Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 17, 2015 By Monica Gupta

आम आदमी कैंटीन

 

 canteen by monica

आम आदमी कैंटीन

खाने खिलाने का दौर जारी है जहां मोदी जी का कहना है कि  न खुद खाएगें न किसी को खाने देंगें वही दिल्ली के मुख्य मंत्री  अरविंद केजरीवाल कैंटीन खोलने जा रहे हैं …

आम आदमी पार्टी के नेता आशीष खेतान ने गुरवार को इसका एलान किया। खेतान ने बताया कि केजरीवाल ने गुरुवार को दिल्ली डायलॉग कमीशन के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इसके उपाध्यक्ष आशीष खेतान हैं। खेतान ने कहा कि कैंटीन में लोगों को सस्ता खाना मिलेगा। इस खाने पर दिल्ली सरकार सबसिडी देगी, जिससे एक थाली की कीमत 5 से 10 रपए तक रहेगी। दिल्ली डायलॉग कमिशन ने केजरीवाल के कहने पर 19 जून को इसका प्रस्ताव दिल्ली सरकार को भेजा था। सरकार इन कैंटीनों को एक या दो माह के भीतर लॉन्च कर देगी। एक कैंटीन में 3000 लोग खाना खा सकेंगे। दिल्ली सरकार की ये कैंटीनें पहले चरण इंडस्ट्रियल एरिया, हॉस्पिटल, कमर्शिल हब और कॉलेजों में शुरू की जाएगी।

खेतान ने कहा कि यह मॉडल तमिलनाडु और ओडिशा में चल रही इस तरह की कैंटीनों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया। ये कैंटीन खाद्य और आपूर्ति विभाग चलाएगा।

 – www.bhaskar.com

अम्मा की कैंटीन की तर्ज पर आम आदमी कैंटीन

ये होगा आम आदमी कैंटीन का मेन्यू दिल्ली सरकार की आम आदमी कैंटीन में सुबह पूड़ी, सब्जी और आचार होगा, दोपहर के खाने में को दाल-चावल और रात के लिए रोटी, सब्जी और दाल होगी। दिल्ली सरकार का इस योजना के तहत राजधानी में 200 से ज्यादा कैंटीन बनाने का प्लान बना रही है। See more…

July 16, 2015 By Monica Gupta

आप का परिवारवाद

ak pariwarwaad by Monica gupta

 

आप का परिवारवाद… AAP भी आ ही गए परिवारवाद के लपेटॆ में अरविंद जी

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल भी कांग्रेस के नक्शेकदम पर चलकर ‘जय हिंद जीजाजी’ कहने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और कांग्रेस की‘‘जीजा जी’’ परंपरा को आगे ले जा रहे हैं। हालांकि केजरीवाल जी ने इस मुद्दे पर ट्विटर पर सफाई देते हुए कहा, ‘‘वो मेरे चाचा की साली के जीजा की भतीजी के ससुर की भांजी के भतीजे की साली के भाई की बेटी है।’’ उन्होंने कहा कि विपक्ष ये अफवाह फैला रहा है कि स्वाती मेरी बहन जोकि पूरी तरह से बकवास है।

 

Kejriwal on DCW row: Swati Maliwal not even remotely connected to me | The Indian Express

The Aam Aadmi Party on Wednesday refuted charges of nepotism in appointing Swati Maliwal, wife of party leader Naveen Jaihind, as the head of the Delhi Commission for Women (DCW), saying she had a long record of “activism” in different spheres.

Chief Minister Arvind Kejriwal was also quick to deny that Maliwal was related to him.

“Some media houses and opposition leaders alleging that Swati is my cousin. Complete nonsense. She is not even remotely connected,” Kejriwal tweeted.

“Some media houses and opposition leaders alleging that Swati is my cousin. Complete nonsense. She is not even remotely connected,” Kejriwal tweeted.

Some media houses n opp leaders alleging that swati is my cousin. Complete nonsense. She is not even remotely connected(1/2)

— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 15, 2015

The party said Maliwal has a long record of “activism” in different spheres and the appointment was done on “merit”. Kejriwal on DCW row: Swati Maliwal not even remotely connected to me | The Indian Express

July 14, 2015 By Monica Gupta

अच्छे दिन

Cartoon BJP by monica gupta

 अच्छे दिन

अच्छे दिन के इंतजार मे मेरे बनाए कुछ कार्टून … कभी कछुए पर, कभी परदे के पीछे छिप कर, तो कभी आखें टेस्ट करवा क,र कभी दूरबीन लगा कर अच्छे दिन देखने की कोशिश की कई बार मुझे सम्मोहित भी किया गया कि अच्छे दिन आ चुके हैं पर…. Thank God  🙂  आज पता चल गया कि बस 25 साल बाद आने ही वाले हैं अच्छे दिन… 🙂

July 14, 2015 By Monica Gupta

सिर्फ पच्चीस साल

achछ्e din by Monica

सिर्फ पच्चीस साल

देश की जनता को पिछ्ले एक साल से भी ज्यादा से इंतजार था कि अच्छे दिन आएं अच्छे दिन आएं….आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को भोपाल पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘अच्छे दिन आने में 25 साल लगेंगे. जिससे जनता ठग़ा सा महसूस कर रही है और विपक्ष चुटकी ले रहा है …

25 : – ABP News

नई दिल्लीः पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव से पहले देश की जनता से जिस ‘अच्छे दिन’ के वादे किए थे, अब उसे लानें में बीजेपी को 25 साल लगेंगे.  बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को भोपाल पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘अच्छे दिन आने में 25 साल लगेंगे.’

शाह ने यह भी कहा कि इंडिया को नंबर वन पोजिशन पर पहुंचाने के लिए बीजेपी को इन 25 साल में पंचायत से लेकर लोकसभा तक, हर चुनाव जीतना होगा. शाह ने कहा, ”देश को दुनिया के सर्वोच्च स्थान पर बैठाना है तो पांच साल की सरकार कुछ नहीं कर सकती.”

शाह ने आगे कहा,  मुद्रास्फीति दर घटाना, विदेश नीति, सीमा सुरक्षा, बेहतर नीतियां इन सभी में बेहतरी लाएंगे लेकिन उसके लिए हमें पांच नहीं बल्कि और समय देना होगा, और बीजेपी को सभी स्तर के चुनावों में जीत दिलानी होगी.

अमित  शाह के  इस बयान पर विपक्षी पार्टियों के हमले तेज हो गए हैं,  इस बयान पर दिल्ली  सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्विट करते हुए लिखा है, “अगर चुनाव के पहले भाजपा बता देती कि ये लोग अच्छे दिन 25 साल में लाएंगे, तो क्या लोग इन्हें वोट देते?”

वहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने लिखा है,  “अच्छे दिन आने में  25  साल लगेंगे” अमित जी आपके अच्छे दिन तो आ गये, ऐश करिये सारे मुक़दमों को समाप्त करा लीजिये. जनता जाये भाड़ में”

इस पूरे मुद्दे पर बीजेपी  ने मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा है कि, “मीडिया  ने इस बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है. गलत तरीके से हेडलाइन बनाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही  है.” abpnews.abplive.in

https://youtu.be/70Va8XFWidQ   एक वीडियों

July 13, 2015 By Monica Gupta

हाल बेहाल

rain water by monica gupta हाल बेहाल

हमारे देश में बारिश होती नही कि सडको पर पानी खडा हो जाता है और तो और  वही बरसात का पानी घरों में भी धुस जाता है … बरसात आने पर जहां लोग इस पानी को  निकालने में जुट जाते हैं तो वही कुछ सैर के लिए भी निकलना चाह्ते हैं पर पानी के कारण सैर तो हो नही पाती इसलिए बच्चे को तैरा ही लाते हैं

July 13, 2015 By Monica Gupta

एलपीजी पर सब्सिडी

LPG by monic a gupta

 

एलपीजी पर सब्सिडी

लगभग हर रोज करीब चार हजार लोग छूट आधारित शाकाहारी तथा मांसाहारी भोजन का लुत्फ उठाते हैं। संसद की कैंटीन में तडक़ा मछली 25 रुपये में, सब्जियां 5 रुपये में, मटन करी 20 रुपये और मसाला डोसा 6 रुपये में मिलता है। सांसदों को ये इतनी सस्ती इसलिए मिलती हैं, क्योंकि इनके वास्तविक लागत मूल्य पर सब्सिडी सरकारी खजाने से दी जाती है

 

 

  | 4 PM | LATEST HINDI NEWS

प्रमोद भार्गव बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के आमंत्रण पर 1916 में महात्मा गांधी ने उसके समारोह में भागीदारी की थी। समारोह के मुख्य अतिथि वायसराय थे। वायसराय के उद्बोधन के बाद महात्मा गांधी को बोलना था। वे बोले, जिस देश की ज्यादातर आबादी की तीन पैसा भी रोजाना आमदनी नहीं है, किंतु वहीं देश के वायसराय पर रोजाना तीन हजार रुपये खर्च होते हैं। समाज में ऐसे लोगों का जीवित रहना बोझ है। अगर आज गांधी जी होते और जनता के धन से भोजन का स्वाद चख रहे सांसदों की उन्हें आरटीआई से सामने आई जानकारी मिलती तो क्या सांसदों को गांधी यही र्शाप नहीं देते? एक तरफ देश के जन प्रतिनिधियों पर रोजाना करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, उन्हें अनेक प्रकार की अन्य सुविधाएं नि:शुल्क दी जा रही हैं, बावजूद जनप्रतिनिधि हैं कि खुद तो ब्सिडीस का भोजन उड़ा रहे हैं, परंतु जो वास्तव में गरीब हैं, भूख की गिरफ्त में हैं, उनकी न तो गरीबी रेखा तय की जा रही है और न ही खाद्य सुरक्षा? सरकार संसद की रसोई से परोसी जाने वाली थाली में दी जाने वाली सब्सिडी खत्म करती दिखाई नहीं देती? सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी सामने आने पर पता चला है कि हमारे माननीय सांसद गरीब के हिस्से का भोजन करके डकार लेने को भी तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि उन्हें न तो आहारजन्य विसंगतियों का आभास होता है और न ही अनाज के उत्पादक किसान की आत्महात्या से पीड़ा होती है? क्योंकि उन्हें तो सब्सिडी के भोजन से पेट भरने की छूट मिली हुई है। वह भी गुणवत्तायुक्त स्वादिष्ठ भोजन की। बावजूद खाद्य मामलों की समिति के अध्यक्ष व टीआरएस सांसद जितेंद्र रेड्डी का कहना है कि यह सब्सिडी बंद की गई तो किसी के पेट पर लात मारने जैसी घटना होगी। सांसदों और संसद में काम करने वाले अधिकारी व कर्मचारियों को बेहद सस्ती दरों पर भोजन दिया जा रहा है। रोजाना करीब चार हजार लोग छूट आधारित शाकाहारी व मांसाहारी भोजन का लुत्फ उठाते हैं। संसद की कैंटीन में तडक़ा मछली 25 रुपये में, मटन कटलेट 18 रुपये में, सब्जियां 5 रुपये में, मटन करी 20 रुपये और मसाला डोसा 6 रुपये में मिलता है।

सांसदों को ये खाद्य सामग्रियां इतनी सस्ती इसलिए मिलती हैं, क्योंकि इनके वास्तविक लागत मूल्य पर क्रमश: 63 फीसदी, 65 फीसदी, 83 फीसदी, 67 फीसदी और 75 फीसदी सब्सिडी सरकारी खजाने से दी जाती है। पूड़ी-सब्जी पर तो यह सब्सिडी 88 फीसदी है। हम सब अच्छी तरह से जानते हैं कि अधिकतम गुणवत्ता के मानकों का पालन करके तैयार होने वाला यह आहार इतनी सस्ती दरों पर मामूली से मामूली ढाबे पर भी मिलना मुश्किल है? स्वयं सरकार द्वारा ही दी गई जानकारी से पता चला है कि मांसाहारी व्यंजनों के लिए कच्ची खाद्य वस्तुएं 99.05 रुपये में खरीदते हैं और माननीय सांसदों को 33 रुपये में परोसते हैं।

पापड़ की दर पर भी छूट दी जाती है। बाजार से पापड़ 1.98 रुपये प्रति नग की दर से खरीदा जाता है और एक रुपये में संसद में बेचा जाता है। यानी 98 प्रतिशत सब्सिडी पापड़ के प्रति नग पर दी जा रही है। कैंटीन में रोटी एकमात्र ऐसा व्यंजन है, जो लाभ जोडक़र बेची जाती है। प्रति रोटी लगत खर्च 77 पैसे आता है, जबकि इसे एक रुपये प्रति नग की दर से बेचा जाता है। हालांकि सस्ते से सस्ते ढाबे पर भी रोटी की कीमत 2 रुपये से लेकर 5 रुपये तक है। संसद की रसोई की ये दरें खाद्य समिति ने 20 दिसंबर, 2010 को लागू की थी, तब से लेकर अब तक इन दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। जबकि सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ती महंगाई के अनुपात में निरंतर बढ़ते रहे हैं।

वर्तमान में सांसद को प्रतिमाह लगभग एक लाख, 40 हजार रुपये मिलते हैं। इसलिए सांसद और संसद के अधिकारी व कर्मचारियों को सब्सिडी आधारित भोजन की व्यवस्था बंद करने की जरूरत है, लेकिन माननीयों के मुंह से निवाला छीनने की हिम्मत कौन जुटाए? बीते पांच सालों में सांसद 60 करोड़ 60 लाख सब्सिडी आधारित भोजन का आनंद ले चुके हैं। 2009-10 में यह छूट 10.04 करोड़ रुपये थी, तो 2010-11 में 11.07 करोड़ रुपये थी और 2013-14 में बढक़र 14 करोड़ रुपये हो गई। यह छूट 76 प्रकार के व्यंजनों पर दी जाती है। इस छूट का प्रतिशत 63 से लेकर 150 प्रतिशत तक है।

बीते पांच सालों में सांसद 60 करोड़ 60 लाख सब्सिडी आधारित भोजन का आनंद ले चुके हैं। 2009-10 में यह छूट 10.04 करोड़ रुपये थी, तो 2010-11 में 11.07 करोड़ रुपये थी और 2013-14 में बढक़र 14 करोड़ रुपये हो गई। यह छूट 76 प्रकार के व्यंजनों पर दी जाती है। इस छूट का प्रतिशत 63 से लेकर 150 प्रतिशत तक है। Via 4pm.co.in

एलपीजी पर सब्सिडी किसलिए ??? आम आदमी ही क्यों ??

 

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