Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

  • About Me
  • Blog
  • Contact
  • Home
  • Blog
  • Articles
    • Poems
    • Stories
  • Blogging
    • Blogging Tips
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Kids n Teens
  • Contact
You are here: Home / Archives for मोनिका गुप्ता

July 13, 2015 By Monica Gupta

हाल बेहाल

rain water by monica gupta हाल बेहाल

हमारे देश में बारिश होती नही कि सडको पर पानी खडा हो जाता है और तो और  वही बरसात का पानी घरों में भी धुस जाता है … बरसात आने पर जहां लोग इस पानी को  निकालने में जुट जाते हैं तो वही कुछ सैर के लिए भी निकलना चाह्ते हैं पर पानी के कारण सैर तो हो नही पाती इसलिए बच्चे को तैरा ही लाते हैं

July 13, 2015 By Monica Gupta

एलपीजी पर सब्सिडी

LPG by monic a gupta

 

एलपीजी पर सब्सिडी

लगभग हर रोज करीब चार हजार लोग छूट आधारित शाकाहारी तथा मांसाहारी भोजन का लुत्फ उठाते हैं। संसद की कैंटीन में तडक़ा मछली 25 रुपये में, सब्जियां 5 रुपये में, मटन करी 20 रुपये और मसाला डोसा 6 रुपये में मिलता है। सांसदों को ये इतनी सस्ती इसलिए मिलती हैं, क्योंकि इनके वास्तविक लागत मूल्य पर सब्सिडी सरकारी खजाने से दी जाती है

 

 

  | 4 PM | LATEST HINDI NEWS

प्रमोद भार्गव बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के आमंत्रण पर 1916 में महात्मा गांधी ने उसके समारोह में भागीदारी की थी। समारोह के मुख्य अतिथि वायसराय थे। वायसराय के उद्बोधन के बाद महात्मा गांधी को बोलना था। वे बोले, जिस देश की ज्यादातर आबादी की तीन पैसा भी रोजाना आमदनी नहीं है, किंतु वहीं देश के वायसराय पर रोजाना तीन हजार रुपये खर्च होते हैं। समाज में ऐसे लोगों का जीवित रहना बोझ है। अगर आज गांधी जी होते और जनता के धन से भोजन का स्वाद चख रहे सांसदों की उन्हें आरटीआई से सामने आई जानकारी मिलती तो क्या सांसदों को गांधी यही र्शाप नहीं देते? एक तरफ देश के जन प्रतिनिधियों पर रोजाना करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, उन्हें अनेक प्रकार की अन्य सुविधाएं नि:शुल्क दी जा रही हैं, बावजूद जनप्रतिनिधि हैं कि खुद तो ब्सिडीस का भोजन उड़ा रहे हैं, परंतु जो वास्तव में गरीब हैं, भूख की गिरफ्त में हैं, उनकी न तो गरीबी रेखा तय की जा रही है और न ही खाद्य सुरक्षा? सरकार संसद की रसोई से परोसी जाने वाली थाली में दी जाने वाली सब्सिडी खत्म करती दिखाई नहीं देती? सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी सामने आने पर पता चला है कि हमारे माननीय सांसद गरीब के हिस्से का भोजन करके डकार लेने को भी तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि उन्हें न तो आहारजन्य विसंगतियों का आभास होता है और न ही अनाज के उत्पादक किसान की आत्महात्या से पीड़ा होती है? क्योंकि उन्हें तो सब्सिडी के भोजन से पेट भरने की छूट मिली हुई है। वह भी गुणवत्तायुक्त स्वादिष्ठ भोजन की। बावजूद खाद्य मामलों की समिति के अध्यक्ष व टीआरएस सांसद जितेंद्र रेड्डी का कहना है कि यह सब्सिडी बंद की गई तो किसी के पेट पर लात मारने जैसी घटना होगी। सांसदों और संसद में काम करने वाले अधिकारी व कर्मचारियों को बेहद सस्ती दरों पर भोजन दिया जा रहा है। रोजाना करीब चार हजार लोग छूट आधारित शाकाहारी व मांसाहारी भोजन का लुत्फ उठाते हैं। संसद की कैंटीन में तडक़ा मछली 25 रुपये में, मटन कटलेट 18 रुपये में, सब्जियां 5 रुपये में, मटन करी 20 रुपये और मसाला डोसा 6 रुपये में मिलता है।

सांसदों को ये खाद्य सामग्रियां इतनी सस्ती इसलिए मिलती हैं, क्योंकि इनके वास्तविक लागत मूल्य पर क्रमश: 63 फीसदी, 65 फीसदी, 83 फीसदी, 67 फीसदी और 75 फीसदी सब्सिडी सरकारी खजाने से दी जाती है। पूड़ी-सब्जी पर तो यह सब्सिडी 88 फीसदी है। हम सब अच्छी तरह से जानते हैं कि अधिकतम गुणवत्ता के मानकों का पालन करके तैयार होने वाला यह आहार इतनी सस्ती दरों पर मामूली से मामूली ढाबे पर भी मिलना मुश्किल है? स्वयं सरकार द्वारा ही दी गई जानकारी से पता चला है कि मांसाहारी व्यंजनों के लिए कच्ची खाद्य वस्तुएं 99.05 रुपये में खरीदते हैं और माननीय सांसदों को 33 रुपये में परोसते हैं।

पापड़ की दर पर भी छूट दी जाती है। बाजार से पापड़ 1.98 रुपये प्रति नग की दर से खरीदा जाता है और एक रुपये में संसद में बेचा जाता है। यानी 98 प्रतिशत सब्सिडी पापड़ के प्रति नग पर दी जा रही है। कैंटीन में रोटी एकमात्र ऐसा व्यंजन है, जो लाभ जोडक़र बेची जाती है। प्रति रोटी लगत खर्च 77 पैसे आता है, जबकि इसे एक रुपये प्रति नग की दर से बेचा जाता है। हालांकि सस्ते से सस्ते ढाबे पर भी रोटी की कीमत 2 रुपये से लेकर 5 रुपये तक है। संसद की रसोई की ये दरें खाद्य समिति ने 20 दिसंबर, 2010 को लागू की थी, तब से लेकर अब तक इन दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। जबकि सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ती महंगाई के अनुपात में निरंतर बढ़ते रहे हैं।

वर्तमान में सांसद को प्रतिमाह लगभग एक लाख, 40 हजार रुपये मिलते हैं। इसलिए सांसद और संसद के अधिकारी व कर्मचारियों को सब्सिडी आधारित भोजन की व्यवस्था बंद करने की जरूरत है, लेकिन माननीयों के मुंह से निवाला छीनने की हिम्मत कौन जुटाए? बीते पांच सालों में सांसद 60 करोड़ 60 लाख सब्सिडी आधारित भोजन का आनंद ले चुके हैं। 2009-10 में यह छूट 10.04 करोड़ रुपये थी, तो 2010-11 में 11.07 करोड़ रुपये थी और 2013-14 में बढक़र 14 करोड़ रुपये हो गई। यह छूट 76 प्रकार के व्यंजनों पर दी जाती है। इस छूट का प्रतिशत 63 से लेकर 150 प्रतिशत तक है।

बीते पांच सालों में सांसद 60 करोड़ 60 लाख सब्सिडी आधारित भोजन का आनंद ले चुके हैं। 2009-10 में यह छूट 10.04 करोड़ रुपये थी, तो 2010-11 में 11.07 करोड़ रुपये थी और 2013-14 में बढक़र 14 करोड़ रुपये हो गई। यह छूट 76 प्रकार के व्यंजनों पर दी जाती है। इस छूट का प्रतिशत 63 से लेकर 150 प्रतिशत तक है। Via 4pm.co.in

एलपीजी पर सब्सिडी किसलिए ??? आम आदमी ही क्यों ??

 

July 13, 2015 By Monica Gupta

मैं तीस हजारी से बोल रही हूं

मैं तीस हजारी से बोल रही हूं

आज मणि बहुत घबराई हुई घर आई और बोली कि वो जेल जाएगी. वो जेल जाएगी … !!! मैने उसे आराम से बैठाया और सारी बात पूछी क्योकि जितना मै मणि को जानती हूं वो और जेल !!! असम्भव !! पर हुआ क्या!!! मैंने उसे पानी का गिलास पकडाया. गिलास हाथ मे लिए लिए  उसने घबराई हुई आवाज मे बताया कि उसके पास एक महिला का फोन आया. वो दिल्ली तीस हजारी कोर्ट से बोल रही थी. उसने नाम पूछ कर कहा कि आपके नाम से केस रजिस्टर हुआ है. क्या आपको नोटिस मिला ? मणि की तो वही सासं फूल गई. उसे कुछ समझ नही आ रहा था. उसने फोन काट दिया और मेरे पास दौडी चली आई. मैने उसे संयत करके बैठाया और विश्वास दिलाया कि ऐसा कुछ नही होगा क्योकि जब उसने कुछ किया ही नही तो !!! जब उसी नम्बर पर दुबारा फोन किया तो नही मिला. मैने यही कहा कि किसी ने मजाक किया है.

तभी उसी नम्बर से फोन आ गया. मैने बात करके पूछा तो उस महिला ने बताया कि हाई कोर्ट के सरकारी वकील है वो आपको सारी हिस्ट्री बताएगे और उसने उनका नम्बर तो दिया ही साथ मे मणि की केस फाईल नम्बर भी दे दिया. मै हैरान !! उस नम्बर पर फोन किया तो कोई आदमी बोल रहा था. इसने बताया कि पिछ्ले साल आपका आईडिया का नम्बर था उसका भुगतान नही किया इसलिए उन्होने केस दर्ज करवाया है. या तो पैसे जमा करवा दो या केस तो डल ही चुका है. मैने यह कह कर फोन रख दिया कि बाद मे बात करती हूं. फिर मणि से पूछ कि कभी किसी मोबाईल का बकाया था. इस पर वो याद करती हुई बोली कि एक बार एक नम्बर का प्लान बदलवाया था पर आईडिया वालो ने बदला की नही लगभग दो महीने तक वो लगातार फोन करके कहती रही पर बिल पहले वाले प्लान का लग कर आता रहा.इस चक्कर मे तंग आकर उसने दूसरा नम्बर ले लिया.

उसके बाद आईडिया से तो तीन बार भुगतान के लिए फोन आए पर उसने कहा कि गलती उनकी है कि प्लान बदला क्यो नही और हमे भी इतनी दिक्कत दी है इसलिए आपकी ही गलती है हम पैसे नही देंगे और उसके बाद कोई फोन नही आया. और आज आया तो !!! वो बता ही रही थी कि इतने मे उसी महिला का दुबारा फोन आया कि आपकी बात हो गई क्या उनसे. और मेरी हैरानी की सीमा नही जब वो महिला अपशब्द बोलने लगी. मै हक्की बक्की रह गई. ये क्या तरीका हुआ. बहुत बुरा लगा. दुख इस बात का हुआ कि मणि के पास कोई इमेल या कार्यवाही नही थी जिसका सबूत वो दिखा सकती कि आईडिया वालो ने कितना तंग किया था. खैर, दो तीन वकीलो और न्यायाधीश मित्र से बात की तो उन्होने बताया कि ऐसा बहुत हो रहा है और ये लोग बहुत गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. इस बारे मे जब दो चार लोगो ने आईडिया मे बात की तो वो तुरंत माफी मांग ली कि क्या करे जी.!!!

खैर, मणि अपने दो हजार रुपए तो अगले दिन ही जमा करवा दिए पर उस महिला के खिलाफ केस करने का मन भी बना रही है जिसने इतने अपशब्द बोले!
वाह रे आईडिया वालो …. वट एन आईडिया !!! वैसे ये अक्टूबर 2012 की बात है पर याद इतनी ताजा है मानो कल की ही बात हो …

मैं तीस हजारी से बोल रही हूं

jail photoमैं तीस हजारी से बोल रही हूं

July 12, 2015 By Monica Gupta

उलझन

लघु  कथा   उलझन

 

 

lady  photo

आज मीता मे जैसे ही अखबार पढा वो खुशी के मारे चहकने लगी. असल मे, उसने अखबार के एक कालम उलझन सुझाव के लिए अपनी राय भेजी थी और उसके पत्र को पुरुस्कृत किया गया था.

उलझन यह थी कि  नीना यानि सुशांत की पत्नी की तरफ से यह लिखा गया था कि उसकी और सुशांत की शादी को आठ साल हो गए हैं और उसकी सासू माँ  कुछ समय से उसी के पास रहने आ गई हैं और साथ मे ननद भी है. दोनो की जिम्मेदारी सुशांत के कंधे पर ही है.दिक्कत यह है कि सास बहू की बनती नही वही दिन भर किच किच.इसी  उलझन मे और अब  पति पत्नी के आपसी रिश्ते मे भी दरार आ गई है. उसे क्या करना चाहिए. पाठको के सुझाव मांगे गए थे.

इसी बारे मे मीता ने लिखा था

नीना, रिश्ते बहुत अनमोल और नाजुक होते है इसे सहेज कर रखने मे ही समझदारी है. आप थोडा सा झुकना सीखो और सास को पूरा आदर मान दो.उन्हे बाहर धूमाने ले जाओ. हर बात मे उनकी महत्ता जतलाओ.छोटी ननद को अपनी बहन की तरह रखो उसे बेहद प्यार दो.  अगर आप सही तालमेल रखोगी तो आपके पति भी आपसे बहुत खुश रहेगें. देखना बहुत ही जल्द  आपका प्यार रंग लाएगा और आपका घर आगंन खुशी से महकने लगेगा. आपकी मीता.

वैसे तो मीता अक्सर लिखती ही रहती है पर उसे उम्मीद नही थी कि यह सुझाव सम्पादक को इतना पसंद आएगा कि इसे पुरस्कार ही मिल जाएगा. बस इसी खुशी मे वो धंटे से फोन पर ही अपनी सहेलियो को बताने मे जुटी हुई थी. इसी बीच मे उसकी बीमार  सास  दो बार आवाज दे चुकी थी कि उसकी दवाई का समय हो गया है.

माथे पर बल डालती हुई मीता सास के कमरे मे घुसी और चिल्लाते हुए बोली…” क्या हुआ अगर एक घंटा दवाई नही लोगी तो मर नही जाओगी. अच्छी मुसीबत आ गई है आपके आने से. सारा दिन बस काम काम और काम… अपनी तो कोई लाईफ रही नही.”ये” भी आफिस चले जाते हैं और दिन भर तो झेलना मुझे ही पडता है.

कुछ देर अपनी सहेली से भी बात नही कर सकते और हुह बोलती हुई मुहं मार कर कमरे से बाहर निकल गई.

सास चुपचाप दवाई लेकर अपने कमरे का दरवाजा जोर से पटक कर बंद कर दिया

 

July 12, 2015 By Monica Gupta

Yes Minister

indian neta by moica gupta

Yes Minister … ना खाऊंगा… न खाने दूंगा की  लहर चली हुई है जिससे  नेता लोग  बेहद  दुखी है …. दाल रोटी सुहा नही रही क्योकिं रुपया खाने की आदत जो  पड चुकी थी या सच पूछों तो राजनीति में आए ही इसलिए थे कि खूब खाएगें और भरपूर समेटेंगें … पर अब चुपचाप बैठे हैं मन मसोस कर !!!

July 11, 2015 By Monica Gupta

Sick Leave

thums up photo

Photo by Zappy’s

Sick Leave

बचपन मे क्लास english  की हो या हिंदी की एक पत्र यानि application  का हमें रट्टा लगा होता था और वो है Sick Leave. सविनय निवेदन है कि आज मुझे बुखार है मैं दो दिन स्कूल नही आ पाऊंगी. कृपया करके दो दिन का अवकाश प्रदान करॆं..

ये application हमारे दिल के इतना करीब है इतना करीब है कि आज भी हम सभी  कही न कही बहाना ही खोजते हैं बीमार होने का …अब देखिए ना बीमार होना यानि मुसीबतों का पहाड टूट पडना. लम्बी लाईन, फिर ढेर सारे टेस्ट और फिर महंगी दवाईयां और दवाई के आफ्टर ईफेक्टस … इतना सब कुछ होते हुए भी बीमार होना हमे प्रिय है … बेहद प्रिय है… अब देखिए ना…  बच्चा अगर बाहर नौकरी कर रहा है तो मां ये कहेगी कि अगर छुट्टी नही मिल रही तो मेरी बीमारी की छुट्टी का बहाना ले कर आजा, मेरे बच्चे… !!!

बाहर बरसात हुई मौसम चाऊ माऊ हुआ कि हमें और किसी की याद आए न आए छुट्टी की याद जरुर आती है और बहाना … अजी बहाना तैयार है कि सर …  कल बरसात मे भीगने के कारण सर्दी लग गई और बुखार भी हो गया. इसलिए आज आफिस  नही आ पाउगां… और फिर बच्चों को लेकर निकल जाते है long drive पर ….  अगर लिख कर दे रहे हैं तो अलग बात है पर अगर फोन करके बताना है तो एक दो फर्जी छीकें तो मारनी पडेगी और एक दो बार नाक से भी बोलना पडेगा अरे भई … आपकी नाक भी तो बंद है ना 🙂 🙂

और तो और आप जरा फेसबुक पर स्टेटस डाल कर तो देखिए कि आपकी  तबियत  ठीक नही है  कमेंटस की लाईन न लग जाए तो अपना नाम बदल लेना( अब भई मेरा नाम तो भला चंगा है)

तो हुआ ना  बीमारी का बहाना हमारे दिल के करीब …

वैसे बहुत देर हो गई कामवाली बाई अभी तक नही आई … सारी रसोई फैली पडी है .. अरे ये किसका मैसेज है मोबाईल पर … नहीईईईईईईईईईईई… काम वाली बाई का है लिखा है आज तबीयत ठीक नही लग रही… दो दिन काम पर नही आएगी रे बाबा … !!

हाय ये क्या ??? मुझे भी अचानक सिर दर्द हो गया ऐसा लग रहा है बुखार भी … अरे नही ये वाकई में  सचमुच वाला है .. 🙁

  • « Previous Page
  • 1
  • …
  • 59
  • 60
  • 61
  • 62
  • 63
  • …
  • 111
  • Next Page »

Stay Connected

  • Facebook
  • Instagram
  • Pinterest
  • Twitter
  • YouTube

Categories

छोटे बच्चों की सारी जिद मान लेना सही नही

Blogging Tips in Hindi

Blogging Tips in Hindi Blogging यानि आज के समय में अपनी feeling अपने experience, अपने thoughts को शेयर करने के साथ साथ Source of Income का सबसे सशक्त माध्यम है  जिसे आज लोग अपना करियर बनाने में गर्व का अनुभव करने लगे हैं कि मैं हूं ब्लागर. बहुत लोग ऐसे हैं जो लम्बें समय से […]

GST बोले तो

GST बोले तो

GST बोले तो –  चाहे मीडिया हो या समाचार पत्र जीएसटी की खबरे ही खबरें सुनाई देती हैं पर हर कोई कंफ्यूज है कि आखिर होगा क्या  ?  क्या ये सही कदम है या  देशवासी दुखी ही रहें …  GST बोले तो Goods and Service Tax.  The full form of GST is Goods and Services Tax. […]

डर के आगे ही जीत है - डर दूर करने के तरीका ये भी

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन – Social Networking Sites aur Blog Writing –  Blog kya hai .कहां लिखें और अपना लिखा publish कैसे करे ? आप जानना चाहते हैं कि लिखने का शौक है लिखतें हैं पर पता नही उसे कहां पब्लिश करें … तो जहां तक पब्लिश करने की बात है तो सोशल मीडिया जिंदाबाद […]

  • Home
  • Blog
  • Articles
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Poems
  • Stories
  • Kids n Teens
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms of Use
  • Disclaimer
  • Anti Spam Policy
  • Copyright Act Notice

© Copyright 2024-25 · Monica gupta · All Rights Reserved