Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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November 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

साफ सफाई का महत्व – क्या आपने सफाई की

रक्तदान सोशल मीडिया और हमारे दायित्व

साफ सफाई का महत्व – क्या आपने सफाई की-  कहिए कैसे हैं आप …  सफाई हो गई … हां हा सफाई … क्या हुआ … कही आप ये तो नही सोच रहे कि दीपावली तो चली गई अब कौन सी सफाई … पर सच में यकीन मानिए असली सफाई तो अब होती है … फर्क इतना है कि सफाई दूसरी तरह की हो जाती है…

साफ सफाई का महत्व – क्या आपने सफाई की

लाईट हो लडिया हो या दीयो को समेटना हो वो भी दिवाली के बाद बहुत बडा काम होता है …

फिर  मेहमानो का आना जान लगा रहता है तो घर और पूजा घर  बहुत फैल जाता है उसकी सफाई  और फिर जो घर में मिठाई आई है उसकी सफई यानि उसका निबटाना क्योकि कई मिठाई ऐसी होती है जो नही निबटाई गई तो खराब होने के पूरे चांंस रहते है .और वैसे भी  मिठाईयों का समय पर निबटाया न जाए तो चींटियों की भेट चढ जाती है ..

साफ सफाई का महत्व

और एक बात और कि दीवाली के दो तीन दिन बाद किसी को मिठाई देने जाएगें तो वो भी शक की निगाह से देखेंगें कि कही पुरानी मिठाई तो देने तो  नही आ गए …

और फिर बारी आती है फ्रिज की सफाई … अब दीवाली पर हो हमने आलू, पूरी, हलवा बनाया और जो एक दो दिन पहले का सामान था वो फ्रिज मे जरा सा पीछे सरका दिया जाता है …

अब जब आलू पूरी खत्म हो गया तो बारी आती है उस खाने के  पुराने सामान की और हम महिलाए इस मामले  मे कुछ ज्यादा ही स्मार्ट होती हैं और वो नही चाह्ती कि कोई चीज वेस्ट हो इसलिए सोचती है कि उसी की सफाई कर ली जाए यानि उसे ही खा लिया जाए …

ज्यादा बासी खाना बहुत नुकसान करता है अगर  खाएगें तो डाक्टर के भगाना पडेगा …  ये भी न करें कि पुरानी या बासी  मिठाई काम वाली बाई या माली आदि को दे दें कि उन्हें क्या फर्क पडेगा ,,अ गर मिठाई सही है तभी दे नही तो कही लेने के देने ही न पड जाए … इसलिए सफाई जरुर कीजिए पर सफाई सफाई से कीजिए …

और सबसे जरुरी बात … मोबाईल मे से मैसेज, वीडियो, फोटो की सफाई यानि डिलीट करना … दीवाली पर इतने संदेश आते हैं कि बस पूछिए ही मत … उसका सफाया होना बहुत जरुरी है … वो भी बहुत ज्यादा जरुरी है वरना मोबाईल हैंग हो जाएगा … काम करना बंद कर देगा

तो हुई आपकी सफई ??? कर लीजिए 🙂

 

साफ सफाई का महत्व – क्या आपने सफाई की …

छठ पूजा की कहानी – क्यो मनाया जाता है छ्ठ पर्व – Monica Gupta

छठ पूजा की कहानी – क्यो मनाया जाता है छ्ठ पर्व और इस पर्व का क्या महत्व है .. छ्ठ पर्व 2016 – 6 नवंबर (रविवार) – छठ पूजा है छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाए read more at monicagupta.info

 

November 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

पति पत्नी में अनबन – सुनो, मुझे माफ कर दो

पति पत्नी में अनबन - सुनो, मुझे माफ कर दो

पति पत्नी में अनबन – सुनो, मुझे माफ कर दो  – पति पत्नी के प्यार और तकरार की एक कहानी है. सुनो, मुझे माफ कर दो … कहानी है रवि और माला की दोनो अच्छा कमाते हैं पर एक दिन किसी बात पर झग़डा बहुत बढ जाता है और फिर क्या होता है जानने के लिए पढनी पढेगी कहानी …सुनो, मुझे माफ कर दो

पति पत्नी में अनबन – सुनो, मुझे माफ कर दो

कुछ ऐसा हुआ रवि और  माला के साथ … शादी हुए साल भी नही हुआ था … रवि और माला की लव मैरिज थी और दोनों अपनी अपनी नौकरी में व्यस्त … शादी को कुछ समय बीता और छोटी मोटी कहासुनी उनकी भी होने लगी… ऑफिस से समय मिलता तो कई बार माला अपनी बडी दीदी को फोन मिला लेती और घंटों अपनी और रवि के बीच की सारी बातें डिस्कस करती.

एक दिन रवि के परिवार वालो की ओर से कोई बात उठी और बात ज्यादा ही बढ गई ..उस दिन दोनों मे झगडा हुआ और रवि बिना नाश्ता किए ही आफिस चला गया. माला भी मुंह बना कर एक ओर लेट गई और आफिस नही गई… तभी दीदी का फोन आ गया.. और गुस्से में वो रवि से हुई सारी बात बताने लगी …

दीदी का पारा भी बातें सुनकर चढने लगा कि रवि भी कैसा निकला ऐसा तो नही सोचा था … दीदी ने सारी बात मम्मी को बता दी और मम्मी तो हाय मेरी बेटी कह को दुख दे रहा है कह कर रोना शुरु कर दिया … और कुछ ही घंटे बाद माला के मम्मी, पापा और दीदी उसके पास उसके घर पर थे…

मम्मी ने तो रट लगा ली थी कि अब एक पल भी यहां नही रुकने देंगी क्योकि आज लडाई की है कल हाथ भी उठा सकता है … कुछ दिन दूर रहेगी तो शायद उसे अकल ठिकाने आ जाए … माला फोन मिलाने को हुई तो मम्मी और दीदी ने फोन काट दिया कि कोई जरुरत नही है फोन करके जाने की …

कुछ तो माला का गुस्सा और कुछ अपने परिवार वालो की बातों में आकर माला ने फैसला कर लिया कि वो अभी मम्मी के घर चली जाएगी ..खुद कमाती है तो किसी की धौंस किसलिए सुने…

उस समय तो वो अपनी मम्मी के घर आ गई पर जब शाम तक भी रवि का फोन नही आया … तो उसके दिल में और गुस्सा भर गया कि इतना अहंकार … जरा भी चिंता नही की … सारी जिंदगी ऐसे आदमी के साथ कैसे गुजारुंगी…

समय बीता और दो दिन भी हो गए… दो दिन कोई फोन नही आया और उधर दबाव में आकर माला ने  तलाक के कागज भी साईन कर दिए.. पर उसके मन में एक ही बात चल रही थी कि अभी तक कोई फोन किसलिए नही आया … कहीं कोई बात … कोई दुर्धटना .. पर फिर उसने अपने सिर को झटक दिया…

इसी बीच वो वटसअप और फेसबुक चैक कर चुकी थी पर उसे भी दो दिन से नही देखा गया था .. जाने अंजाने उसका दिल घबराने लगा.. पर अपने आप को रिलेक्स करने के लिए वो नहाने चली गई … नहाते वक्त सोचने लगी कि  वो ही ज्यादा रिएक्ट कर गई … क्या हो गया था अगर आपस में बात हो गई थी तो … आपस में छोटे मोटे झगडे तो चलते ही रहते हैं …

पता नही रवि का क्या हाल होगा … कही सुसाईड कर लिया हो तो … पता नही अंट शंट सोचती बाथरुम से बाहर निकली और सोचने लगी कि लडाई तो शादी से पहले भी होती थी और मनाना भी आता था पर आज अचानक क्या हुआ …आखिर किसलिए उसने इतना बढा कदम उठा लिया…

अचानक दरवाजे पर घंटी बजी. वो चौक कर उठ बैठी…. अरे … वो तो सो रही थी और ये सारा सपना चल रहा था… दरवाजे पर फिर से घंटी बजी और वो सपने की दुनिया से बाहर निकल कर दरवाजा खोलने के लिए बढी उसे याद आया सुबह जब रवि से झगडा हुआ और वो बिना नाश्ता किए ऑफिस चला गया तो वो भी चुपचाप सो गई थी और ये सारा सपना ही चल रहा था…

उसी सोच में उसने दरवाजा खोला  … सामने देखा तो रवि खडा था हाथ में लाल गुलाब लिए जैसे वो पहले लाया करता था अपनी रुठी मालू को मनाने के लिए… उसने गुलाब माला की ओर बढाया और कुछ बोलने ही वाला था कि माला ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और बोली आई एम सॉरी … सुनो….   मुझे माफ कर दो … और दोनो नम आखॆं लिए गले लग गए…

नाश्ता करके अब रवि ऑफिस जा रहा था और पर अब चेहरे पर मुस्कान थी… माला ने छुट्टी ले रखी थी इसलिए अपने बालो का जूडा बनाती वो फैले हुए घर को समेट्ने में सहेजने में जुट गई…

तभी दीदी का फोन आया … वो सपने की सारी बात याद करके मुस्कुराने लगी और फोन उठाने पर दीदी से बोली कि आज छुट्टी का मन था इसलिए बस घर पर आराम कर रही हूं …

इतने में रवि का मैसेज आया कि वो ऑफिस पहुंच गया है आई लव यू  और माला ने भी उसका जवाब थम्स अप करके दिया और फोन रखती हुई सोच रही थी कि अब वो समझदारी से काम लेगी और अपना घर संसार खूबसूरती से निखारेगी …

सार ये है कि बात बात को घर परिवार मे शिकायत के तौर पर करना सही नही है … जरा समझदार बनिए पति पत्नी का रिश्ता और निखारिए और अपने घर संसार की बगिया किसी की बातों में आकर नही बिखरने दे .. बहुत प्यारा है ये रिश्ता …

पति पत्नी में अनबन - सुनो, मुझे माफ कर दो

पति पत्नी में अनबन – सुनो, मुझे माफ कर दो – कहानी आपको कैसी लगी ?? जरुर बताईएगा !!

November 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Happy Halloween – I Want to Celebrate Halloween

Happy Halloween - I Want to Celebrate Halloween

Happy Halloween – I Want to Celebrate Halloween- हर कोई हैलोवीन मना रहा है तो सोचा कि हम भी मनाए कदू की सब्जी बना कर …

 

Happy Halloween - I Want to Celebrate Halloween

Happy Halloween – I Want to Celebrate Halloween

 

Happy Halloween – I Want to Celebrate Halloween

Halloween or Hallowe’en also known as Allhalloween, All Hallows’ Eve, or All Saints’ Eve, is a celebration observed in a number of countries on 31 October.. हर साल 31 अक्टूबर को अमेरिका, इंग्लैंड और सभी यूरोपीय देशों में हेलोवीन फेस्टिवल मनाया जाता है। मान्यता है  कि इस दिन पूर्वजों की आत्माएं धरती पर आती हैं। इसलिए लोग भूतों के कॉस्ट्यूम पहनते हैं, चुड़ैल और जानवरों के मुखौटे, विग आदि पहनकर अलाव (आग) के आसपास नाचते-गाते हैं। ऐसा करने के पीछे एक विश्वास यह भी है कि लोगों को भूतों के रूप में देखकर वे उन्हें कम डरा पाएंगे। वहां के लोग सुपर नेचुरल पावर में विश्वास करते हैं।

हैप्पी हैलोवीन

हैलोवीन डे के सबसे खास परंपरा में शामिल है नक्काशीदार कद्दू में लालटेन जलाना. इसके पीछे एक बेहद रोचक कहानी है. आयरलैंड में जन्मे कंजूस शराबी जैक ने अपने एक शैतान दोस्त को घर में ड्रिंक करने के लिए बुलाया, लेकिन वो पैसे खर्च करना नहीं चाहता था. उसने अपने दोस्त को ड्रिंक के बदले घर में लगा कद्दू देने के लिए राजी किया. लेकिन ड्रिंक करने के बाद वह अपनी बात से मुकर गया. इसके बदले उसके दोस्त ने उसे कद्दू की डरावनी लालटेन बनाकर जैक के घर के बाहर पेड़ पर टांग दिया, जिस पर उसके मुंह की नक्काशी थी और जलते हुए कोयले डाल थे. तब से दूसरे लोगों के लिए सबक के तौर पर इस दिन जैक-ओ-लालटेन का चलन शुरू हो गया. यह उनके पूर्वजों की आत्माओं को रास्ता दिखाने और बुरी आत्माओं से रक्षा करने का प्रतीक है. हैप्पी हैलोवीन

Happy Halloween – I Want to Celebrate Halloween के बारे में आपका क्या विचार है …

October 31, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Viral Videos – वायरल वीडियो – जरा संभल के लाईक करें

Viral Videos

Viral Videos – वायरल वीडियो – जरा संभल के लाईक करें   – वाकई, भले ही हमारा सपना होता है कि  हमारा वीडियो या पोस्ट वायरल हो पर कई बार बिन जाने समझे … बस भेडचाल के चक्कर में  ऐसी बाते वायरल हो जाती है  जिसकी सच्चाई जब सामने आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है …

Viral Videos – जरा संभल के लाईक करें

सोशल मीडिया पर किसी बात को वायरल होने में समय नही लगता … कई बार बिन सोचे समझ बिना हकीकत जाने पोस्ट वायरल हो जाती है… जोकि दुखद है …

मैनेंं एक बार देखा था जब एपीजे कलाम साहब की मृत्यु की खबर वायरल हो गई थी … तो एक फिल्म स्टार की भी … फिल्म स्टार को सामने आकर कहना पडा कि भई मैं जिंदा हूं .

वही दो दिन पहले एक वीडियो देखी कि पुणे की एक महिला बैंक में काम कर रही है और लिखा आ रहा है कि सबसे तेज कैशियर .. असल में, वो महिला बहुत धीमे काम कर रही थी … उनका मजाक बनाया जा रहा था…

न्यूज चैनल ने जब पडताल की तो पता चला कि महिला हाल ही मैं रिटायर होने वाली है और एक पैरालीसिस अटैक और दो बार हार्ट अटैक आ चुका है …

उन्हें एक अलग काउंटर दिया हुआ है क्योकि वो काम करते करते ही रिटायर होना चाहती हैं बजाय उनके जज्बे को सलाम करने के उनका मजाक उडाया गया … जिसका जिम्मेदार सबसे पहले वो व्यक्ति है जिसने बिना बात जाने वीडियो बनाई और फिर हम सब जिन्होने उस पोस्ट पर मजाक बना बना कर उसे वायरल कर दिया …
हैरानी है कि  
वायरल सच ऐसा भी कहां तो हम किसी की पोस्ट लाईक तक नही करते और वही दूसरी ओर इतना लाईक करते हैं कि पोस्ट ही वायरल बना देते हैं जाने कैसी मानसिकता है … समझ से बाहर है … !!!

 

वायरल वीडियो - जरा संभल के लाईक करें

वायरल वीडियो – जरा संभल के लाईक करें

वायरल खबर – स्कूली छात्र का पत्र पीएम मोदी के नाम – Monica Gupta

वायरल खबर – स्कूली छात्र का पत्र पीएम मोदी के नाम रैली, बस और परेशान स्कूली बच्चे जानना जरुरी है..कुछ खबरें,न्यूज में बेशक ज्यादा नही दिखाई जाती  पर अपना असर छोड जाती हैं. सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद  न्यूज चैनल पर एक खबर देखी कि मध्य प्रदेश के खांडवा मे होने वाली रैली के लिए … वायरल खबर – स्कूली छात्र का पत्र पीएम मोदी के नाम – Monica Gupta

वायरल वीडियो – जरा संभल के लाईक करें  के बारे में आप्के क्या विचार हैं ???

October 31, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

जरा सोचिये – अपनी सेहत को लेकर कितने जागरुक हैं हम

जरा सोचिये - अपनी सेहत को लेकर कितने जागरुक हैं हम -

जरा सोचिये – अपनी सेहत को लेकर कितने जागरुक हैं हम – शायद बिल्कुल भी नही … बहुत लापरवाह है बात चाहे खाने की हो , सिग्रेट पीने की हो या शराब पीने की … अगर हमें कोई टोकता या समझाता  है तो हमे वो बहुत बुरा लगता है …

जरा सोचिये – अपनी सेहत को लेकर कितने जागरुक हैं हम –

क्या वाकई जो होता है अच्छा होता है ?? या ???
आज मैं अपनी एक सहेली से मिलने गई तो उदास थी मैने कारण पूछा तो और उदास हो गई … बार बार पूछ्ने पर उसने बताय कि वजन बहुत बढ रहा है घर वाले डाईटिंग के पीछे पडे है और वो टरकाती आ रही है अब उसने दीवाली के बात की थी और आज दीवाली भी चली गई … कैसे करुंगी डाईटिंग … कैसे हो पाएगी डाईटिंग ….वैसे पता नही हम लोग अपनी हैल्थ के प्रति इतने लापरवाह किसलिए है …सेहत का ध्यान ही नही रखना चाहते … सेहत पर ही मुझे एक बात और याद आई … क्लिक करिए और सुनिए पूरी बात…

 

स्वच्छता का महत्व – ऐसे ही लाई जा सकती है स्वच्छता – Monica Gupta

स्वच्छता का महत्व – ऐसे ही लाई जा सकती है स्वच्छता – जब तक स्वच्छता अभियान जन आंदोलन रुप नही ले लेगा .लोग इसे दिल से नही अपना लेंगें स्वच्छता नही आ सकती . स्वच्छता का महत्व – ऐसे ही लाई जा सकती है स्वच्छता – Monica Gupta

Happiness looks gorgeous on you … जरा सोचिए … अपने आप   को कुछ समय तो दीजिए … दूसरो जो समझाते हैं उस पर एक बार विचार जरुर कीजिएगा …

 

 

October 31, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

छठ पूजा की कहानी – क्यों मनाया जाता है छ्ठ पर्व

छठ पूजा की कहानी – क्यों मनाया जाता है छ्ठ पर्व और इस  chhath puja पर्व का क्या महत्व है .. आईए जाने इसकी अलग अलग पौराणिक कहानियां . सूर्योपासनाके लिए प्रसिद्ध पर्व छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाए .

सूर्य षष्ठी व्रत होनेके कारण इसे छठ कहा गया है। इसे वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में। श्रद्धालु भगवान सूर्य की आराधना करके वर्षभर सुखी, स्वस्थ और निरोगी होने की कामना करते हैं…

छठ पूजा की कहानी – क्यों मनाया जाता है छ्ठ पर्व

मार्कण्डेय पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया है और इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मा की मानस पुत्री और बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को इन्हीं देवी की पूजा की जाती है.

शिशु के जन्म के छह दिनों के बाद भी इन्हीं देवी की पूजा करके बच्चे के स्वस्थ, सफल और दीर्घ आयु की प्रार्थना की जाती है. पुराणों में इन्हीं देवी का नाम कात्यायनी मिलता है, जिनकी नवरात्र की षष्ठी तिथि को पूजा की जाती है

छठ पूजा पर्व चार दिवसीय उत्सव है। इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते। छठ व्रत कठिन तपस्या की तरह है  भैयादूज के तीसरे दिनसे यह आरंभ होता है ।ऐसी मान्यता है कि छठ पर्व पर व्रत करने वाली महिलाओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।

सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अघ्र्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।

छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व का प्रतिपादन करने वाली अनेक पौराणिक और लोक कथाएं प्रचलित हैं।

 क्या हैं पौराणिक मान्यताएं

पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी के सूर्यास्त और सप्तमी के सूर्योदय के मध्य वेदमाता गायत्री का जन्म हुआ था. प्रकृति के षष्ठ अंश से उत्पन्न षष्ठी माता बालकों की रक्षा करने वाले विष्णु भगवान द्वारा रची माया हैं. बालक के जन्म के छठे दिन छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं और जिंदगी मे किसी प्रकार का कष्ट नहीं आए. अत: इस तिथि को षष्ठी देवी का व्रत होने लगा.

छठ पूजा की कहानी - क्यो मनाया जाता है छ्ठ पर्व

रामायण से एक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुनः अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशिर्वाद प्राप्त किया था।

ये भी माना जाता है कि छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य का परम भक्त थे। वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में ख़ड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है।

कुछ कथाओं में पांडवों की पत्नी द्रोपदी द्वारा भी सूर्य की पूजा करने का उल्लेख है। वे अपने परिजनों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना और लंबी उम्र के लिए नियमित सूर्य पूजा करती थीं।

पुराणों से एक कथा के अनुसार राजा प्रियवद को कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराकर उनकी पत्नी मालिनी को यज्ञाहुति के लिए बनाई गई खीर दी। इसके प्रभाव से उन्हें पुत्र हुआ परंतु वह मृत पैदा हुआ। प्रियवद पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त भगवान की मानस कन्या देवसेना प्रकट हुई और कहा कि सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूं। राजन तुम मेरा पूजन करो तथा और लोगों को भी प्रेरित करो। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी।

आप सभी को छठ पूजा की शुभकामनाए ….

छठ पूजा की कहानी - क्यो मनाया जाता है छ्ठ पर्व

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अहोई अष्टमी कथा – अहोई अष्टमी व्रत कथा और महत्व – Monica Gupta

अहोई अष्टमी कथा अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन किया जाता है। माताओ के लिए यह व्रत अत्यन्त महत्वपूर्ण है। अहोई अष्टमी की कहानी read more at monicagupta.info

 

छठ पूजा की कहानी – क्यों मनाया जाता है छ्ठ पर्व

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