Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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February 8, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

Nraghuraman Aiyer ka Funda

Nraghuraman Aiyer ka Funda

 2 फरवरी को दैनिक भास्कर के मैनेजेमैट फंडा में रघु जी ने मेरी एक पोस्ट का जिक्र किया। वाकई में यह मेरे लिए बहुत हैरानी पर गर्व,सम्मान और खुशी का विषय है।funda-raghuraman- monica gupta

 

 

January 24, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

बहन जी टाईप

स्वच्छता अभियान और शौचालयों की भूमिका

girls photo

 बहन जी टाईप 

कल शाम को बाजार से लौटते हुए मेरे आगे कुछ
कालिज की लडकियां जा रही थी.शायद ट्यूशन क्लास खत्म हुई होगी. बहुत स्टाईल
मे बाते हो रही थी उनमे. मसलन अपने मंहंगे और फैशनेबल कपडो की, मोबाईल और
मैसेज की और अचानक किसी को देख कर उसका मजाक भी उडाने लगी कि देख वो ” बहन
जी टाईप ” आ रही है.

सच मानिए, वो लडकी बहुत साधारण से परिवार की लग रही थी.
उस लडकी ने शायद उनकी बात सुन ली थी वो अचानक उनके पास रुक कर बोली क्या बात
है किस बात पर बहुत हंसी आ रही है. मुझे समाज मे किस तरह से रहना है क्या पहनना
और क्या दिखाना है मै भी बखूबी जानती हूं.

मै बहन जी टाईप ही खुश हूं तुम
अपना सोचो कि तुम्हारा क्या होगा और वो लडकी आगे बढ गई.!!! अब उन लडक़ियो के
पास सिवाय चुप्पी के कोई चारा नही था.

मैने उस समय कहा तो कुछ नही पर उस
साधारण सी आसाधारण लडकी की तरफ स्माईल देकर अपना थम्स अप जरुर कर दिया.

 

January 16, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

जब कैंसर को शिकस्त दी – आत्मविश्वास से भरी सच्ची घटना

Importance of Mothers in Life

जब कैंसर को शिकस्त दी – आत्मविश्वास से भरी सच्ची घटना – मैं एक हीरोईन से मिली … आपके मन में माधुरी दीक्षित, हेमा मालिनी या आलिया भट्ट आ रहे होंगे पर नही… ये जो हीरोईन हैं इनका नाम कभी अखबार मे नही आया… कभी ब्रेकिंग न्यूज नही बनी पर मेरी नजर में किसी हीरोईन से कम नही …और अगर आप सुनेगें तो आप भी कह उठेंगें कि वाकई ये है सही मायनों नें हीरोईन …

 जब कैंसर को शिकस्त दी – आत्मविश्वास से भरी सच्ची घटना

मेरी खबर- कैंसर से जीत…  मणि के घर जाना हुआ. उसके घर रिश्तेदार आए हुए थे. उनके साथ एक प्यारी सी 3 महीने की गुडिया भी थी. गोल मटोल गुडिया के चेहरे पर स्माईल इतनी प्यारी थी कि मन करा कि उसे गोदी मे ही लिए रहूं. पर उनको वापिस जाना था इसलिए वो अपने मम्मी पापा के साथ चली गई. उनके जाने के बाद मणि ने बताया कि इस प्यारी सी गुडिया की मम्मी को यानि पप्पी को कैंसर था.

जब कैंसर को शिकस्त दी – आत्मविश्वास से भरी सच्ची घटना –

 

Hats Off ….!!!  उसे लगभग 8-9 महीने पहले पता चला और वो मुम्बई चले गए वही रह कर इलाज करवाया. इसी बीच अनेकों बार उसकी कीमोथैरेपी भी हुई. जहां एक तरफ उसका खाने का मन नही करता था वही दूसरी तरफ अपने भीतर पल रही नन्ही जान के लिए खाना और अच्छी डाईट लेनी भी जरुरी थी. मैं हैरान और हक्की बक्की होकर सारी बाते सुने जा रही थी. एक तो कैंसर का नाम ही डरावना है उस पर कीमो, आप्रेशन या रेडिएशन ना जाने कितनी तरह की प्रक्रिया से गुजरना पडता है

ऐसे मे मन हार जाता है पर पप्पी ने ना सिर्फ उसे सहन किया बल्कि अपने जज्बे को जिंदा रखते हुए अपनी बेटी को जन्म भी दिया हालाकि वो आप्रेशन से ही हुई पर उसके बाद भी वो कैंसर का ईलाज करवाती रही. अब वो ठीक होकर वापिस अपने शहर लौट रही थी इसलिए यहां पर थोडी देर के लिए रुकी.

काश मुझे पहले पता होता तो मै जरुर उसकी हौंसला अफजाई करती और उसकी पीठ थपथपाती. मैं अपने घर जाने के लिए खडी ही हुई थी कि पप्पी सामने खडी थी. वो अपना पर्स ले जाना भूल गई थी इसलिए दुबारा आई थी. अचानक उसे सामने खडा देख कर मेरी आखे छ्लछ्ला आई और मैने उसे गले से लगा लिया और उसकी बहुत बहुत तारीफ की जिसकी वाकई मे वो सच्ची हकदार थी.

प्यारी से मुस्कान लिए वो वहां से चले गए और मैं अपने घर लौटती हुई यही सोचती रही कि बेशक पप्पी कोई नामी गिरामी खिलाडी, अभिनेत्री या कोई जानी मानी हस्ती नही है पर जिस विश्वास के साथ उसने अपने दर्द को सहा और एक बच्ची को जन्म दिया वो मेरे लिए किसी रियल हीरोईन से कम नही है. ईश्वर करे अब वो हमेशा स्वस्थ रहे और सेहतमंद रहे.

बीती ताहि बिसार दे – बीती हुई बात को पकड कर बैठना सही नही – Monica Gupta

बीती ताहि बिसार दे – बीती हुई बात को पकड कर बैठना सही नही – अक्सर हम past की बातों को लेकर बैठ जाते हैं और अपना भविष्य खराब कर लेते हैं. घर पर एक जानकर आईं. . read more at monicagupta.info

 

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मेरी खबर आपको कैसी लगी … !!!!

 

monica gupta

January 15, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

Nice Thoughts

positive Thoughts photo

Photo by symphony of love

Nice Thoughts

गूगल सर्च से एकत्रित किए कुछ बहुत अच्छे विचार …

“M e e t i n g
&
D e p a r t i n g
Is The Way Of Life . . .

But

D e p a r t i n g
&
M e e t i n g
Is The Hope Of Life . . .

A Friend Would Share
A Bag 0f Chips
But
A Best-Friend Would Eat
Them All
Then
Give You The Empty Bag
And Say
“You Can Have The Rest.”

Sometimes
It’s Not The Song
That
Makes You Emotional,
It’s The People & Things
That Come To Your Mind
When
You Hear It … ! *.*

Heart Touching Line
By A Poor Child …

“I Saw Many Shirts In
0pposite Home’s Window

But

I Saw Many Windows In
My Shirts .”

Forest Dept:
Love Trees
But
Don’t Love Under D Trees..

&

Traffic Dept:
Donate Blood,
But
Not On Roads..

It Take One MINUTE
To MAKE Someone’s Day
And
One WORD To DESTROY
Someone’s Life … !!!

Everyone Acts Like A
FRESHER In Their Own
Problems
But
Incase Of Other’s Problem
Everyone Acts Like An
EXPERT … !!!

Strange But True …

“Kisi Ki Galati Ki Saza Khud Ko Dena”. Gussa hai ..

We Get Comfort From Those Who Agree With Us,
But
We Get Growth From Only Those Who Disagree With Us…

Efforts Towards SUCCESS
Will Make You A MASTER.
But
Efforts Towards SATISFACTION
Will Make You A LEGEND…

Making Someone Laugh
When They Are Feeling Down
Is One Of The Best
Feelings In The Whole
World. . .
“Ek Baat Zindagi Bhar Yaad Rakhna,
Kisi Ko Dhoka Na Dena,
Dhoke Mein Bari Jaan Hoti Hy,
Ye Kabhi Marta Nahi,
Ghoom Phir Kar Ek Din Wapis Aap k Paas Hi Pohanch Jata Hy
Kyun k Iss Ko Apne Thikane Se Bohat Mohabat Hoti Hy..”!!

I Belong To The Country Where Mothers Don’t Tell Their Soldiers Sons That..

“Ja Beta! Apna Khyal Rakhna”

Instead They Tell Them,
“Ja Beta! Watan Ka Khyal Rakhna”
…
And They Don’T Wish Them That,
“Ja Beta! Fatah Tera Naseeb Ho”

Instead They Wish Them,
“Ja Beta! Shahadat Tera Naseeb Ho”…..
“Instead Of Thinking
About How To
W i n
Think How You
L o s t
…Last Time … !
You Will Definitely
W i n
Next Time …! ” 🙂

Me W0 “CHAND” Nhi Jise Hr K0i Be-Naqaab Dekhe,,,

Balky,

Me T0 W0 Suraj Hun Jise Dekhne Se Pehle He Ankhen Jhuk Jati Hai..
If You Can
S M I L E
When You r
Completely
B R O K E N – U P
…Then
There Can Be
N O T H I N G
That Can
B R E A K
You Next Time . .

A Man Lost Almost Everything In A Fire..
Nxt Day He Placed A Signboard…
.
.
Shop Burnt!!! House Burnt!!! Guds Burnt!!! But Faith Not Burnt..

Shop Starts Tomorrow..
A Line That Very
Few Understand …

“Tears Don’t Come
When
…You Miss A Person
But
It Comes
When
You Don’t Want To
Miss A Person …”

What Do You Say ? ?

A Man Saw A Little Poor Boy Looking At His Expensive Car..,

He Took The Boy 4 A Drive..
,
The Boy Said: “Ur Car Is So Marvelous,
It Must Be 2 Expensive.!,
Hw Much It Costs.?”
Man: “I Don’t Kno, My Brother Has Gifted Me.”

Boy: “Wow, So Nice Of Him.”

Man: “I Know What You’re Thinking, You Also Want To Have A Car Like It.”

Boy: No, I Want To Be A Brother Like Him.

Always Think Higher Than The People’s Expectation.!

CONFIDENT QUOTE:

Whenever You Feel
That You Failed,

…Say These Words,

“I AM NOT FAILED,
MY SUCCESS JUST
POSTPONED. . . “

Nice Thoughts …..     Collection of Monica Gupta

January 12, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

सुखवंत कलसी

  सुखवंत कलसी  

नन्हों की दुनिया के सम्राट हैं सुखवंत कलसी      

Sukhwant Kalsi ….!!!

 Journey from commerce to comics !!!

sk

बच्चो और बचपन  का नाम लेते ही मन मे बहुत सारी बाते उभर कर आती  है जैसाकि पढाई, मासूमियत, शरारते, मस्ती और कार्टून. जी हां, बच्चो और कार्टून का गहरा नाता है. चाहे वो टीवी पर देखे या बच्चो की पत्रिका मे पढे. खुद को तनाव रहित और रिलेक्स करने के लिए यह कार्टून वाकई मे बहुत ताजगी दे जाते हैं. ये तो बात हुई बच्चो की जो कार्टून पढते हैं.

आईए, आज आपकी मुलाकात ऐसी शखसियत से करवाते हैं जो अपने बचपने से ही ऐसे मनोरंजक, ज्ञानवर्धक कार्टून बनाने लगे.जी हां, खुद बनाने लगे और उन्होने सौ नही, हजार नही बल्कि आप बच्चो के लिए दस हजार से भी ज्यादा कार्टून बनाए हैं.

चलिए आप को मैं हिंट देती हूं और आप ही बताईए कि  उन आसाधारण प्रतिभा का नाम है क्या !!! मूर्खिस्तान, जूनियर जेम्स बांड…. !!! अरे क्या !!! आप पहचान गए !!! अरे वाह !! आप तो बहुत जल्दी पहचान गए. बिल्कुल सही पहचाना!!! वो महान कलाकार है श्री सुखवंत कलसी जी.सुखवंत कलसी जी ना सिर्फ़ नन्हो की दुनिया के कार्टून सम्राट हैं बल्कि टेलिविजन की दुनिया मे भी उन्होने एक से एक बढ कर लेखन कार्य किया है और उन धारावाहिको को शीर्ष तक ले कर गए हैं.

सुखवंत जी से मिलने से पहले कई बार मन मे यह बात  आई कि इतने महान और व्यस्त कलाकार है पता नही बात करेगे या नही, समय देंगे या नही पर मेरी हैरानी और खुशी की सीमा नही रही जब सुखवंत जी ने ना सिर्फ समय दिया बल्कि अपने बचपन के बारे मे बहुत सी बाते बताने का भी वायदा किया. उनसे मिलने के बाद शुरु हुआ बातो का सिलसिला.

 चिर परिचित सहज मुस्कान से साथ सुखवंत कलसी जी ने बताया कि उनका जन्म 14 जुलाई को कानपुर मे हुआ. पापा इंजीनियर थे और मम्मी घर का काम सम्भालती थी.चार भाई बहन यानि उनके एक बडे भाई और दो बहने है. वो सबसे छोटे हैं और छोटे होने के नाते बेहद शरारती और लाडले थे.फिर मैने बात की पढाई की तो मुस्कुराते हुए बताने लगे कि वो पढाई मे ठीक ठीक ही थे पर स्कूल मे पढते पढते उन्होने दूसरी गतिविधियो मे भी बहुत बढ चढ कर हिस्सा लिया और उसमे मुख्य थी चित्रकारी.

 उन्होने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि स्कूल मे जब उनके हाउस की डयूटी लगती थी तो वो अपने नोटिस बोर्ड पर कार्टून बनाकर डालते थे और उस समय पूरा स्कूल उमड पडता था यह देखने को कि आज इन्होने क्या बनाया है. स्कूल के टीचर भी बहुत खुश होते और बहुत उत्साहित करते.

मैने बीच मे ही पूछ कि इतनी छोटी उम्र मे कार्टून बनाने शुरु किए. अखबारो या बच्चो की पत्रिकाओ मे देने के बारे मे कुछ बताईए. उन्होने हसंते हुए बताया कि उन दिनो घर मे मम्मी “सरिता” मैगजीन  पढा करती थी. इसके इलावा “मनोरमा” व अन्य पत्रिका घर पर आया करती थी.बस तब यह विचार आया कि उनमे भेजकर देखते हैं. एक बार सरिता मे कार्टून भेजने पर जवाब आया. जिसमे सम्पादक महोदय ने लिखा था कि  कि रेखाचित्र कमजोर है.प्रयास जारी रखिए सफलता अवश्य मिलेगी. उस पत्र मे बहुत प्रोत्साहित किया और वो कार्टून और वो पत्र अभी तक उन्होने सम्भाल कर रखा हुआ है.पर उसमे बाद भी  प्रयास जारी रखा और ईश्वर की कृपा रही और कार्टून छ्पने शुरु हो गए. इसके इलावा एक और भी मजेदार बात हुई एक बार कार्टून बना कर जब वो स्वयं सम्पादक से मिलने गए तो उनकी दीदी और दीदी के रिश्तेदार साथ मे थे. सम्पादक महोदय कार्टून के बारे मे जो भी बात कर रहे थे वो दीदी के रिश्तेदार से सुखवंत कलसी समझ कर ही कर रहे थे बात खत्म होने के बाद दीदी ने जब उन्हे यह बताया कि सुखवंत तो ये है तब वो इतने हैरान हुए कि ये सुखवंत है.इतना छोटा बच्चा और  इतने अच्छे कार्टून बना रहा है.उन्हे विश्वास ही नही हुआ.

बातो बातो मे ही एक किस्सा याद करते हुए उन्होने बताया कि एक बार सम्पादक महोदय ने उनसे कहा कि आजकल बहुत बचकाना कार्टून बना रहे हो इस पर उन्होने हंस कर कहा तो आप “चंपक” मे स्थान दे दीजिए. इस पर सम्पादक महोदय भी हंसे बिना नही रह सके. सुखवंत जी ने बताया कि ये बात वो इसलिए बताना जरुरी समझते हैं कि ज्यादातर बच्चे हौंसला अफजाई ना मिलने से हिम्मत हार जाते है पर वो हिम्मत नही हारे बल्कि और हर बात को बहुत सकारात्मक रुप से स्वीकार कर के और अपने काम मे दिन रात जुटे रहे.

उन्होने बताया कि पहले उनके पास साईंस विषय था बाद मे उन्होने कामर्स ले ली और फिर कामर्स से कामिक्स तक का लंबा सफर शुरु हो गया.

सन 1972 से “सरिता”, “मनोरमा”, “कारवा”,”वोमेंस ईरा”,”धर्मयुग” आदि कोई किताब ऐसी नही रही जिसमे उन्होने अपना कार्टून ना दिया हो और बच्चो की पत्रिका “दीवाना”( बात बेबात की),”मेला”(भोलू)आदि और फिर 1980 मे डायमंड कामिक्स( हीरा मोती, राजन इकबाल),मनोज कामिक्स, चित्रा  भारती आदि ढेर सारी कामिक्स पर काम किया. सफर ऐसे ही आगे बढता रहा. बाल पत्रिका “नन्हे सम्राट” का भी सम्पादन कर रहे हैं या दूसरे शब्दो मे यह कह सकते है कि “नन्हे सम्राट” के वो ही जन्मदाता है. “नन्हे सम्राट” इस उद्देश्य को लेकर चले कि उसमे सिर्फ और सिर्फ बच्चो का जबरदस्त मनोरंजन हो. ताकि जब बच्चे उसे पढे तो बस हंसी खुशी की दुनिया मे ही खो जाए. उन्होने जो सोचा वो कर के भी दिखाया क्योकि यह उनकी व उनकी टीम के अथक मेहनत और प्रयास का ही नतीजा है कि “नन्हे सम्राट” अपनी अपार सफलता के  25 साल पूरे होने जा रहा हैं और बहुत ही जल्द 300वां अंक प्रकाशित होगा. यह बात बताते हुए उनके चेहरे से खुशी मानो टपक रही थी.बच्चो के इस प्यार से उन्हे यकीनन बहुत उर्जा मिली और नए नए आईडिया आते चले गए.

अपने टीवी के सफर के बारे मे उन्होने बताया कि 98-99 मे वो मुम्बई शिफ़्ट हो गए और फिर शुरु हुआ टीवी पर लेखन का दौर. “मूवर्स एंड शेखर्स” मे लगभग 250 स्क्रिप्ट उन्होने लिखी और लालू यादव के स्टाईल से शेखर सुमन छाने लगे. इसमे वो खुद भी कभी कवि तो कभी वैज्ञानिक की भूमिका मे नजर आए. बताते बताते हो मुस्कुराने लगे.इसी सिलसिले मे वो लालू जी से भी मिले और लालू जी भी उनसे मिलकर खुश हुए बल्कि उनके काम की बेहद तारीफ भी की. इसके साथ साथ दूरदर्शन तथा अन्य ढेर सारे चैनलो के लिए इन्होने हास्य लेखन किया जैसे “नीलाम घर”,”कामेडी सर्कस भाग 1”,”द ग्रेट इंडियन लाफदर चैलेंज”, “गोलमाल”,”हम आपके है वो” आदि ढेर सारे ऐसे धारावाहिक है जिनका लेखन उन्होने किया.सुप्रसिद्द हास्य कलाकार “राजू श्रीवास्तव” के लिए भी यह लगातार लिख रहे है और सांसद “नवज्योत सिह सिद्दू” के लिए बहुत पंच लाईने लिख रहे हैं.

बच्चो को संदेश देते हुए उन्होने  कहा कि जिंदगी मे सबसे जरुरी पढाई है. हां, अपनी पढाई के साथ साथ अपने पसंद के काम को भी चुन सकते हो पर पढाई सबसे ज्यादा जरुरी है और अपने मम्मी पापा का कहना मानना भी बहुत जरुरी होता है. वो जो भी कहते है हमारे ही भले के लिए होता है और अभिभावको को भी यह संदेश दिया है कि बच्चो की रुचि देख कर उन्हे उत्साहित करने की कोशिश करनी चाहिए.पर दूसरे बच्चे से तुलना भी नही करनी चाहिए. हर बच्चे मे अपनी अपनी खूबी अपनी प्रतिभा होती है.बजाय उसे दबाने के उस खूबी को उभारना चाहिए.

वाकई मे, सुखंवत कलसी जी से मिलकर बहुत खुशी हुई.वाकई मे मैने उनका बहुत सारा समय लिया !!!! पर उनके कार्टून जैसा नही !!! 

skj

मैने उन्हे आप सभी की तरफ से ढेर सारी शुभकामनाए दी. उनसे मिलकर एक ही बात जहन मे आ रही है कि ….

“पढो तो किताब है जिंदगी,सुनो तो ज्ञान है जिंदगी पर हंसते रहो तो आसान है जिंदगी”

 

मोनिका गुप्ता

 

January 9, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

विज्ञापन और हमारा जीवन

विज्ञापन और हमारा जीवन – अक्षय कुमार का एक विज्ञापन आ रहा था. उसमे वो घर दिखा रहे हैं और फिर बताते है कि यह उनका ही घर है इसी बीच मे उनकी पत्नी आवाज देकर कहती है कि जाकर बाथरुम धो …!!! इस पर अक्षय मुस्कुरा कर कहते हैं कि हर संडे वो बाथरुम धोते हैं.

विज्ञापन और हमारा जीवन

इस को देख देख कर मेरी सहेली मणि हंस हंस कर दोहरी हुई जा रही थी कि ऐसा थोडे ही ना होता है कि आदमी लोग घर की सफाई करे.मैने उसे कहा कि जहा महिलाए भी बाहर काम करती है वहां पति पत्नी मिल कर घर का काम करते हैं कई पति तो खाना भी बनाते हैं, कपडे भी धोते हैं बच्चो को भी सम्भालते हैं और इसमे गलत भी क्या है पर मणि के मन मे एक ही बात बैठी हुई है कि आदमी का काम घर चलाना होता है और आदमियो का इस तरह से घर के काम करना वो सपने मे भी नही सोच सकती .

हां अगर पत्नी बीमार हो या कोई अन्य बात हो तो ठीक है यानि कभी कभार पर दिनचर्या का ही हिस्सा बना लेना ठीक नही है और यही देख कर वो हंस हंस कर दोहरी हुई जा रही है कि मर्द और घर के काम … कभी नही !!! मैं उसे समझाए जा  रही थी कि समय बदल गया है … 

विज्ञापन और हमारा जीवन

विज्ञापन और हमारा जीवन

विज्ञापन और हमारा जीवन

 

मोनिका गुप्ता

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