Difficult Spouse से कैसे deal करें… इतना आसान नहीं है जिंदगी का हर किरदार निभाना… इंसान को बिखरना पड़ता है कुछ रिश्ते समेटने के लिए… बहुत सारे कमेंट्स और मैसेज इसी बारे में आते हैं कि क्या करें कई बहुत helpless feel करते हैं हम दोनों ना एक छ्त के नीचे रह सकते हैं ना ही छोड़ सकते है क्या करें… ??
जैसे वाईफ लिखती हैं कि घर की मेरी या बच्चों की तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं देते, टीवी या दोस्त ही प्रिय हैं कुछ बोलू तो गुस्सा करते हैं चिल्लाने लगते हैं बात बात पर ताना देते हैं.. कुछ का कहना है कि गाली गलौच या हाथ तक भी उठा देते हैं.वही पति बोलते हैं कभी घर में रहती ही नहीं.. सारा दिन शॉपिंग या किट्टी पार्टी या पडोसन के साथ बैठे रहना.. घर की तरफ कोई ध्यान नहीं… मेरे माता पिता को अपना कभी नहीं समझती हमेशा अपने कमरे में ही बैठी रहती है…
अब ऐसे में क्या करें बहुत helpless feel करते हैं ना एक छ्त के नीचे रह सकते हैं ना ही छोड सकते है क्या करें… ??
तो मैं उनसे कुछ बातें शेयर कर रही हूं… आप चाहे पति हैं या पत्नी.. ये बातें आप दोनो पर लागू होती हैं…क्या सबसे पहले शांत रहें.. दिमाग को रिलेक्स करें.. शांत पानी में ठहरे हुए पानी में ही हम अपनी रिफ्लेशन देख पाते हैं.. वही अगर पानी उबल रहा हो तो हम उसमे अपना रिफ्लेशन नहीं देख पाएगें.. इसलिए सबसे जरुरी हैं एक बार शांत रह्ना और शांत होकर सोचना.. बेशक एक दिन एक्ट्रा लग जाए पर खुद को शांत रखना ही होगा..
सोचना ये हैं कि इस तरह से जो ये हो रहा है पति कर रहे हैं या पत्नी कर रही हैं कारण है क्या… जड तक जाना है.. जैसे पति बात बात पर चिडते हैं पहले तो ऐसा नहीं था क्या कोई ऑफिस की दिक्कत है या फाईनेंशली प्रोब्लम है या किसी से कोई बात हुई है… वाईफ को बात बात पर गुस्सा आता है तो हुआ क्या ऐसा पहले तो नहीं था तो… क्या सेहत ठीक है.. बीपी की दिक्कत तो नहीं या खून तो कम नहीं… लेडीज के साथ भी सौ तरह की परेशानी हो सकती हैं तो गहराई से सोचिए और स्पोर्ट बनिए.. उस प्रोब्लम को दूर करना है और उन्हें ये भी बताना है कि कोई बात नहीं ये तो लाईफ का एक हिस्सा है… This Too shall pass.. हम मिलकर सामना करेंगे…
यानि अब माईंड सेट पॉजिटिव रखना है अगर प्रोब्लम पता लग गई तो उसे दूर करने का प्रयास करना है नहीं पता लगी तो बातचीत से पता लगाना है पर माईड सेट पोजिटिव ही रखना है एक बार कोशिश करनी है कि सम्बंध बेहतर बन सकें… क्योंकि हम हमने सोच ही रखा होगा कि मुझे क्या ?? मुझे कोई फर्क नहीं पडता… होने दो जो हो रहा है अच्छा ही है फल मिलना ही चाहिए.. नहीं ये नहीं.. एक बार बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए.. कहानी शुरु होते ही द एंड नहीं कीजिए…कर दिया… लडाई झगडे, टेंशन तो हर परिवार में होते हैं कोई बात नहीं.. मैं एक ट्राई खुद को देते हैं… रिश्ते को track पर लाने का प्रयास करते हैं और करनी है बातचीत…
अच्छा जब बातचीत करें तो अपना होमवर्क कर ले कि क्या बात करनी है.. प्लान बना लें कि ये ये बातें हैं और मैंने करनी हैं.. कई बार बातचीत शुरु हो गई कि जो जरुरी बात करनी थी वो तो रह ही गई… इसलिए और जब बातचीत करें तो आराम से रिस्पेक्ट से कोई टोंट करके या व्यंग्य करके नहीं… संवाद ही विवाद मिटाने की शक्ति रखता है…
बातचीत तक करें जब पार्टनर भी मैंटली फ्री हों जैसे कि सुबह सुबह ऑफिस जाने की जल्दी है और तब बात शुरु कर दी या दो दिन से बच्चे को बुखार है वाईफ का पूरा ध्यान बच्चे की ओर है और पति ने उस समय बात करने शुरु कर दी.. वो बेचारी पहले ही बहुत परेशान है तो जब मैंटली फ्री हो तब बात कीजिए.. बेशक पहले ही पूछ लीजिए कि आपसे कुछ बात करनी है कब हो सकती है
जब बातचीत के लिए साथ बैठे तो संयम रखते हुए बात शुरु करनी हैं जैसा कि मैं कुछ दिन से देख रही हूं कि आप मुझ से गुस्सा हैं क्या कोई मेरी गलती हुई… किस बात से आप नाराज हैं… और जब लगे कि उधर से सही रिपॉसन मिल रहा है तो अपनी बातें क्लीयर करते जाईए…
एक ना कभी भी दूसरे से तुलना नहीं कीजिए.. मेरी एक जानकार थी वो जब भी घर आती हमेशा अपने पड़ोसी की तारीफ करती कि वो बहुत ही अच्छा कपल है बहुत प्यार से रहते हैं उनकी वाईफ को बच्चा होने वाला था तो 6 महीने पत्नी की छोटी बहन को बुला लिया और बहुत केयर करते.. जब बेबी हुआ और वो उनके घर गई तो क्या देखा पत्नी की जिस बहन को घर बुला लिया था उसी से कोर्ट मैरिज कर ली.. तब उसे लगा कि उसकी सोच बहुत गलत थी…
और अगर हमें लग रहा है कि ये सब कर के देख लिया और छोड तो सकते नहीं.. तो खुद को बिजी रखिए किसी ना क्रिएटिव काम में.. कई बार हम बहुत ज्यादा पोजेसिव हो जाते हैं तो ये बात भी कही न कही नुकसान करती है जैसे सारा समय बस उन्ही के बारे में ही सोचेग़ी… वो अपने मम्मी पाप से भी नहीं ज्यादा बात कर सकते बस सारा समय मेरे साथ ही रहे.. तो खुद को बिजी रखिए और ये सोचिए कि किसी के बेटे भी हैं वही पति भी पत्नी को जोब नहीं करने देना चहते तो वो ये सोचे की इसकी भी कोई फीलिंग हैं ये भी कुछ बनना चाहती हैं सपने हैं इसके भी…
तो ऐसे में अगर बाहर जाने की परमिशन नहीं है तो घर पर रह कर ही बहुत कुछ क्रिएटिव किया जा सकता है… खुद को बिजी रखा जा सकता है.मन बिजी रहेगा तो उस तरफ ध्यान कम जाएगा… काम कर लीजिए या बच्चों की देखभाल बहुत अच्छे से कीजिए ताकि जो प्रोब्लम आपने फेस की वो बच्चे न करें.. बच्चों को अच्छे संस्कार दीजिए
और अगर इन सबके बाद लगता है कि नहीं अब कुछ नहीं हो सकता अब साथ रहना सम्भव ही नहीं… फिर आपको आगे बढ जाना चाहिए पर ये भी सोचना चाहिए कि कैसे होगा.. कहां रहेगें, इंकम का क्या सोर्स होगा कहीं किसी पर बोझ तो नहीं बन जाएगें.. बहुत सोच समझ कर कदम उठाना है हो सके तो अपने बहुत अच्छे मित्र से, बडे बुजुर्ग से या काऊंसलर से सलाह लेकर ही कदम उठाए…
रिश्ते निभाना हर किसी के बस की बात नहीं
अपना दिल भी दुखाना पडता है किसी और की खुशी के लिए
इतना आसान नहीं है जिंदगी का हर किरदार निभाना…
इंसान को बिखरना पडता है कुछ रिश्ते समेटने के लिए…
रिश्ते निभना उतना ही आसान है जितना मिट्टे से मिट्टी पर मिट्टी लिखना और निभाना उतना ही मुश्किल है जितना पानी से पानी पर पानी लिखना



