किसान रैली बरसात क्या आई मानों किसानों की जिंदगी मॆ ग्रहण सा लग गया. फसले तबाह हो गई और किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए. लेकिन नेता अपनी अपनी पार्टी का राग आलाप रहे हैं कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस तो कभी आप पार्टी स्वयं को किसान का हितैषी बता रहे हैं पर उनका दुख दर्द कोई नही समझ रहा.. बस किसान रैली में सभी दल राजनीति कर रहे है और किसने कैसा भाषण दिया इस पर लगातार चर्चा हो रही है अफसोस !!! ऐसे मे पृथ्वी दिवस की शुभकामनाए कैसे दें किसानों को …
शुभ यात्रा
आपकी यात्रा शुभ हो !! शुभ यात्रा जी … अभी आए नही है … अच्छे दिन आने वाले हैं … बस चलते रहिए … चलते रहिए और चलते रहिए … कभी न कभी आ ही जाएगे… आपकी यात्रा शुभ हो 🙂
Modi One Year
‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ का नारा देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए थे। एक साल के दौरान उन्होंने 18 विदेश दौरे किए। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई तो पेट्राेल-डीजल सस्ता हुआ। लेकिन फरवरी के बाद कीमतें फिर बढ़ने लगीं। मोदी का चीन दौरा खत्म होते-होते सोशल मीडिया पर उनका जादू भी कमजोर पड़ता दिखा। 26 मई को मोदी सरकार के एक साल पूरे होने के मौके पर dainikbhaskar.com आपको बता रहा है कि अच्छे दिन की कोशिश में मोदी कहां चूके और कहां तारीफ पाई?
Expert View : मोदी के पास अब देने को ज्यादा कुछ नहीं – राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन का मानना है कि पिछले एक साल में मोदी सरकार को लेकर जनता के उत्साह में कमी आई है। अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की तुलना में मोदी के पास अब देने के लिए बहुत कुछ नहीं है। सरकार अब पब्लिसिटी को ज्यादा तव्वजो दे रही है। लेकिन मोदी के पास खुद का उत्साह बचा है। उसमें कमी आती है तो यह चिंता की बात होगी। जहां तक स्वच्छ भारत अभियान, बीमा योजना, जन धन योजना की बात है तो ये हल्के कार्यक्रम हैं। इनके जरिए राजनीतिक-सामाजिक स्तर पर प्रभाव नहीं डाला जा सकता। – ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के चेयरमैन पी.
भट्टाचार्य का कहना है कि फिलहाल महंगाई काबू में है। अच्छे दिन हैं या नहीं, इसका पता मानसून के बाद चलेगा, क्योंकि इस बार अलनीनो का असर रह सकता है। कच्चे तेल के दाम बढ़े तो भी महंगाई बढ़ेगी। – अंतरराष्ट्रीय संबंध मामलों के जानकार पुष्पेश पंत का कहना है कि मोदी सरकार की विदेश नीति की कई लोग आलोचना कर रहे हैं, लेकिन मैं मानता हूं कि उनकी विदेश नीति काफी संतुलित रही है। मोदी की सभी 18 विदेश यात्राएं सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थीं। विदेश नीति में एक-एक कदम काफी सूझबूझ के साथ उठाया गया। See more…
कछुआ चाल है … अभी तो पहला साल है आप चलते रहिए …आपकी यात्रा शुभ हो !! अभी आए नही है … अच्छे दिन आने वाले हैं … बस चलते रहिए … चलते रहिए और चलते रहिए … कभी न कभी आ ही जाएगे… आपकी यात्रा शुभ हो 🙂
Cartoon Kissan
Cartoon Kissan
अपना हाथ ही जगन्नाथ
कभी मोदी जी तो कभी राहुल… उफ ये राजनीति !!! किसानों की बदहाली पर ठीकरा एक दूसरे पर फोडते नजर आते हैं मुसीबत के मारे किसानों ने अलग अलग रैलियां भी कर ली, धरने भी दे दिए और तस्वीरे भी खिंचवा ली पर नतीजा शून्य अब किसान को समझ आ गया है कि दुबारा हल ही लेना पडेगा और जमीन नए सिरे से जोतनी पडेगी … किसी भी राजनीति दल की इच्छा ही नही कि वो किसानो का कल्याण करे.. और रही बात मीडिया की …वो बेचारी तो अपने टीआरपी मे ही उलझी हुई है
Cartoon Kissan
पहचान
पहचान (कविता)
नन्हू की चाची
दिव्या की मौसी
गीता की ताई
नीरु की आंटी
जमुना की बाई जी
दीप की भाभी
लीना की देवरानी
रानो की जेठानी
सासू माँ की बहू रानी
माँ की मोना
पति की सुनती हो
रामू की बीबी जी
मणि की मम्मी
इन नामो से मेरी
पहचान कही गुम हो गई
एक दिन
आईने के आगे
खुद को जानने की कोशिश की
तो
मुस्कुरा दिया आईना
और बोला
मेरी नजरो मे ना तुम
चाची हो ना ताई
ना भाभी हो ना बाई
बस
तुम सिर्फ तुम हो
सादगी की मूरत
दयालुता की प्रतीक
प्रेम की देवी
ईश्वर का प्रतिबिम्ब
बस …
तभी से अपने पास
आईना रखने लगी हूं
ताकि पहचान धुंधलाने पर
उसके अक्स मे खुद को जान सकू
पहचान सकू….
कि मैं भी कुछ हूं
कि मैं भी कुछ हूं ….( पहचान )
जी में आता है
जी में आता है … (कविता)
जी में आता है
ये बदल दू
वो बदल दूं
कुछ ऐसा लिखू
कि मच जाए हलचल
सुप्त समाज मे भर दूं नव चेतना
भर दू रंग इस बेरंग दुनिया में
अंधियारी गलियो मे भर दूं नई रोशनी
फिर
अनायास ही ठिठक जाती हूं
क्योंकि
मैं भी उसी समाज का हिस्सा हूं
कौन देगा मौका
कौन सुनेगा बात
ना रुपया ना सिफारिश मेरे पास
मेरी कलम कैसे कह पाएगी अपने दिल की बात
फिर बैठे बैठे जी भर आया
अपनी लिखी कविता को फिर दिल से लगाया …
जी में आता है…. कविता कैसी लगी ? जरुर बताईएगा !!!
इतवारी धूप

इतवारी धूप ( कविता)
रोजमर्रा की भाग दौड में
अक्सर धूप नजर नही आती
पर
मेरे घर का है एक कोना
जंहा से इतवारी धूप छ्न छ्न कर है आती
उस कोने मे
किरणे
अपने कणो से अठखेलियां है करती
रिझाती, उलझाती, सहलाती
और
अपनी तपिश से
नई स्फूर्ति जगाती
खिला खिला रहता है
सर्द इतवारी धूप से वो कोना
क्योकि
रोजमर्रा की भागदौड में
अक्सर वो नजर नही आता ….!!!
इतवारी धूप
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