम क्या कहेंगें … बच्चा बिगड गया है … तो हम ये भी मान सकते हैं कि बच्चे अगर झूठ बोलते हैं तो इसके लिए ज्यादातर जिम्मेदार ज्यादा मामलों में मां-बाप ही होते हैं।बच्चें वही करते हैं जो देखते हैं …

घर उनकी पहली पाठशाला होता है और पैरेंट्स  टीचर

पर ज्यादातर होते हैं हमेशा नही …

ये उनकी संगत का असर भी हो सकता है इसलिए कारण जानने की कोशिश करनी चाहिए कि पर मार पिटाई करके ही सुधार आ सकता है

ये सम्भव नही इससे और ज्यादा बिगडने के चांस होते हैं …

patience की बहुत जरुरत होती है

बहुत साल पहले हमारे पडोस में एक परिवार रहता था उनकी बेटी भी बहुत झूठ बोलती थी मम्मी बहुत समझती पर वो समझती ही नही थी … एक दिन स्कूल में जब टेस्ट हुआ और वो फेल थी तो टीचर ने बोला कि सभी बच्चे घर से मम्मी के साईन करवा कर लाएगें और जो नही लाएगा उसे सजा मिलेगी …

उस शाम को वो लडकी पहले सहेलियों के साथ खेलती रही फिर पार्क चली गई … रात को सो गई … सुबह उठी और तैयार होकर स्कूल चली गई … स्कूल जाकर ख्याल आया कि मम्मी के साईन तो करवाए नही …

अब एक दो पक्की सहेलियों को बता दिया … और क्या किया कि चुपचाप खुद ही साईन कर दिए मम्मी के … अब जिन बच्चों को सजा मिली उन्हें पता था कि ये साईन नही करवा कर लाई है और अपने आप किए है …

बात टीचर तक पहुंची और … पांच ही मिनट में टीचर ने उसकी मम्मी को स्कूल बुलवा लिया … अब उस लडकी की हालत खस्ता … सारे भगवान के नाम ले लिए … मन ही मन सोचा कि आज के बाद से झूठ न्ही बोलूगी …

हे भगवान बचा ले …  थोडी देर में मम्मी आई और उनसे पूछा गया कि क्या आपने इसकी कॉपी पर साईन किए हैं उन्होनें हैरानी से उसकी तरफ देखा …

मन में तो बहुत गुस्सा था पर अचानक उनके मुंह से निकला कि हां जब ये कॉपी लेकर आई तो मैं किचन मे कुछ काम कर रही थी इसलिए सही से साईन नही कर पाई …

उनकी बेटी अपनी कॉपी लेकर क्लास में चली गई और उसकी मम्मी  वापिस लौट गई…

जब स्कूल से वो वापिस लौटी तो एकदम बदल चुकी थी … उस दिन के बाद से उसने कभी झूठ नही बोला उसे सबक मिल गया था …

कई बार patience रख कर माता पिता को बच्चों को समझाना चाहिए पर उससे पहले ये भी कोशिश करनी चाहिए कि वो झूठ न बोले …

वैसे आप कैसे समझातें हैं जब बच्चा झूठ बोलता है  जरुर बताईएगा …

जब बच्चा झूठ बोले तो – what to do when child lies

झूठ के पाँव नहीं होते, झूठ नहीं बोलना चाहिए, झूठ बोल, झूठ बोलना पाप है, झूठ मत बोलो

 

July 26, 2017 By Monica Gupta 1 Comment

How to Write a Story for Children – बच्चों की कहानी कैसे लिखें – कैसे लिखें कहानी

 राइटर कैसे बने इन हिंदी

 How to Write a Story for Children – बच्चों की कहानी कैसे लिखें – कैसे लिखें कहानी  – राइटर कैसे बने इन हिंदी – कहानी कैसे लिखें – writer kaise bane –  बच्चों की कहानी कैसे लिखें . कहानी इन हिंदी फॉर चाइल्ड- कहानी ऑनलाइन.  बहुत सारे मैसेज आते हैं कि हम भी लिखना चाहते हैं बच्चों के लिए बताईए कि कैसे लिखें … तो आज मैं कहानी कैसे लिखी जाती है बताती हूं अगर आप मेरी वीडियो देखते रहते हैं तो मैंने एक कहानी को लेकर बताया था कि कैसे बन जाती है कहानी … आज बच्चों की कहानी कैसे लिखें ये बताती हूं

How to Write a Story for Children – बच्चों की कहानी कैसे लिखें – कैसे लिखें कहानी

मैं हूं राजकुमारी … ये मैंने लिखी थी बहुत साल पहले… और इस किताब को हरियाणा साहित्य अकादमी की तरफ से बाल साहित्य सम्मान भी मिला था …

बच्चों की कहानी के लिए खुद का बालमन होना बहुत जरुरी है … बच्चे जैसा महसूस करना बहुत जरुरी है…मैंनें जब ये कहानी लिखी थी तब मैं किसी के घर गई थी और उनके बच्चे कार्टून भी देख रहे थे और खेल भी रहे थे … कार्टून चल रही थी सिंड्रेला की … और वो लडकी कार्टून देखते देखते उठी और बहुत प्यारे शूज ले आई और मुझे दिखाते हुए बोली कि ये देखो मेरे शूज .. पापा लाए हैं … प्यारे हैं ना … इसी बीच में उसके छोटे छोटे दोस्त भी आ गए और वो खेलने लगे …

 

उन सब बच्चों में लडकी सबसे बडी थी तो वो सब को हिदायत दे रही थी और बच्चों को डांट भी रही थी …अपने दोस्तों को भी उसने शूज दिखाए जब एक बच्चे ने कहा पहन कर तो दिखाओ तो उसके पांव में फंसे ही नही … इतने में एक और कार्टून शुरु हो गई थी … जिसमे एक लडकी के लम्बे बाल होते हैं और एक राजकुमार उसके बाल पकड कर ऊपर आता है …

बस अब मुझे आईडिया मिल गया था और मोटा मोटा मैंनें नोट कर लिया और घर भागी … असल में,  एक भी एक पहचान होती है लेखकों की जब आईडिया आता है और लिख नही लेते आधीर से हो जाते हैं …

अब मेरी कहानी बनी … मैं हूं राजकुमारी मणि … 6 लडकी होती हैं बहुत प्यारी और गोल मटोल …  एक शाम उसके घर पापा के दोस्त के बच्चे आते हैं तो वो क्योकि सभी बच्चों में सबसे बडी होती है तो धाक जमानी शुरु कर देती है कि मैं हूं राजकुमारी …

अब बच्चे पूछ्ते हैं कैसे … वो बताती है क्योकि उसके पास सिंड्रेला जैसे शूज है … वो भाग कर शूज लाती है पर पहन नही पाती … फिर वो बोलती है कि तुमने कहा नी सुनी है जिसमे एक लडकी के इतने लम्बे बाल होते हैं कि एक राजकुमार उसके बाल पकड कर ऊपर आता है उससे मिलने महल में …

मैं भी राजकुमारी हूं … तुम मेरी चोटी पकडो और जैसे ही वो उसकी चोटी पकडते हैं वो दर्द से चिल्ला उठती है … और बच्चे डर कर उसके बाल छोड देते हैं … और हंसने लगते हैं कि तू राजकुमारी नही है … नही है …

इतने में मणि का डोगी आ जाता है अंदर और वो बताती है कि फ्राग प्रिंस की कहा नी तो जरुर सुनी होगी कि जब एक किस करने से मेंढक राजकुमार बन जाता है … और बच्चों पर अपनी धाक जमाने के लिए वो अपने dog  को जोर से खींचती है और dog को पता नही क्या होता है वो उसे काट लेता है …

और फिर उसके पापा फटाफट से डाक्टर  के पास ले जाते हैं और डाक्टर सूई लगाकर उसेका इलाज करता है जब उसकी आंख खुलती है तो उसके पापा डाक्टर को कह रहे होते हैं ये तो मेरी राजकुमारी है राजकुमारी … तब मणि स्माईल देती है और बोलती है कि और नही तो क्या .. मैं हूं अपने पापा की राजकुमारी मणि…

अब बच्चों की कहानी भी हो गई , परियों की भी बात हो गई … पुरानी कहानियों के बारे में भी बता दिया… तो ऐसे बन जाती हैं कहानी … कोशिश कीजिए चारो तरफ ध्यान से गौर से देखिए … बिखरी हुई हैं कहानियां …

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