Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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March 14, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

ISBTI

isbti- yamuna nagar-monica gupta

ISBTI

 रक्तदान करने वाले को दिल का दौरा कभी नही पड सकता . आईएसबीटीआई , रादौर यमुना नगर में  रक्तदान पर आयोजित कार्यशाला में अपने विचार रखते गणमान्य अतिथि !!

March 6, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

निर्भया

 

cartoon mahila

निर्भया

निर्भया Nirbhaya  दिल्ली में 16 दिसम्बर 2012 के बहुचर्चित बलात्कार और हत्या की आपराधिक घटना की पीड़िता को समाज व मीडिया द्वारा दिया गया नाम है। भारतीय कानून व मानवीय सद्भावना के अनुसार ऐसे मामले में पीड़ित की पहचान को उजागर नहीं किया जाता।  ऐसी धटना के बाद भी जिस तरह से रेप  केस बढे जा रहे हैं लग रहा है मानो अब महिलाओं और बच्चियों का बस यही नाम रह जाएगा ऐसा प्रतीत हो रहा है

अफसोस !! बेहद दुखद !!! इतनी असुरक्षा !!!

निर्भया

March 5, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

अच्छे दिन आयेंगे

cartoon ..mahila diwas

अच्छे दिन आयेंगे

बहुत समय से अच्छे दिनों की इंतजार है. महिला असुरक्षा इतनी बढ गई है कि घर से निकलते हुए डर लगता है. कानून अव्यवस्था , रेप, महिला असुरक्षा … बस बहुत बुरा हाल है ..

मोदी सरकार का नारा था चुनावों में कि अच्छे दिन आएंगें .. उसी की इंतजार है पता नही बाहर कब आऊं हो सकता है जल्दी या फिर कभी नही …

मन मे बार बार यही प्रश्न परेशान कर रहा है कि क्या अच्छे दिन आयेंगे   ????

March 3, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

महिला बनाम पतंग

cartoon mahila-kite

महिला बनाम पतंग

आज हालात  कुछ ऐसे हो गए है कि पंतग की बात करो या महिला की … एक जैसी ही है !!! जिस तरह से महिलाओ पर अत्याचार की खबरें लगातार पढने को मिल रही हैं समझ नही आता किस की बात हो रही है महिला की या पतंग की … बेहद  अफसोस की बात है !!!

February 26, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

दीदी की चिठ्ठी

   दीदी की चिठ्ठी

हैल्लो नन्हे दोस्तों,


कैसे हो?

कुछ दिन पहले नेहा स्कूल जाते हुए साईकिल से गिर गई. ज्यादा चोट तो नही आई पर डाक्टर ने उन्हे पांच दिन आराम करने को कहा. नेहा बहुत पढाकू लडकी थी. हर रोज स्कूल जाना ही उसे पसंद था. इसलिए जब उसकी टीचर को पता चला तो उन्होने कहा कि कोई बात नही. वो जो भी स्कूल मे पढाएगी शाम को उसके घर आकर समझा जाया करेगी. चार पाचं दिन टीचर उनके घर आकर स्कूल का पाठ समझाने लगी.

नेहा के बीमारी वाले दिन कैसे आराम से बीत गए पता भी नही चला. ऐसे ही दीपा के दादा रिटायर हो गए थे. सारा दिन कैसे घर मे खाली रहेगें यही सोच सोच के वो बहुत परेशान थे. रिटायरमेंट के अगले ही दिन पडोस मे रहने वाली अनु अपनी बिटिया को लेकर आ गई कि दादा जी आप इसे इतिहास पढाईए.

वहीं कालिज मे पढने वाला राजेश हर शाम अपना लेपटाप ले आता और दादा जी को नेट का इस्तेमाल सीखाता.इतना ही नही उनकी उम्र के लोगो ने हर सुबह और हर शाम सैर का प्रोग्राम बना लिया. ऐसे ही मिल जुल कर दिन हंसी खुशी मे दिन बीतने लगे. इसलिए जितनी भी हम खुशियां बांट् सके बाटंनी चाहिए. या दूसरे शब्दो मे यह भी कह सकते हैं कि खुशियां चंदन की तरह होती हैं अगर हम दूसरे के माथे पर लगाएगे तो हमारी भी ऊगंलियां महक उठेगी.
आपकी दीदी

मोनिका गुप्ता

दीदी की चिठ्ठी कैसी लगी … जरुर बताना 🙂

 

February 20, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

खोजी पत्रकारिता

rain strom photo

Photo by KadKarlis

खोजी पत्रकारिता

बात कुछ समय पहले की है. जब हमारे शहर मे जबरदस्त बारिश के साथ भयंकर ओलाबारी हुई और देखते ही देखते ना सिर्फ सडको पर पानी भरने लगा बल्कि घरो मे भी पानी धुसने लगा.करीब धंटा बारिश चली पर मेरी सहेली मणि का घर आश्चर्य का विषय बना हुआ था.

मणि के घर 6-7 ओले अभी भी जस के तस थे. यानि पिघले नही थे. बारिश, ओले की वजह से सर्दी बहुत बढ गई थी और रात भी होने वाली थी अगली सुबह फिर देखा तो वैसे ही थे. लोगो का जमावडा बढने लगा और मेरा रिपोर्टरी दिमाग भी सोचने लगा कि आखिर यह पिघले क्यो नही. कही कोई उल्कापात के कण तो हमारे यहां नही आ गए है.खैर, किसी को उसे हाथ नही लगाने दिया गया.बहुत पत्रकार भी उसकी तस्वीर लेकर गए. शहरी बच्चो ने तस्वीरे फेसबुक पर डाल दी वही और मधुबन से एक जांच टीम भी गठित करके वहा से रवाना हो गई.

उस दिन पूरी धूप निकल गई, मैं दुबारा मणि के घर गई तो वो ट्रंक के गर्म कपडे बाहर सुखा रही थी क्योकि उसके स्टोर मे पानी चला गया था. तभी मैने पूछा कि क्या स्टोर मे फिनाईल की गोलियां भी थी तो वो बोली कि हां बहुत थी. कुछ ट्रंक के अंदर तो कुछ ट्रंक के पीछे गलती से गिर गई थी. बस, मैंने वही सिर पकड लिया. वो ओले, वोले कुछ नही फिनाईल की गोलियां थी जो बरसात के पानी के साथ अंदर से बह कर बाहर आ गए थे.इतने मे कुछ चैनल की ओबी लाईव टेलिकास्ट के लिए वहां पहुच चुकी थी. मैं उनको मना कर ही रही थी कि अचानक मोबाईल की आवाज से मेरी नींद खुल गई.

चैनल की तरफ से फोन था कि शहर के पास के गांव मे दो गैंगस्टर घुस आए है उनकी ताजा अपडेट चाहिए. फोन रखने के बाद मैने ऐसे सपने के लिए सिर को झटका और फिर नई खबर की जानकारी जुटाने मे जुट गई. … !!! 🙂

खोजी पत्रकारिता

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