Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 4, 2015 By Monica Gupta

Audio Poem- Female Foeticide by Monica Gupta

जब कोई बात बिगड़ जाये तो रहें बी पॉजिटिव
girl child photo

Photo by U.S. Fotografie

Audio Poem- Female Foeticide by Monica Gupta

सुनिए मेरी लिखी कविता मेरी आवाज में …

हद हो गर्इ

मोनिका गुप्ता

 

https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2015/07/poem-monica-gupta.wav

( भ्रूण हत्या पर लिखी कविता )

हमारे देश मॆं जिस तरह से भूण हत्याएं हो रही हैं  अकसर मन विचलित हो जाता है और उसी विचलित मन से बन जाती हैं ऐसी कविता कि हद हो गई … बस बहुत हो गया …

अब बहुत हो गया

बस
अब बहुत हो गया
हद हो गर्इ
टी.वी. हो या समाचार पत्र
कविता प्रतियोगिता हो या राज्यस्तरीय विवाद
पर लगा नहीं पा रहे
भ्रूण हत्या पर लगाम
कह कह कर थक गए हम
पर हम अडि़ग हैं कि
कन्या नही…… कन्या नही
बस चाहिए पुत्र रत्न ही
कोर्इ बात नही

ज्यादा दूर नही है, देख लेंगेें
आज से बीस साल बाद
जब…..
लड़की नही मिलेगी कोर्इ
आपके कुल दीपक से ब्याहने को
आपका वंश चलाने को
ना होगी तब नवरात्रि में कंजको की पूजा
ना होगी पति की लम्बी उम्र के लिए उपवास पूजा
ना छम छम पायल से किसी का घर आँगन चहकेगा
नाना-नानी बनने का शौक अधूरा ही रह जाऐगा
ना रहेगा प्रेम, ना होगी करूणा
क्योंकि यह तो है नारी का गहना
बेबस मन कन्यादान से वंचित रह जाऐगा
हरा भरा घर मकान बन कर ही रह जाऐगा
मनु, इंदिरा, कल्पना का नाम पन्नों में ही रह जाऐगा
बस……….
कुछ ही सालों की है बात
हैरान, परेशान हताश खुद ही कह उठेंगें आप
कन्या थी अनमोल रत्न
पर तब तक शायद बहुत देर हो चुकी होगी
हमें इन्तज़ार करना होगा
शायद फिर से बीस सालों का
पर तब तक सब कुछ बदल चुका होगा
खामोशी, उदासी, मायूसी का फैल चुका होगा आतंक
तो फिर………..
क्यों हो रही हैं ये भ्रूण हत्याएँ
ठान लो
बस बहुत हो गया
जानते हो
हम भारतवासी……… एक जुट हो क्या है कर सकते
मुसीबत पडने पर दे सकतें हैं जान
चीर सकतें हैं धरती की छाती
उधेड़ सकतें हैं पहाड़ों का सीना
जब ला सकतें हैं हरियाली बंजर धरा पर
फिर क्यों है रोक कलियों के प्रस्फुटन पर
चलिए लें संकल्प
आज, अभी, यहीं
भ्रूण हत्या पर लगाए
कस कर लगाम सभी
मत ड़गमगाने दें भारत का आधार
नर और नारी से ही है हमारा घर संसार
उठो, जागो, चलो
बनाए संसार में भारत की अलग पहचान
ताकि फिर से ना पड़े कहना कि…….
मोनिका, अब बहुत हो गया
हद हो गर्इ

Audio Poem- Female Foeticide by Monica Gupta

 

July 4, 2015 By Monica Gupta

लडते झगडे मुद्दे

लडते झगडे मुद्दे

लडते झगडे मुद्दे – मीठा मीठा गप्प गप्प कडवा कडवा थू थू … लडते, झगडे तो कभी सुलझे बच्चे की तरह टीचर(एंकर} के सामने कुछ पूछ्ने के लिए ऊंगली उठाते, बीच बीच में विज्ञापन और अगले कार्यक्रम की सूचना … इतना सब कुछ होता है आजकल न्यूज चैनल की भैंस … ओह क्षमा बहस में, बस पूछिए ही मत…

लडते झगडे मुद्दे

लडते झगडे मुद्दे – कई बार इतना डरा देते हैं और खासकर  शाम का समय तो बेहद ही क्रूशियल होता है. कितनी बार तो चैनल की आवाज ही धीमी करनी पडती है कि पडोसी ये न समझ लें कि हमारे घर में लडाई हो रही है…

हर चैनल, बहस में लडने भिडने मारने को उतारु सा प्रतीत होता है… इसलिए बस आज तो सोच ही लिया कि रोज रोज बुराईयां करने से अच्छा है आज से फालतू की बहस देखना ही बंद … ना होगी भैस ओह पुन क्षमा.. न होगी बहस और न वो पानी मे जाएगी… बस आज शाम टीवी ही नही चलाया… समय गुजर रहा था. गुजर रहा था..

मन मे बुरे बुरे ख्याल आने शुरु हो गए कि आज का मुद्दा क्या होगा. कौन कौन किस चैनल पर आया होगा. किस बात पर लड मर रहे होंगें. किस की खाली कुर्सी दिखाई जा रही होगी.  कुछ सूनापन सा महसूस होने लगा.

खैर ध्यान बटाया कि मोनिका तू कार्टून की बना ले कोई ,पर फिर सोचा कि कार्टून बनाने का आईडिया भी तो यही से मिलता है … बस फिर क्या था. अब मैं टीवी के सामने बैठी  चाय पीते हुए बहस एंजाय कर रही हूं और बार बार चैनल ही बदल बदल कर देख रही हूं और सोच रही हूं  बिल्कुल बेकार मुद्दे … आज तो देख लिया बस पर कल से बिल्कुल नही देखूगी…   🙂

Cover story: Freedom for Women

लडकियां मोबाइल का प्रयोग न करें, जींस न पहनें। घर से बाहर निकलते हुए सिर पर पल्लू रखें, बाज्ार  न जाएं..।लडकियों की शादी कम उम्र में कर देनी चाहिए। इससे बलात्कार की घटनाएं कम होंगी और वे सुरक्षित रहेंगी..।

बलात्कार के 90 फीसदी मामले आपसी सहमति के होते हैं..।

लडकियों को देर रात घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए..।

ये सारे बयान और फरमान देश के ज्िाम्मेदार लोगों द्वारा दिए गए हैं। ऐसे समय में जबकि स्त्रियां हर क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम कर रही हैं, ऐसे बयान हास्यास्पद हैं। ये स्त्रियों के प्रति संवेदनहीन नज्ारिए का जीवंत उदाहरण हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्राइम कैपिटल में तब्दील हो रही है। सेंटर फॉर सोशल रिसर्च ने दिल्ली में जनवरी 2009 से जुलाई 2011 के बीच दर्ज मामलों के अध्ययन के बाद एक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में महिलाएं दिन में भी सुरक्षित नहीं हैं।

http://www.jagran.com/sakhi/special-in-the-issue-cover-story-freedom-for-women-S7354SK.html

 

लडते झगडे मुद्दे -

लडते झगडे मुद्दे –

 

तेज खबरे – गरमा गरम खबर – Monica Gupta

तेज खबरे – गरमा गरम खबर तेज खबरे – गरमा गरम खबर Short term memory loss. खबरों का संसार जितनी तेजी से बदल रहा है हैरानी होती है  अभी एक मिनट पहले जो खबर सुर्खियों में होती है वही पल भर  में गायब भी हो जाती है और फिर सामने होती है एक और सनसनी खबर.. … read more at monicagupta.info

 

 

न्यूज चैनल और गर्मागर्म बहस – Monica Gupta

न्यूज चैनल और गर्मागर्म बहस मीडिया और हमारे खबरिया चैनल मणि का फोन आया कि तबियत ठीक नही लग रही. मैं तुरंत भागी. इधर उधर घूमती हुई बोली बैचेनी सी हो रही है धबराहट भी, कुछ अच्छा नही लग रहा. अरे !! मैने उसे आराम से बैठाया वो फिर खडी हो गई. बोली बैठा नही … read more at monicagupta.info

न्यूज़ चैनल और मुद्दे

न्यूज़ चैनल और मुद्दे किसने बिगाडा देश का माहौल … न्यूज चैनलों पर मुद्दा गरमाया हुआ है. चैंनलों पर अलग अलग पार्टियों के महारथी, पत्रकार और न्यूज एंकर ऊंची न्यूज़ चैनल और मुद्दे

 

वैसे लडते झगडे मुद्दे  के बारे में आपकी राय जरुर बताईएगा !!!

July 4, 2015 By Monica Gupta

विज्ञापन और अरविंद केजरीवाल

cartoon monica gupta ak board

विज्ञापन और अरविंद केजरीवाल

हर रोज कुछ न कुछ आप पार्टी की ओर से सुनने को मिल रहा है कि आप के बहुत से समर्थको का विश्वास डगमगा रहा है … बात ये नही है कि किसी अन्य पार्टी की तरफ ध्यान आकर्षित हुआ है नही … सभी पार्टियां एक ही कैसी है और अब कार्यशैली देखते हुए लग रहा है कि आप भी इसी मे शामिल होती जा रही है …

– ABP News

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल फिर विवादों में हैं. इस बार उनकी खिंचाई भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके एक टीवी विज्ञापन को लेकर हो रही है. विज्ञापन में मुख्यमंत्री केजरीवाल का महिमामंडन किया गया है जिस पर विपक्ष हमलावर हो गया है. विपक्ष का आरोप है कि विज्ञापन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिल्ली सरकार ने उल्लंघन किया है.

विपक्ष का जोरदार हमला दिल्ली की केजरीवाल सरकार के टीवी विज्ञापन पर है. इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर दिल्ली सरकार का विज्ञापन टीवी पर जोर-शोर से दिखाया जा रहा है. बीजेपी और कांग्रेस का आरोप है कि विज्ञापन में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का चेहरा नहीं दिखाया गया है लेकिन उनका नाम लेकर उन्हें गरीबों के मसीहा के तौर पर पेश किया जा रहा है. विज्ञापन में 9 बार केजरीवाल का नाम लिया गया है. विपक्ष का कहना है कि ये विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के खिलाफ है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकारी विज्ञापनों पर सिर्फ राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और प्रधानमंत्री की फोटो लगी हो और किसी व्यक्ति का महिमामंडन नहीं होना चाहिए.

विज्ञापन का इसलिए भी विरोध हो रहा क्योंकि इसमें इसमें पति को बैठे हुए और महिला को काम करते हुए दिखाया गया है. इसे महिलाओं के अपमान से जोड़कर देखा जा रहा है.

विज्ञापन को लेकर विपक्ष को हो-हंगामे के बाद भी आम आदमी पार्टी को इसमें कुछ भी गलत नजर नहीं आता है.

दिल्ली सरकार के इस विज्ञापन पर आम आदमी पार्टी का कहना है कि इसमें कुछ गलत नहीं है. आशुतोष के मुताबिक, “इस विज्ञापन में केजरीवाल का चेहरा नहीं दिखाया गया है इसलिए इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं है. आप कुछ भी करती है तो बीजेपी को तकलीफ होती है उन्हें मिर्ची लगती है.  बीजेपी किसी भी हद तक गिर सकती है. उनका बस चले तो पूरे हिंदुस्तान से ये आम आदमी पार्टी को बर्खास्त कर दें.”

बीजेपी के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा ने कहा, ”आप सफाईकर्मचारियों को भूखा रखते हैं, उनको सैलरी देन के लिए आपके पैसा नहीं है उसके बाद इस प्रकार घटिया कैंपने के जरिए अपना प्रमोशन करना चाहते हैं ये कहां तक सही है. इनके निकम्मेपन को 100 करोड़ खर्च करके दिखा रही है.”

बीजेपी प्रवक्ता का संवित पात्रा का कहना है, “‘टीवी ऑन करते ही हर दो मिनट  बाद केजरीवाल का गुणगान शुरू हो जाता है. सफाई कर्मचारियों के घर में चुल्हे नहीं जल पा रहे हैं. आप का कहना है कि उनके पास पैसा नहीं है. विज्ञापन पर लाखों खर्च करने वाली पार्टी कहती है कि सफाई कर्मचारियों को देने के लिए पैसा नहीं है. एड में महिला को काम करते हुए दिखाया गया है.”

सरकारी विज्ञापनों के नियमन से जुड़े दिशानिर्देश जारी करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन विज्ञापनों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और प्रमुख न्यायाधीश जैसे कुछ ही पदाधिकारियों की तस्वीरें हो सकती हैं.

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश See more…

IBN Khabar

नई दिल्ली। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल फिर विवादों में हैं। इस बार एक ‘रिश्वत बंद’ कराने वाले एक विज्ञापन को लेकर उनकी खिंचाई हो रही है जिसमें केजरीवाल का गुणगान किया गया है। इसे लेकर आप के पूर्व नेता ही केजरीवाल पर भड़क उठे हैं। इसके अलावा बीजेपी ने भी इस पर सवाल उठाए हैं।

Apart from being a crass and crude abuse of funds the Kejriwal ad on TV is sexist and projects women as servants of their husbands. Shocking

The ‘Jai Ho Kejriwal’ ad on TV, being a crass projection of Kejriwal, is against the SC order. It is an abuse of funds to project a leader Read more…

AAP

विधायकों को 54000 की सैलरी मिलती है। बिजली पानी के लिए महीने का चार हज़ार मिलता है। कोई सरकारी गाड़ी और घर नहीं मिलता। यूपी के एक विधायक ने बताया कि उन्हें 1 लाख रुपये से ज्यादा मिलते हैं। लेकिन विधायकों के वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव की कांग्रेस और बीजेपी ने आलोचना की है। कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा है कि ये पार्टी अब आम आदमी की नहीं रही, पांच महीने में इनके विधायक सैलरी बढ़ाने की बात करने लगे हैं।

दिल्ली विधान सभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि अगर सरकार एक रुपये महीना वेतन का प्रस्ताव लाए तो तीन विधायकों का उनका विधायक दल समर्थन करेगा। विजेंद्र गुप्ता जी की भावना का सम्मान करते हुए यह पूछा जाना चाहिए कि वे इस महंगाई में एक रुपये महीने पर कैसे जी सकते हैं। उनकी आय का ज़रिया क्या है। क्या उनके पास इतना पैसा है कि बिना कमाए जी सकते हैं। अगर है तो वे यह तरीका मुझे भी बता दें तो यकीन जानिए ये मेरा आखिरी प्राइम टाइम होगा। मैं सोमवार से काम पर नहीं आऊंगा।

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July 3, 2015 By Monica Gupta

सैलरी डबल

cartoon sansad by monica guptaसैलरी डबल- एक बार फिर सांसदों की सैलरी का मुद्दा गरमा  गया है इससे पहले 2010 में वेतन दुगुना हुआ था. आम लोगों के अच्छे दिन आएं न आएं, लगता है सांसदों के तो आ ही जाएंगे। प्रस्ताव कहता है कि सांसदों की स्वास्थ्य सुविधाओं में उनके बच्चों के अलावा पोते-पोतियों को भी शामिल कर लिया जाए।

MPs’ salaries – Navbharat Times

फोटो शेयर करें जैसे-जैसे हमारे अधिकांश सांसदों के संसदीय बर्ताव और काम करने के तौर-तरीकों में गिरावट आ रही है, वैसे-वैसे सुविधाओं की उनकी मांगें बढ़ती जा रही हैं। बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली संसद की संयुक्त समिति ने कहा है कि सांसदों के वेतन को दोगुना कर दिया जाए। इस समय सांसदों को मासिक वेतन 50,000 रुपये मिलता है। बात यहीं तक सीमित नहीं है।

सांसदों का दैनिक भत्ता 2000 रुपए से अधिक करने और पूर्व सांसदों का पेंशन भी 75 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सांसदों के वेतन में बढ़ोतरी सन 2010 में की गई थी। बहरहाल, समिति ने कहा है कि सांसदों के लिए ऑटोमैटिक पे रिविजन की व्यवस्था हो ताकि समय-समय पर बढोतरी स्वयं होती रहे। 34 हवाई यात्राओं में 25 फीसदी किराए के प्रावधान से भी सांसद संतुष्ट नहीं हैं। समिति ने 20 से 25 फ्री हवाई यात्राओं सहित करीब 60 सिफारिशें की हैं। इनमें निजी सचिव के लिए प्रथम श्रेणी के एसी रेल-पास की मांग भी शामिल है।

सांसद ग्राम योजना के तहत कुछ भले न हुआ हो, आम लोगों के अच्छे दिन आएं न आएं, लगता है सांसदों के तो आ ही जाएंगे। प्रस्ताव कहता है कि सांसदों की स्वास्थ्य सुविधाओं में उनके बच्चों के अलावा पोते-पोतियों को भी शामिल कर लिया जाए। गौरतलब है कि अपने क्षेत्र में काम कराने के लिए प्रत्येक सांसद 45,000 रुपए का भत्ता हर महीने पाने का हकदार है। ऑफिस के खर्च के लिए भी माहवार इतनी ही रकम मिलती है।

कपड़े और परदे धुलवाने के लिए हर तीसरे महीने 50,000 रुपए मिलते हैं। सड़क मार्ग का इस्तेमाल करने वाले सांसदों को 16 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से यात्रा भत्ता मिलता है। लेकिन यह सब इन्हें कम लगता है। ऐसा लगना स्वाभाविक इसलिए है कि हमारे ज्यादातर सांसदों की नजरें उन लोगों पर रही ही नहीं जिनका प्रतिनिधित्व वे करते हैं।

अगर अपने आम वोटरों की जिंदगी पर, उनके जीवन की तकलीफों-चुनौतियों पर नजर डालने का वक्त इन्हें मिले तो शायद इनकी भी प्राथमिकता कुछ बदले। मगर, राजनीति का जो चरित्र बनता जा रहा है, उसमें इसकी संभावना तलाशना आकाश कुसुम तोड़ने जैसा ही हो गया है। ऐसे में यह उम्मीद भर जताई जा सकती है कि वेतन के साथ वे अपनी गरिमा बढ़ाने पर भी ध्यान दें तो बेहतर होगा। See more…

July 2, 2015 By Monica Gupta

Really handicapped

Really handicapped

ladies talking photo

Photo by Katie Tegtmeyer

आज एक महिला बता रही थी कि वो handicapped हो गई है… अरे !!!  फिर  मैने ध्यान उसे देखते हुए पूछा अरे   कहां से, कब और कैसे. तुमने तो बताया भी नही …  इस पर उसने मुझे ही पागल करार देते हुए कहा कि अरी पगली वो वाला handicapped नही बल्कि दूसरे वाला !!!दूसरे वाला मतलब ??? तब उसने बताया कि जहाँ उसने नया घर बनाया है वहां मोबाईल नेट वर्क नही है इसलिए बिना नेट के handicap बराबर ही है. हे भगवान !!

Really handicapped….. वही कुछ दिन पहले एक जानकार भी नई कालोनी मे शिफ्ट हुए हैं. वहां जाने के लिए अभी सडक नही बनी है. एक दिन वो हमारे घर आए और बोले कि भई हम तो  handicapped हो गए है. हमने सोचा कि पता नही कैसे हो गए वो handicapped क्योकि देखने से तो लग नही रहे थे.. तब उन्होने हंसते हुए बताया कि असल में, सडक नही बनी है ना दस मिनट के रास्ते में आधा घंटा लग जाता है इसलिए … हे भगवान !!

मैं उसकी  मानसिकता पर मुस्कुरा दी.  ऐसे शब्दों का लोग किस  सहजता से इस्तेमाल कर लेते हैं ..वैसे सच ही है हम Really handicapped यानि बहुत अपाहिज हो चले है. आखों के सामने अन्याय होते हुए देख कर भी अंधे बन जाते हैं. कही से सच्चाई का स्वर उठे तो हम बहरे बन जाते हैं . अक्सर ईमानदारी का साथ देने के मामलो मे हमारी बोलती बंद हो जाती है. ओफ्फ.. नेट न चले और सडक न बनी हो तो भी  handicapped बहुत ही handicapped   Really  handicapped

 

July 2, 2015 By Monica Gupta

भविष्यकर्ता

cartoon kaam wali bai by monica gupta

भविष्यकर्ता -ये हैं हमारी भविष्यकर्ता !!इनका नाम है मिस टेक … भविष्यवाणी में साढे सात साल का लम्बा अनुभव है … ना जाने कितनी तरह की अलग अलग किताबें इन्होने पढ रखी हैं पर एक बात से ये भी सहमत है कि बेशक हम कितने भी बडे ज्योतिष क्यो न बन जाए पर एक बात आज भी पता नही लग असकते कि काम वाले बाई आज काम पर आऐगी या नही

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