Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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You are here: Home / Archives for मोनिका गुप्ता

May 29, 2015 By Monica Gupta

रक्तदान

रक्तदान महादान है

बात सन 1973 की है तब मैं हरियाणा के जींद मे रहती थी. हमारे घर के पीछे रेस्ट हाऊस  था वही हम सभी कालोनी के बच्चे खेलने जाया करते थे. उस पार्क में एक छोटा सा तालाब था जो हमेशा पानी से भरा रहता था. एक शाम खेलते हुए मुझे आवाज आई कि बचाओ वो पानी मे गिर गई  है . सभी भागे उसके पास और देखने लगे पता नही मुझे क्या  सूझी कि मैने वहां लेट कर हाथ लंबा किया और उसे खीचं लिया. बहुत पतली दुबली सी लडकी को मैने बाहर निकाल लिया और  फिर उसे उल्टा करके मुंह से पानी भी निकाला. ये समझ मुझे कैसे आई कैसे नही इसका तो याद नही पर जब हम उसे घर छोडने जा रहे थे सारे बच्चे मेरे नाम की जय जय कर रहे थे और कह रहे थे कि मोनिका ने चोची तिवारी को डूबने से बचा लिया .

आज इस बात को ना जाने कितने साल हो गए पर वो धटना मेरे मन मे  जस की तस तब तक रही जब तक में कुछ ऐसे लोगो के सम्पर्क मे नही आई जो रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं. असल में, बचपन मे मैने एक लडकी की जान बचाई थी लेकिन जब से रक्तदान से जुडी. भले ही रक्तदान न कर पाई हूं पर लोगो को प्रेरित किया और रक्तदाताओ का नेट वर्क तैयार किया कि जिसे भी रक्त की जरुरत हो वो सम्पर्क करे और इस तरह से  अनगिनत लोगो की जान बच रही है  तो अब वो बचपन वाली बात अक्सर भूल जाती हूं

बात रक्तदान की हो तो महिलाए का  जिक्र तो आता ही आता है. एनीमिया की कमी से , महिलाए रक्त दान नही कर पाती. महिलाए मासिक धर्म के दौरान या स्तन पान करवाने की वजह से भी रक्तदान नही कर पाती इसलिए सबसे ज्यादा जरुरी यह है कि महिलाए अपना खान पान सुधार ले. अपनी डाईट सही कर ले तो कम से कम उसे तो रक्त चढवाने की जरुरत न पडे  और इसे के साथ साथ जो महिलाए टोका टाकी करती हैं यानि जो महिलाए अपने बच्चों या पति को रक्तदान के लिए मना करती हैं वो जागरुक हो और रक्तदान की महत्ता समझे जिसे वो लोग बिना डर के रक्तदान कर सके और जीवन बचा सके.

एनीमिया- कुछ रोचक जानकारियां-

एनीमिया- कुछ रोचक जानकारियां-  डाॅ0 एक0के0 त्रिपाठी की  किताब है. डाॅ0 ए0के0 त्रिपाठी जानकारी देते हैं कि एनीमिया एक रोग का नाम नहीं, वरन् अनेक रोगों या विकारों का लक्षण है। ऐसे में उपचार के लिये इसके कारणों को जानना आवश्यक है। खासतौर पर ससामाजिक सरोकार के तहत विशेषज्ञ लेकखक ने इन्हीं कारणों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास इस पुस्तक के माध्यम से किया है। सामान्य पाठक भी इसे रुचि के साथ पढ़ सकता है। जबकि बीमारी की बातें गम्भीर विषय वस्तु के अन्तर्गत मानी जाती है।
एनीमिया हमारे देश की बड़ी समस्या है। दो से तीन चैथाई लोग एनीमिया से पीड़ित हैं। इसमें हर वर्ग तथा उम्र के लोग शामिल हैं। लेकिन साधारण जानकारियों से इससे बचा जा सकता है। एनीमिया अर्थात् रक्त अल्पता किसी बीमारी का नाम नहीं वरन् लक्षण मात्र है। जिसमें हीमोग्लोबिन की मात्रा में कमी होने की वजह से शरीर में तरह-तरह की परेशानियां उत्पन्न होती हैं। स्वस्थ पुरुषों में सामान्यतः 13-16 ग्राम प्रतिशत तथा स्त्रियों में 12-14 ग्राम प्रतिशत हीमोग्लोबिन होता है। यदि हीमोग्लोबिन इससे कम हो जाए तो उसे एनीमिया कहते हैं, इससे कमजोरी आ जाती है। भूख कम हो जाती है, खाना अच्छा नहीं लगता, याददाश्त व एकाग्रता में कम आ जाती है। हीमोग्लाकबीन जितना कम होगा, शारीरिक परेशानी उतनी अधिक होगी जांच के द्वारा इसका पता लगाया जा सकता है। लाल रक्त कोशिकाओं में बढ़ोत्तरी आयरन, विटामिन बी12, फोलिक एसिड, पायरीडाक्सिन बी-6, प्रोटीन आदि से हो सकती है।
पुस्तक में बताया गया है कि एनीमिया का प्रमुख कारण आयरन अर्थात् लौह तत्व की कमी है। लेखक ने इसे रोचक कहानी के माध्यम से समझाया है। लौहतत्व शरीर के लिये बहुत आवश्यक है, यह हीमोग्लोबीन के अलावा कई प्रकार के एनजाइम्स के लिये भी जरूरी है। भोजन में आयरन की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए। जैसे गुड़ में चीनी की अपेक्षा आयरन बहुत अधिक होता है। खजूर, धनिया-बीज, मेथी-बीज आयरन के अच्छे स्रोत है।
आयरन द्वारा एनीमिया का समुचित उपचार किया जा सकता है। इसकी कमी आयरन की गोली से भी हो सकती है। इसकी पूरी खुराक लेनी चाहिए। पूरा कोर्स करना चाहिएं खाली पेट दवा नहीं लेनी चाहिए। आयरन की गोली खाने के एक घंटे बाद लेना चाहिए। विटामिन सी युक्त पदार्थ के साथ आयरन नहीं होना चाहिए। एक अलग अध्याय में बताया गया कि विटामिन बी-12 की कमी से एनीमिया वस्तुतः आधुनिक जीवन शैली की देन है। इसे भी कहानी के माध्यम से बताया गया। पान मसाला, तम्बाकू, शराब आदि नुकसानदेह होते हैं। इससे आमाशय एवं आंतों की अन्दरूनी सतह खराब हो जाती है, जिससे व्यक्ति बी-12 की कमी का शिकार हो जाता है। दवाओं के कुप्रभाव से भी एनीमियां होता है। दवाओं के कुप्रभाव से भी एनीमिया होता हैं अनेक दवाएं ऐसी होती है, जिनका प्रयोग करने से दुष्परिणाम रूप में एनीमिया होता है। दर्द निवारक दवा भी विशेष की सलाह के बाद लेनी चाहिए। एप्लास्टिक एनीमिया का प्रकोप भी बढ़ा है। वातावरण एवं भोज्य पदार्थों में बढ़ रहे रासायनिक प्रदूषण या दवाओं के कुप्रभाव से ऐसा हो रहा है। वृद्धावस्था या दवाओं के कुप्रभाव से ऐसा हो रहा है। वृद्धावस्था में एनीमिया से बचाव हेतु विशेष सावधानी बरतनी होती है। इसी प्रकार गर्भावस्था  के दौरान भी विशेष ध्यान देना चाहिए। पर्याप्त व पूर्ण पोषण आवश्यक होता है। संक्रमण, गंदगी, हुक वर्म से भी बचाव करना चाहिए। यह बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है

 

Article- Blood Donation – Monica Gupta

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http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/8846287.cms

Blood donation facts and advantages –

रक्त दान से जुड़े तथ्य एवं इसके लाभ स्वास्थ्य की देखभाल  रक्त दान से जुड़े तथ्य एक वयस्क पुरुष/स्त्री में 5-6 लीटर तक रक्त होता है| कोई भी व्यक्ति हर तीन माह में रक्त दान कर सकता है| रक्त में प्लाज्मा नामक प्रवाही होता है| 450 मि.ली. See more…

अंत में  मैं यही कहना चाहूगी …  रक्तदान करके देखिए अच्छा लगता है

जय रक्तदाता …

May 28, 2015 By Monica Gupta

टीवी का क्रेज

किसी जमाने में बुदू बक्सा कहलाए जाने वाला टीवी का क्रेज आज लोगो के सिर चढ कर बोल रहा है. हम टीवी सीरियल से इतना धुल मिल गए है कि उसे अपनी जिंदगी का एक अहम हिस्सा समझते हैं ये बात मैं इसलिए कह रही हूं कि मेरी एक जानकार का पथरी का आपरेशन होना था. डाक्टर ने समय और जगह फिक्स कर दी पर वो  जानकार बोली कि एक दिन बाद में आपरेशन  रख दो क्योकि एक  धारावाहिक में बहुत सही कहानी आ रही है किरदार का बच्चा होने वाला है बस वो  राजी खुशी घर आ जाए तो कोई फिक्र नही …

ऐसे ही मैं अपनी सहेली को जन्मदिन का न्योता देने गई कि ठीक आठ बजे पार्टी है और आठ बजे ही केक कटेगा …  इस पर वो बोली कि वो 9 बजे तक ही आ पाएगे क्योकि धारावाहिक की कहानी इतनी मजेदार और सस्पैंस वाली चल रही है कि छोड  नही सकते

वही स्टाप पर  बच्चे को छोडने आई मेरी सहेली की आखें सूजी हुई थी. ऐसा लग रहा था कि बहुत रोई हो. मैने पूछा तो बताया कि प्रिया को कैंसर है.. वो मर जाएगी … मैने सारा दिमाग इस्तेमाल कर लिया पर याद नही आया कि उसके परिवार में प्रिया कौन है . मेरे पूछ्ने पर उसने बताया कि एक साल से वो टीवी सीरियल देख रही है उसी की मुख्य पात्रा है प्रिया… हे भगवान !!! आप समझ सकते हैं कि किस तरह से टीवी का क्रेज सिर चढ कर बोल रहा है लोगो के …

वैसे कोई शक नही ये कलाकार बहुत मेहनत करते हैं और एक दिन बिलंदियों को छूते हैं और छोटे पर्दे से लेकर बडे पर्दे तक धूम मचा देते हैं

शाहरूख खान  टीवी पर केवल एक छोटे कलाकार थे।.  छोटे पर्दे पर “फौजी” और “सर्कस” जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में काम करने के बाद शाहरूख ने बुलंदियों का स्वाद चखा
विद्या बालन का नाम बॉलीवुड इंडस्ट्री में ऎसी अभिनेत्रियों में शामिल किया जाता है जिन्होने अपनी फिल्म “कहानी”, “नो वन किल्ड जेसिका”, “डर्टी पिक्चर” से यह साबित कर दिया कि फिल्म सिर्फ एक्टर से नहीं बल्कि एक्ट्रेस से भी चल सकती हैं। अपने करियर की शुरूआत में लगभग 12 फिल्मों से रिजेक्ट होने के बाद छोटे पर्दे पर प्रसारित पहला शो “हम पांच” से एंट्री की जिसके बाद उन्होंने कई एड फिल्मों में भी काम किया, लेकिन किसने सोचा था कि “हम पांच” के दूसरे सीजन में राधिका माथुर का किरदार निभाने वाली विद्या लगातार 3 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम करेगी.
फिल्म “रहना है तेरे दिल में” में मैडी का किरदार कर आर माधवन ने दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया। खूबसूरत स्माइल से लाखों लड़कियों के दिल पर राज करने वाले “3 इडियट्स” एक्टर माधवन ने अपने करियर की शुरूआत बड़े पर्दे से नहीं बल्कि छोटे पर्दे के शो “बनेगी अपनी बात” से की। साउथ हिरो माधवन ने कई साउथ सुपरहिट फिल्में भी की, जिसके बाद वापस उन्होने “तनु वेड्स मनु” से अपनी धमाकेदार वापसी की
यामी गौतम, सुशांत सिंह राजपूत सबसे बड़ा उदाहरण है जिनको हम कह सकते है कि उन्होने छोटे पर्दे से बॉलीवुड का रास्ता बनाया है। सुशांत लंबे समय तक धारावाहिक “पवित्र रिश्ता” में नजर आए जिसके बाद उन्हें फिल्म “काई पो छे” का ऑफर मिला
राजीव खंडेलवाल का नाम सामने आते की सबसे पहले दिमाग में “सच का सामना” रियलिटी शो का नाम याद आता है
एकता कपूर की सबसे पसंदीदा एक्ट्रेस की लिस्ट में प्राची देसाई का भी नाम शामिल धूम मचाओ धूम”, “किस देश में है मेरा दिल”, “गीत” जैसे धारावाहिक में नजर आ चुके टीवी एक्टर जय भानुशाली गुरमीत चौधरी टीवी में धरावाहिक “रामायण” में भगवान राम के रोल में नजर आए जिसके बाद वह रोमांटिक शो “गीत” में भी नजर आए। साथ ही वह “पुर्न विवाह” में भी नजर आए। गुरमीत”झलक दिखला जा” और नच बलिए डांसिग शो में नजर आ चुके हैं। हाल ही एक्टर ने महेश भट्ट की फिल्म “खामोशियां” से बॉलीवुड में डेब्यू किया. टीवी धारावाहिक “बालिका वधु” के शिव से पॉपुलर हुए एक्टर सिद्धार्थ ने “जाने पहचाने से ये अजनबी”, “लव यू जिन्दगी”, “बाबुल का आंगन छूटे ना” धारावाहिक में काम किया जिक के बाद वह डांस शो “झलक दिखला जा” में नजर आए.

 

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तो देखा टीवी का क्रेज किस तरह से सिर चढ कर बोल रहा है . वैसे इन सीरियल को देखना जरुर चाहिए पर ज्यादा सीरीयसली भी नही … ह हा हा !!! है ना !!!

Photos courtesy patrika.com

May 27, 2015 By Monica Gupta

स्कूल जाने का जुनून

स्कूल जाने का जुनून

पुस्तक “पाठक मंच न्यूज बुलेटिन”(नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित)

अंक- मई “खेल खेल में “नामक लेख में सिरसा के अमन मिढ्ढा से बातचीत…
हरियाणा के सिरसा में रहने वाले अमन ने एक मिसाल कायम की है. दसवीं क्लास में पढने वाले अमन ने लगातार पांच साल में एक बार भी स्कूल से छुट्टी नही ली.शत प्रतिशत उपस्थिती …है ना हैरानी वाली बात .. इस बेमिसाल उपलब्धि के लिए सेंट जेवियर्स स्कूल ने अमन को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. अमन उन बच्चों के लिए प्रेरणा है जो स्कूल जाने के नाम से कतराते हैं और बहाना बना कर स्कूल बंक करते हैं. अमन ने हर क्लास मे प्रथम स्थान प्राप्त किया है. हम सभी को अमन से सीख लेनी चाहिए. खुशी इस बात की भी है कि अब अमन के छोटे भाई नमन ने भी भाई की कदमो पर चलना शुरु कर दिया है.
बहुत बहुत शुभ कामनाएं अमन, नमन और परिवार में उनके मम्मी पापा और दादा जी को जिन्होने बच्चों को हमेशा उत्साहित किया…

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चलों चले स्कूल ( लेख )

स्कूल जाने का जुनून

स्कूली जीवन यानि पढाई पढाई पढाई !!! और अगर हम बात करें फरवरी और मार्च की तो उस समय और भी ज्यादा पढाई में जुटना पडता है क्योकि फाईनल परीक्षा होती है और हमारी कोशिश रहती है कि अच्छे से अच्छे अंक लेकर  नई क्लास में जाए.वैसे बहुत बच्चे पढाई के प्रति गम्भीर नही होते जबकि कुछ बच्चे सत्र के आरम्भ से ही नियमित पढाई शुरु कर देते हैं. कुछ बच्चे तो हमेशा  छुट्टी की ही फिराक में रहते हैं और कोई शादी या नाना, दादी जी के पास जाने का मौका ही तलाशते रहते हैं ताकि पढाई से छुटकारा मिले. वही कुछ बच्चे “बहाना एकस्पर्ट” भी होते है.स्कूल जाने के नाम से अचानक पेट दर्द या सिर दर्द शुरु हो जाता है और मिल जाती है स्कूल से छुट्टी. पार्क में खेलते हुए बच्चों से मैने बहुत अनुभव सांझा किए.

दीपा, नवनीत, गीता, सार्थक, मुबीन और तेज पाल सभी का  नई क्लास मॆं दाखिला हो गया है और अब वो छुट्टी कम से कम लेंगें और मन लगा कर पढेंगें ऐसा उनका कहना है. उनसे बात हो ही रही थी तभी दो और बच्चे अमन और नमन भी आ गए.

अमन मिढढा से जब स्कूल की पढाई और छुट्टी की बात की तो वो हसंने लगा और उसने बताया कि अब तो दसवीं क्लास में है और पिछले पांच साल का उसका रिकार्ड है कि वो लगातार स्कूल गया है. एक दिन भी छुट्टी नही की. क्या ?? मैं हैरान थी कि ऐसा भी होता है. उसने बताया कि पिछले साल उसे स्कूल की तरफ से एवार्ड और प्रशस्ति पत्र भी मिला है. उसने बताया कि स्कूल में बहुत अच्छा लगता है नई बातें नई चीजें सीखते हैं और पढाई पर भी पूरा ध्यान रहता है छुट्टी करके अगले दिन उधर उधर से कापी मांगना होमवर्क करना , टेस्ट ना दे पाना जरा भी अच्छा नही लगता इसलिए कोशिश यही रहती है कि छुट्टी न की जाए.

मेरे अटकते अटकते पूछ्ने पर कि कभी बीमार नही पडॆ ??? इस पर वो हसंते हुए बोला कि बुखार भी होता है और बीमार भी होते हैं पर दवाई खा कर चले जाते हैं और दोपहर तक तो आ ही जाते हैं तब आराम हो जाता है. और रही बात किसी शादी या कोई कार्यक्रम में जाने की. वो स्कूल मिस करके कभी नही जाता और ना ही जाएगा. अरे वाह !! अचानक मैं बोल उठी. क्योकि बच्चों की सोच आमतौर पर जरा हट कर होती है और अमन अपनी उम्र के हिसाब से बहुत सुलझा हुआ लगा. बातों बातों में अमन ने यह भी बताया कि नियमित स्कूल जाने के लिए उसके मम्मी पापा और दादा जी ने भी बहुत उत्साहित किया और अब और बच्चे भी उससे सीख कर नियमित आने का प्रयास करते हैं तो और भी खुशी होती है.

वैसे इस बात में कोई दो राय नही कि पढाई के प्रति अगर हम शुरु से ही नियमित रहें और खेल कूद के साथ साथ सामान्य ज्ञान की पुस्तकें पढते रहें तो हम आने वाली किसी भी स्पर्धा का डट कर मुकाबला कर सकते हैं. तो बच्चों क्या सोचा तो फिर चलो, चले स्कूल !!!

 

स्कूल जाने का जुनून

May 27, 2015 By Monica Gupta

क्या है मीनोपोज

क्या है मीनोपोज

मीनोपोज या प्री मीनोपोज के बारे मे जानकारी का अभाव महिलाओं को और ज्यादा तनाव ग्रस्त कर देता है. पर ये जानना बहुत जरुरी है कि बीमारी नही है मीनोपोज पर क्या है मीनोपोज  बेशक, ये भी एक कठिन दौर  होता है जब बेहद रक्तस्राव होने से कमजोरी आ जाती है और बहुत लक्षण महिलाए को तनाव मे डाल देते हैं.

कल एक पार्टी में मेरी पुरानी सहेली मिली. मिली क्या असल में मैने ही उसे ढूढा. एक किनारे पर चुपचाप बैठी थी. मुझे भी उसने सूखा सा हैलो बोला. यहां वहां की बात करने के बाद जब मैने उससे उसका हाल चाल पूछा तो उसने बताया कि कुछ समय से पता नही उसे क्या होता जा रहा है . कुछ करने का मन नही करता एक अजीब तरह की बेचैनी सी  महसूस होती है. उसे न भूख लगती न ही कहीं जाने की इच्‍छा होती है कई बार  आधी रात को पसीने से तर हो जाती हूं और नींद खुल जाती है कई बार सारी सारी रात नींद ही नही आती तो कई  बार दिन मे बहुत नींद आती है. कई बार दस दस दिन रक्तस्राव होता है तो कई बार तीन तीन महीने हो जाते हैं रक्तस्राव ही नही होता.  मैने इस बात को जरा भी गम्भीरता से नही लिया. उसे बताया कि यह भी एक तरह का चक्र है जिसमे हम महिलाओं को धर्य और संयम के साथ  दो चार होना पडता है अब इसे सहर्ष स्वीकार कर लें या तनाव बना कर रखें ये अपने हाथ मे है. उसने बताया कि डाक्टर भी उसे यही कह रही थी. अल्ट्रा सांऊड भी करवाया है वो भी ठीक है …

मैने जो नेट पर पढा था या जो अपने अनुभव थे उसे बताए कि उसे अपना ख्याल कैसे रखना चाहिए

Women in Menopause Need Foods With These Minerals and Vitamins

 

Plenty of things change as women approach menopause. Fortunately, some undesirable consequences like bone loss and hot flashes may be reduced with a few diet changes.

Menopause is a difficult time for many women. It can be a little reassuring to know that the foods you put on your shopping list can make a difference, and can help restore some sense of normalcy to your life. Read more…

मीनोपोज में सबसे ज्यादा जरुरी है कि खुद को व्यस्त रखें.. खुश रखे अपना ध्यान अच्छी बातों में लगाए और सबसे ज्यादा जरुरी खान पान पर ध्यान देना है आयरन और कैल्शियम का सही सेवन बहुत जरुरी है क्योकि कई बाद बहुत ब्लीडिंग होने से शरीर में कमजोरी आ जाती है सही मायनों में क्या है मीनोपोज प्रश्न आपको तंग नही करेगा और वैसे भी  जिंदगी को pause नही करता मीनोपोज …

 

 

 

Images via empowher.com

May 26, 2015 By Monica Gupta

पानी- एक गम्भीर समस्या

पानी- एक गम्भीर समस्या….  कम होता पानी का भंडार … जिस तरह से पानी के भंडार की क्षमता घट रही है 2025 तक भारत पानी की कमी महसूस करने लगेगा

cartoon of water -monica gupta

तापमान बढता जा रहा है और जिस तरह से पानी का भंडार कम होता जा रहा है  पानी इतना ही आना कम होता जा रहा है. मुश्किल  से आधा घंटा पानी आता है वो भी बूंद बूंद टपक कर… और कई नलकों से तो पानी की बजाय हवा ही आती है … ऐसे के क्या होगा … एक गम्भीर समस्या है …

पानी एक गम्भीर समस्या – 2025

नई दिल्ली। भारत में जल्द ही पानी की कमी हो जाएगी। भारत पानी की कमी को 2025 तक महसूस करने लगेगा। यह कहना है पानी के क्षेत्र की अग्रणी परामर्श कंपनी ईए-वाटर का। ईए-वाटर के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में तेजी से पानी के भंडार में कमी हो रही है। Read more…

प्राकृतिक संसाधनों का अन्धाधुंध दोहन यथा वृक्षों की कटाई, अत्यधिक जल दोहन, अनियंत्रित खनन, आदि से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है । इसी तरह बढ़ती आबादी के कारण सभी जगह की आबोहवा बिगड़ रही है.ऐसे में संकट मुंह बाए खडा है क्या करे या क्या न करें

पानी की समस्या से बचने के लिए श्रम दान

प्राचीन काल से ही श्रमदान का महत्व रहा हैं ब्रज में वर्षा खूब होती थी जिससे यमुना नदी में प्रायः बाढ़ आती रहती थी। ब्रज मैदानी भाग था यहां की अधिकांश भूमि ” गोचर ” थी पर अति वृष्टि के कारण बरसात के बाद तक यह क्षेत्र जल मग्न बना रहता था। एक बार ऐसी बाढ़ आई कि घर सम्पत्ति संभालना कठिन हो गया। लोगों ने गाये हटा दी और घर छोड़कर भागने लगे। श्रीकृष्ण ने इस स्थिति पर गम्भीरता से विचार किया तो मालूम हुआ इस तरह के गम्भीर संकटों का सामना अकेले नहीं हो सकता। उसके लिए सामूहिक श्रमदान और लोक मंगल की भावना से मिल-जुलकर काम करना आवश्यक होता है। उन्होंने वर्षा के जल और बाढ़ से गांव को बचाने के लिए उस क्षेत्र के सभी निवासियों को इकटठा कर सामूहिक श्रमदान की प्रेरणा दी और सबको पत्थर ढोने में लगा दिया। देखते ही देखते 14 मील लम्बा और आधा मील चौड़ा बांध बनकर तैयार हो गया और इस तरह ब्रज को श्रमदान के द्वारा बाढ़ की परेशानी से निजात मिल गयी ।। See more…

पानी बचाओ को के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि शुरुआत अपने आप से करें. फालतू पानी न बहने दे और कम पानी का भरपूर प्रयोग लें . अगर कोई पानी व्यर्थ गिरा रहा है तो उसे टोके अवश्य… क्योकि समझाना हमारा फर्ज है … बाकि आप खुद समझदार हैं … है ना 🙂

May 26, 2015 By Monica Gupta

Acche Din aane wale hain

365 दिन  यानि एक साल चला भी गया पर अभी भी यही सुनने को मिल रहा है कि Acche Din aane wale hain

cartoon days monicaAcche Din aane wale hain  ना जाने कब आएगे अच्छे दिन ???

 

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