Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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May 25, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छ भारत अभियान और हमारी सोच

स्वच्छ भारत अभियान और हमारी सोच

स्वच्छ भारत अभियान और हमारी सोच- swachh bharat abhiyan aur hamari soch – स्वच्छता के नारे हो या स्लोगन  . हम अपनी जिंदगी में इसे कितना अपना रहे हैं ? क्या ये सिर्फ सरकार का ही काम है या हमें भी इसमें काम करना होगा अगर स्वच्छ भारत चाहिए तो ??

स्वच्छ भारत अभियान और हमारी सोच

सबसे पहले तो आपका बहुत सारा thanks  कि आप share your knowledge वाली  video न सिर्फ देख रहे हैं बल्कि मैसेज के माध्यम से appreciate  भी कर रहे हैं …

कल एक मैसेज आया और वो बोली कि वो भी share करेंगी knowledge उन्होने topic decide  कर लिया है मैंने उनसे topic पूछा तो उन्होनें बोला कि स्वच्छता को लेकर वो बहुत ज्यादा प्रेरित हैं  लो गो में जागरुकता , स्वच्छता के नारे से शुरुआत करुगी और बीच बीच मे slogan competition  भी करवाऊगी … ताकि जागरुकता आए … वाकई … ये बहुत अच्छा प्रयास रहेगा …सोसाईटी के साथ साथ  लोगो की लाईफ में भी पोजीटिव असर डालेगा …मैं बहुत खुश कि वीडियो देख कर लोगो में जागरुकता आ रही है और वो शेयर करना चाहते हैं…

 

 

वैसे जहां तक स्वच्छता की बात है तो एक समय था जब मुझे भी स्वच्छ्ता की जानकारी नही थी …

बात 2007 की है तब मैं सिरसा से ज़ी न्यूज की रिपोर्टर थी और हमारे शहर में स्वच्छता अभियान शुरु हुआ और इस विश्वास के साथ हुआ कि 90 दिन में पूरा जिला स्वच्छ बना देंगें …

 

स्वच्छ भारत अभियान और हमारी सोच

मैं न्यूज कवर करने गई कि ऐसे कैसे सम्भव है पर जब मैंने देखा कि जिला प्रशासन , ADC , किस तरह से लोगो को स्वच्छता को लेकर मोटिवेट कर रहें हैं और स्वच्छता कितनी जरुरी है तो मैं भी इस अभियान से जुड गई तब हमारे 333 गावों  में से 260 के करीब गावों को राष्ट्रपति से सम्मान मिला था मैं इतना जुड गई थी कि मैंने दो किताबें भी लिख डाली थी ..

स्वच्छ भारत अभियान और हमारी सोच

एक स्वच्छता एक अहसास और दूसरी जय स्वच्छता … कडी से कडी ऐसे ही जुडती है इसलिए मैं कहती हूं कि अपनी नॉलिज शेयर करनी चाहिए ऐसी नॉलिज हो जो समाज पर पॉजिटिव असर डाले पता नही किसकी जिंदगी में कितना बदलाव ले आए …  वैसे आपने क्या सोचा है … टोपिक ऐसा हो जो लोगो की जिंदगी में सकारात्मक  असर डाले

 

सफाई अभियान पर नारे – Monica Gupta

स्वच्छता के प्रति कैसे बदलें लोगो की मानसिकता बेशक, गली गली में सफाई अभियान पर नारे लगाए जा रहें हैं स्वच्छता की गूंज है. मन की बात में हो , देश के मंत्री ह सफाई अभियान पर नारे – Monica Gupta

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स्वच्छ भारत अभियान और हमारी सोच

December 26, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छता की आवश्यकता को समझना होगा

 Art of Public Speaking in Hindi

स्वच्छता की आवश्यकता को समझना होगा  – बैंको की लम्बी कतार तो हम सभी ने देखी और झेली है पर कूडा डालने के लिए भी कतार है ? ये कहां और किसलिए ? जनता को स्वच्छ्ता के प्रति उत्साहित करने का शानदार तरीका. कूडा मशीन में डालो और ईनाम पाओ …

रिवर्स वेंडिंग मशीन की सार्थकता …

स्वच्छता की आवश्यकता को समझना होगा – एक सार्थक पहल

बैंको की लम्बी कतार तो हम सभी ने देखी और झेली है पर कूडा डालने के लिए भी कतार है ???? ये कहां और किसलिए ???

खबर है नई दिल्ली नगर पालिका की उन्होने पालिका बाजार में एक मशीन लगाई है मशीन का नाम है रिवर्स वेंडिंग मशीन जो हम प्लास्टिक बोतल की बोतल और केन पर सडक पर ऐसे ही पीकर फेंक देते हैं अगर वो सामान को हम उस रिवर्स वेंडिंग मशीन में डालेगें तो 5 रुपये से 50 रुपये तक के उपहार , वाई फाई, पैन दायरी कूपन आदि मिलेगे… है ना एक एक शानदार पहल है फिलहाल ये मशीन दिल्ली पालिका बाजार में लगी है और बहुत जल्द बहुत जगह लगाई जाएगी
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जनता को स्वच्छ्ता के प्रति उत्साहित करने का शानदार तरीका -एक सार्थक पहल , स्वच्छता की परिभाषा

 

स्वच्छता की आवश्यकता को समझना होगा

मार्किट में एक महिला दुकानदार से लड रही थी वजह थी कि  उन्होनें पॉलीथीन नही रखे हुए थे पेपर बैग हैं … इस पर वो महिला गुस्सा कर रही थी कि पॉलीथीन रखने चाहिए आसानी रहती है … दुकानदार  ने बोला भी कि हम पर्यावरण स्वच्छ रखने मे सहयोग कर रहे हैं इसलिए .. वैसे आप खरीद सकती हैं पर उसने खरीदा नही …

हम ऐसे ही हैं सचेत और जागरुक नाम की कोई चीज ही नही … तो कैसे आएगी जागरुकता …

आज यही सर्च कर रही थी तभी एक खबर ने मेरा ध्यान  आकर्षित किया और मेरे मुंह से निकला वाह !! खबर है नई दिल्ली नगर पालिका की उन्होने पालिका बाजार में एक मशीन लगाई है

मशीन का नाम है रिवर्स वेंडिंग मशीन जो हम  प्लास्टिक बोतल की बोतल और केन पर सडक पर ऐसे ही पीकर फेंक देते हैं अगर वो सामान को हम उस रिवर्स वेंडिंग मशीन में डालेगें तो 5 रुपये से 50 रुपये तक के उपहार , वाई फाई, पैन दायरी कूपन आदि मिलेगे..

. है ना एक एक शानदार  पहल है फिलहाल ये मशीन दिल्ली पालिका बाजार में लगी है और बहुत जल्द बहुत जगह लगाई जाएगी

अच्छा ही तो है अगर ऐसे जागरुकता आ जाए तो …  वैसे ये साल भी अलविदा कहने वाला है और हम सकंल्प लेने की भी सोच रहे हैं … तो क्यो न ये सकल्प लें कि हम स्वच्छता रखेंगें …

सफाई अभियान पर नारे – Monica Gupta

स्वच्छता के प्रति कैसे बदलें लोगो की मानसिकता बेशक, गली गली में सफाई अभियान पर नारे लगाए जा रहें हैं स्वच्छता की गूंज है. मन की बात में हो , देश के मंत्री ह सफाई अभियान पर नारे – Monica Gupta

 

स्वच्छता की आवश्यकता को समझना होगा के बारे में आपके विचारों का स्वागत है …

December 21, 2016 By Monica Gupta 2 Comments

स्वच्छ भारत अभियान मे हमारा योगदान कितना जरुरी

 Art of Public Speaking in Hindi

स्वच्छ भारत अभियान मे हमारा योगदान कितना जरुरी है? असल में हम चाह्ते हैं कि देश स्वच्छ रहे स्वच्छता के नारे लगाते हैं  स्लोगन लिखते हैं स्वच्छता पर निबंध और कविता लिखते हैं पोस्टर बनाते हैं पर मह्त्व नही समझते जबकि हमें एक कदम स्वच्छ्ता की ओर खुद ही बढाना होगा …

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स्वच्छ भारत अभियान मे हमारा योगदान कितना जरुरी

कल एक ऐसी खबर पढी कि पढ कर बहुत खुशी हुई …पर फिर दुख भी हुआ … पर वो खबर या खुशी और दुख वाली बात बताने से पहले मैं आपको एक जानकार की आदत बताना चाहती हूं ..

 

हमारे जानकार हर रोज सुबह की सैर पर कूडा कचरे वाला पॉलीथिन लेकर जाते हैं उनकी श्रीमति उन्हें कूडे से भरा पॉलीथीन देती हैं और वो धूमने के बहाने निकलते हैं और किसी सडक या खाली प्लॉट पर फेंक देते हैं और विजयी मुस्कान के साथ लौट आते हैं … यह हर रोज चलता और वो खुश भी है क्योकि हर महीने 80 रुपये जो बचा रहे हैं …

अब मैं आती हूं उस खबर पर जो मैने आज पढी …

खबर है दिल्ली कि जो भी सडक पर या सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकेंगा उसकी खैर नही.कूड़ा फेंकने पर 10 हजार रुपये फाईन लगेगा। और ये खबर है नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानि  (एनजीटी) की –

सफाई अभियान पर नारे – Monica Gupta

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है ना अच्छी बात पर अब दुख इस बात का है कि यही कानून पूरे देश में लागू क्यो नही हुआ … जैसे नोट बंदी का हुआ था … काश ऐसे जुर्माने वाले कानून बनें देश के लिए बनें ताकि स्वच्छता आए … वैसे हम भी इसमे योगदान दे सकते हैं अगर देना चाहे कि अपनी तरफ से कोई कूडा या कागज सडक [पर न फेंके और अगर फेंकना ही हो तो डस्ट बीन में … बस …

मंजिल तक वही लोग पहुंचते हैं जो पहला कदम उठाते हैं

स्वच्छता पर वीडियो देखने के लिए …

 

स्वच्छ भारत अभियान और हमारी सोच – Motivational & Personal Development Videos by Monica Gupta – YouTube

स्वच्छ भारत अभियान और हमारी सोच – एक अनुभव Motivational & Personal Development Videos in Hindi by Monica Gupta… https://monicagupta.info/swachh-bharat/s… स्वच्छ भारत अभियान और हमारी सोच – Motivational & Personal Development Videos by Monica Gupta – YouTube

 

 https://youtu.be/wogIh-iRCI8

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August 31, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वास्थ्य ही जीवन है

अच्छे स्वास्थ्य का महत्व

स्वास्थ्य ही जीवन है और इसे समझने के लिए हमें व्‍यक्तिगत स्‍वच्‍छता को समझना बहुत जरुरी है व्‍यक्तिगत स्‍वच्‍छता  दो शब्‍दों से मिलकर बनी है  ”व्‍यक्ति”  एवं ”स्‍वच्‍छता” इस बात में कोई दो राय नही कि हमारा  स्वास्थ्य हमारे स्वच्छ हाथों में है… हाथ कैसे धोऎ यानि hand wash पर तो बहुत बातें हैं पर कुल मिला कर हमारा स्वास्थय हमारे हाथों में ही है.

हाथ धोने की विधि

स्वास्थ्य ही धन है

स्वास्थ्य ही जीवन है और इतना ही नही हमारा स्‍वास्‍थ्‍य ही धन है. इसकी महत्ता हमे समझनी होगी. व्यक्तिगत स्वच्छता और स्‍वास्‍थ्‍य का ख्याल रखना बेहद जरुरी है.  व्यक्तिगत स्‍वास्‍थ्‍य में शरीर की स्‍वच्‍छता,  दॉंतों की सफाई, नाखूनों तथा पैरो की देखभाल,  भोजन,  आहार,  व्‍यायाम,  विश्राम एवं नींद ध्रूमपान लत,  मानसिक विचार तथा मद्यपान संबंधी नियमों का पालन आतें हैं। इनके प्रति लापरवाही हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा प्रभाव डाल सकती है उदाहरण के तौर पर दॉंतों की सफाई भरे मैल में जमे रोगाणुओं से ऑंतों में कृमि तथा अन्‍य विकार पैदा हो सकते हैं।

इससे बहुत सारी बीमारियों को निमत्रंण मिल जाता है और वो हाथो के जरिए या नाखूनों के माध्यम से मुह में चले जाते है और जाने कितनी तरह तरह की बीमारियों फैलती चली जाती है। इसलिए हाथों को राख या साबुन से भली प्रकार धोना चाहिए। कई बार घरो में लोग और खासतौर पर महिलाए नंगे पांव रहना ज्यादा पसंद करती है। नंगे पाव से हुकवार्म शरीर में घुस जाते है और इसकी वजह से शरीर में कमजोरी और खून की कमी हो जाती है।

त्वचा की सफाई ना होने पर पसीने और मैल की परत चढ़ती चली जाती है इसकी वजह से दाद खाज, खुजली और त्वचा के रोग हो जाते है। इस तरह के रोग बहुत जल्दी फैलते है इसलिए शरीर की सफाई रखनी बहुत ही जरूरी हो जाती है दांतो की सफाई भी उतनी ही जरूरी है अगर नियमित रूप से दात साफ नहीं होगे तो खाने के कण दांतो में पड़े पड़े सड़ जाऐगे इससे ना सिर्फ दांतो में सड़न होती है बल्कि पेट सम्बन्धी रोगो के होने का भी अंदेशा रहता है इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत सफाई बहुत जरूरी है खाने से पहले और खाना खाने के बाद हाथ या तो साबुन अथवा राख से अच्छी तरह धोने बहुत जरूरी है

एक सर्वे से पता चला है कि अगर हाथ सही प्रकार से wash हो तो दस्त जैसे अनेक रोगो में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कमी आई है इसलिए शौच के बाद या खाना बनाने से पहले और खाते समय हाथ साफ रखने बहुत जरूरी है जिन महिलाओं के बच्चे अभी बहुत छोटे है और उन्ही का दुग्धपान करते है उनके लिए यह और भी जरूरी हो जाता है कि हाथों को साफ रखे।

शौच त्यागने के बाद भी भली प्रकार हाथ धोने चाहिए हाथों के नाखूनों को भी नही बढ़ने देना चाहिए। इन नाखूनों में अन्दर की तरफ रोगाणु लम्बे, गंदे नाखूनों से भोजन करते वक्त भोजन में चले जाते है और  दूषित कर देते है इस भोजन का सेवन करने से दस्त व अन्य रोग पैदा हो जाते है

चप्पल पहनना भी बहुत जरूरी हो जाता है ताकि कीटाणु पैरो के जरिए शरीर में प्रवेश करके बीमार ही ना कर दे।

शरीर में सिर के बालों की सफाई भी बहुत जरूरी होती है क्योंकि गन्दे सिर में जुए आ जाती है जोकि इसे नुकसान पहुंचाती है इसी प्रकार दांतो की सफाई बहुत जरूरी है ताकि मुंह की दुर्गन्ध ओर सड़न से बचा जा सके इसके लिए या तो दातुन या फिर नमक का भी इस्तेमाल किया जाता है

हर रोज नहाने से शरीर भी स्वच्छ और तरो ताजा रहता है इसलिए नहाना धोना बहुत जरूरी है जब हम खुद साफ और स्वच्छ होगे तो हमारा मन करेगा स्वच्छ जगह पर ही खेलने का सफाई का ध्यान सिर्फ खुद रखे बल्कि दूसरों को भी इसकी महता समझाए।

कई लोग चलते फिरते सड़क पर ही थूक देते है। उन्हें इसके होने वाले नुकसान बता कर स्वच्छता के प्रति जागरूक करना हमारा पहला कर्तव्य है। यही बात लागू होती है कि जिस व्यक्ति को जुकाम है। कई बार बच्चे या बड़े नाक आने पर अपनी आस्तीन से या कमीज से और महिलाएं अपने दुपटटे से ही साफ कर लेती है। जोकि सीधे तौर पर बीमारी को न्यौता देता है इसलिए ऐसे कामों से बच कर ही रहें। अपने पास साफ रूमाल ही रखे और उसे ही इस्तेमाल करे।

घर की सफाई

खेतो को पॉस्टिक खाद तो मिलेगी ही जिससे मिटटी की उर्वरकता बढ़ेगी। और जो कूड़े कचरे और प्लास्टिक के सामान से पर्यावरण का नुकसान हो रहा है उससे बचाव हो जाऐगा कई बार गांव वासियों द्वारा खाद के ढ़ेर पर सफाई के दौरान इतनी गन्दगी डाल दी जाती है कि वो खाद का ढेर कम और गन्दगी का ढेर ज्यादा लगता है जिससे बीमारियों का निमत्रंण मिलता है।

गडडों में इसे डाल कर ना सिर्फ बीमारियों से बचेगे बल्कि उन कूड़े के ढेर की बजाय सड़क पर पेड़ लगाए जा सकेगे जिससे पर्यावरण की स्वच्छता बढ़ेगी। चूल्हा एक ही कमरे में होने की वजह से घर के लोगो को सांस की दिक्कत हो जाती है और चूल्हे के धुएं से आंखो में भी जलन हो जाती है

आकडे तो यहा तक बताते है कि महिलाओं के खाना बनाते वक्त जितना धुआं सांस के साथ अन्दर जाता है। वो 200 सिग्रेट के धुए के बराबर होता है ऐसे में गर्भवती महिलाए खुद भी बीमार रहेगी और होने वाला बच्चा भी किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्ति होगा ये तो रही घर की बात। अब लोग जब खेतो में शौच जाते है तो खुले में मल पड़ा रहने से संक्रामक रोगाणु फलो और सब्जियों में लग जाते है यही फल सब्जियां बिना धोए खा लेने पर दस्त या अन्य ऐसे रोग हो सकते है जो जानलेवा भी साबित हो सकते है।

तो इतनी सारी दिक्कतों के चलते इससे छुटकारा पाने का क्या कोई तरीका हो सकता है या नही तो जवाब सीधा सा है कि जिस घर में लोग रहते है सबसे पहले तो वो हवादार हो, पूरी रोशनी आए और घर में मच्छर मक्खी के बचाव के लिए जालीदार दरवाजे भी लगे हो अगर घर में धुए वाले चूल्हे है तो ऐसे चूल्हे बनाए जाए जो धुआ रहित हो इससे आखों की जलन के साथ साथ संास के रोगो में भी कमी आऐगी।

अब बात आती है सफाई की घर को खासकर फर्श को साफ रखना चाहिए।

घर का कूड़ा उठाकर सड़क पर फेकने की बजाय कूड़े के डि़ब्बे में ही डालना चाहिए। भोजन पर मक्खियां बैठ कर उसे दूषित ना कर दे उसके लिए जाती का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी हो जाता है जो बना हुआ भोजन है उसे भी ढ़क कर ही रखना चाहिए ताकि वो प्रदूषित ना हो।

पीने के पानी को भी ढ़क कर रखने के साथ साथ मटके या किसी अन्य बर्तन से निकालने के लिए डण्डी वाले लोटे का प्रयोग करना चाहिए और पानी का हमेशा जमीन से थोड़ा उचां रखना चाहिए। इसके साथ साथ या तो सुराही या फिर ऐसे मटकें या डिब्बे जिनमें नलके की सुविधा हो तो इस्तेमाल करने चाहिए। कच्ची सब्जी को बनाने से या कच्ची सब्जी खाने से पहले भली प्रकार धो लेनी चाहिए ताकि सारे कीटाणु दूर हो जाए। बर्तनों को भी साफ पानी से ही धोना चाहिए अगर गन्दे पानी से धोऐगें तो बर्तनों के साथ-2 उनमें रखा सामान भी दूषित हो जाऐगा

खोमचे वाले से खुला रखा खाना खाने से भी बीमार होने के लक्षण जल्दी दिखने लगते है इसलिए वहां का भोजन ना ही करे और जो भोजन घर पर भी बनाए उसे अच्छी तरह हाथ धोकर ही बनाए अब हाथ या तो साबुन से या राख से धोने बहुत जरूरी है ताकि खाने के साथ-2 अपनी और घर के सदस्यों की स्वस्थता भी बनी रहे।

इन सभी बातों के साथ साथ अपना अड़ोस-पड़ोस भी साफ रखना चाहिए। कूडे को घर के बाहर ना फेंक कर गडे में डालना चाहिए छोटे बच्चों के घर में ही शौच करने की स्थिति में उसे तुरन्त साफ करके हाथ धो लेने चाहिए ताकि ना मच्छर, मक्खी आए और ना कोई बीमारी फैले। जानवरो के गोबर को भी कूड़े के गडडे में ही डाल देना चाहिए और उनके मूत्र के लिए नाली द्वारा सोख्ता गडडे में ही बहने देना चाहिए।

इसके लिए घर से अलग पशुशाला का प्रावधान होना चाहिए। इसमें पक्का फर्श और नाली की ओर ढलुवा हो ताकि उनका मूत्र वहां इकठठा रहने की बजाय बह जाए।

नाली को सोख्ता गडडे से मिला देना चाहिए इसमें सफाई का ध्यान देना बहुत जरूरी है ताकि दुधारू पशु किसी भी तरह की बीमारी से बचे रहे।

स्वच्छता अपनाने से  फायदे बहुत है …

कम मृत्यु दर और बेहतर स्वास्थ्य

पैसे की बचत

उत्पादकता में वृद्धि

ज्यादा आय के साधन

आत्म सम्मान

और सबसे बड़ी बात तो यह होगी कि स्वच्छता अपनाने से ड़ाक्टरों के चक्कर नही लगाने पड़ेगें जिससे पैसे बचेगें। पैसे बचेगें तो खुशियाँ आऐगी, खुशियाँ होगी तो आय के साधन और बढेगें क्योंकि अक्सर तनाव में रहने से काम नही हो पाता जब तनाव ही नही होगा तो और काम करने को मन करेगा, जिससे आय बढे़गी और आय बढे़गी तो जीवन स्तर में सुधार होगा और फिर देश को आगे बढ़ने से कोई  रोक ही नही सकता।

 

खुले में शौच, महिलाएं और स्वच्छता अभियान – Monica Gupta

खुले में शौच, महिलाएं और स्वच्छता अभियान स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 हो या जन आंदोलन के रुप में चला स्वच्छता अभियान. महिलाओ को इसकी महत्ता समझ कर बढ चढ कर आगे आना ही होगा. अपनी और अपने गांव की स्वच्छता की ,कामयाबी की कहानी बनानी होगी. आज अचानक एक खबर ने फिर चौंका दिया. बदायूं बरेली … read more at monicagupta.info

वैसे स्वच्छता के बारे में आपका क्या ख्याल है … जरुर बताईएगा !!

 

 

August 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो – Total Sanitation Campaign in India ,Nirmal Bharat Abhiyan ,’Swachh Bharat Abhiyan या स्वच्छता अभियान नाम कोई भी हो मकसद सिर्फ एक है कि हमारा भारत देश स्वच्छ हो खुले में शौच से मुक्त हो 

  स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छ भारत अभियान के एक नए जारी किए गए वीडियो में कंगना रनौत लक्ष्मी के रूप में दिखती हैं और अमिताभ बच्चन जी  की आवाज़ है. इस वीडियो में संदेश दिया गया है कि सफाई न रखने पर लक्ष्मी आपका घर छोड़ कर चली जाएंगी, आप चाहे तो उन्हें रोक लें. बेशक, स्वच्छता अभियान में चाहे विद्द्या बालन जी हों या अमिताभ जी….  पर असली हीरो होते हैं गांव वाले जो  स्वच्छता से प्रेरित होकर अपने गन्दे और शौच युक्त गांव का नक्शा ही बदल देते हैं . एक बडा सा सलाम हैं उन गांव वालो को जिन्होने अपने गांव को गांव नही परिवार समझा और देखते ही देखते गांव का नक्शा ही बदल गया..

यह कोई सुनी सुनाई बात नही बल्कि मेरे सामने की बात है और गांव वालो के जज्बे से उनका सफाई के प्रति प्रेम देख कर मैं इतना उत्साहित हो गई कि मैने स्वच्छता एक अहसास पर पूरी किताब ही लिख डाली.

अहसास स्वच्छता का ………… पुस्तक को लेकर आपके मन में ढ़ेरो सवाल उठ रहें होंगें कि आखिर इस पुस्तक के माध्यम से स्वच्छता का अहसास कैसे करवाया जा सकता है। सच पूछो तो, हम सभ्य समाज के सभ्य नागरिक हैं, पढे़- लिखे और समझदार भी हैं लेकिन सही मायनों में देखा जाए तो अनपढ़ और असभ्य की श्रेणी में आते हैं क्योंकि जिस समाज में हम रहतें हैं उसी को गंदा कर रहें हैं।

यहां बात भ्रष्टाचार की नहीं बल्कि उस कूडे़- कर्कट की है जो हमारें चारों तरफ फैला है और कूडेदान एक तरफ खडे़- खडे़ गंदगी का मुँह ही ताकते रह जातें हैं और तो और सड़क के किनारें, दीवारों की ओट को शौचालय का रूप देकर दिन-रात गंदगी में इजाफा किया जा रहा है। सड़क पर चलते हुए थूकना और पूरी सड़क को कूडादान समझना आम बात है। अगर यह पढ़े- लिखे सभ्य समाज को चित्रित करता है तो गाँव वालों को किस श्रेणी में रखेंगें क्योंकि वो तो वैसे भी अनपढ़, सीधे-साधारण गरीब, किसान और मज़दूर होतें हैं।

भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत गाँव वासियों की सोच में एक ऐसा बदलाव, ऐसी जागरूकता देखने को मिली जिसकी सपनें में भी कल्पना नहीं की जा सकती थी। बस, यहीं मुझे पुस्तक लिखने का मकसद मिल गया कि आज जो अहसास इन गाँव वासियों को हो रहा है उसकी महक उन लोगों तक भी पहुँचे जो अभी तक इससे अछूते हैं। मैनें अपनी तरफ से पुस्तिका में स्वच्छता और उससे आए बदलाव के बारे में जानकारी देने की पूरी कोशिश की है और मुझे उम्मीद ही नही पूरा विश्वास है कि इसको पढ़ने के बाद आप भी और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में मदद करेंगें।
अहसास ……………स्वच्छता का

“देशोऽस्ति हरयाणारव्यः पृथिव्यां स्वर्गसनिन्नभः” यानि हरियाणा नाम का एक देश हैं जो धरती पर स्वर्ग के समान है। यह विक्रमी संवत् 1385 के शिलालेख से उद्घृत है जो दिल्ली के निकट सारवान गाँव से मिला है।

सन् 2005 में जिला फतेहबाद के निकट भिरड़ाना गाँव में खुदाई के दौरान एक ऐसी सभ्यता मिली जो स्वच्छता से रहती थी। खुदाई के दौरान नालियाँ और मुख्य नाला इस ढ़ंग से बनाया गया था कि ऐसा मालूम देता था कि जिस समय यहां लोग रहते होंगें उस समय गंदगी का नामो-निशान नही होगा क्योंकि घर-घर में नालियाँ इस सफाई से बनाई गई थी कि पानी रूकने या जमा होने का कोई मतलब ही नही था।

सफाई, एक अनमोल गहना है जिसे हर एक अपने पास रखना चाहता है पर उसे सहेज कर रखने के चक्कर में वो इसे सम्भाल कर नहीं रख पाता और नतीजा…….. हमें चारों तरफ गंदगी, कूडे़, कीचड़ आदि का साम्राज्य मिल जाता हैं। बात शहर की हो या गाँव की, गन्दगी हर जगह हैं। हाँ, अगर तुलना की जाए तो गाँव में गंदगी का तो बहुत ही बुरा हाल है। गलियों में जमा पानी, रूढि़यों के ढे़र, कूड़ा-कर्कट और तो और बाहर खेतों में शौच जाते गाँव-वासी गन्दगी और फैलती जानलेवा बीमारियों में बढ़-चढ़ कर योगदान दे रहें हैं।

ना तो उन्हें कोई समझाने वाला है और ना ही कोई जागरूक करने वाला। जबकि इतिहास के पन्ने पलटने पर हम पढ़ते है कि खाना खाने से पहले और खाने के बाद हाथ धोना, प्रतिदिन नहाना, कमरे मे जाने से पहले चप्पल-जूतें उतारना, बिना स्नान किए रसोई में ना जाना, प्रसूति के बाद माँ तथा बच्चें को कुछ समय के लिए संक्रमण से बचाने के लिए अलग कमरें में रखा जाता था। व्यक्तिगत स्वच्छता का उल्लेख मनुस्मृति में भी मिलता है। मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा की खुदाई भी स्वच्छता की साक्षी रहीं हैं।
आज जबकि देश इतनी प्रगति कर रहा है। हर रोज नई-नई वैज्ञानिक खोजें हो रही है ऐसे में लोग गन्दगी से दूर क्यों नहीं जा पा रहें? क्यों वो घर और गलियों के आगे इकट्ठा बदबूूदार पानी देखकर भी कुछ नहीं करते? क्यों मच्छरों को उन्होनें अपनी नियति समझ लिया है और क्यों सदियों पुरानी चली आ रही खुल्ले में शौच जाने आदत से उन्हें इतना भावनात्मक लगाव है।

 

देखा जाए तो क्यों यानि प्रश्न बहुत हैं। आखिर कोई तो रास्ता होगा इससे बाहर निकलने का। जबकि सभी को पता है कि स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल की कमी से 80ः बीमारियाँ पैदा होती हैं। प्रति वर्ष विश्व भर में 5 वर्ष से कम आयु के 15 लाख बच्चें मौत के शिकार बनते हैं।
आंकड़ा सुनकर सिरहन दौड़ जाना स्वाभाविक है पर स्वाभाविकता से परे एक कटु सत्य है और वो है कैसे भी करके गंदगी को दूर भगाना, लोगों को अच्छे रहन-सहन के तरीकों की जानकारी देना, बेकार पानी की निकासी, पीने के पानी की सम्भाल, कूडे़-कर्कट के साथ-साथ मानव मल का सही ढ़ंग से निपटान, व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ ग्रामीण स्वच्छता को जान कर, समझ कर उस पर अमल करना।
इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाएँ उपलब्ध करवाने के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर प्रयास किए जाते रहे और सन् 1986 में भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (सी0आर0एस0पी0 ) की शुरूआत की गई। सन् 1999 में भारत सरकार द्वारा सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान की शुरूआत की गई।

sawacchta book by monica gupta

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छता अभियान और मेरे मन की बात – Monica Gupta

क्लिक करिए और सुनिए स्वच्छता अभियान पर 4 मिनट और 35 सैकिंड की ऑडियो… मेरा अनुभव स्वच्छता अभियान और मेरे मन की बात बात स्वच्छता अभियान के दौरान की है. जब गांव गांव जाकर लोगों को जागरुक किया जा रहा था.लोगो को समझाया जा रहा था कि खुले मे शौच नही जाओ आसान नही था क्योकि सदियों से चली आ रही मानसिकता बदलना मुश्किल था.

https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2016/07/audio-sani.mp3 क्लिक करिए और सुनिए स्वच्छता अभियान पर  4 मिनट और 35 सैकिंड की ऑडियो… मेरा अनुभव बात स्वच्छता अभियान के दौरान की है. Read more…

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

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