Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 2, 2015 By Monica Gupta

नया साल और संकल्प

satire by monica gupta

satire by monica gupta

 

( व्यंग्य )

नया साल और संकल्प

 

उफ्फ …!!! आखिरकार नए साल मे मैने क्या संकल्प लेना है सोच ही लिया .अब आपसे क्या छिपाना …हर साल जब भी नवम्बर समाप्त होने लगता और दिसम्बर जी का आगमन होता. मन मे अजीब सी बैचेनी करवट लेने लगती कि नए साल मे नया क्या क्या करना है और क्या क्या नही करना है.बस इसी उधेड बुन मे पूरा समय निकल जाता पर भगवान का लाख लाख शुक्र है कि इस साल यह नौबत ही नही आई और समय से पहले ही डिसाईड हो गया.

पता है, पिछ्ले साल मैने यह सोचा था कि सच बोलना शुरु कर दूगी. अरे नही.. नही … आप गलत समझ गए.असल मै, वैसे मै, झूठ नही बोलती पर ना जाने क्यू टीवी पर सच का सामना देख कर डर सी गई थी इसलिए बोल्ड होकर यह निर्णय लिया कि यह आईडिया ड्राप.फिर सोचा था कि कुछ भी हो जाए पतली हो कर दिखाऊगी पर पर पर .. सर्दियो के महीने मे ऐसा विचार मन मे लाना जरा मुश्किल हो जाता है.सरदी की गुनगुनी धूप हो,रजाई हो और गर्मा गर्म पराठे हो और उस तैरता और पिधलता मखन्न.मन भी पिधलना शुरु हो जाता अब ऐसे मे भला खाने पर कैसे ब्रेक लग सकती है.चलो इसे भी सिरे से नकार कर यह सोचा कि सुबह शाम की सैर ही शुरु कर दी जाए. इस पर तुरत अमल करना भी शुरु कर दिया था पर दो ही दिन मे यह मिशन फेल होता सा प्रतीत हुआ. असल मे , ऊबड खाबड सडके, सडको पर मस्ती मे धूमते आवारा बैल,और गंदगी के ढेर के साथ साथ सीवर के ढक्कन गायब.अब बताईए ऐसे मे हाथ पैर तुडवाने से अच्छा है कि कुछ और सोचा जाए.

वैसे सोचा तो मैने यह भी था कि नए साल मे किसी पर गुस्सा नही करुगी.चेहरे पर स्माईल रखूगीं. पिछ्ले साल 31 की रात सबसे यही कह कर सोई कि सभी 1 जनवरी को सुबह सुबह मंदिर चलेगे .मै तो सुबह सुबह तैयार हो गई पर कोई सुबह उठने को तैयार ही नही था. मुस्कुराते मुस्कुराते उठाती रही पर रात को देर से सोने के चक्कर मे सभी गहरी नींद मे थे. इतने मे काम वाली बाई आ गई. उसे पता नही क्या हुआ. बर्तनो को जोर जोर से शोर करते हुए धोने लगी .एक तो देर से आई ऊपर से मुहं बना रखा था इसने. मैने खुद को संयत किया कि मोनिका स्माईल … कंट्रोल कर… कहती हुई ताजा हवा लेने के लिए खिडकी पर जा खडी हुई कि अचानक मेरी नजर पडोसियो की नई चमचमाती कार पर पडी शायद कल ही के लर आए थे.बस आगे आपको बताने की जरुर नही कि ….. !!!!

इस साल भी यही विचार चल रहा था कि नए साल मे क्या संकल्प लिया जाए कि पूरा भी किया जा सके. घर के एक बडे बुजुर्ग ने सुझाया कि हम लोगो को तीर्थ यात्रा करवा दिया करो हर चार महीने मे एक बार. पुण्य मिलेगा.बात जमी नही और मै बच्चो के कमरे मे गई तो बच्चे कहते कि छोडो मम्मी… हर महीने हमे पिक्चर और पिकनिक पर ले जाया करो.काम वाली बाई भी कहा पीछे रहने वाली थी बोली कि मेरी पगार बढा दो और छुट्टी भी बढा दो. बाहर निकली तो ये बोले कि तुम फुलके पतले नही बनाती जरा श्रीमति ऋतु से सीख लो इतने पतले,मुलायम और गोल गोल चपाती बनाती है और कृष्णामूति से डोसा बनाना भी सीख लो … खश्बू से ही मुहं मे पानी आ जाता है.वो बात कर ही रहे थे कि इतने मे मेरी सहेली मणि का फोन आ गया उसने राय दी कि दो चार किट्टी पार्टी ज्वायन कर ले. थोडी सी चालाक बन बहुत भोली है तू.!!! अगले साल ही तुझे सोसाईटी की सैकट्ररी ना बनवा दिया तो मेरा नाम मणि नही!! मैने कोई बहाना कर के तुरंत फोन रख दिया.उफ्फ !!!किस की सुनू किस की ना सुनूं… देखा कितना टेंशन था.

 

अब आपको भी टेंशन हो रही होगी कि आखिर इस साल मैने क्या सकंल्प लिया है. तो सुनिए … पिछ्ले दो तीन सालो के अनुभव को देखते हुए… बहुत सोच विचार के मै इस नतीजे पर पहुंची हूँ कि चाहे कुछ भी जाए बस बहुत हुआ. अब और नही इसलिए इस साल … इस साल … इस साल … नए साल के लिए कोई सकंल्प ही नही लूगी.इसलिए मै खुश हू और बहुत ही खुश हूं ..

कैसा लगा आपको ये व्यंग्य     नया साल और संकल्प   जरुर बताईगा 🙂

दैनिक भास्कर की मधुरिमा मे प्रकाशित

April 22, 2015 By Monica Gupta

Match Fixing

Match Fixing

मैने भी की मैच फिक्सिंग    (व्यंग्य)

क्षमा करें !!! पर माथे पर इतने बल डालने की आवश्यकता नही. मैने कोई गुनाह या कोई डाका नही डाला कि आप मैच फिक्स के नाम से इतना तुनक रहे हैं. अब समाज मे रहते हैं तो जरुरते भी होती है. कुछ काम ऐसे भी होते है जिन्हे निभाना पडता है.बस वही किया है मैने कोई दुनिया से हट कर नही किया ये काम सभी करते है. हां, वो बात है कि कोई चोरी छिपे करता है तो कोई … वैसे मुझे इस बात का कतई दुख नही है कि यह काम मैने चोरी छिपे किया.

cartoon-tihar jail

असल में, जमाना बहुत खराब है किसी को मेरे इस Match Fixing की भनक लग जाती तो बहुत बडी मुश्किल खडी हो जाती. इसलिए बस मैने परम प्रिय नेताजी को अपना हमराज बनाया और नेशनल हाईवे के ढाबे पर मीटिंग फिक्स की. मीटिंग के लिए नेता जी की कडी हिदायत थी कि खास खास लोग ही होने चाहिए.वैसे आपसे क्या छिपाना ऐसा करने से लेन देन की बाते आराम से हो जाती है.
सब कुछ आराम से हो गया. देखते ही देखते मैच फिक्स हो गया. जगह भी फिक्स हो गई कि कहाँ पर दुबारा मिलना है और किसे आना है.यकीन मानिए मेरे परिवार मे सभी बहुत ज्यादा खुश है खासकर कि मेरा बेटा वही चाह्ता था कि मै इस सीजन में मैच फिक्स कर ही दूं शायद उसके दोस्तों के पिता ने भी … खैर !!!
मैं तो नेता जी का धन्यवाद करना चाहूगां कि उन्होने इसे फिक्स करवाने मे बहुत जोर लगाया. मै इसकी कीमत शायद कभी भी नही चुका पाऊगा. अरे… आप कहां चले. क्या ? पुलिस को बताने. अरे, इसमे बताने की क्या बात है वो भी थे उस दिन. रसगुल्ले का डिब्बा दिया था मैने सभी को.
माफ करें!! फोन आ रहा है शायद पंडित जी का है. मुहुर्त निकलवाना है ना. अब आप फिर से हैरान हो गए. अरे भई, बच्चो का मैच फिक्स किया है अब शुभ मुहुर्त देख कर शादी की तारीख भी तो फिक्स करनी है या नही. लो कर लो बात !!! मै बात से क्यू पलटूगा. मैने क्या गलत कहां. वैसे एक मिनट… एक मिनट… आप सोच क्या रहे हैं जरा पता तो चले. क्या किकेट वाला मैच फिक्स?? जैसाकि बडे बडे क्रिकेटर या दूसरे लोग करते हैं.. ह हा हा …
अजी नही.वो तो कुछ दिन पहले एक लडकी देखी थी. बस पसंद आ गई.घर बार भी भला था. शरीफ से लोग है बस उसी से Match Fixing की बात हो रही थी. अब नेता जी समझ लिजिए कि बिचौलिया और अच्छे दोस्त है तो उन्होने पूरा साथ दिया और पहले बात ना फैले इसलिए गुपचुप तरीके से हाईवे पर दोनो को मिलवा दिया था और बहुत जल्दी ही सब कुछ फाईनल हो गया. ओह .. अब समझ आया कि आरम्भ मे Match Fixing की बात सुन कर आपने माथे पर बल क्यो डाल दिए थे. हे भगवान!!! आप भी ना ….. !!!!

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