Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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February 17, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

लेखन कला और मेरा सफर

मोनिका गुप्ता

लेखिका रुप में मेरा अनुभव

अपने 26 साल के लेखन के अनुभव को 6 मिनट में वीडियों में दिखाने का प्रयास किया है..बेशक,  लेखन  चंद मिंंनट की वीडियों में दिखाना बहुत मुश्किल था क्योकि लेखक का हर लेख बहुत प्रिय होता है अगर सभी लेख लेती तो वीडियों बहुत लम्बी बन जाती इसलिए बहुत कम में अपना सफर बताने की कोशिश की है… बताईएगा जरुर कि आपको, मेरे द्वारा बनाया गया ये वीडियों कैसा लगा

नमस्कार

हरियाणा के सिरसा में रहती हूं और लेखन में लगभग 26 साल से सक्रिय हूं. वैसे देखा जाए तो लेखन का बचपन से ही शौक था बहुत कहानियां भी लिखी थी पर ये समझ नही थी कि कहां भेजे और कैसे भेजे इसलिए प्रकाशित भी नही हुई.

बात सन 1989 ,गाजियाबाद( यूपी) की है. एक दिन अचानक बैठे बैठे विचार आया और कहानी लिख दी इतना ही नही उसे उसी समय सांध्य समाचार पत्र में दे आई. उसी शाम वो कहानी सचित्र प्रकाशित हो गई. बस उस दिन ऐसा हौंसला मिला कि लगातार लेखनी चल रही है.

जाने माने राष्ट्रीय समाचार पत्र-पत्रिकाओं जैसा कि “दैनिक भास्कर”, “राजस्थान पत्रिका”, “दैनिक जागरण”, “दैनिक ट्रिब्यून”, “दैनिक नव ज्योति”, “पंजाब केसरी”, आदि अखबारों के साथ-साथ “लोटपोट”, “चंपक,” “बालहंस”, “बालभारती”, “नन्हें सम्राट”, “नैशनल बुक ट्रस्ट” की “न्यूज़ बुलेटिन” आदि में लेख, कहानी एवं प्रेरक प्रसंग नियमित रूप से छपते रहे ।

“दिल्ली सिटी केबल” में अनेंको कार्यक्रम जैसे “हम मतवाले नौजवान” आदि के स्क्रीप्ट लेखन के साथ साथ जिंगल्स और वायस ओवर भी किया. “भास्कर टीवी” जयपुर में भी अनेंक कार्यक्रमों की स्क्रीप्ट लिखी और जयपुर आकाशवाणी के कई प्रोग्राम में न सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि महिला जगत की एकंरिंग भी की है। आकाशवाणी में उदघोषिका के रुप मे भी कार्य किया. इसके इलावा दूरदर्शन जयपुर मे “कुछ जानी अनजानी” कार्यक्रम की स्क्रिप्ट भी लिखी. जिसमे जानी मानी हस्तियों से साक्षात्कार लिए थे.

आकाशवाणी रोहतक व जयपुर से मेरे लिखे नाटक, क्षणिका एवं झलकियां प्रसारित होते रहे. सिरसा मे लोकल केबल पर बच्चों के ढेरों कार्यक्रम बनाए. बच्चो के अति उत्साह को देखते हुए “सैमसन क्रिएश्सन” आरम्भ की जिसमें बच्चों की वीडियों रिकार्डिग करके कार्यक्रम बनाते और केबल पर दिखाए जाते. इसके इलावा महिलाओं के कार्यक्रम तथा अन्य प्रेरित करने वाली सोशल डोक्यूमैंट्री भी बनाई.

इसी बीच जब से सोशल मीडिया एक सशक्त माध्यम बन कर उभरा तभी से न सिर्फ लेखन में और ज्यादा सक्रिय हो गई बल्कि अपनी अभिव्यक्ति के लिए कार्टून भी बनाने लगी. धीरे धीरे कार्टून “दैनिक जागरण “ मुद्दा के तहत मे छपने लगे और लगभग डेढ साल तक नियमित छपते रहे. पिछ्ले दस साल से राष्ट्रीय स्तर के चैनल “ज़ी न्यूज” के साथ संवाददाता के रुप में जुडी रही.

“दैनिक नवज्योति”, जयपुर से लगातार तीन साल तक रविवारीय में, “दीदी की चिठ्ठी” प्रकाशित होती रही.”नन्हें सम्राट” में बाल उपन्यास “ वो तीस दिन “ को धारावाहिक के रुप मे प्रकाशित कर रहा है. “नव भारत टाईम्स” आनलाईन में ब्लाग है. अभी तक सात किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं और कार्य निरन्तर जारी है.

Monica Gupta

“मैं हूं मणि’ को 2009 में” हरियाणा साहित्य अकादमी” की तरफ से बाल साहित्य पुरस्कार मिला। इस पुस्तक में मणि के बचपन की कुछ कहानियां हैं. जिसमे शरारत है. मासूमियत है जिद्दीपना है और बहुत सारा प्यार छिपा है. ‘समय ही नहीं मिलता’ नाटक संग्रह है जिसे हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से अनुदान मिला। ये वो नाटक हैं जिनका प्रसारण आकाशवाणी जयपुर और रोहतक से हो चुका है.

‘अब तक 35’ व्यंग्य संग्रह है।राष्ट्रीय समाचार पत्रों जैसाकि दैनिक भास्कर में “राग दरबारी” एक कालम छ्पता था जिसमॆ ये व्यंग्य प्रकाशित हुए. इसके इलावा “मधुरिमा” व अन्य पत्रिकाओं में भी व्यंग्य प्रकाशित हुए उनमे से ये किताब कुछ चुनींदा व्यग्यों का सकंलन है.

‘स्वच्छता एक अहसास’ सामाजिक मूल्यों पर आधारित किताब है। खुले मे शौच जाने की सोच किस तरह बदली और लोगो ने शौचालय बनवाए उसी पर यह प्रेरित करती किताब है.

‘काकी कहे कहानी’ बाल पुस्तक है जो ‘नैशनल बुक ट्रस्ट’ से प्रकाशित हुई है। काकी बच्चे को कहानी सुनाती है पर बच्चा पढाई की वजह से कहानी सुनने मे शौक नही रखता पर जब कहानी सुनना शुरु करता है तो काकी के पीछे ही पड जाता है कि और कहानी सुनाओ पर फिर काकी कहानी से तौबा कर लेती है.

‘अब मुश्किल नहीं कुछ भी’ को भी “हरियाणा साहित्य अकादमी” की तरफ से अनुदान मिला है। इसमें जानी मानी दस शख्सियतें हैं उनका बचपन कैसा था और साधारण परिवार से होते हुए भी आज किस मुकाम पर पहुंचे हैं “अब मुश्किल नही कुछ भी “उनके बारे में बताता है.

‘वो तीस दिन’ बाल उपन्यास ,नैशनल बुक ट्रस्ट के नेहरू बाल पुस्तकालय की ओर से प्रकाशित हुआ है। “वो तीस दिन” उपन्यास की कहानी दसवीं में पढने वाली जिद्दी, शरारती लडकी मणि की है जिसकी हाल ही में बोर्ड परीक्षा समाप्त हुई है और अब वो कुछ दिन पढाई से दूर मौज मस्ती में रहना चाहती है पर उन तीस दिनों में कुछ ऐसा होता है कि उसकी सोच में बदलाव आ जाता है. इस उपन्यास में हंसी मजाक, प्रेरक प्रसंग, पहेलियां, चुटकुले, और भी बहुत कुछ है जिससे बच्चे सीख सकते हैं और बहुत अच्छे इंसान बन सकते हैं….

फिलहाल बहुत जल्द स्वच्छता पर एक अन्य किताब प्रकाशित होने वाली है और लघु कथाओं पर कार्य चल रहा है…

सफर जारी है

February 13, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

आज कल के बच्चे और माँ

आज कल के बच्चे और माँ

सारी माँए पागल ही होती हैं

कई बार लिखते हुए चश्मा बहुत प्रोब्लम देता है. खासकर जब कुछ इमोशनल लिखना हो.. बार बार चश्मा उतार कर नम हुई आखें पोंछ्ना फिर लिखना फिर चश्मा उतार कर आंसू पोछ्ना… उफ्फ … आज मेरी एक सहेली से कुछ बात ही ऐसी हुई कि मन भावुक हो गया बस… वही लिख रही हूं और लिखते लिखते शब्द धुंधला रहे …..

lady working on laptop photo

बच्चें चाहे बेटा हो या बेटी… माता पिता के लिए अमूल्य होते हैं. जहां बिटिया हमेशा पापा की लाडली होती हैं वही माँए भी, अक्सर अपने बेटे को लेकर बेहद भावुक होती हैं… !!!

बात कुछ दिनों पहले की है एक पार्टी में दीपा (परिवर्तित नाम) मिली. थोडी उदास लग रही थी मेरे पूछ्ने पर उसने बताया कि बेटे पर गुस्सा आ रहा है दिल्ली नौकरी करता है यहां मिलने भी बहुत कम आता है बात करो तो busy  हूं कह कर फोन रख देता है. वटस अप पर भी मैसेज भेजती हूं तो देख तो लेता है पर बस कभी कभी hmmm तो कभी स्माईली बना देता है …

काश उसकी एक बेटी भी होती तो कितना अच्छा होता… मैनें उसके गाल पर चपत मारी और बोली अरे .. ये क्या बात हुई … अच्छा ये बताओ कि कितनी बार फोन करती हो तुम उसे … वो बोली दिन भर में तीन चार बार तो धंटी दे ही देती हूं और मैसेज तो भेजती ही रहती हूं कि क्या हाल है … !!खाना खाया .. क्या खाया … काम वाली आई थी की नही … आदि

मैने कहा हे भगवान !! इतनी बार फोन … अगर मैं तुम्हारा बेटा होती तो शायद मैं भी फोन नही उठाती … अरे भई !!! बच्चा नौकरी कर रहा है. नई नौकरी है … काम ज्यादा है तनाव भी ज्यादा ही होगा … इस पर वो मेरी बात काटते हुए बोली कि पर जब देखो तब online  रहता है पर बात करने का समय नही है … वो मुझे प्यार ही नही करता … याद ही नही करता … आठ महीने और 20 दिन हो गए उसे घर आए …!!

मैनें उसे बहुत समझाया पर उसका record एक ही बात पर अटका हुआ था कि वो अब प्यार नही करता … जबकि मैं उसे समझाने में जुटी थी.
इस बात को तीन चार दिन बीत गए. अभी थोडी देर पहले वो मेरे घर आई और बहुत खुश थी पर मुझसे गले मिलते ही रो पडी बोली तुम ठीक कह रही थी… मेरा बेटा वाकई मुझसे बहुत प्यार करता है … मैने उसे चुप कराया और पूछा कि क्या हुआ उसने बताया कि कल ही एक दिन के लिए घर आया था. खाने के बाद आराम कर रहा था. उसके लैपटॉप मे कोई दिक्कत थी बोला ठीक आप ही करवा दो… दीपा ने बताया कि उसे गुस्सा तो आ ही रहा था कि एक दिन के लिए आया है और आराम कर रहा है बात भी नही कर रहा … और वो पास ही दुकान पर लैपटाप ठीक करवाने ले गई…

दुकानदार ने चैक करने के लिए लैपटाप खोला और पूछा कि पास वर्ड क्या है. दीपा बता रही थी कि उसने अनमने भाव से घर फोन करके बेटे से पार्सवर्ड पूछा तो बेटे ने कहा … लव यू मां …एक बार तो उसे समझ नही आया … दुबारा पूछने पर बेटे ने बताया यही मेरा पासवर्ड है … Love u maa अपनी आखों में खुशी के आसूं छिपाती उसने दुकानदार को पासवर्ड बताया और जब laptop स्टार्ट किया तो उसी की फुल्ल स्क्रीन फोटो desktop पर लगाई हुई थी…!!! वो बहुत खुश थी कि उसके बेटे ने उसकी फोटो लगा रखी थी

उसने बताया कि वो कितनी गलत थी जबकि बेटा हर पल उसे अपने ख्यालों में यादों में साथ रखता है. बताते बताते उसका गला रुंध गया और शायद मैं भी अपने आंसू रोक नही पा रही थी.. उसने बताया कि उसका बेटा, वाकई उससे बहुत प्यार करता है… बस नई नौकरी है ना … बस इसलिए थोडा सा व्यस्त है … !! वैसे बहुत बहुत प्यार करता है उससे… !! अच्छा जी … कहते हुए मैंने भी मुस्कुराने की कोशिश की … !!
वो तो चली गई और मैं उसी के बारे में लिखने लगी कि सभी माएं पागल ही होती है और बस बार बार आसूं आखों से छ्लक रहे हैं और चश्मा है कि बार बार disturb किए जा रहा है !!!

.lady working on laptop photo

February 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

माता सरस्वती शारदा

माता सरस्वती शारदा

माता सरस्वती शारदा आप अपनी कृपा अपने भक्तों पर ऐसी ही बनाए रखना. अपना आशीर्वाद हमें हमेशा देना और हम भी सच्चाई और नेकी की राह पर चलते रहेंंगें

माता सरस्वती शारदा

माता सरस्वती शारदा

माता सरस्वती शारदा

आप सभी को  बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं …

 सरस्वती शारदा

विद्यादानी दयानी दुःख हरिणी

जगत जननी ज्वालामुखी माता

सरस्वती शारदा

हे माता सरस्वती शारदा

विद्यादानी दयानी दुःख हरिणी

जगत जननी ज्वालामुखी माता

सरस्वती शारदा

कीजे सुदृष्टि

सेवक जान अपना

इतना वरदान दीजे

तान तान और अलाप बुद्धि अलंकार

शारदा

विद्यादानी दयानी दुःख हरिणी

जगत जननी ज्वालामुखी माता

सरस्वती शारदा

 

https://monicagupta.info/articles/%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE/

February 8, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

फिल्मफेयर अवार्ड और दीपिका पादुकोण के पिता का पत्र

deepika-filmfare

फिल्मफेयर अवार्ड और दीपिका पादुकोण के पिता का पत्र

इसे कहतें है असली मन की बात … दिल से निकली बात अक्सर दिल पर ही लगती है…
फिल्मफेयर अवार्ड्स कार्यक्रम में  पीकू फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवार्ड लेने स्टेज पर आई दीपिका पादुकोण ने भरी सभा में सभी दर्शकों से अनुरोध किया कि वो दो मिनट अपनी बात शेयर करना चाहती है दीपिका ने अपने पिता प्रकाश पादुकोण जोकि  मशहूर बैडमिंटन खिलाडी रहें  हैं उन के लिखे एक पत्र को सभी के साथ शेयर किया. जिसे सुनकर दर्शकों की आखॆं तो नम हुई ही हम जैसे जो लोग टीवी पर ये कार्यक्रम देख रहे थे… भावुक हो गए और आखें भर आईं.. एक एक शब्द सच्चाई से भरा था एक एक शब्द प्रेम और अपनेपन से भरा था शायद दिल से निकली बात थी इसीलिए सभी के दिल पर लगी…  और सभी की  आंखें नम हो गईं ….

 

दीपिका फिल्मफेयर में

दीपिका फिल्मफेयर में

प्रकाश पादुकोण का पत्र दीपिका के नाम

दीपिका, जब तुम 18 साल की हुईं थीं तो तुमने मुंबई जाकर मॉडलिंग करने की इच्छा जताई थी. तुम्हारे मुंह से मुंबई जाकर मॉडलिंग करने की बात सुनकर हमें थोड़ी दिक्कत हुई क्योंकि तुम एक ऐसी इंडस्ट्री में जाने की बात कर रही थीं जिसके लिए तुम बहुत छोटी और अनुभवहीन थी और, ये एक ऐसी इंडस्ट्री थी, जिसके बारे में हम भी कुछ नहीं जानते थे. लेकिन, फिर हमने सोचा कि तुम्हें तुम्हारे सपने को पूरा करने से रोकना तुम्हारे साथ अन्याय होगा. खासकर, उस सपने को पूरा करने से रोकना जिसके बारे में तुम दिन रात सोचती हो. अगर तुम अपना सपना सच कर पाईं तो हमें गर्व होगा लेकिन अगर तुम अपनी कोशिश में सफल भी नहीं होती हो, तब भी तुमको खराब नहीं लगेगा कि तुमने अपने सपने को सच करने की कोशिश नहीं की.

दीपिका, जब तुम घर आओगी तो खाने के बाद तुम्हें अपने बिस्तर खुद ही बिछाने होंगे और अगर घर में मेहमान आए होंगे तो तुम्हें जमीन पर भी सोना पड़ेगा. अगर कभी तुम्हें लगे कि हम तुम्हें स्टार की तरह क्यों ट्रीट नहीं करते तो उसका कारण ये है कि तुम हमारी बेटी पहले हो एक सुपर स्टार बाद में. एक वक्त के बाद तुम्हारे आगे-पीछे घूमने वाले कैमरे धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे. तब तुम ही बचोगी और एक बात हमेशा याद रखना कि जिंदगी में हमेशा जीत नहीं होती है. कभी हार भी होती है. जीतने के लिए कभी हारना भी पड़ता है. तुम जिस इंडस्ट्री में हो उसमें तुम बहुत छोटी हो, लेकिन हमेशा एक सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करना.
पापा

बहुत खुशी है क़ि आप जैसे स्टार्स से ना सिर्फ आज के, बल्कि आने वाली पीढी बहुत कुछ सीखेगी।।। ढेर सारी शुभकामनाए 🙂 लव यू !!!

फिल्मफेयर अवार्ड और दीपिका पादुकोण के पिता का पत्र आपको कैसा लगा ?? आप भी अपने मन की बात जरुर शेयर कीजिएगा … अच्छा लगेगा आपको भी और हमको भी !!!

February 6, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

ऐसा भी होता है

ऐसा भी होता है

ऐसा भी होता है

कई बार कुछ ऐसी बात हो जाती है जो भुलाए नही भुलती. हमेशा हमारे दिमाग में ताजा रहती है.
बहुत समय बाद एक व्यक्ति से मिलना हुआ. पहले तो पहचान नही पाई पर जब याद आया तो  हम दस मिनट तक हंसते ही रहे… !!! हंसते ही रहे !!! असल में हुआ ये था कि बहुत समय पहले हम किसी शादी में गए थे. वहां बहुत रश था. खाना बहुत देर से सर्व हुआ इस करके वहां बहुत भीड थी…

किसी तरह मैं भी टेबल तक पहुंची तो प्लेट खत्म हो चुकी थी इसलिए एक तरफ किनारे पर खडी प्लेट की इंतजार कर ही रही थी तभी देखा एक व्यक्ति ने प्लेट में तो खाना डाल लिया पर चमच्च नही मिला. काफी देर इधर उधर देखने के बाद उन्होने सब्जी में रखा बडा चमच्च( करछा) (सर्विंग स्पून) उठा लिया और उसी से दाल खाने लगे क्योकि मैं वही खडी थी और पहले तो बहुत कंट्रोल किया कि हंसी न आए पर हंसी छूट ही गई. जिस तरह से वो इतने बडे चमच्च से दाल खा रहे थे … ह हा हा !!!

वो भी समझ गए पर अपनी मजबूरी इशारे से बताई और खाने में जुटे रहे तभी और प्लेट भी आ गई और मैं भी खाना डालने लगी. अब जब दाल ले पास पहुंची तो उसका चमच्च नही था  …  !!!वो व्यक्ति जो खाना खा चुके थे उन्होने मेरी दिक्कत समझी और खुद खाना खाकर मुझे चमच्च देने के लिए पूछा पर मैने मुस्कुरा कर मना कर दिया … आज इतने समय बाद, आज वही चमच्च वाले जानकार मिले और बीती बातें ताजा हो गईं  …!!! वो समय वो अंजाने थे पर अब मैं उनका अनुभव जानना चाह रही थी कि इतने बडे चमच्च से खाना खाया कैसे ??

smily photo

मुझे लगता है कि ऐसी मजेदार बातें हम सभी के साथ होती है इसलिए अगर आप भी अपनी बातें शेयर करेंगें तो बहुत अच्छा लगेगा …

February 5, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

वासुदेव कुटुम्बकम

वासुदेव कुटुम्बकम

earth photo

 

वासुदेव कुटुम्बकम- क्लिक करें -गया वो जमाना जब आपका कही बाहर  धूमने का दिल किया और आपको बोरिया बिस्तर बांधना पडता था. अब जमाना वाकई में  बदल गया है !! तो क्या हो गया अब या क्या करना चाहिए ??

वासुदेव कुटुम्बकम

अब… ह हा हा  उठाईए ऊंगली और निकल जाईए ह हा हा … जी हां उठाईए ऊंगली और निकल जाईए… एक क्लिक पर कभी दोस्तों की वॉल पर, कभी वीडियों के जरिए गहरे समुंद्र, कही ऊंची ऊंची पहाडियां, कभी किसी की रसोई में कभी किसी के परिवार से मिलने, कभी किसी की शादी में तो कभी अपनी ही यादों में … कोई बोझ नही कोई तनाव नही …  है ना हल्के से सामान के साथ शानदार सफर  😎

ठीक ऐसा ही बदलाव लाया है   Blog हमारी दुनिया  में    What is Blog and Blogging

बदलते समय के साथ साथ जिस तरह से बदलाव आया है और पूरी पृथ्वी की मानों एक परिवार बन गया है वासुदेव कुटुम्बकम बन गया है . कभी सोचा न था

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