Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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You are here: Home / Archives for मोनिका गुप्ता

September 29, 2015 By Monica Gupta

रक्तदाता

 रक्तदाता

अक्सर हम रक्तदान पर बढ चढ कर बात करते हैं पर जब रक्त देने की बात आती है तो कुछ लोग ऐसे भी होते है…

हुआ ये कि एक सहेली ने बताया कि उनके करीबी रिश्तेदार को डेंगू हो गया और अचानक प्लेट्लेट की जरुरत पडी. उसने मुझे फोन किया. मैने कहा कि अभी कुछ करती हूं बात को 5 मिनट भी नही हुए थे कि उसका दुबारा फोन आया कि रहने दीजिए एक रक्तदाता मिल गए हैं और वो प्लेटलेटस देने आ रहे हैं . मैने भी भगवान शुक्र अदा किया कि अब मरीज जल्द ठीक हो जाएगें.

असल में,  उन्होने उसने अपने  जानकार को  फोन किया और उसने कहा कि वो अभी आ रहें हैं. इसी बीच मेरी सहेली रिलेक्स हो गई पर आधा घंटा बीतने पर भी वो नही आए. सहेली ने दुबारा उन्हें फोन किया पर अब फोन ही नही  मिल रहा था. अब परेशानी शुरु हो गई क्योकि मरीज की हालत लगातार बिगडती जा रही थी. आनन फानन दो चार् लोगो से फोन किया और बिल्कुल अंत मे एक अंजान व्यक्ति रक्तदान के लिए आगे आया.

 दुख इस बात का है कि अगर ऐसे समय मे वो मित्र पहले ही  मना ही कर देते कि मै नही दे सकता तो शायद इतनी परेशानी ना होती पर जिस तरह से उन्होने लटकाए रखा और ना ही फोन किया और ना ही खुद आए तो  ये तो बहुत ही गलत बात की. इस वजह से उनके मरीज की जान भी जा सकती थी.

यह बात  आपके साथ इसलिए  शेयर कर रही हूं अगर कभी भी ऐसी बात हमारे सामने आए तो या मना कर दें या फिर आगे आए. परेशान व्यक्ति को और ज्यादा परेशानी मे ना डाले…!!  प्लीज !!

रक्तदाता

 

man thinking photo

September 29, 2015 By Monica Gupta

स्मार्टफोन

स्मार्ट फोन

आजकल हम सभी स्मार्ट हैं  या स्मार्ट फोन  हैं या जिस शहर में हम रह रहे हैं वो स्मार्ट है .. !!! कुछ समझ नही आ रहा .

असल में, हुआ ये कि कल एक जानकार मुझसे नाराज हो गई. उसको शिकायत थी कि मैनें उसका फोन नही उठाया. जबकि मेरे पास तो कोई ट्रिन ट्रिन नही हुई. ऐसे ही  जब आज मैं भी अपनी  सहेली को बार बार फोन कर रही थी और bell जाते ही busy आ जाता. गुस्सा तो बहुत आ रहा था कि ऐसी भी क्या व्यस्त हो रखी है वो  ?? पर बाद में मुझे लगा कि शायद नेटवर्क की दिक्कत होगी.

वही फेसबुक पर कुछ जानकार दबाव बना रहे है कि अपने प्रोफाईल पिक्चर को तिरंगा करो … पर आप ही बताईए कि कैसे करुं सुबह का बनाया कार्टून नेट स्लो चलने की वजह से शाम को ही अपलोड हो तो कैसे और किस विश्वास से अपनी तस्वीर बदलें… मैं सोच ही रही थी कि तभी मणि भी आ गई.हम बाते कर ही रहे थे कि अचानक उसके पास फोन आया. उसने फोन नही उठाया मेरे पूछ्ने पर उसने बताया कि अगर एक बार फोन पर बात शुरु हो गई तो आधा घंटा समझो गया.. और वैसे भी आजकल नेट वर्क की दिक्कत चल रही है तो जब मिलेगी बोल दूंगी कि अच्छा ?? फोन किया था ??? ओह ?? पता ही नही चला !!!

हे भगवान !!! आजकल हम सभी स्मार्ट हैं  या स्मार्ट फोन  हैं या जिस शहर में हम रह रहे हैं वो स्मार्ट है .. !!! जरा सोच लूं !!!

smart phone photo

September 24, 2015 By Monica Gupta

चप्पलें

 rubber foot wear photo

Photo by ▓▒░ TORLEY ░▒▓

 

चप्पलें

एक सहेली के पावं में फ्रेक्चर हो गया.  उसका फोन बताने के लिए आया. मैं उससे मिलने गई और मिलने से पहले ढेर सारी बाते मन में आ रही थी कि  जरुर ही सडक पर आते जाते किसी वाहन से टक्कर हुई होगी. आजकल लोग चलाते भी तो बेहिसाब तेज है कोई नियम कानून तो रहा ही नही.

 पर वहां पहुंच कर कुछ और ही बात पता चली. असल में, हुआ ये कि घर मे ही उसका पैर फिसला धडाम और …. !!! पर ये हुआ कैसे!! मेरे पूछ्ने पर झिझकते हुए बताया कि  उसकी घरेलू चप्पल धिस गई थी और अक्सर जरा से पानी मे भी फिसलती थी.

कुछ दिन पहले वो बाजार जाकर नई जोडी ले भी आई थी पर आलस वश या कुछ भी समझ लो  …. कुछ भी समझ लो उसे पहना ही नही और सुबह कपडे धोते अचानक फिसली और सीधा 1 महीने के लिए बिस्तर पर. !! बात कितनी छोटी सी थी पर कितनी बडी हो गई और उसके साथ साथ पूरे परिवार को दिक्कत का सामना करना पडेगा वो अलग …

हे पाठक जनो अगर आप भी इस तरह का कोई आलस इत्यादि कर रहे हैं तो कृप्या न करे और अपना ध्यान रखे !!! और रही बात मेरी भई मैं तो नई चप्पलें खरीदने चली ..!!

September 24, 2015 By Monica Gupta

गूगल सर्च और कार्टून

गूगल सर्च और कार्टून

आज गूगल सर्च मे मेरे बनाए कुछ दिखाई दिए. बहुत अच्छा लगा …

गूगल सर्च और कार्टून ((मोनिका ग़ुप्ता)

गूगल सर्च और कार्टून ((मोनिका ग़ुप्ता)

September 23, 2015 By Monica Gupta

घरेलू नौकर और चुगली

just think photo

Photo by SodanieChea

घरेलू नौकर और चुगली

कुछ दिन पहले मार्किट में एक जानकार मिल गई. बाते करते हुए वो बोली कि वो भी उसी तरफ जा रही हैं मुझे ड्राप कर देगीं. मै मना न कर सकी. कार ड्राईवर चला रहा था और सारे रास्ते कभी वो अपनी सास की तो कभी अपनी ननदों की बुराई करती रही. बीस मिनट का रास्ता मुझे  दो घंटे का लगा, मेरे असहज होने की दो वजह थी एक तो उनका बुराई करना और दूसरा कार चालक भी सुन रहा होगा. वो भी क्या सोचता होगा अपनी मालकिन के बारे में. मैने एक बार उन्हे इशारा किया कि ड्राईवर सुन रहा है बाद मे बात कर लेंगें  पर मेरी बार अनसुनी कर दी गई और बोलती ही रही.

एक अन्य पडोसन काम वाली बाई के साथ आधा आधा घंटा बतियाती रहती है. सभी घरों का इतिहास खंगालने के बाद चाय पानी पिला कर उसे विदा करती है और ये रोज की बात है. वही एक अन्य महिला सब्जी वाले से सारी बाते करती है. अरे!! आप सब्जी लो और जाओ पर नही ..वो तो उसे ये तक बता देती है कि आज सब्जी नही लेंगें. हफ्ते के लिए बाहर जा रहे हैं. किसी के समझाने पर नही उसे तब समझ आया जब घर पर चोरी हो गई.

आज माहौल ऐसा नही है. समय बहुत बदल गया है. चाहे मालिश करने वाला हो,काम वाली बाई हो, माली हो या घरेलू नौकर अपने दुखडे उनके आगे न रोए तो बेहतर….. अपनापन दिखाए और प्यार से रखे पर अपने ही परिवार के सदस्यों की बुराई उनसे न करें  … क्योकि एक बार उन्हें भनक लग गई ना तो वो उसका भरपूर फायदा उठा सकते हैं बेशक अपवाद भी हैं पर बहुत कम इसलिए बहुत समझ कर रहने की आवश्यकता है … वैसे आप तो ऐसे नही होंगें … अगर हैं तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है… बाकि आप खुद भी समझदार हैं … है ना !!!

घरेलू नौकर और चुगली कैसा लगा ??? जरुर बताईगा !!! यदि आपका कोई अनुभव भी हमसे सांझा करना चाहे तो भी आपका स्वागत है !!

 

September 23, 2015 By Monica Gupta

सफलता की कहानी

 

ashok[1]

सफलता की कहानी

रक्तदान के क्षेत्र में एक प्रेरणा है अशोक कुमार

रक्तदाता श्री अशोक कुमार

रक्तदान से सम्बंधित एक कार्यक्रम चल रहा था. मीडिया, नेता, वक्ता, टीचर, डाक्टर आदि बहुत सज्जन मौजूद थे. सभी बहुत ध्यान पूर्वक कार्यक्रम सुन रहे थे तभी अचानक दरवाजा खुला और एक पुलिस वाले भीतर आए. उन्हे देख कर अन्य लोगो की तरह मेरे मन मे भी यही सवाल उठ रहा था कि यह यहां किसलिए आए हैं इनका यहां क्या काम है. इतने मे उन्हे स्टेज पर बुलाया गया. मैने सोचा कि स्पीच वगैरहा देकर चले जाएगे. पर स्पीच के दौरान सुना कि वो तो स्वयं रक्तदाता हैं और अभी तक 45 बार रक्तदान कर चुके हैं और 15 बार रक्तदान के कैम्प लगा चुके हैं. उनकी बातो से प्रभावित होकर मैने विस्तार से उनसे बात की.

सफलता की कहानी

उनका पूरा नाम है श्री अशोक कुमार. 3 सितम्बर सन 1972 मे जन्मे अशोक जी का जन्म हरियाणा के करनाल मे हुआ. पिता आर्मी मे थे. उन्होने सन 1962 और 1965 की लडाई भी लडी इसलिए बचपन से ही वो उनसे प्रेरित थे और बस एक ललक थी कि बडे होकर या तो आर्मी या पुलिस मे जाना है. कालिज मे जाने के बाद एनसीसी ज्वाईन कर ली थी. वैसे ना तो उन्हे सांइस और ना ही कामर्स का शौक था पर बडो के कहने पर उस विषय को लेना पडा. इससे पहले मैं कुछ और पूछती उन्होने बताया कि आज की तारीख मे उनके पास चार डिग्री बीकाम, एमकाम, एलएलबी और एलएलएम की हैं. फिर सन 98 मे वो पुलिस मे भर्ती हुए और आजकल हरियाणा के कुरुक्षेत्र मे वो फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट हैं.

रक्तदान के बारे मे अपने पहले अनुभव को उन्होने इस तरह से बताया कि सन 90 मे जब एनएसएस का कैम्प लगा था तब वो और उनके तीन चार दोस्त रक्तदान करने गए. तब अपने तीनो दोस्तो मे वो ही रक्तदान कर पाए और उनके दोस्त किसी ना किसी वजह से रक्त दान नही कर पाए. उस दिन इनमे एक अलग सा ही आत्मविश्वास आ गया और बस तभी से रक्तदान की शुरुआत हुई. एक और अच्छी बात यह भी हुई कि घर पर सभी ने शाबाशी दी और प्रोत्साहित किया. वैसे भी आर्मी मे समय बेसमय रक्त की जरुरत तो पडती ही रहती थी तब उनके पिता भी हमेशा आगे रहते. यही भावना उनके मन मे भी घर कर गई थी कि वो भी कभी भी जरुरतमंद को अवश्य खून दिया करेगें.

अब मेरे मन मे एक ही सवाल था कि पुलिस वालो के लिए अक्सर लोग बोलते है कि ये लोग तो खून पीतें हैं. इस पर वो मुस्कुराते हुए बोले कि यकीनन बोलते हैं और कई बार दुख भी होता है पर खुद काम अच्छा करते चलो तो कोई परेशानी नही आएगी. एक बार का वाक्या याद करते हुए उन्होने बताया सन 2010 मे जब उन्होने खून दान किया तो अखबार मे प्रमुखता से खबर छपी तो श्री सुधीर चौधरी (आईपीएस) ने भी यही बात की थी और शाबाशी भी दी थी कि बहुत अच्छा कार्य कर रहे हों. तब भी विश्वास को एक नया बल मिला था.

कोई मजेदार बात सोचते हुए उन्होने बताया कि जब भी वो कैम्प लगाते है कि जानी मानी शखसियत को बुलाते हैं. एक बार ( नाम नही बताया) जब उन्होने अपने कैम्प मे आने का निमत्रंण दिया तो पहले तो उन्होने सहर्ष स्वीकार कर लिया पर बाद मे बोले कि उन्हे रक्त देख कर ही डर लगता है इसलिए वो नही आ पाएगे. पर बहुत प्रयास और समझाने के बाद वो आए और पूरे समय कैम्प पर ही रहे पर रक्तदान के नाम से आज भी कतराते हैं.

अशोक जी ने बहुत गर्व से बताया कि आज की तारीख मे लगभग 1000 पुलिस विभाग के लोग उस मुहिम से जुडे हैं और वो जब भी खुद कैम्प आयोजित करते हैं ज्यादा से ज्यादा पुलिस को जोडते हैं ताकि समाज मे फैली धारणा को वो बदल सकें. समाज सेवा मे मात्र रक्तदान ही नही वो भ्रूण हत्या, वृक्षारोपण, सडक दुर्धटना मे घायल लोगो की मदद करना और गरीब बच्चो को छात्रवृति भी प्रदान करवाते हैं. आज की तारीख मे अशोक जी के पास दो नेशनल एवार्ड हैं. 15 स्टेट एवार्ड ,13 जिले व प्रशासन की ओर से मिले सम्मान और 23 एनजीओ की तरफ से मिले विशेष सम्मान मिले है जोकि बहुमूल्य हैं. मैं उनकी बातों से शत प्रतिशत सहमत थी.

अंत मे जब मैने पूछा कि जनता के लिए क्या संदेश है इस पर वो बोले कि एक कविता लिखी हैं. ये बात फिर चौका गई क्योकि पहली बात तो वो पुलिस वाले फिर रक्तदाता और फिर अब कवि भी. अपना संदेश उन्होने कुछ इस तरह से रखा….

आओ मिल कर कसम ये खाए

खून की कमी से ना कोई मरने पाए

जात पात और मजहब से उपर उठ कर

इंसानियत की जोत जगाए

हम तो है भारत वासी देख का गौरव ऊंचा बढाए !!!

अशोक जी इसी तरह रक्तदान की मुहिम को आगे बढाते रहॆं. आईएसबीटीआई परिवार की ओर से ढेरो शुभकामनाएं !!!!

सफलता की कहानी आपको कैसी लगी ?? जरुर बताईगा !!

मोनिका गुप्ता

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