Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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June 16, 2015 By Monica Gupta

नारियल का फैसला – कैसे बचे बाबाओं से

naariyala-ka-faisala

नारियल का फैसला – ( बाल कहानी) टोने टोटके , पाखंड के खिलाफ पोल खोलती कहानी है नारियल का फैसला. भारतीय संस्कृति में नारियल को बहुत पवित्र माना जाता है… नारियल का फैसला क्या लिया ये जानने के लिए पढनी होगी कहानी

नारियल का फैसला – कैसे बचे बाबाओं से

आज दोपहर ही गांव से दादी अम्मा का तार आया है। उसमें लिखा था कि दादी बीमार है, तुरन्त चले आओ. तार पढ़ने के बाद मनोज के पापा का मन दफ्तर में नहीं लगा।

वह तुरन्त ही दो-तीन दिन की छुट्टी लेकर मनोज और अपनी पत्नी मनीषा के साथ गांव रवाना हो गए। रास्ते भर वह सोचते रहे कि अम्मा को शहर ले आएंगे। यहीं उनका इलाज करवाएंगे। तीन घंटे में वह गांव पहुंच गए।

वहाँ अड़ोसी-पड़ोसी इकटठे हुए थे। गांव की यही बात अच्छी है कि एक-दूसरे का सब बेहद ख्याल रखतें हैं। दादी के घर पहुंचे तो देखा, दादी बैठी हुर्इ थी। वह बहुत ही परेशान दिख रही थी। पापा ने उन्हें हाथ लगा कर देखा पर वह गर्म नहीं था।

मनोज के पापा ने राहत की साँस ली। दादी अम्मा के पड़ोसी छाछ ले आए। थोड़ा रूक कर मनोज के पापा ने पूछा, अम्मा बुखार कब उतरा?  अम्मा बोली बुखार तो था ही नहीं। पर अब चढ़ेगा। मनोज के पिता हैरान रह गए।

लेकिन वो तार भिजवाया था आपने ? पापा बोले। हाँ, भिजवाया तो था, तुझे जो बुलवाना था। इसलिए भिजवाना पड़ा। अम्मा रूआंसी होकर बोली। मनोज के साथ-साथ उसके मम्मी-पापा को दाल में कुछ काला लगा। उन्होंने पूछा, भर्इ, बताएं ना आखिर क्या बात है?

तभी गांव के सरपंच दीनू काका बोले, बेटे बात ये है कि हमारे गांव में एक साधु महाराज पधारे हैं और अम्मा भी उनके दर्शनों के लिए गर्इ थी। अब बात यह है कि किस व्यक्ति का  और किसके परिवार का भविष्य उज्ज्वल होता है ? यह सब बाबा एक नारियल देकर ज्ञात कर लेते हैं। क्या नारियल से?

मनोज के मम्मी-पापा ने उत्सुकता से पूछा। मनोज की मम्मी को भी ऐसे जादुर्इ बाबा के किस्से बहुत अच्छे लगते थे। तब दीनू काका ने बताया कि, बाबा एक नारियल लेने को कहते हैं। वहां बहुत से नारियल रखे होते हैं।

जिस नारियल को हम हाथ लगाते हैं, बाबा उसे खोलते हैं। अब अगर उसमें से फूल निकले तो उसका तथा  उसके परिवार का जीवन खुशहाल रहता है पर जिस नारियल में आग लग जाती है, उसके परिवार का नाश हो जाता है।

बस, अम्मा तीन बार से बाबा के पास नारियल दिखवाने जा रही है और हर बार नारियल में आग निकल रही है। अम्मा को वहम हो गया कि उनके परिवार पर जरूर मुसीबतें आने वाली हैं। इसलिए उन्होंने आप सभी को तार देकर बुलवाया है।

मनोज की मम्मी को चिंतित हो गर्इ पर मनोज समझदार बालक था। वह जिस विधालय में पढ़ता था, वहां उनको यह शिक्षा भी दी जाती थी कि ढ़ोंगी साधु कैसे भोली-भाली जनता को लूटते हैं, उसे पता था कि उस बाबा ने क्या पाखंड किया होगा।

अगले दिन मनोज और उसके मम्मी-पापा तथा दादी सब उसी दरबार में गए। मनोज ने कहा, इस बार नारियल वो ही उठाएगा। बाबा के दरबार में खूब भीड़ थी। गांव वाले बाबा पर खूब चढ़ावा चढ़ा रहे थे। चारों तरफ जबर्दस्त धूप की खुशबू फैली हुर्इ थी।

मनोज अपने साथ एक नारियल लेकर गया और बाबा से बोला, बाबा मेरा भविष्य बताइए। बाबा ने उसे ड़ांटा, मूर्ख, तू हमारा अपमान करता है, सिर्फ हमारे द्वारा रखे नारियल से ही भविष्य बताया जाएगा क्योंकि ये पूजा किए गए नारियल हैं। तब उसने अपना नारियल अपने पापा को दे दिया और बाबा द्वारा रखे नारियल में से एक नारियल उठा लिया। मनोज नारियल उठाते ही उसे सूंघने लगा।

अब बाबा कुछ सकपकाए। बोले, मूर्ख, नारियल क्यों सूंघता है? मनोज बोला, बाबा मैं परिवार की सुख-समृद्धि वाला नारियल चाहता हूँ। इसलिए आपको ऐसा ही नारियल सूंघ कर दूंगा, जिसमें हमारे परिवार का कल्याण हो।

भीड़ के सभी लोग सकते में आ गए। पूरी भीड़ में खामोशी सी छा गर्इ। बाबा भी कुछ परेशान हो गए। मनोज ने एक नारियल हाथ में लिया और बोला , बाबा, आप इसे खोलें , इसमें अवश्य ही फूल होंगें। बाबा ने उसे हाथ में लेकर पानी के कुछ छींटे देकर उसे पवित्र कर कुछ मंत्र पढ़े और जब उसे खोला तो उसमें फूल निकले।

क्यों, दादी माँ, अब तो कोर्इ बीमार नही पड़ेगा, देखो, अब फूल निकला है नारियल में।

बाबा को पोल खुलती नज़र आर्इ। उन्होंने शिष्यों से कहा कि आज उनकी तबियत ठीक नहीं है। अब वह दरबार कल सुबह लगाएंगे। लेकिन अब पासा पलट चुका था। बाबा को स्टेज पर जबर्दस्ती रोककर मनोज ने बताना शुरू कर किया, आमतौर पर साबुत नारियल के सिर पर तीन काली बिन्दी बनी होती है।

बस थोड़ी सी सावधानी से, इसमें से एक बिन्दी में छेद करके छोटी सी फूलों की 2या 3 कलियां नारियल में ड़ाल दी जाती हैं। करीब सात घण्टे पहले ही और फिर छेद को आराम से बंद कर दिया जाता है। ये तो बात रही कि नारियल में फूलों के निकलने की। अब बात बची है नारियल में आग लगने की।

तो होता यूं है कि नारियल के बालों या जटाओं में सोडियम के बहुत ही छोटे छोटे टुकड़े जो तेल से भिगो कर निकाले जाते हैंं। उन्हें इसमें छिपा कर रख देतें है और जब आप लोग नारियल चुन कर देतें हैं तो बाबा, उसमें जल छिड़क कर उसे शु़द्ध करते हैं, जो कि एक बहाना ही है।

असल में,  होता यह है कि केरोसिन युक्त सोडियम धातु पर पानी डलते ही वह जलने लगती है। बस, बाबा कह देते हैं कि परिवार पर कष्ट आएगा और वो भोली-भाली जनता से धन, गहने, जमीन आदि खूब ऐंठते हैं। क्यों बाबा, मैंने सब ठीक कहा ना। अगर कुछ भूल गया हूँ तो बता देंं।

मनोज ने अपनी बात पूरी की। बाबा सिर झुकाए बैठे रहे। उनकी पोल खुल चुकी थी। ये कुछ और नही बस जादू की ट्रिक्स ही थीं  उनके पास सारे गहने, रूपया, जमीन आदि वापिस करने के अलावा कोर्इ दूसरा रास्ता नहीं था। चारों तरफ मनोज की जय-जयकार होने लगी। दादी तो एकदम हक्की-बक्की सी बैठी ही रह गर्इ। वो बहुत खुश हुर्इ कि ढ़ोंगी को सबक मिल गया।

नारियल का फैसला

नारियल का फैसला

नारियल का फैसला कहानी आपको कैसी लगी … ???

Photo by YIM Hafiz

June 16, 2015 By Monica Gupta

Nature

Nature

 plant and sun photo

Nature  (poem)

एक तरफ
तपता सूरज
जलती धरा
मन बेचारा
अकेला पड़ा………बेसहारा
दूसरी ओर
नन्हा पौधा
गर्मी की मार
सह ना सका
और
पनपते ही कुम्हला गया
काश
मिल जाता
किसी का सहारा
या फिर शीतल धरा
और पनप जाता
पर……
वो चुपचाप…….खामोश सा
पड़ा रहा
मन भी ऐसा ही है
खामोश, चुपचाप
एकदम अलग-अलग
काश……..
मन कुछ कर सकता
झुलसते पौधे को देखकर
सहला सकता
तभी अचानक
रूक गए मेरे पानी पीते हाथ
उड़ेल दिया पानी
उस नन्हें पर
तब तक
सूरज की लौ
पड़ चुकी थी मद्धम
ठण्ड़े झोंको से
आने लगी उसमे जान
इधर………..
मुस्कुरा उठा मेरा मन
उधर….
जलती धरा भी
शांत हो गर्इ
अब……..
नन्हें को मिल गया था एक सहारा
शीतल धरा का
एक तरफ……….
प्रकृति खिलखिलार्इ
दूसरी तरफ……….
मन मुस्कुराया

Nature

June 16, 2015 By Monica Gupta

योग दिवस

cartoon Yoga diwas by monica gupta21 जून को योग दिवस मनाया जाएगा. सरकारी दफ्तर के सभी  कर्मचारी  इसी में जुटे हैं और कार्य शून्य …

| Zee News Hindi

नयी दिल्ली : सार्वजनिक प्रसारक दूरदर्शन ने राजपथ पर आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह का गणतंत्र दिवस समारोह जैसा कवरेज करने की योजना तैयार की है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शरीक होंगे।

सूत्रों ने बताया कि समारोह के कवरेज के लिए दूरदर्शन 20 हाईडेफिनिशन कैमरे लगाएगा। संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के तौर पर घोषित किया है। दो कैमरे इंडिया गेट के उपर लगाए जाएंगे और इंडिया गेट से विजय चौक तक के विहंगम दृश्य को दिखाने के लिए हाइड्रोलिक क्रेन पर कई कैमरे लगाए जाएंगे। ऐसा अनुमान है कि समारोह के दौरान योगासन करने के लिए रिकॉर्ड संख्या में लोग हिस्सा लेंगे। सूत्रों ने बताया कि करीब 18 कैमरे मुख्य मंच को कवर करेंगे और प्रस्तुतियों का पूरा कवरेज सुनिश्चित करेंगे।

इसके सीधे प्रसारण के लिए कई आउटडोर प्रसारक वाहनों को भी सेवा में रखा जाएगा। सूत्रों ने बताया है कि इसका कवरेज अंतरराष्ट्रीय मानक का हो यह सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक उपकरण का इस्तेमाल होगा।

समारोह के सीधे प्रसारण के लिए इंजीनियर, सिनेमेटोग्राफर और अन्य संबंधित विशेषज्ञों का एक विशेष दल ड्यूटी पर होगा। क्रू के ज्यादातर सदस्यों को स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, कॉमनवेल्थ खेल इत्यादि जैसे विशाल समारोहों के आउटडोर प्रोडक्शन का अनुभव हासिल है। | Zee News Hindi

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : देश-विदेश में समारोहों में हिस्सा लेंगे सरकार के वरिष्‍ठ मंत्री

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री देश-विदेश में समारोहों में हिस्सा लेंगे। बीजेपी ने भी सभी राज्य इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए कहा है। मगर ये नसीहत भी दी है कि इस मौक़े पर पार्टी का झंडा या चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने के बजाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोटो लगाया जाए।

सूत्रों के मुताबिक़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में राजपथ पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पटना में योग दिवस के कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज न्यूयार्क, वित्त मंत्री अरुण जेटली सैन फ्रांसिस्को और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला शिकागो के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे…..

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June 16, 2015 By Monica Gupta

स्वच्छता एक अहसास

स्वच्छता एक अहसास

sawacchta  book by monica gupta

स्वच्छता एक अहसास…

2009 में प्रकाशित हुई ये मेरी तीसरी किताब है. 56 पेज की है तो ये छोटी सी किताब पर इस किताब में आसाधारण गांव के लोगों की जागरुकता का वर्णन है कि कैसे मात्र 90 दिन में उनमें जागरुकता आई और हरियाणा के सिरसा के 333 गांवों को स्वच्छ बना दिया.

स्वच्छता एक अहसास

पुस्तक को लेकर आपके मन में ढ़ेरो सवाल उठ रहें होंगें कि आखिर इस पुस्तक के माध्यम से स्वच्छता का अहसास कैसे करवाया जा सकता है। सच पूछो तो, हम सभ्य समाज के सभ्य नागरिक हैं, पढे़- लिखे और समझदार भी हैं लेकिन सही मायनों में देखा जाए तो अनपढ़ और असभ्य की श्रेणी में आते हैं क्योंकि जिस समाज में हम रहतें हैं उसी को गंदा कर रहें हैं।

यहां बात भ्रष्टाचार की नहीं बलिक उस कूडे़- कर्कट की है जो हमारें चारों तरफ फैला है और कूडेदान एक तरफ खडे़- खडे़ गंदगी का मुँह ही ताकते रह जातें हैं और तो और सड़क के किनारें, दीवारों की ओट को शौचालय का रूप देकर दिन-रात गंदगी में इजाफा किया जा रहा है। सड़क पर चलते हुए थूकना और पूरी सड़क को कूडादान समझना आम बात है।

अगर यह पढ़े- लिखे सभ्य समाज को चित्रित करता है तो गाँव वालों को किस श्रेणी में रखेंगें क्योंकि वो तो वैसे भी अनपढ़, सीधे-साधारण गरीब, किसान और मज़दूर होतें हैं।
स्वच्छता एक अहसास
भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत गाँव वासियों की सोच में एक ऐसा बदलाव, ऐसी जागरूकता देखने को मिली जिसकी सपनें में भी कल्पना नहीं की जा सकती थी। बस, यहीं मुझे पुस्तक लिखने का मकसद मिल गया कि आज जो अहसास इन गाँव वासियों को हो रहा है उसकी महक उन लोगों तक भी पहुँचे जो अभी तक इससे अछूते हैं।

मैनें अपनी तरफ से पुस्तिका में स्वच्छता और उससे आए बदलाव के बारे में जानकारी देने की पूरी कोशिश की है और मुझे उम्मीद ही नही पूरा विश्वास है कि इसको पढ़ने के बाद आप भी और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में मदद करेंगें।

स्वच्छता एक अहसास  …

स्वच्छ भारत मिशन …

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) पंचायतीराज विभाग, भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना है जिसका पूर्व में नाम निर्मल भारत अभियान था। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के निम्न उद्देश्य हैं:-
1. ग्रामीण क्षेत्रों के सामान्य जीवन स्तर में सुधार लाना।
2. समस्त ग्राम पंचायतों को निर्मल एवं स्वच्छ बनाना।
3. ग्रामीण क्षेत्र के समस्त शासकीय विद्यालयों को स्वच्छता सुविधाओं (स्वच्छ स्कूल शौचालय जलापूर्ति सहित) से आच्छादित करना साथ ही छात्र-छात्राओं को स्वास्थ्य, शिक्षा एवं साफ-सफाई की आदतों को बढ़ावा देना।
4. ग्रामीण क्षेत्र के समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों को स्वच्छता सुविधाओं से आच्छादित करना।?
5. सामान्य पर्यावर्णीय स्वच्छता हेतु ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबन्धन अर्थात् कूड़े कचरे एवं बेकार पानी की उचित निकासी पर कार्य करना।
मानव मल एवं पर्यावरण में इधर-उधर पड़े कूड़े-कचरे एवं बेकार पानी के कारण विभिन्न प्रकार के रोग जैसे डायरिया, मलेरिया, कालरा, जापानी इन्सेफ्लाइटिस, पोलियो जैसी भयानक बीमारियों की रोकथाम हेतु, जल स्रोतों को सुरक्षित रखने हेतु, पर्यावर्णीय स्वच्छता हेतु यह योजना अत्यन्त आवश्यक है।हमारे प्रधान मंत्री जी द्वारा आरम्भ किया गया

महात्मा गांधी ने जिस भारत का सपना देखा था उसमें सिर्फ राजनैतिक आजादी ही नहीं थी, बल्कि एक स्वच्छ एवं विकसित देश की कल्पना भी थी। महात्मा गांधी ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर मां भारती को आजाद कराया। अब हमारा कर्त्तव्य है कि गंदगी को दूर करके भारत माता की सेवा करें। मैं शपथ लेता हूं कि मैं स्वयं स्वच्छता के प्रति सजग रहूंगा और उसके लिए समय दूंगा।

हर वर्ष 100 घंटे यानि हर सप्ताह 2 घंटे श्रमदान कर के स्वच्छता के इस संकल्प को चरितार्थ करूंगा। मैं न गंदगी करूंगा न किसी और को करने दूंगा। सबसे पहले मैं स्वयं से, मेरे परिवार से, मेरे मुहल्ले से, मेरे गांव से एवं मेरे कार्यस्थल से शुरुआत करूंगा।

मैं यह मानता हूं कि दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखते हैं उसका कारण यह है कि वहां के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं। इस विचार के साथ मैं गांव-गांव और गली-गली स्वच्छ भारत मिशन का प्रचार करूंगा। मैं आज जो शपथ ले रहा हूं, वह अन्य 100 व्यक्तियों से भी करवाऊंगा। वे भी मेरी तरह स्वच्छता के लिए 100 घंटे दें, इसके लिए प्रयास करूंगा। मुझे मालूम है कि स्वच्छता की तरफ बढ़ाया गया मेरा एक कदम पूरे भारत देश को स्वच्छ बनाने में मदद करेगा।

 

राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को अब घरों में शौचालय बनाना अनिवार्य कर दिया है.

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को अब घरों में शौचालय बनाना अनिवार्य होगा. सरकार से पचास हजार का कर्जा लेने वाले काश्तकारों के लिए भी कर्ज लेने के लिए इस शर्त को पूरा करना होगा.

राज्य सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत मार्च 2018 तक प्रदेश को खुले में शौच से मुक्त करने के अनूठे कार्यक्रम में ऐसी कई शर्तें जरूरी की गई है.

खास यह कि कर्मचारियों को 20 जून तक शर्त की पालना के लिए निर्धारित प्रपत्र में उद्घोषणा करनी होगी। इसके आधार पर ही उन्हें जुलाई माह में होने वाली वार्षिक वेतन वृद्धि, मानदेय,ऋण आदि स्वीकृत के लाभ दिए जाएंगे. इस कार्यक्रम की निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय कर रहा है. : , – Regional News – Samay Live

June 16, 2015 By Monica Gupta

मैं हूं कौन

व्य़ंग्य

मैं हूं कौन

अरे दीवानों … मुझे पहचानो … कहां से आया … मैं हूं कौन ???
मैं हूं कौन .. जी हाँ, क्या आप जानते हैं कि मै हूँ कौन …चलिए मैं हिंट देता हूँ .. सबसे पहले मै यह बता दूं कि मैं आम आदमी नही हूँ . मुझसे मिलने के लिए लोगो की भीड लगी रहती है पर मै जिला उपायुक्त नही हूँ. मेरे आगे पीछे 4-4 अंगरक्षक घूमते हैं पर मै पुलिस कप्तान भी नही हूँ .मेरे पीछे दिन रात जनता पडी रहती है पर मै कोई स्वामी जी या कही का महाराज भी नही हूँ. मेरे बच्चे स्कूल मे प्रथम आते हैं और सभी स्कूल के प्रोग्रामो मे हिस्सा लेते हैं सारा स्टाफ मेरा सम्मान करता है पर मै स्कूल का प्रिसीपल भी नही हूँ.
जिले मे कोई भी कार्यक्रम होता है तो मुझे जरुर बुलाया जाता है . मेरे साथ फोटो खिचवाई जाती है. रिबन कट्वाया जाता है ताली बजा कर स्वागत किया जाता है मेरी बातो को समाचार पत्र मे मुख्य स्थान दिया जाता है पर मै किसी समाचार पत्र का सम्पादक भी नही हूं. मेरे पास सभी खास अफसरो के फोन आते रहते है या मै जब भी फोन करता हू तो वो तुरंत पहचान जाते हैं और मुझे और मेरे परिवार को भोजन पर बुलाते हैं. मुझे देख कर कौन कितना जला भुना या कितना खुश हुआ मैं सब जानता हूँ.

फिर  मैं हूं कौन…..

 

spoon  photo

 

आप सोच रहे होगें कि मैं यकीनन ही कोई पागल हूं जो ऐसे ही बात किए जा रहा है तो जनाब, मै बताता हू कि मै कौन हूँ . मै हूँ “चमचा” एक दम चालू चक्रम चमचा .लोगो की चापलूसी करने मे सबसे आगे .थूक कर चाट्ने मे सबसे आगे . शहर मे कौन बडा अफसर है कौन नेता है उनकी पत्नी, बच्चे और तो और उनके कुतॆ का नाम उसकी पसंद ना पसंद सभी मुझे पता है . सभी को खुश रखना मेरा परम धर्म है तभी तो लोग मुझे फोन करके मुझसे मिलने को बैचेन रहते हैं क्योकि वो जानते है कि मै ही उनके काम करवा सकता हूँ.
मै भी महान हूँ पता है जब मेरा मन होता है तब फोन उठाता हूँ

जब मन नही होता तब फोन उठाता ही नही चाहे कितनी घंटी बजती रहे. मै जानता हूँ कि जिसने मेरे पास चक्कर लगाने है वो तो लगाएगा ही चाहे घंटो ही इंतजार ही क्यो ना करना पडे
ना सिर्फ बडे लोगो से बलिक मीडिया से भी मै बना कर रखता हूँ. समय समय पर मैं प्रैस कांफ्रैस करता रहता हूँ ताकि वो सैट रहे. लोगो के काम के लिए लंबी कतार मेरे घर या दफतर मे कभी भी देखी जा सकती है . पता है मै गिरगिट की तरह रंग बदलने मे माहिर हूँ.

कल जो मेरा जानी दुश्मन था आज वो मेरे साथ बैठ कर चाय पी रहा होता है.या आज मै जिसके संग चाय पी रहा हू वो कल मेरा जानी दुश्मन बन सकता है काम निकलवाने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ किसी भी हद तक जा सकता हूँ. बस अधिकारी लोग खुश रहने चाहिए.

ये चमचागिरि मुझे अपने बडो से विरासत मे नही मिली बलिक समय और हालात को देखते हुए मुझे सीखनी पडी .मै जानता हूँ कि भले ही लोग मुझे पीठ पीछे गाली देते होगें मुझे अकडू की उपाधि भी दे दी होगी पर मुझे कोई असर नही. मै आज जो भी हूँ बहुत खुश हूँ.
तो दोस्तो, अगर आप भी खुश रहना चाहते हैं तो एक बार चमचागिरी के मैदान मे आ जाओ यकीन मानो एक बार समय तो लगेगा, अजीब भी लगेगा पर कुछ समय बाद आपको खुद ही अच्छा लगने लगेगा.
सच पूछो तो आज का समय शराफत, महेनत और ईमानदारी का नही है क्योकि उनकी कोई कद्र ही नही है या ये कहे कि सबसे ज्यादा पिसता ही शरीफ आदमी है इसलिए तो मुझे भी चमचागिरी को अपनाना पडा. तो अगर आप सुखी रहना चाहते है अपने सारे काम भी निकलवाना चाहते हैं तो बनावट और दिखावे की दुनिया मे आपका स्वागत है बिना देरी किए तुरंत आए और अधिक जानकारी के लिए शहर के किसी भी बडे अफसर से आप मेरा पता पूछ सकते हैं….

मैं हूं कौन…..

June 16, 2015 By Monica Gupta

छुट्टियों की न करें छुट्टी

छुट्टियों की न करें छुट्टी ..
छुट्टी का नाम लेते ही चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ जाती है और अगर यही छुट्टियाँ महीने की हो तो.. बस फिर तो कहना ही क्या. अब गर्मी आ गई है और ये लाई है ढेर सारी छुट्टियाँ .
पूरी मौज मस्ती, आराम, नेट, पिक्च्चर,फोन, मोबाईल, मैसेज, दोस्त और भी ना जाने क्या क्या.

 

cartoon smile by monica guptaछुट्टियों की न करें छुट्टी
सच बात है, पर इस बात मे भी कोई दो राय नही कि जहाँ छुट्टियो मे बच्चो के चेहरे खुशी से चमक जाते हैं वही दूसरी ओर घर मे मम्मी का तनाव भी थोडा सा बढ जाता है.खासकर उनका जो गृहणी हैं क्योकि अपनी दिनचर्या मे तो वो सुबह बच्चो, बडो को स्कूल,कालिज और दफ्तर भेज कर कुछ पल अपने भी आराम के निकाल लेती थी टीवी देख लिया,फोन पर गप्पे लगा ली पर अब चौबीसो धंटे की धमा चौकडी मे आराम कहाँ.
छुट्टियो मे, बच्चो का एक छ्त्र राज हो जाता है. सुबह उठने का समय अजी मतलब ही नही कि समय पर उठ जाए और नाश्ता ले लें. 10 बजे तक तो सोना ही होता है जिसकी वजह से घर मे ना सफाई ढंग से हो पाती है और ना ही झाड पोछ और घर बिखरा बिखरा सा ही लगता है ऐसे मे मम्मी लोग का पारा चढना स्वाभाविक ही होता है. नाश्ते का समय सही नही हुआ तो लंच के समय की भी छुट्टी हुई समझो. और फिर उपर से बच्चो की फरमाईश कि ये खाना है वो खाना है यहाँ जाना है वहाँ जाना है. फिर बच्चो के दोस्त भी कम नही होते और अगर छुट्टियो मे मेहमान ना आए तो छुट्टी लगती ही नही. उफ …!!!!
और एक बात कि अगर घर मे एक बच्चे की छुट्टी हो और दूसरे बडे बच्चे की परीक्षा चल रही हो तो एक मस्ती और दूसरा pin drop silence चाहता है ऐसे मे आप सोच सकते है कि घर मे जबरदस्त तनाव का माहौल बन जाता है.
ऐसे मे आप छुट्टी की छुट्टी ना होने दें यानि घर पर अपने बडे से या मम्मी लोग से पूरा सहयोग करके चले.  धमाल,हल्ला गुल्ला शोर शराबा सब करें पर limit मे रह कर ही करें ना करने पर आपको सुबह सुबह से ही जो डांट पडनी शुरु होगी तो सारा दिन आपका भी कोप भवन मे बीतेगा और सभी सदस्यो को भी तनाव झेलना पड सकता है.

सभी का मूड off हो जाए तो वाकई मे छुट्टी की छुट्टी ना हो जाए घर पर कहना मान कर मिलजुल कर रहना पडेगा. मेहमान के आने पर बजाय खुद भी बैठ कर आर्डर करने के घर मे मदद करवाए .कभी मम्मी के लिए खुद उठ कर कुछ काम करे. और समय मिलने पर आराम से बैठ कर उनकी मदद ले ताकि आपका होमवर्क समय पर पूरा हो सके.
सबसे ज्यादा जरुरी बात ये है कि छुट्टियो मे summer camp या कोई भी hobby class join करें अपनी छुट्टी को व्यर्थ ना जाने दें. कुछ ना कुछ रचनात्मक जरुर ही करें.
अब आप यही कहेगे कि इतनी मुश्किल से तो छुट्टियाँ मिली है तो इसमे भी काम. पर यह काम आपकी आगे आने वाली जिंदगी मे बहुत काम आएगा इस बात का तो पक्का यकीन है और कौन सा आपको पूरा दिन ही उस काम मे लगे रहना है मुश्किल से एक या दो धंटे का होगा उस के बाद तो पूरा दिन आपका है आप जैसा चाहे उस का फायदा उठाए और अगर बिलकुल भी कुछ करने का मन नही है तो भी एक अच्छे बच्चे की तरह घर पर रहे या जहाँ भी रहने जाए वहाँ इतनी अच्छी प्रकार से रहे कि सभी आपके वापिस जाने के बाद आपको याद करे ना कि कन्नी काटे.
यकीनन काम मुशकिल जरुर है पर नामुमकिन नही है अगर आप प्यार देगे तो आपको प्यार ही मिलेगा वो भी ढेर सारा. इसलिए छुट्टियो मे खूब सारा enjoy करें और छुट्टी की छुट्टी ना होने दें.
जाते जाते एक चुटकुला …
एक बच्चा मच्छर उडना सीख रहा था. जब पहली बार उडा और लोगो के बीच मे पहुचां तो बहुत खुश हुआ और वापिस आकर अपने मम्मी पापा को बताया कि लोग तो मुझसे बहुत खुश हैं. मै जहाँ भी गया उन्होने मेरा स्वागत तालियाँ बजाकर कर किया ….

छुट्टियों की न करें छुट्टी

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