Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 2, 2015 By Monica Gupta

बाल कहानी-मणि

story by monica gupta

बाल कहानी-मणि

मणि छ्ठी क्लास में पढने वाली बेहद चुलबुली और शरारती लडकी है. वो भी बडे होकर कुछ बनना चाह्ती है. कभी सोचती है पत्रकार बन जाऊ कभी सोच में आता है कि टीचर बन जाऊ तो कभी पुलिस अधिकारी पर आखिर में क्या होता है और क्या बनने की सोचती है …

इसी का ताना बाना है बाल कहानी-मणि में …

कहानी का अंत और भी ज्यादा रोचक है कि मणि का फैसला क्या रहता है …

बाल कहानी-मणि

 

ये कहानी नेशनल बुक ट्रस्ट की पत्रिका पाठक मंच बुलेटिन में प्रकाशित हुई थी …

July 2, 2015 By Monica Gupta

लेखों का संसार

Article in champak by Monica guptaPhotograph (131)champak story  monica guptaलेखों का संसार

बेशक आज नेट का जमाना है हर एक चीज क्लिक करके सोशल मीडिया पर डाली जा सकती है जिस करोडों लोग एक ही पल में देख सकते हैं पर आज से 20- 25  साल पहले ऐसा नही था.

एक कहानी या लेख लिखने के बाद पत्र के माध्यम से सम्पर्क करना पडता था. कुछ जाने माने हाउस अकसर जवाब भी देते थे पर कई बार भेजा गया पत्र कही गुम होकर रह जाता था न ही वापिस आता था और न ही प्रकाशित होता था.

जानी मानी बाल पत्रिका जैसे “चंपक” में लेख या अन्य कोई भी सामग्री छपना बेहद गर्व की बात होती थी.

July 2, 2015 By Monica Gupta

कहानी का जन्म

story by monica gupta (2) story monica gupta

कहानी का जन्म

बात सन 92 की यूपी गाजियाबाद की  है . अचाक एक विचार दिमाग में कौंधा और कहानी डाली और  उसे  सांध्य टाईम्स  के दफ्तर जाकर   दे आई . वैसे तो लिखने का बचपन से ही शौक रहा और अपने हिसाब से कहानी भेजती भी रहती थी . पर शायद जानकारी का अभाव था शायद  कभी मौका नही मिला और रचना प्रकाशित नही हुई पर अच्छी बात ये भी रही कि उत्साह कभी कम नही हुआ.

ये बात 92 की है .उन दिनों नेट नही हुआ करता था और लेखकों का पूरा फोकस सांध्य दैनिक और राष्ट्रीय समाचार पत्र पत्रिकाओं पर ही होता था क्योकि भारी तादात में उसे ही पढा जाता था. हां , तो मैं बता रही थी कि कहानी लिखी और सांध्य टाईम्स के दफ्तर में दे आई.  उसी शाम वो कहानी प्रकाशित भी हो गई. इससे लेखनी को बेहद बल मिला और लेखनी लगातार चलती रही.

बहुत लोग चाह्ते हैं कि आज कुछ लिखा और वो राष्ट्रीय पत्र पत्रिका में छप जाए. बेशल सोशल मीडिया बहुत बलवान हो गया है और लेखन को दिखाने का बहुत अच्छा माध्यम भी है पर मेरा मानना है कि  अगर शुरुआत लोकल स्तर पर हो और धीरे धीरे अपनी कमियों को देख कर उपर उठते जाए तो बहुत अच्छा होगा …

और अब तो जबसे नेट की सुविधा हुई है कोई भी अपना ब्लाग बना कर लेखन आरम्भ कर सकता है.

 

July 1, 2015 By Monica Gupta

दैनिक जागरण में कार्टून

collage DJ 16

दैनिक जागरण में कार्टून … दैनिक जागरण में मुद्दा के अंतर्गत कुछ कार्टून … समाज में फैले अलग अलग गम्भीर  मुद्दों पर चर्चा करके उनका हल निकाला जाता था … उसी मे प्रकाशित कुछ कार्टून

July 1, 2015 By Monica Gupta

स्वच्छता का महत्व – स्वच्छता का अहसास

Total Sanitation Campaign in Haryana

स्वच्छता का महत्व समझना बहुत जरुरी है. लोगों को स्वच्छता का अहसास करवाना जरुरी है ताकि वो इसकी मह्त्ता समझ सकें. इसके लिए सभी को मिल कर पहल करनी होगी

 

स्वच्छता का महत्व

swachata ka mahatva

कैसे करवाया स्वच्छता का अहसास

स्वच्छता का महत्व जहन में रखते हुए स्वच्छता का अहसास करवाया गया.

बात  2007 -2008 की है तब स्वच्छता अभियान हरियाणा के जिला सिरसा  में जोर  शोर से चला हुआ था. Zee News की रिपोर्टर  हम इस अभियान की  डाक्यूमैंट्री बना रहे थे तो स्वाभाविक है गांव गांव जा कर लोगो से इस अभियान के बारे मे साक्षात्कार ले रहे थे.

गांव में जा जा कर लोगों को समझाना कि खुले में शौच न जाओ ये अच्छा नही है …. आसान नही था. क्योकि बरसों से बाहर जाकर शौच करने का रिवाज रहा है तो कहां मानेगें ये लोग ….  फिर भी चलो सोच में उनकी थोडा बदलाव आया. कुछ गांव के लोग बहुत  समझदार थे  तो कुछ गांव के लोग बिल्कुल न समझ  और कुछ तो लडने को ही उतारु हो जाते कि हम तो बाहर शौच जाएगे कर ले  जो करना है …  ऐसे मे उनकी सोच बदलने मॆ कुछ समय लगा.

अभियान के दौरान एक गांव की महिलाए  सामने आने से कतरा रही थी.  बहुत समझाया  और कुछ देर बाद थोडी सी महिलाए सामने आई. आते ही महिलाओं ने मुझे घेर लिया और बोली कि हम न जाने इस अभियान को … हम को ये बता दो कि पैसा कितना मिलेगा… पैसा ??? किस बात का पैसा ??? इस पर वो बोली कि हम निगरानी करेगी. सुबह शाम गांव वालों को बाहर  जाने से रोकेगी तो समय भी तो लगेगा उसी लिए पूछ रहे हैं कि पैसा कितना लगेगा… उन दिनों मैं “जी न्यूज चैनल” की संवाददाता भी हुआ करती थी और  प्रशासन की ओर से डोक्य़ूमैंटी भी  बना रहे थे. मुझे ज्यादा बोलने का अनुभव तो नही था पर चूकि इस अभियान को बहुत नजदीक  से देख रही थी  और जिले के ADC डाक्टर युद्दबीर सिह ख्यालिया जोकि इस अभियान को आगे बढा रहे थे उनकी बाते सुन सुन कर मन में जोश भरा हुआ था. मन में  ढेरों विचार उमड रहे थे.

उन्हे  पेड के नीचे बैठा दिया और बोला कि बताओ कितना पैसा चाहिए. कोई बोली पाचं सौ तो कोई बोली सात सौ रुपया महीना तो होना ही चाहिए. क्या ??? मैने कहा बस ?? 500 – 700 रुपए महीना. उन्होनें सोचा कि बहुत कम बोल दिया शायद तो एक खडी होकर बोली हजार मैडम जी हजार चाहिए.  क्या ??? सिर्फ हजार !!! सफाई की कीमत सिर्फ हजार रुपए. इस पर वो फिर सोचने लगी और बोली पद्रंह सौ रुपए … फिर महिलाओं मे कानाफूसी होने लगी.

मैने उन्हें शांत करवाया और बोला कि ये स्वच्छता अभियान है स्वच्छता अभियान … इस अभियान के अगर आप हजार क्या लाख भी मांगोगे तो भी कम है क्योकि ये जो काम आप लोग करने जा रहे हो यह अमूल्य है बहुमूल्य है इसकी कीमत का तो कोई अंदाजा ही नही लगाया जा सकता.

कोई सिर पर पल्लू डाले तो कोई नाक पर पल्लू रखे मेरी बात गम्भीरता से सुन रही थीं. मैने कहा अच्छा चलो एक बात बताओ … आपको ये पता है कि पहले हमारा देश आजाद नही था. बहुत लोगों ने कुर्बानी दी … कुछ की आवाज आई कि म्हारा दादा ससुर , ताऊ, ने भी हिस्सा लिया था … मैने कहा कि अरे वाह !! ये तो बहुत अच्छी बात है कि आप उस परिवार से हो … अच्छा ये तो बताओ कि क्या आपने कभी सुना कि जो लोग देश के लिए लडे. स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया उन्होने ये कहा हो कि हम इस लडाई मे तभी हिस्सा लेंगें जब आप हमें पैसे दोगे .. सब हंसने लगी और बोली ऐसे थोडे ही न होता है बल्कि जिन जिन ने इस आंदोलन में  हिस्सा  लिया उन्होनें अपने गहने, जेवर तक भी दान मे दे दिए थे. बिल्कुल … मैने कहा  बस दिल में एक ही लग्न थी, जज्बा था और  निस्वार्थ सेवा भाव था कि हर हालत में देश को आजाद करवाना ही है कितने लोग तो बेनाम ही रह कर देश के लिए लडे और जान कुर्बान कर दी  कि देश को आजाद करवाना है और देखो सच्चे मन से देश के लिए लडे और आज हम आजाद है.

आज भी एक लडाई हमे लडनी हैं और वो लडाई है गंदगी के साथ … उसका जड से  सफाया करना है  और आपका साथ चाहिए आपकी निस्वार्थ सेवा भाव चाहिए और आप है कि पैसे मांग रहे हो ..

इन बातों ने उनको सोचने पर मजबूर कर दिया . मैने कहा कि इतिहास बदलने जा रहे हो  इतिहास आप लोग .. क्या कभी सोचा है आपने … सफाई के मामले मॆं पूरी दुनिया में देश एक  देश नम्बर एक पर होगा  हमारा देश वो भी आप लोगो की वजह से …

इतने में कुछ महिलाए बोल पडी … न जी हम कुछ नही लेंगें … सफाई रखेंगें और अपने गांव का देश मॆं नाम करेंगें …

इनकी बात सुनकर मन खुशी से नाच उठा कि मैनें भी  स्वच्छता की अलख जगाई.  कुछ लोगों को तो प्रेरित किया स्वच्छता  के लिए  कम से कम … 😀

जिस जोश मे ये अभियान सिरसा में आगे बढा वो वाकई मे देखने लायक था.  जिसका मुख्य श्रेय डाक्टर ख्यालिया और उनकी पूरी टीम को जाता है. निसंदेह अगर गांव वाले आगे न आते जागरुक  न होते तो स्वच्छता कभी नही आ सकती थी इसलिए गांव वाले, गांव के सभी स्कूल के  टीचर, पंच सरपंच की बेहद मह्त्वपूर्ण भूमिका रही. छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग ने इस अभियान मे योगदान दिया.

तब सिरसा के 333 गांवो मे से 260 गांवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार मिला . जिसे महामहिम प्रतिभा पाटिल जी ने हिसार में सम्मानित किया. सिरसा के हर गांव मॆ जय स्वच्छता के नारे गूंजने लगे और लोग खुशी से नाच उठे.

 

 

 

July 1, 2015 By Monica Gupta

स्वच्छता के नारे

101-swachhta-ke-naare

स्वच्छता के नारे / स्वच्छता पर नारे

स्वच्छता हम सभी के लिए बेहद जरुरी है जानते हैं हम सब पर फिर भी मानते नही है और गंदगी फैलाए चले जाते हैं. ये कहना भी सही नही है कि गंदगी गांव के असभ्य और अनपढ लोग फैलाते हैं.

गंदगी पढे लिखे लोग भी बराबर की ही फैलाते हैं. हैरानी की बात तो तब हुई जब गांव के लोगों मे स्वच्छता की अलख जगाई गई उन्हें खुले मे शौच जाने से होने वाली बीमारियों के बारे मॆं बताया गया तो ना सिर्फ उन्होने घर में शौचालय बनवाया बल्कि दूसरों को भी प्रेरित करने के लिए नारे भी बना दिए.

ये स्वच्छता के नारे बनाए हैं हरियाणा में  जिला  सिरसा के गांव वालो ने …  जिला प्रशासन के समझाने पर  एक नई चेतना जागी और स्वच्छता को एक नया आयाम दिया …

नारे स्वच्छता अभियान के

गाँव वालों ने तो स्वच्छता  अभियान को नर्इ दिशा देने के लिए ढ़ेरों नारे बना दिए।
• मूँगफली में गोटा, छोड़ दो लोटा।

• ना जिलें में, न स्टेट में, सफार्इ सारे देश में

• 1-2-3-4, कुर्इ खुदवा लो मेरे यार

• सफार्इ करना मेरा काम, स्वच्छ रहें हमारा गाँव।

• सुन ले सरपंच, सुन ले मैम्बर, कुर्इ खुदवा लें घर के अंदर

• बच्चें, बूढ़े और जवान, सफार्इ का रखो ध्यान
• आँखों से हटाओ पटटी, खुले में न जाओ टटटी

• खुले में शौच, जल्दी मौत

• नक्क तै मक्खी बैन नी देनी, खुल्ले में टट्टी रहन नी देनी

• लोटा बोतल बंद करो, शौचालय का प्रबन्ध करों।

• मेरी बहना मेरी माँ, खुले में जाना ना ना ना….

• ताऊ बोला तार्इ से, सबसे बड़ी सफार्इ सै

• खुले में शौच, पिछड़ी हुर्इ सोच

इस अभियान से लम्बे समय तक जुडे रहने के कारण बहुत नारे पढे सुने और देखे … वाकई नारों में एक अलग ही शक्ति है जागरुक करने की… इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैने भी कुछ नारे लिखे , कुछ गांव वालो के लिए और  कुछ नारे नेट से सकलिंत किए और उस ई बुक को

” 101 स्वच्छता के नारे” का नाम दिया…  लिंक नीचे दिया है …

 

101-swachhta-ke-naare

101-swachhta-ke-naare

महात्मा गांधी भी स्वच्छता पर जोर देते रहे और पंडित नेहरु भी स्वच्छता की अहमियत जनता को समझाते रहे.

महात्मा गाँधी

स्वच्छता स्वतंत्रता से भी महत्वपूर्ण है
स्वच्छता में ही र्इश्वर का वास होता है

पं0 जवाहर लाल नेहरू

जिस दिन हम सबके पास अपने प्रयोग के लिए एक शौचालय होगा मुझे पूर्ण विश्वास है कि उस दिन देश अपनी प्रगति की चरम सीमा पर पहुँच चुका होगा।

जय स्वच्छता

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