अभी तक मेरी लिखी सात पुस्तके प्रकाशित हो चुकी हैं. जिसमें से दो नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से प्रकाशित है. किताबों मे व्यंग्य, नाटक, बाल कहानियां, स्वच्छता, प्रेरक जीवनी पढने को मिलेगीं
हमारी मानसिकता
हमारी मानसिकता 
हमारी मानसिकता- कुछ देर पहले मैं अपनी सहेली मणि से मिलने गई. उससे मिलने कोई आई हुई थी. मुझे देखते ही उठने को हुई और बोली … ठीक है मैं शाम को आ जाऊंगी… और स्माईल देती हुई चली गई. उसके जाने के बाद मणि ने बताया कि ये महिला उनकी जानकार है और वो टी सैट और दो चार चीजें मांगने आई थी कल के लिए चाहिए. असल में, उनकी लडकी को लडके वाले देखने आ रहे हैं .. सामान अच्छा हो तो जरा रौब अच्छा पडता है.
मै सोचने लगी कि हमारी मानसिकता आज भी जस की तस है. लडकी पसंद करनी है या टीसैट पसंद करना है. दिखावे के पीछे पागल से हुए पडे हैं. अपनी चादर बिना देखे दूसरों की चादर देख कर पांव पसराते हैं और अंत क्या होता है हम सभी जानते हैं अब तो अखबार के सुर्खियां भी नही बनती कि दहेज के कारण मौत हुई.
फलां की शादी में 5 करोड लगे डिमकाना की शादी मॆं बारह करोड लगे. अरे छोडों हमें क्या लेना… बस जरुरत इस बात की है पहले दिन से ही कोई दिखावा न हो और सारी बात साफ और स्पष्ट हो ताकि सब कुशल मंगल रहे.
शादियों में बहुत खर्चा बेवजह होता है इस पर रोक लगा कर बच्चों के नाम ऎफ.डी करवा देंगें तो बहुत अच्छा होगा. बाकि हम चाहे 5 लाख दे या पांच करोड लोगों ने तो बोलना ही बोलना है … फिर किस के लिए दिखावा और क्यों ???
बहुत बडा प्रश्नवाचक है ????
story on marriage
फेरे हो रहे थे। दूल्हे मियां शराब में टुन्न थे। इतने कि वे लड़खड़ा रहे थे। आधे फेरे होते न होते टपकने को हुए कि दुल्हन ने शादी से ही इंकार कर दिया। ठीक भी है, ‘जब तक पूरे न हो फेरे सात, दुल्हन नहीं दुलहा की।’ इसी तरह एक शादी में दूल्हे के पिए हुए दोस्त दुल्हन पक्ष की महिलाओं के साथ बेहूदा मजाक कर रहे थे। जब उनकी मजाक अश्लीलता की हद तक पहुंच गई फिर भी दूल्हे ने हस्तक्षेप नहीं किया, अपने दोस्तों को मना नहीं किया तो इस दुल्हन ने भी बीच फेरे के डोर काट दी।
उल्लेखनीय बात यह है कि यह गुना जिले के बिजानीपुरा गांव की आदिवासी लड़की है। इसी तरह एक दूल्हे ने अपनी शिक्षा के बारे में झूठ बोला था। शादी के समय एक मौके पर साध्ाारण से गणित में वह ऐसा गड़बड़ाया कि उसकी पोल खुल गई और दुल्हन ने शादी से इंकार कर दिया। फेरे पर बैठकर दहेज में वस्तुओं की मांग करने वाले दूल्हों को दुल्हन द्वारा लौटाने की घटनाए भी पिछले कुछ सालों में हुई हैं।
सवाल यह है कि दूल्हे शादी के मंडप में बैठकर ही दहेज की मांग क्यों करते आए हैं? वजह यह कि अब तक लड़कियों के घरवाले इस बात से डरते आए हैं कि बारात लौट गई तो लड़की ‘लग्नभ्रष्ट’ हो जाएगी, फिर उससे शादी कौन करेगा? दूल्हे, दूल्हे के घरवालों और बारातियों का अहंकार तो हमारे समाज में ऐसा रहा है कि किसी बाराती की कोई मांग पूरी न हो या तथाकथित रूप से अपमान हो जाए तो दुल्हन को रोता छोड़ बारातें लौट जाती रही हैं।
दूल्हे के पांवों में दुल्हन के पिता द्वारा अपनी टोपी या पगड़ी रख देना, कर्ज लेकर वरपक्ष की मनचाही सामग्री जुटाना, दूल्हे के घर वालों की मिन्नातें करना कि कहीं बारात न लौट जाए, यह लड़की के बाप की नियति रही है। क्योंकि पहले लग्नभ्रष्ट हो जाने पर दुल्हन की कहीं शादी नहीं होती थी और दूल्हे को तो फिर कोई रिश्ता मिल जाता था। समाज की मानसिकता ऐसी थी कि कलंक सिर्फ दुल्हन को ही लगता था। बगैर पढ़ी-लिखी, परनिर्भर लड़कियों के हाथ में था भी क्या? लेकिन अब जमाने ने करवट ली है।
लड़कियां अब करारा जवाब देती हैं तो समाज में भी ऐसे बहुत से लोग निकल आते हैं जो लड़कियों को उद्दण्ड या लाजरहित बताने के बजाए उनके साहस की प्रशंसा करते हैं। मीडिया में भी ऐसे साहस की चर्चा होती है। अधिक से अधिक लड़कियां भी अब अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।
ग्रामीण इलाकों तक ये जाग्रति पहुंची है कि जिस ससुराल में टॉयलेट न हो वहां जाने से दुल्हन इंकार कर दे। और एक दुल्हन इंकार करे तो उसकी खबर प्रेरणा बनकर अन्य युवतियों तक पहुंचे और एक सिलसिला बन जाए। ऐसा सकारात्मक साहस अधिक से अधिक युवतियों में होना चाहिए कि वे गलत बात बर्दाश्त न करें और समाज को उनका साथ देना चाहिए। See more…
हमारी मानसिकता
बच्चे और कार्टून चैनल
बच्चे और कार्टून चैनल
बहुत सारे बच्चे पार्क में खेलते हुए बतिया रहे थे कुछ स्कूल की तो कुछ होम वर्क की बाते कर रहे थे और एक बच्चों का समूह शायद थक हार कर बैठ गया था और उनके बीच शुरु हो गया कार्टून का वार्तालाप. सभी अपनी अपनी पसंद के कार्टून बता रहे थे. किसी को डेक्स्टर किसी को पावर पफ गर्ल तो किसी क शिन चैन पसंद है…
शिन चैन का नाम लेते ही मुझे याद आया कि कुछ दिनों पहले जब शिन चैन देख अतो उसकी शब्दावली ऐसी थी कि अगर बच्चे बोले तो …. अच्छा नही लगेगा. वैसे एक ये भी महसूस की कि अगर कोई मूवी डब हो हिंदी में या कार्टून हिंदी मे डब हो तो भाषा बहुत गंदी इस्तेमाल करते हैं जबकि आम बोल चाल मॆं ऐसा नही होता.
इसी की कुछ और बाते सर्च करने के लिए मैनें पर देखा.
आजकल कार्टून की दुनिया भी अपनी सोच और हास्य में बॉलीवुड फ़िल्मों की तरह हो गई है. फ़िल्मों पर ‘क़ैंची’ चलनी तो आम बात थी ही अब बच्चों के कार्टूनों पर भी क़ैंची लगने लगी है.
BBC
आजकल कार्टून की दुनिया भी अपनी सोच और हास्य में बॉलीवुड फ़िल्मों की तरह हो गई है. फ़िल्मों पर ‘क़ैंची’ चलनी तो आम बात थी ही अब बच्चों के कार्टूनों पर भी क़ैंची लगने लगी है.
जिन कार्टूनों को देखकर बच्चे हँसते हैं, ख़ुश होते हैं उन पर भी ‘कैंची’ चलने का दौर शुरू हो गया है.
भारत में पिछले एक दशक में ‘जापानी’ कार्टूनों ने अपना दबदबा बनाया है. जो बच्चे ‘टॉम एंड जेरी’ और ‘टेलस्पिन’ जैसे कार्टून देखा करते थे. वहीँ आज ‘डोरेमोन’, ‘शिनचैन’ जैसे कार्टून चरित्रों के दीवाने हैं.
बी.सी.सी.सी, यानि ‘ब्राडकास्टिंग कंटेंट कम्प्लेंट्स काउंसिल’ एक संस्था है. यहां टेलीविज़न पर दिखाए जा रहे कार्यक्रम के ‘आपत्तिजनक’ दृश्यों के विरोध में कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है.
हाल ही में बी.सी.सी.सी में बहुत से माता पिता ने शिकायतें दर्ज कीं. इन शिकायतों में कहा गया कि कार्टून चैनल ‘अनुचित’ दृश्य दिखा रहे हैं. बी.सी.सी.सी ने तुरंत इन कार्टून चैनलों को हिदायत दी की वे ऐसा कोई दृश्य न दिखाए जो बच्चों के लिए ठीक न हों.
अब कार्टून चैनल आपत्तिजनक दृश्यों को हटा कर उन्हें बिलकुल ही नए रूप में ढाल रहे हैं.
डबिंग इंडस्ट्री के निर्देशक या क्रिएटिव एक्सपर्ट ऐसे कार्टूनों पर अपनी पैनी नज़रें जमाए रखते हैं. उन्हें बदल कर वे ऐसे कार्टून तैयार करते हैं जिसके चाहने वाले देश भर के बच्चे होते हैं.
कार्टून किरदारों को डब करते वक़्त छोटी मोटी तब्दीलियाँ अक्सर हर विदेशी कार्टून और प्रोग्राम में करनी पड़ती है. क्योंकि उनके विचार स्थानीय दर्शकों के विचारों से मेल नहीं खाते.
पर कई बार कार्टून की तब्दीलियाँ काफ़ी अजीब और मज़ेदार होती हैं.
अलका शर्मा अरसे से शिनचैन की आवाज़ रही. ‘शिनचैन’ जापानी कार्टून है. वह एक पांच साल का बच्चा है और अपने माता पिता और बहन के साथ रहता है.
शिनचैन बेहद नटखट किरदार है और बच्चों में ख़ासा लोकप्रिय है.See more…
amitabh bachchan to play superhero cartoon in tv series: :
एक सूत्र ने कहा कि 72 साल के महानायक ने ‘एस्ट्रा फोर्स’ कार्टून के लिए एंटरटेनमेंट कंपनी ग्राफिक इंडिया और डिजनी से हाथ मिलाया है. इस सुपरहीरो की रचना अमिताभ और ग्राफिक इंडिया के सीईओ और सहसंस्थापक शरद देवराजन को करनी है. अमिताभ बच्चन के सुपरहीरो अवतार वाली इस काटूर्न सीरीज को डिजनी चैनल लॉन्च करेगा. यह कार्टून हंसी-मजाक, मारधाड़ , रोमांच और रहस्य से भरपूर बताया गया है.
अमिताभ छोटे पर्दे पर इससे पहले रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के सूत्रधार के रूप में और धारावाहिक ‘युद्ध’ में मुख्य भूमिका में नजर आ चुके हैं. Read more…
कार्टून साफ सुथरी हों प्रेरक हों तो बहुत कुछ हम इनसे सीख सकते हैं जैसाकि बचपन में हम अमर चित्र कथा पढ कर सीखते थे. अगर सुधार नही होगा हर बच्चा बहुत शान से शीन चैन जैसे किरदार बोलता नजर आएगा और हमारी आखॆ शर्म से झुकती चली जाएगी …
वैसे आपके क्या विचार हैं इस बारे में …
ना खाऊगीं न खाने दूंगी
ना खाऊगीं न खाने दूंगी
मेरी सहेली का बेटा आफिस की ओर से कुछ दिनों के लिए विदेश गया हुआ है. जब उससे फोन पर बात हुई तो वो बेहद दुखी थी उसने बताया कि उसका बेटा वहां कुछ खा नही पा रहा. बचपन से ही उसे शुद्द शाकाहारी बनाया हुआ था. ना खाऊगी और न खाने दूंगी पर टिकी हुई थी. बहुत बार बच्चे का मन होने पर भी उसे डांट दिया जाता था. घर मॆं ही नही बाहर खाने के लिए भी सख्त कानूब बना रखा था. आज उसे गए दस दिन हो गए और वो खा नही पा रहा क्योकि ज्यादातर वहां नान वेज यानि मांसा हार चलता है और सादे खाने की महक ऐसी होती है कि खाना खा ही नही पा रहा.
वैसे आज समय डांट डपट और अपने विचार थोपने का नही है मुझे याद आया कि मेरे एक आंटी बहुत ही ज्यादा सख्त थे. फरमान जारी किया हुआ था कि घर में अंडा ,प्याज नही आएगा. हालाकि उनका बेटा होटल में चोरी चोरी खा आता था. कुछ दिनों पहले जब मैं उनके घर गई तो देखा आंटी खुद आमलेट बना रहे थे. मेरे हैरानी से पूछ्ने पर उन्होने बताया कि उनके पोते को डाक्टर ने अंडा खाने के लिए बोला है.एक बार तो उन्हें अच्छा नही लगा पर सेहत से कोई समझौता नही. इसलिए खाती वो आज भी नही हैं पर बना जरुर देती हैं वो भी खुशी खुशी.
सच , बहुत अच्छा लगा था. बदलते समय के साथ बदलने मॆ ही भलाई है. हमें हमारी बेडियों से हमें आजाद होना ही होगा अन्यथा दुख उठाने पडेगें जैसाकि मेरी सहेली उठा रही है.
आप भले ही न खाओ पर नाक मुंह बना कर बंदिश भी तो न लगाओ..
Selfie with Daughter
आजकल सैल्फी का क्रेज बहुत छाया हुआ है कि अपनी बेटी के साथ सैल्फी कराओ वही एक खबर कि अमेरिका में गे मैरिज को मान्यता मिल गई है ने सकते मॆं डाल दिया … ऐसे में ये हरियाणा का पिता सैल्फी ले या न ले … सोच रहा है
बीबीपुर गांव के सरपंच सुनील जागलान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरणा लेकर इसी महीने पंचायत की तरफ से बेटी बचाओ सैल्फी बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया। सरपंच की यह मुहिम खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन को इस कद्र भायी कि गत रविवार को उन्होंने रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम में इसका जिक्र कर डाला। यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री ने अपने मुंह से किसी गांव के सरपंच का जिक्र किया हो
Selfie with Daughter ……PICS: ‘ ‘ ‘ ‘
जींद/नई दिल्ली: बीबीपुर गांव के सरपंच सुनील जागलान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरणा लेकर इसी महीने पंचायत की तरफ से बेटी बचाओ सैल्फी बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया। सरपंच की यह मुहिम खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन को इस कद्र भायी कि गत रविवार को उन्होंने रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम में इसका जिक्र कर डाला। यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री ने अपने मुंह से किसी गांव के सरपंच का जिक्र किया हो। पीएम मोदी ने रेडियो पर प्रसारित अपने मन की बात कार्यक्रम में बीबीपुर की पंचायत द्वारा इसी महीने आयोजित बेटी बचाओ, सैल्फी बनाओ प्रतियोगिता को लेकर कहा कि हरियाणा के एक छोटे से गांव बीबीपुर के सरपंच सुनील जागलान की बेटी बचाओ-सैल्फी बनाओ प्रतियोगिता की पहल से देशभर में पिता अपनी बेटी के सोचने के लिए मजबूर हुआ और उन्होंने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हरियाणा जैसा प्रदेश जहां लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या काफी कम है, वहां लड़कियों के सम्मान के लिए इस तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन करना प्रशंसा के काबिल है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बेटी बचाओ-सैल्फी बनाओ प्रतियोगिता मजेदार थी। समाज में लड़कियों के सम्मान के लिए बेटी बचाओ-सैल्फी बनाओ को जन आंदोलन बनाया जाना चाहिए। उन्हें भी इस प्रतियोगिता से प्रेरणा मिली है और वे भी इसी की तरह सैल्फी विद डॉटर कान्टैस्ट का आयोजन कर रहे हैं। इसके लिए जो भी पिता अपनी बेटी के साथ सैल्फी कर बेटी के लिए अच्छा-सा स्लोगन लिखकर पोस्ट करेगा, आए हुए पोस्ट में से जो सबसे अच्छी सैल्फी व स्लोगन होगा उसे वे वापिस रिपीट करेंगे।
वहीं पीएम द्वारा शुरू इस मुहिम के लिए सोशल साइट ट्विटर पर अपनी बेटियों के साथ देश भर से माता-पिता सैल्फी पोस्ट कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रेडियो पर अपने मन की बात कार्यक्रम में गांव की पंचायत द्वारा हाल ही में आयोजित बेटी बचाओ, सैल्फी बनाओ प्रतियोगिता का जिक्र और इसकी तारीफ सुनकर बीबीपुर गांव के सरपंच सुनील जागलान गदगद हैं। सुनील जागलान ने कहा कि प्रधानमंत्री के मुंह से अपनी तारीफ सुनना उनके लिए अकल्पनीय था। See more…
Same Sex Marriage
बेशक अमेरिका में Same Sex Marriage को मान्यता मिल गई है पर हमारे देश में इसे भारी मात्रा में सही नही माना जा रहा. तभी इस कार्टून मॆं एक पिता अपनी लडकी के घर से भागने और अन्य लडकी से शादी करने पर बेहद दुखी है …
Same Sex Marriage – गे मैरिज
ओबामा ने एक विशेष संदेश में कहा- “यह अमरीका की जीत है… यह जीत इस बात की पुष्टि करती है कि लाखों अमरीकी लोग बराबर हैं और हम अधिक स्वतंत्र हो गए हैं”। अमरीका की सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में समलैंगिक विवाह को वैध घोषित किया
बराक ओबामा ने विश्वास व्यक्त किया कि अदालत के इस फैसले से अमरीकी समाज और मज़बूत होगा जिसमें आज से “कुछ और सुधार हुआ है।”
शुक्रवार को अमरीका के सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि समलैंगिक विवाह करने का अधिकार संविधान के विपरीत नहीं है। अब सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के आधार पर पूरे अमरीका में समलैंगिक विवाह वैध माने जाएंगे। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के तुरंत पश्चात अदालत की इमारत के सामने समलैंगिक विवाहों के समर्थकों द्वारा एक रैली की गई।
Same Sex Marriage
american supreme court rules same sex marriage is legal: :
‘समान अधिकार देना कानून का फर्ज’जस्टिस एंथनी कैनेडी ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘सोसायटी की पुरानी मान्यताओं के चलते किसी भी समलैंगिक शख्स को अकेले रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. शादी करना उसका अधिकार है और सभी को समान अधिकार देना कानून का फर्ज है.’
Today is a big step in our march toward equality. Gay and lesbian couples now have the right to marry, just like anyone else. #LoveWins
जो भी हो पर Same Sex Marriage पर एक बार फिर से debate जरुर छिड गई है
- « Previous Page
- 1
- …
- 65
- 66
- 67
- 68
- 69
- …
- 111
- Next Page »













