Hat’s Off
Hat’s Off आज अखबार पढ कर पता चला कि देश में कल और भी बहुत गतिविधिया हुई. मैने सोचा कि शायद सलमान खान वाली धटना ही धटित हुई थी क्योकि जिस तरह से पल पल का धटना क्रम दिखा रहे थे उससे तो यही प्रतीत हो रहा था कि मानो कोई दूसरा मुद्दा ही नही है.
कब सलमान घर से निकले. कब अपने पापा के गले लगे. कब किस किससे गले मिले. अच्छा चलो एक बार हो तो भी समझ आता है पर बार बार एक ही सीन को दिखाना और वो भी सारे चैनल पर … ये अच्छी बात नही है …
वैसे Hat’s Off to media जिस के पीछे पडता है हाथ धो के नही, नहा धो कर पडता है.ऐसे में तो कहना बनता है Hat’s Off
आप खुद ही देखिए ना पहले आप पार्टी, फिर गजेंद्र, किसानों का मुद्दा फिर भूकम्प,फिर मोगा रेप, फिर आप पार्टी और ताजा ताजा सलमान खान केस. दिन के 24 धंटे मे से ना जाने 25 धंटे एक ही खबर लगातार चलती है और चलती ही रहती है वैसे hats off हम लोगो के लिए भी है जो दिन रात कोसते भी हैं और खबरें देखते भी हैं.. चलिए आज देखते हैं कि पूरा दिन कौन सी एक खबर सभी चैनलों पर चलेगी ..Hat’s Off
न्यायालय
मां – प्यार का दूसरा नाम
मां – प्यार का दूसरा नाम …… कुछ देर पहले नेट पर कुछ सर्च कर रही थी कि तभी एक लेख पढने को मिला कि मां के हाथ के खाने जैसा दुनिया में और कुछ नही हो सकता… उसमे बहुत सारी बाते बताई हुई थी कि मां के हाथ मे ये है मां के हाथ में वो है… कुछ बातें बहुत अच्छी भी लगी पर जब भी मां के हाथों से बने खाने की बात होती है तो मुझे बस एक ही बात याद आती है और वो है ..पेट भरने के बाद, मना करने के बावजूद , एक फुल्का और लो ना बस ये बिल्कुल छोटा सा है … यानि मना करने के बाद भी आखिरी फुल्का तो खिलाना ही होता है… जिसे दूसरी भाषा में कहते हैं Over eating ya torture…. पेट के साथ … पर क्या करें खाना इतना लजीज जो होता है … हां तो मैं बता रही थी….
बात उन दिनों की है जब मैं कुरुक्षेत्र से एम ए (संगीत) कर रही थी. होस्टल मे खाना खा रही थी. उस दिन मेरे पसंदीदा राजमा चावल बने थे. पेट भर गया था पर नियत नही भरी थी. मैस वाला भाई प्लेट में फुल्का डाल गया और मैने कहा कि और नही चाहिए. फिर मैं बहुत देर तक इंतजार करती रही कि वो फुल्का ले कर आएगा… असल में, वो क्या है ना कि जब मम्मी को मना करती तो बाद मे एक चपाती तो आनी ही आनी होती थी . होता वही साईज था पर कहने को पतली सी छोटी सी होती. वही आदत पडी हुई थी और याद भी नही रहा कि मैं घर नही होस्टल मे हूं और ये मैस वाला भईया है मेरी मम्मी नही. मैने जब उसे बुला कर पूछा कि चपाती क्यो नही दी इतनी देर से इंतजार कर रही हूं तो वो बोला कि आपने ही तो मना किया था.
उस रात मैं अपने कमरे मे जाकर मम्मी को याद करके बहुत रोई… फिर धीरे धीरे आदत पड गई.
ये जो प्यार है न कि बस एक आखिरी , छोटी सी और ….
ये हमेशा बहुत याद आता है मां का ऐसा प्यार , दुलार और कही भी नही देखने को मिल सकता. वाकई में, मां – प्यार का दूसरा नाम ही तो है … है ना !!!!
Rape Graph in India
मोनिका गुप्ता
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