Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 6, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

आकर्षक व्यक्तित्व – कुछ टिप्स

जब कोई बात बिगड़ जाये तो रहें बी पॉजिटिव
ऑडियो मोनिका गुप्ता

आकर्षक व्यक्तित्व

 

https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2016/08/audio-confidence-by-monica-gupta.wav

 

आकर्षक व्यक्तित्व – कुछ टिप्स

क्लिक करिए और सुनिए मेरी आवाज में  2 मिनट 13 सैकिंड का  audio. आकर्षक व्यक्तित्व – कुछ टिप्स.

How to become more beautiful.  अकसर हम  अपने व्यक्तित्व  को आकर्षक बनाना चाहते हैं पर tips नही पता कि   how to make our Personality attractive… अगर आप भी जानना चाहतें हैं तो जरुर सुनिए ये ऑडियो

मोनिका गुप्ता का नमस्कार !! कल मैने अपने कुछ दोस्तो से पूछा कि हम आकर्षक बनें लोगो की नजरों में आए उसके लिए क्या करना चाहिए. कुछ ने कहा कि महंगे कपडे पहनने चाहिए तो कुछ ने कहा कि बढिया सा perfume लगा लेना चाहिए एक अन्य सहेली बोली कि simple है ब्यूटी पार्लर जाओ सुंदर बन कर बाहर आओ.

बेशक, उनकी बातें गलत नही हैं पर मेरे विचार से अपना व्यक्तित्व आकर्षक और खूबसूरत बनाने के और भी सिम्पल उपाय हैं जैसाकि

कम बोलना , अच्छा बोलना और ज्यादा से ज्यादा सुनने में विश्वास रखना, जिसमे जो भी अच्छी बात लगे उसे सराहना यानि appriceate करना… बात बात पर उनका मनोबल encourage  बढाना पर अपनी प्रशंसा कि मैं ये हूं मैं वो कर सकता हूं उसे न के बराबर कहना क्योकि अहंकारी लोगों को कोई पसंद नही करता.

बात करते हुए शिष्टाचार यानि manners रखना और यही कोशिश करना कि किसी की बुराई न हो क्योकि इससे इम्प्रेशन impression अच्छा नही पडता.

हम जो हैं वही बने रहना. कई बार हम दूसरों की नकल करके वैसा बनने की कोशिश करते हैं ये भी सही नही है दूसरे से सीखने की कोशिश जरुर करनी चाहिए पर नकल नही… जैसा कि मान लीजिए किसी हिरोईन की ड्रेस देख कर हमारा मन कर जाता है कि हम भी वैसा ही पहने. पर यह भूल जाते हैं कि हमारी और उस हीरोईन की फीगर figure  बहुत अलग है इसलिए अकसर मजाक का कारण भी बन जाते हैं..

या कई बार हम इतना perfume लगा लेते हैं कि चलती फिरती perfume की दुकान की उपाधि हमें मिल जाती है,.

जरुरत है अपनी  natural smile ,, अपनी पोजिटिव  positive सोच ,अपना कोंफिडेंस confidence , अपनी नॉलिज knowledge हमेशा अपडेट रखने की  ताकि जो भी हमसे बात करे बस हम से इम्प्रैस impress हो जाए.

और सबसे ज्यादा जरुरी बात कि फिट fit  रहें हैल्दी healthy  रहें… हैल्दी रहेंगें तो मन खुश रहेगा मन खुश रहेगा तो विचार अच्छे आएगे और अगर अच्छे विचार आएगें तो  वैसे विचार से मुझे भी याद आया

एक खूबसूरत विचार  एक अच्छी किताब सौ दोस्तों के बराबर होती है पर एक अच्छा उत्साहित करने वाला दोस्त तो पूरी की पूरी लाईब्रेरी ही होता है

इसलिए उत्साहित करते रहिए   मुस्कुराते रहिए कल फिर मिलूंगी एक नए कोफिडेंस के ओह मेरा मतलब topic के साथ तब तक बाय बाय

बीमार का हाल अच्छा है – Monica Gupta

एक बार मेरी Facebook dost  जब अपनी बीमारी की बात फेसबुक पर लिखी तो कमेंटस की भरमार लग गई उसी  शाम को जब वो मुझे मार्किट मे मिली तो मैने तबियत पूछी कि कैसी है तो बोली कौन सी तबियत … वो तो बस कमेंटस के लिए … थोडा चेंज के लिए लिख दिया … हे भगवान वैसे चेंज से याद आया कि चेंजिंग वेदर है मौसम कभी गर्मी तो कभी बरसात का है  बदलते मौसम में  कोई मित्र, रिश्तेदार, जानकार या परिवार का कोई न कोई व्यक्ति जरुर बीमार है… ऐसे में मिलना भी जरुरी हो जाता है पर मिलने से पहले कुछ बातें जरुर ध्यान रखना चाहिए… Read more…

 

 

 

 

 

July 30, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

वजन नियंत्रित करने की टिप्स – How to Control Weight

डाइट – वजन नियंत्रित करने की टिप्स

वजन नियंत्रित करने की टिप्स – वजन कम  या maintain करने के कुछ आसान उपाय –  diet-weight-loss-control-tips – आमतौर पर हम डाइट या वजन नियंत्रित करने की टिप्स ही खोजते रहते हैं . कुछ diet control tips –  healthy dieting tips  हमें सही भी मिल जाती है पर डाइट – वजन नियंत्रित करने की टिप्स क्या हो ? क्या खाए क्या न खाए जिससे हमारा वजन काबू में रहे.

वजन नियंत्रित करने की टिप्स

How to Maintain our weight.. some helpful tips डाइट – वजन नियंत्रित करने की टिप्स क्या होनी चाहिए वैसे हम जिम जाकर या अन्य तरीके अपना कर अपना वजन कम तो कर लेते है पर उसे नियंत्रण में नही रख पाते और जिम छोडते ही या सैर करना छोडते ही दुबारा अपने पहले वाले वजन पर आ जाते है. शरीर फिर भारी हो जाता है वजन बढना शुरु हो जाता है

diet photo

आज एक जानकार घर आई हुई थी. थोडी मोटी लग रही थी. मुझे याद है पिछ्ली बार जब हम मिले थे वो बहुत स्लिम slim हो गई थी पर अब उनका वजन बढ गया. मेरी पूछ्ने पर उन्होनें बताया कि पहले जिम नियमित जाती थी पर अब जब से छोडा है वजन बढ गया.

असल में, हम वजन कम या ज्यादा तो कर लेते हैं पर उसे मैनेटेन maitain कैसे करे यह सबसे बडा प्रश्न है पर मुश्किल भी नही …ध्यान देने वाली बात सिर्फ इतनी है कि जितनी कैलोरी हमने ली है उतनी ही burn करें..

चाहे हैल्दी खाना खाकर या कसरत करके ये हमारे ऊपर है. वैसे इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए …

टिप्स

वजन मापने वाली मशीन पर नियमित वजन देखते रहे. ताकि आपको पता चलता रहे कि किस गति से वजन कम या ज्यादा हो रहा है.

घर का बना खाना ही खाना चाहिए. असल में, बाहर का खाना आकर्षित तो बहुत करता है पर उसमें प्रयुक्त धी, तेल, वसा हमारे शरीर को मोटापा दे सकता  है.

कोशिश करनी चाहिए कि सलाद ज्यादा से ज्यादा खाया जाए.. वैसे कच्ची सब्जी या फल खाना सदा ही सेहत के लिए सही रहता है.

दुकान पर हमेशा लेबल देख कर ही खरीदे. जिसमे वसा कम हो. हम अक्सर ज़ीरो केलोस्ट्रोल देख कर खुश हो जाते हैं और सोचते हैं कि यही खाना है हमारे लिए पर हमें यह भी याद रखना चाहिए कि कोलेस्ट्रोल केवल प्राणी वसा मांस, मछली, दूध एवं दूध दूध से बने उत्पादों में पाया जाता है किसी भी वनस्पति वसा में कोलेस्ट्रोल नहीं होता।

सोयाबीन,सूरजमुखी व सल्फ़र आदि के विज्ञापनों में कहा गया है कि उन तेलों में जीरो कोलेस्ट्रोल है. तथ्य यह है कि सभी वनस्पति तेल जीरो कोलेस्ट्रोल वाले ही होतें है। मूंगफली, तिल व सरसों तेल में भी कोलेस्ट्रोल नही होता.

कई बार किसी पैकेट पर लिखा होता है ज़ीरो शूगर पर हम अन्य बात पढना भूल जाते है मान लिजिए  उसमे बेशक शूगर ज़ीरो है पर वसा और कोको उसका क्या.. इसलिए पैकेट बंद लेबल देख कर खरीदें.

प्रयास करें कि वही खरीदें जो पौष्टिकता लिए हुए हों जैसे मूसली ओटस, वीट बरैन, ओट बरैन, फ्लेक्स सूजी, सेवियां सेहत के लिए बहुत अच्छे हैं. दूध को डबल टोन कर देना चाहिए ताकि वसा की गुंजाईश ही न रहे.. रात को धी या नमक का सेवन कम हो और डिनर करते ही नही सो जाना है.

अक्सर व्यस्त रहने के चक्कर में हम जल्दी बनने वाला रेडीमेट खाना खरीद लेते हैं पर कुछ डाईट ऐसी भी हैं जो बहुत जल्दी भी बनती हैं और हैल्दी भी होती है जैसा कि दूध दलिया, दाल दलिया, इडली, डोकला, उपमा, चिडवा या वरमेसिली यानि सेविया… !! इसे जरुर ट्राई करते रहिए.

कभी कभार पार्टी आदि में अगर ज्यादा खाया भी जाए तो कोई बात नही अगले एक दो दिन में आप फिर से वजन नियंत्रण में ला सकते हैं पर ये भी नही करना चाहिए कि नाश्ता न करें या खाना स्किप कर दें ये बिल्कुल सही नही है बल्कि वजन बढने का मुख्य कारण ही होगा.

कई बार हमारी सोच होती है कि जिम जाकर या महंगें उपकरण खरीद कर ही वजन काबू में रखा जा सकता है जबकि योगा करके, पैदल चलकर या कसरत करके भी वजन नियत्रित रखा जा सकता है.बस इच्छाशक्ति चाहिए होती है बस …

अकसर हमे टीवी या अखबारों के विज्ञापन भी बहुत मिस गाईड करते हैं इसलिए अगर वो बिल्कुल सही और पुख्ता हैं तभी ले अन्यथा सीधा साधारण खान पान हमें बेहतर जिंदगी देता है

बातें तो बहुत हैं पर जरुरी हमारी सोच की है अगर हम वाकई में करना चाहते हैं तो कर सकते हैं अपने वजन पर काबू अन्यथा  ….

हेल्थ टिप्स – पहला सुख निरोगी काया – Monica Gupta

अंकुरित अनाज सेहत के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। यह पोषक एवं जीवंत आहार माना जाता है। यह तुरंत शरीर को ताकत व ऊर्जा देता है।  अंकुरित करने से अनाजों की पौष्टिकता बढ़ जाती है। मसलन सूखे बीजों में विटामिन ‘सी’ की मात्रा लगभग नहीं के बराबर होती है। इन बीजों के अंकुरित होने पर यही मात्रा लगभग दस गुना हो जाती है।  फाइबर से भरपूर अंकुरित अनाज  को आसानी से पचाया जा सकता है। इसे खाने से पेट संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं और पाचन तंत्र मजबूत बनता है। और सबसे मजेदार बात तो ये हा कि इसे किसी भा मौसम में खाया जा सकता है। read more at onlymyhealth.com read more at monicagupta.info

 

अगर आपके पास भी कोई टिप्स हों तो जरुर बताईएगा …

 

July 21, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

पोकीमॉन गो, पोकेमॉन गो या Pokemon Go

pokemon go photo

पोकीमॉन गो, पोकेमॉन गो या Pokemon Go

प्लीज गो …. पहले कान में ईयरफोन लगा कर संंगीत लगा कर, सडक पर  चलने पर तीव्र आलोचना हुआ करती थी कि ये सडक  दुर्धटना का निमंंत्रण देता है तो अब पोकीमॉन गो को क्या कहेंगें समझ से बाहर है…

मुम्बई में मैनें अपनी सहेली को फोन किया तो उसके बेटे ने फोन उठाया बोला…. आंटी, थोडी देर बाद करना मम्मी का फोन मेरे पास है और वो घर  पोकीमॉन गो खेलने बाहर आया हुआ है …

वैसे घर पर बैठ कर वीडियो गेम खेलने की बात तो समझ आती थी पर अब ये  पोकीमॉन गो  … बाहर सडकों पर , पार्क में, और भी अलग अलग न जाने कितने लैंड मार्क पर … !!!

जितना मैने समझा है एक गम्भीर समस्या  लगी…. पहली समस्या तो एप का डाऊनलोड करना क्योकि जितना मैने पढा है कि एप डाऊनलोड करते ही वायरस का हमला हो सकता है नेट पर इस आर्टिकल को सर्च करने के दौरान भी मैं कुछ आर्टिकल से दो चार हुई जहां इसे बहुत बडी समस्या बताया है पर हैरानी इस बात की भी हुई कि आर्टिकल के अंत में और बहुत बाते लिखी थी कि इस गेम को फ्री डाऊनलोड कैसे करें या फ्री टीशर्ट पाए … हे भगवान !!

सोचा कि इस बारे में जो खेल रहे हैं उनसे बात की जाए तो एक ने बोला बहुत मजेदार है तो दूसरा बोला आप भी खेलिए अच्छा लगेगा ये ज्यादातर मंदिर के पास होते हैं तो इसी बहाने भगवान के दर्शन भी कर लेता हूं इसलिए घर पर दादी भी खुश है… पर कुछ दिनों से अखबारों की खबर की पोकीमॉन खोजते हुए दुर्धटना  या इसे खोजते हुए एक लाश मिली …

खबरों का बाजार भी गर्म है… पहले कान में संंगीत लगा कर, सडक पर  चलने पर तीव्र आलोचना हुआ करती थी कि ये सडक  दुर्धटना का निमंंत्रण देता है तो अब पोकीमॉन गो को क्या कहेंगें समझ से बाहर है…

 

Popular game Pokemon Go claims its first victim – Navbharat Times

पोकेमॉन गो की वजह से पहली मौत, घर में घुसने पर टीनेजर को मारी गोली पोकेमॉन गो खेलने के चक्कर में हुए हादसों की खबरें दुनिया के कई हिस्सों से आती रही हैं, मगर इस गेम की वजह से मौत का पहला मामला सामने आया है। पोकेमॉन गो खेलते वक्त एक घर में घुसने पर एक टीनेजर को गोली मार दी गई। यह घटना ग्वाटेमाला की है। read more at navbharattimes.indiatimes.com

 

पोकीमॉन गो गाइड /  Pokemon Go guide in Hindi |

पोकीमॉन Pokemon go क्या है? पोकीमॉन गो / जीओ कैसे खेलें? नीचे दिए गए गाइड में आपके सभी बारंबार पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर हैं जिनको पढ़कर आप भी पोकीमॉन (पोकीमोन या पॉकीमोन या पॉकीमॉन या पोकीमान?) गेम गुरु बन सकते हैं. read more at raviratlami.blogspot.in

 

 

Photo by Wootang01

October 5, 2015 By Monica Gupta

बीफ

बीफ

कार्टून  बीफ ( मोनिका गुप्ता )

कार्टून बीफ ( मोनिका गुप्ता )

बीफ

जिस तरह से बीफ की खबर ब्रीफ में दिखाई जा रही है … दिल बैठा जा रहा है. चाहे न्यूज चैनल हो या नेता सब अपनी अपनी टीआरअपी  बढाने में जुटे है और बेचारी गौ माता पूरी तरह से घबराई हुई है …

 

  ABP News

सवाल उठता है कि क्या बीफ और गौ मांस एक ही शब्द है या फिर इसके जो मायने लगाये जा रहे हैं वो गलत हैं. अगर ठेठ अंग्रेजी संदर्भ में देखें, तो कैंब्रिज डिक्शनरी के मुताबिक बीफ का मतलब होता है मवेशी यानी गाय का मांस. वैसे भी अगर वैश्विक संदर्भ में देखें, तो बीफ को गाय, बैल, सांढ़, बछड़े या बछिया के मांस को परिभाषित करने के लिए ही उपयोग में लाया जाता है. ऐसे में भारत से बड़े पैमाने पर बीफ का निर्यात कैसे होता है, जिसका हवाला दे रहे हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और इसी बहाने हमला कर रहे हैं केंद्र की सरकार पर और उसके अगुआ मोदी पर, ये याद दिलाते हुए कि लोकसभा चुनावों के पहले मोदी खुद पिंक रिवोल्यूशन के नाम पर यूपीए की तत्कालीन सरकार पर हमला बोल चुके हैं.

दरअसल जब भारत में हम बीफ शब्द का इस्तेमाल करते हैं और खास तौर पर निर्यात के संदर्भ में, तो इसका मतलब गाय, बैल, सांढ, बछिया या बछड़े के मांस के निर्यात से नहीं होता, बल्कि इसका अर्थ होता है भैंस के निर्यात से. इस तथ्य की तरफ इशारा खुद केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री निर्मला सीतारामन ने भी एक प्रेस कांफ्रेंस कर किया. सीतारामन के मुताबिक, भारत से गाय, बैल, सांढ, बछिया या बछड़े के मांस का निर्यात नहीं होता, बल्कि भैंस के मांस का निर्यात होता है. इसी भैंस के निर्यात को आम आदमी तो ठीक, खुद मीडिया भी बीफ एक्सपोर्ट कह देता है, जिसका अर्थ ये लगा लिया जाता है कि भारत से गौ मांस का निर्यात होता है. अगर हम विविध राज्यों के कानूनों को देखें, तो कुछ राज्यों को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में गौ हत्या पर प्रतिबंध है. ऐसे में भला गौ मांस का निर्यात कैसे हो सकता है. यहां तक कि भैंसों के मांस का जो निर्यात होता है, उसमें उनकी हड्डियां तक नहीं होती हैं, सिर्फ और सिर्फ बोनलेस भैंस मांस का निर्यात होता है. Read more…

October 2, 2015 By Monica Gupta

रक्तदाता और सफलता की कहानी

 

r saini kuk

r saini kuk

 

रक्तदाता और सफलता की कहानी

अगर बात हो निस्वार्थ स्वैच्छिक रक्तदान की तो हरियाणा के राजेन्द्र सैनी का नाम आगे आता है.

हरियाणा के जिला  कुरुक्षेत्र में रक्तदान से सम्बंधित एक कार्यक्रम चल रहा था. स्टेज पर जो भी वक्ता आ रहे थे सभी राजेंद्र सैनी का धन्यवाद और आभार प्रकट कर रहे थे कि आज रक्तदान के क्षेत्र मे रक्तदाता या कैम्प आयोजक या प्रेरक वो जो भी कुछ  है  सब राजेंद सैनी जी  की वजह से हैं.सभी के मुंह से यह बात सुनकर एक उत्सुकता सी बनी हुई थी कि आखिर सैनी जी है कौन  क़िस तरह का काम कर रहे हैं. खैर मीटिंग खत्म हुई और मुझे मौका मिला. सैनी साहब से बात करने का.

न्यू पिंच ने बदल दी दुनिया

1 जून 1962 को पुंडरी मे जन्मे राजेंद्र सैनी आज पूरी तरह से रक्तदान केप्रति समर्पित है. इतना ही नही इनके  परिवार  परिवार म्रे बेटा और बेटी भी रक्तदाता है. मेरे पूछ्ने पर कि रक्तदान के प्रति ऐसी प्रेरणा कब आई तो उन्होने बताया सन 1998 मे रक्तदान मे मीटिंग के दौरान  एक बार उन्होने श्री युद्दबीर सिह ख्यालिया को सुना और रक्तदान के बारे मे उनकी बाते सुनकर उनकी सोच बदली और उन्होने मन ही मन प्रण किया कि वो भी रक्तदान करेंगें. बाकि तो सब ठीक था बस एक ही जरा सी अडचन थी कि उन्हे सूई से डर लगता था. हालाकिं वो बच्चो या बडो को रक्तदान के प्रति जागरुक करते रहते थे कि सूई से जरा भी डर नही लगता पर खुद सूई फोबिया से बाहर नही निकल पा रहे थे.

एक दिन एक कैम्प के दौरान मन बना पर फिर डर गए और सोचा कि किसी लैब मे ही जाकर चुपचाप रक्तदान करके आंऊगा क्योकि अगर यहां  रक्तदान कैम्प मे वो रक्तदान करते समय डर के मारे चिल्ला पडे तो दूसरे लोग उनके बारे मे क्या सोचेगें पर शायद उस दिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था. डाक्टर ने उनकी भावनाओ को समझा और उन्हे बातो मे लगा कर उन्हे लिटाया और  सूई लगा दी. जब रक्तदान करके वो उठे  तो नई स्फूर्ति का उनके अंदर संचार हो रहा था, उस समय का अनुभव बताया कि दर्द तो महज इतना ही हुआ जितना  कोई नई कमीज पहनता है और उसके दोस्त उसे न्यू पिंच बोलते. 

दूसरे शब्दो मे यह न्यू पिंच ही था जिसने एक नई दिशा दी और वो और भी ज्यादा विश्वास से भर कर लोगो को रक्तदान के प्रति जागरुक करने मे जुट गए. तब का दिन है और आज का दिन है. आज सैनी जी 49 बार रक्तदान कर चुके हैं और न्यू पिंच से प्यार हो गया है. उन्होने बताया कि रक्तदान मे अर्धशतक तो लग चुका है पर  बस अब वो  शतक लगना चाहते हैं. उन्होने बताया कि लोगो को प्रेरित करना और वो प्रेरित हुए  लोग  आगे लोगो को प्रेरित करके मुहिम जारी रखे तो एक सकून सा मिलता है. बहुत अच्छा लगता है. जब  एक दीए से दूसरा दीया जगमग करता है तो दिल को खुशी मिलती है जिसका बयान शब्दो मे नही किया जा सकता.

अपनी बिटिया श्वेता के बारे मे उन्होने बताया कि जब उनकी बिटिया पहली बार रक्तदान के लिए गई तो डाक्टर ने बोला कि वजन कम है  वो रक्तदान कर  नही पाएगी. इस पर वो काफी मायूस हो गए पर आधे धटे बाद जब देखा तो वो रक्तदान करके बाहर आ रही थी इस पर जब उन्होने हैरानी जाहिर की तो श्वेता ने बताया कि उसने 5-6 केले खा लिए थे और रक्तदान कर के आई है. उसके चेहरे से जो खुशी झलक  रही थी वो आज भी भुलाए नही भूलती.

मैने जब उनसे पूछा कि कार्यक्रम के दौरान जब सभी उनका नाम ले कर सम्बोधितकर रहे थे तो वो कैसा महसूस कर रहे थे इस पर वो बोले कि खुशी तो हो रही थी एक नया संचार सा शरीर मे भर  रहा था पर दूसरी तरफ अच्छा भी नही लग रहा था. कारण पूछ्ने पर उन्होने बताया कि कही दर्शक यह ना सोचे कि मैंने  ही उन्हे कहा है कि  मेरे बारे मे भी जरुर कहना. उनकी बात सुनकर मै मंद मंदमुस्कुरा उठी क्योकि मैने खुद सुना कि लोग पीठ पीछे भी उनकी तारीफ कर रहेथे. आखिर नेक काम की अच्छाई तो छुपाए नही छिप सकती.

आज रक्तदान के क्षेत्र मे हरियाणा के  राजेंद् सैनी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. पीजीआई रोहतक से उन्हे कैम्प आयोजक रुप मे दो बार सम्मान मिल चुका है और फस्ट एड ट्रैनर यानि प्राथमिक चिकित्सक ट्रैनर  व रक्तदाता के रुप मे वो महा महिम बाबू परमानंद, डाक्टर किदवई और श्री धनिक लाल मंडल से सम्मानित हो चुके है. राजेंद्र सैनी  दिन रात इसी उधेड बुन मे रहते है  कि किस तरहलोगो को जागरुक करे और उन्हे मोटिवेटर बनाए ताकि वो इसका संदेश आगे औरआगे फैलाते रहें. भले ही राजेंद्र सैनी आज 52 साल के हो चुके हैं पर खुद को वो नौजवान ही मानते है उनका कहना है कि रक्तदाता कभी बूढा नही होता वो हमेशा जवान ही बना रहता है.उनकी भाषा मे ‘ तो आप न्यू पिंच कब करवा रहे हैं”  !!!!

हमारी ढेर सारी शुभकामनाएं !!! 

रक्तदाता और सफलता की कहानी

 

October 2, 2015 By Monica Gupta

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस

आईएसबीटीआई ( मोनिका गुप्ता)

 

 

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस की हार्दिक शुभकामनाऎं…

 खुशी का विषय यह है कि आईएसबीटीआई यानि इंडियन सोसाईटी आफ ब्लड ट्रांसफ्यूजनएंड इमयोनोहीमेटोलोजी  ने ही इस दिवस की शुरुआत सन 1976 में की थी.  आईएसबीटीआई पिछ्ले चालीस सालों से रक्तदान से जुडी गैर सरकारी संस्था है और स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र  मे अभूतपूर्व कार्य कर रही है. स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति पूरी तरह समर्पित आईएसबीटीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. युद्द्बीर सिह खयालिया एक ही दृष्टि कोण  लेकर चल रहें  हैं  कि जनता में स्वैच्छिक  रक्तदान के प्रति इतनी जागरुकता आ जाए कि सुरक्षित रक्त मरीज की इंतजार करे  ना मरीज रक्त की. डाक्टर ख्यालिया का  मानना है कि इसके लिए शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान की भावना का होना बेहद जरुरी है और ऐसी जागरुकता जन जन मे कैसे लाई जाए. अपने इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आईएसबीटीआई दिन रात कार्यरत है. इन्ही सब बातों को ध्यान मे रखते हुए  जगह जगह ट्रैंनिग करवाई जाती है. स्कूल कालिजो मे क्विज, पोस्टर बनाना तथा अन्य माध्यमों से जागरुकता लाई जाती  है. भिन्न भिन्न रक्तदान के  खास अवसरो पर जैसाकि विश्व रक्तदान दिवस, स्वैच्छिक रक्तदान दिवस आदि कुछ  खास दिनों में प्रतियोगिताए भी आयोजित करवाई जाती  है.

 रक्तदान से जुडे होने के कारण अक्सर मेरे पास भी रक्त की जरुरत के लिए फोन आते रहते हैं.यथा सम्भव मदद करने की कोशिश तो करती हूं पर जहां तक हमारी पहुंच ही नही है वहां मदद करना या किसी को कहना बहुत मुश्किल हो जाता है. दिल्ली में डाक्टर संगीता पाठक Sangeeta Pathak, सोनू सिह  Sonu Singh Bais , राजेंद्र माहेश्वरी (भीलवाडा, राजस्थान) मंजुल पालीवाल, रोहतक हरियाणा से , मुम्बई से दीपक शुक्ला जी,  ब्लड कनेक्ट की पूरी टीम नई दिल्ली से और चंडीगढ में डाक्टर रवनीत कौर को जब भी मैंने वक्त बेवक्त फोन किया  और रक्त  की जरुरत के बारे मे बताया तो उन्होनें तुरंत एक्शन लिया और एक ही बात कही कि चिंता नही करो आप उन्हे मेरा नम्बर दे दो. कोई फिक्र नही. परेशानी मे पडे एक अंजान के लिए ऐसी बात कहना बहुत बडी बात है. मैं उनका अक्सर खुले लफ्जों में और कई बार दिल ही दिल मॆ बहुत धन्यवाद करती हूं और फिर विचार आता है कि क्यों ना ऐसे शानदार और समर्पित व्यक्तित्व पूरे देश भर में हो. हमारे पास देश भर में कही से भी फोन आए. हम किसी को रक्त की कमी से न मरने दे.

अगर डाक्टर या ब्लड बैंक से जुडे लोग हों तो बहुत बेहतर है या फिर कोई ऐसे जो स्वैच्छिक रक्तदान से जुडे हों और समाज के लिए निस्वार्थ भाव से कुछ करना चाहते हों. उनका स्वागत है. यह बात पक्की है कि आपके सहयोग के बिना यह कार्य सम्भव नही है और यह बात भी पक्की है कि इस लक्ष्य को हम जीत सकते हैं. अगर आप ऐसे किसी भी व्यक्ति को जानते हैं या आप खुद ही हैं तो नेक काम मे आगें आए. अपना नाम और पता monica.isbti [at]gmail.com पर भेज दीजिए….. !!!!

आईएसबीटीआई ( मोनिका गुप्ता)

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