Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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January 15, 2019 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Be a Good Son – एक अच्छा बेटा कैसे बनें – Relationship Advice for Teenagers

How to Be a Good Son

How to Be a Good Son – एक अच्छा बेटा कैसे बनें –   Qualities of a Good Son – Tips for Healthy Relationships with Your Parents – अगर हम अच्छा बच्चा बनेंगे तो माता पिता न सिर्फ हम  पर गर्व करेंगे बल्कि ये भी कहेंगें कि हर जन्म में आप ही मेरे बच्चे बनोंं… तो देखिए कितनी खुशी होगी.. तो किन बातों का ख्याल रखें.. मैं बहुत ज्यादा नही सिर्फ 7 बातें ही बता रही हूं…

How to Be a Good Son

Relationship Advice for Teenagers –  Tips for Healthy Relationships with Your Parents –  How to Be a Good Son as a Child Advice for Teenagers – Teenage Relationship Advice – How to Be a Good Boy to Your Parents – Have a Better Relationship with Your Parents –

 

How to Be a Good Son

January 14, 2019 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Impress Anyone in Hindi – किसी को भी impress कैसे करें –

How to Impress Anyone in Hindi

How to Impress Anyone in Hindi – किसी को भी impress कैसे करें – How to impress someone… how to make anyone attracted to you… how to make anyone instantly like you

दूसरों को Impress कैसे करें – जब Impress करने की बात आती है तो हम आम तौर पर किसी और की तरह बनने की कोशिश करते हैं ताकि हम दूसरे को जल्द से जल्द  Impress कर सकें… हाव भाव अजीबो गरीब कर लेगें , अजीब तरीके से बात करेंगें, स्टाईल मारेंगें…  इस चक्कर में अपनी जो originality होती है वो भी खो देते हैं.. जबकि हम जैसे हैं वैसे ही बने रह कर भी दूसरे को Impress कर सकते हैं… कुछ बाते ख्याल रखें तो आसानी से हम किसी को प्रभावित कर सकते हैं… तीन बातें बता रही हूं

How to Impress Anyone in Hindi

1.तो पहले तो जो हम हैं वही रहिए… Be yourself.. हम unique  हैं… लोग तो हम जो भी duplicate बनेंगे उसमे कुछ न कुछ पोईंट निकाल ही लेंगे तो क्यों ना हम जो हैं वही बन कर रहा जाए…

खुद पर काम करना है.. खुद को Create करना है… खुद को खोजना नहीं है कि हम क्या है.. खुद को बनाना है अपनी personality बनानी है.. body language के साथ साथ हमारा confidence हो, Dress sense को अच्छा बनाना है..

body language में eye contact, बात करना, बात सुनना,चेहरे के हाव भाव बहुत सहज हो

फिर बात आती है हमारे confidence की… हमें Confident बनना होगा.. ओवर नहीं पर confident.. ना ही किसी का मजाक बनाना है ऐसा न हो कि कोई कुछ भी बोल कर चला जाए…

दयालु होना चाहिए.. आदर मन देकर बात करें.. और जब दूसरे की मदद करें ये सोच कर नहीं करें कि वो भी मदद करेगा… हमें उदार बनना चाहिए.. सैलफिश नहीं बनना चाहिए… .

और इसी के साथ अगर हमें दूसरे में भी कोई अच्छी बात नजर आए तो उसे Appreciate जरुर करना चाहिए.. ये खुद में एक पॉजिटिव क्वालिटी होती है… चेहरे पर हमेशा हलकी सी स्माईल हो.. सामने वाले को ऐसा महसूस हो कि हम उससे मिलकर बहुत खुश हैं..

2.जो चीज नहीं पसंद वो नहीं करनी जैसे मान लीजिए आपको स्मोक पसंद नहीं पर एक दोस्त कहता है कि कर ले.. तो हम कर लेते हैं मना नहीं कर पाते.. जबकि मना करना है.. बेशक, अगर उसे बुरा लगे तो साथ छोड दीजिए.. ऐसे दोस्त भी किस काम के जो गलत आदत डलवाए …

यानि हमारे दोस्त सही मायने में true और real हों… ये न हो कि वो बहुत पैसे वाला है या बहुत जाना माना नाम है वो रियल हो, केयरिंग हों…

और दोस्तों के इलावा लोगो से हैलो हाय सभी से रखिए और सभी को स्माईल दीजिए.. compliment दीजिए.. कई बार अच्छे दोस्त मिल जाते हैं…

  1. ये सब होने के बाद एक चीज जो बहुत जरुरी है वो है हमारा talent उसे बाहर निकालिए हम में क्या खूबी है.. देखिए कोई न कोई खूबी तो है ही जरुरत है उसे पहचान कर बाहर निकालने की… ताकि लोग देखे और इम्प्रेस हों…

मान लीजिए बहुत सारे लोग आपसे इम्प्रेस हो गए… आपने बहुत दोस्त बना लिए.. तो फेक नहीं होना वैसे ही रहना है और दूसरी बात ये क्योंकि ये जरुरी नहीं जिसे आप इम्प्रेस करने के कोशिश करे वो इम्प्रेस हो ही जाए ये जरुरी भी नहीं… और जरुरत भी नहीं… आप अपनी वेल्यू समझिए अपना कॉफिडेस बनाए रखें मुस्कुराते रहें और सिर उठा कर जीए…

January 11, 2019 By Monica Gupta Leave a Comment

Shukravar Vrat Katha – शुक्रवार व्रत कथा – Friday Fast Story –

Shukravar Vrat Katha

Shukravar Vrat Katha – शुक्रवार व्रत कथा – Friday Fast Story – धार्मिक ग्रथों में शुक्रवार का दिन संतोषी माता की पूजा के लिए निर्धारित है। अत्यंत ही सरल, आसानी से प्रसन्न होने वाली संतोषी माता का व्रत हर तरह से गृहस्थी को धन-धान्य, पुत्र, अन्न-वस्त्र से परिपूर्ण रखता है मां अपने भक्त को हर कष्ट से बचाती हैं

Shukravar Vrat Katha – शुक्रवार व्रत कथा – Friday Fast Story –

आईए सुनते हैं शुक्रवार व्रत कथा…

पौराणिक कथा के अनुसार एक बुढ़िया के के सात बेटे थे। छः बेटे कमाते थे और सातवां बेटा नहीं कमाता था। बूढ़ी माँ कमाने वाले बेटों के लिए भोजन बनाकर उन्हें खिलाती और बची हुई झूठन सातवें बेटे को दे दिया करती थी। बेटे को यह पता नहीं था।

उसकी पत्नी ने उसे यह बात बताई। उसे विश्वास नहीं हुआ। छुपकर देखा तो उसे पता चला की यह सच था। उसे बड़ा दुःख हुआ। माँ के खाना खाने बुलाने पर वह बोला – मैं यह खाना नहीं खाऊंगा। परदेस जाकर कमाई करूँगा।

माँ बोली – कल जाता हो तो आज ही चला जा। यह सुनकर वह तुरंत घर से निकल गया।

रास्ते में पत्नी से मिला। वह गोबर से कंडे बना रही थी। बोला – मैं परदेस जा रहा हूँ कुछ समय बाद लौटूंगा। तुम अपना धर्म का पालन करते हुए ध्यान से रहना।

वह बोली आप मेरी चिंता ना करें। मुझे भूलना मत और मुझे अपनी कुछ निशानी दे दो। उसे देखकर मैं समय बिता लूँगी। उसने उसे अपनी अंगूठी दे दी और चल पड़ा।

एक बड़े शहर में बड़ी दुकान देखकर उसने काम माँगा। वहां जरुरत थी इसलिए सेठ ने उसे काम पर रख लिया। उसने दिन रात मेहनत की। सेठ उसे तरक्की देता गया।

कुछ ही समय में अपनी मेहनत और लगन से उसने सेठ का विश्वास इतना जीत लिया की सेठ ने उसे अपना पार्टनर बना लिया। कुछ समय बाद सारा काम उसे सौंप कर सेठ यात्रा पर निकल गया। अब वह खुद बड़ा सेठ बन चुका था।

 

उधर उसकी पत्नी पर बड़े जुल्म हो रहे थे। घर के सभी लोग उससे दिन भर काम करवाते। जंगल में लकड़ी लाने भेजते। भूसे की रोटी खाने को देते। नारियल के कटोरे में पानी पिलाते।

एक दिन जंगल जाते समय उसने रास्ते में कुछ औरतों को संतोषी माता का व्रत करते देखा। कथा कहते हुए सुना। उसने पूछा की यह व्रत कैसे करते है , और इसे करने से क्या होता है।

उनमे से एक औरत ने बताया कि यह संतोषी माता का व्रत है। इसे करने से दरिद्रता मिटती है , मन की चिंता दूर होती है , कुंवारों को मनपसंद जीवन साथी मिलता है , रोग दूर होते है , हर प्रकार का सुख  प्राप्त होता है।

इसे करने के लिए अपनी सुविधा और शक्ति  के अनुसार गुड़ चना खरीद लेना। हर शुक्रवार व्रत करना और कथा कहना या सुनना। जब तक कार्य सिद्ध नहीं हो जाता बिना क्रम तोड़े व्रत करना।

कथा सुनने वाला कोई ना मिले तो दीपक को सामने रखकर कथा कहना। कार्य सिद्ध होने पर उद्यापन करना।

 

आठ लड़कों को भोजन कराना। लड़के परिवार के ही हो तो अच्छा नहीं तो पड़ोस से भी बुला सकते हैं। भोजन करवाकर व केला आदि फल देकर विदा करना। खट्टे फल नहीं देना।

उस दिन घर में कोई खटाई ना खाये।

सारी विधि जानकर उसने गुड़ चने खरीद लिए। रास्ते में संतोषी माता के मंदिर में भोग लगाकर याचना करने लगी – माँ मुझे व्रत के नियम कायदे नहीं पता। मैं शुक्रवार का व्रत निष्ठां से करुँगी , मेरा दुःख दूर करना।

एक शुक्रवार बीता ,दूसरे शुक्रवार को पति का पत्र आया ,तीसरे शुक्रवार पति के भेजे रूपये आ गए। परन्तु सब घर वाले ताना मारने से नहीं चूकते।

 

दुखी होकर माता के मंदिर में प्रार्थना करने लगी – माँ मुझे पैसा नहीं चाहिए। मुझे अपने स्वामी के दर्शन करने हैं। माता ने उसे आशीर्वाद देकर कहा – तेरा पति जल्दी ही आएगा। वह बहुत खुश हुई।

परदेस में उसके पति के पास बिल्कुल समय नहीं था। दिनभर व्यस्त रहता था। माँ संतोषी ने उसके सपने में आकर उसे बताया कि उसकी पत्नी बहुत दुखी है। उसे उसके पास जाना चाहिए। उसे पत्नी की बहुत चिंता होने लगी। दुकान बेचकर पत्नी के लिए कपड़े , गहने और ढ़ेर सारा पैसा लेकर रवाना हो गया।

बहु जंगल से लकड़ी काटकर लौट रही थी तब उसने धूल का गुबार उठते देखा। माता ने उसे बताया की उसका पति आ रहा है। वह घर माँ के पास जा रहा है।

इसलिए वह भी घर जाये और चौक में लकड़ी का गट्ठर डाल कर आवाज लगाये – लो सासुजी लकड़ी का गट्ठर , भूसी की रोटी दो , नारियल के खोखे में पानी दो ,आज कौन मेहमान आया है। उसने ऐसा ही किया।

आवाज सुनकर उसका पति बाहर आया और अंगूठी देखकर व्याकुलता के साथ माँ से पूछा की ये कौन है ? माँ बोली ये तेरी बहु है। दिन भर घूमती रहती है। भूख लगे तो यहाँ आकर खाना खा लेती है। काम कुछ करती नहीं है।  तुझे दिखाने के लिए नाटक कर रही है।

उसे विश्वास नहीं हुआ और माँ से चाबी लेकर ऊपर वाली मंजिल के कमरे में अपनी पत्नी के साथ चला गया। कमरे को महंगे सामान से सजा कर महल जैसा बना दिया। दोनों सुख से रहने लगे।

बहु में अपने पति से कहा – मुझे माता का उद्यापन करना है। पति ने स्वीकृति दे दी। ख़ुशी से माता के उद्यापन की तैयारी करने लगी। जेठानी के बच्चों को खाने का न्योता दिया।

उसका उद्यापन बिगड़ने के लिए जेठानी ने बच्चों से कहा की तुम खटाई मांगना। बच्चों ने वैसा ही किया पर उसने खटाई देने से मना कर दिया तो बच्चों ने पैसे मांगे जो उसने दे दिए।

बच्चों ने खटाई खरीद कर खा ली। माता क्रुद्ध हो गई। सिपाही आये और उसके पति को अपने साथ ले गए। जेठानी बोली चोरी करके पैसे इकट्ठे किये है। इसलिए सिपाही पकड़कर ले गए।

बहु रोती बिलखती माता के मंदिर गई। माँ ने कहा तुमसे भूल हुई यह उसी का परिणाम है। बहु क्षमा मांग कर बोली में फिर से उद्यापन करुँगी और अब ऐसी भूल नहीं होगी। मेरे पति को वापस बुलाओ।

माता ने कहा वह रास्ते में आता हुआ मिल जायेगा। उसका पति रास्ते में मिला और कहने लगा इतना धन कमाया है उसका टेक्स भरने गया था। सिपाही इसी कारण आये थे। बहु ने चैन की साँस ली।

शुक्रवार आने पर फिर से उद्यापन की तैयारी कर ली। इस बार जेठानी के बच्चों को नहीं बुलाया। पंडित के बच्चों को बुलाकर प्रेमपूर्वक भोजन कराया और केले देकर विदा किया। माता बहुत प्रसन्न हुई।

कुछ समय बाद उसे बहुत सुन्दर पुत्र प्राप्त हुआ। पुत्र को लेकर रोजाना माता के मंदिर जाती थी।

एक दिन माता ने सोचा आज मैं इसके घर जाकर देखती हूँ।

माता ने भयानक रूप अपनाया। गुड़ और चने से सना मुख , सूंड जैसे होंठ जिन पर मक्खियां भिनभिना रही थी। दहलीज पर पांव रखते ही उसकी सास चिल्लाने लगी।

अरे देखो कोई चुड़ैल आ गई है। इसे भगाओ नहीं तो किसी को खा जाएगी। घर के सब लोग डर गए और चिल्लाने लगे। घर के खिड़की दरवाजे बंद कर दिए। छोटी बहु देखते ही पहचान गई और प्रसन्न होकर बोली – आज मेरी माता जी मेरे घर आई हैं।

सास से बोली माँ जी डरो मत ये वही संतोषी माता जी हैं जिनकी मैं पूजा करती हूँ और जिनका व्रत रखती हूँ। यह कह कर उसने घर के सब खिड़की दरवाजे खोल दिए सभी लोग माँ के चरणों में गिर गए

और कहने लगे – माँ , हम अज्ञानी हैं। आपका व्रत भंग करके हमने जो अपराध किया है उसके लिए हमें क्षमा करो। माँ ने सभी को क्षमा करके कुशल मंगल का आशीर्वाद दिया और प्रेम पूर्वक रहने की सीख दी। सब आनंद से रहने लगे।

बहु को जैसा फल दिया संतोषी माँ सबको वैसा ही दे। जो यह कहानी पढ़े ,उसका मनोरथ पूर्ण हो।

बोलो संतोषी माता की जय !!!

Shukravar Vrat Katha

 

 

January 10, 2019 By Monica Gupta Leave a Comment

Difficult Times in Life – जीवन में कठिन समय – Dealing with Difficult Times in Life –

Difficult Times in Life – जीवन में कठिन समय – Dealing with Difficult Times in Life – कठिन समय का सामना कैसे करें ? What to Do in Difficult Times – मन का हो तो अच्छा,… मन का न हो तो और भी अच्छा.. क्योंकि अब वो होगा भगवान को अच्छा लगता है.. जिंदगी में उतार चढ़ाव आते रहते हैं… जब समय अच्छा होता है तो समय का पता ही नहीं चलता पर जब कठिन समय होता है तो समय बीतता ही नहीं… ऐसा लगता है मानो समय ठहर सा गया.. ऐसे समय में हमें किन बातों का ख्याल रखना चाहिए… ताकि हम उसका सामना कर सकें… तो इसके लिए मैं बता रही हूं 9 बातें…

Difficult Times in Life

  1. सबसे पहले तो अपना ख्याल रखना है… अपने प्रति अच्छे रहिए.. हम क्या करते हैं कि खाना बंद पीना  बंद,  बाहर आना जाना बंद, या किसी नशे में डूब जाते हैं… तो खुद को टार्चर नहीं करना.. खुद का ख्याल रखना है.. हंसो, बोलो, बाहर आओ, जाओ… इससे दिमाग फ्रेश होगा..
  2. फिर ये सोचना है कि लाईफ में तो सभी के साथ उतार चढाव आते ही रहते हैं मेरे साथ भी हो गया..

जीवन में यदि उतार-चढ़ाव अर्थात सुख-दुख न हों तो जीवन अर्थहीन है क्योंकि ईसीजी में सीधी रेखा का मतलब मृत्यु होता है

ये जो प्रोब्लम मुझ पर आई है… इसका सामना करना है.. और वैसे भी इस संसार में कुछ भी परमानेंट नहीं है सभी ये आई है तो चली भी जाएगी.. ये भी Temporary है ये समय भी बीत जाएगा.. दिस टू शैल पास..

वो कहते भी है ना अच्छे समय की एक बुरी बात कि वो हमेशा नहीं रहता और बुरे वक्त की एक अच्छी बात कि वो भी हमेशा नहीं रहता

3.जरुरत है कि हम negativity से दूर रहें….कोई भी नेगेटिव विचार हमारे मन में न आए… बजाय कोसने के कि ये हमारे साथ ही क्यों हुआ.. मैं क्या करुं ? मैं तो सामना कर ही नहीं सकता.. तो जो हमारा सर्कल है जिसमे नेगेटिव सोच वाले लोग हैं उनसे दूरी बना कर रखनी चाहिए

  1. अपनी unique strength पर खुद पर विश्वास रखना है खुद से बात करनी है कि मैं इसका मुकाबला करुंगा…

मुश्किले केवल बेहतरीन लोगो के हिस्से में ही आती हैं क्योंकि वो इसे बेहतरीन ढंग से निभाने की ताकत रखते हैं

ये सोचना चाहिए कि हो सकता है ये समय और भी ज्यादा मजबूत बनाने के लिए आया हो..

  1. ये जो कठिन समय है जिस भी वजह से समय आया तो मुझे सबक मिला है… मैंने इससे बहुत कुछ सीखा है और अब ऐसी कोई गलती नहीं होगी…

6.बेशक समय लगता है पर सब सही होगा.. कई बार लगता है समय ठहर गया.. पर ये सोच रखिए कि बहुत अच्छा होगा…  काम का रिजल्ट  देर से मिले निराश नहीं होना चाहिए यह सोचिए की मकान बनाने से ज्यादा समय महल बनाने में लगता है. हो सकता है कि हमारे लिए कुछ बहुत शानदार बन रहा हो..

  1. ऐसे में किसी से जवाब देही नहीं है.. अपने हिसाब से चलना है सही गलत देख कर फैसला लेना है.. कई बार लोगो से सलाह लेते हैं तो बहुत लोग तो बस मजाक ही बनाते हैं तो

8. grateful होना है thankful होना है… अगर हम अपनी सोच पॉजिटिव रखेंगें और बात बात पर कोसने की बजाय  छोटी से छोटी बात को एप्रीशिवेट करेंगें… thankful होंगें तो तनाव कम होता जाएगा..

9. Blessing बन कर आया है ये टाईम… जो हो रहा है अच्छे के लिए हो रहा है और जो होगा.. अच्छा ही होगा.. वो कहते भी है ना कि मन का हो तो अच्छा,… मन का न हो तो और भी अच्छा.. क्योंकि अब वो होगा भगवान को अच्छा लगता है..

तो मजबूत बनिए और मजबूती से सामना कीजिए… मूव ऑन…

 Difficult Times in Life

 

January 9, 2019 By Monica Gupta Leave a Comment

Things Parents should Never Do – बच्चों को ना सिखाएं ये बातें –

Things Parents should Never Do

Things Parents should Never Do – बच्चों को ना सिखाएं ये बातें – क्या पेरेंट्स बच्चों को गलत बातें सिखलाते हैं.. आपका जवाब होगा.. बिल्कुल नहीं… भला पेरेंट्स क्यों सिखलाएगें बच्चों को गलत बाते… पर ऐसा होता है मैं आज आपको 7 बातें बता रही हूं जो आमतौर पर हर घर में जाने अंजाने सिखला दी जाती हैं.. क्या हैं वो बातें जो आमतौर पर कही जाती हैं..

 Things Parents should Never Do – बच्चों को ना सिखाएं ये बातें –

 

1. जैसा कि झूठ बोलना.. झूठ बोलना तो कोई पेरेंटस अपने बच्चों को नहीं सीखाते पर…

जैसा कि मान लीजिए कोई फोन आया तो मम्मी टीवी सीरियल देख रही हैं और बोलती है कि बोल दे मम्मी अभी घर पर नहीं है.. मार्किट गई हुई हैं और बच्चा बोल देता है…

ऐसे में अगर बच्चे को बोल दे कि बोल दो मैं बिजी हूं खुद ही फोन कर लूंगी थोडी देर में… तो एक सही मैसेज जाएगा…

2.फिर बात आती है तुलना करना.. तुलना तो कभी नहीं करते पेरेट्स दो बच्चे हैं घर पर और खेल रहे हैं मम्मी बोलती है चलो उठो अब खाना खा  लो.. एक बच्चा उठता है और टेबल पर आ जाता है दूसरा वही खेल रहा है तो मम्मी क्या बोलती है अपने भाई से सीखो कुछ.. कितना समझदार है और तुम पता नहीं किस पर गए हो…

अब यही बात बिना तुलना के भी समझाई जा सकती थी कि बेटा चलो आ जाओ.. खाना खा कर खेल लेना. इससे हम दोनों बच्चों के बीच में खुद ही अंतर पैदा कर रहे हैं…

3.हम कई बार बच्चे को गिल्टी फील करवा देते हैं… जैसे दो मम्मिया आपस में बात कर रही हैं अरे मैं तो इतनी अच्छी जॉब कर रही थी… इसके होने पर छोडनी पडी..

दूसरी बोलती है अरे क्या फिगर थी मेरी.. बच्चा होने के बाद फीड देने के बाद तो मेरी फिगर ही खराब हो गई…  ऐसी बाते सुन कर बच्चे गिल्टी फील करने लगते हैं कि देखो… ये हमारी वजह से हुआ.. जबकि ये दोनो बातें तो अब ही हो सकती हैं अपनी फीगर का भी ख्याल रखा जा सकता है और घर बैठे कुछ काम भी किया जा सकता है..  है ना तो फिर किसलिए ऐसी बात कहनी जिससे मासूम बच्चे की फीलिंग हर्ट हो..

एक और उदाहरण देती हूं कि बच्चे को अच्छा नहीं करने देते.. एक बच्चा मार्किट जाते वक्त अगर अपनी टॉफी से गरीब बच्चे को दे देता है तो अरे?? किस लिए तुमने.. ऐसा किसलिए किया.. कोई जरुरत नहीं होती इन्हें देने की… बेकार लोग होते हैं ये.. !!

अगर वही अपने बच्चे की पीठ थपथपाते तो कितनी खुशी होती बच्चे को और वो आगे भी छोटी छोटी मदद करता रहता..

4. कई बार हम बच्चे को एनकरेज करते हैं कि वो कुछ भी कर सकते हैं.. ये भी सही नहीं..

जैसे मान लीजिए पेरेंटस और बच्चे पार्क में है और बच्चा केला खा रहा है.. और छिलका वही फेंक दिया और पेरेंटस ने कुछ नहीं कहा माली आया उसने बोला कि बच्चे ने छिलका डाल दिया तो पेरेंटस बोलते हैं एक ही तो केला खाया है और लोगो को तो बोलो बच्चे ने डाल दिया तो क्या सारा पार्क खराब हो गया क्या ??  और उससे उलझ गए.. जबकि अपनी गलती माननी चाहिए और बच्चे को समझाना चाहिए… ताकि बच्चा स्वच्छता का ख्याल रखे..

5.  बच्चे के Bad Behavior को एनकरेज करते है.. उनकी praise करते हैं..

वो ऐसे की मान लीजिए घर में एक बच्चा है और वो किसी बात की जिद कर रहा है और चीज़ो को गुस्से में फेंक रहा है.. और एक लेडी क्या बोलती है देखा अपने पापा पर गया है उन्हें भी जब गुस्सा आता है तो वो भी ऐसे ही करते हैं… इससे एक तरह से वो बच्चे को एनकरेज ही कर रही हैं.. तो क्या ये सही बात है… बल्कि समझाना चाहिए कि ऐसा नहीं करना चाहिए.. पर क्योंकि बच्चे को praise मिल रही है तो वो और भी और ज्यादा जिद्दी हो गया..

6.  पेरेंटस फोन पर बिजी रहते हैं और बच्चा जब कुछ पूछे तो देख नहीं रहे मैं फोन पर बात कर रहा हूं…या पेरेंटस टीवी सीरियल में बिजी हैं और बच्चा अगर कुछ पूछ रहा है तो उसे गुस्सा कर देते हैं कई बार तो हाथ भी उठा देते हैं..

जबकि फोन होल्ड कर के बच्चे को बता सकते हैं कि मैं अभी आपकी बात सुनता हूं या जिससे फोन पर बात हो रही है उसे बोल सकते हैं कि मैं आपसे दस मिनट बाद बात करता हूं..

रही बात टीवी सीरियल की तो वो या रिकार्डिंग पर लगाया जा सकता है या उसे पॉज किया जा सकता है…

7.  जब भी बच्चे के मार्क्स कम आए तो गुस्सा करना, नालायक की पदवी देना तुम लाईफ में कुछ नहीं कर सकते

जबकि कहना क्या चाहिए कि इससे सबक लो और इम्प्रूव करो.. आगे से ये गलती नहीं करना.. हम ऐसे ही सीखते हैं जिंदगी में.. ताकि बच्चा मोटिवेट हो.. तो देखिए ये हैं कुछ बातें…

Things Parents should Never Do

January 8, 2019 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Deal with Rude People – Dealing with Rude People – Monica Gupta

How to Deal with Rude People

How to Deal with Rude People – Dealing with Rude People – Monica Gupta – Rude people से कैसे  deal करें… माना बुरी है दुनिया हर तरफ धोखा है हम तो अच्छे बने… हमे किसने रोका है – बहुत सारे comments  इस बारे में आते हैं कि लोग कई बार बहुत Rudely behave करते हैं होते हैं उनसे deal कैसे करें…  तो मैं कुछ बातें उनसे share करती हूं..  वही 5 बातें आज आप से भी शेयर कर रही हूं.. How to React When Someone Talks Rudely – What to Do When Someone Talks to You Rudely

How to Deal with Rude People – Dealing with Rude People – Monica Gupta

जब हम उनसे किस तरह से डील करें कि बात कर रहे हैं तो सबसे पहले एक बात जरुर ध्यान में रखनी चाहिए और वो ये कि हमारा मूड बदलता रहता है कभी हम खुश होते हैं तो कभी नाराज… तो कभी सामने वाले की बात का सही जवाब नहीं देते… तो यानि कई बार हम भी तो ऐसे बन जाते हैं… तो वो जो आज हमसे रुडली बात कर रहा है वो भी तो इंसान है उसका मूड भी तो उपर नीचे हो जाता होगा.. तो अगर वो रुड है तो ये मतलब नहीं है कि वो है ही बुरा इंसान…

तो हमें इसे personally नहीं लेना..  लीजिए बेशक मन upset हो जाता है पर ये सोच रखनी है कि ये उसकी प्रोब्लम है मेरी नहीं.. और मैंने अच्छे से डील करना है.. सबसे पहले वजह जानने की कोशिश करनी है कि उसने ऐसे कैसे बात की?

2. Impartial होकर analyze करना है कि वो ऐसा किस लिए हुआ…

क्या ऐसी उसकी आदत तो नहीं…. वो सभी से ऐसे ही बात करते हैं  अगर आदत ही है तो भी ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं और ये भी नहीं कि हम उसे बदल देंगें.. इसका हल भी निकालेग़े solution एक ही दम से निकल जाएगा.. ऐसा भी नहीं… समय लगेगा

3. उसके लिए हमें उसकी rudness का जवाब rude होकर नहीं देना… हमे सभ्य रहना है conversation सही हो.. कोई drama नहीं करना.. drama ही तो हो जाता है जब सामने वाला बोले रुडली फिर हम भी वैसा ही बोले.. दूसरे जो लोग खडे होते हैं देख रहे होते हैं उन्हें ग़ोसिप का मसाला मिल जाता है… Resist करना है खुद को… और avoid करना है.. हमें एक लम्बी सांस लेकर खुद को शांत रखना है…

4. ऐसा शो नहीं होने देना कि आपको भी बहुत गुस्सा आ रहा है… खुद को normal दिखाना है… जैसा कि उससे eye contact  नहीं रखना… अगर वो सामने दिख जाए तो खुद का ध्यान कहीं और कर लेना है और अगर बाय चांस सामने आ ही जाए तो हल्की सी smile  देकर किसी बहाने से सामने से निकल जाना चाहिए..

और अगर बात करनी ही है सामना करना ही है तो सबके सामने नहीं या तो अगर दूसरा कोई कमरे मे है तो उन्हें बाहर जाने को बोल सकते हैं कि जरा दो मिनट बात करनी है या फिर आप उन्हें लेकर बाहर आ जाईए कि आप जरा आईए आपसे बात करनी है…

5. अगर जरुरत लगती है तो उनके फैमिली या दोस्त से बात की जा सकती है या इनसे सलाह ली जा सकती है पर अपनी dignity अपना गरिमा बनाए रखनी है…कई बार जब सामने वाला बहुत रुडली बात कर रहा हो और हम बहुत आराम से से Politely होकर बात करें तो उसमे बदलाव का सकते हैं… क्या हुआ सब ठीक तो है ना.. क्या बात आपको परेशान कर रही है.. क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूं…

पॉजिटिव रहना है… और उसी हिसाब से एक्ट करना है…

माना बुरी है दुनिया हर तरफ धोखा है हम तो अच्छे बने हमे किसने रोका है

January 7, 2019 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Be Mature – Mature कैसे बनें – How to Be Mature and Grow Up – Monica Gupta

How to Be Mature

How to Be Mature – Mature कैसे बनें – How to Be Mature and Grow Up – Monica Gupta –  आमतौर पर हम कहते मिल जाते है कि वो देखो कितना mature हो गया है वो या ये भी कहते मिल जाते हैं कि अरे mature हो जाओ… !! ये कैसे behave करते हो… responsible बनो  तो Mature कैसे बनें ?

How to Be Mature – Mature कैसे बनें –

देखिए जो maturity है ना इसमें उम्र की कोई सीमा नहीं एक दस साल का भी mature हो सकता है वही 60 साल का भी immature… Maturity वो होती है कि हम खुद से और दूसरो से कैसे treat करते हैं कैसे सोचते हैं कैसे behave करते हैं अब प्रश्न ये उठता है कि कैसे बनें mature.. तो मैं आपको इस बारे में 5 बातें बता रही हूं.. इसे अपना कर हम हम अपनी personality  में बदलाव ला सकते हैं…

1.अपने goals Set करें और दृढ़ भी रहें

अगर हम mature होना चाहते हैं तो हमे हमारा एक goal सेट करना पडेगा.. और वो बिल्कुल clear और realistic हो और उसके बाद उस पर लगातार काम करना पडेगा… और उसे achieve करने के लिए पूरी मेहनत करनी पडेगी.. Never give up ये नहीं कि एक गोल बनाया कुछ दिन काम किया नहीं हो पाएगा चलो दूसरा गोल बनाते हैं.. चलो तीसरा गोल बनाते हैं..  उससे immaturity झलकती है.. एक ही बनाईए और लगातार उस पर जुटे रहें..

2. हमें सुनना ज्यादा चाहिए और बोलना कम चाहिए..

self-control होना चाहिए कि हमें कब और क्या बोलना है.. बात को अच्छी तरफ से सुनना आमतौर पर हम बातचीत में बीच में ही बोल पडते हैं.. बात काट देते हैं… बात को सही प्रकार से सुनना maturity की निशानी है… हम कई बार बहुत उतावले हो जाते है जैसे की कभी कोई कमेंट लिखा तो आपका जवाब नहीं आया क्या हो गया आप गुस्सा हो नाराज हो.. तो थोडी सी पैशंस रखनी चाहिए.. किसी भी बात पर ओवर रिएक्ट नहीं करना चाहिए… सिर्फ बोलने में ही नहीं बल्कि लिखने में भी अच्छे etiquette अपनाने चाहिए..

दूसरे लोगो के opinion का भी सम्मान करना चाहिए.. दूसरे की अपनी सोच है point of view अपने विचार हैं… तो उनके नजरिए को न समझना हमारी immaturity है.. अपनी अपनी चलाए जाना… कई बार समझदारी इस बात में भी होती है कि ज्यादा समझदारी न दिखाई जाए… accept कर लेना चाहिए कि सामने वाला जो कह रहा है कि चलो कोई बात नहीं… इसका मतलब ये भी नहीं होता कि हमने हार मान ली… तो ये बात भी अगर हम Develop कर लेंगें तो भी हम समझदार कहलाएगें..

3. कई बार हम जिंदगी में असफल हो गए तो दूसरा जिम्मेदार है…

इस तरह की शिकायत लगा देते हैं.. blame नहीं लगाना दूसरे पर.. खुद मेहनत कीजिए और comfort zone से बाहर आईए… मेहनत कीजिए… बार बार शिकायत करने से हमारी immaturity झलकती है.. अगर कोई हमें compliment देता है या हमें criticise करता है तो उसे maturity से स्वीकार करना चाहिए.. या बार बार दूसरे की बुराई करना दूसरे में नुक्स निकालना भी immature बनाता है… इस तरह की बातों को कई बार ये बहुत बचकानी लगती है… और हमारी immaturity झलकती है.. Avoid करना चाहिए

4.  तो खुद पर विश्वास रखिए..

self-confidence बनाएं अपनी strength को कभी भी underestimate नहीं कीजिए.. और ये तभी होगा जब हम अपने डर का सामना करेंगें… और ये तभी सम्भव होगा जब हम आशावादी होंगें… हमारी सोच पॉजिटिव होगी… जब ये फीलिंग हममे आ जाएगी तो लोग हमें mature कहने लगेंगें..

5. Mature लोगो की संगत में रहिए और mature topics पर बात कीजिए..

जैसे आज की खबर, राजनीति, पर्यावरण आदि पर ये नहीं कि किसी की चुगली कर रहे हैं, बुराई कर रहे है.. ऐसे विषयों पर बात करें जिनसे कुछ सीख सकें.. अच्छे बन कर रखिए,, नम्र बन कर रहिए और जो वायदा करे जो कहें उसे कर के भी दिखाएं… बजाय ये सोचने के कि लोग क्या कहेंगें लोग क्या सोचते हैं हम क्या सोचते हैं अपने बारे में ये ज्यादा जरुरी है..  Mature हम तब नहीं होते जब बडी बडी बाते करने लगते हैं बल्कि mature तब होते हैं जब छोटी छोटी बातें समझने लगते हैं…

How to Be Mature

January 5, 2019 By Monica Gupta Leave a Comment

Shanivar Vrat Katha – शनिवार व्रत कथा – Saturday Fast Story –

Shanivar Vrat Katha

Shanivar Vrat Katha – शनिवार व्रत कथा – Saturday Fast Story –  शनिवार का दिन अपने नाम के अनुरूप ही शनिदेव को समर्पित है। शनि अत्यंत विशिष्ट देव हैं। वे ग्रह भी है और देवता भी…. उनका प्रताप ऐसा है कि वे राजा को रंक और रंक को राजा बना देते हैं…. श्री शनिदेव के पिताश्री- श्री सूर्यनारायण और छाया माताश्री हैं…

Shanivar Vrat Katha

आईए जानते हैं शनिदेव व्रत कथा.. हिंदु पौराणिक कथा के अनुसार एक समय स्वर्गलोक में ‘सबसे बड़ा कौन?’ के प्रश्न पर नौ ग्रहों में वाद-विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि परस्पर भयंकर युद्ध की स्थिति बन गई। निर्णय के लिए सभी देवता देवराज इंद्र के पास पहुँचे और बोले- ‘हे देवराज! आपको निर्णय करना होगा कि हममें से सबसे बड़ा कौन है?’ देवताओं का प्रश्न सुनकर देवराज इंद्र उलझन में पड़ गए।

इंद्र बोले- ‘मैं इस प्रश्न का उत्तर देने में असमर्थ हूँ। हम सभी पृथ्वीलोक में उज्जयिनी नगरी के राजा विक्रमादित्य के पास चलते हैं।

देवराज इंद्र सहित सभी देवता) उज्जयिनी नगरी पहुँचे। महल में पहुँचकर जब देवताओं ने उनसे अपना प्रश्न पूछा तो राजा विक्रमादित्य भी कुछ देर के लिए परेशान हो उठे क्योंकि सभी देवता अपनी-अपनी शक्तियों के कारण महान थे। किसी को भी छोटा या बड़ा कह देने से उनके क्रोध के प्रकोप से भयंकर हानि पहुँच सकती थी।

अचानक राजा विक्रमादित्य को एक उपाय सूझा और उन्होंने विभिन्न धातुओं- सोना, चांदी, कांसा, तांबा), सीसा, रांगा, जस्ता, अभ्रक व लोहे के नौ आसन बनवाए। धातुओं के गुणों के अनुसार सभी आसनों को एक-दूसरे के पीछे रखवाकर उन्होंने देवताओं को अपने-अपने सिंहासन पर बैठने को कहा।

देवताओं के बैठने के बाद राजा विक्रमादित्य ने कहा- ‘आपका निर्णय तो स्वयं हो गया। जो सबसे पहले सिंहासन पर विराजमान है, वहीं सबसे बड़ा है।’

राजा विक्रमादित्य के निर्णय को सुनकर शनि देवता ने सबसे पीछे आसन पर बैठने के कारण अपने को छोटा जानकर क्रोधित होकर कहा- ‘राजा विक्रमादित्य! तुमने मुझे सबसे पीछे बैठाकर मेरा अपमान किया है। तुम मेरी शक्तियों से परिचित नहीं हो। मैं तुम्हारा सर्वनाश कर दूँगा।’

शनि ने कहा- ‘सूर्य एक राशि पर एक महीने, चंद्रमा सवा दो दिन, मंगल डेढ़ महीने, बुध और शुक्र एक महीने, वृहस्पति तेरह महीने रहते हैं, लेकिन मैं किसी राशि पर साढ़े सात वर्ष (साढ़े साती) तक रहता हूँ। बड़े-बड़े देवताओं को मैंने अपने प्रकोप से पीड़ित किया है।

राम को साढ़े साती के कारण ही वन में जाकर रहना पड़ा और रावण को साढ़े साती के कारण ही युद्ध में मृत्यु का शिकार बनना पड़ा। राजा! अब तू भी मेरे प्रकोप से नहीं बच सकेगा।’

इसके बाद अन्य ग्रहों के देवता तो प्रसन्नता के साथ चले गए, परंतु शनिदेव क्रोध के साथ वहाँ से विदा हुए।

राजा विक्रमादित्य पहले की तरह ही न्याय करते रहे। उनके राज्य में सभी स्त्री-पुरुष बहुत आनंद से जीवन-यापन कर रहे थे। कुछ दिन ऐसे ही बीत गए। उधर शनि देवता अपने अपमान को भूले नहीं थे।

विक्रमादित्य से बदला लेने के लिए एक दिन शनिदेव ने घोड़े के व्यापारी का रूप धारण किया और बहुत से घोड़ों के साथ उज्जयिनी नगरी पहुँचे। राजा विक्रमादित्य ने राज्य में किसी घोड़े के व्यापारी के आने का समाचार सुना तो अपने अश्वपाल को कुछ घोड़े खरीदने के लिए भेजा।.

घोड़े बहुत कीमती थे। अश्वपाल ने जब वापस लौटकर इस संबंध में बताया तो राजा विक्रमादित्य ने स्वयं आकर एक सुंदर व शक्तिशाली घोड़े को पसंद किया।

घोड़े की चाल देखने के लिए राजा उस घोड़े पर सवार हुए तो वह घोड़ा बिजली की गति से दौड़ पड़ा।

तेजी से दौड़ता घोड़ा राजा को दूर एक जंगल में ले गया और फिर राजा को वहाँ गिराकर जंगल में कहीं गायब हो गया। राजा अपने नगर को लौटने के लिए जंगल में भटकने लगा। लेकिन उन्हें लौटने का कोई रास्ता नहीं मिला। राजा को भूख-प्यास लग आई। बहुत घूमने पर उसे एक चरवाहा मिला।

राजा ने उससे पानी माँगा। पानी पीकर राजा ने उस चरवाहे को अपनी अँगूठी दे दी। फिर उससे रास्ता पूछकर वह जंगल से निकलकर पास के नगर में पहुँचा।

राजा ने एक सेठ की दुकान पर बैठकर कुछ देर आराम किया। उस सेठ ने राजा से बातचीत की तो राजा ने उसे बताया कि मैं उज्जयिनी नगरी से आया हूँ। राजा के कुछ देर दुकान पर बैठने से सेठजी की बहुत बिक्री हुई।

सेठ ने राजा को बहुत भाग्यवान समझा और खुश होकर उसे अपने घर भोजन के लिए ले गया। सेठ के घर में सोने का एक हार खूँटी पर लटका हुआ था। राजा को उस कमरे में छोड़कर सेठ कुछ देर के लिए बाहर गया।

तभी एक आश्चर्यजनक घटना घटी। राजा के देखते-देखते सोने के उस हार को खूँटी निगल गई।

राजा ने विक्रमादित्य से हार के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसके देखते ही देखते खूँटी ने हार को निगल लिया था। इस पर राजा ने क्रोधित होकर चोरी करने के अपराध में विक्रमादित्य के हाथ-पाँव काटने का आदेश दे दिया। राजा विक्रमादित्य के हाथ-पाँव काटकर उसे नगर की सड़क पर छोड़ दिया गया।

कुछ दिन बाद एक तेली उसे उठाकर अपने घर ले गया और उसे अपने कोल्हू पर बैठा दिया। राजा आवाज देकर बैलों को हाँकता रहता। इस तरह तेली का बैल चलता रहा और राजा को भोजन मिलता रहा। शनि के प्रकोप की साढ़े साती पूरी होने पर वर्षा ऋतु प्रारंभ हुई।

राजा विक्रमादित्य एक रात मेघ मल्हार गा रहा था कि तभी नगर के राजा की लड़की राजकुमारी मोहिनी रथ पर सवार उस तेली के घर के पास से गुजरी। उसने मेघ मल्हार सुना तो उसे बहुत अच्छा लगा और दासी को भेजकर गाने वाले को बुला लाने को कहा।

दासी ने लौटकर राजकुमारी को अपंग राजा के बारे में सब कुछ बता दिया। राजकुमारी उसके मेघ मल्हार से बहुत मोहित हुई। अतः उसने सब कुछ जानकर भी अपंग राजा से विवाह करने का निश्चय कर लिया।

 

राजकुमारी ने अपने माता-पिता से जब यह बात कही तो वे हैरान रह गए। रानी ने मोहिनी को समझाया- ‘बेटी! तेरे भाग्य में तो किसी राजा की रानी होना लिखा है। फिर तू उस अपंग से विवाह करके अपने पाँव पर कुल्हाड़ी क्यों मार रही है?’

राजकुमारी ने अपनी जिद नहीं छोड़ी। अपनी जिद पूरी कराने के लिए उसने भोजन करना छोड़ दिया और प्राण त्याग देने का निश्चय कर लिया।

आखिर राजा-रानी को विवश होकर अपंग विक्रमादित्य से राजकुमारी का विवाह करना पड़ा। विवाह के बाद राजा विक्रमादित्य और राजकुमारी तेली के घर में रहने लगे। उसी रात स्वप्न में शनिदेव ने राजा से कहा- ‘राजा तुमने मेरा प्रकोप देख लिया।

मैंने तुम्हें अपने अपमान का दंड दिया है।’ राजा ने शनिदेव से क्षमा करने को कहा और प्रार्थना की-

‘हे शनिदेव! आपने जितना दुःख मुझे दिया है, अन्य किसी को न देना।’

शनिदेव ने कुछ सोचकर कहा- ‘राजा! मैं तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार करता हूँ। जो कोई स्त्री-पुरुष मेरी पूजा करेगा, शनिवार को व्रत करके मेरी व्रतकथा सुनेगा, उस पर मेरी अनुकम्पा बनी रहेगी।

प्रातःकाल राजा विक्रमादित्य की नींद खुली तो अपने हाथ-पाँव देखकर राजा को बहुत खुशी हुई। उसने मन ही मन शनिदेव को प्रणाम किया। राजकुमारी भी राजा के हाथ-पाँव सही-सलामत देखकर आश्चर्य में डूब गई।

तब राजा विक्रमादित्य ने अपना परिचय देते हुए शनिदेव के प्रकोप की सारी कहानी सुनाई।

सेठ को जब इस बात का पता चला तो दौड़ता हुआ तेली के घर पहुँचा और राजा के चरणों में गिरकर क्षमा माँगने लगा। राजा ने उसे क्षमा कर दिया क्योंकि यह सब तो शनिदेव के प्रकोप के कारण हुआ था।

सेठ राजा को अपने घर ले गया और उसे भोजन कराया। भोजन करते समय वहाँ एक आश्चर्यजनक घटना घटी। सबके देखते-देखते उस खूँटी ने हार उगल दिया। सेठजी ने अपनी बेटी का विवाह भी राजा के साथ कर दिया और बहुत से स्वर्ण-आभूषण, धन आदि देकर राजा को विदा किया।

राजा विक्रमादित्य राजकुमारी मोहिनी और सेठ की बेटी के साथ उज्जयिनी पहुँचे तो नगरवासियों ने हर्ष से उनका स्वागत किया। अगले दिन राजा विक्रमादित्य ने पूरे राज्य में घोषणा कराई कि शनिदेव सब देवों में सर्वश्रेष्ठ हैं। प्रत्येक स्त्री-पुरुष शनिवार को उनका व्रत करें और व्रतकथा अवश्य सुनें।

राजा विक्रमादित्य की घोषणा से शनिदेव बहुत प्रसन्न हुए। शनिवार का व्रत करने और व्रत कथा सुनने के कारण सभी लोगों की मनोकामनाएँ शनिदेव की अनुकम्पा से पूरी होने लगीं। सभी लोग आनंदपूर्वक रहने लगे

शनिवार के व्रत में पूजा के बाद शनिदेव की कथा अवश्य सुनें और दिन भर उनका स्मरण करते रहें, तो शनिदेव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और कष्टों का शीघ्र निवारण करते हैं।

Shanivar Vrat Katha – शनिवार व्रत कथा – Saturday Fast Story –

तस्वीर- गूगल से साभार

कहानी – गूगल से साभार

January 4, 2019 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Avoid Misunderstanding – रिश्तों में ग़लतफहमी – Relationship Tips in Hindi –

How to Avoid Misunderstanding

How to Avoid Misunderstanding – रिश्तों में गलतफहमी – Relationship Tips in Hindi – ग़लतफहमी कैसे avoid करें… हम सभी चाहते है कि एक दूसरे के साथ हमारा संम्बध मधुर हो.. पर कई बार कुछ ऐसी बात हो जाती है कि एक अच्छा खासा रिश्ता बिगड जाता है और दूरियाँ हमेशा के लिए बढ़ जाती हैं.. इसमें अहम रोल निभाती है  misunderstanding… ग़लतफहमी रखना ग़लती करने से ज्‍यादा खतरनाक होता है… तो इसे avoid कैसे करें…

How to Avoid Misunderstanding – रिश्तों में गलतफहमी – Relationship Tips in Hindi –

 

 हमारा रिश्ता चाहे किसी से घर पर हो, दोस्त के साथ हो या आफिस में हो.. कहीं भी हो पर एक छोटी सी ग़लतफहमी  रिश्ता हमेशा के लिए तोड़ सकती है.. तो ऐसा क्या करना चाहिए कि ग़लतफहमी हो ही ना.. यानि इसे avoid कैसे करें… इसके लिए मैं आपको बस 3 बातें ही बता रही हूं..

  1. सबसे पहली है कि सुनना है और वो भी ध्यान से.. सामने वाला क्या बोल रहा है उसे ध्यान से सुनना है या जो लिखा हुआ है उसे ध्यान से पढ़ना है और समझना है कि वो क्या कहना चाह रहा है… अगर हम ध्यान दे कर बात सुनेंगे तो ग़लतफहमी का कोई चांस नहीं रहेगा..

2.  फिर बात आती है कि समझना है…जो सामने वाला कह रहा है उसे समझना है कि वो क्या और किस तरीके से कह रहा है. जैसे मान लीजिए मैंनें एक सहेली को फोन किया कि मेरे घर लंच पर आना तो उसने बोला कि नहीं आ पाएगी… और हमारा फोन कट गया नेटवर्क नहीं था.. इस बीच में मैनें assume कर लिया कि उसमें तो बहुत अकड आ गई.. मैं उसे आगे से कभी नहीं बुलाऊंगी.. ये हो गई शुरुआत गलत फहमी की… तो assume नहीं करना बल्कि बात की तह तक जाना है

3. यानि Verify  करना है. यही है तीसरा point  कि Verify करें… हम अगर गलत फहमी पाल कर रखना चाहते हैं तो कुछ भी न करें पर अगर इसे avoid करना चाहते हैं तो Verify जरुर करना चाहिए कि असल में, हुआ क्या? या तो मैं फोन मिला लूं कि बात करते हुए फोन कट गया था जब मैं ये भी सोच सकती हू कि जब वो बात कर रही थी तो उसकी आवाज ज्यादा happy  नहीं थी…

कही कोई बात तो नहीं हुई.. तो बात पूरी तरह से जान कर ही किसी नतीजे पर पहुंचना चाहिए..  और जो भी doubts हैं उसे क्लीयर कर लेना चाहिए…

और Communicate करके बात की तह तक पहुंचा जा सकता है..

और हम जब भी बात करें सोच समझ कर बोले… कई बार हमारी body language या हमारी बात करने में tone से भी ग़लतफहमी हो सकती है… तो जब भी बात करें सीधे और स्पष्ट तरीके से करें.. ताकि गलत फहमी की कोई गुंजाईश ही न रहे…

क्योंकि एक बार हो गई और हमने clear  नहीं की और बहुत समय हो गया तो ego ही दीवार खड़ी हो जाती है…  जिसे दूर करना कई बार नामुमकिन हो जाता है…

ग़लतफहमी रखना गलती करने से ज्‍यादा खतरनाक होता है। तो इससे बचना चाहिए…

और वैसे जिंदगी बहुत छोटी है अगले पल का पता ही नहीं इसलिए लगे हाथ इसे clear कर लेना चाहिए..

और कई बार होता है कि गलत फहमी हो ही गई उसे दूर कैसे करें.. इस बारे में में भी जल्दी वीडियो बनाऊंगी पर फिलहाल तो यही कोशिश होनी चाहिए कि गलतफहमी हो ही न..

How to Avoid Misunderstanding

December 29, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Parenting Tips for Teenagers – बच्चों की परवरिश कैसे करें

Parenting Tips for Teenagers

Parenting Tips for Teenagers – बच्चों की परवरिश कैसे करें –  Parents पूछ्ते हैं कि Teenagers को deal कैसे करें, कैसे handle करें… तो मैं उनसे कहती हूं कि Teenagers कोई situation नहीं है जिसे हम handle or deal करें… वो इंसान हैं person है और हमें Treat करना है वो भी प्यार से… respect से… Teenage बुरी नहीं है ….  ये Parents के लिए और साथ ही साथ बच्चों के लिए difficult टाईम होता है पर अगर हमने बच्चों को अच्छे से समझ लिया तो यकीन मानिए.. ये भी खूबसूरत बन सकता है… पर अब प्रश्न आता है कि कैसे ?? तो इसके बारे में मैं आज बता रही हूं 9 बातें..

Parenting Tips for Teenagers – बच्चों की परवरिश कैसे करें

1. पहला है बातचीत… communicate जब आमतौर पर हम teen से बात करते हैं तो जवाब होता है हां या न बस इतना ही इससे ज्यादा नहीं और अगर Parents बात करना शुरु भी करते हैं तो वो  किसी भी पल argument बन जाती है… तो क्या करना चाहिए ऐसे में

बात सुने.. हम अपनी चलाते हैं और सुनते नहीं है तो उनकी बात सुने.. बच्चा ये चाहता है कि उसे सुना जाए और समझा जाए ना कि सीधा ही जज बन कर अपना फैसला सुना दें..

उनके साथ समय बीताए. अगर समय बिताएगें तो बच्चे को समझ पाएगें.. उसके दिल में दिमाग में क्या चल रहा है बिना साथ बैठे समय बिताए हम नहीं पता लगा सकते..

हर समय बच्चे पर पहरा न रखे.. Privacy दें.. space दीजिए… आजादी भी दीजिए.. बार बार जासूसी करने से हम उन्हें खुद चिढा रहे हैं.. कौन है किससे बात हो रही है… बहुत ज्यादा और बार बार नहीं होना चाहिए..

teen एक half-grown adult है उसे guidance चाहिए वो दीजिए बात बात पर बजाय ये बताने की ये करो ये नहीं.. बातचीत के दौरान ही बताईए कि क्या सही है क्या गलत है..

एक अच्छे दोस्त की तरह बात कीजिए.. और अगर वो किसी वजह से गुस्से में है तो आप प्यर से संयम से बात कीजिए.. अकसर हम पेरेंटस ही बच्चे पर चिल्लाना शुरु कर देते हैं तो ऐसा तो बिल्कुल नहीं करना क्योंकि ऐसा करने से बच्चा गुस्से में पैर पटकता हुआ अपने कमरे में चला जाएगा.. कमरा भडाम से बंद कर देगा फिर आपको ही चिंता होगी कि कुछ आवाज भी नहीं आ रही .. पता नहीं क्या कर रहा है.. फिर दरवाजा जोर जोर से खट खटाएगे तो बेहतर है कि ऐसी नौबत आने ही न दे.. आराम से बात करें.. और जताने की भी जरुरत नहीं कि हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं… बताने की बजाय उसे महसूस करवाईए.. कुल मिला कर घर का माहौल ऐसा बनाए कि वो खुल कर बात कर सके..

2.  खुल कर बात… कुछ ऐसी बातें होती हैं जिन पर खुल कर बात होनी चाहिए.. जैसे मान लीजिए हार्मोनल चैंज आते हैं तो बच्चे से बात कीजिए कि ये तो होता ही है.. गर्ल्स में बदलाव आते हैं.. तो हाईजीन का ख्याल रखना बहुत जरुरी होता है.

बहुत बार ऐसा होता है बच्चे खुल कर बात नहीं करते और फिर झूठ बोलने लगते हैं जैसे कि बच्चे से नशे के बारे में खुल कर बात करनी चाहिए कि ये शरीर के लिए कितना नुकसानदायक है.. किस तरह से शरीर को नुकसान देता है.. और ड्रग्स लेने से, अपने पास रखने से तो जेल भी हो सकती है..  करने से और  जेल भी हो सकती है.. कई बार होता है कि बच्चा स्मोक करने लग गया या चलो एक पार्टी में थोडी ही शराब पी तो इस बारे में खुल कर बात करनी चाहिए… कई बार पेरेंटस एक दूसरे पर बात डाल देते हैं तो जिससे बात करने में बच्चा ज्यादा कम्फतटेब्ल हो उन्हें बात जरुर करनी चाहिए

3. जो चीज मना करने वाली है मना करनी चाहिए पर हर चीज को मना नहीं करना चाहिए… जैसा कि एक बच्चे को शौक हुआ कि बाल कलर करवाने है तो चलो कोई बात नहीं पर जैसे टेटू बनवाना है उसे तो हमेशा के लिए हो जाएगा.. या होठ, नाक पर कान पर छेद करवाना है तो जरुर समझाना चाहिए कि फिर ये हमेशा के लिए हो जाएगा.. और समझदारी से बात करनी है… choose your battles wisely

4. बच्चों के दोस्तों के बारे में भी जानना बहुत जरुरी है… उनके बॉय फ्रेंड गर्ल फ़्रेंड के बारे में जानना.. उन्हें अपने घर ईंवाईट करें.. ताकि आपको भी पता लगे कि कौन कैसा है… उसकी आदत कैसी है.. क्योंकि दोस्त बच्चे के जीवन को बहुत प्रभावित करते हैं.. और अगर कोई बात उनकी अच्छी नहीं लगती तो बच्चे को कारण देकर समझाई कि वो किसलिए सही नहीं है..

5.  rules जरुर बने होने चाहिए.. यानि boundries हो पर इस बात का भी ख्याल रखना है कि हमारी expectation reasonable हों.. कि रात को 8 बजे के बाद घर से बाहर नहीं जाना… दोस्तों के साथ मूवी नहीं जाना… हां पर ये भी जरुर हो कि अगर जा रहे हैं तो फोन पर टच में रहे.. और बताते रहे कि कितने देर तक पहुंच जाईया.. रात के 12 बज रहे हैं पेरेंटस फोन कर रहे हैं और बच्चे का मोबाइल बंद आ रहा है… इससे चिंता होनी स्वाभाविक है… और जो हम रिल बनाए वो अगर नहीं फ़ॉलो किए तो क्या सजा हो… वो सजा भी मिलकर ही बनानी है.. ताकि बच्छा भी इस बात से अवेयर हो..

6.  बच्चों को responsible जिम्मेदार बनाएं.. उन्हें भी कुछ डिसीजन लेने की जिम्मेदारी सौंपें.. तभी बन पाएगें responsible… नहीं तो बात बात पर निर्भर ही रहेंगें.. और सिर्फ अपने और घर के प्रति ही नहीं.. परिवार और समाज के प्रति भी जिम्मेदार बनाए… किसी एनगीओ या वोलियंटर बन कर भी जिम्मेदारी दे सकते हैं..

7.  फिर बात आती है कि parenting पर technology हावी न होने दे… आपने बच्चे को स्मार्ट फोन लाकर दिया वो सारा दिन इसी में लगा रहे और बात भी न करे… तो ये भी समझाना है.. मना नहीं करना  बस जरुरत ये समझाने की है कि बैलेंस बना कर चले बच्चा.. टीवी, वीडियो गेम्स, मोबाइल में ही उलझ कर न रह जाए..

8. बच्चों को confident बनाना है.. खासकर लडकियो को.. उन्हें strong और bold बनाना है सिर्फ  looks पर ही ध्यान देने की बजाय अपने करेक्टर पर ज्यादा फोकस करें कैसे किस situation का सामना करना है वो बताना चाहिए.. वही बॉयस के लिए भी हम बोलते हैं कि लडके कभी नहीं रोते… तो उन्हें इमोशन के साथ डील करना सिखाए.. emotional होना अच्छा है.. और जो उनकी फीलिंग है हंसी की खुशी की उदासी की नाराजगी की..की.. ये कोई गलत नहीं है.. बस डील करना सीखाना है..

9. वही लड़कों को लड़कियों की इज़्ज़त करना सीखाना है.. वो भी एक इंसान है उसमें भी भावनाएं हैं उसका मज़ाक बनाना या उसके बारे में बातें बनाना नहीं चाहिए… खुद की आदर दें और अगर की आदर न करे तो उसे भी वो समझाए कि ये गलत बात है.. ऐसा नहीं करना चाहिए..

तो ये हैं कुछ बातें.. हम अगर कहते हैं कि बच्चे जिद्दी है, कहना नहीं मानते, समझते नहीं तो हमें अपने भीतर ही टटोल कर देखना होगा कि कहां कमी रह गई है..

Parenting Tips for Teenagers – बच्चों की परवरिश कैसे करें

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