Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

रियो ओलंपिक में भारत और खेल मंत्री

रियो ओलंपिक में भारत और खेल मंत्री

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रियो ओलंपिक में भारत और खेल मंत्री

हे भगवान !!ये क्या हो “रियो” है. एक तरफ ओलंपिक में हमारे पदक नही आ पा रहे और दूसरी तरफ हमारे खेल मंत्री को ही चेतावनी मिल गई और वही चीनी मीडिया ने ओलंपिक में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के छह कारण बता दिए कि भारत में मूलभूत ढांचे की कमी, स्वास्थ्य की कमी, ग़रीबी, लड़कियों को खेलों से दूर रखना, लड़कों पर अच्छे डॉक्टर और इंजीनियर बनने का दबाव, क्रिकेट की लोकप्रियता और ओलंपिक के बारे में ग्रामीण इलाक़ों में जानकारी की कमी है.

बहुत स्टीक बात कही उन्होनें … चीनी मीडिया में ये भी कहा गया है कि भारत चीन के बाद दूसरा सबसे ज़्यादा जनसंख्या वाला देश है लेकिन ओलंपिक में बहुत कम पदक जीत पाता है.

बहुत सच्चाई है इस बात में तभी कह रही हूं कि ये क्या हो रियो है…

खेल मंत्री विजय गोयल को रियो में चेतावनी – BBC हिंदी

रियो में उपमहाद्वीप प्रबंधक साराह पेटरसन ने भारतीय चीफ़-डे-मिशन राकेश गुप्ता को एक ख़त लिखा है कि ऐसी कई रिपोर्टें मिली हैं कि खेल मंत्री एक्रेडिटेशन वाली जगहों पर प्रवेश चाह रहे थे, उनके साथ ऐसे लोग थे जिनके पास यहां जाने की अनुमति नहीं थी. जब ओलंपिक कर्मचारी उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे तो उनका बर्ताव रूखा और आक्रामक था.

भारतीय खेल मंत्री दलबल को ऐसी जगहों पर ले जा रहे थे जिसका एक्रेडिटेशन उनके पास नहीं था और अख़बारों की सुर्खियां. read more at bbc.com

 

August 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छ भारत मिशन – सफलता की कहानी(वीडियो)

स्वच्छ भारत मिशन – सफलता की कहानी(वीडियो)

स्वच्छ भारत मिशन – सफलता की कहानी(वीडियो)

ये सफलता की कहानी किसी एक व्यक्ति की नही बल्कि पूरे गांव की है.  पूरा गांव  जय स्वच्छ्ता के नारे गूंज उठा. एक कहानी नही हकीकत है और हकीकत है हरियाणा के जिला सिरसा के गांव फूलकां की.

ये तभी सम्भव हुआ जब जिला प्रशासन की टीम ने गांवों का दौरा किया और लोगो में जागृति  आई…

गांव की निवासी पुष्पा देवी बताती है कि पहले अपने गांव में आते जाते जाते शर्म आती और आज इस गांव में इतनी स्वच्छता आ गई है कि हमारा गांव अपने नाम जैसा  फूल जैसा खूबसूरत हो गया है..

वही गांव के बच्चों प्रदीप और कलावती ने बताया कि वो निगरानी करते और लोगो को खुले में शौच जाने को मना करते जब लोग नही मानते तो इनके शौच पर मिट्टी डाल कर आते ताकि बीमारियों से बचाव हो सके.

स्कूली टीचर श्री जगदेव फौगाट ने भी बताया कि बच्चों ने स्वच्छता के मह्त्व को बहुत जल्दी समझा.

आज ये गांव पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त है यही इस गांव की सफलता की कहानी है क्योकि सभी के सांझे प्रयासों से स्वच्छता आई तभी आज इस गांव की महिला नाच रही है गा रही है और जय स्वच्छता नारे गूंज रहे हैं

स्वच्छ भारत मिशन – सफलता की कहानी(वीडियो)

Swachh Bharat Mission-Gramin

Swachh Bharat Mission-Gramin Swachh Bharat Mission-Gramin – Kanganpur – Nirmal Bharat Abhiyan – TSC – DOST बात उन दिनों की है जब गांव के लोग खुले में See more…

 

 

August 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

एन. रघुरामन- मैनेजमेंट फंडा – एक शख्सियत

एन. रघुरामन- मैनेजमेंट फंडा – एक शख्सियत

Ab Muskil

एन. रघुरामन- मैनेजमेंट फंडा – एक शख्सियत

N Raghuraman Management Funda in Dainik Bhaskar

कुछ साल पहले मैनें बच्चों को प्रेरित करने के लिए एक किताब लिखी थी अब मुश्किल नही कुछ भी और सोच विचार उन नामों पर था जिन्होनें अपना बचपन  बेहद साधारण रुप में यापन किया और आज आसाधारण प्रतिभा बन कर हम सभी का मार्ग दर्शन कर रहे हैं अपनी किताब के लिए मैने जिन आसाधारण प्रतिभाओं का साक्षात्कार लिया उनमें से एक हैं  एन रघुरामन.. हम हमेशा उन का लिखा मैनेजमैंट फंडा पढते हैं पर आज पढिए रघु जी के बारे में…

एन रघुरामन
कहते है कि एक अच्छी किताब सौ दोस्तो के बराबर होती है पर एक अच्छा उत्साहित करने वाला दोस्त हो तो वो तो पूरी की पूरी लाइ्रब्रेरी ही होता है।
जी हॉ, अब जिस शख्सियत से आपकी मुलाकात होगी वो हजारो प्रेरक प्रंसगो और जागरूक करने वाले फंडो की चलती फिरती लाइब्रेरी से कम नही है। मैनेजमैंट फंडा के जनक श्री एन रघुरामन आज किसी परिचय के मोहताज नही है। लेखन के प्रति समर्पित नटराजन रघुरामन मध्य प्रदेश दैनिक भास्कर के स्टेट एडिटर है और समस्त सिटी भास्कर के मुखिया है।

मैनेजेमैंट फंडा के नाम से दैनिक भास्कर में नियमित रूप से कालॅम लिखने वाले रघु जी से जब मिलने का समय लिया तो उन्होने तुरन्त अपने व्यस्त कार्यक्रम से कुछ समय निकाल लिया और फिर शुरू हुआ बातो का सिलसिला। बाते शुरू करने से पहले एक बात मैने महसूस की कि रघु जी सादगी की जीती जागती मिसाल है जिससे भी मिलते है उसे अपना बना लेते है और ऐसा महसूस होने लगता है कि इन्हे तो हम बहुत पहले से ही जानते है।

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13 मई 1960 को तमिलनाडू के तंजौर जिले के कुम्भाकोणम् मे इनका जन्म हुआ। इनकी मॉ जी श्रीमति जय लक्ष्मी गृहणी और पिता श्री वैकेटारामन नटराजन् वर्धा रेलवे स्टेशन जोकि गांधी आश्रम के पास था। उसी रेलवे में कार्यरत थे। रघुजी के दादाजी के भाई डा0 शंंकरन् महात्मा गांधी जी के तमिल टीचर थे।

वाह !!  हैरानी से सारी बात सुने जा रही थी। उन्होने बताया कि इस कारण उनको भी आश्रम मे जाने का और गांधी जी से सम्बधित चीजो को पास से देखने का सुअवसर मिला। बताते बताते उनकी आंखो मे एक अलग सी चमक आ गई। निश्चित तौर  पर यह बात किसी के लिए भी गर्व का विषय हो सकती है.

रघुजी ने बताया कि दिनचर्या मे अकसर वो स्कूल जाने से पहले गांधी आश्रम की झाड़पोछ करते और खुद को भाग्यशाली समझते। सैलानियो के लिए आश्रम आठ बजे खुलता था। तब तक उनके स्कूल जाने का समय हो जाता।
वो बता रहे थे कि बचपन में घर मे आर्थिक रूप से बहुत तंगी थी इसलिए उन्होने 14 साल की उम्र से ही अपने घर का खर्चा चलाने के लिए छोटा मोटा पढाने का काम करने लगे पर पढाई साथ में जारी रही। मैं हैरानी से उनकी बाते सुन रही थी। उन्होनें बताया कि समय ऐसे ही बीत रहा था। कुछ समय बाद गॉव में अच्छा स्कूल ना होने की वजह से उनका परिवार नागपुर जा कर बस गया और स्कूली शिक्षा नागपुर से हुई। मेरे मन मे प्रश्न् उठ रहा था कि कम उम्र में ही उन्होने घर का खर्चा चलाने के लिए काम भी करना शुरू किया पर आखिर लेखन की तरफ कैसे और कब आकर्षित हुए।
इस पर वो मुस्कुराते हुए बोले कि इसको भी अलग ही कहानी है असल में, 1978 में यानि जब वो 18 साल के थे तब उन्होने रोची प्रोडेक्ट में मशीन संचालक के रूप मे कार्यभार सम्भाला। जो सैरीडोन दवाई बनाते थे। मैने फिर बीच मे पूछा कि लेखनी…….। इस पर वो बोले कि वो उसी बात पर आ रहे है काम के दौरान एक बार सैरीडोन दवाई का पैकेट जल गया तो वहा के जी0एम0 श्री डा0 काशीनाथ कॉल ने कहा कि लिख कर सारी जानकारी दो कि ये जला कैसे। जब उन्होने लिख कर दिया तो सारी बाते भूल कर वो उनकी लेखनी से बहुत प्रभावित हुए और उसके बाद लेखन के क्षेत्र मे आगे हो बढ़ते गए।

फ्री प्री जनरल उनका पहला पेपर ग्रुप था जिसमे उन्होने काम करना शुरू किया। बचपन से एक ऐसा माहौल देखा था कि मन मे आता था कि कुछ ऐसा लिखूं की आमजन तक उनकी आवाज पहुचे। इसी बीच लेखन के साथ साथ पोस्ट ग्रेजूएशन की और एम0बी0ए0 की डिग्री  मुम्बई से प्राप्त की।
सन् 2000 में दैनिक भास्कर समाचार पत्र में मैनेजेमैंट गुरू के नाम से कालॅम लिखना शुरू किया और हर दिन लेखो की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिलती रही जिससे हर रोज कुछ नया कुछ अलग लिखने की भावना आती रही। उनके लेख ना सिर्फ पंसद किए जाते बल्कि पाठक उनसे प्रेरणा भी लेने लगे। इसके लिए उन्होने विशेष रूप से दैनिक भास्कर का धन्यवाद किया क्योकि उसके माध्यम से वो निरन्तर अपनी बात रख रहे है।
मै उनकी बाते बहुत ध्यान से सुन रही थी और मैं कुछ पूछने को ही हुई थी कि उनका फोन आ गया और वो दो मिनट का समय लेकर बात करने मे व्यस्त हो गए।
फोन रखने के बाद मेरा प्रश्न तैयार था कि बहुत लोग आपको अपना गुरू या आर्दश मानते है क्या आपके भी कोई प्रेरक है? इस पर वो मुस्कुराते हुए बोले कि जिससे भी चाहे वो बच्चा हो या बडा सीखने को मिले वो उनका गुरू है। वैसे वो श्री सी0के0 प्रहलाद जोकि जाने माने मैनेजेमैण्ट एक्सपर्ट है उन्हे बहुत पंसद करते है क्योकि जमीन से जुडे उनके लेख आम आदमी को बहुत प्रभावित करते है।

इसी बीच फिर से उनका फोन आ गया और वो किसी से बात करने लगे। मेरा अगला प्रश्न तैयार था। फोन रखते ही मैने पूछा कि आपके बचपन की कोई ऐसी धटना जिसे आप कभी ना भूल पाए। उस पर वो बोले कि बाते तो बहुत है पर एक धटना बहुत बड़ी सीख दे गई थी।
एक बार गॉव मे मेला लगा हुआ था। मॉ ने 5 पैसे दिए। मेरी गो राऊड (गोल घूमने वाला) झूले में तीन पैसे का एक चक्कर था। एक चक्कर लगाने के बाद झूले वाले ने कहा कि दो पैसे में वो एक चक्कर और लगवा देगा। वो खुश हो गए और एक चक्कर और लगा लिया। घर लौट कर जब मॉ जी की बताया कि झूले में 5 पैसे लगा दिए दो पैसे बेवजह खर्च करने पर तो बहुत नाराज हुई कि 2 पैसे खर्च करने का अधिकार किसने दिया इसके परिणाम स्वरूप उन्हे 6 धण्टे धूप मे खडे रहने की सजा मिली। बुखार भी हो गया और डाक्टर का खर्चा हुआ वो अलग। पर ये बात बहुत बडा सबक दे गई कि ऐसे ही फिजूल खर्च नही करने चाहिए और बात भी सही है जब तक हम कमाते नही है तब तक इसकी कीमत भी नही पता लगती।
उन्होने बताया कि आज के समय मे जहॉ बच्चे 100-200 रूपये तो ऐसे खर्च कर देते है वहा 2 पैसे की बात सुनकर उन्हे हॅसी ही आऐगी। पर ये भी एक सच है ऐसा लगा कि वो बाते बताते बताते कही खो गए मैने बात को आगे बढ़ाते हुए पूछा कि बचपन की और क्या बात बहुत याद आती है उन्होने बताया कि मॉ जब अपने हाथ से खाना खिलाती थी तो वो समय बहुत याद आता है। काश वो समय दुबारा आ जाए कहते-कहते वो संजीदा हो गए।

मैने बात बदलते हुए पूछा कि चलिए खाने की बात चली है तो खाने मे क्या-क्या पंसद है । तो उन्होने बताया दही, चावल अचार बहुत पंसद है और अगर पूरे साल सिंर्फ यही मिले तो भी वो बहुत शौक से खा सकते है बताते हुए उनके चेहरे पर मुस्कान दौड गई। मैने जानना चाहा कि उनकी दिनचर्या कैसी रहती है तो उन्होने बताया कि सुबह 5.30 बजे उठाना और 6 बजे से 8 बजे तक अखबार पढ़ना और सैर करना रहता है और इसी बीच विचारो की उथल पुथल होती रहती है और वही समय लेखन के लिए उपयुक्त होता है।
मैने मुस्कुराते हुए पूछा कि हम अपने मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए आपके लेख पढ़ते है पर आप इसके लिए क्या करते है कोई फिल्म वगैरहा या इस पर वो बोले कि फिल्मो मे तो ज्यादा रूचि है नही पर लेखन के लिए फिल्म देखनी पड़ती है और पसंदीदा गाना पूछने पर उन्होने बताया कि एम0एस0 सुब्बालक्ष्मी का भजन भज गोविंदम् प्रार्थना है। जब कभी भी सुनते हैं तो रोंगटे खडे हो जाते है और बार बार सुनने का मन करता रहता है।
मेरे पूछने पर कि आप दक्षिणी भारतीय है कौन सी जगह भारत की पसंद है उन्होने मुस्कुराते हुए कहा कि सभी जगह उन्हे बहुत पसंद है फिर मेरे एक प्रश्न पूछ्ने  पर कि जिंदगी में हमेशा  उतार-चढाव और टेंशन  आती रहती है। तनाव के वक्त खुद को कैसे कूल रखते है… उन्होने सहज होते हुए कहा कि टेंशन होने पर टेंंशन मे रहने से कोई नतीजा नही निकलता।

उन्होने बताया कि अब इस समय उनकी बेटी अस्पताल मे भर्ती है तबियत ठीक नही है और वो उसके पास नही है पर टेंशन लेने से ना तो वो ठीक हो जाऐगी और न ही वो ठीक रह पाऐगें। हां  इतना जरूर है कि उन्होने सभी अपने डाक्टर मित्रो को बोल दिया है और वो लगातार उनसे फोन पर सम्पर्क बनाए हुए है और उसकी तबियत की जानकारी दे रहे है।
सच पूछो, तो अब मैं थोड़ी असहज हो गई क्योकि मुझे लगा कि शायद ये सही समय नही है उनसे बात करने के लिए। तो उन्होने कहा कि कोई दिक्कत ही नही है आप अपना अगला प्रश्न पूछिए।

मैने मुस्कान लाते हुए पूछा कि बचपन मे आपने कोई सपना देखा था। उन्होने बताया कि बचपन में बहुत गरीबी देखी थी इसीलिए बस यही सपना देखता था कि बडे होकर आराम की जिंदगी जीउ, इसीलिए बचपन से ही दिन रात मेहनत शुरू कर दी। 14 साल की उम्र से काम मे लग गया। आज ईश्वर की कृपा है कि उन्होने मेरी प्रार्थना सुन ली और उनके बच्चे को वो सब नही देखना पडा जो उन्होने देखा।

अब बच्चे का भविष्य खुद बच्चो पर निर्भर है कि वो अपना आने वाला कल कैसे बनाते है। बिल्कुल सही बात है। मै उनकी बात से सहमत थी।
मै जानना चाह रही थी कि उनके परिवार में और कौन कौन है और परिवार को कितना वक्त दे पाते है इस पर वो बोले कि उनकी पत्नी प्रेमा है, प्यारी सी बिटिया है और पिक्सी नाम की डॉगी है पर जहॉ तब वक्त देने की बात है.

सच मे, व्यस्तताएॅ इतनी ज्यादा है कि वो ज्यादा समय परिवार को नही दे पाते। पर जब भी समय मिलता है तो उनका सारा समय परिवार के साथ ही बीतता है और कहते कहते मुस्कुराने लगे।
मेरा अगला प्रश्न भी तैयार था कि भविष्य को लेकर आपका क्या सपना है इस पर वो मुस्कराते हुए बोले कि अच्छा सवाल है वो अक्सर सोचते है कि उनके इस दुनिया से अलविदा कहने के बाद जब लोग आएगे तो क्या बात करेगे कि अच्छा हुआ एक बुरा आदमी दुनिया से चला गया । बहुत दुख हुआ। उन्होने बच्चो और बड़ो से बहुत ज्ञान बांंटा पर अब शून्य ही रह गया ।

फिर खुद ही मुस्कुराते हुए बोले कि वो जानते है कि अभी वो उस रास्ते से कोसो दूर है जब लोग उनके बारे मे अच्छा बोलेगे पर इतना यकीन है कि वो कम से कम सही रास्ते पर तो है।
इसमें कोई शक नही कि अपने लेखन से वो पाठको को हर रोज कुछ ना कुछ नया सन्देश दे रहे है। सन्देश से मुझे याद आया और मैं पूछ बैठी कि बच्चो को क्या संदेश देना चाहते है तो वो कुछ सोचने की मुद्रा मे बोले कि आज के बच्चे बहुत समझदार है उनके सपने वो जानते है कि उन्हे क्या करना है पहले साधन नही थे। आज उनके पास सभी साधन और सुविधाए है बस उसका इस्तेमाल सही ढ़ग से करना होगा। सीधे शब्दों  मे कहे तो चीनी, चावल उनके पास है खीर कैसे बनानी है यह उन्हे सोचना होगा।

नींव उनके पास उस पर महल कैसे खडा करना है उन्हे विचारना होगा ताकि आने वाली पीढी के लिए रास्ता खुला रहे। हम सभी को उन्हे प्रोत्साहित करना होगा, पीठ थपथपानी होगी ताकि वो मीलो आगे जा सकें। बस अपने से बडो का आदर मान कभी नही छोडना चाहिए। जो बच्चे अपने अभिभावको का आदर करते है देख कर बहुत खुशी होती है उन्होने सभी बच्चो को शुभकामनाए दी और कहा कि अपने माता पिता बडे बुर्जगो की सेवा करते, आशीर्वाद  लेते अपने लक्ष्य की ओर बढो फिर देखो सफलता आपके कदमो मे होगी।
फिर उनका फोन आ गया और वो फोन पर बात करने मे व्यस्त हो गए और मैं भी अपने कागजो को समेटने लगी क्योकि बहुत सारी जानकारी उनसे ले ली थी। बस एक आखिरी प्रश्न  पूछना रह गया था कि उनकी भविष्य मे क्या योजनाए है फोन पर बात करने के बाद वो समझ चुके थे कि मैं कुछ पूछना चाह रही हॅू प्रश्न  सुनने के बाद वो बोले कि वो दिन रात इसी प्रयास में जुटे है कि लेखन के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगो के बीच मे रह कर उन्हे जागरूक और प्रेरित करते रहे।

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चार किताबे भी लिखी है और दूसरी किताबो पर काम चल रहा है इसी सिलसिले ने ना सिर्फ देश के अन्य शहरो मे बल्कि विदेशो में भी दौरे लग रहे है और लोगो के स्नेह देखकर वो भी बहुत उत्साहित है मुझे जाने के लिए उठता देख उन्होनें कहा कि आपके बिना प्रश्न पूछे एक बात का मैं जवाब देना चाह्ता हूं कि  उनकी बिटिया अब ठीक है अभी फोन पर बात हुई है । उनकी बात सुनकर मै मुस्कुरा उठी।
मैने उन्हे सुनहरे भविष्य की ढेर सारी शुभकामनाए दी और वहा से रवाना हो गई ।जाते जाते मैं सोच रही थी कि सादा जीवन उच्च विचार रखते हुए रघु जी आज निसन्देह एक चमकते सूरज के समान अपनी किरणो रूपी बातो और लेखो से हम सभी में एक नई स्फूर्ति भर रहे है। यही सोचते सोचते मै आगे बढ़ गई।

कैसा लगा आपको उनका ये साक्षात्कार ?? जरुर बताईएगा !!

August 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो – Total Sanitation Campaign in India ,Nirmal Bharat Abhiyan ,’Swachh Bharat Abhiyan या स्वच्छता अभियान नाम कोई भी हो मकसद सिर्फ एक है कि हमारा भारत देश स्वच्छ हो खुले में शौच से मुक्त हो 

  स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छ भारत अभियान के एक नए जारी किए गए वीडियो में कंगना रनौत लक्ष्मी के रूप में दिखती हैं और अमिताभ बच्चन जी  की आवाज़ है. इस वीडियो में संदेश दिया गया है कि सफाई न रखने पर लक्ष्मी आपका घर छोड़ कर चली जाएंगी, आप चाहे तो उन्हें रोक लें. बेशक, स्वच्छता अभियान में चाहे विद्द्या बालन जी हों या अमिताभ जी….  पर असली हीरो होते हैं गांव वाले जो  स्वच्छता से प्रेरित होकर अपने गन्दे और शौच युक्त गांव का नक्शा ही बदल देते हैं . एक बडा सा सलाम हैं उन गांव वालो को जिन्होने अपने गांव को गांव नही परिवार समझा और देखते ही देखते गांव का नक्शा ही बदल गया..

यह कोई सुनी सुनाई बात नही बल्कि मेरे सामने की बात है और गांव वालो के जज्बे से उनका सफाई के प्रति प्रेम देख कर मैं इतना उत्साहित हो गई कि मैने स्वच्छता एक अहसास पर पूरी किताब ही लिख डाली.

अहसास स्वच्छता का ………… पुस्तक को लेकर आपके मन में ढ़ेरो सवाल उठ रहें होंगें कि आखिर इस पुस्तक के माध्यम से स्वच्छता का अहसास कैसे करवाया जा सकता है। सच पूछो तो, हम सभ्य समाज के सभ्य नागरिक हैं, पढे़- लिखे और समझदार भी हैं लेकिन सही मायनों में देखा जाए तो अनपढ़ और असभ्य की श्रेणी में आते हैं क्योंकि जिस समाज में हम रहतें हैं उसी को गंदा कर रहें हैं।

यहां बात भ्रष्टाचार की नहीं बल्कि उस कूडे़- कर्कट की है जो हमारें चारों तरफ फैला है और कूडेदान एक तरफ खडे़- खडे़ गंदगी का मुँह ही ताकते रह जातें हैं और तो और सड़क के किनारें, दीवारों की ओट को शौचालय का रूप देकर दिन-रात गंदगी में इजाफा किया जा रहा है। सड़क पर चलते हुए थूकना और पूरी सड़क को कूडादान समझना आम बात है। अगर यह पढ़े- लिखे सभ्य समाज को चित्रित करता है तो गाँव वालों को किस श्रेणी में रखेंगें क्योंकि वो तो वैसे भी अनपढ़, सीधे-साधारण गरीब, किसान और मज़दूर होतें हैं।

भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत गाँव वासियों की सोच में एक ऐसा बदलाव, ऐसी जागरूकता देखने को मिली जिसकी सपनें में भी कल्पना नहीं की जा सकती थी। बस, यहीं मुझे पुस्तक लिखने का मकसद मिल गया कि आज जो अहसास इन गाँव वासियों को हो रहा है उसकी महक उन लोगों तक भी पहुँचे जो अभी तक इससे अछूते हैं। मैनें अपनी तरफ से पुस्तिका में स्वच्छता और उससे आए बदलाव के बारे में जानकारी देने की पूरी कोशिश की है और मुझे उम्मीद ही नही पूरा विश्वास है कि इसको पढ़ने के बाद आप भी और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में मदद करेंगें।
अहसास ……………स्वच्छता का

“देशोऽस्ति हरयाणारव्यः पृथिव्यां स्वर्गसनिन्नभः” यानि हरियाणा नाम का एक देश हैं जो धरती पर स्वर्ग के समान है। यह विक्रमी संवत् 1385 के शिलालेख से उद्घृत है जो दिल्ली के निकट सारवान गाँव से मिला है।

सन् 2005 में जिला फतेहबाद के निकट भिरड़ाना गाँव में खुदाई के दौरान एक ऐसी सभ्यता मिली जो स्वच्छता से रहती थी। खुदाई के दौरान नालियाँ और मुख्य नाला इस ढ़ंग से बनाया गया था कि ऐसा मालूम देता था कि जिस समय यहां लोग रहते होंगें उस समय गंदगी का नामो-निशान नही होगा क्योंकि घर-घर में नालियाँ इस सफाई से बनाई गई थी कि पानी रूकने या जमा होने का कोई मतलब ही नही था।

सफाई, एक अनमोल गहना है जिसे हर एक अपने पास रखना चाहता है पर उसे सहेज कर रखने के चक्कर में वो इसे सम्भाल कर नहीं रख पाता और नतीजा…….. हमें चारों तरफ गंदगी, कूडे़, कीचड़ आदि का साम्राज्य मिल जाता हैं। बात शहर की हो या गाँव की, गन्दगी हर जगह हैं। हाँ, अगर तुलना की जाए तो गाँव में गंदगी का तो बहुत ही बुरा हाल है। गलियों में जमा पानी, रूढि़यों के ढे़र, कूड़ा-कर्कट और तो और बाहर खेतों में शौच जाते गाँव-वासी गन्दगी और फैलती जानलेवा बीमारियों में बढ़-चढ़ कर योगदान दे रहें हैं।

ना तो उन्हें कोई समझाने वाला है और ना ही कोई जागरूक करने वाला। जबकि इतिहास के पन्ने पलटने पर हम पढ़ते है कि खाना खाने से पहले और खाने के बाद हाथ धोना, प्रतिदिन नहाना, कमरे मे जाने से पहले चप्पल-जूतें उतारना, बिना स्नान किए रसोई में ना जाना, प्रसूति के बाद माँ तथा बच्चें को कुछ समय के लिए संक्रमण से बचाने के लिए अलग कमरें में रखा जाता था। व्यक्तिगत स्वच्छता का उल्लेख मनुस्मृति में भी मिलता है। मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा की खुदाई भी स्वच्छता की साक्षी रहीं हैं।
आज जबकि देश इतनी प्रगति कर रहा है। हर रोज नई-नई वैज्ञानिक खोजें हो रही है ऐसे में लोग गन्दगी से दूर क्यों नहीं जा पा रहें? क्यों वो घर और गलियों के आगे इकट्ठा बदबूूदार पानी देखकर भी कुछ नहीं करते? क्यों मच्छरों को उन्होनें अपनी नियति समझ लिया है और क्यों सदियों पुरानी चली आ रही खुल्ले में शौच जाने आदत से उन्हें इतना भावनात्मक लगाव है।

 

देखा जाए तो क्यों यानि प्रश्न बहुत हैं। आखिर कोई तो रास्ता होगा इससे बाहर निकलने का। जबकि सभी को पता है कि स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल की कमी से 80ः बीमारियाँ पैदा होती हैं। प्रति वर्ष विश्व भर में 5 वर्ष से कम आयु के 15 लाख बच्चें मौत के शिकार बनते हैं।
आंकड़ा सुनकर सिरहन दौड़ जाना स्वाभाविक है पर स्वाभाविकता से परे एक कटु सत्य है और वो है कैसे भी करके गंदगी को दूर भगाना, लोगों को अच्छे रहन-सहन के तरीकों की जानकारी देना, बेकार पानी की निकासी, पीने के पानी की सम्भाल, कूडे़-कर्कट के साथ-साथ मानव मल का सही ढ़ंग से निपटान, व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ ग्रामीण स्वच्छता को जान कर, समझ कर उस पर अमल करना।
इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाएँ उपलब्ध करवाने के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर प्रयास किए जाते रहे और सन् 1986 में भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (सी0आर0एस0पी0 ) की शुरूआत की गई। सन् 1999 में भारत सरकार द्वारा सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान की शुरूआत की गई।

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स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छता अभियान और मेरे मन की बात – Monica Gupta

क्लिक करिए और सुनिए स्वच्छता अभियान पर 4 मिनट और 35 सैकिंड की ऑडियो… मेरा अनुभव स्वच्छता अभियान और मेरे मन की बात बात स्वच्छता अभियान के दौरान की है. जब गांव गांव जाकर लोगों को जागरुक किया जा रहा था.लोगो को समझाया जा रहा था कि खुले मे शौच नही जाओ आसान नही था क्योकि सदियों से चली आ रही मानसिकता बदलना मुश्किल था.

https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2016/07/audio-sani.mp3 क्लिक करिए और सुनिए स्वच्छता अभियान पर  4 मिनट और 35 सैकिंड की ऑडियो… मेरा अनुभव बात स्वच्छता अभियान के दौरान की है. Read more…

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

August 11, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

वायरल खबर – स्कूली छात्र का पत्र पीएम मोदी के नाम

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वायरल खबर – स्कूली छात्र का पत्र पीएम मोदी के नाम

रैली, बस और परेशान स्कूली बच्चे

जानना जरुरी है..कुछ खबरें,न्यूज में बेशक ज्यादा नही दिखाई जाती  पर अपना असर छोड जाती हैं. सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद  न्यूज चैनल पर एक खबर देखी कि मध्य प्रदेश के खांडवा मे होने वाली रैली के लिए स्कूल बसो का इंतजाम किया गया इस कारण दो दिन स्कूल बंद रखे गए… स्कूल न जाने से दुखी देवांश ने नाराज़गी में सीधे पीएम को ही चिट्ठी लिखकर सवाल दाग दिया, “क्या आपकी सभा मेरे स्कूल से ज़्यादा महत्वपूर्ण है…?”

देवांश जैन के यह भावुक खत सोशल मीडिया पर वायरल हो गया,  प्रधानमंत्री केउसने अपनी नाराज़गी का इज़हार करते हुए खुद को ‘मोदी का प्रशंसक’ भी बताया और कहा कि वह रेडियो पर उनके ‘मन की बात’ कार्यक्रम को हमेशा सुनता है,
देवांश जैन ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि ‘शिवराज मामा’ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद से कहिए, वह स्कूल बसों को ऐसे कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल नहीं किया करें, क्योंकि “आप कांग्रेस के नेताओं जैसे नहीं हैं, और आपके मन में भविष्य और शिक्षा को लेकर चिंता रहती है…”
उसने लिखा, “अगर आप ऐसा करते हैं, तो मैं ताल ठोककर कह सकूंगा कि ‘मेरे मोदी अंकल’ की रैलियों में भीड़ अपने आप जुटती है, और उसे जुटाया नहीं जाता…”

 

रैली के लिए स्कूल बस लगाने से नाराज़ बच्चे ने लिखी पीएम को चिट्ठी, क्या मेरे स्कूल से ज़्यादा ज़रूरी है आपकी सभा

देवांश जैन ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि शिवराज मामा (दरअसल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद को यही कहलाना पसंद करते हैं) से कहिए, वह स्कूल बसों को ऐसे कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल नहीं किया करें, क्योंकि read more at ndtv.com

 

बदलाव अच्छा है … वैसे आप के इस बारे में क्या विचार हैं जरुर बताईएगा …

 

August 11, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

सावधान इंडिया- शराब पीकर वाहन चलाना और जुर्माना

rules by monica gupta

सावधान इंडिया- शराब पीकर वाहन चलाना और जुर्माना

life ok करनी है तो कुछ बातेंं जानना जरुरी है.शराब पीकर वाहन चलाने वालो को अब सावधान रहना पडेगा क्योकि अब जुर्माना दारु की बोतल से भीज्यादा  महंगा पड सकता है . जिस तरह से सडक दुर्धटनाए देखने को मिल रही हैं उससे हमें बेहद सजग रहने की आवश्यकता है भले ही तेज वाहन चलाना हो या बिना हेलमेट के वाहन चलाना … बेशक मोबाईल फोन पर बात करते हुए या बिना सीट बेल्ट बांधे वाहन चलाने पर भी जुर्माना है … ये सब हमारी सुरक्षा के लिए ही है और हमे रुपये देकर मामला रफा दफा करना है फैसला हमारे हाथ में है…

ट्रैफिक नियम और हमारी जागरुकता – Monica Gupta

पिछ्ले कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी  बहुत अच्छा कदम उठाया था . कोर्ट का आदेश था  कि कोई व्यक्ति सड़क पर पड़े किसी जख्मी को अस्पताल पहुंचाता है तो  ना पुलिस और न अस्पताल बेवजह की पूछताछ से उन्हें परेशान करेगी. रोड एक्सीडेट्ड में समय पर help न मिलने का मुख्य कारण यही होता था कि कोई कानूनी पचड़ों में नहीं फंसना चाहता इसलिए accident  देख कर भी अनदेखा कर देते  सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं पचड़ों को दूर करके एक शानदार आदेश सुनाया और अब ये निर्णय कि  ambulance सायरन बजने पर भी साईड न दिए जाने पर 2000 रुपए जुर्माना होगा .. read more at monicagupta.info

 

शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 10,000 का जुर्माना – BBC हिंदी

मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2016 के क़ानून बन जाने के बाद बदल जाएगे ट्रैफ़िक के नियम.

  • शराब पीकर गाड़ी चलाने पर अब 10 हज़ार रुपए तक का जुर्माना लगेगा.
  • हिट एंड रन के मामले में मिलने वाले मुआवजे को बढ़ाकर अब दो लाख रुपए कर दिया गया है.

read more at bbc.com

शराब पीकर गाड़ी चलाने पर देना पड़ेगा 10 हजार का जुर्माना – Jansatta

read more at jansatta.com

वैसे आपके इस बारे में क्या विचार हैं जरुर बताईगा …

 

August 11, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

70 वर्षीया आजादी और मेरे मन की बात

70th Independence Day

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70 वर्षीया आजादी और मेरे मन की बात

70th Independence Day .. आजादी 70 जरा याद करो कुर्बानी.

आज हम आजादी के 70 वें साल को धूमधाम से मना रहे हैं पर यकीन मानिए अबकी बार वो फीलिंग नही आ रही  जो अक्सर आया करती थी. एक समय था जब देश भक्ति के गीत सुनकर मन भावुक हो उठता था आज वही भावुक मन बहुत बैचेन है कि हमारे देश को ये हो क्या गया है.

वैसे, मेरे विचार से, मौजूदा सरकार की एक उपलब्धि तो जबरदस्त है और वो ये है कि उसने महंगाई तो नही पर उसका मुद्दा जरुर दबा दिया… असल में, जात पात, दलित, गौमाता, गौरक्षक, कश्मीर, आतंक आदि के मुद्दे इतने मुखर हो गए है कि बेचारा आम आदमी का सर्वप्रिय महंगाई वाला मुद्दा तो खिसक कर पीछे ही चला गया है. अब देखिए न बिजली, पानी, बेरोजगारी, महिला असुरक्षा, लूटपाट आदि के मुद्दे तो जस के तस हैं उसका तो क्या ही बोलना पर, सच पूछिए तो मौजूदा हालात को देखते हुए , जात पात, दलित, गौमाता, गौरक्षक, कश्मीर, आतंक जैसे मुद्दे मद्दे नजर रखते हुए मन में एक दहशत सी बैठ गई है कि ये हो क्या रहा है किस दिशा में जा रहे हैं हम…

समाज को पीछे धकेलने में ना सिर्फ नेताओ का बल्कि न्यूज चैनल का बहुत बडा हाथ है. 24 घंटे खबर… खबर और उसमे भी कभी एक मिनट 100 खबरें कभी झटपट 20 ,कभी नॉन स्टाप खबर, कभी सुपर फास्ट, कभी ताल ठोक के कभी जागो इंडिय़ा तो कभी गुड मार्निग खबरें … बेशक दिखा वही रहें हैं जो समाज में हो रहा है पर अपने अपने अंदाज और टीआरपी को ख्याल में रखते हुए बिल्कुल संवेदनहीन व्यक्ति की तरह …!!!

चैनल जब किसी पार्टी विशेष का हो तो उसी पार्टी के गुणगान करते नही थकता. और उनके द्वारा गलत काम को भी सच और अच्छा दिखाने का काम खूबसूरती से करता है पर इससे नकारात्मता बढती है और चैनल अपना विश्वास खो देता है.

वहीं दूसरी ओर जो उत्पाद प्रायोजक होते हैं बेशक वो भ्रामक ही क्यो न हो उसे विज्ञापन रुप में बढा चढा कर बार बार दिखाया जाता है और दर्शक भ्रमित होता रहता है .. होता रहता है..  इतना ही नही विज्ञापनों के माध्यम से अपने अपने राज्यों के भी बहुत गुणग़ान गाए जाते हैं पर हकीकत क्या है ये खबरों के माध्यम से पता चल जाता है क्योकि दिन भर चैनल उसी प्रदेश की खबर चलाएगा बहस करवाएगा, मुद्दा उछालेगा और साथ ही साथ उसी प्रदेश का तरक्की करने वाला विज्ञापन भी बार बार दिखाएगा…ऐसा होता है क्या ??

दर्शक क्या समझे … प्रदेश की जर्र जर्र अव्यव्स्था को देख कर रोए या विज्ञापन देख कर खुश हो.

राज्यों के भ्रामक विज्ञापन क्या सिर्फ चुनावी रोटियां या सियासी रोटियां ही सेकनें के लिए हैं असलियत में…

तभी तो मैं कह रही हूं कि आज हम आजादी के 70 वें साल को धूमधाम से मना रहे हैं पर यकीन मानिए अबकी बार वो फीलिंग नही आ रही. एक समय था जब देश भक्ति के गीत सुनकर मन भावुक हो उठता था आज वही भावुक मन बहुत बैचेन है कि हमारे देश को ये हो क्या गया है क्या बस देश में राजनीति ही सर्वोपरि हो कर रह गई है.

हर कोई लडने मरने, लूटपाट करने, एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड में है रही सही कसर नेताओं की बदजुबानी पूरी कर रही है..

ऐसे में फिर कुछ अच्छा खोज रही हूं बेशक, 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के आसपास की छुट्टियां या महा सेल ऑफर या स्वतंत्रता दिवस पर कूपन लाओ और मुफ्त उपहार या छूट पाओ ऑफर आकर्षित तो कर रही है पर लाख कोशिशों के बाद खुशी नही आ पा रही..

वाकई आजादी के 70 साल या 70 वर्षीया आजादी जो भी कहें कह सकते हैं पर जरा याद करनी चाहिए उन लोगो की कुर्बानी जिन्होनें खुद को मिटा कर देश तो स्वतंत्र करवा दिया पर आज हम उसे सहेज कर रखने में नाकामयाब हो रहे हैं

अब तो बस एक ही उपाय है कि सोच समझ कर अपने मत का उपयोग करें और ऐसे नेता चुने जो वाकई देश हित की सोचें… !! देश हमारा है इसे हम सभी को मिल जुल कर आगे बढाना है.

आज के लिए बस इतना ही

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ…..

70 Independence Day Of India Prediction From Jupiter Transit In Virgo – स्वतंत्रता द‌िवस से पहले जान‌िए, भारत और आपके ल‌िए कैसा रहेगा अब से एक साल, Predictions Photo Gallery- Amar Ujala

भारत की स्वतंत्रता के 70 वें वर्षगांठ से पहले गुरु का कन्या राश‌ि में प्रवेश भारत और भारत की जनता के शुभ संदेश दे रहा है। read more at amarujala.com

 

August 10, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

टवीटर,टवीट और बढता कॉम्पीटिशन

 

 

tweet cartoon by monica gupta

टवीटर,टवीट और बढता कॉम्पीटिशन

मनोरंजक कार्टून, Cartoon Twitter tweet …

देखन  में छोटन लगे घाव करे गम्भीर … !!! बेशक, 140 शब्द लिए है ये टवीटर पर सोशल मीडिया की दौड में अव्वल है आज जिसे देखो वो ही टवीट करने में जुटा है और बस अपना टवीट वायरल या और तेज होने के चक्कर में कुछ बी लिखे चले जा रहा है और बस अव्वल रहना चाह्ता है … प्रश्न ये है कि क्या ये भावना सही है … !!!

August 10, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

टवीटर के टवीट और चटपटी खबरों का खेल

 

 

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टवीटर twitter के टवीट और चटपटी खबरों का खेल

विवादास्पद टवीट और न्यूज चैनलों की बढती टीआरपी

अरे क्या हुआ अगर अभिनव बिंद्रा निशाना चूक गए ।।।शोभा डे ने जिस तरह से ट्वीटर twitter पर मजाक उड़ाया बहुत गलत किया उनका कहना क़ि रियो जाओ सेल्फ़ी लो और खाली वापिस आ जाओ अवसर और धन की बरबादी हो रही है।।। बेशक अभिनव ने भी इसका जवाब ट्वीटर पर ही दिया पर खुशी इस बात की हुई क़ि जनता को भी शोभा डे का ट्वीट अच्छा नही लगा और शोभा डे को जनता के गुस्से का भागीदार बनाना पड़ा।। सोच समझ कर बोलना चाहिए ।।।खेल की भावना तो होती भी यही है sportsmanship रखनी चाहिए।।। मजाक नही उड़ाना चाहिए।।।

शोभा डे ने भारतीय ओलंपिक खिलाड़ियों का उड़ाया मजाक, भड़के दिग्गज– IBN Khabar

ट्वीटर पर आम यूजर्स के साथ साथ सेलीब्रिटीज ने भी शोभा डे के इस ट्वीट पर कॉमेंट कर विरोध जताया। शूटर अभिनव बिंद्रा ने इसे अनुचित बताया और कहा कि आपको अपने एथलीट्स पर गर्व होना चाहिए। अभिनेत्री गुल पनाग ने बिंद्रा को जवाबी ट्वीट कर लिखा, ‘और इसलिए भी क्योंकि यहां न तो कोई इंस्टिट्यूशनल सपोर्ट है और न ही स्पोर्टिंग कल्चर है।’

पूर्व एथलीट सुनीता गोदारा ने डे पर हमला करते हुए कहा कि वह खिलाड़ियों के प्रति दुर्भावना से ग्रसित हैं। उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था। उन्होंने कहा कि शोभा डे को माफी मांगनी चाहिए। एक लेखक को इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए। बिशन बेदी ने अभिनव बिंद्रा के ट्वीट पर जवाब दिया, ‘हां, अभिनव तुमने हमेशा अपना बेस्ट किया है और यही वजह है कि पूरा देश आपसे प्यार करता है।’

.@DeShobhaa I Know You’re Jealous Because People Of Your Country Couldn’t Qualify. ;)#Rio2016 #RioOlympics2016 #Olympics2016 #Olympics read more at ibnlive.com

abhinav bindra gets angry over shobha des tweet said you should be proud of athletes: ख़बरें: आज तक

शोभा डे ने सोमवार रात ट्वीट किया, ‘रियो ओलंपिक में भारत का लक्ष्य- रियो जाओ, सेल्फी लो, खाली वापस आओ. अवसरों और धन की क्या बर्बादी हो रही है? एकमात्र आशा, अभिनव बिंद्रा स्वर्ण पदक का लक्ष्य.’

इस ट्वीट से नाराज बिंद्रा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘शोभा डे, ये काफी गलत है. आपको पूरे विश्व के खिलाफ संघर्ष की तैयारी कर रहे एथलीटों पर गर्व होना चाहिए.’ भारत के लिए गोल्ड पदक जीतने वाले बिंद्रा इस साल रियो ओलंपिक में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा के फाइनल में सोमवार को बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए और चौथे स्थान पर रहे. read more at aajtak.intoday.in

 

 

Photo by Kooroshication

August 10, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

खराब नोट , बैंक और रेल में करोडो की लूट

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खराब नोट , बैंक और रेल में करोडो की लूट

कटॆ फटे और पुराने नोटो की चलती ट्रेन में शायद पहली करोडो की  लूट की  खबर सामने आई होगी. मैं आज की ताजा खबर सुन ही रही थी कि

मेरी सहेली मणि घर आई। उसने 500 का नोट दिखाते हुए बताया क़ि कल एटीएम से कुछ पैसे निकाले थे तब तो ध्यान नही दिया पर आज दुकान पर जब रुपए निकाले तो देखा कि पांच सौ का नोट फटा हुआ है उसका नम्बर ही कटा हुआ है मैंने कहा बैंक ही फोन करके पूछते हैं क़ि क्या किया जा सकता है

तभी मुझे आज की खबर का ख्याल आया जो ट्रेन रॉबरी थी ट्रेन की छत पर सुराख करके 5 करोड़ लूट लिए पर वो सभी कटे फ़टे पुराने नोट थे।।

सोच रही हूँ क़ि इस लूट का उन्हें फायदा हुआ होगा या नही क्योकि मार्किट में चलेंगे नही इतने सारे नोट रिप्लेस करवाएँगे तो पुलिस को शक हो जाएगा।।। वैसे क्या उन्हें पता होगा की जहाँ लूट रहे हैं वहाँ ऐसे नोट मिलेंगें।

 

Train robbers cut open rail coach, loot RBI’s soiled note trunks

चोरों ने चलती ट्रेन से आरबीआई केे करीब पांच करोड़ रुपयों पर हाथ साफ कर लिया। कड़ी सुरक्षा के बीच 226 बॉक्‍सों में भरकर करीब 340 करोड़ रुपयों को चेन्‍नई लाया जा रहा था।  read more at jagran.com

Train robbers cut open rail coach, loot RBI’s soiled note trunks 14481612

चोरों ने चलती ट्रेन से आरबीआई केे करीब पांच करोड़ रुपयों पर हाथ साफ कर लिया। कड़ी सुरक्षा के बीच 226 बॉक्‍सों में भरकर करीब 340 करोड़ रुपयों को चेन्‍नई लाया जा रहा था। 14481612 read more at jagran.com

 

Robbery from Salem to Chennai Train from rbi consignment – www.bhaskar.com

पुलिस को शक है कि यह चोरी सेलम और विरधाचलम के बीच हुई। यह दूरी करीब 138 किमी की है। बता दें कि इस रूट की लाइन इलेक्ट्रिफाइड नहीं है। – पुलिस के मुताबिक, ट्रेन की छत पर जहां छेद किया गया, वहां इलेक्ट्रिक केबल होते हैं। ऐसे में, चोरी करना संभव नहीं है। – सेलम और विरधाचलम के बीच में ही बदमाशों ने लूट को अंजाम दिया। 225 में से सिर्फ चार बॉक्स टूटे मिले?

Robbery,Salem to Chennai, Train rbi consignment,Tamil Nadu, Cash stolen, 9.87 crore read more at bhaskar.com

 

( तस्वीर साभार गूगल से )

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